Adhyaya 29
Anushasana ParvaAdhyaya 29110 Verses

Adhyaya 29

मातङ्ग–शक्रसंवादः (Mataṅga–Śakra Dialogue on Tapas, Status, and Moral Qualities)

Upa-parva: Varṇa–Saṃskāra–Phala Anuśāsana (Matanga–Śakra Saṃvāda episode)

Bhīṣma recounts that Mataṅga, described as disciplined and firm in vow, undertakes severe austerity—standing on one foot for a hundred years. Śakra (Indra) addresses him repeatedly as Mataṅga petitions for a “supreme station” that is characterized as extremely difficult to obtain. Śakra warns that such overreaching is not Mataṅga’s proper dharma-path and that seeking the unattainable can lead to ruin; even with tapas, the requested transformation “will not be” in the manner desired. The discourse then outlines a graded sequence of births and statuses over extended time—moving from stigmatized human conditions through śūdra, vaiśya, rājanya, and further designations—emphasizing long durations of “parivartana” (repeated turning/recurrence) in each state. Finally, the text introduces moral-psychological obstacles (anger, elation, desire, aversion, excessive pride, and contentious speech) that can “enter” and degrade a twice-born person; if conquered, one attains a good end, but if they conquer him, he falls. Śakra concludes by advising Mataṅga to choose another boon, stating that brāhmaṇya is exceedingly rare.

Chapter Arc: वैशम्पायन जनमेजय से कहते हैं कि पाण्डवों के समक्ष एक अद्भुत प्रसंग खुलता है—गड़ाजी (गङ्गा-तीर्थ) का माहात्म्य, जिसकी कीर्ति सूर्य-तप्त जल तक में पुण्य का संचार करती है। → युधिष्ठिर, भ्राताओं सहित, पितामह भीष्म से प्रश्नों की माला बाँधते हैं—कौन-से देश, जनपद, आश्रम, पर्वत और नदियाँ विशेष पुण्यदायी हैं? इसी जिज्ञासा के साथ गड़ाजी के जल, दर्शन और व्रत-तप की तुलनाएँ सामने आती हैं, जो साधारण पुण्य-कल्पनाओं को चुनौती देती हैं। → गड़ाजी के माहात्म्य का उत्कर्ष—सूर्य-किरणों से तपे गड़ाजल के पान, गड़ाजी में एक मास-निवास, और गङ्गा-दर्शन से उत्पन्न प्रसाद की तुलना ऐसे महातप से की जाती है जो युग-सहस्र तक एक पाँव पर खड़े रहने जैसा है; यहाँ तीर्थ-शक्ति का चरम प्रतिपादन होता है। → उपदेश का फल यह कि पाण्डवों का चित्त प्रसन्न और स्थिर होता है; मन्त्र-कोविद ब्राह्मण उदित सूर्य की भाँति उपस्थान करते हैं, और तप-प्रभाव से दिशाएँ प्रकाशित-सी प्रतीत होती हैं—श्रद्धा, विस्मय और शान्ति में अध्याय ठहरता है। → महर्षिगण भीष्म और पाण्डवों की अनुमति लेकर सबके देखते-देखते अन्तर्धान हो जाते हैं—यह संकेत छोड़ते हुए कि आगे भीष्म के मुख से तीर्थ-धर्म और पुण्य-मार्ग का प्रवाह और गहन होगा।

Shlokas

Verse 1

अत-#-#क+ षड्विशो<5ध्याय: श्रीगड़ाजीके माहात्म्यका वर्णन वैशम्पायन उवाच बृहस्पतिसमं बुद्ध्या क्षमया ब्रह्मण: समम्‌ । पराक्रमे शक्रसममादित्यसमतेजसम्‌,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! जो बुद्धिमें बृहस्पतिके, क्षमामें ब्रह्माजीके, पराक्रममें इन्द्रके और तेजमें सूर्यके समान थे, अपनी मर्यादासे कभी च्युत न होनेवाले वे महातेजस्वी गड़ानन्दन भीष्मजी जब अर्जुनके हाथसे मारे जाकर युद्धमें वीरशय्यापर पड़े हुए कालकी बाट जोह रहे थे और भाइयों तथा अन्य लोगोंसहित राजा युधिष्ठिर उनसे तरह- तरहके प्रश्न कर रहे थे, उसी समय बहुत-से दिव्य महर्षि भीष्मजीको देखनेके लिये आये

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຈະນະເມຊະຍະ, ພີສະມະ ບຸດຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ຂອງແມ່ນ້ຳຄົງຄາ (Gaṅgā) ມີປັນຍາດັ່ງພຣະບຣິຫັດສະປະຕິ (Bṛhaspati), ມີຄວາມອົດທົນດັ່ງພຣະບຣະຫມາ (Brahmā), ມີວິລະກຳດັ່ງສັກຣະ (Śakra/Indra), ແລະມີຮັດສະມີດັ່ງພຣະອາທິດ. ທ່ານຜູ້ບໍ່ເຄີຍຫຼຸດອອກຈາກທຳນຽມຂອງຕົນ ໄດ້ຖືກອາຣຈຸນະຍິງລົງ ແລະນອນຢູ່ເທິງຕຽງລູກສອນຂອງວິລະຊົນ ຄອຍຖ້າເວລາທີ່ກຳນົດ. ໃນຂະນະທີ່ພຣະຣາຊາຢຸທິສຖິຣະ ພ້ອມດ້ວຍອ້າຍນ້ອງ ແລະຜູ້ອື່ນໆ ຖາມທ່ານດ້ວຍຄຳຖາມຫຼາຍປະການ, ມີມະຫາຣິສີຜູ້ເປັນເທວະຫຼາຍອົງມາເພື່ອເບິ່ງພີສະມະ»។

Verse 2

गाड़ेयमर्जुनेनाजी निहतं भूरितेजसम्‌ । भ्रातृभि: सहितो<अ्यैश्न पर्यपृच्छद्‌ युधिछ्िर:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! जो बुद्धिमें बृहस्पतिके, क्षमामें ब्रह्माजीके, पराक्रममें इन्द्रके और तेजमें सूर्यके समान थे, अपनी मर्यादासे कभी च्युत न होनेवाले वे महातेजस्वी गड़ानन्दन भीष्मजी जब अर्जुनके हाथसे मारे जाकर युद्धमें वीरशय्यापर पड़े हुए कालकी बाट जोह रहे थे और भाइयों तथा अन्य लोगोंसहित राजा युधिष्ठिर उनसे तरह- तरहके प्रश्न कर रहे थे, उसी समय बहुत-से दिव्य महर्षि भीष्मजीको देखनेके लिये आये

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນສົງຄາມນັ້ນ ພີສະມະຜູ້ສ່ອງສະຫວ່າງ—ບຸດແຫ່ງແມ່ນ້ຳຄັງຄາ ຜູ້ມີລັດສະໝີອັນຍິ່ງ—ຖືກອາຣຊຸນຍິງລົງ. ແລ້ວພຣະຣາຊາຢຸທິສຖິຣະ ພ້ອມດ້ວຍພີ່ນ້ອງ ໄດ້ເຂົ້າໄປໃກ້ ແລະຖາມເລື່ອງຫຼາຍປະການ. (ພາບນີ້ວາງກອບຈັນຍາທຳໃຫ້ກັບຄຳສອນເລື່ອງທັມມະຂອງພີສະມະ ທີ່ຈະກ່າວຈາກຂອບເຂດແຫ່ງຄວາມຕາຍ ຫຼັງຄວາມພິນາດຂອງສົງຄາມ.)

Verse 3

शयानं वीरशयने कालाकाड्'क्षिणमच्युतम्‌ । आज ममुर्भरतश्रेष्ठ द्रष्टकामा महर्षय:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! जो बुद्धिमें बृहस्पतिके, क्षमामें ब्रह्माजीके, पराक्रममें इन्द्रके और तेजमें सूर्यके समान थे, अपनी मर्यादासे कभी च्युत न होनेवाले वे महातेजस्वी गड़ानन्दन भीष्मजी जब अर्जुनके हाथसे मारे जाकर युद्धमें वीरशय्यापर पड़े हुए कालकी बाट जोह रहे थे और भाइयों तथा अन्य लोगोंसहित राजा युधिष्ठिर उनसे तरह- तरहके प्रश्न कर रहे थे, उसी समय बहुत-से दिव्य महर्षि भीष्मजीको देखनेके लिये आये हि. न विन न मु 73

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ຜູ້ປະເສີດໃນວົງສາພາຣະຕະ, ເມື່ອພີສະມະນອນຢູ່ເທິງຕຽງວິລະຊົນອັນເປັນລູກສອນ, ໝັ້ນຄົງ ບໍ່ຫວັ່ນໄຫວ, ຄອຍຖ້າເວລາມໍລະນະທີ່ຖືກກຳນົດ, ມະຫາຣິສີຫຼາຍອົງ—ປາຖະໜາຈະເຫັນທ່ານ—ກໍໄດ້ມາຮອດທີ່ນັ້ນ. ພາບນີ້ສະທ້ອນຄວາມຄອບຄຸມຕົນເອງອັນບໍ່ຫວັ່ນໄຫວຂອງພີສະມະໃນຄວາມທຸກທໍລະມານ ແລະຄວາມເຄົາລົບທີ່ບັນດາດຸລະຊີມີຕໍ່ຊີວິດທີ່ອຸທິດໃຫ້ແກ່ໜ້າທີ່.

Verse 4

अन्रिर्वसिष्ठो5थ भृगुः पुलस्त्य: पुलह:ः क्रतुः । अज्धिरागौतमोडगस्त्य: सुमति: सुयतात्मवान्‌,उनके नाम ये हैं--अत्रि, वसिष्ठ, भृगु, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, अड्िरा, गौतम, अगस्त्य, संयतचित्त सुमति, विश्वामित्र, स्थूलशिरा, संवर्त, प्रमति, दम, बृहस्पति, शुक्राचार्य, व्यास, च्यवन, काश्यप, ध्रुव, दुर्वासा, जमदग्नि, मार्कण्डेय, गालव, भरद्वाज, रैभ्य, यवक्रीत, त्रित, स्थूलाक्ष, शबलाक्ष, कण्व, मेधातिथि, कृश, नारद, पर्वत, सुधन्वा, एकत, नितम्भू, भुवन, धौम्य, शतानन्द, अकृतव्रण, जमदग्निनन्दन परशुराम और कच

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ນີ້ແມ່ນບັນດາດຸລະຊີ—ອະຕຣິ, ວະສິດຖະ, ພຣຶກຸ, ປຸລັສຕະຍະ, ປຸລະຫະ, ກຣະຕຸ, ອັງຄິຣະສ, ໂກຕະມະ, ອະກັສຕະຍະ, ແລະ ສຸມະຕິ ຜູ້ມີຕົນອັນສຳລວມດີ.” ໃນບໍລິບົດ ຂໍ້ນີ້ເປັນການເລີ່ມຕົ້ນບັນຊີລາຍນາມອັນນ່າເຄົາລົບຂອງຣິສີຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ ນຳເສີນພວກທ່ານເປັນແບບຢ່າງແຫ່ງວິໄນ ແລະອຳນາດທາງຈິດວິນຍານ ເພື່ອວາງຖານໃຫ້ຄຳສອນເລື່ອງທັມມະຢູ່ໃນສາຍສືບທີ່ຄວນເຄົາລົບ.

Verse 5

विश्वामित्र: स्थूलशिरा: संवर्त: प्रमतिर्दम: । बृहस्पत्युशनोव्यासाश्ष्यवन: काश्यपो ध्रुव:,उनके नाम ये हैं--अत्रि, वसिष्ठ, भृगु, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, अड्िरा, गौतम, अगस्त्य, संयतचित्त सुमति, विश्वामित्र, स्थूलशिरा, संवर्त, प्रमति, दम, बृहस्पति, शुक्राचार्य, व्यास, च्यवन, काश्यप, ध्रुव, दुर्वासा, जमदग्नि, मार्कण्डेय, गालव, भरद्वाज, रैभ्य, यवक्रीत, त्रित, स्थूलाक्ष, शबलाक्ष, कण्व, मेधातिथि, कृश, नारद, पर्वत, सुधन्वा, एकत, नितम्भू, भुवन, धौम्य, शतानन्द, अकृतव्रण, जमदग्निनन्दन परशुराम और कच प्न्गागाए ए््ग्राक्प्नार्याफ्रसाणक व्याप्त दत्गत्च एन नण्ड्डगाए 05 कि 0 377 “आते %&फस!! )॥| “-< ज।ड्ल 50 छ्ी(84॥( ्त पल 4 54॥&8

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “(ໃນບັນດາຣິສີຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ນັ້ນມີ) ວິສວາມິດຕະຣະ, ສະຖູລະສິຣະ, ສັມວັຣຕະ, ປຣະມະຕິ, ດະມະ, ບຣຶຫັສປະຕິ, ອຸສະນະ (ສຸກຣະ), ວະຍາສະ, ຈະຍະວະນະ, ກາສຍະປະ, ແລະ ທຣຸວະ.” ໃນຕອນນີ້ ມະຫາກາບຍັງຄົງສືບຕໍ່ການລຽນນາມຣິສີຢ່າງເຄົາລົບ—ຜູ້ທີ່ຊີວິດແລະຄຳສອນຖືກຖືວ່າເປັນແບບຢ່າງແຫ່ງຈັນຍາ ແລະແຫຼ່ງທັມມະ—ເພື່ອວາງຄຳສອນຕໍ່ໄປໃຫ້ຢູ່ໃນນ້ຳໜັກຂອງສາຍສືບອັນສັກສິດ.

Verse 6

दुर्वासा जमदन्निश्चव मार्कण्डेयोडथ गालव: । भरद्वाजो<थ रैभ्यक्ष यवक्रीतस्त्रितस्तथा,उनके नाम ये हैं--अत्रि, वसिष्ठ, भृगु, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, अड्िरा, गौतम, अगस्त्य, संयतचित्त सुमति, विश्वामित्र, स्थूलशिरा, संवर्त, प्रमति, दम, बृहस्पति, शुक्राचार्य, व्यास, च्यवन, काश्यप, ध्रुव, दुर्वासा, जमदग्नि, मार्कण्डेय, गालव, भरद्वाज, रैभ्य, यवक्रीत, त्रित, स्थूलाक्ष, शबलाक्ष, कण्व, मेधातिथि, कृश, नारद, पर्वत, सुधन्वा, एकत, नितम्भू, भुवन, धौम्य, शतानन्द, अकृतव्रण, जमदग्निनन्दन परशुराम और कच

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “(ໃນບັນດາຣິສີນັ້ນ) ມີ ດຸຣວາສາ, ຈະມະດັກນິ, ມາຣະກັນເດຍ, ແລະຕໍ່ມາ ກາລະວະ; ພະຣະດວາຈະ ແລະ ໄຣພະຍະ; ຢະວະກຣີຕະ ແລະ ຕຣິຕະ ເຊັ່ນດຽວກັນ.” ໃນຕອນນີ້ ມະຫາກາບຍັງສືບຕໍ່ບັນຊີລາຍນາມຣິສີຢ່າງເຄົາລົບ—ຜູ້ຖືກຈື່ຈຳເນື່ອງຈາກຕະປະ, ຄວາມຮູ້, ແລະອຳນາດທາງຈັນຍາ—ໂດຍນັຍວ່າພວກທ່ານເປັນແບບຢ່າງ ແລະເປັນພະຍານແຫ່ງທັມມະ ທີ່ຊີວິດແລະຄຳສອນນຳທາງການປະພຶດທີ່ຖືກຕ້ອງ.

Verse 7

स्थूलाक्ष: शबलाक्षश्न कण्वो मेधातिथि: कृश: । नारद: पर्वतश्चैव सुधन्वाथैकतो द्विज:,उनके नाम ये हैं--अत्रि, वसिष्ठ, भृगु, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, अड्िरा, गौतम, अगस्त्य, संयतचित्त सुमति, विश्वामित्र, स्थूलशिरा, संवर्त, प्रमति, दम, बृहस्पति, शुक्राचार्य, व्यास, च्यवन, काश्यप, ध्रुव, दुर्वासा, जमदग्नि, मार्कण्डेय, गालव, भरद्वाज, रैभ्य, यवक्रीत, त्रित, स्थूलाक्ष, शबलाक्ष, कण्व, मेधातिथि, कृश, नारद, पर्वत, सुधन्वा, एकत, नितम्भू, भुवन, धौम्य, शतानन्द, अकृतव्रण, जमदग्निनन्दन परशुराम और कच

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນບັນດາລະສີເຫຼົ່ານັ້ນ ມີ ສະຖູລາກສະ, ສະບະລາກສະ, ກັນວະ, ເມທາຕິຖິ, ແລະ ກຣິສະ; ທັງຍັງມີ ນາຣະດະ ແລະ ປະຣະວະຕະ ພ້ອມດ້ວຍ ສຸທັນວາ ແລະ ພຣາຫມະນ ເອກະຕະ»។ ຕອນນີ້ ມະຫາກາບຍະສືບຕໍ່ລຽນນາມລະສີຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ດ້ວຍຄວາມເຄົາລົບ—ຜູ້ຝຶກຕະປະສະຍາ ແລະ ຮັກສາຄວາມຮູ້ສັກສິດ ຜູ້ສືບທອດທັມມະ—ເພື່ອຊີ້ວ່າ ອໍານາດທາງສິນທຳໃນ «ມະຫາພາຣະຕະ» ຕັ້ງຢູ່ເທິງຄໍາພະຍານ ແລະ ການປະຈັກຂອງນັກເຫັນຄວາມຈິງ.

Verse 8

नितम्भूरभुवनो धौम्य: शतानन्दो5कृतव्रण: । जामदग्न्यस्तथा राम: कचश्चेत्येवमादय:,उनके नाम ये हैं--अत्रि, वसिष्ठ, भृगु, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, अड्िरा, गौतम, अगस्त्य, संयतचित्त सुमति, विश्वामित्र, स्थूलशिरा, संवर्त, प्रमति, दम, बृहस्पति, शुक्राचार्य, व्यास, च्यवन, काश्यप, ध्रुव, दुर्वासा, जमदग्नि, मार्कण्डेय, गालव, भरद्वाज, रैभ्य, यवक्रीत, त्रित, स्थूलाक्ष, शबलाक्ष, कण्व, मेधातिथि, कृश, नारद, पर्वत, सुधन्वा, एकत, नितम्भू, भुवन, धौम्य, शतानन्द, अकृतव्रण, जमदग्निनन्दन परशुराम और कच

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «(ໃນບັນດາລະສີເຫຼົ່ານັ້ນ) ມີ ນິຕັມພູ, ພູວະນະ, ທໍາມະຍະ, ສະຕານັນດະ, ອະກຣິຕະວຣະນະ, ແລະ ຣາມະ ຜູ້ເປັນລູກຫຼານຂອງ ຈາມະດັກນິ (ປະຣະຊຸຣາມະ); ທັງຍັງມີ ກະຈະ—ພ້ອມອື່ນໆອີກຫຼາຍ»។ ໃນບົດບາດຂອງເລື່ອງ ຂໍ້ຄວາມນີ້ເປັນການລຽນນາມດ້ວຍຄວາມເຄົາລົບຂອງລະສີຜູ້ຄວນບູຊາ ຜູ້ມີອໍານາດແລະການປະຈັກທີ່ຊໍາລະການສົນທະນາເລື່ອງທັມມະ ແລະເຕືອນວ່າ ຄໍາສອນດ້ານຈັນຍາບັນຕັ້ງຢູ່ເທິງຕະປະສະຍາ ຄວາມຮູ້ ແລະຄວາມສໍາລວມຂອງນັກເຫັນຄວາມຈິງ.

Verse 9

समागता महात्मानो भीष्म द्रष्टे महर्षय: । तेषां महात्मनां पूजामागतानां युधिष्ठिर:

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ບັນດາມະຫາລະສີຜູ້ມີໃຈຍິ່ງໃຫຍ່ ໄດ້ມາຊຸມນຸມກັນຢູ່ທີ່ນັ້ນ ເພື່ອເບິ່ງ ພີສະມະ. ຢຸທິສຖິຣະ ຜູ້ລະລຶກຖືທັມມະ ແລະ ມາລະຍາດອັນຄວນ ໄດ້ອອກໄປເພື່ອບູຊາ ແລະ ໃຫ້ກຽດແກ່ທ່ານຜູ້ສູງສົ່ງເຫຼົ່ານັ້ນທີ່ມາຮອດ.

Verse 10

ते पूजिता: सुखासीना: कथाश्षक्रुर्महर्षय:

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອໄດ້ຮັບການບູຊາຢ່າງສົມຄວນແລ້ວ ບັນດາມະຫາລະສີກໍນັ່ງຢູ່ດ້ວຍຄວາມສະບາຍ ແລະ ເລີ່ມສົນທະນາກັນ.

Verse 11

भीष्मस्तेषां कथा: श्रुत्वा ऋषीणां भावितात्मनाम्‌

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອ ພີສະມະ ໄດ້ຟັງເລື່ອງລາວທີ່ລະສີເຫຼົ່ານັ້ນ—ຜູ້ມີໃຈຝຶກຝົນ ແລະ ບໍລິສຸດ—ໄດ້ເລົ່າຂຶ້ນ ທ່ານກໍຮັບເອົາຖ້ອຍຄໍານັ້ນເປັນຄໍາຊີ້ນໍາອັນໜັກແນ່ນ ສໍາລັບການປະພຶດທີ່ຖືກທັມມະ.

Verse 12

ततस्ते भीष्ममामन्त्रय पाण्डवांश्व महर्षय:

ຈາກນັ້ນ ບັນດາລະສີຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ເຫຼົ່ານັ້ນ ໄດ້ເຂົ້າໄປກ່າວຄໍາຄາລະວະແດ່ ພີສະມະ ດ້ວຍຄວາມເຄົາລົບ ແລະກໍໄດ້ກ່າວແດ່ ພານດະວະ ທັງຫຼາຍດ້ວຍ—ເປັນເຄື່ອງຊີ້ວ່າກໍາລັງປ່ຽນຕອນຂອງການສົນທະນາ ເມື່ອຜູ້ເຖົ້າແລະຜູ້ເຫັນທໍາ ຂໍຄວາມຍິນຍອມ ແລະຄວາມໃສ່ໃຈ ກ່ອນຈະສືບຕໍ່ຄໍາຊີ້ນໍາອັນຕັ້ງຢູ່ເທິງທໍາມະ.

Verse 13

तानृषीन्‌ सुमहाभागानन्तर्धानगतानपि

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ແມ່ນແຕ່ບັນດາລະສີຜູ້ມີສິຣິມົງຄຸນຢ່າງຍິ່ງ—ເຖິງແມ່ນພວກທ່ານຈະຖອນຕົວອອກຈາກສາຍຕາ ແລະເຂົ້າສູ່ຄວາມລີ້ລັບມອງບໍ່ເຫັນແລ້ວກໍຕາມ—ກໍຍັງຖືກກ່າວເຖິງ/ນໍາມາຄິດຄໍານຶງຢູ່».

Verse 14

पाण्डवास्तुष्टवुः सर्वे प्रणेमुश्न मुहुर्मुहुः । उन महाभाग मुनियोंके अदृश्य हो जानेपर भी समस्त पाण्डव बारंबार उनकी स्तुति और उन्हें प्रणाम करते रहे ।। १३ $ ।। प्रसन्नमनस: सर्वे गाज़ेयं कुरुसत्तमम्‌

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ພານດະວະທັງຫມົດ ດ້ວຍໃຈອັນເຄົາລົບ ໄດ້ສັນລະເສີນບັນດາລະສີຜູ້ມີຈິດໃຫຍ່ເຫຼົ່ານັ້ນ ແລະກໍກົ້ມກາບນົບນ້ອມຊໍ້າໆ. ແມ່ນແຕ່ຫຼັງຈາກນັກບໍາເພັນຕະປະອັນຮຸ່ງເຮືອງເຫຼົ່ານັ້ນຫາຍໄປຈາກສາຍຕາແລ້ວ ພານດະວະກໍຍັງສືບຕໍ່ການນົບນ້ອມ—ຊີ້ໃຫ້ເຫັນວ່າ ການໃຫ້ກຽດຢ່າງແທ້ຈິງ ບໍ່ໄດ້ພຶງພາການປາກົດຕົວທາງກາຍ ແຕ່ພຶງພາຄວາມກະຕັນຍູ ແລະຄວາມຖ່ອມຕົນຕາມທໍາມະ.

Verse 15

प्रभावात्‌ तपसस्तेषामृषीणां वीक्ष्य पाण्डवा:

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອເຫັນລັດສະໝີອັນເກີດຈາກຕະປະຂອງບັນດາລະສີເຫຼົ່ານັ້ນ ພານດະວະກໍຢືນຢູ່ດ້ວຍຄວາມເຄົາລົບ ແລະໃສ່ໃຈຟັງ ໂດຍຮັບຮູ້ອໍານາດທາງຄຸນທໍາ ແລະພະລັງທາງຈິດວິນຍານ ທີ່ການຂັດເກົາຕົນຢ່າງມີວິໄນນໍາມາ.

Verse 16

महाभाग्यं पर॑ं तेषामृषीणामनुचिन्त्य ते । पाण्डवा: सह भीष्मेण कथाश्षक्रुस्तदाश्रया:,उन महर्षियोंके महान्‌ सौभाग्यका चिन्तन करके पाण्डव भीष्मजीके साथ उन्हींके सम्बन्धमें बातें करने लगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອຄິດຄໍານຶງເຖິງສິຣິມົງຄຸນອັນສູງສຸດຂອງບັນດາລະສີເຫຼົ່ານັ້ນ ພານດະວະທັງຫຼາຍ ພ້ອມກັບ ພີສະມະ ໄດ້ເລີ່ມສົນທະນາເຖິງເລື່ອງລາວ ແລະປະເດັນທີ່ເກີ່ຍວພັນກັບພວກທ່ານ ໂດຍຍຶດເອົາຫົວຂໍ້ນັ້ນເປັນຖານ.

Verse 17

वैशम्पायन उवाच कथान्ते शिरसा पादौ स्पृष्टवा भीष्मस्य पाण्डव: । धर्म्य धर्मसुतः प्रश्न॑ पर्यपृच्छद्‌ युधिष्ठिर:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! बातचीतके अन्तमें भीष्मके चरणोंमें सिर रखकर धर्मपुत्र पाण्डुनन्दन युधिष्ठिरने यह धर्मानुकूल प्रश्न पूछा--

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະຣາຊາ ຈະນະເມຊະຍະ! ເມື່ອການສົນທະນາສິ້ນສຸດ ພຣະຍຸທິສຖິຣະ ບຸດແຫ່ງປານດຸ ແລະ ບຸດແຫ່ງທັມມະ ໄດ້ນໍາສີສະໄປແຕະພຣະບາດຂອງພຣະພີສະມະ ແລ້ວຖາມຄໍາຖາມອັນສົມຄວນຕາມທັມມະນີ້»។

Verse 18

युधिछ्िर उवाच के देशा: के जनपदा आश्रमा: के च पर्वता: । प्रकृष्टा: पुण्यत: काश्न ज्ञेया नद्य: पितामह,युधिष्ठिर बोले--पितामह! कौन-से देश, कौन-से प्रान्त, कौन-कौन आश्रम, कौन-से पर्वत और कौन-कौन-सी नदियाँ पुण्यकी दृष्टिसे सर्वश्रेष्ठ समझने योग्य हैं?

ພຣະຍຸທິສຖິຣະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະອາຈານຜູ້ເຖົ້າ (ປິຕາມະຫະ)! ປະເທດໃດ ແຂວງໃດ ອາສຣົມໃດ ພູໃດ ແລະ ແມ່ນ້ໍາໃດ ຄວນຮູ້ວ່າເປັນຍອດເຢັ້ນທີ່ສຸດຕາມທາງແຫ່ງບຸນ? ແລະດ້ວຍເຫດອັນໃດຈຶ່ງຖືກນັບວ່າສັກສິດເປັນພິເສດ?»

Verse 19

भीष्म उवाच अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्‌ । शिलोज्छवृत्ते: संवादं सिद्धस्य च युधिष्ठिर,भीष्मजीने कहा--युधिष्ठिर! इस विषयमें शिलोज्छवृत्तिसे जीविका चलानेवाले एक पुरुषका किसी सिद्ध पुरुषके साथ जो संवाद हुआ था, वह प्राचीन इतिहास सुनो

ພຣະພີສະມະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຍຸທິສຖິຣະ! ໃນເລື່ອງນີ້ກໍມີຕົວຢ່າງຈາກປະຫວັດເກົ່າແກ່. ຈົ່ງຟັງເລື່ອງເກົ່ານັ້ນ—ບົດສົນທະນາລະຫວ່າງຊາຍຜູ້ດໍາລົງຊີວິດດ້ວຍການເກັບເມັດຂ້າວທີ່ຕົກຫຼົ່ນ (śiloccavṛtti) ແລະ ນັກບຸນຜູ້ສໍາເລັດ (ສິດທະ)»។

Verse 20

इमां कक्ित्‌ परिक्रम्य पृथिवीं शैलभूषणाम्‌ । असकृद ड्विपदां श्रेष्ठ: श्रेष्टस्य गृहमेधिन:,मनुष्योंमें श्रेष्ठ कोई सिद्ध पुरुष शैलमालाओंसे अलंकृत इस समूची पृथ्वीकी अनेक बार परिक्रमा करनेके पश्चात्‌ शिलोज्छवृत्तिसे जीविका चलानेवाले एक श्रेष्ठ गृहस्थके घर गया। उस गृहस्थने उसकी विधिपूर्वक पूजा की। वह समागत ऋषि वहाँ बड़े सुखसे रातभर रहा। उसके मुखपर प्रसन्नता छा रही थी 5॥ ता ध ] गा 5त

ພຣະພີສະມະ ກ່າວວ່າ: «ເມື່ອໄດ້ເດີນວຽນຮອບພິພົບນີ້ອັນປະດັບດ້ວຍແນວພູເຂົາ ຊໍ້າແລ້ວຊໍ້າອີກ ຊາຍຜູ້ສໍາເລັດການ (ສິດທະ) ຜູ້ເປັນຍອດໃນຫມູ່ມະນຸດ ໄດ້ໄປຮອດເຮືອນຂອງຄົນເຮືອນຜູ້ດີເລີດ. ຄົນເຮືອນນັ້ນໄດ້ບູຊາຕ້ອນຮັບຕາມພິທີອັນຖືກຕ້ອງ. ນັກບຸນຜູ້ມາເຖິງໄດ້ພັກຄ້າງຄືນຢູ່ນັ້ນດ້ວຍຄວາມສຸກສະບາຍ ໃບໜ້າເຕັມໄປດ້ວຍຄວາມພໍໃຈ—ເປັນຄວາມຍິນດີສງົບທີ່ເກີດຈາກການຕ້ອນຮັບຕາມທັມມະ»។

Verse 21

शिलवृत्तेगहं प्राप्त: स तेन विधिनार्चित: । उवास रजनी तत्र सुमुख: सुखभागृषि:,मनुष्योंमें श्रेष्ठ कोई सिद्ध पुरुष शैलमालाओंसे अलंकृत इस समूची पृथ्वीकी अनेक बार परिक्रमा करनेके पश्चात्‌ शिलोज्छवृत्तिसे जीविका चलानेवाले एक श्रेष्ठ गृहस्थके घर गया। उस गृहस्थने उसकी विधिपूर्वक पूजा की। वह समागत ऋषि वहाँ बड़े सुखसे रातभर रहा। उसके मुखपर प्रसन्नता छा रही थी

ພຣະພີສະມະ ກ່າວວ່າ: «ເມື່ອໄດ້ໄປຮອດເຮືອນຂອງຄົນເຮືອນຜູ້ດໍາລົງຊີວິດດ້ວຍວິນັຍອັນເຂັ້ມງວດ ໂດຍການເກັບເມັດຂ້າວທີ່ຕົກຫຼົ່ນ (śiloccavṛtti) ນັກບຸນຜູ້ສໍາເລັດນັ້ນຖືກບູຊາຕ້ອນຮັບຕາມພິທີ. ແລ້ວທ່ານໄດ້ພັກຄ້າງຄືນຢູ່ນັ້ນດ້ວຍຄວາມສຸກສະບາຍ; ໃບໜ້າສງົບ ແລະ ຍິນດີ—ສະແດງຄວາມພໍໃຈທີ່ເກີດຈາກການຕ້ອນຮັບຕາມທັມມະ»។

Verse 22

शिलवृत्तिस्तु यत्‌ कृत्यं प्रातस्तत्‌ कृतवान्‌ शुचि: । कृतकृत्यमुपातिष्ठत्‌ सिद्ध तमतिथिं तदा,सबेरा होनेपर वह शिलवृत्तिवाला गृहस्थ स्नान आदिसे पवित्र होकर प्रातः:कालीन नित्यकर्ममें लग गया। नित्यकर्म पूर्ण करके वह उस सिद्ध अतिथिकी सेवामें उपस्थित हुआ। इसी बीचमें अतिथिने भी प्रातःकालके स्नान-पूजन आदि आवश्यक कृत्य पूर्ण कर लिये थे

ພີດສະມະກ່າວວ່າ: ເມື່ອຟ້າສາງ ຄະຫັດຜູ້ມີວິໄນໃນການປະພຶດ ໄດ້ຊໍາລະກາຍໃຈໃຫ້ບໍລິສຸດ ແລ້ວປະຕິບັດກິດວັດຕະປະຈໍາເຊົ້າຕາມທີ່ຄວນເຮັດ. ເມື່ອສໍາເລັດວັດຕະປະຈໍາວັນແລ້ວ ລາວກໍຢືນພ້ອມເພື່ອຮັບໃຊ້ແຂກຜູ້ສໍາເລັດ (ສິດທະ) — ຊຶ່ງໃນຂະນະນັ້ນແຂກກໍໄດ້ສໍາເລັດພິທີເຊົ້າອັນຈໍາເປັນ ເຊັ່ນ ອາບນ້ໍາ ແລະ ບູຊາ ແລ້ວເຊັ່ນກັນ.

Verse 23

तौ समेत्य महात्मानौ सुखासीनौ कथा: शुभा: । चक्रतुर्वेदसम्बद्धास्तच्छेषकृतलक्षणा:,वे दोनों महात्मा एक-दूसरेसे मिलकर सुखपूर्वक बैठे तथा वेदोंसे सम्बद्ध और वेदान्तसे उपलक्षित शुभ चर्चाएँ करने लगे

ມະຫາວິນຍານທັງສອງນັ້ນໄດ້ພົບກັນ ແລ້ວນັ່ງຢ່າງສະບາຍ ແລະເລີ່ມສົນທະນາອັນເປັນມົງຄຸນ—ເປັນຖ້ອຍຄໍາທີ່ອີງຢູ່ໃນເວດ ແລະມີເວດານຕະເປັນເນື້ອຫາສຸດທ້າຍກໍາກັບ.

Verse 24

शिलवृत्ति: कथान्ते तु सिद्धमामन्त्रय यत्नत: । प्रश्न॑ पप्रच्छ मेधावी यन्मां त्वं परिपृच्छसि,बातचीत पूरी होनेपर शिलोउ्छवृत्तिवाले बुद्धिमान्‌ गृहस्थ ब्राह्मणने सिद्धको सम्बोधित करके यत्नपूर्वक वही प्रश्न पूछा, जो तुम मुझसे पूछ रहे हो

ພີດສະມະກ່າວວ່າ: ເມື່ອການສົນທະນາສິ້ນສຸດ ພຣາຫມັນຄະຫັດຜູ້ສະຫຼາດ—ຜູ້ດໍາລົງຊີວິດດ້ວຍການເກັບເກືອບ (ຊິລະວຶດຕິ)—ໄດ້ເອີ້ນສິດທະດ້ວຍຄວາມລະມັດລະວັງ ແລ້ວຖາມຄໍາຖາມດຽວກັນນັ້ນ ທີ່ເຈົ້າກໍາລັງຖາມຂ້ອຍຢູ່ໃນບັດນີ້.

Verse 25

शिलवृत्तिस्वाच के देश:के जनपदा: के55श्रमा: के च पर्वता: । प्रकृष्टा: पुण्यत: काश्न ज्ञेया नद्यस्तदुच्यताम्‌,शिलवृत्तिवाले ब्राह्मणने पूछा--ब्रह्म! कौन-से देश, कौन-से जनपद, कौन-कौन आश्रम, कौन-से पर्वत और कौन-कौन-सी नदियाँ पुण्यकी दृष्टिसे सर्वश्रेष्ठ समझनेयोग्य हैं? यह बतानेकी कृपा करें

ພຣາຫມັນຜູ້ດໍາລົງຊີວິດດ້ວຍຊິລະວຶດຕິ ຖາມວ່າ: “ໂອ ພຣາຫມັນ! ດິນແດນໃດ, ເມືອງແຄວ້ນໃດ, ອາສຣົມໃດ, ພູເຂົາໃດ, ແລະ ແມ່ນ້ໍາໃດ ຄວນຖືວ່າເປັນສູງສຸດໃນດ້ານບຸນກຸສົນ? ຂໍໃຫ້ທ່ານເມດຕາບອກຂ້ອຍ.”

Verse 26

सिद्ध उवाच ते देशास्ते जनपदास्ते5<श्रमास्ते च पर्वता: । येषां भागीरथी गड्ा मध्येनैति सरिद्वरा,सिद्धने कहा--ब्रह्मन्‌! वे ही देश, जनपद, आश्रम और पर्वत पुण्यकी दृष्टिसे सर्वश्रेष्ठ हैं, जिनके बीचसे होकर सरिताओंमें उत्तम भागीरथी गड़ा बहती हैं इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि गज्भामाहात्म्यक थने षड्विंशो5ध्याय:

ສິດທະກ່າວວ່າ: “ໂອ ພຣາຫມັນ! ດິນແດນເຫຼົ່ານັ້ນ, ເມືອງແຄວ້ນເຫຼົ່ານັ້ນ, ອາສຣົມເຫຼົ່ານັ້ນ, ແລະ ພູເຂົາເຫຼົ່ານັ້ນ ແມ່ນມີບຸນສູງສຸດ—ເປັນມົງຄຸນຢ່າງຍິ່ງ—ທີ່ກາງຂອງມັນມີແມ່ນ້ໍາພາຄີຣະທີ ຄື ຄົງຄາ ອັນເປັນເລີດໃນບັນດາແມ່ນ້ໍາ ໄຫຼຜ່ານ.”

Verse 27

/८-] __ 200+“7:. 5 फ्ड्लि कक तपसा ब्रह्मचर्येण यज्ञैस्त्यागेन वा पुन: । गतिं तां न लभेज्जन्तुर्गज्भां संसेव्य यां लभेत्‌,गड़ाजीका सेवन करनेसे जीव जिस उत्तम गतिको प्राप्त करता है उसे वह तपस्या, ब्रह्मचर्य, यज्ञ अथवा त्यागसे भी नहीं पा सकता

ສັດມີຊີວິດບໍ່ອາດບັນລຸຈຸດໝາຍອັນສູງສຸດນັ້ນໄດ້ ໂດຍຕະປະສະຍາ, ໂດຍພຣະຫມະຈັນຍາ, ໂດຍພິທີຍັດ, ຫຼືແມ່ນແຕ່ໂດຍການສະຫຼະ. ສະພາບອັນສູງສົ່ງນັ້ນ ບັນລຸໄດ້ໂດຍການເຂົ້າພຶ່ງພາ ແລະສະໝັກສະໝອງຕໍ່ແມ່ນ້ຳຄົງຄາ (Gaṅgā) ດ້ວຍຄວາມເຊື່ອສັດທາ.

Verse 28

स्पृष्टानि येषां गाड़ेयैस्तोयैर्गात्राणि देहिनाम्‌ न्यस्तानि न पुनस्तेषां त्याग: स्वर्गाद्‌ विधीयते,जिन देहधारियोंके शरीर गड्ाजीके जलसे भीगते हैं अथवा मरनेपर जिनकी हडियाँ गंगाजीमें डाली जाती हैं वे कभी स्वर्गसे नीचे नहीं गिरते

ສິດທະກ່າວວ່າ: ບັນດາຜູ້ມີກາຍທີ່ອວັຍວະຖືກຕ້ອງໂດຍນ້ຳແຫ່ງແມ່ນ້ຳຄົງຄາ (Gaṅgā) ຫຼືຜູ້ທີ່ເມື່ອຕາຍແລ້ວໄດ້ນຳກະດູກໄປຝາກໄວ້ໃນຄົງຄາ—ຜູ້ນັ້ນຈະບໍ່ຕົກຈາກສະຫວັນອີກເລີຍ.

Verse 29

सर्वाणि येषां गाड़ेयैस्तोयै: कार्याणि देहिनाम्‌ । गां त्यक्त्वा मानवा विप्र दिवि तिष्ठन्ति ते जना:,विप्रवर! जिन देहधारियोंके सम्पूर्ण कार्य गड़ाजलसे ही सम्पन्न होते हैं वे मानव मरनेके बाद पृथ्वीका निवास छोड़कर स्वर्गमें विराजमान होते हैं

ສິດທະກ່າວວ່າ: “ໂອ ພຣາຫມະນະ, ມະນຸດທີ່ກິດທຸກຢ່າງແຫ່ງຊີວິດອັນມີກາຍ ສຳເລັດດ້ວຍນ້ຳຄົງຄາ—ເມື່ອຕາຍແລ້ວລະທິ້ງແຜ່ນດິນ—ຜູ້ນັ້ນຢູ່ສະຫວັນ.”

Verse 30

पूर्वे वयसि कर्माणि कृत्वा पापानि ये नरा: । पश्चात्‌ गड्ां निषेवन्ते तेडपि यान्त्युत्तमां गतिम्‌,जो मनुष्य जीवनकी पहली अवस्थामें पापकर्म करके भी पीछे गड़ाजीका सेवन करने लगते हैं वे भी उत्तम गतिको ही प्राप्त होते हैं

ສິດທະກ່າວວ່າ: ຜູ້ໃດໃນວັຍແຕ່ກ່ອນໄດ້ເຮັດກຳຊົ່ວ, ແຕ່ພາຍຫຼັງຫັນມາປະພຶດການພຶ່ງພາ ແລະນຳໃຊ້ນ້ຳຄົງຄາ (Gaṅgā), ແມ່ນແຕ່ຜູ້ນັ້ນກໍຍັງໄປຮອດຄະຕິອັນສູງສຸດ.

Verse 31

स्‍्नातानां शुचिभिस्तोयैर्गाज़ियै: प्रयतात्मनाम्‌ । व्युष्टिर्भवति या पुंसां न सा क्रतुशतैरपि,गड़ाजीके पवित्र जलसे स्नान करके जिनका अन्तःकरण शुद्ध हो गया है उन पुरुषोंके पुण्यकी जैसी वृद्धि होती है; वैसी सैकड़ों यज्ञ करनेसे भी नहीं हो सकती

ສິດທະກ່າວວ່າ: ສຳລັບບຸລຸດຜູ້ມີວິໄນ ຜູ້ອາບນ້ຳໃນນ້ຳອັນບໍລິສຸດແຫ່ງແມ່ນ້ຳຄົງຄາ (Gaṅgā) ແລະຊຳລະໃຈພາຍໃນໃຫ້ບໍລິສຸດ—ຄວາມເພີ່ມພູນແຫ່ງບຸນທີ່ເກີດຂຶ້ນນັ້ນ ບໍ່ອາດບັນລຸໄດ້ແມ່ນແຕ່ດ້ວຍການປະກອບຍັດຮ້ອຍຄັ້ງ.

Verse 32

यावदस्थि मनुष्यस्य गड्ातोयेषु तिष्ठतति । तावद्वर्षसहस्त्राणि स्वर्गलोके महीयते,मनुष्यकी हड्डी जितने समयतक गड्ाजीके जलमें पड़ी रहती है, उतने हजार वर्षोंतक वह स्वर्गलोकमें प्रतिष्ठित होता है

ພຣະສິດທາໄດ້ປະກາດວ່າ: ຕາບໃດທີ່ກະດູກຂອງມະນຸດຍັງຄົງຢູ່ໃນນ້ຳແມ່ນ້ຳຄົງຄາ, ຕາມເວລານັ້ນເທົ່າໃດ ຜູ້ນັ້ນຈະຖືກຍົກຍ້ອງໃນສະຫວັນເປັນພັນໆປີ.

Verse 33

अपहत्य तमस्तीव्रं यथा भात्युदये रवि: । तथापहत्य पाप्मानं भाति गड़ाजलोक्षित:,जैसे सूर्य उदयकालमें घने अन्धकारको विदीर्ण करके प्रकाशित होते हैं, उसी प्रकार गड़ाजलमें स्नान करनेवाला पुरुष अपने पापोंको नष्ट करके सुशोभित होता है

ເຫມືອນດວງອາທິດໃນຍາມຮຸ່ງ ສ່ອງສະຫວ່າງຫຼັງຈາກຂັບໄລ່ຄວາມມືດໜາທຶບ, ສັນນັ້ນແຫຼະ ຜູ້ທີ່ອາບນ້ຳໃນນ້ຳກະດາ (Gaḍā) ຈະສ່ອງສະຫວ່າງຫຼັງຈາກທຳລາຍບາບຂອງຕົນ.

Verse 34

विसोमा इव शर्वर्यों विपुष्पास्तरवो यथा । तद्धद्‌ देशा दिशश्वैव हीना गज्भाजलै: शिवै:,जैसे बिना चाँदनीकी रात और बिना फूलोंके वृक्ष शोभा नहीं पाते, उसी प्रकार गड़ाजीके कल्याणमय जलसे वज्चित हुए देश और दिशाएँ भी शोभा एवं सौभाग्य हीन हैं

ເຫມືອນຄືນທີ່ບໍ່ມີແສງຈັນ ແລະເຫມືອນຕົ້ນໄມ້ທີ່ບໍ່ມີດອກ ບໍ່ອາດງາມໄດ້, ສັນນັ້ນແຫຼະ ດິນແດນແລະທິດທາງທີ່ຂາດນ້ຳກະດາອັນເປັນມົງຄຸນ ກໍຂາດຄວາມງາມ ແລະສິຣິມົງຄຸນ.

Verse 35

वर्णाश्रमा यथा सर्वे धर्मज्ञानविवर्जिता: । क्रतवश्चन॒ यथासोमास्तथा गड़ां विना जगत्‌,जैसे धर्म और ज्ञानसे रहित होनेपर सम्पूर्ण वर्णों और आश्रमोंकी शोभा नहीं होती है तथा जैसे सोमरसके बिना यज्ञ सुशोभित नहीं होते, उसी प्रकार गड़ाके बिना जगत्‌की शोभा नहीं है

ເຫມືອນວັນນະແລະອາສຣົມທັງປວງ ເມື່ອຂາດທັມມະແລະປັນຍາ ກໍບໍ່ມີຄວາມສົງ່າ, ແລະເຫມືອນພິທີບູຊາ (ຍັດ) ເມື່ອຂາດນ້ຳໂສມະ ກໍບໍ່ຮຸ່ງເຮືອງ, ສັນນັ້ນແຫຼະ ໂລກນີ້ເມື່ອຂາດກະດາ (Gaḍā) ກໍບໍ່ມີຄວາມງາມ.

Verse 36

यथा हीन॑ नभो<र्केण भू:शैलै: खं च वायुना । तथा देशा दिशश्वैव गड़ाहीना न संशय:,जैसे सूर्यके बिना आकाश, पर्वतोंके बिना पृथ्वी और वायुके बिना अन्तरिक्षकी शोभा नहीं होती, उसी प्रकार जो देश और दिशाएँ गड़ाजीसे रहित हैं उनकी भी शोभा नहीं होती --इसमें संशय नहीं है

ເຫມືອນຟ້າທີ່ຂາດດວງອາທິດ ບໍ່ມີຄວາມສົງ່າ, ເຫມືອນແຜ່ນດິນທີ່ຂາດພູເຂົາ ບໍ່ມີຄວາມງາມ, ແລະເຫມືອນອາກາດທີ່ຂາດລົມ ບໍ່ມີຊີວິດຊີວາ; ສັນນັ້ນແຫຼະ ດິນແດນແລະທິດທາງທີ່ຂາດກະດາ (Gaḍā) ກໍຂາດຄວາມສົງ່າ—ບໍ່ມີຂໍ້ສົງໄສ.

Verse 37

त्रिषु लोकेषु ये केचित्‌ प्राणिन: सर्व एव ते । तर्प्पमाणा: परां तृप्तिं यान्ति गज़ाजलै: शुभै:,तीनों लोकोंमें जो कोई भी प्राणी हैं, उन सबका गड़ाजीके शुभ जलसे तर्पण करनेपर वे सब परम तृप्ति लाभ करते हैं

ພຣະສິດທະໄດ້ກ່າວວ່າ: «ສັດມີຊີວິດທັງຫມົດທີ່ມີຢູ່ໃນໂລກທັງສາມ—ທຸກຕົວ—ເມື່ອໄດ້ຮັບການທຳຕັຣປະນະ (ການຖວາຍນ້ຳ) ດ້ວຍນ້ຳອັນເປັນມົງຄຸນທີ່ກ່ຽວກັບຊ້າງ ກໍຈະເຖິງຄວາມອິ່ມໃຈສູງສຸດ».

Verse 38

यस्तु सूर्येण निष्टप्तं गाड़ेयं पिबते जलम्‌ । गवां निहरिनिर्मुक्तादू यावकात्‌ तद्‌ विशिष्यते,जो मनुष्य सूर्यकी किरणोंसे तपे हुए गड़ाजलका पान करता है, उसका वह जलपान गायके गोबरसे निकले हुए जौकी लप्सी खानेसे अधिक पवित्रकारक है

ພຣະສິດທະກ່າວວ່າ: «ຜູ້ໃດດື່ມນ້ຳທີ່ຖືກແດດເຜົາໃຫ້ອຸ່ນ—ນ້ຳທີ່ຕັກມາຈາກແຫຼ່ງນ້ຳລຶກແລະໝັ້ນຄົງ—ຜູ້ນັ້ນໄດ້ຄວາມບໍລິສຸດຍິ່ງກວ່າການກິນໂຈກຂ້າວບາເລທີ່ເຮັດຈາກເມັດທີ່ຄັດອອກຈາກຂີ້ງົວ».

Verse 39

इन्दुब्रतसहस्र॑ तु यश्चरेत्‌ कायशोधनम्‌ । पिबेद्‌ यश्चापि गज्भाम्भ: समौ स्यातां न वा समौ,जो शरीरको शुद्ध करनेवाले एक सहस्र चान्द्रायण व्रतोंका अनुष्ठान करता है और जो केवल गड़ाजल पीता है, वे दोनों समान ही हैं अथवा यह भी हो सकता है कि दोनों समान नहों (गड़ाजल पीनेवाला बढ़ जाय)

ພຣະສິດທະກ່າວວ່າ: «ຄົນໜຶ່ງອາດປະພຶດວຣະຕະຈັນທຣາຍະນະ (Cāndrāyaṇa) ເພື່ອຊຳລະກາຍເຖິງພັນຄັ້ງ; ອີກຄົນໜຶ່ງພຽງແຕ່ດື່ມນ້ຳຄົງຄາ. ທັງສອງອາດຖືກນັບວ່າເທົ່າກັນ—ຫຼືອາດບໍ່ເທົ່າກັນກໍໄດ້, ໂດຍການດື່ມນ້ຳຄົງຄາອາດຈະເຫນືອກວ່າ».

Verse 40

तिछेद्‌ युगसहस्न॑ तु पदेनैकेन यः पुमान्‌ । मासमेकं तु गज्जायां समौ स्यातां न वा समौ,जो पुरुष एक हजार युगोंतक एक पैरसे खड़ा होकर तपस्या करता है और जो एक मासतक गड़ातटपर निवास करता है, वे दोनों समान हो सकते हैं अथवा यह भी सम्भव है कि समान न हों

ພຣະສິດທະກ່າວວ່າ: «ຊາຍຄົນໜຶ່ງອາດຢືນຂາດຽວບຳເນັດຕະປະສະຍາເຖິງພັນຍຸກ; ອີກຄົນໜຶ່ງພຽງແຕ່ຢູ່ອາໄສໜຶ່ງເດືອນຢູ່ຝັ່ງນ້ຳຄົງຄາ. ທັງສອງອາດຈະເທົ່າກັນໃນບຸນກຳ—ຫຼືອາດບໍ່ເທົ່າກັນ».

Verse 41

लंबते5वाक्‌शिरा यस्तु युगानामयुतं पुमान्‌ । तिष्ठेद्‌ यथेष्टं यश्चापि गड़ायां स विशिष्यते,जो मनुष्य दस हजार युगोंतक नीचे सिर करके वृक्षमें लटका रहे और जो इच्छानुसार गड़ाजीके तटपर निवास करे, उन दोनोंमें गड़ाजीपर निवास करनेवाला ही श्रेष्ठ है

ພຣະສິດທະກ່າວວ່າ: «ແມ່ນແຕ່ຖ້າຊາຍຄົນໜຶ່ງຫ້ອຍຕົວຢູ່ເທິງຕົ້ນໄມ້ໂດຍຫົວລົງລຸ່ມເຖິງສິບພັນຍຸກກໍຕາມ, ຜູ້ທີ່ຢູ່ອາໄສຢູ່ຝັ່ງນ້ຳຄົງຄາຕາມທີ່ປາຖະໜາ ຖືກນັບວ່າເຫນືອກວ່າ».

Verse 42

अग्नौ प्रास्तं प्रधूयेत यथा तूल॑ द्विजोत्तम । तथा गज्भजावगाढस्य सर्वपापं प्रधूयते,द्विजश्रेष्ठट जैसे अतामें डाली हुई रूई तुरंत जलकर भस्म हो जाती है, उसी प्रकार गड़ामें गोता लगानेवाले मनुष्यके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं

ສິດທະໄດ້ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຜູ້ເກີດສອງຄັ້ງຜູ້ປະເສີດ! ເຫມືອນກອກຝ້າຍເມື່ອຖືກໂຍນເຂົ້າໄຟ ກໍຖືກເຜົາຜານທັນທີແລະກາຍເປັນຂີ້ເຖົ່າ; ສັນນັ້ນແຫຼະ ບາບທັງປວງຂອງຜູ້ທີ່ດຳລົງລົງອາບນ້ຳໃນແມ່ນ້ຳຄົງຄາ ກໍຖືກຊຳລະໝົດໄປ»។

Verse 43

भूतानामिह सर्वेषां दुः:खोपहतचेतसाम्‌ | गतिमन्वेषमाणानां न गड़ासदृशी गति:,इस संसारमें दुःखसे व्याकुलचित होकर अपने लिये कोई आश्रय ढूँढ़नेवाले समस्त प्राणियोंके लिये गंगाजीके समान कोई दूसरा सहारा नहीं है

ສຳລັບສັດມີຊີວິດທັງປວງໃນໂລກນີ້ ຜູ້ທີ່ຈິດໃຈຖືກທຸກຂ໌ກະທົບ ແລະກຳລັງສະແຫວງຫາທີ່ພຶ່ງແລະທາງອອກ ບໍ່ມີທີ່ພຶ່ງໃດຈະເທົ່າກັບແມ່ນ້ຳຄົງຄາເລີຍ.

Verse 44

भवन्ति निर्विषा: सर्पा यथा तार्क्ष्यस्य दर्शनात्‌ । गज्जाया दर्शनात्‌ तद्वत्‌ सर्वपापै: प्रमुच्यते,जैसे गरुड़को देखते ही सारे सर्पोंके विष झड़ जाते हैं, उसी प्रकार गड़ाजीके दर्शनमात्रसे मनुष्य सब पापोंसे छुटकारा पा जाता है

ເຫມືອນງູທັງຫຼາຍກາຍເປັນບໍ່ມີພິດ ເມື່ອໄດ້ເຫັນຕາຣກສະຍະ (ກະຣຸດ) ແຕ່ພຽງສາຍຕາ; ສັນນັ້ນແຫຼະ ເມື່ອໄດ້ເຫັນແມ່ນ້ຳຄົງຄາ ມະນຸດກໍພົ້ນຈາກບາບທັງປວງ.

Verse 45

अप्रतिष्ठाक्ष ये केचिदर्धर्मशरणाश्ष ये । तेषां प्रतिष्ठा गड़ेह शरणं शर्म वर्म च,जगत्‌में जिनका कहीं आधार नहीं है; तथा जिन्होंने धर्मकी शरण नहीं ली है, उनका आधार और उन्हें शरण देनेवाली श्रीगड़ाजी ही हैं। वे ही उसका कल्याण करनेवाली तथा कवचकी भाँति उसे सुरक्षित रखनेवाली हैं

ຜູ້ໃດກໍຕາມທີ່ບໍ່ມີທີ່ພຶ່ງພາໃນທຸກແຫ່ງ ແລະຜູ້ທີ່ບໍ່ໄດ້ເຂົ້າພຶ່ງທຳມະ—ສຳລັບເຂົາເຈົ້າ ແມ່ນ້ຳຄົງຄານີ້ແຫຼະເປັນຖານທີ່ໝັ້ນຄົງ. ນາງເປັນທີ່ພຶ່ງ, ເປັນຄວາມສຸກສະຫງົບ, ແລະເປັນເກາະປ້ອງກັນດັ່ງເກາະກາຍ ຄຸ້ມຄອງເຂົາເຈົ້າໃຫ້ປອດໄພ.

Verse 46

प्रकृष्टेरशुभै्ग्रस्ताननेकै: पुरुषाधमान्‌ । पततो नरके गज्ज संश्रितान्‌ प्रेत्य तारयेत्‌,जो नीच मानव अनेक बड़े-बड़े अमड्नलकारी पापकर्मोंसे ग्रस्त होकर नरकमें गिरनेवाले हैं, वे भी यदि गड़ाजीकी शरणमें आ जाते हैं तो ये मरनेके बाद उनका उद्धार कर देती हैं

ແມ່ນແຕ່ຄົນຕ່ຳຊ້າທີ່ສຸດ ຜູ້ຖືກບາບອັນຮ້າຍແຮງຫຼາຍປະການຄອບງຳ ແລະກຳລັງຕົກລົງສູ່ນະລົກ—ຖ້າເຂົາເຈົ້າເຂົ້າພຶ່ງແມ່ນ້ຳຄົງຄາ ນາງກໍຈະຊ່ວຍຂ້າມພົ້ນໄດ້ໃນພາຍຫຼັງຄວາມຕາຍ.

Verse 47

ते संविभक्ता मुनिभिरननुनं देवैः सवासवै: । येडभिगच्छन्ति सततं गड्जां मतिमतां वर,बुद्धिमानोंमें श्रेष्ठ ब्राह्यण! जो लोग सदा गड्जाजीकी यात्रा करते हैं, उनपर निश्चय ही इन्द्र आदि सम्पूर्ण देवता तथा मुनिलोग पृथक्‌-पृथक्‌ कृपा करते आये हैं

ຜູ້ໃດທີ່ເດີນທາງໄປຫາແມ່ນ້ຳຄົງຄາ (Gaṅgā) ຢ່າງສະເໝີ ຜູ້ນັ້ນແນ່ນອນຍ່ອມໄດ້ຮັບພຣະກະລຸນາອັນແຈ້ງຊັດ ແລະອຸດົມຈາກພວກມຸນີ ແລະຈາກເທວະທັງຫຼາຍ ພ້ອມດ້ວຍວາສະວະ (ອິນທຣະ) ດ້ວຍ. ສິດທະກ່າວຢືນຢັນວ່າ ການຈາລິກໄປຢ່າງມັ່ນຄົງນີ້ ດຶງດູດພຣະພອນຈາກເທວະ ແລະຈາກນັກບຳເນັດ ເຮັດໃຫ້ຜູ້ຈາລິກເປັນຜູ້ສະແຫວງຫາຄວາມບໍລິສຸດ ແລະດຳລົງຊີວິດດ້ວຍຄວາມເຄົາລົບຕໍ່ທຳມະ.

Verse 48

विनयाचारहीनाश्न अशिवाश्षन नराधमा: । ते भवन्ति शिवा विप्र ये वै गड़ामुपाश्रिता:,विप्रवर! विनय और सदाचारसे हीन अमड्रलकारी नीच मनुष्य भी गड़ाजीकी शरणमें जानेपर कल्याणस्वरूप हो जाते हैं

ສິດທະກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣາຫມະນະ, ແມ່ນແຕ່ຄົນຕໍ່າຕໍ່າທີ່ສຸດ—ຜູ້ຂາດຄວາມຖ່ອມຕົນ ແລະຂາດຈັນຍາບັນ, ເອົາໃຈໄປທາງອັບມົງຄົນ—ເມື່ອໄດ້ເຂົ້າໄປພຶ່ງພາ Gaḍā ແລ້ວ ກໍກາຍເປັນຜູ້ມີມົງຄົນ ແລະນຳພາຄວາມສຸກສະຫວັດດີ. ໂອ ພຣາຫມະນະຜູ້ປະເສີດ, ຄວາມຖ່ອມຕົນ ແລະຄວາມປະພຶດຖືກຕ້ອງແມ່ນຫົນທາງແຫ່ງການຂັດເກົາຕົນທີ່ແທ້; ແຕ່ແມ່ນແຕ່ຜູ້ຂາດມັນ ກໍອາດຖືກນຳໃຫ້ຫັນໄປສູ່ຄວາມດີໄດ້ ເມື່ອເຂົ້າຫາການຄຸ້ມຄອງຂອງທີ່ພຶ່ງອັນຊອບທຳ».

Verse 49

यथा सुराणाममृतं पितृणां च यथा स्वधा । सुधा यथा च नागानां तथा गड्भाजलं नृणाम्‌,जैसे देवताओंको अमृत, पितरोंको स्वधा और नागोंको सुधा तृप्त करती है, उसी प्रकार मनुष्योंके लिये गंगाजल ही पूर्ण तृप्तिका साधन है

ດັ່ງທີ່ນ້ຳອະມຣິຕະເຮັດໃຫ້ເທວະພໍໃຈ, ດັ່ງທີ່ເຄື່ອງບູຊາ svadhā ເຮັດໃຫ້ບັນພະບຸລຸດພໍໃຈ, ແລະດັ່ງທີ່ sudhā ເຮັດໃຫ້ນາກາພໍໃຈ—ສັນນັ້ນແຫຼະ ນ້ຳແມ່ນ້ຳຄົງຄາ (Gaṅgā) ແຕ່ພຽງຢ່າງດຽວ ນຳຄວາມພໍໃຈຢ່າງສົມບູນໃຫ້ແກ່ມະນຸດ. ສິດທະຈຶ່ງສັນລະເສີນນ້ຳຄົງຄາວ່າ ເປັນທີ່ພຶ່ງອັນບໍລິສຸດ ແລະເຕັມພູນສຳລັບຊີວິດທາງທຳມະຂອງມະນຸດ, ວາງໄວ້ຄຽງຄູ່ກັບອາຫານອັນຖືກຕ້ອງຂອງສັດທຸກຈຳພວກ.

Verse 50

उपासते यथा बाला मातर क्षुधयार्दिता: । श्रेयस्कामास्तथा गड़ामुपासन्तीह देहिन:,जैसे भूखसे पीड़ित हुए बच्चे माताके पास जाते हैं, उसी प्रकार कल्याणकी इच्छा रखनेवाले प्राणी इस जगतमें गड़ाजीकी उपासना करते हैं

ສິດທະກ່າວວ່າ: «ເຫມືອນເດັກນ້ອຍທີ່ຫິວໂຫຍ ແລະຖືກຄວາມຫິວທຳລາຍ ຍ່ອມໄປຫາແມ່ຂອງຕົນ, ສັນນັ້ນແຫຼະ ສັດຜູ້ມີກາຍໃນໂລກນີ້—ຜູ້ປາຖະໜາຄວາມສຸກສະຫວັດດີອັນແທ້—ຍ່ອມເຂົ້າຫາທີ່ພຶ່ງດ້ວຍການບູຊາ Gaḍā».

Verse 51

स्वायम्भुवं यथा स्थान सर्वेषां श्रेष्ठमुच्यते । सस्‍्नातानां सरितां श्रेष्ठा गड़ा तद्गदिहोच्यते,जैसे ब्रह्मलोक सब लोकोंसे श्रेष्ठ बताया जाता है, वैसे ही स्नान करनेवाले पुरुषोंके लिये गड़ाजी ही सब नदियोंमें श्रेष्ठ कही गयी हैं

ສິດທະກ່າວວ່າ: «ເຫມືອນທີ່ສະຖານຂອງສະວາຍັມພູວະ (Svāyambhuva, ພຣະພຣົມ) ຖືກກ່າວວ່າເປັນທີ່ສູງສຸດໃນບັນດາໂລກທັງປວງ, ສັນນັ້ນແຫຼະ ສຳລັບຜູ້ທີ່ປາຖະໜາຄວາມບໍລິສຸດດ້ວຍການອາບນ້ຳ, ແມ່ນ້ຳ Gaḍā ຖືກປະກາດວ່າເປັນເລີດທີ່ສຸດໃນບັນດາແມ່ນ້ຳທັງຫຼາຍ».

Verse 52

यथोपजीविनां धेनुर्देवादीनां धरा स्मृता । तथोपजीविनां गज्जा सर्वप्राणभृतामिह,जैसे धेनुस्वरूपा पृथ्वी उपजीवी देवता आदिके लिये आदरणीय है, उसी प्रकार इस जगतमें गंगा समस्त उपजीवी प्राणियोंके लिये आदरणीय हैं

ດັ່ງທີ່ແຜ່ນດິນຖືກຈື່ຈຳເປັນດັ່ງ “ງົວ” ສຳລັບຜູ້ທີ່ດຳລົງຊີວິດດ້ວຍພອນຂອງນາງ ແລະຈຶ່ງເປັນທີ່ເຄົາລົບຂອງເທວະດາແລະຜູ້ອື່ນ—ສັນນັ້ນແຫຼະ ໃນໂລກນີ້ ແມ່ນ້ຳຄົງຄາ (ຄັງຄາ) ຄວນໄດ້ຮັບການເຄົາລົບບູຊາຈາກສັດມີຊີວິດທັງປວງຜູ້ອຸປະຖຳຊີວິດ.

Verse 53

देवा: सोमार्कसंस्थानि यथा सत्रादिभिर्मखै: । अमृतान्युपजीवन्ति तथा गज्ाजलं नस:,जैसे देवता सत्र आदि यज्ञोंद्वारा चन्द्रमा और सूर्यमें स्थित अमृतसे आजीविका चलाते हैं, उसी प्रकार संसारके मनुष्य गंगाजलका सहारा लेते हैं

ສິດທະໄດ້ກ່າວວ່າ: “ດັ່ງທີ່ເທວະດາດຳລົງຊີວິດໂດຍອາໄສນ້ຳອະມະຕະທີ່ສະຖິດຢູ່ໃນດວງຈັນແລະດວງອາທິດ ຜ່ານພິທີບູຊາຍັນຍະເຊັ່ນ ‘ສັດຕະ’ ເປັນຕົ້ນ—ສັນນັ້ນແຫຼະ ມະນຸດໃນໂລກນີ້ດຳລົງຊີວິດໂດຍອາໄສນ້ຳແຫ່ງແມ່ນ້ຳຄົງຄາ (Gaṅgā).”

Verse 54

जाह्नववीपुलिनोत्थाभि: सिकताभि: समुक्षितम्‌ । आत्मानं मन्यते लोको दिविषछ्ठमिव शोभितम्‌,गंगाजीके तटसे उड़े हुए बालुका-कणोंसे अभिषिक्त हुए अपने शरीरको ज्ञानी पुरुष स्वर्गलोकमें स्थित हुआ-सा शोभासम्पन्न मानता है

ເມື່ອຖືກພອຍພອດດ້ວຍເມັດຊາຍທີ່ຟຸ້ງຂຶ້ນຈາກຝັ່ງກວ້າງໃຫຍ່ຂອງຈາຫນະວີ (Gaṅgā) ມະນຸດກໍມັກເຫັນຕົນເອງວ່າງາມສະຫງ່າ ປານຜູ້ຢູ່ໃນສະຫວັນ.

Verse 55

जाह्नवीतीरसम्भूतां मृदं मूर्थध्ना बिभर्ति यः । बिभर्ति रूप॑ सो<र्कस्य तमोनाशाय निर्मलम्‌,जो मनुष्य गंगाके तीरकी मिट्टी अपने मस्तकमें लगाता है वह अज्ञानान्धकारका नाश करनेके लिये सूर्यके समान निर्मल स्वरूप धारण करता है

ຜູ້ໃດນຳດິນຈາກຝັ່ງຈາຫນະວີ (Gaṅgā) ມາທາຫົວ ຜູ້ນັ້ນຍ່ອມຖືຮູບອັນບໍລິສຸດດັ່ງດວງອາທິດ ເພື່ອທຳລາຍຄວາມມືດແຫ່ງອະວິຊາ.

Verse 56

गड़ोर्मिभिरथो दिग्ध: पुरुषं पवनो यदा । स्पृशते सो<स्य पाप्मानं सद्य एवापकर्षति,गंगाकी तरंगमालाओंसे भीगकर बहनेवाली वायु जब मनुष्यके शरीरका स्पर्श करती है, उसी समय वह उसके सारे पापोंको नष्ट कर देती है

ເມື່ອລົມທີ່ຊຸ່ມຊື່ນດ້ວຍຄື້ນນ້ຳຂອງແມ່ນ້ຳຄົງຄາ (Gaṅgā) ມາສຳຜັດກາຍຂອງມະນຸດ ມັນຍ່ອມດຶງເອົາແລະທຳລາຍບາບຂອງຜູ້ນັ້ນໃນທັນທີ.

Verse 57

व्यसनैरभितप्तस्य नरस्य विनशिष्यत: । गड्जादर्शनजा प्रीतिव्यसनान्यपकर्षति,दुर्व्स्सनजनित दु:खोंसे संतप्त होकर मरणासन्न हुआ मनुष्य भी यदि गंगाजीका दर्शन करे तो उसे इतनी प्रसन्नता होती है कि उसकी सारी पीड़ा तत्काल नष्ट हो जाती है

ຊາຍຜູ້ໜຶ່ງທີ່ຖືກໄພພິບັດເຜົາໄໝ້ ແລະກຳລັງຈົ່ມລົງສູ່ຄວາມພິນາດ—ແມ່ນແຕ່ຢູ່ປາກຂອງຄວາມຕາຍ—ຖ້າໄດ້ເຫັນແມ່ນ້ຳຄັງຄາ (Gaṅgā) ຄວາມປິຕິທີ່ເກີດຈາກການເຫັນນັ້ນຈະເກີດຂຶ້ນໃນໃຈ ແລະດຶງເອົາຄວາມທຸກທັງປວງອອກໄປໃນທັນທີ ຂັບໄລ່ຄວາມເຈັບປວດທີ່ເກີດຈາກເຄາະຮ້າຍ.

Verse 58

हंसारावै: कोकरवै रवैरन्यैश्व पक्षिणाम्‌ । पस्पर्थ गज गन्धर्वान्‌ पुलिनैश्व शिलोच्चयान्‌,हंसोंकी मीठी वाणी, चक्रवाकोंके सुमधुर शब्द तथा अन्यान्य पक्षियोंके कलरवोंद्वारा गंगाजी गन्धर्वोंसे होड़ लगाती हैं तथा अपने ऊँचे-ऊँचे तटोंद्वारा पर्वतोंके साथ स्पर्धा करती हैं

ແມ່ນ້ຳຄັງຄາ (Gaṅgā) ດ້ວຍສຽງຮ້ອງຂອງຫົງ, ສຽງຫວານຂອງນົກຈັກກະຣະວາກ (cakravāka) ແລະບົດຮ້ອງຫຼາກຫຼາຍຂອງນົກອື່ນໆ ດູເຫມືອນຈະປະລອງກັບພວກຄັນທະວະ (Gandharva) ເອງ; ແລະດ້ວຍສັນດອນສູງ ແລະຝັ່ງນ້ຳສູງໆ ນາງກໍດູເຫມືອນຈະແຂ່ງຂັນກັບຍອດພູຫີນ.

Verse 59

हंसादिभि: सुबहुभिवविविधी: पक्षिभिवव॒ताम्‌ | गड्ां गोकुलसम्बाधां दृष्टवा स्वर्गोडपि विस्मृत:,हंस आदि बहुसंख्यक एवं विविध पक्षियोंसे घिरी हुई तथा गौओंके समुदायसे व्याप्त हुई गंगाजीको देखकर मनुष्य स्वर्गलोकको भी भूल जाता है

ເມື່ອເຫັນແມ່ນ້ຳຄັງຄາ (Gaṅgā) ທີ່ຖືກຫ້ອມລ້ອມດ້ວຍນົກຫຼາກຫຼາຍນັບບໍ່ຖ້ວນ ເຊັ່ນ ຫົງ ແລະຄຶກຄື້ນໄປດ້ວຍຝູງງົວ, ມະນຸດຜູ້ໜຶ່ງຈະຫຼົງໄຫຼຈົນລືມແມ່ນແຕ່ສະຫວັນ.

Verse 60

न सा प्रीतिर्दिविष्ठस्थ सर्वकामानुपाश्रत: । सम्भवेद्‌ या परा प्रीतिर्गड्राया: पुलिने नृूणाम्‌,गंगाजीके तटपर निवास करनेसे मनुष्योंको जो परम प्रीति--अनुपम आनन्द मिलता है वह स्वर्गमें रहकर सम्पूर्ण भोगोंका अनुभव करनेवाले पुरुषको भी नहीं प्राप्त हो सकता

ຄວາມປິຕິນັ້ນ ບໍ່ອາດໄດ້ຮັບ—ແມ່ນແຕ່ຜູ້ຢູ່ໃນສະຫວັນ ແລະມີຄວາມສຸກທຸກປະການ. ຄວາມຍິນດີອັນສູງສຸດທີ່ມະນຸດໄດ້ຈາກການຢູ່ຕາມຝັ່ງຊາຍຂອງແມ່ນ້ຳຄັງຄາ (Gaṅgā) ສູງກວ່າຄວາມສຸກແຫ່ງສະຫວັນ.

Verse 61

वाड्मन:कर्मजै ग्रस्त: पापैरपि पुमानिह । वीक्ष्य गड़ां भवेत्‌ पूतो अत्र मे नास्ति संशय:,मन, वाणी और क्रियाद्वारा होनेवाले पापोंसे ग्रस्त मनुष्य भी गंगाजीका दर्शन करने मात्रसे पवित्र हो जाता है--इसमें मुझे संशय नहीं है

ແມ່ນແຕ່ມະນຸດຜູ້ຖືກບາບທີ່ເກີດຈາກໃຈ, ຄຳເວົ້າ, ແລະການກະທຳຂອງກາຍ ກົດທັບຢູ່ໃນໂລກນີ້ ກໍຈະບໍລິສຸດໄດ້ ແຕ່ພຽງແຕ່ເຫັນແມ່ນ້ຳຄັງຄາ (Gaṅgā) ເທົ່ານັ້ນ—ໃນຂໍ້ນີ້ ຂ້ອຍບໍ່ມີຄວາມສົງໄສເລີຍ.

Verse 62

सप्तावरान्‌ सप्त परान्‌ पितृस्तेभ्यश्व ये परे । पुमांस्तारयते गज्जां वीक्ष्य स्पृष्टवावगाहु च,गंगाजीका दर्शन, उनके जलका स्पर्श तथा उस जलके भीतर स्नान करके मनुष्य सात पीढ़ी पहलेके पूर्वजोंका और सात पीढ़ी आगे होनेवाली संतानोंका तथा इनसे भी ऊपरके पितरों और संतानोंका उद्धार कर देता है

ສິດທະໄດ້ກ່າວວ່າ: ແຕ່ພຽງໄດ້ເຫັນແມ່ນ້ຳຄົງຄາ, ໄດ້ແຕະນ້ຳຂອງນາງ, ແລະໄດ້ອາບຈົມຢູ່ໃນນ້ຳນັ້ນ, ບຸກຄົນຍ່ອມເປັນເຫດໃຫ້ເກີດການປົດປ່ອຍແກ່ວົງຕະກູນ—ບັນພະບຸລຸດ 7 ຊົນຊັ້ນ ແລະລູກຫຼານ 7 ຊົນຊັ້ນ, ກະທັ້ງຜູ້ກ່ອນໜ້າ ແລະຜູ້ຕໍ່ໄປທີ່ເກີນກວ່ານັ້ນດ້ວຍ.

Verse 63

श्रुताभिलषिता पीता स्पृष्टा दृष्टावगाहिता । गज्जा कप वंशौ विशेषत:,जो पुरुष ग॑ माहात्म्य सुनता, उनके तटपर जानेकी अभिलाषा रखता, उनका दर्शन करता, जल पीता, स्पर्श करता तथा उनके भीतर गोते लगाता है, उसके दोनों कुलोंका भगवती गंगा विशेषरूपसे उद्धार कर देती हैं

ສິດທະປະກາດວ່າ: ແມ່ນ້ຳຄົງຄາອັນສັກສິດເປັນພະລັງແຫ່ງການຊ່ວຍໃຫ້ພົ້ນໄດ້ຫຼາຍທາງ—ເມື່ອໄດ້ຟັງຄຸນມະຫາອຳນາດຂອງນາງ, ເມື່ອປາຖະໜາຈະໄປຫາຝັ່ງນາງ, ເມື່ອໄດ້ເຫັນນາງ, ດື່ມນ້ຳນາງ, ແຕະນ້ຳນາງ, ແລະຈົມຕົວໃນສາຍນ້ຳນາງ. ສຳລັບຜູ້ນັ້ນ, ພຣະນາງຄົງຄາຜູ້ປະເສີດປະທານການປົດປ່ອຍຢ່າງພິເສດແກ່ສອງສາຍຕະກູນ—ຝ່າຍພໍ່ແລະຝ່າຍແມ່.

Verse 64

दर्शनात्‌ स्पर्शनात्‌ पानात्‌ तथा गड़्ेति कीर्तनात्‌ । पुनात्यपुण्यान्‌ पुरुषान शतशो5थ सहस्रश:,गंगाजी अपने दर्शन, स्पर्श, जलपान तथा अपने गंगानामके कीर्तनसे सैकड़ों और हजारों पापियोंको तार देती हैं

ສິດທະໄດ້ກ່າວວ່າ: ແຕ່ພຽງໄດ້ເຫັນນາງ, ແຕະນາງ, ດື່ມນ້ຳນາງ, ແລະຮ້ອງສັນລະເສີນນາມ “ຄົງຄາ” ເຊັ່ນດຽວກັນ, ນາງຍ່ອມຊຳລະຄົນບາບໄດ້ເປັນຮ້ອຍໆ ແລະເປັນພັນໆ.

Verse 65

य इच्छेत्‌ सफलं जन्म जीवितं श्रुतमेव च । स पितुृंस्तर्पयेद्‌ गाड्रमभिगम्य सुरांसतथा,जो अपने जन्म, जीवन और वेदाध्ययनको सफल बनाना चाहता हो वह गंगाजीके पास जाकर उनके जलसे देवताओं तथा पितरोंका तर्पण करे

ຜູ້ໃດປາຖະໜາໃຫ້ການເກີດ, ຊີວິດ, ແລະການຮຽນຮູ້ອັນສັກສິດຂອງຕົນເກີດຜົນຢ່າງແທ້ຈິງ, ຜູ້ນັ້ນຄວນໄປຫາແມ່ນ້ຳຄົງຄາ ແລະໃຊ້ນ້ຳຂອງນາງຖວາຍຕັຣປະນາ (tarpaṇa) ແກ່ເທວະດາ ແລະບັນພະບຸລຸດ.

Verse 66

न सुतैर्न च वित्तेन कर्मणा न च तत्फलम्‌ | प्राप्तुयात्‌ पुरुषो&त्यन्तं गड्जां प्राप्प यदाप्रुयात्‌,मनुष्य गंगास्नान करके जिस अक्षय फलको प्राप्त करता है उसे पुत्रोंसे, धनसे तथा किसी कर्मसे भी नहीं पा सकता

ສິດທະໄດ້ກ່າວວ່າ: ຜົນອັນສູງສຸດ ແລະບໍ່ເສື່ອມສະລາຍ ທີ່ມະນຸດໄດ້ຮັບເມື່ອໄປຮອດແມ່ນ້ຳຄົງຄາ ແລະອາບນ້ຳຢູ່ນັ້ນ, ບໍ່ອາດໄດ້ມາດ້ວຍລູກຊາຍ, ດ້ວຍຊັບສິນ, ຫຼືດ້ວຍກຳມະພິທີໃດໆ ແລະຜົນຂອງມັນໄດ້ເລີຍ.

Verse 67

जात्यन्धैरिह तुल्यास्ते मृत: पड़गुभिरेव च । समर्था ये न पश्यन्ति गड़ां पुण्यजलां शिवाम्‌,जो सामर्थ्य होते हुए भी पवित्र जलवाली कल्याणमयी गंगाका दर्शन नहीं करते वे जन्मके अन्धों, पंगुओं और मुर्दोके समान हैं

ສິດທາກ່າວວ່າ: ໃນໂລກນີ້ ຜູ້ມີຄວາມສາມາດແຕ່ບໍ່ໄດ້ເບິ່ງແມ່ນ້ຳຄົງຄາອັນເປັນມົງຄຸນ ທີ່ນ້ຳບໍລິສຸດ—ກໍບໍ່ດີກວ່າຄົນຕາບອດແຕ່ເກີດ ຄົນພິການ ຫຼືແມ່ນກະທັ້ງຄົນຕາຍ.

Verse 68

सा,भूतभव्यभविष्यज्ञैर्महर्षिभिरुपस्थिताम्‌ । देवै: सेन्द्रैश्न को गड़ां नोपसेवेत मानव: भूत, वर्तमान और भविष्यके ज्ञाता महर्षि तथा इन्द्र आदि देवता भी जिनकी उपासना करते हैं, उन गंगाजीका सेवन कौन मनुष्य नहीं करेगा?

ນາງ—ແມ່ນ້ຳຄົງຄາ—ທີ່ມະຫາຣິສີຜູ້ຮູ້ອະດີດ ປັດຈຸບັນ ແລະອະນາຄົດ ມາປະຄອງບູຊາ; ແມ່ນກະທັ້ງເທວະດາທັງຫຼາຍພ້ອມພຣະອິນທຣາກໍບູຊາ—ມະນຸດຜູ້ໃດຈະບໍ່ເຂົ້າໄປພຶ່ງພາ ແລະດື່ມຊົມນ້ຳຄົງຄານັ້ນ?

Verse 69

वानप्रस्थैर्गहस्थैश्व यतिभिरन्रह्मचारिभि: । विद्यावद्धि: श्रितां गड़ां पुमान्‌ को नाम नाश्रयेत्‌,ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यासी और विद्वान्‌ पुरुष भी जिनकी शरण लेते हैं, ऐसी गंगाजीका कौन मनुष्य आश्रय नहीं लेगा?

ສິດທາກ່າວວ່າ: ເມື່ອຜູ້ຢູ່ປ່າ ແລະຜູ້ຄອບຄົວ, ນັກບວດຜູ້ສະຫຼະໂລກ ແລະພຣະພຣະຫມະຈາຣິນ, ກະທັ້ງຜູ້ຮູ້ຫຼາຍ ຍັງພາກັນພຶ່ງພາແມ່ນ້ຳຄົງຄາ—ມະນຸດຜູ້ໃດຈະບໍ່ໄປຂໍພຶ່ງເພິ່ນ?

Verse 70

उत्क्रामद्िश्व यः प्राण: प्रयत: शिष्टसम्मत: । चिन्तयेन्मनसा गड़ां स गतिं परमां लभेत्‌,जो साधु पुरुषोंद्वारा सम्मानित तथा संयतचित्त मनुष्य प्राण निकलते समय मन-ही-मन गंगाजीका स्मरण करता है, वह परम उत्तम गतिको प्राप्त कर लेता है

ສິດທາກ່າວວ່າ: ຜູ້ມີວິໄນ ແລະໄດ້ຮັບການນັບຖືຈາກຄົນດີ, ເມື່ອລົມຫາຍໃຈຊີວິດກຳລັງຈະຈາກໄປ ຖ້າເຂົາລະລຶກແມ່ນ້ຳຄົງຄາໃນໃຈ—ເຂົາຈະໄດ້ຮັບຄວາມເຖິງທີ່ສູງສຸດ.

Verse 71

न भयेभ्यो भयं तस्य न पापेभ्यो न राजतः । आ देहपतनाद्‌ गड़ामुपास्ते यः: पुमानिह,जो पुरुष यहाँ जीवनपर्यन्त गंगाजीकी उपासना करता है उसे भयदायक वस्तुओंसे, पापोंसे तथा राजासे भी भय नहीं होता

ສິດທາປະກາດວ່າ: ຜູ້ໃດໃນໂລກນີ້ ບູຊາແມ່ນ້ຳຄົງຄາຢ່າງຕໍ່ເນື່ອງຈົນກວ່າຮ່າງກາຍຈະລົ້ມລົງ (ຄືຈົນຕາຍ) ຜູ້ນັ້ນບໍ່ຖືກຄວາມຢ້ານກົວຄອບງຳ—ທັງຈາກສິ່ງນ່າຢ້ານ, ຈາກບາບ, ຫຼືແມ່ນກະທັ້ງອຳນາດຂອງກະສັດ.

Verse 72

महापुण्यां च गगनात्‌ पतन्तीं वै महेश्वर: । दधार शिरसा गड्जां तामेव दिवि सेवते,भगवान्‌ महेश्वरने आकाशसे गिरती हुई परम पवित्र गंगाजीको सिरपर धारण किया, उन्हींका वे स्वर्गमें सेवन करते हैं

ພຣະຄົງຄາອັນມີບຸນຍິ່ງ ແລະບໍລິສຸດສຸດຍອດ ທີ່ຕົກລົງຈາກຟ້າ—ພຣະພະຄະວານ ມະເຫສະວະຣະ ໄດ້ຮັບໄວ້ເທິງພຣະເສົາ. ແມ່ນແຕ່ໃນສະຫວັນ ພຣະອົງກໍຍັງນົບນ້ອມບູຊາ ແລະຮັບປະທານນ້ຳຄົງຄານັ້ນເອງ—ເປັນນິຍາຍເຖິງພະລັງແຫ່ງການຂົມຂືນຕົນ ແລະການຊຳລະທີ່ທຳໃຫ້ສິ່ງບໍລິສຸດ ແລະເປັນປະໂຫຍດແກ່ໂລກທັງຫຼາຍ ຖືກຄ້ຳຈຸນໄວ້ໂດຍທິວະພະອົງ.

Verse 73

अलंकृतास्त्रयो लोका: पथिभिविंमलैस्त्रिभि: | यस्तु तस्या जल॑ सेवेत्‌ कृतकृत्य: पुमान्‌ भवेत्‌,जिन्होंने तीन निर्मल मार्गोद्रारा आकाश, पाताल तथा भूतल--इन तीन लोकोंको अलंकृत किया है उन गंगाजीके जलका जो मनुष्य सेवन करेगा वह कृतकृत्य हो जायगा

ໂລກທັງສາມຖືກປະດັບດ້ວຍທາງໄຫຼສາມສາຍອັນບໍ່ມີມົນທິນຂອງນາງ—ສະຫວັນ, ພາຕານ (ໂລກໃຕ້), ແລະແຜ່ນດິນ. ຜູ້ໃດກໍຕາມທີ່ຮັບປະທານນ້ຳແຫ່ງຄົງຄາ ຈະເປັນຜູ້ທີ່ສຳເລັດພັນທະແຫ່ງຊີວິດ ເພາະການສຳຜັດນັ້ນເຊື່ອວ່າຊຳລະບາບ ແລະເຮັດໃຫ້ຄວາມພາກເພຍທາງທຳມະສົມບູນ.

Verse 74

दिवि ज्योतिर्यथा5<दित्य: पितृणां चैव चन्द्रमा: । देवेशश्व॒ तथा नृणां गज्ञा च सरिता तथा,स्वर्गवासी देवताओंमें जैसे सूर्यका तेज श्रेष्ठ है, जैसे पितरोंमें चन्द्रमा तथा मनुष्योंमें राजाधिराज श्रेष्ठ है, उसी प्रकार समस्त सरिताओं में गंगाजी उत्तम हैं

ສິດທະໄດ້ກ່າວວ່າ: “ເຊັ່ນດຽວກັນກັບໃນສະຫວັນ ແສງຕາເວັນເປັນສິ່ງສູງສຸດ; ເຊັ່ນດຽວກັນກັບໃນຫມູ່ພິຕຣະ (ບັນພະບຸລຸດ) ດວງຈັນເປັນຜູ້ນຳ; ແລະເຊັ່ນດຽວກັນກັບໃນຫມູ່ມະນຸດ ກະສັດເອກະຣາດເປັນຜູ້ສູງສຸດ—ດັ່ງນັ້ນໃນຫມູ່ແມ່ນ້ຳທັງປວງ ຄົງຄາເປັນຍອດ.” ຄຳກ່າວນີ້ສອນໃຫ້ຮູ້ຈັກຈັດລຳດັບຄວາມດີເລີດຕາມທຳມະ: ຮັບຮູ້ສິ່ງທີ່ຍົກຈິດ ແລະເປັນແບບຢ່າງໃນແຕ່ລະພາກສ່ວນ ແລ້ວນົບນ້ອມບູຊາຕາມຄວນ.

Verse 75

मात्रा पित्रा सुतैदरिर्विमुक्तस्य धनेन वा । न भवेद्धि तथा दुःख यथा गड़ावियोगजम्‌,(गंगाजीमें भक्ति रखनेवाले पुरुषको) माता, पिता, पुत्र, स्‍त्री और धनका वियोग होनेपर भी उतना दुःख नहीं होता, जितना गंगाके बिछोहसे होता है

ສິດທະໄດ້ກ່າວວ່າ: ແມ່ນແຕ່ຈະພັດພາກຈາກແມ່, ພໍ່, ລູກ, ເມຍ, ຫຼືຊັບສິນ ຄວາມໂສກກໍບໍ່ເທົ່າຄວາມໂສກທີ່ເກີດຈາກການພັດພາກຈາກຄົງຄາ. ຄຳກ່າວນີ້ຍົກຍ້ອງຄວາມເລື່ອມໃສຕໍ່ແມ່ນ້ຳສັກສິດໃຫ້ເປັນທີ່ພຶ່ງສູງສຸດ: ການສູນເສຍທາງໂລກຍ່ອມນຳຄວາມເສົ້າ, ແຕ່ການຂາດການສຳຜັດກັບແຫຼ່ງຊຳລະບາບ ແລະການຄ້ຳຈຸນທາງທຳມະ ຖືກພັນລະນາວ່າເປັນຄວາມຂາດແຄນທີ່ເລິກທີ່ສຸດ.

Verse 76

नारपण्यैनेष्टविषयैर्न सुतैर्न धनागमै: । तथा प्रसादो भवति गज्जां वीक्ष्य यथा भवेत्‌,इसी प्रकार उसे गंगाजीके दर्शनसे जितनी प्रसन्नता होती है, उतनी वनके दर्शनोंसे, अभीष्ट विषयसे, पुत्रोंसे तथा धनकी प्राप्तिसे भी नहीं होती

ບໍ່ແມ່ນໂດຍການແລກປ່ຽນກັບຄົນ, ບໍ່ແມ່ນໂດຍການເສບສຸກໃນສິ່ງທີ່ປາຖະໜາ, ບໍ່ແມ່ນໂດຍລູກ, ຫຼືໂດຍການໄດ້ມາຊັບສິນ—ຈຶ່ງຈະເກີດຄວາມສະຫງົບແບບນັ້ນ. ແຕ່ຄວາມປິຕິ ແລະຄວາມແຈ້ງໃສໃນໃຈທີ່ເກີດຈາກການເຫັນຄົງຄາ ກັບສູງກວ່າທຸກສິ່ງເຫຼົ່ານັ້ນ.

Verse 77

पूर्णमिन्दु यथा दृष्ट्वा नृणां दृष्टि: प्रसीदति । तथा त्रिपथगां दृष्टवा नृणां दृष्टि: प्रसीदति,जैसे पूर्ण चन्द्रमाका दर्शन करके मनुष्योंकी दृष्टि प्रसन्न हो जाती है, उसी तरह त्रिपथगा गंगाका दर्शन करके मनुष्योंके नेत्र आनन्दसे खिल उठते हैं

ດັ່ງຄົນທັງຫຼາຍເມື່ອໄດ້ເຫັນດວງຈັນເຕັມດວງ ສາຍຕາແລະໃຈກໍສະຫງົບຜ່ອນຄາຍ; ສະເຫມືອນກັນນັ້ນ ເມື່ອໄດ້ເຫັນ ຕຣິປະຖະຄາ—ແມ່ນ້ຳຄົງຄາ—ສາຍຕາຂອງຄົນກໍບານຊື່ນ ແລະບໍລິສຸດຂຶ້ນ.

Verse 78

तद्भावस्तद्गतमनास्तन्निष्ठस्तत्परायण: । गड्जां योडनुगतो भकक्‍्त्या स तस्या: प्रियतां व्रजेत्‌,जो गंगाजीमें श्रद्धा रखता, उन्हींमें मन लगाता, उन्हींके पास रहता, उन्हींका आश्रय लेता तथा भक्तिभावसे उन्हींका अनुसरण करता है वह भगवती भागीरथीका स्नेह-भाजन होता है

ຜູ້ໃດມີສັດທາຕໍ່ແມ່ນ້ຳຄົງຄາ ນໍາໃຈໄປຢູ່ກັບນາງ ຢືນຢັນຢູ່ໃນນາງ ພຶ່ງພານາງ ແລະຕິດຕາມນາງດ້ວຍຄວາມພັກດີ—ຜູ້ນັ້ນຈະເປັນຜູ້ທີ່ ພະນາງພາຄີຣະຖີ ພໍໃຈຮັກໃຄ່.

Verse 79

भूस्थै: स्वःस्थैर्दिविष्ठै क्ष भूतिरुच्चावचैरपि । गड्जा विगाह्मया सततमेतत्‌ कार्यतमं सताम्‌,पृथ्वी, आकाश तथा स्वर्गमें रहनेवाले छोटे-बड़े सभी प्राणियोंको चाहिये कि वे निरन्तर गंगाजीमें स्नान करें। यही सत्पुरुषोंका सबसे उत्तम कार्य है

ສັດທັງຫຼາຍ—ຜູ້ຢູ່ໃນແຜ່ນດິນ, ຜູ້ຢູ່ໃນອາກາດ, ແລະຜູ້ຢູ່ໃນສະຫວັນ—ທັງຜູ້ນ້ອຍຜູ້ໃຫຍ່ ຄວນລົງອາບນ້ຳໃນແມ່ນ້ຳຄົງຄາຢ່າງສະເໝີ. ນີ້ແມ່ນກິດທີ່ດີຍິ່ງທີ່ສຸດຂອງຜູ້ມີຄຸນທຳ.

Verse 80

विश्वलोकेषु पुण्यत्वाद्‌ गड़ाया: प्रथितं यश: । यत्पुत्रान्सगरस्येतो भस्माख्याननयद्‌ दिवम्‌,सम्पूर्ण लोकोंमें परम पवित्र होनेके कारण गंगाजीका यश विख्यात है; क्योंकि उन्होंने भस्मीभूत होकर पड़े हुए सगरपुत्रोंको यहाँसे स्वर्गमें पहुँचा दिया

ໃນທຸກໂລກທັງປວງ ກິດຕິສຽງຂອງແມ່ນ້ຳຄົງຄາໂດງດັງ ເນື່ອງຈາກຄວາມບໍລິສຸດອັນສູງສຸດຂອງນາງ; ເພາະນາງໄດ້ນໍາບຸດຂອງສະຄະຣະ ຜູ້ກາຍເປັນຂີ້ເຖົ່າ ຈາກໂລກນີ້ໄປສູ່ສະຫວັນ.

Verse 81

वाय्वीरिताभि: सुमनोहराभि- द्रुताभिरत्यर्थसमुत्थिताभि: । गड़ोर्मिभिर्भानुमतीभिरिद्धा: सहस्नरश्मिप्रतिमा भवन्ति,वायुसे प्रेरित हो बड़े वेगसे अत्यन्त ऊँचे उठनेवाली गंगाजीकी परम मनोहर एवं कान्तिमयी तरंगमालाओंसे नहाकर प्रकाशित होनेवाले पुरुष परलोकमें सूर्यके समान तेजस्वी होते हैं

ຜູ້ໃດອາບນ້ຳ ແລະໄດ້ຮັບແສງສະຫວ່າງຈາກຄື້ນນ້ຳຄົງຄາອັນງາມຍິ່ງ ທີ່ພຸ່ງຂຶ້ນສູງຢ່າງແຮງ ແລະໄຫວໄວ ໂດຍລົມພັດດັນ—ໃນໂລກໜ້າ ຜູ້ນັ້ນຈະສະຫວ່າງໄສດັ່ງດວງອາທິດມີພັນລຳແສງ.

Verse 82

पयस्विनीं घृतिनीमत्युदारां समृद्धिनीं वेगिनीं दुर्विगाह्माम्‌ । गड्डां गत्वा यै: शरीर विसूष्टं गता धीरास्ते विबुधै: समत्वम्‌,दुग्धके समान उज्ज्वल और घृतके समान स्निग्ध जलसे भरी हुई, परम उदार, समृद्धिशालिनी, वेगवती तथा अगाध जलराशिवाली गंगाजीके समीप जाकर जिन्होंने अपना शरीर त्याग दिया है वे धीर पुरुष देवताओंके समान हो गये

ສິດທະກ່າວວ່າ: ບຸລຸດຜູ້ໝັ້ນຄົງທັງຫຼາຍ ຜູ້ໄປຫາແມ່ນ້ຳຄົງຄາ—ນ້ຳຂາວດັ່ງນົມ, ການໄຫຼນຸ່ມມັນດັ່ງເນີຍໃສ (ghee), ໃຈກວ້າງຢ່າງຍິ່ງ, ປະທານຄວາມຮຸ່ງເຮືອງ, ໄຫຼໄວ ແລະຂ້າມຍາກ—ແລ້ວສະຫຼະກາຍຢູ່ທີ່ນັ້ນ ກໍໄດ້ບັນລຸຄວາມເທົ່າທຽມກັບເທວະດາ.

Verse 83

अन्धान्‌ जडान द्रव्यहीनांश्व गड़ा यशस्विनी बृहती विश्वरूपा । देवै: सेन्द्रैमुनिभिमाननवैश्व निषेविता सर्वकामैर्युनक्ति,इन्द्र आदि देवता, मुनि और मनुष्य जिनका सदा सेवन करते हैं वे यशस्विनी, विशालकलेवरा, विश्वरूपा गंगादेवी अपनी शरणमें आये हुए अन्धों, जडों और धनहीनोंको भी सम्पूर्ण मनोवाज्छित कामनाओंसे सम्पन्न कर देती हैं

ສິດທະກ່າວວ່າ: ເທວະນາງແມ່ນ້ຳຄົງຄາ—ມີກຽດສະຫງ່າ, ຮ່າງໃຫຍ່ກວ້າງ, ແລະປາກົດໄດ້ຫຼາຍຮູບ—ແມ່ນແມ່ນ້ຳທີ່ເທວະດາພ້ອມອິນທຣາ, ນັກບວດມຸນີ, ແລະມະນຸດ ພາກັນໄປນົບນ້ອມຢູ່ເປັນນິດ; ແຕ່ຜູ້ໃດມາຂໍພຶ່ງພານາງ ແມ່ນແມ່ນຄົນຕາບອດ, ໂງ່ທຶບ, ຫຼືຂາດຊັບສິນ ນາງກໍປະທານຄວາມປາດຖະໜາທຸກປະການໃຫ້ສຳເລັດ.

Verse 84

ऊर्जावतीं महापुण्यां मधुमतीं त्रिवर्त्मगाम्‌ । त्रिलोकगोफ्तीं ये गड्डां संश्रितास्‍्ते दिवं गता:,गंगाजी ओजस्विनी, परम पुण्यमयी, मधुर जलराशिसे परिपूर्ण तथा भूतल, आकाश और पाताल--इन तीन मार्गोपर विचरनेवाली हैं। जो लोग तीनों लोकोंकी रक्षा करनेवाली गंगाजीकी शरणमें आये हैं, वे स्वर्गलोकको चले गये

ສິດທະກ່າວວ່າ: “ແມ່ນ້ຳຄົງຄາເຕັມໄປດ້ວຍພະລັງທາງທຳ, ມີບຸນຍິ່ງໃຫຍ່, ແລະນ້ຳຫວານຊື່ນ. ນາງເຄື່ອນໄປຕາມສາມເສັ້ນທາງ—ແຜ່ນດິນ, ຟ້າ, ແລະໂລກບາດານ—ຈຶ່ງປົກປ້ອງສາມໂລກ. ຜູ້ໃດພຶ່ງພາຄົງຄາ ຜູ້ນັ້ນຍ່ອມໄປສູ່ສະຫວັນ.”

Verse 85

यो वत्स्यति द्रक्ष्यति वापि मर्त्य- स्तस्मै प्रयच्छन्ति सुखानि देवा: । तद्धभाविता: स्पर्शनदर्शनेन इष्टां गतिं तस्य सुरा दिशन्ति,जो मनुष्य गंगाजीके तटपर निवास और उनका दर्शन करता है उसे सब देवता सुख देते हैं। जो गंगाजीके स्पर्श और दर्शनसे पवित्र हो गये हैं उन्हें गंगाजीसे ही महत्त्वको प्राप्त हुए देवता मनोवाञ्छित गति प्रदान करते हैं

ມະນຸດຜູ້ໃດອາໄສຢູ່ຕາມຝັ່ງແມ່ນ້ຳຄົງຄາ ຫຼືແມ່ນແຕ່ໄດ້ເຫັນນາງ ເທວະດາທັງຫຼາຍກໍປະທານຄວາມສຸກໃຫ້. ຜູ້ທີ່ຖືກຊຳລະແລະປ່ຽນແປງດ້ວຍການສຳຜັດແລະການເຫັນນາງ ຈະຖືກເທວະດາ—ຜູ້ໄດ້ຮັບຄວາມຍິ່ງໃຫຍ່ຈາກຄົງຄາ—ນຳໄປສູ່ຄວາມໝາຍປາດຖະໜາອັນມົງຄຸນ.

Verse 86

दक्षां पृश्चिं बृहतीं विप्रकृष्टां शिवामृद्धां भागिनीं सुप्रसन्नाम्‌ । विभावरीं सर्वभूतप्रतिष्ठां गड़्ां गता ये त्रिदिवं गतास्ते,गंगा जगत्‌का उद्धार करनेमें समर्थ हैं। भगवान्‌ पृश्चिगर्भकी जननी 'पृश्रि” के तुल्य हैं, विशाल हैं, सबसे उत्कृष्ट हैं, मंगलकारिणी हैं, पुण्यराशिसे समृद्ध हैं, शिवजीके द्वारा मस्तकपर धारित होनेके कारण सौभाग्यशालिनी तथा भक्तोंपर अत्यन्त प्रसन्न रहनेवाली हैं। इतना ही नहीं, पापोंका विनाश करनेके लिये वे कालरात्रिके समान हैं तथा सम्पूर्ण प्राणियोंकी आश्रयभूत हैं। जो लोग गंगाजीकी शरणमें गये हैं वे स्वर्गलोकमें जा पहुँचे हैं

ສິດທະກ່າວວ່າ: “ຄົງຄາແມ່ນທິດາຂອງທັກຊະ, ເປັນນ້ອງສາວຂອງປຣິສນີ—ຍິ່ງໃຫຍ່, ສູງສົ່ງ, ມົງຄຸນ, ແລະອຸດົມດ້ວຍບຸນ. ນາງເມດຕາຕໍ່ຜູ້ບູຊາຢ່າງຍິ່ງ ແລະມີສິຣິມົງຄຸນ ເພາະພຣະສິວະທຣົງຮັບນາງໄວ້ເທິງພຣະເສົາ. ເພື່ອທຳລາຍບາບ ນາງດຸດດັ່ງຄືນແຫ່ງການລະລາຍ, ແລະເປັນທີ່ພຶ່ງພາພິງອັນມັ່ນຄົງຂອງສັດທັງປວງ. ຜູ້ໃດຂໍພຶ່ງພາຄົງຄາ ຜູ້ນັ້ນຍ່ອມໄປສູ່ໂລກສະຫວັນ.”

Verse 87

ख्यातिर्यस्या: खं दिवं गां च नित्यं पुरा दिशो विदिशश्चवावतस्थे । तस्या जल सेव्य सरिद्वराया मर्त्या: सर्वे कृतकृत्या भवन्ति,आकाश, स्वर्ग, पृथ्वी, दिशा और विदिशाओंमें भी जिनकी ख्याति फैली हुई है, सरिताओंमें श्रेष्ठ उन भगवती भागीरथीके जलका सेवन करके सभी मनुष्य कृतार्थ हो जाते हैं

ກຽດຊື່ຂອງນາງ ແຕ່ກ່ອນການ ໄດ້ແຜ່ຊຶມໄປທົ່ວຟ້າ ສະຫວັນ ແລະແຜ່ນດິນ ແລະຍັງຕັ້ງມັ່ນຢູ່ໃນທຸກທິດ ແລະທິດຍ່ອຍ. ຜູ້ໃດໄດ້ດື່ມນ້ຳແຫ່ງແມ່ນ້ຳອັນສູງສຸດນັ້ນ—ພຣະນາງ ພາກີຣະທີ—ມະນຸດທັງປວງຈະເປັນຜູ້ສົມບູນ ໄດ້ສຳເລັດກິດທີ່ຄວນສຳເລັດແທ້.

Verse 88

इयं गज्नेति नियतं प्रतिष्ठा गुहस्य रुक्मस्य च गर्भयोषा । प्रातस्त्रिवर्गा घृतवहा विपाष्मा गड़ावतीर्णा वियतो विश्वतोया,'ये गंगाजी हैं--ऐसा कहकर जो दूसरे मनुष्योंको उनका दर्शन कराता है, उसके लिये भगवती भागीरथी सुनिश्चित प्रतिष्ठा (अक्षय पद प्रदान करनेवाली) हैं। वे कार्तिकेय और सुवर्णको अपने गर्भमें धारण करनेवाली, पवित्र जलकी धारा बहानेवाली और पाप दूर करनेवाली हैं। वे आकाशसे पृथ्वीपर उतरी हुई हैं। उनका जल सम्पूर्ण विश्वके लिये पीने योग्य है। उनमें प्रातः:काल स्नान करनेसे धर्म, अर्थ और काम तीनों वर्गोंकी सिद्धि होती है

ຜູ້ໃດກ່າວຢ່າງໝັ້ນໃຈວ່າ “ນີ້ແມ່ນແມ່ນ້ຳຄົງຄາ” ແລະນຳໃຫ້ຜູ້ອື່ນໄດ້ເຫັນນາງ ຜູ້ນັ້ນຈະໄດ້ຮັບທີ່ພຶ່ງອັນໝັ້ນຄົງ ບໍ່ເສື່ອມສູນ ຂອງພຣະນາງ ພາກີຣະທີ. ນາງເປັນແມ່ນ້ຳສັກສິດ ຜູ້ອຸ້ມຊູກັນດະ (Guha/Skanda) ແລະທອງຄຳໄວ້ໃນຄັນ; ນາງໄຫຼອອກເປັນສາຍນ້ຳບໍລິສຸດດັ່ງເນີຍໃສ ແລະກຳຈັດບາບ. ນາງລົງມາຈາກຟ້າສູ່ດິນ; ນ້ຳຂອງນາງເໝາະແກ່ໂລກທັງປວງໃນການດື່ມ. ອາບນ້ຳໃນນາງຍາມອາລຸນ ນຳໃຫ້ສຳເລັດເປົ້າໝາຍສາມ—ທັມມະ, ອັດຖະ, ແລະ ກາມະ.

Verse 89

(नारायणादक्षयात्‌ पूर्वजाता विष्णो: पादात्‌ शिशुमाराद्‌ ध्रुवाच्च । सोमात्‌ सूर्यान्मेरुरूपाच्च विष्णो: समागता शिवमूर्थ्नो हिमाद्रिम्‌ ।।) भगवती गंगा पूर्वकालमें अविनाशी भगवान्‌ नारायणसे प्रकट हुई हैं। वे भगवान्‌ विष्णुके चरण, शिशुमार चक्र, ध्रुव, सोम, सूर्य तथा मेरुरूप विष्णुसे अवतरित हो भगवान्‌ शिवके मस्तकपर आयी हैं और वहाँसे हिमालय पर्वतपर गिरी हैं ।। सुतावनी ध्रस्य हरस्य भार्या दिवो भुवश्चापि कृतानुरूपा । भव्या पृथिव्यां भागिनी चापि राजन्‌ गड्जा लोकानां पुण्यदा वै त्रयाणाम्‌,गंगाजी गिरिराज हिमालयकी पुत्री, भगवान्‌ शंकरकी पत्नी तथा स्वर्ग और पृथ्वीकी शोभा हैं। राजन! वे भूमण्डलपर निवास करनेवाले प्राणियोंका कल्याण करनेवाली, परम सौभाग्यवती तथा तीनों लोकोंको पुण्य प्रदान करनेवाली हैं

ສິດທະກ່າວວ່າ: ໃນການກ່ອນ ພຣະນາງ ຄົງຄາ ໄດ້ປະກົດອອກຈາກ ນາຣາຍະນະ ຜູ້ບໍ່ເສື່ອມສູນ. ນາງລົງມາຈາກພຣະບາດຂອງ ວິສນຸ—ຜ່ານວົງຟ້າແຫ່ງ ສິຊຸມາຣະ, ທຣຸວະ, ໂສມະ, ສູຣະຍະ ແລະ ວິສນຸໃນຮູບເມຣຸ—ແລ້ວມາພັກຢູ່ເທິງພຣະເສົາຂອງ ພຣະສິວະ; ຈາກນັ້ນນາງຕົກລົງສູ່ ພູຫິມາລະຍະ. ນາງແມ່ນທິດາຂອງກະສັດແຫ່ງພູ ຄື ຫິມາລະຍະ; ເປັນຄູ່ຄອງຂອງ ຫະຣະ (ສິວະ); ເປັນເຄື່ອງປະດັບອັນສົມຄວນແກ່ທັງສະຫວັນແລະແຜ່ນດິນ. ໂອ ພຣະຣາຊາ—ນາງເປັນມົງຄຸນໃນໂລກ, ເປັນຜູ້ເກື້ອກູນແກ່ສັດມີຊີວິດ, ແລະເປັນຜູ້ປະທານບຸນແກ່ສາມໂລກ.

Verse 90

मधुस्रवा घृतधारा घृतार्चि- महोर्मिभि: शोभिता ब्राह्मणैश्न । दिवश्ष्युता शिरसा55प्ता शिवेन गज्भावनीधात्‌ त्रिदिवस्य माता,श्रीभागीरथी मधुका स्रोत एवं पवित्र जलकी धारा बहाती हैं। जलती हुई घीकी ज्वालाके समान उनका उज्ज्वल प्रकाश है। वे अपनी उत्ताल तरड़ों तथा जलमें स्नान- संध्या करनेवाले ब्राह्मणोंसे सुशोभित होती हैं। वे जब स्वर्गसे नीचेकी ओर चलीं तब भगवान्‌ शिवने उन्हें अपने सिरपर धारण किया। फिर हिमालय पर्वतपर आकर वहाँसे वे इस पृथ्वीपर उतरी हैं। श्रीगंगाजी स्वर्गलोककी जननी हैं

ສິດທະກ່າວວ່າ: ສີຣີ ພາກີຣະທີ (ຄົງຄາ) ໄຫຼດ້ວຍຄວາມຫວານ ພຸ່ງອອກດັ່ງສາຍເນີຍໃສ ແລະສ່ອງສະຫວ່າງດັ່ງໄຟເນີຍໃສ. ນາງງາມສະຫງ່າດ້ວຍຄື້ນລົມອັນໃຫຍ່ ແລະດ້ວຍພຣາຫມະນທີ່ອາບນ້ຳໃນນາງ ແລະປະກອບພິທີສັນທະຍາ. ເມື່ອນາງລົງມາຈາກສະຫວັນ ພຣະສິວະໄດ້ຮັບໄວ້ແລະອຸ້ມຊູໄວ້ເທິງພຣະເສົາ; ແລ້ວເມື່ອຮອດພູຫິມາລະຍະ ນາງຈຶ່ງລົງສູ່ແຜ່ນດິນ. ດັ່ງນັ້ນ ຄົງຄາ—ພາກີຣະທີ—ຈຶ່ງຖືກສັນລະເສີນວ່າເປັນແມ່ແຫ່ງໂລກສະຫວັນ ເປັນຜູ້ຊຳລະບາບ ເປັນມົງຄຸນ ແລະຄ້ຳຈຸນຊີວິດແຫ່ງທັມມະຜ່ານການປະຕິບັດພິທີສັກສິດ.

Verse 91

योनिर्वरिष्ठा विरजा वितन्वी शय्याचिरा वारिवहा यशोदा । विश्वावती चाकृतिरिष्टसिद्धा गज़ोक्षितानां भुवनस्य पन्था:

ສິດທະກ່າວວ່າ: ນາງແມ່ນແຫຼ່ງກຳເນີດ ແລະຄັນອັນປະເສີດທີ່ສຸດຂອງສັດທັງປວງ—ບໍ່ມີມົນທິນ, ແຜ່ຊຶມທົ່ວ, ແລະກວ້າງໃຫຍ່ໄພສານ; ເປັນທີ່ພັກພິງແຕ່ໂບຮານ; ເປັນຜູ້ຫາບຫິ້ວນ້ຳ; ເປັນຜູ້ປະທານຊື່ສຽງ ແລະການຫຼ້ຽງຊີວິດ. ນາງຄ້ຳຈຸນຈັກກະວານທັງມວນ; ຮູບຮ່າງຂອງນາງເອງແມ່ນການສຳເລັດຂອງສິ່ງທີ່ປາດຖະໜາ ແລະທີ່ສຳເລັດຢ່າງຖືກຕ້ອງ. ນາງແມ່ນເສັ້ນທາງ ແລະເສົາຄ້ຳຂອງໂລກ, ຄ້ຳຈຸນໄດ້ແມ່ນແຕ່ຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ ແລະຜູ້ທີ່ດຳລົງຢູ່ຍືນຍາວ.

Verse 92

सबका कारण, सबसे श्रेष्ठ, रजोगुणरहित, अत्यन्त सूक्ष्म, मरे हुए प्राणियोंके लिये सुखद शगय्या, तीव्र वेगसे बहनेवाली, पवित्र जलका स्रोत बहानेवाली, यश देनेवाली, जगत्‌की रक्षा करनेवाली, सत्स्वरूपा तथा अभीष्टको सिद्ध करनेवाली भगवती गंगा अपने भीतर स्नान करनेवालोंके लिये स्वर्गका मार्ग बन जाती हैं ।। क्षान्त्या मह्मा गोपने धारणे च दीप्त्या कृशानोस्तपनस्य चैव । तुल्या गड्जा सम्मता ब्राह्मणानां गुहस्य ब्रह्म॒ण्यतया च नित्यम्‌,क्षमा, रक्षा तथा धारण करनेमें पृथ्वीके समान और तेजमें अग्नि एवं सूर्यके समान शोभा पानेवाली गंगाजी ब्राह्मणजातिपर सदा अनुग्रह करनेके कारण सुब्रह्मण्य कार्तिकेय तथा ब्राह्मणोंके लिये भी प्रिय एवं सम्मानित हैं

ສິດທາກ່າວວ່າ ພຣະນາງຄົງຄາ (Gaṅgā) ແມ່ນເຫດປັດໃຈສາກົນ ແລະເປັນຜູ້ຊໍາລະທີ່ສູງສຸດ—ປາສຈາກຄວາມປັ່ນປ່ວນແຫ່ງຣາໂຈຄຸນ (rajas), ລະອຽດລ້ຳລຶກຢ່າງຫາທຽບບໍ່ໄດ້, ແລະເປັນທີ່ນອນອັນສຸກສະບາຍແມ່ນແຕ່ສໍາລັບຜູ້ລ່ວງລັບ. ນ້ໍາຂອງນາງໄຫຼໄວ ປ່ອຍສາຍນ້ໍາບໍລິສຸດ, ປະທານຊື່ສຽງ, ປົກປ້ອງໂລກ, ເປັນສະພາບແທ້ ແລະສໍາເລັດຄວາມປາຖະໜາ. ຜູ້ໃດອາບນ້ໍາໃນນາງ ນາງກາຍເປັນທາງໄປສະຫວັນ. ໃນຄວາມອົດທົນ ນາງເຫມືອນແຜ່ນດິນ; ໃນການຄຸ້ມຄອງແລະຄໍ້າຈຸນ ກໍເຫມືອນແຜ່ນດິນ; ແລະໃນຄວາມສະຫວ່າງ ເຫມືອນໄຟແລະຕາເວັນ. ນາງໄດ້ຮັບການນັບຖືຈາກພຣາຫມັນຢູ່ເສມອ ແລະເປັນທີ່ຮັກແລະເຄົາລົບຂອງຄຸຫາ (Kārttikeya) ເນື່ອງຈາກນາງອຸປະຖຳສິ່ງທີ່ເປັນ brahmaṇya—ຄວາມຈົ່ງຮັກຕໍ່ພຣະພຣະຫມັນ ແລະການປົກປ້ອງລະບຽບອັນສັກສິດ—ຢູ່ເສມອ.

Verse 93

भ्रातृभि: सहितश्चक्रे यथावदनुपूर्वश: । ये सभी महात्मा महर्षि जब भीष्मजीको देखनेके लिये वहाँ पधारे, तब भाइयोंसहित राजा युधिष्ठिरने उनकी क्रमश: विधिवत्‌ पूजा की,ऋषिष्टतां विष्णुपदीं पुराणां सुपुण्यतोयां मनसापि लोके । सर्वात्मना जाह्ववीं ये प्रपन्ना- स्ते ब्रह्मण: सदनं सम्प्रयाता: ऋषियोंद्वारा जिनकी स्तुति होती है, जो भगवान्‌ विष्णुके चरणोंसे उत्पन्न, अत्यन्त प्राचीन तथा परम पावन जलसे भरी हुई हैं, उन गंगाजीकी जगत्‌में जो लोग मनके द्वारा भी सब प्रकारसे शरण लेते हैं वे देहत्यागके पश्चात्‌ ब्रह्मलोकमें जाते हैं

ໄວສັມປາຍະນະກ່າວວ່າ: ພຣະຣາຊາຢຸທິສຖິຣະ ພ້ອມດ້ວຍພີ່ນ້ອງ ໄດ້ປະກອບພິທີຕ້ອນຮັບ ແລະບູຊາຕາມລໍາດັບຢ່າງຖືກຕ້ອງ ແກ່ບັນດາມະຫາຣິສີຜູ້ໃຈໃຫຍ່ ທີ່ມາເພື່ອເບິ່ງພຣະພີສະມະ. ແລະສໍາລັບແມ່ນ້ໍາຈາຫນະວີ—ທີ່ຖືກຣິສີສັນລະເສີນ, ເກີດຈາກພຣະບາດຂອງພຣະວິສນຸ, ເກົ່າແກ່ ແລະເຕັມໄປດ້ວຍນ້ໍາອັນບໍລິສຸດຢ່າງຍິ່ງ—ຜູ້ໃດທີ່ແມ່ນແຕ່ໃນໃຈ ກໍຂໍພຶ່ງພານາງດ້ວຍທັງຊີວິດ ຫຼັງຈາກລະທິ້ງກາຍ ຈະໄດ້ເຖິງສະຖານຂອງພຣະພຣະຫມາ (Brahmā).

Verse 94

लोकानवेक्ष्य जननीव पुत्रान्‌ सर्वात्मना सर्वगुणोपपन्नान्‌ । तत्स्थनकं ब्राह्ममभीप्समानै- गज़ा सदैवात्मवशैरुपास्या,जैसे माता अपने पुत्रोंको स्नेहभरी दृष्टिसे देखती है और उनकी रक्षा करती है, उसी प्रकार गंगाजी सर्वात्मभावसे अपने आश्रयमें आये हुए सर्वगुणसम्पन्न लोकोंको कृपादृष्टिसे देखकर उनकी रक्षा करती हैं; अतः जो ब्रह्मलोकको प्राप्त करनेकी इच्छा रखते हैं उन्हें अपने मनको वशमें करके सदा मातृभावसे गंगाजीकी उपासना करनी चाहिये

ເຫມືອນແມ່ມອງລູກດ້ວຍສາຍຕາແຫ່ງຄວາມຮັກ ແລະປົກປ້ອງເຂົາ, ພຣະນາງຄົງຄາກໍເຊັ່ນດຽວກັນ ມອງເຫັນໂລກທັງຫຼາຍ—ຜູ້ມີຄຸນຄ່າຄົບຖ້ວນ ແລະຜູ້ມາພຶ່ງພານາງດ້ວຍທັງຊີວິດ—ດ້ວຍສາຍຕາເມດຕາ ແລະຄຸ້ມຄອງເຂົາ. ດັ່ງນັ້ນ ຜູ້ປາຖະໜາຈະໄດ້ຮັບພຣະໂລກພຣະຫມັນ (Brahma-loka) ຄວນຝຶກຄວບຄຸມໃຈ ແລະບູຊານາງເປັນນິດ ດ້ວຍຈິດໃຈແຫ່ງແມ່.

Verse 95

उस्रां पुष्टां मिषतीं विश्वभोज्या- मिरावतीं धारिणीं भूधराणाम्‌ | शिष्टाश्रयाममृतां ब्रह्म॒कान्तां गड्जां श्रयेदात्मवान्‌ सिद्धिकाम:,जो अमृतमय दूध देनेवाली, गौके समान सबको पुष्ट करनेवाली, सब कुछ देखनेवाली, सम्पूर्ण जगत्‌के उपयोगमें आनेवाली, अन्न देनेवाली तथा पर्वतोंको धारण करनेवाली हैं, श्रेष्ठ पुरुष जिनका आश्रय लेते हैं और जिन्हें ब्रह्माजी भी प्राप्त करना चाहते हैं; तथा जो अमृतस्वरूप हैं, उन भगवती गंगाजीका सिद्धिकामी जितात्मा पुरुषोंको अवश्य आश्रय लेना चाहिये

ສິດທາກ່າວວ່າ: ຜູ້ມີຕົນຄວບຄຸມ ແລະປາຖະໜາຄວາມສໍາເລັດທາງຈິດວິນຍານ ຄວນເຂົ້າພຶ່ງພາພຣະນາງຄົງຄາ—ນາງຜູ້ຫຼ້ຽງດູ ແລະເຝົ້າມອງຢູ່ເສມອ, ເປັນປະໂຫຍດແກ່ໂລກທັງປວງ, ເປັນຜູ້ປະທານອາຫານ ແລະເປັນຜູ້ຄໍ້າຈຸນພູເຂົາ. ນາງເປັນທີ່ພຶ່ງຂອງຜູ້ດີ ແລະແມ່ນແຕ່ພຣະພຣະຫມາກໍຍັງປາຖະໜາຈະເຖິງ; ນາງມີສະພາບເປັນອະມະຕະ. ບົດນີ້ຈັດວາງການສັດທາຕໍ່ຄົງຄາ ບໍ່ໃຫ້ເປັນແຕ່ຄໍາສັນລະເສີນ ແຕ່ເປັນວິໄນທາງຈິດໃຈ: ຄວາມຖ່ອມຕົນ, ການຄວບຄຸມຕົນ, ແລະການພຶ່ງພາພຣະພະຍົງອັນບໍລິສຸດເພື່ອຄວາມສໍາເລັດພາຍໃນ.

Verse 96

प्रसाद्य देवान्‌ सविभून्‌ समस्तान्‌ भगीरथस्तपसोग्रेण गड्भाम्‌ । गामानयत्‌ तामभिगम्य शश्चत्‌ पुंसां भयं नेह चामुत्र विद्यात्‌,राजा भगीरथ अपनी उग्र तपस्यासे भगवान्‌ शंकरसहित सम्पूर्ण देवताओंको प्रसन्न करके गंगाजीको इस पृथ्वीपर ले आये। उनकी शरणमें जानेसे मनुष्यको इहलोक और परलोकमें भय नहीं रहता

ດ້ວຍຕະປະສະອັນແຮງກ້າ ພຣະຣາຊາພະຄີຣະຖະ ໄດ້ເຮັດໃຫ້ເທວະທັງປວງ ພ້ອມທັງພຣະມະຫາເທວະ (Śiva) ພໍໃຈ ແລະນໍາແມ່ນ້ໍາຄົງຄາລົງມາສູ່ແຜ່ນດິນນີ້. ຜູ້ໃດເຂົ້າໄປພຶ່ງພານາງ ຈະບໍ່ຮູ້ຈັກຄວາມຢ້ານກົວ ທັງໃນໂລກນີ້ ແລະໃນໂລກຫນ້າ—ຢູ່ເສມອ.

Verse 97

उदाह्नत: सर्वथा ते गुणानां मयैकदेश: प्रसमीक्ष्य बुद्ध्या । शक्तिर्न मे काचिदिहास्ति वक्तुं गुणान्‌ सर्वान्‌ परिमातुं तथैव,ब्रह्मन्‌! मैंने अपनी बुद्धिसे सर्वथा विचारकर यहाँ गंगाजीके गुणोंका एक अंशमात्र बताया है। मुझमें कोई इतनी शक्ति नहीं है कि मैं यहाँ उनके सम्पूर्ण गुणोंका वर्णन कर सकूँ

ໂອ ພຣາຫມັນ! ຫຼັງຈາກຂ້ອຍໄດ້ພິຈາລະນາດ້ວຍປັນຍາຂອງຂ້ອຍຢ່າງຖ້ວນຖີ່, ຂ້ອຍໄດ້ກ່າວໄວ້ທີ່ນີ້ພຽງແຕ່ສ່ວນນ້ອຍໜຶ່ງຂອງຄຸນຄ່າຂອງນາງ ຕາມທີ່ຂ້ອຍສາມາດ. ຂ້ອຍບໍ່ມີພະລັງໃນໂລກນີ້ທີ່ຈະບັນຍາຍ—ຫຼືວັດໃຫ້ຄົບ—ຄຸນງາມຄວາມດີທັງປວງຂອງນາງໄດ້ເລີຍ.

Verse 98

मेरो: समुद्रस्य च सर्वयत्नै: संख्योपलानामुदकस्य वापि | शक्यं वक्तुं नेह गड़ाजलानां गुणाख्यानं परिमातुं तथैव,कदाचित्‌ सब प्रकारके यत्न करनेसे मेरु गिरिके प्रस्तरकणों और समुद्रके जलविन्दुओंकी गणना की जा सके; परंतु यहाँ गंगाजलके गुणोंका वर्णन तथा गणना करना कदापि सम्भव नहीं है

ສິດທະໄດ້ກ່າວວ່າ: ແມ່ນແຕ່ຈະພາກພຽນທຸກວິທີທາງ ກໍອາດຈະກ່າວໄດ້ເຖິງຈໍານວນກ້ອນຫີນນ້ອຍໆໃນພູເມຣຸ ແລະຍັງອາດຈະນັບໄດ້ເຖິງຈໍານວນຢອດນ້ໍາໃນມະຫາສະໝຸດ; ແຕ່ການບັນຍາຍ ແລະການນັບວັດຄຸນຄ່າຂອງນ້ໍາແຫ່ງແມ່ນ້ໍາຄົງຄາ ນັ້ນ ບໍ່ອາດເປັນໄປໄດ້ເລີຍ.

Verse 99

तस्मादेतान्‌ परया श्रद्धयोक्तान्‌ गुणान्‌ सर्वान्‌ जाह्नवीयात्‌ सदैव । भवेद्‌ वाचा मनसा कर्मणा च भक्‍्त्या युक्त: श्रद्धया श्रद्दधान:,अतः मैंने बड़ी श्रद्धाके साथ जो ये गंगाजीके गुण बताये हैं, उन सबपर विश्वास करके मन, वाणी, क्रिया, भक्ति और श्रद्धाके साथ आप सदा ही उनकी आराधना करें

ດັ່ງນັ້ນ ຈົ່ງເຊື່ອຖືດ້ວຍສັດທາອັນເຕັມປ່ຽມໃນຄຸນຄ່າທັງປວງຂອງ ຈາຫນະວີ (ຄົງຄາ) ທີ່ໄດ້ຖືກປະກາດດ້ວຍຄວາມເຄົາລົບສູງສຸດນີ້; ແລະຈົ່ງນະມັດສະການນາງຢ່າງສະເໝີ—ຄຸ້ມຄອງວາຈາ, ໃຈ, ແລະການກະທໍາ—ດ້ວຍພັກດີ, ສັດທາ, ແລະຄວາມເຄົາລົບ.

Verse 100

लोकानिमांस्त्रीन्‌ू यशसा वितत्य सिद्धि प्राप्प महतीं तां दुरापाम्‌ । गड्जाकृतानचिरेणैव लोकान्‌ यथ्थेष्टमिष्टान्‌ विहरिष्यसि त्वम्‌,इससे आप परम दुर्लभ उत्तम सिद्धि प्राप्त करके इन तीनों लोकोंमें अपने यशका विस्तार करते हुए शीघ्र ही गंगाजीकी सेवासे प्राप्त हुए अभीष्ट लोकोंमें इच्छानुसार विचरेंगे

ສິດທະກ່າວວ່າ: ເຈົ້າຈະແຜ່ຂະຫຍາຍຊື່ສຽງຂອງເຈົ້າໄປທົ່ວສາມໂລກ ແລະຈະບັນລຸສິດທິອັນຍິ່ງໃຫຍ່ ທີ່ຍາກຈະໄດ້ມາ. ແລະໃນໄມ່ຊ້າ ດ້ວຍບຸນກຸສົນທີ່ເກີດຈາກການຮັບໃຊ້ແມ່ນ້ໍາຄົງຄາ, ເຈົ້າຈະໄປເຖິງໂລກທີ່ປາຖະໜາ ທີ່ໄດ້ມາດ້ວຍບຸນນັ້ນ ແລະຈະທ່ອງທ່ຽວໃນນັ້ນໄດ້ຢ່າງເສຣີ ຕາມໃຈປາຖະໜາ.

Verse 101

तव मम च गुणैर्महानुभावा जुषतु मतिं सतत स्वधर्मयुक्तै: । अभिमतजनवत्सला हि गड्जा जगति युनक्ति सुखैश्ष भक्तिमन्तम्‌,महान्‌ प्रभावशाली भगवती भागीरथी आपकी और मेरी बुद्धिको सदा स्वधर्मानुकूल गुणोंसे युक्त करें। श्रीगंगाजी बड़ी भक्तवत्सला हैं। वे संसारमें अपने भक्तोंको सुखी बनाती हैं

ຂໍໃຫ້ເທວະນາງ ພາຄີຣະທີ (ຄົງຄາ) ຜູ້ມີຈິດໃຈຍິ່ງໃຫຍ່ ແລະມີອານຸພາບຫຼາຍ, ໂດຍຄຸນຄ່າທີ່ສອດຄ່ອງກັບທຳມະຂອງແຕ່ລະຄົນ, ຈົ່ງຂັດເກົ່າ ແລະທໍາໃຫ້ຄວາມເຂົ້າໃຈຂອງທັງເຈົ້າແລະຂ້ອຍ ໝັ້ນຄົງຢູ່ເສມອ. ເພາະຄົງຄາແທ້ຈິງແມ່ນຜູ້ເມດຕາຕໍ່ຜູ້ທີ່ນາງຮັກ; ໃນໂລກນີ້ ນາງປະທານຄວາມສຸກ ແລະຄວາມຜາສຸກໃຫ້ແກ່ຜູ້ມີພັກດີຕໍ່ນາງ.

Verse 102

भीष्म उवाच इति परममतिर्गुणानशेषान्‌ शिलरतसये त्रिपथानुयोगरूपान्‌ । बहुविधमनुशास्य तथ्यरूपान्‌ गगनततलं द्युतिमान्‌ विवेश सिद्ध:,भीष्मजी कहते हैं-युधिष्ठि!र! वह उत्तम बुद्धिवाला परम तेजस्वी सिद्ध शिलोख्छतृत्तिद्वारा जीविका चलानेवाले उस ब्राह्मणसे त्रिपथगा गंगाजीके उपर्युक्त सभी यथार्थ गुणोंका नाना प्रकारसे वर्णन करके आकाशगमें प्रविष्ट हो गया

ພີດສະມະກ່າວວ່າ: ດັ່ງນັ້ນ ສິດທະຜູ້ມີປັນຍາສູງສຸດ ແລະມີຮັດສະຫວ່າງໄສ ໄດ້ອົບຮົມພຣາຫມັນຜູ້ດຳລົງຊີວິດດ້ວຍ “ຊີລະວຶດຕິ” (ເກັບເມັດຂ້າວທີ່ເຫຼືອ) ດ້ວຍຫຼາຍວິທີ ແລະໄດ້ພັນລະນາຄຸນຄ່າອັນແທ້ຈິງອັນຫຼາກຫຼາຍຂອງ ຕຣິປະຖະຄາ—ຄື ຄົງຄາຜູ້ໄຫຼຜ່ານສາມພາກ—ຈົນຄົບຖ້ວນ ແລ້ວກໍເຂົ້າສູ່ຜືນຟ້າອັນກວ້າງໃຫຍ່.

Verse 103

शिलवृत्तिस्तु सिद्धस्य वाक्यै: सम्बोधितस्तदा | गड़ामुपास्य विधिवत्‌ सिद्धि प्राप सुदुर्लभाम्‌,वह शिलोज्छतवृत्तिवाला ब्राह्मण सिद्धके उपदेशसे गंगाजीके माहात्म्यको जानकर उनकी विधिवत्‌ उपासना करके परम दुर्लभ सिद्धिको प्राप्त हुआ

ແລ້ວພຣາຫມັນຜູ້ດຳລົງຊີວິດດ້ວຍຊີລະວຶດຕິ ໄດ້ຮັບການຕັກເຕືອນດ້ວຍຖ້ອຍຄຳຂອງສິດທະ ແລະໄດ້ບູຊາແມ່ນ້ຳຄົງຄາຕາມພິທີຢ່າງຖືກຕ້ອງ; ດ້ວຍຄວາມເຄົາລົບອັນມີວິໄນນັ້ນ ລາວໄດ້ບັນລຸສິດທິອັນຫາຍາກຢ່າງຍິ່ງ.

Verse 104

तथा त्वमपि कौन्तेय भक्‍्त्या परमया युत: । गड्भामभ्येहि सतत प्राप्स्यसे सिद्धिमुत्तमाम्‌,कुन्तीनन्दन! इसी प्रकार तुम भी पराभक्तिके साथ सदा गंगाजीकी उपासना करो। इससे तुम्हें उत्तम सिद्धि प्राप्त होगी

ດັ່ງນັ້ນແຫຼະ ໂອ ບຸດແຫ່ງກຸນຕີ, ຈົ່ງມີພັກຕິອັນສູງສຸດ ແລະເຂົ້າໄປຫາຄົງຄາ ບູຊານາງຢູ່ເປັນນິດ. ເຈົ້າຈະໄດ້ຮັບສິດທິອັນສູງສຸດ.

Verse 105

वैशम्पायन उवाच श्रुत्वेतिहासं भीष्मोक्तं गज़ाया: स्तवसंयुतम्‌ । युधिष्ठिर: परां प्रीतिमगच्छद्‌ भ्रातृभि: सह,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! भीष्मजीके द्वारा कहे हुए श्रीगंगाजीकी स्तुतिसे युक्त इस इतिहासको सुनकर भाइयोंसहित राजा युधिष्ठिरको बड़ी प्रसन्नता हुई

ໄວສັມປາຍະນະກ່າວວ່າ: ໂອ ຈະນະເມໄຈ! ເມື່ອພະຣາຊາຢຸທິສຖິຣະ ພ້ອມດ້ວຍພີ່ນ້ອງ ໄດ້ຟັງອິຕິຫາສະນີ້ທີ່ພີດສະມະເວົ້າ ອັນປະກອບດ້ວຍການສັນລະເສີນແມ່ນ້ຳຄົງຄາ ກໍເກີດຄວາມປິຕິຍິນດີຢ່າງຍິ່ງ.

Verse 106

भीष्मश्रिता: सुमधुरा: सर्वेन्द्रियमनोहरा: । पूजनके पश्चात्‌ वे महर्षि सुखपूर्वक बैठकर भीष्मजीसे सम्बन्ध रखनेवाली मधुर एवं मनोहर कथाएँ कहने लगे। उनकी वे कथाएँ सम्पूर्ण इन्द्रियों और मनको मोह लेती थीं,इतिहासमिमं पुण्यं शृूणुयाद्‌ यः पठेत वा । गड़्जाया: स्तवसंयुक्त स मुच्येत्‌ सर्वकिल्बिषै: जो गड़्ाजीके स्तवनसे युक्त इस पवित्र इतिहासका श्रवण अथवा पाठ करेगा वह समस्त पापोंसे मुक्त हो जायगा

ໄວສັມປາຍະນະກ່າວວ່າ: ຫຼັງຈາກພິທີບູຊາສຳເລັດແລ້ວ ມະຫາຣິສີທັງຫຼາຍນັ່ງຢ່າງສະບາຍ ແລະເລີ່ມເລົ່າເລື່ອງອັນຫວານຊື່ນ ນ່າຟັງ ທີ່ກ່ຽວພັນກັບພີດສະມະ—ເລື່ອງເຫຼົ່ານັ້ນຊັກຈູງທັງອິນທຣີ ແລະໃຈ. ຜູ້ໃດຟັງ ຫຼືອ່ານ ອິຕິຫາສະອັນບຸນນີ້ ທີ່ປະກອບດ້ວຍການສັນລະເສີນແມ່ນ້ຳຄົງຄາ ຜູ້ນັ້ນຈະພົ້ນຈາກມົນທິນແຫ່ງບາບທັງປວງ.

Verse 113

मेने दिविष्ठमात्मानं तुष्टया परमया युत:ः । शुद्ध अन्तःकरणवाले उन ऋषि-मुनियोंकी बातें सुनकर भीष्मजी बहुत संतुष्ट हुए और अपनेको स्वर्गमें ही स्थित मानने लगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ດ້ວຍຄວາມພໍໃຈອັນສູງສຸດ ພີສະມະເຫັນຕົນເອງດັ່ງຢູ່ໃນສະຫວັນແລ້ວ. ເມື່ອໄດ້ຟັງຖ້ອຍຄໍາອັນບໍລິສຸດຈາກໃຈຂອງພຣະລິສີທັງຫຼາຍ ທ່ານກໍເກີດຄວາມຊື່ນບານຢ່າງລຶກຊຶ້ງ.

Verse 123

अन्तर्धानं गता: सर्वे सर्वेषामेव पश्यताम्‌ । तदनन्तर वे महर्षिगण भीष्मजी और पाण्डवोंकी अनुमति लेकर सबके देखते-देखते ही वहाँसे अदृश्य हो गये

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ທຸກອົງຫາຍໄປຈາກສາຍຕາ ໃນຂະນະທີ່ທຸກຄົນກໍາລັງເບິ່ງຢູ່. ຕໍ່ຈາກນັ້ນ ບັນດາພຣະລິສີຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່—ໄດ້ຂໍລາດ້ວຍການອະນຸຍາດຈາກພີສະມະ ແລະ ພານດະວະ—ກໍຫາຍລັບໄປທັນທີ ຕໍ່ໜ້າຕາທຸກຄົນ.

Verse 143

उपतस्थुर्यथोद्यन्तमादित्यं मन्त्रकोविदा: । जैसे वेदमन्त्रोंके ज्ञाता ब्राह्मण उगते हुए सूर्यका उपस्थान करते हैं, उसी प्रकार प्रसन्न चित्त हुए समस्त पाण्डव कुरुश्रेष्ठ गड़ानन्दन भीष्मको प्रणाम करने लगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເຫມືອນພຣາຫມັນຜູ້ຊໍານານໃນມັນຕຣາເວດ ນົບນ້ອມບູຊາຕໍ່ພຣະອາທິດຍາມຂຶ້ນ, ພານດະວະທັງຫມົດຜູ້ມີໃຈຜ່ອງໃສ ກໍນົບນ້ອມກາບໄຫວ້ພີສະມະ ຜູ້ເປັນຍອດແຫ່ງກຸຣຸ ແລະເປັນບຸດແຫ່ງແມ່ນ້ໍາຄົງຄາ.

Verse 153

प्रकाशन्तो दिश: सर्वा विस्मयं परम ययु: । उन ऋषियोंकी तपस्याके प्रभावसे सम्पूर्ण दिशाओंको प्रकाशित होती देख पाण्डवोंको बड़ा विस्मय हुआ

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ທິດທັງປວງສ່ອງສະຫວ່າງ ແລະພານດະວະກໍຕົກຕະລຶງຢ່າງສູງສຸດ. ເມື່ອເຫັນທິດທັງຫມົດຖືກສ່ອງສະຫວ່າງໂດຍອໍານາດແຫ່ງຕະປະສະຍາ (ການບໍາເພັນພຣະຕະປະ) ຂອງພຣະລິສີເຫຼົ່ານັ້ນ ພວກເຂົາກໍພິສົດອັດສະຈັນຢ່າງຫຼວງ.

Frequently Asked Questions

The tension lies between intense austerity aimed at acquiring a supreme social-spiritual status and the claim that such status cannot be secured merely by desire or forceful striving when ethical qualification and inner discipline are lacking.

Śakra advises redirecting effort away from hazardous over-aspiration and toward conquering internal adversaries—anger, desire, aversion, pride, and contentiousness—since these determine elevation or decline more reliably than status-seeking tapas.

Rather than a formal phalāśruti, it provides an evaluative closure: brāhmaṇya is declared “sudur-labha” (exceedingly rare), and the outcome is framed conditionally—victory over inner enemies yields a good end; defeat by them results in a fall.