Main characters of Ayodhya Kanda
- रारामRāma
राज्य-आकर्षण और वन-कठोरता के बीच अडिग मर्यादा-पुरुषोत्तम, पिता-वचन/आज्ञा-पालन को धर्म का केंद्र बनाकर करुणा को शान्त-भक्ति में रूपांतरित करते हैं; नीति-निष्ठा से लक्ष्मण के आवेग को भी संयमित करते हैं।
- सीसीताSītā
विरह-श्रृंगार की छाया में भी धर्म-साहचर्य, वनगमन को पति-धर्म और प्रेम की तपस्या बनाती हैं; करुणा को कोमल धैर्य में धारण करती हैं।
- ललक्ष्मणLakṣmaṇa
आरम्भ में रण-उद्यम और क्रोध-प्रवण वीर-रस; पर राम-आदेश से शांत-रस, दास्य-भक्ति और भ्रातृ-प्रेम में परिपक्व, बल का शोधन होकर सेवा बनता है।
- ददशरथDaśaratha
विवशता, वचन-बन्धन और पुत्र-वियोग से करुणा का केंद्र; अंत में दाह-संस्कार के साथ कथा-धारा शोक से धर्म-चिन्तन की ओर मुड़ती है।
- कैकैकेयीKaikeyī
मंथरा-कृत भय/कपट से प्रेरित कटुता, लोक-व्यवस्था में विघटन का कारण; उसके माध्यम से ‘अधर्म-प्रेरित इच्छा’ का परिणाम और वचन-बंधन की त्रासदी उभरती है।
- भभरतBharata
दुःख का उदात्तीकरण, शोक को आत्म-शुद्धि बनाकर राम-प्रेम को शरणागति में रूपांतरित करते हैं; राज्य-लोभ का निषेध कर ‘सेवा-धर्म’ को सिंहासन से ऊँचा रखते हैं।
- सुसुमित्रा/अन्यSumitrā
सुमित्रा का वैराग्य-दर्शन और मातृ-नीति, तथा केवट/वनवासी जैसे साधारण जन, भक्ति की सार्वभौमिकता और विनय-सेवा का आदर्श दिखाते हैं।
