Opening the text
त्याग-धर्म की सीढ़ी: राजसुख के शिखर से उतरकर ‘मर्यादा’ में स्थित होना। इस सोपान में भक्ति का परिपाक ‘विरह’ और ‘सेवा’ के मार्ग से होता है—भरत का चरित्र दिखाता है कि अधिकार (राज) नहीं, अधिकारिता (अधिकार-त्याग) मोक्ष-मार्ग का द्वार है।
『アヨーディヤー・カーンダ』の主たるラサはカルナー・ヴィプラランバ(離別の哀情)であるが、その内奥の声はシャーンタ(寂静)のバクティである。王法・家法・自己の法の葛藤は、ここで「マリヤーダー(規範・節度)」へと転成する。ラーマの森への旅立ちは外的事件でありつつ、内心のサーダナー(修行)となる。本巻においてバラタの人物像はバクティの倫理的頂点である。彼は「私欲に縛られた者」ではなく、「サティヤサンド(真実に堅固)」としてラーマの命に随う。ゆえに世評・非難を超えて、奉仕のダルマに安住する。提示箇所(およそドーハー220–229)では、旅の構図(ヤムナー河畔、ガート、ニシャーダとの交わり、アーシュラムの境内)が巡礼の地図となり、各停留が心の散乱を洗い、ラーマ・ダルシャン(御姿拝観)への渇望を鋭くする。トゥルシーはここにニルグナ(無相)とサグナ(有相)の橋を架ける。ラーマは「マリヤーダー・プルショーत्तマ(規範の至上者)」でありながら、 भक्तの心にはブラフマーナンダ(梵楽)の測りがたい相として近づく。
Verse 449 (चौपाई)
सत्यसंध प्रभु सुर हितकारी। भरत राम आयस अनुसारी।। स्वारथ बिबस बिकल तुम्ह होहू। भरत दोसु नहिं राउर मोहू।। सुनि सुरबर सुरगुर बर बानी। भा प्रमोदु मन मिटी गलानी।। बरषि प्रसून हरषि सुरराऊ। लगे सराहन भरत सुभाऊ।। एहि बिधि भरत चले मग जाहीं। दसा देखि मुनि सिद्ध सिहाहीं।। जबहिं रामु कहि लेहिं उसासा। उमगत पेमु मनहँ चहु पासा।। द्रवहिं बचन सुनि कुलिस पषाना। पुरजन पेमु न जाइ बखाना।। बीच बास करि जमुनहिं आए। निरखि नीरु लोचन जल छाए।।
主は真実を守り、神々の利益を願う、バラタはラーマの命令に従う。自己の利益に惑わされ、動揺している、バラタに過失はない、あなたにも私にも。神々の師の優れた言葉を聞いて、神々の王は喜び、恥は消えた。花を降らせて喜び、バラタの高潔な性質を称え始めた。こうしてバラタは道を進んだ、その様子を見て、仙人和シッダは驚嘆した。ラーマの名を口にするたび、長い息をつき、愛が心の四方から湧き上がった。その言葉を聞いて、雷や岩さえも溶ける、都人の愛は語り尽くせない。途中で宿泊してヤムナーに着き、水を見て眼は涙に曇った。
Verse 450 (दोहा/सोरठा)
रघुबर बरन बिलोकि बर बारि समेत समाज। होत मगन बारिधि बिरह चढ़े बिबेक जहाज।।220।।
ラーグヴァの主、優れた方を、集団とバラモンと共に見て、慈悲の海は喜びに満ち、分別の船が別離の海を渡るために出航した。
Verse 451 (चौपाई)
जमुन तीर तेहि दिन करि बासू। भयउ समय सम सबहि सुपासू।। रातहिं घाट घाट की तरनी। आईं अगनित जाहिं न बरनी।। प्रात पार भए एकहि खेंवाँ। तोषे रामसखा की सेवाँ।। चले नहाइ नदिहि सिर नाई। साथ निषादनाथ दोउ भाई।। आगें मुनिबर बाहन आछें। राजसमाज जाइ सबु पाछें।। तेहिं पाछें दोउ बंधु पयादें। भूषन बसन बेष सुठि सादें।। सेवक सुह्रद सचिवसुत साथा। सुमिरत लखनु सीय रघुनाथा।। जहँ जहँ राम बास बिश्रामा। तहँ तहँ करहिं सप्रेम प्रनामा।।
その夜はヤムナーの岸で過ごし、時は吉兆で皆順調であった。夜に、数えきれぬほどの船が各渡し場に来た。朝までに全員が一度の渡航で対岸に渡り、ラーマの友への奉仕を果たした。彼らは沐浴し、川に頭を下げて進んだ、ニシャーダの主が二人の兄弟に同行した。前方には大仙が乗り物で進み、王族の一行は後ろに続いた。その後ろを二人の兄弟が徒歩で歩き、質素な装飾、衣類、姿であった。僕、友人、顧問、息子たちが同行し、ラクシュマナはシーターとラーグヴァの主を常に念じていた。ラーマが休息し、滞在する所どこでも、彼らは愛を込めて敬礼した。
Verse 452 (दोहा/सोरठा)
मगबासी नर नारि सुनि धाम काम तजि धाइ। देखि सरूप सनेह सब मुदित जनम फलु पाइ।।221।।
彼の滞在を聞いて、男女は家を捨て、他の用事を捨てて急いだ。その姿を見て、愛と喜びに満たされ、生まれた果実を得た。
Verse 453 (चौपाई)
कहहिं सपेम एक एक पाहीं। रामु लखनु सखि होहिं कि नाहीं।। बय बपु बरन रूप सोइ आली। सीलु सनेहु सरिस सम चाली।। बेषु न सो सखि सीय न संगा। आगें अनी चली चतुरंगा।। नहिं प्रसन्न मुख मानस खेदा। सखि संदेहु होइ एहिं भेदा।। तासु तरक तियगन मन मानी। कहहिं सकल तेहि सम न सयानी।। तेहि सराहि बानी फुरि पूजी। बोली मधुर बचन तिय दूजी।। कहि सपेम सब कथाप्रसंगू। जेहि बिधि राम राज रस भंगू।। भरतहि बहुरि सराहन लागी। सील सनेह सुभाय सुभागी।।
彼らは互いに愛を込めて尋ねた。「ラーマとラクシュマナは友と共にいるのか、それともいないのか」 「彼の体、身分、姿は同じであり、その品性、愛情、歩みも似ている」 「だがそれは彼の衣装ではなく、シーターも共にいない、それでも彼は四軍を率いて進んでいく」 「その顔には喜びがなく、ただ悲しみがある、これには疑いがある、友よ」 女たちは心の中でこの論理を受け入れた、彼ほど賢い者はいないと皆が言った 彼らは彼の言葉を称え、すぐに彼を崇拝した、その女性は彼に甘い言葉を語った 愛を込めて物語の全てを語った、ラーマの王運がどのように壊れたかを それから彼らはバラタを称え始めた、その品性、愛情、本性、そして幸運を
Verse 454 (दोहा/सोरठा)
चलत पयादें खात फल पिता दीन्ह तजि राजु। जात मनावन रघुबरहि भरत सरिस को आजु।।222।।
徒歩で歩き、果実を食べ、父から与えられた王国を捨てて、ラーグヴァ王を連れ戻しに行く、今日バラタに匹敵する者がいようか
Verse 455 (चौपाई)
भायप भगति भरत आचरनू। कहत सुनत दुख दूषन हरनू।। जो कछु कहब थोर सखि सोई। राम बंधु अस काहे न होई।। हम सब सानुज भरतहि देखें। भइन्ह धन्य जुबती जन लेखें।। सुनि गुन देखि दसा पछिताहीं। कैकइ जननि जोगु सुतु नाहीं।। कोउ कह दूषनु रानिहि नाहिन। बिधि सबु कीन्ह हमहि जो दाहिन।। कहँ हम लोक बेद बिधि हीनी। लघु तिय कुल करतूति मलीनी।। बसहिं कुदेस कुगाँव कुबामा। कहँ यह दरसु पुन्य परिनामा।। अस अनंदु अचिरिजु प्रति ग्रामा। जनु मरुभूमि कलपतरु जामा।।
兄弟への献身がバラタの行いであった、それを語り聞くことで悲しみと欠点が取り除かれる 友よ、私が言うことはこれだけである、なぜラーマが私の兄弟であってはならないのか 私たちは皆、弟たちと共にバラタだけを見る、彼を立派な人と数える者たちは幸いである 彼の美徳を聞き、その状態を見て、彼らは悔いる、カイケーイーの母は母にふさわしくない ある者は王妃に欠点はないと言う、運命が全てをなした、私たちが苦しんでいる 私たちは世界、ヴェーダ、正法を欠いている、卑しい女の家系の行いは不浄である 彼らは邪悪な地、邪悪な村、邪悪な家に住む、この光景が功徳の果実であろうか そのような喜びは各村で稀である、砂漠に願望を満たす木が現れたようだ
Verse 456 (दोहा/सोरठा)
भरत दरसु देखत खुलेउ मग लोगन्ह कर भागु। जनु सिंघलबासिन्ह भयउ बिधि बस सुलभ प्रयागु।।223।।
バラタを見て、人々の手にある運が開かれた、まるで摂理によって、プラヤーガがシンハラの住人に容易に近づけるようになったかのようであった
Verse 457 (चौपाई)
निज गुन सहित राम गुन गाथा। सुनत जाहिं सुमिरत रघुनाथा।। तीरथ मुनि आश्रम सुरधामा। निरखि निमज्जहिं करहिं प्रनामा।। मनहीं मन मागहिं बरु एहू। सीय राम पद पदुम सनेहू।। मिलहिं किरात कोल बनबासी। बैखानस बटु जती उदासी।। करि प्रनामु पूँछहिं जेहिं तेही। केहि बन लखनु रामु बैदेही।। ते प्रभु समाचार सब कहहीं। भरतहि देखि जनम फलु लहहीं।। जे जन कहहिं कुसल हम देखे। ते प्रिय राम लखन सम लेखे।। एहि बिधि बूझत सबहि सुबानी। सुनत राम बनबास कहानी।।
自らの美徳と共にラーマの美徳を歌う、聞いてラーグヴァ主を思いながら進む 巡礼地、聖者の庵、神の住処を見て、身を浸し、礼拝する 心の中でこの一つの願いを求める、シーターとラーマの蓮華の足への愛 キラータ、コーラ、森の住人、ヴァイカーナサ、行者、離脱者に出会う 礼拝して各々に尋ねる、どの森でラクシュマナ、ラーマ、ヴィデーハの娘を見たか 彼らは皆、主の知らせを語る、バラタを見て、生の果実を得る 「私たちは無事に見た」と言う者を、ラーマとラクシュマナのように愛する このように、全員があらゆる方向で尋ねる、ラーマの森の追放の物語を聞きながら
Verse 458 (दोहा/सोरठा)
तेहि बासर बसि प्रातहीं चले सुमिरि रघुनाथ। राम दरस की लालसा भरत सरिस सब साथ।।224।।
その夜をそこで過ごし、夜明けにラーグヴァ主を思いながら出発した、ラーマの姿を渇望する点でバラタと等しい全員と共に
Verse 459 (चौपाई)
मंगल सगुन होहिं सब काहू। फरकहिं सुखद बिलोचन बाहू।। भरतहि सहित समाज उछाहू। मिलिहहिं रामु मिटहि दुख दाहू।। करत मनोरथ जस जियँ जाके। जाहिं सनेह सुराँ सब छाके।। सिथिल अंग पग मग डगि डोलहिं। बिहबल बचन पेम बस बोलहिं।। रामसखाँ तेहि समय देखावा। सैल सिरोमनि सहज सुहावा।। जासु समीप सरित पय तीरा। सीय समेत बसहिं दोउ बीरा।। देखि करहिं सब दंड प्रनामा। कहि जय जानकि जीवन रामा।। प्रेम मगन अस राज समाजू। जनु फिरि अवध चले रघुराजू।।
吉兆が全員に現れる、喜びを与える目と腕が震える バラタと共に全集会が熱望に満ちる、ラーマに会い、悲しみと苦悩が消える 各々の心にある願いを満たし、彼らは皆、神々のように愛に浸る 手足と歩みは弱く、道でよろめき揺れる、圧倒され、愛に支配されて言葉を語る その時、ラーマの友たちは場所を示した、山の宝珠、自然に美しい その近くを川とその岸辺が流れる、そこに二人の英雄とシーターが住む 見て、全員が合掌して礼拝する、ジャーナキーとラーマ、命そのものに勝利を宣言する このように愛に浸った王の集会は、ラーグヴァ王がアヨーディヤーに戻ったかのようであった
Verse 460 (दोहा/सोरठा)
भरत प्रेमु तेहि समय जस तस कहि सकइ न सेषु। कबिहिं अगम जिमि ब्रह्मसुखु अह मम मलिन जनेषु।।225।।
その時のバラタの愛は、栄光も不名誉もそれを語ることができず、シェーシュさえも語れない。ブラフマンの至福のように、詩人には到達できない、ああ、私の卑しい親族の中では汚されている
Verse 461 (चौपाई)
सकल सनेह सिथिल रघुबर कें। गए कोस दुइ दिनकर ढरकें।। जलु थलु देखि बसे निसि बीतें। कीन्ह गवन रघुनाथ पिरीतें।। उहाँ रामु रजनी अवसेषा। जागे सीयँ सपन अस देखा।। सहित समाज भरत जनु आए। नाथ बियोग ताप तन ताए।। सकल मलिन मन दीन दुखारी। देखीं सासु आन अनुहारी।। सुनि सिय सपन भरे जल लोचन। भए सोचबस सोच बिमोचन।। लखन सपन यह नीक न होई। कठिन कुचाह सुनाइहि कोई।। अस कहि बंधु समेत नहाने। पूजि पुरारि साधु सनमाने।।
全ての愛がラーグヴァ主の中で弱くなった、太陽は沈み、二コサが過ぎた 水と陸を見、夜が過ぎた、ラーグヴァ主は愛に駆られて旅をした そこでラーマは夜の残りを過ごした、シーターは目覚めてこのような夢を見た バラタが全集会と共に来た、主との別離の熱が体を弱らせた 全員が心で陰鬱になり、惨めで悲しんだ、義母が泣いて来るのを見た シーターの夢を聞いて、目は涙で満ちた、思いから解放する者が思いに圧倒された ラクシュマナは言った、「この夢は良くない、誰かが厳しく悪いことを告げるだろう」 そう言って、兄弟と共に沐浴し、シヴァを崇拝し、聖者を敬った
Verse 462 (छंद)
सनमानि सुर मुनि बंदि बैठे उत्तर दिसि देखत भए। नभ धूरि खग मृग भूरि भागे बिकल प्रभु आश्रम गए।। तुलसी उठे अवलोकि कारनु काह चित सचकित रहे। सब समाचार किरात कोलन्हि आइ तेहि अवसर कहे।।
神々と聖者を敬い、座って北の方角を見つめた 鳥と鹿が混乱して逃げ、主は庵に行った トゥルシーダースは原因を見て立ち上がった、彼らは心配して留まった 全ての知らせをキラータとコーラが来てその時に語った
Verse 463 (दोहा/सोरठा)
सुनत सुमंगल बैन मन प्रमोद तन पुलक भर। सरद सरोरुह नैन तुलसी भरे सनेह जल।।226।।
吉祥の言葉を聞いて、彼女の心は喜び、体は震えた。トゥルシーダースの目は、秋の蓮のように、愛の涙で満たされた。
Verse 464 (चौपाई)
बहुरि सोचबस भे सियरवनू। कारन कवन भरत आगवनू।। एक आइ अस कहा बहोरी। सेन संग चतुरंग न थोरी।। सो सुनि रामहि भा अति सोचू। इत पितु बच इत बंधु सकोचू।। भरत सुभाउ समुझि मन माहीं। प्रभु चित हित थिति पावत नाही।। समाधान तब भा यह जाने। भरतु कहे महुँ साधु सयाने।। लखन लखेउ प्रभु हृदयँ खभारू। कहत समय सम नीति बिचारू।। बिनु पूँछ कछु कहउँ गोसाईं। सेवकु समयँ न ढीठ ढिठाई।। तुम्ह सर्बग्य सिरोमनि स्वामी। आपनि समुझि कहउँ अनुगामी।।
再びシーターの母は思い悩んだ。バラタが来る理由は何だろうか。一人の使者が来て告げた。彼の四軍は小さくはないと。これを聞いて、ラーマは深い憂いに満たされた。一方には父の言葉、他方には弟の躊躇があった。バラタの性質を心で理解して、主の心は安らぎを得られなかった。その時、この決心が生じた。バラタは賢者の中で語るだろう。ラクシュマナは主の心が重いのを知った。適切な時に、適切な判断で語った。主よ、尋ねられずとも申し上げます。このような時に、従者は大胆ではありません。あなたは全知者の頂点、主であります。自ら理解して、従者として申し上げます。
Verse 465 (दोहा/सोरठा)
नाथ सुह्रद सुठि सरल चित सील सनेह निधान। सब पर प्रीति प्रतीति जियँ जानिअ आपु समान।।227।।
主よ、彼は真の良き友であり、素朴な心を持ち、徳高く、愛の宝庫であります。彼はすべての人に愛と信頼を抱く。彼を自分自身と知りなさい。
Verse 466 (चौपाई)
बिषई जीव पाइ प्रभुताई। मूढ़ मोह बस होहिं जनाई।। भरतु नीति रत साधु सुजाना। प्रभु पद प्रेम सकल जगु जाना।। तेऊ आजु राम पदु पाई। चले धरम मरजाद मेटाई।। कुटिल कुबंध कुअवसरु ताकी। जानि राम बनवास एकाकी।। करि कुमंत्रु मन साजि समाजू। आए करै अकंटक राजू।। कोटि प्रकार कलपि कुटलाई। आए दल बटोरि दोउ भाई।। जौं जियँ होति न कपट कुचाली। केहि सोहाति रथ बाजि गजाली।। भरतहि दोसु देइ को जाएँ। जग बौराइ राज पदु पाएँ।।
毒ある生き物は権力を得て、愚かになり、迷妄に支配される。バラタは正義に専念し、善良で賢い人であった。全世界は主の足への愛を知っていた。それでも今日、主の地位を得て、彼は正義と道徳を覆そうとした。彼は曲がった運命、悪しき時を持っていた。これを知って、ラーマは一人で森林の流刑に行った。悪しき計画を心に抱き、同盟者を集めて、彼は邪魔されない支配を確立しようとした。百万の策略を企て、軍勢を集めて、二人の兄弟と共に来た。もし心に欺瞞と悪意がなければ、なぜ戦車、馬、象が必要だろうか。誰がバラタを責めに行こうか。彼は世界を惑わせ、王位を奪った。
Verse 467 (दोहा/सोरठा)
ससि गुर तिय गामी नघुषु चढ़ेउ भूमिसुर जान। लोक बेद तें बिमुख भा अधम न बेन समान।।228।।
王が馬の引く戦車に乗ると、人々は彼を君主と知った。彼は世界とヴェーダに背を向け、卑しい者となり、草の葉ほどの価値もなくなった。
Verse 468 (चौपाई)
सहसबाहु सुरनाथु त्रिसंकू। केहि न राजमद दीन्ह कलंकू।। भरत कीन्ह यह उचित उपाऊ। रिपु रिन रंच न राखब काऊ।। एक कीन्हि नहिं भरत भलाई। निदरे रामु जानि असहाई।। समुझि परिहि सोउ आजु बिसेषी। समर सरोष राम मुखु पेखी।। एतना कहत नीति रस भूला। रन रस बिटपु पुलक मिस फूला।। प्रभु पद बंदि सीस रज राखी। बोले सत्य सहज बलु भाषी।। अनुचित नाथ न मानब मोरा। भरत हमहि उपचार न थोरा।। कहँ लगि सहिअ रहिअ मनु मारें। नाथ साथ धनु हाथ हमारें।।
サハスラバーフ、神々の主、トリシャンク。王権の酔いで汚されなかった者は誰か。これはバラタが採った適切な方策であった。彼は敵にわずかな借りも残さない。バラタは一つの善行もしなかった。ラーマを無力で支えなしと考えた。これを理解して、その同じ者は今日特に怒った。戦いの怒りに満ちたラーマの顔を見た。これほど語って、彼は政治の味に惑わされた。戦いの味の森の木のように、身の毛がよだって花開いた。主の足に伏して、頭の塵を頭に留めた。真実を語り、自然に力を備えていた。主よ、不適切なことは私は受け入れない。バラタよ、私の扱いは軽くはない。いつまで耐え、心を殺すべきか。主よ、弓は私の手にある。
Verse 469 (दोहा/सोरठा)
छत्रि जाति रघुकुल जनमु राम अनुग जगु जान। लातहुँ मारें चढ़ति सिर नीच को धूरि समान।।229।।
戦士の階級に生まれ、ラグの家系に生まれ、ラーマに従う者を世界は知る。蹴りで打たれても、頭に受ける、卑しき者の塵のように。
परंपरानुसार भरत-चरित (दोहा 220–229 के आसपास) का पाठ ‘निष्काम सेवा’ और ‘भ्रातृ-प्रेम’ की सिद्धि देता है; मन का राज-मद/अहंकार गलता है और राम-दर्शन की लालसा (स्मरण-रुचि) प्रबल होती है—यही इसका मुख्य फल माना जाता है।
साधारणतः ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ या ‘श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन’ को समपुट/जप-रूप में जोड़ा जाता है; भरत-प्रसंग में कई परंपराएँ ‘राम पद प्रेम’ की वृद्धि हेतु ‘सीय राममय सब जग जानी’ भाव-स्मरण को भी समपुट-सदृश रखती हैं।
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
A free sign-in with Google or Apple keeps your chat saved across web and the app.
Read Ramcharitmanas in the Vedapath app
Scan the QR code to open this directly in the app, with word-by-word meanings, Sanskrit recitation where available, and more.