
Chapter Arc: संजय धृतराष्ट्र को बताता है कि द्रोण-पर्व के इस अध्याय में तीन मोर्चों पर एक साथ घोर संग्राम भड़क उठा—दुःशासन बनाम सहदेव, कर्ण बनाम भीमसेन, और द्रोणाचार्य बनाम अर्जुन; रणभूमि मानो एक ही क्षण में तीन अग्निकुंड बन जाती है। → सहदेव अपनी तीव्र फुर्ती से दुःशासन के सारथी/रथ-व्यवस्था पर निर्णायक प्रहार करता है—ऐसा कि न दुःशासन, न कोई सैनिक उसे रोक पाता। उधर भीम और कर्ण वेग से एक-दूसरे पर टूट पड़ते हैं; गदा-युद्ध में रथ, ध्वजा, कूबर—सब लक्ष्य बनते हैं। तीसरे मोर्चे पर द्रोण दिव्यास्त्रों की वर्षा कर अर्जुन को दबाने का प्रयास करते हैं, और अर्जुन विधिपूर्वक प्रतिअस्त्रों से उन्हें निष्फल करता जाता है। → भीमसेन अपनी गदा से कर्ण के रथ के कूबर को तोड़कर ‘शतधा’ कर देता है—अद्भुत दृश्य; साथ ही द्रोण और अर्जुन के बीच दिव्यास्त्रों का चरम आदान-प्रदान होता है—ऐन्द्र, पाशुपत, त्वाष्ट्र, वायव्य, वारुण आदि अस्त्र द्रोण के धनुष से छूटते हैं और धनंजय उन्हें तत्क्षण काट/शांत कर देता है। द्रोण मन-ही-मन अर्जुन की प्रशंसा करते हैं—गुरु-शिष्य का युद्ध अपने शिखर पर पहुँचता है। → सहदेव का त्वरित प्रहार पाण्डव-पक्ष का मनोबल बढ़ाता है; भीम-कर्ण का गदा-संघर्ष निर्णायक चोटों के बावजूद चलता रहता है—कर्ण भीम की गदा उठाकर प्रत्याघात करता है, पर भीम दूसरी गदा से उसे रोक देता है। द्रोण, प्रयत्न करते हुए भी, अर्जुन द्वारा रोके जाने पर प्रसन्न-हास्य सहित उसे प्रत्यवारित करते हैं—युद्ध थमता नहीं, केवल अगले आवेग के लिए साँस लेता है। → तीनों द्वंद्वों में कोई अंतिम निर्णय नहीं—कर्ण-भीम और द्रोण-अर्जुन की टक्कर अगले क्षण और अधिक उग्र होने का संकेत देती है।
Verse 1
शीश >> श््जु भ्निध्ररॉभ्राध्यस अष्टा शीर्त्याधिकशततमोब् ध्याय: दुःशासन और सहदेवका
قال سنجيا: أيها الملك! ثم إن دوحشاسانا، وقد اشتعل غضبًا، اندفع نحو سهاديفا. وبسرعة عربته العاتية بدا كأنه يُرجِف الأرض نفسها—إشارة إلى تصاعد القتال بلا رحمة، حين يدفع السخطُ المحاربَ إلى طلب الغلبة لا إلى ضبط النفس.
Verse 2
तस्यापतत एवाशु भल््लेनामित्रकर्शन: । माद्रीपुत्र: शिरो यन्तु: सशिरस्त्राणमच्छिनत्,उसके आते ही शत्रुसूदन माद्रीकुमार सहदेवने शीघ्र ही एक भल्ल मारकर दुःशासनके सारथिका मस्तक शिरस्त्राणसहित काट डाला
قال سنجيا: وما إن اندفع حتى بادر سهاديفا—ابن مادري، قاهر الأعداء—فضرب سريعًا بسهمٍ من نوع «بهلّا» فقطع رأس السائق، خوذته معه. ويبرز المشهد اندفاع المعركة القاسي، حيث تُمارَس المهارة والعزيمة بلا توقف، فيما يظل الثقل الأخلاقي للعنف مُخيّمًا على كل فعلٍ حاسم.
Verse 3
नैनं दुःशासन: सूतं नापि कश्चन सैनिक: । कृत्तोत्तमाड़माशुत्वात् सहदेवेन बुद्धवान्
قال سنجيا: لم ينتبه دوحشاسانا إلى ذلك، ولا أيُّ جنديٍّ آخر—لهول ما أبداه سهاديفا الحكيم من سرعةٍ ومهارة—حين ضرب فقطع رأس السائق. وتُظهر الحادثة كيف يمكن للسرعة والدقة التكتيكية، وسط فوضى الحرب، أن تُخفي حتى فعلًا جسيمًا من العنف، فتزيد التوتر الأخلاقي بين ضرورة ساحة القتال والكلفة الإنسانية التي يتحملها غيرُ الملوك من المقاتلين، كسائقي العربات.
Verse 4
यदा त्वसंगृहीतत्वात् प्रयान्त्यश्वा यथासुखम् | ततो दुःशासन: सूतं बुबुधे गतचेतसम्,जब रास छूट जानेके कारण घोड़े अपनी मौजसे इधर-उधर भागने लगे, तब दुःशासनको यह ज्ञात हुआ कि मेरा सारथि मारा गया
قال سنجيا: لما لم يكن أحدٌ ممسكًا باللِّجام، أخذت الخيل تعدو حيث شاءت، فعلم دُحشاسَنَةُ أن سائس مركبته (السُّوتا) قد فقد وعيه—كأنه قُتل أو عُطِّل عن أداء مهمته—فبقيت العربة بلا زمام ولا ضبط.
Verse 5
स हयान् संनिगृह्माजी स्वयं हयविशारद: । युयुधे रथिनां श्रेष्ठो लघु चित्र च सुष्ल च
قال سنجيا: وكان ماهرًا في تسيير الخيل، فأمسك هو بنفسه بزمامها في ساحة القتال. ذلك المتقدّم بين فرسان العربات قاتل بسرعة، مُجريًا مناورات شتّى محكمة التنفيذ، محافظًا على الانضباط وسط ضراوة الحرب.
Verse 6
तदस्यापूजयन् कर्म स्वे परे चापि संयुगे । हतसूतरथेनाजौ व्यचरद् यदभीतवत्
قال سنجيا: وقد أثنى على فعله هذا أهلُه وخصومُه في ساحة الوغى. إذ إنه في القتال، مع أن سائق عربته قد قُتل، ظل يجول في المعمعة بعربته كأنه لا يعرف الخوف.
Verse 7
सारथिके मारे जानेपर भी दुःशासन उस रथके द्वारा युद्धभूमिमें निर्भय-सा विचरता रहा; उसके इस कर्मकी अपने और शत्रुपक्षके लोगोंने भी प्रशंसा की ।।
قال سنجيا: مع أن سائقه قد قُتل، ظل دُحشاسَنَةُ يجول في ساحة القتال بعربته كأنه لا يخاف؛ وقد مدح فعله أهلُه وخصومُه معًا. غير أن سَهَدِيفا أمطر تلك الخيل بسهامٍ حادّة. فلما أُنهكت بالنبال، اندفعت مسرعةً وتفرّقت هاربةً في جهات شتّى.
Verse 8
स रश्मिषु विषक्तत्वादुत्ससर्ज शरासनम् | धनुषा कर्म कुर्वस्तु रश्मींश्ष॒ पुनरुत्सूजत्
قال سنجيا: ولأنه كان مشتبكًا باللِّجام، ترك قوسه؛ وإذا أراد أن يعمل بالقوس اضطرّ إلى إطلاق اللِّجام من جديد. وهكذا، في زحمة القتال وضغطه، لم يستطع أن يجمع بين ضبط الخيل واستعمال السلاح في آنٍ واحد.
Verse 9
छिद्रेष्वेतेषु तं बाणैर्माद्रीपुत्रो 5 भ्यवाकिरत् । परीप्संस्त्वत्सुतं कर्णस्तदन््तरमवाप तत्
قال سانجيا: «لما وجد تلك الثغرات في دفاع العدو، أمطره سهاديڤا ابنُ مادري بالسهام حتى كأنه غطّاه بها. وفي تلك اللحظة اندفع كَرْنَةُ—ابتغاءَ حماية ابنِك—إلى الفجوة واتخذ موضعه بينهما.»
Verse 10
वृकोदरस्तत: कर्ण त्रिभिर्भल्लै: समाहित: । आकर्णपूर्णरभ्यघ्नद् बाह्वोरुगसि चानदत्
قال سانجيا: «ثم إن فِرْكودَرَةَ (بهيمَة) ثبّت نظره على كَرْنَة، وشدّ قوسه حتى الأذن، فأصابه بثلاثة سهامٍ حادّة، فأحدث جراحًا غائرة في ذراعيه وصدره. وبعد تلك الضربات زأر بهيمة زئيرًا مدوّيًا.»
Verse 11
स निवृत्तस्तत: कर्ण: संघट्टधित इवोरग: । भीममावारयामास विकिरन् निशितान् शरान्,तदनन्तर पैरोंसे कुचले गये सर्पके समान कुपित हो कर्ण लौट पड़ा और तीखे बाणोंकी वर्षा करके भीमको रोकने लगा
قال سانجيا: «ثم إن كَرْنَةَ عاد أدراجه كأفعى ثائرة بعد أن دِيست، فكبح تقدّم بهيمة وهو ينثر وابلًا من السهام القاطعة.»
Verse 12
ततो<भूत् तुमुलं युद्ध भीमराधेययोस्तदा । तौ वृषाविव नर्दन्तौ विवृत्तनयनावुभौ
قال سانجيا: «عندئذٍ اشتعل قتالٌ عاصف بين بهيمة ورادهيَة (كَرْنَة). وكانا كلاهما بعينين قد التوتا من الغضب، شاخصتين أحدهما إلى الآخر، يزمجران كثورين متقابلين.»
Verse 13
वेगेन महतान्योन्यं संरब्धावभिपेततु: । अभिसंश्शलिष्टयोस्तत्र तयोराहवशौण्डयो:
قال سانجيا: «وباندفاعٍ عظيم وسرعةٍ هائلة وعزمٍ محتدم، انقضّ الاثنان أحدهما على الآخر. وهناك، حين تقاربا والتحما في قتالٍ لصيق، التقى ذانك البطلان المتمرّسان في أصول الحرب في صدامٍ ضيّقٍ عنيف.»
Verse 14
गदया भीमसेनस्तु कर्णस्य रथकूबरम्
قال سانجيا: إنّ بهيماسينا ضرب بمطرقته (الغَدَا) عارضةَ عربةِ كارنا/قضيبَها الحامل، قاصدًا أن يُعطِّل المركبة، وبذلك يكبح اندفاعَ المحارب في فوضى المعركة. ويكشف هذا الفعل عن خيارٍ تكتيكي في الحرب: شلُّ وسيلة الإيذاء بدل الاكتفاء بتبادل الضربات، مع البقاء ضمن ضرورات ساحة القتال القاسية.
Verse 15
ततो भीमस्य राधेयो गदामाविध्य वीर्यवान्
قال سانجيا: ثم إنّ رادهيّا (كارنا) الجبّار، وهو يُدوِّر غَداه، تقدّم لملاقاة بهيما—صورةٌ لغضبٍ يتصاعد في ساحة الوغى، حيث تُختبر القوة والعزيمة تحت الثقل الأخلاقي لحربٍ بين ذوي القربى.
Verse 16
ततो भीम: पुनर्गुर्वी चिक्षेपाधिरथेर्गदाम्
قال سانجيا: ثم إنّ بهيما، غيرَ مُتراجع، قذف مرةً أخرى غَداه الثقيلة نحو ذلك المحارب العظيم على العربة. وتُبرز الآية تصاعد العنف بلا هوادة في القتال—إذ يدفع البأس والغضب إلى هجمات متكررة، فيما يتراكم العبء الأخلاقي للدماء على ميدان الدارما.
Verse 17
तां गदां बहुभि: कर्ण: सुपुड्खै: सुप्रवेजितै: । प्रत्यविध्यत् पुनश्चान्यै: सा भीम॑ पुनराव्रजत्
قال سانجيا: إنّ كارنا أصاب تلك الغَدَا مرارًا بكثيرٍ من السهام—محسنة الريش، مدفوعةً بقوةٍ عظيمة—غير أنّ الغَدَا، وإن كُفَّت بسهامه، عادت من جديدٍ متجهةً نحو بهيما. ويُبرز المشهد زخم المعركة الذي لا يلين: مهارةٌ وقوةٌ تصطدمان بعزمٍ لا يتزعزع، وحتى العوائق المتكررة لا تصرف بسهولة هجومًا عاقدًا العزم.
Verse 18
तत्पश्चात् उन्होंने अधिरथपुत्र कर्णपर पुनः एक भारी गदा छोड़ी। परंतु कर्णने तेज किये हुए सुन्दर पंखवाले दूसरे-दूसरे बहुत-से बाण मारकर उस गदाको बींध डाला। इससे वह पुनः भीमपर ही लौट आयी ।।
قال سانجيا: ثم قذف بهيما غَدًا عظيمةً أخرى نحو كارنا، ابن أدهيراثا. غير أنّ كارنا، بكثيرٍ من السهام السريعة حسنة الريش، ثقب تلك الغَدَا ودفعها إلى الوراء؛ وبفعل ارتدادها عادت مرةً أخرى متجهةً إلى بهيما. وفي صدام البأس، تُبرز الآية مهارة المحارب المنضبطة وحضور ذهنه: تُكبح القوة بالدقة، ويرتد العنف على من أطلقه.
Verse 19
स कर्ण सायकानष्टौ व्यसृजत् क्रोधमूर्च्छित:
قال سانجيا: وقد غمرته موجةٌ من الغضب، أطلق كارنا ثمانيةَ سهامٍ.
Verse 20
तैस्तस्य निशितैस्ती&$णैरभीमसेनो महाबल: । चिच्छेद परवीरघ्न: प्रहसन्निव भारत
قال سانجيا: وبتلك السهام الحادّة القاطعة، قطع بهيماسينا العظيم القوة—قاتل أبطال الأعداء—أسلحة خصمه، كأنه يضحك، يا بهاراتا.
Verse 21
ध्वजं शरासनं चैव शरावापं च भारत । तब क्रोधसे व्याकुल हुए भीमसेनने कर्णको आठ बाण मारे। भारत! शत्रुवीरोंका संहार करनेवाले महाबली भीमसेनने हँसते हुए-से उन तेज धारवाले तीखे बाणोंद्वारा कर्णके ध्वज धनुष और तरकसको काट गिराया ।।
قال سانجيا: يا بهاراتا، إن بهيماسينا، بسِهامه الحادّة، وإن اضطرب بالغضب، أصاب كارنا وقطع رايته وقوسه وجعبته. فأخذ كارنا قوسًا آخر ذا ظهرٍ من ذهبٍ عسير المَغلَب؛ ثم إن ابن رادها أسرع فقتل بسهام عربته خيلَ بهيماسينا السوداء، سوداء كالدببة، ومعها حارسا الجانبين.
Verse 22
ततः पुनस्तु राधेयो हयानस्य रथेषुभि: । ऋक्षवर्णाञ्जघानाशु तथोभौ पार्ष्णिसारथी
قال سانجيا: ثم عاد رادهيَة (كارنا) فأصاب سريعًا، بسهامٍ أطلقها من عربته، خيلَ بهيماسينا ذات لون الدب؛ وقتل كذلك على عجلٍ حارسي الجانبين وسائق العربة.
Verse 23
स विपन्नरथो भीमो नकुलस्याप्लुतो रथम् | हरिर्यथा गिरे: शूड़ं समाक्रामदरिंदम:,इस तरह रथ नष्ट हो जानेसे शत्रुदमन भीमसेन जैसे सिंह पर्वतके शिखरपर चढ़ जाता है, उसी प्रकार उछलकर नकुलके रथपर जा बैठे
قال سانجيا: فلما تحطمت عربته، قفز بهيما—قاهر الأعداء—فامتطى عربة ناكولا، كما يقفز الأسد إلى ذروة الجبل.
Verse 24
तथा द्रोणार्जुनौ चित्रमयुध्येतां महारथौ । आचार्यशिष्यौ राजेन्द्र कृतप्रहरणौ युधि
قال سانجيا: «وكذلك، أيها الملك، كان الفارسان العظيمان على العربة، درونا وأرجونا—المعلّم والتلميذ—يقتتلان في ذلك الميدان قتالًا عجيبًا، يضرب كلٌّ منهما الآخر في المعركة».
Verse 25
लघुसंधानयोगाभ्यां रथयोश्व रणेन च । मोहयन्तौ मनुष्याणां चक्षूंषि च मनांसि च,शीघ्रतापूर्वक बाणोंके संधान और रथोंके योगसे अपने संग्रामद्वारा वे दोनों वीर लोगोंके नेत्रों और मनको भी मोह लेते थे
قال سانجيا: «وبمهارتِهما الخاطفة في تركيب السهام على القوس، وبالتناسق المنضبط لعربتيهما، وبهيئة قتالِهما ذاتها، أدهش البطلان الناظرين، فأسكرا أبصار الرجال وقلوبهم معًا».
Verse 26
उपारमन्त ते सर्वे योधा भरतसत्तम । अदृष्टपूर्व पश्यन्तस्तद् युद्ध गुरुशिष्ययो:,भरतश्रेष्ठ! गुरु और शिष्यके उस अपूर्व युद्धको देखते हुए सब योद्धा संग्रामसे विरत हो गये
قال سانجيا: «يا خيرَ آلِ بهاراتا، إنّ جميعَ أولئك المحاربين كفّوا عن القتال حين أبصروا ذلك النزال الذي لم يُرَ له مثيل بين المعلّم وتلميذه».
Verse 27
विचित्रान् पृतनामध्ये रथमार्गनुदीर्य तौ । अन्योन्यमपसव्यं च कर्तु वीरौ तदेषतु:,वे दोनों वीर सेनाके बीचमें रथके विचित्र पैंतरे प्रकट करते हुए उस समय एक-दूसरेको दायें कर देनेकी चेष्टा करने लगे
قال سانجيا: «وفي قلب الصفوف أظهر البطلان مناوراتٍ عجيبة بالعربات، يسوقان مسالكهما في تعاريج دقيقة؛ وكان كلٌّ منهما يسعى أن يُلجئ الآخر إلى جهة اليسار، وهي موضع يُعدّ غير ميمون، طلبًا للغلبة في الحيلة الحربية».
Verse 28
पराक्रमं तयोयोधा ददृशुस्ते सुविस्मिता: । तयो: समभवद् युद्ध द्रोणपाण्डवयोर्महत्
قال سانجيا: «ورأى المحاربون بأسَهما فدهشوا دهشةً عظيمة. ثم قامت معركةٌ كبرى بين درونا وجانب الباندافا».
Verse 29
यद् यच्चकार द्रोणस्तु कुन्तीपुत्रजिगीषया
قال سانجيا: إنّ كلَّ ما أقدم عليه درونا من أفعالٍ إنما فعله بقصد قهر أبناء كونتي، مدفوعًا برغبةٍ في التغلب عليهم في ساحة القتال.
Verse 30
यदा द्रोणो न शक्नोति पाण्डवं सम विशेषितुम्
قال سانجيا: «حين لا يعود درونا قادرًا على قهر ذلك الباندڤا ونيل تفوّقٍ حاسمٍ عليه…»
Verse 31
ऐन्द्रं पाशुपतं त्वाष्ट्र वायव्यमथ वारुणम्
قال سانجيا: «(لقد استعمل) سلاح إندرا، وسلاح باشوباتا، والسلاح المولود من تفاشتري، ثم أسلحة فايُو وفارونا». وفي المناخ الأخلاقي للحرب، فإن تكديس المقذوفات الإلهية يُشير إلى تصعيدٍ يتجاوز قتال البشر المألوف، حيث تُختَبَر القوة وضبط النفس (الدارما) وسط اندفاعٍ إلى قهر العدو.
Verse 32
अस्त्राण्यस्त्रैर्यदा तस्य विधिवद्धन्ति पाण्डव:
قال سانجيا: «حين يصدّ الباندڤا، على الوجه اللائق ووفق الأصول، مقذوفاته بأسلحتهم هم…»
Verse 33
यद् यदस्त्रं स पार्थाय प्रयुड्धक्ते वेजिगीषया
قال سانجيا: «أيّ سلاحٍ استعمله ضد بارثا، إنما استعمله بقصد أن يظفر في القتال.»
Verse 34
तस्य तस्य विघाताय तत् तद्धि कुरुतेडर्जुन: । परंतु विजयकी इच्छासे वे पार्थपर जिस-जिस अस्त्रका प्रयोग करते थे, उस-उसके विनाशके लिये अर्जुन वैसे ही अस्त्रोंका प्रयोग करते थे ।।
قال سنجيا: لِدَفْعِ كلِّ هجمةٍ من تلك الهجمات، كان أرجونا يستعمل على وجه الدقة وسيلةَ الإبطال الموافقة لها. فكلما أُطلقت الأسلحةُ الإلهية وفق الطقوس المقرَّرة، واجهها أرجونا—وهو يتطلع إلى الظفر—بسلاحٍ مماثل، فيُفني كلَّ واحدٍ منها ساعةَ ظهوره. ويُبرز هذا المشهدُ إتقانًا منضبطًا لفنون القتال: فالقوةُ لا تُكبح بالغضب، بل بالمهارة، وضبط النفس، والمعرفة الدقيقة بوسائل الردع.
Verse 35
मेने चात्मानमधिकं पृथिव्यामधि भारत
قال سنجيا: «يا بهاراتا، لقد حسب نفسه أرفعَ أهلِ الأرض.»
Verse 36
वार्यमाणस्तु पार्थेन तथा मध्ये महात्मनाम्
قال سنجيا: ومع أنه كان مُقيَّدًا ببارثا (أرجونا)، فإنه ظل هناك، في قلب صفوف ذوي النفوس العظيمة—لحظةٌ مشحونة يتصادم فيها بأسُ الفرد مع السعي إلى كفِّ مزيدٍ من الأذى في ساحة القتال.
Verse 37
ततोडन्तरिक्षे देवाश्न गन्धर्वाश्ष सहस्रश:
ثم في السماء ظهر الآلهةُ والگندهرفا بالآلاف، يشهدون تلك اللحظة ويزيدون الإحساس بأن ما يجري في ساحة المعركة منظورٌ وموزونٌ بحكمٍ من كائناتٍ أسمى.
Verse 38
तदप्सरोभिराकीर्ण यक्षगन्धर्वसंकुलम्
قال سنجيا: بدا ذلك الموضع مكتظًّا بالأبساراس، ومزدحمًا بالياكشا والگندهرفا—مُوحيًا بجوٍّ سماويٍّ، فوقَ دنيويّ، في قلب ما كان يتكشف من أحداث.
Verse 39
तत्र स्मान्तर्हिता वाचो व्यचरन्त पुन: पुन:
هناك، مرّة بعد مرّة، كانت أصواتٌ—مستترةٌ عن العيون—تتحرّك ذهابًا وإيابًا، تتردّد على فترات، كأنها تُومئ إلى حضورٍ غير منظور وإلى ذلك الارتياب المقلق الذي يخيّم على ساحة القتال.
Verse 40
विसृज्यमानेष्वस्त्रेषु ज्वालयत्सु दिशो दश
قال سنجيا: حين كانت الأسلحة تُقذَف متّقدةً متلألئة، خُيِّل أنها تُشعل الجهات العشر كلّها—إشارةً إلى التصاعد المروّع للقتال وإلى الخطر الأخلاقي الذي يعقب انفلات الغضب والقوة الحربية بلا كابح.
Verse 41
अब्रुव॑ंस्तत्र सिद्धाश्षन ऋषयश्न समागता: । जब दिव्यास्त्रोंके प्रयोग होने लगे और उनके तेजसे दसों दिशाएँ प्रकाशित हो उठीं
قال سنجيا: لما أُطلقت الأسلحة السماوية وعمّ ضياؤها الجهات العشر، أخذ السِّدّهات والريشيّون المجتمعون في السماء يتناجون قائلين: «ليست هذه حربَ البشر، ولا حربَ الأسورا، ولا حربَ الرّاكشسا—ولا حتى حربَ الآلهة والگندهرفا. إنما هي، حقًّا، معركةٌ عليا ذات طابعٍ برهميّ. قتالٌ غريبٌ مدهشٌ كهذا لم نره قط، ولم نسمع به من قبل.»
Verse 42
नदैवं न च गान्धर्व ब्राह्मां ध्रुवमिदं परम् विचित्रमिदमाश्चर्य न नो दृष्टं न च श्रुतम्
قال سنجيا: «هذه المعركة ليست معركةَ البشر، ولا معركةَ الأسورا، ولا معركةَ الرّاكشسا، ولا حتى معركةَ الآلهة والگندهرفا. إنها، يقينًا، حربٌ ‘برهميّة’ عليا لا تخطئ. قتالٌ غريبٌ مدهشٌ كهذا لم نره قط، ولم نسمع به من قبل.»
Verse 43
अति पाण्डवमाचार्यो द्रोणं चाप्पति पाण्डव: । नानयोरन्तरं शक््यं द्रष्टमन्येन केनचित्
قال سنجيا: كان المعلّم (درونا) كأنه مندمجٌ كلّ الاندماج مع جانب الباندافا، وكان محاربُ الباندافا يضغط على درونا ضغطًا شديدًا. ولم يستطع أحدٌ غيرهما أن يلمح بين الاثنين فجوةً أو انفصالًا—إذ كانا متكافئين متلاصقين، متواجهين مباشرةً في ذلك القتال.
Verse 44
“आचार्य द्रोण पाण्डुपुत्र अर्जुनसे बढ़कर हैं और पाण्डुपुत्र अर्जुन भी आचार्य द्रोणसे बढ़कर हैं। इन दोनोंमें कितना अन्तर है, इसे दूसरा कोई नहीं देख सकता ।।
قال سنجيا: «إنّ درونا، المُعلِّم، يفوق أرجونا ابن باندو؛ ومع ذلك فإنّ أرجونا ابن باندو يفوق درونا. ولا يستطيع أحدٌ سواهما أن يُبصر حقًّا مقدار الفارق بين هذين الاثنين. ولو أنّ رودرا (شيفا) شقّ ذاته إلى صورتين وقاتل نفسه بنفسه، لكان ذلك القتال وحده مثالًا يُقاس عليه؛ أمّا فيما عدا ذلك فلا نظير لهذين الاثنين.»
Verse 45
ज्ञानमेकस्थमाचार्य ज्ञानं योगश्न पाण्डवे | शौर्यमेकस्थमाचार्ये बलं शौर्य च पाण्डवे
قال سنجيا: «إنّ العلم كلَّه مجتمعٌ في موضعٍ واحدٍ في المُعلِّم (درونا)؛ أمّا في ابن باندو (أرجونا) فالعلم مقرونٌ بإتقان اليوغا المنضبط. وكذلك فإنّ البأس كلَّه مُركَّزٌ في المُعلِّم؛ أمّا في أرجونا فثمّة بأسٌ وقوّةٌ معًا.»
Verse 46
नेमौ शक््यौ महेष्वासौ युद्धे क्षपयितुं परै: । इच्छमानौ पुनरिमौ हन्येतां सामरं जगत्
قال سنجيا: «هذان الراميان العظيمان لا يستطيع أيُّ محاربٍ آخر أن يُهلكهما في ساحة القتال. غير أنّهما إن أرادا، لقدرَا على إيقاع الفناء بالعالم كلّه، ومعه الآلهة.»
Verse 47
इत्यब्रुवन् महाराज दृष्टवा तौ पुरुषर्षभौ । अन्तर्हितानि भूतानि प्रकाशानि च सर्वश:
قال سنجيا: «يا أيها الملك، لما رأى الناسُ هذين البطلين، ثورين بين الرجال، سُمِعَت الكائنات في كل ناحية—مَن كان منها مستترًا في السماء ومَن كان ظاهرًا للعيان—تُردِّد هذه الكلمات بعينها من كل جانب.»
Verse 48
ततो द्रोणो ब्राह्ममस्त्र प्रादुश्चक्रे महामति: । संतापयन् रणे पार्थ भूतान्यन्तर्हितानि च
قال سنجيا: «ثم إنّ درونا، عظيم الرأي، أظهر سلاح براهما—البراهماأسترا. وفي ساحة القتال أحرق بارثا (أرجونا) وأحرق كذلك الكائنات غير المرئية التي تتحرّك في السماء.»
Verse 49
ततश्नचाल पृथिवी सपर्वतवनद्रुमा । ववौ च विषमो वायु: सागराश्षापि चुक्षुभु:,फिर तो पर्वत, वन और वृक्षोंसहित धरती डोलने लगी, आँधी उठ गयी और समुद्रोंमें ज्वार आ गया
قال سَنْجَيا: عندئذٍ أخذت الأرض ترتجف، بما عليها من جبالٍ وغاباتٍ وأشجار. وهبَّت ريحٌ عاتيةٌ مضطربة، وهاجت المحيطاتُ كذلك واضطربت—وهي نُذُرٌ بأن نظام الطبيعة نفسه كان يُزعزَع بفعل المنعطف الرهيب في الحرب.
Verse 50
ततस्त्रासो महानासीत् कुरुपाण्डवसेनयो: । सर्वेषां चैव भूतानामुद्यते<स्त्रे महात्मना
قال سَنْجَيا: عندئذٍ قام فزعٌ عظيمٌ في جيوش الكورو والباندافا؛ بل وفي جميع الكائنات الحيّة أيضًا، حين رفع ذلك المحارب العظيمُ النفس سلاحه.
Verse 51
ततः पार्थोउप्यसम्भ्रान्तस्तदस्त्रं प्रतिजध्निवान् । ब्रह्मास्त्रेणैेव राजेन्द्र ततः सर्वमशीशमत्
قال سَنْجَيا: ثم إن بارثا (أرجونا) أيضًا، غيرَ مضطربٍ، تصدّى لذلك السلاح؛ أيها الملك، فكبحه ببراهماأسترا نفسه. وعندئذٍ، يا خيرَ الملوك، سكن الاضطراب كلُّه.
Verse 52
यदा न गम्यते पारं तयोरन्यतरस्य वा । ततः संकुलयुद्धेन तद् युद्ध व्याकुलीकृतम्,जब द्रोणाचार्य और अर्जुनमेंसे कोई भी किसीको परास्त न कर सका, तब सामूहिक युद्धके द्वारा उस संग्रामको व्यापक बना दिया गया
قال سَنْجَيا: ولما لم يستطع أيٌّ من الاثنين—دروناآتشاريّا أو أرجونا—أن يبلغ «الشاطئ الآخر»، أي أن يقهر صاحبه قهرًا حاسمًا، اضطربت المعركة واتسعت باشتباكٍ جماعيٍّ متشابك.
Verse 53
नाज्ञायत ततः किंचित् पुनरेव विशाम्पते । प्रवृत्ते तुमुले युद्धे द्रोणपाण्डवरयोर्मुथे,प्रजानाथ! रणभूमिमें द्रोणाचार्य और अर्जुनमें घमासान युद्ध छिड़ जानेपर फिर किसीको कुछ सूझ नहीं रहा था
قال سَنْجَيا: يا سيّدَ الشعب، يا حاكمَ الرجال، لما اندلع ذلك القتال العنيف بين درونا والباندافي (أرجونا)، لم يعد يُدرَك شيءٌ على وجهٍ بيّن—ففي خضمّ الضجيج غمر العنفُ الحربيُّ الإدراكَ والحُكم.
Verse 54
(द्रोणो मुक्त्वा रणे पार्थ पज्चालानन्वधावत । अर्जुनो5पि रणे द्रोणं त्यक्त्वा प्राद्रावयत् कुरून् ।।
قال سنجيا: في ساحة القتال، إنّ درونا، مُعرِضًا عن أرجونا، اندفع يطارد البانچالا؛ وأرجونا كذلك، مُؤجِّلًا مبارزته مع درونا، أخذ يدفع جموع الكورو إلى الوراء مسرعًا. ثم، أيها الملك، في ذلك الاصطدام العظيم، جعل الاثنان بسيلٍ من السهام الميدان كأنه مكسوٌّ بالظل؛ وكان ضجيج الحرب يبدو مُرعِبًا للعالم كلّه. وامتلأت السماء بشبكة من السهام كأنها كتلة من السحاب مبسوطة في الفضاء، حتى إنّه في ذلك الحين لم يستطع أيُّ مخلوقٍ يطير في الهواء أن يمرّ عبرها.
Verse 136
विच्छिन्नशरपातत्वाद् गदायुद्धमवर्तत । फिर दोनों परस्पर अत्यन्त कुपित हो बड़े वेगसे टूट पड़े। उन युद्धकुशल योद्धाओंके परस्पर अत्यन्त निकट आ जानेके कारण उनके बाण चलानेका क्रम टूट गया; इसलिये उनमें गदायुद्ध आरम्भ हो गया
قال سنجيا: لما انقطع تبادل السهام، انقلب القتال إلى مبارزة بالهراوات (الصولجانات). إذ اندفع المحاربان، وقد استعر غضبهما، أحدهما نحو الآخر بسرعة عظيمة حتى تقاربا تقاربًا شديدًا، فاختلّ نظام القتال بالأسلحة المقذوفة؛ وهكذا تحوّلت المعركة إلى قتالٍ قريبٍ بالهراوات.
Verse 146
बिभेद शतधा राजंस्तदद्भुतमिवाभवत् | राजन! भीमसेनने अपनी गदासे कर्णके रथका कूबर तोड़कर उसके सौ टुकड़े कर दिये, वह अद्भुत-सा कार्य हुआ
قال سنجيا: أيها الملك، إنّ بهيماسينا حطّمه إلى مئة قطعة، حتى بدا الأمر كالمعجزة. فقد كسر بهراوته الجزء الأمامي من عربة كارنا الحربية وفتّته.
Verse 186
पपात सारथिभश्चास्य मुमोह च गदाहतः । कर्णके बाणोंसे आहत हो वह गदा मन्त्रसे मारी गयी सर्पिणीके समान लौटकर भीमसेनके ही रथपर गिरी। उसके गिरनेसे भीमसेनकी विशाल ध्वजा धराशायी हो गयी और उस गदाकी चोट खाकर उनका सारथि भी मूर्च्छित हो गया
قال سنجيا: بضربة الهراوة سقط سائق عربة بهيما وفقد وعيه. وتلك الهراوة—وقد أصابتها سهام كارنا ودُفِعت راجعةً بقوة المانترا كأنها أفعى تعود—وقعت على عربة بهيماسينا نفسها. وبسقوطها هوت راية بهيما العظيمة إلى الأرض، وأغمي على السائق أيضًا من شدة الصدمة.
Verse 187
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणवधपर्वमें नकुलका युद्धाविषयक एक सौ सतासीवाँ अध्याय पूरा हुआ
قال سنجيا: وهكذا تنتهي الفصولُ المئةُ والسابعةُ والثمانون، في شأن قتال ناكولا، ضمن «دروṇa پرفا» من «شري مهابهاراتا»، في القسم الفرعي المتعلق بمقتل درونا.
Verse 188
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणवधपर्वणि संकुलयुद्धे अष्टाशीत्यधिकशततमो< ध्याय:,इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणवधपर्वमें घमासान युद्धविषयक एक सौ अद्वासीवाँ अध्याय पूरा हुआ
وهكذا، في «المهابهارتا الشريفة»، ضمن «بارفا درونا»—وخاصة في فصل «مقتل درونا»—تنتهي هذه الحلقة التي تصف القتال المتشابك الكثيف، المستغرق لكل شيء، وبذلك يكتمل الفصل الثامن والثمانون بعد المئة. ويؤكد خاتمةُ الفصل ثِقَلَ التصاعد الأخلاقي للحرب: فالسرد لا يمضي بوصفه مشهداً للفرجة، بل سجلاً لكيفية احتجاب الدارما وسط عنفٍ لا ينقطع وقتلٍ تحكمه الحيلة والتدبير.
Verse 283
आमिषार्थ महाराज गगने श्येनयोरिव । उन द्रोणाचार्य और पाण्डुपुत्र अर्जुनके पराक्रमको वे सब सैनिक अत्यन्त आश्चर्यचकित होकर देख रहे थे। महाराज! जैसे मांसके टुकड़ेके लिये आकाशमें दो बाज लड़ रहे हों
قال سنجيا: أيها الملك، لقد كان جميع المحاربين ينظرون في ذهولٍ بالغ إلى بأس دروناآچاريا وأرجونا ابن باندو. أيها المَهاراجا، وكما يتنازع صقران في السماء على قطعة لحم، كذلك قامت بين ذلك المعلّم وتلميذه معركة هائلة من أجل السيادة. ويكشف المشهد توتّر الحرب المأساوي: فالتفوّق والوفاء حاضران، غير أنّهما يُساقان إلى الصدام بجوع المُلك وبمطالب الواجبات المتعارضة.
Verse 296
तत् तत् प्रतिजघानाशु प्रहसंस्तस्य पाण्डव: । द्रोणाचार्य कुन्तीपुत्र अर्जुनको जीतनेकी इच्छासे जिस-जिस अस्त्रका प्रयोग करते थे, उस-उसको पाए्जुपुत्र अर्जुन हँसते हुए तत्काल काट देते थे
قال سنجيا: كان الباندفي يضحك وهو يردّ سريعاً، فيصدّ كل هجمة من خصمه في الحال. وكلما استعمل دروناآچاريا سلاحاً رغبةً في قهر أرجونا ابن كونتي، قطع أرجونا ابن باندو ذلك السلاح فوراً وهو يبتسم. وفي لهيب المعركة تبدو رباطة جأش أرجونا وإحكامه لفنون السلاح لا قسوةً، بل ضبطاً منضبطاً: يلاقي القوة بكبحٍ دقيق، ويحوّل كل محاولة للعدو إلى درسٍ في مهارة أسمى وثباتٍ في النفس.
Verse 306
ततः प्रादुश्चकारास्त्रमस्त्रमार्गविशारद: । जब द्रोणाचार्य पाण्डुपुत्र अर्जुनकी अपेक्षा अपनी विशेषता न सिद्ध कर सके, तब अस्त्रमार्गोके ज्ञाता गुरुदेवने दिव्यास्त्रोंकोी प्रकट किया
قال سنجيا: ثم إنّ المعلّم، الخبير بمسالك الأسلحة وتعويذاتها وتطبيقاتها، أظهر سلاحاً إلهياً. وفي توتّر الميدان الأخلاقي، حين لم تعد البراعة العادية تكفي لإثبات التفوّق، كان لجوء المعلّم إلى أسترا أرفع علامةً على تصاعد الحرب، ودليلاً على جسامة المسؤولية الملازمة للمعرفة المتخصصة.
Verse 323
ततो<अस्त्रै: परमैर्दिव्यैद्रोण: पार्थमवाकिरत् । जब पाण्डुकुमार अर्जुन आचार्यके सभी अस्त्रोंको अपने अस्त्रोंद्वारा विधिपूर्वक नष्ट करने लगे, तब द्रोणने परम दिव्य अस्त्रोंद्वारा अर्जुनको ढक दिया
قال سنجيا: عندئذٍ لجأ درونا إلى أسمى الأسترا السماوية، فأمطر بها بارثا (أرجونا) حتى غمره بها. ولما أخذ أرجونا ابن باندو يصدّ أسلحة المعلّم ويُبطلها على وجهها الصحيح بسلاحه، شدّد درونا الهجوم بأسترا إلهية أعلى—تصعيدٌ يبرز شراسة الحرب، ويكشف التوتّر الجسيم حين يلتقي الغورو وتلميذه عدوّين في ساحة القتال.
Verse 353
तेन शिष्येण सर्वेभ्य: शस्त्रविद्भ्य: परंतप: । भारत! शत्रुओंको संताप देनेवाले द्रोणाचार्य उस शिष्यके द्वारा अपने-आपको भूमण्डलके सभी शस्त्रवेत्ताओंसे श्रेष्ठ मानने लगे
قال سنجيا: يا بهاراتا! بفضل ذلك التلميذ أخذ دروناآتشاريّا—مُعذِّب الأعداء—يرى نفسه أسمى من جميع سادة السلاح في أرجاء الأرض. وتُبرز هذه الحادثة كيف قد تُربَط سمعة المعلّم وتقديره لذاته ببأس تلميذ واحد، فتثير أسئلةً عن الكِبْر والاستحقاق والثِّقل الأخلاقي للتفوّق القتالي في أتون الحرب.
Verse 366
यतमानोडर्जुनं प्रीत्या प्रत्यवारयदुत्स्मयन् । महामनस्वी वीरोंके बीचमें अर्जुनके द्वारा इस प्रकार रोके जाते हुए द्रोणाचार्य प्रयत्न करके प्रसन्नतापूर्वक मुसकराते हुए स्वयं भी अर्जुनको आगे बढ़नेसे रोकने लगे
قال سنجيا: وهو يجاهد بمودّةٍ وابتسامةٍ، كفَّ اندفاع أرجونا. ومع أنّ أرجونا كان يقيّده على هذا النحو في غمرة القتال، فإنّ دروناآتشاريّا—ذلك البطل العظيم النفس—بذل جهده وابتسم برضا هادئ، ثم أخذ بدوره يمنع أرجونا من المضيّ قُدُمًا. ويُبرز المشهد انضباط المحارب: فحتى في صراعٍ قاتل، يمكن لسيادة النفس واحترام الخصم الجدير أن يجتمعا مع الواجب الذي لا يلين في ساحة المعركة.
Verse 373
ऋषय: सिद्धसंघाश्च व्यतिष्ठन्त दिदृक्षया । तदनन्तर वह युद्ध देखनेकी इच्छासे आकाशमें बहुत-से देवता, सहस्रों गन्धर्व, ऋषि और सिद्धसमुदाय खड़े हो गये
قال سنجيا: «وقف الحكماء وجموع السِّدْهَة مترقّبين شوقًا إلى المشاهدة. ثم بعد ذلك، رغبةً في رؤية القتال، اتخذ كثيرٌ من الآلهة—ومعهم آلاف الغندرفا، والريشيون، وجماعات السِّدْهَة المجتمعة—مواقعهم في السماء.»
Verse 383
श्रीमदाकाशमभवद् भूयो मेघाकुलं यथा । अप्सराओं, यक्षों और गन्धर्वोंसे भरा हुआ आकाश ऐसी विशिष्ट शोभा पा रहा था, मानो उसमें मेघोंकी घटा घिर आयी हो
قال سنجيا: عادَت السماءُ مرةً أخرى بهيّةً، مكتظّةً كأنها كتلةٌ من السحاب. وقد ازدحمت بالأبسارات والياكشا والغندرفا، فاكتسبت بهاءً مميّزًا، كأنّ سحابةً عظيمةً قد تجمّعت في جوفها.
Verse 393
द्रोणपार्थस्तवोपेता व्यश्रूयन्त नराधिप । नरेश्वर! वहाँ द्रोणाचार्य और अर्जुनकी स्तुतिसे युक्त अदृश्य व्यक्तियोंके मुखोंसे निकली हुई बातें बारंबार सुनायी देने लगीं
قال سنجيا: أيها الملك، أخذت تُسمَع مرارًا كلماتُ الثناء على درونا وأرجونا، كأنها صادرةٌ من أفواه كائناتٍ غير مرئية، وكأنّ أصواتًا قد نهضت من شفاهٍ خفيّة. وفي خضمّ اضطراب الحرب، تدلّ هذه الإشادة المتكرّرة على أنّ بأسًا استثنائيًا والوفاءَ لناموس المحارب كانا يُشاهَدان ويُقَرّان بما يتجاوز ساحة القتال البشرية.
Verse 1536
अवासूजदू रथे तां तु बिभेद गदया गदाम् | फिर पराक्रमी राधापुत्र कर्णने भीमकी ही गदा उठा ली और उसे घुमाकर उन्हींके रथपर फेंका; किंतु भीमने दूसरी गदासे उस गदाको तोड़ डाला
قال سنجيا: إنّ بهيما، ثابتًا في ساحة القتال، ضرب تلك الهراوة فحطّمها بهراوته. وهكذا، في تبادل السلاح العنيف، لاقت القوّةُ القوّةَ، وكُفَّ اندفاعُ المحارب بضربةٍ مضادّةٍ مساويةٍ وفي أوانها—صورةٌ تُبيّن أنّ البأسَ واليقظةَ هما اللذان يحسمان نتيجةَ اللحظة في الحرب.
Verse 3136
मुक्त मुक्त द्रोणचापात् तज्जघान धनंजय: । द्रोणाचार्यके धनुषसे क्रमश: छूटे हुए ऐन्द्र, पाशुपत, त्वाष्ट्, वायव्य तथा वारुण नामक अस्त्रको अर्जुनने तत्काल शान्त कर दिया
قال سنجيا: لما كانت المقذوفات تُطلَق مرارًا من قوس درونا، كان دهننجيا (أرجونا) يضربها فيسقطها. والأسلحة السماوية التي خرجت تباعًا من قوس دروناآچاريا—المسماة: أَيْندرا (Aindra)، وباشوباتا (Pāśupata)، وتفاشترَا (Tvāṣṭra)، وفايَفيا (Vāyavya)، وفارونا (Vāruṇa)—قد حيّدها أرجونا في الحال. وتُبرز هذه الواقعةُ سيادةً منضبطةً على القوّة: فحتى أشدّ القوى بأسًا ينبغي أن تُواجَه بالكفّ، والدقّة، والعزم على منع الخراب المنفلت في ساحة القتال.
Verse 3436
अर्जुनेनार्जुनं द्रोणो मनसैवाभ्यपूजयत् । जब अर्जुनके द्वारा उनके विधिपूर्वक चलाये हुए दिव्यास्त्र भी प्रतिहत होने लगे, तब द्रोणने अर्जुनकी मन-ही-मन सराहना की
قال سنجيا: إنّ درونا أكرم أرجونا في باطنه. فلما أخذت حتى المقذوفات الإلهية التي أطلقها أرجونا على وجهها وبحسب الطقس أن تُصدَّ وتُحيَّد، مدح درونا أرجونا في قلبه—إذ أدرك ما في ذلك من براعةٍ خارقةٍ وكفٍّ للنفس في فنّ الحرب.
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