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सोपान-प्रवेश: ‘भक्ति का जन्म’ और ‘सगुण-साकार के सौंदर्य में चित्त-स्थापन’। बालकाण्ड मन को कथा-श्रवण योग्य बनाता है—नाम, रूप, गुण, लीला के माध्यम से चित्त की मलिनता घटाकर उसे मंगल-लग्न (अनुकूल काल) की तरह ‘अनुकूल-भाव’ में स्थिर करता है। प्रस्तुत खंड में विवाह-उत्सव का सामुदायिक आनंद ‘सत्संग’ का रूप लेता है: राम-रूप-दर्शन ही मोक्ष-सीढ़ी का प्रथम दृढ़ पायदान है।
ينتمي هذا المقطع إلى ذروة الراسا في بالا كاندا، حيث تنشر مشاهد موكب الزفاف بهاكتي راسا في المجتمع. النكهة السائدة ليست مجرد شرينغارا (الرومانسية)، بل "بهاكتي أناندا" القائم على شرينغارا - النعيم الأسمى المولود من حلاوة الشكل الإلهي؛ والراسات الداعمة هي أوتساها (الطاقة المنتشية)، وأدهبوتا (الدهشة)، والهاسيا الخفيف (المرح المبهج) في صخب المدينة والموسيقى وطقوس الترحيب. يصبح الحديث المتبادل بين نساء جاناكبور لغة ساتسانغ: إذ يعتبرنه ثمرة فضيلتهن السابقة، ويسمين درشان راما ولاكشمانا "ربحاً للعيون". إن ذهول جمع الآلهة (شيفا، براهما وغيرهم) يثبت أن هذه ليلا ليست دنيوية - بل هي تجلي البراهمان ساغونا المتعالي. هنا يمارس تولسي اتحاد نيرغونا وساغونا من خلال تأمل الجمال: فوصف الشكل يجمع العقل في تركيز أحادي، وهذا التركيز نفسه يصبح أساساً لاسم سمارانا. وهكذا يشكل هذا القسم، ضمن سلم الكاندا، صعوداً تدريجياً: "تطهير العقل → الشوق للدرشان → المراعاة الميمونة → الاستسلام لله".
Verse 642 (चौपाई)
जनक सुकृत मूरति बैदेही। दसरथ सुकृत रामु धरें देही।। इन्ह सम काँहु न सिव अवराधे। काहिं न इन्ह समान फल लाधे।। इन्ह सम कोउ न भयउ जग माहीं। है नहिं कतहूँ होनेउ नाहीं।। हम सब सकल सुकृत कै रासी। भए जग जनमि जनकपुर बासी।। जिन्ह जानकी राम छबि देखी। को सुकृती हम सरिस बिसेषी।। पुनि देखब रघुबीर बिआहू। लेब भली बिधि लोचन लाहू।। कहहिं परसपर कोकिलबयनीं। एहि बिआहँ बड़ लाभु सुनयनीं।। बड़ें भाग बिधि बात बनाई। नयन अतिथि होइहहिं दोउ भाई।।
جاناكا هو الفضيلة متجسدة، وكذلك فايديهي، وداشاراثا هو الفضيلة متجسدة، وراما يحمل ذلك الجسد. لم يعبد شيفا غيرهم، ولم يُنل في مكان آخر مثل هذا الثمر. لم يكن مثلهم أحد في العالم، ولا يوجد الآن، ولن يكون أبداً. نحن جميعاً مجموع الفضيلة، وُلدنا وأصبحنا سكان مدينة جاناكا. من هم محظوظون مثلنا، الذين رأينا جمال جاناكي وراما؟ وسنرى مرة أخرى زفاف رب سلالة راغو، وسنأخذ ربح عيوننا بوفرة. تتحدث النساء لبعضهن بأصوات مثل طائر الكوكل: في هذا الزفاف ربح عظيم للجميلات العيون. صنع القدر أمراً عظيماً، وستكون العيون ضيفتين للأخوين.
Verse 643 (दोहा/सोरठा)
बारहिं बार सनेह बस जनक बोलाउब सीय। लेन आइहहिं बंधु दोउ कोटि काम कमनीय।।310।।
اثنتي عشرة مرة، من أجل الحب، سينادي جاناكا سيتا، وسيأتي الأخوان لأخذها، بهجة مليون رغبة.
Verse 644 (चौपाई)
बिबिध भाँति होइहि पहुनाई। प्रिय न काहि अस सासुर माई।। तब तब राम लखनहि निहारी। होइहहिं सब पुर लोग सुखारी।। सखि जस राम लखनकर जोटा। तैसेइ भूप संग दुइ ढोटा।। स्याम गौर सब अंग सुहाए। ते सब कहहिं देखि जे आए।। कहा एक मैं आजु निहारे। जनु बिरंचि निज हाथ सँवारे।। भरतु रामही की अनुहारी। सहसा लखि न सकहिं नर नारी।। लखनु सत्रुसूदनु एकरूपा। नख सिख ते सब अंग अनूपा।। मन भावहिं मुख बरनि न जाहीं। उपमा कहुँ त्रिभुवन कोउ नाहीं।।
سيُرحب بهم بطرق كثيرة، لم يكن قط مثل هذا الصهر وابنة الصهر المحبوبان. مراراً وتكراراً حدقوا في راما ولاكشمانا، وامتلأ كل سكان المدينة بالسرور. كما كان راما مقترناً بلاكشمانا، هكذا رافق الملك الشابان. أسمر وأبيض، كل طرف جميل، وكل من جاء ورآهم تكلم هكذا. قال أحدهم: ماذا رأيت اليوم! كأن براهما نفسه قد شكلهم بيده. كان بهارات صورة راما نفسها، فجأة لم يستطع الرجال والنساء التمييز بينهما. ولاكشمانا واحد مع شاتروغنا، من الرأس إلى القدم، كل طرف فريد. يسرون القلب لكن لا يمكن وصفهم بالكلمات، ولا يوجد لهم تشبيه في العوالم الثلاثة.
Verse 645 (छंद)
उपमा न कोउ कह दास तुलसी कतहुँ कबि कोबिद कहैं। बल बिनय बिद्या सील सोभा सिंधु इन्ह से एइ अहैं।। पुर नारि सकल पसारि अंचल बिधिहि बचन सुनावहीं। ब्याहिअहुँ चारिउ भाइ एहिं पुर हम सुमंगल गावहीं।।
لا شاعر ولا عالم في أي مكان يستطيع تقديم تشبيه، يقول تولسيداس، لأن محيط القوة والتواضع والعلم والفضيلة والمجد موجود في هذين الأخوين وحدهما. كل نساء المدينة نشرن ثيابهن وتكلمن بهذه الكلمات لرب الخليقة: زوجوا الأخوة الأربعة في هذه المدينة، سنغني أغاني البركة.
Verse 646 (दोहा/सोरठा)
कहहिं परस्पर नारि बारि बिलोचन पुलक तन। सखि सबु करब पुरारि पुन्य पयोनिधि भूप दोउ।।311।।
تحدثت النساء فيما بينهن، وعيونهن مملوءة بدموع الفرح، وأجسادهن ترتجف بالنشوة. وقالت جميع الصديقات: "سنزيّن المدينة؛ فالمحيط الفاضل والملك كلاهما مباركان."
Verse 647 (चौपाई)
एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं। आनँद उमगि उमगि उर भरहीं।। जे नृप सीय स्वयंबर आए। देखि बंधु सब तिन्ह सुख पाए।। कहत राम जसु बिसद बिसाला। निज निज भवन गए महिपाला।। गए बीति कुछ दिन एहि भाँती। प्रमुदित पुरजन सकल बराती।। मंगल मूल लगन दिनु आवा। हिम रितु अगहनु मासु सुहावा।। ग्रह तिथि नखतु जोगु बर बारू। लगन सोधि बिधि कीन्ह बिचारू।। पठै दीन्हि नारद सन सोई। गनी जनक के गनकन्ह जोई।। सुनी सकल लोगन्ह यह बाता। कहहिं जोतिषी आहिं बिधाता।।
بهذه الطريقة حققوا كل رغبات قلوبهم، وامتلأت قلوبهم بالفرح والسرور. أولئك الملوك الذين جاءوا إلى مراسم اختيار سيتا للزواج، نظروا إلى الإخوة وسرّوا جميعاً. وأعلنوا مجد راما البعيد المدى، وعاد كل ملك إلى داره. وهكذا مرت أيام قليلة على هذا النحو، بينما كان المواطنون وجميع حفلة الزواج يفرحون. وجاء يوم الزواج الميمون، شهر مارغاشيرشا المشرق في فصل الشتاء. وفحص براهما وقت الزواج، ناظراً في الكواكب واليوم القمري والنجوم والأوقات المواتية. وأرسل رسالة إلى نارادا، بعد استشارة المنجمين في بلاط جاناكا. وسمع جميع الناس هذا الخبر، وقال المنجمون: "الخالق نفسه حاضر."
Verse 648 (दोहा/सोरठा)
धेनुधूरि बेला बिमल सकल सुमंगल मूल। बिप्रन्ह कहेउ बिदेह सन जानि सगुन अनुकुल।।312।।
كان وقت غبار البقر صافياً ومشرقاً، وهو أصل كل البركات؛ وخاطب ملك فيديها البراهمة، عالماً أن الفأل مواتٍ.
Verse 649 (चौपाई)
उपरोहितहि कहेउ नरनाहा। अब बिलंब कर कारनु काहा।। सतानंद तब सचिव बोलाए। मंगल सकल साजि सब ल्याए।। संख निसान पनव बहु बाजे। मंगल कलस सगुन सुभ साजे।। सुभग सुआसिनि गावहिं गीता। करहिं बेद धुनि बिप्र पुनीता।। लेन चले सादर एहि भाँती। गए जहाँ जनवास बराती।। कोसलपति कर देखि समाजू। अति लघु लाग तिन्हहि सुरराजू।। भयउ समउ अब धारिअ पाऊ। यह सुनि परा निसानहिं घाऊ।। गुरहि पूछि करि कुल बिधि राजा। चले संग मुनि साधु समाजा।।
قال الملك للكاهن: "لماذا التأخير الآن؟ ما سبب الانتظار؟" ثم استدعى وزيره ساتاناندا وأحضر جميع الأشياء الميمونة ورتبها. وسمعت الأصداف والطبول والآلات الموسيقية الكثيرة؛ وأُعدت جرار الماء الميمونة والعلامات الحسنة. وغنت النساء المتزوجات الجميلات الأغاني، ورتل البراهمة المقدسون تراتيل الفيدا. وانطلقوا بخشوع بهذه الطريقة، وذهبوا إلى حيث كانت حفلة الزواج نازلة. وعند رؤية الجمع في يد رب كوسالا، شعر ملك الآلهة بأنه قليل الشأن. وقال: "الآن حان وقت الانطلاق"، وعند سماع هذا، ضُربت الطبول. وبعد استشارة المعلم ومراعاة تقاليد العائلة، انطلق الملك، يرافقه جمع الحكماء والقديسين.
Verse 650 (दोहा/सोरठा)
भाग्य बिभव अवधेस कर देखि देव ब्रह्मादि। लगे सराहन सहस मुख जानि जनम निज बादि।।313।।
عند رؤية الحظ والبهاء في يد رب أيوديا، بدأ الآلهة، بدءاً من براهما، يمتدحونه بأفواههم الألف، عالمين أن ميلاده كان من أجل قضيتهم.
Verse 651 (चौपाई)
सुरन्ह सुमंगल अवसरु जाना। बरषहिं सुमन बजाइ निसाना।। सिव ब्रह्मादिक बिबुध बरूथा। चढ़े बिमानन्हि नाना जूथा।। प्रेम पुलक तन हृदयँ उछाहू। चले बिलोकन राम बिआहू।। देखि जनकपुरु सुर अनुरागे। निज निज लोक सबहिं लघु लागे।। चितवहिं चकित बिचित्र बिताना। रचना सकल अलौकिक नाना।। नगर नारि नर रूप निधाना। सुघर सुधरम सुसील सुजाना।। तिन्हहि देखि सब सुर सुरनारीं। भए नखत जनु बिधु उजिआरीं।। बिधिहि भयह आचरजु बिसेषी। निज करनी कछु कतहुँ न देखी।।
عرف الآلهة أن هذا وقت مبارك جداً؛ فأمطروا الزهور وضربوا آلاتهم. وصعد شيفا وبراهما والحكماء الآخرون، في مجموعات مختلفة، إلى مركباتهم السماوية. وأجسادهم ترتجف بالحب، وقلوبهم مملوءة بالفرح، انطلقوا لمشاهدة زفاف راما. وعند رؤية جاناكبور، رقّت قلوب الآلهة؛ وبدا لكل منهم عالمه صغيراً. ونظروا بذهول إلى الأجنحة الغريبة والعجيبة، وعند جميع الخلقات المتنوعة غير الأرضية. وكان رجال المدينة ونساؤها كنوزاً من الجمال، رقيقين، فاضلين، حسني السلوك وحكماء. وعند رؤيتهم، خفت بريق جميع الآلهة وزوجاتهم، كما تخفت النجوم بضوء القمر. وحتى براهما شعر بذهول خاص؛ فلم يرَ في أي مكان شيئاً من صنعه هو.
Verse 652 (दोहा/सोरठा)
सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज भुलाहु। हृदयँ बिचारहु धीर धरि सिय रघुबीर बिआहु।।314।।
شرح شيفا لجميع الآلهة: "لا تضيعوا في الدهشة. كونوا ثابتين في القلب وتأملوا: هذا زفاف سيتا ورب راغو."
Verse 653 (चौपाई)
जिन्ह कर नामु लेत जग माहीं। सकल अमंगल मूल नसाहीं।। करतल होहिं पदारथ चारी। तेइ सिय रामु कहेउ कामारी।। एहि बिधि संभु सुरन्ह समुझावा। पुनि आगें बर बसह चलावा।। देवन्ह देखे दसरथु जाता। महामोद मन पुलकित गाता।। साधु समाज संग महिदेवा। जनु तनु धरें करहिं सुख सेवा।। सोहत साथ सुभग सुत चारी। जनु अपबरग सकल तनुधारी।। मरकत कनक बरन बर जोरी। देखि सुरन्ह भै प्रीति न थोरी।। पुनि रामहि बिलोकि हियँ हरषे। नृपहि सराहि सुमन तिन्ह बरषे।।
أولئك الذين يذكر العالم أسماءهم يدمر أصل كل سوء. وتصبح الأهداف الأربع للحياة في راحة اليد؛ لذلك سمّى رب الحب نفسه سيتا وراما. وبهذه الطريقة أوضح شيفا للآلهة؛ ثم قاد موكب الزواج إلى الأمام. ورأى الآلهة أن داشاراثا قد وصل؛ فكان قلبه مملوءاً ببهجة عظيمة، وجسده يرتجف بالفرح. ومع جمع الحكماء، آلهة الأرض، كأنهم متجسدون، قدموا له خدمة محبة. وتألق أبناؤه الأربعة النبلاء في صحبته، كأن الأهداف الأربع للحياة قد اتخذت شكلاً جسدياً. وامتزج الزمرد والذهب، الداكن والفاتح؛ وعند رؤيتهم، شعر الآلهة بحب كبير. ثم، عند النظر إلى راما مرة أخرى، فرحت قلوبهم؛ وأثنوا على الملك وأمطروا عليه الزهور.
Verse 654 (दोहा/सोरठा)
राम रूपु नख सिख सुभग बारहिं बार निहारि। पुलक गात लोचन सजल उमा समेत पुरारि।।315।।
شكل راما، الجميل من ظفر القدم إلى طرف الشعر، نظروا إليه مراراً وتكراراً؛ وأجسادهم ترتجف، وعيونهم مبللة بالدموع، كل من أوما وعدو المدن.
Verse 655 (चौपाई)
केकि कंठ दुति स्यामल अंगा। तड़ित बिनिंदक बसन सुरंगा।। ब्याह बिभूषन बिबिध बनाए। मंगल सब सब भाँति सुहाए।। सरद बिमल बिधु बदनु सुहावन। नयन नवल राजीव लजावन।। सकल अलौकिक सुंदरताई। कहि न जाइ मनहीं मन भाई।। बंधु मनोहर सोहहिं संगा। जात नचावत चपल तुरंगा।। राजकुअँर बर बाजि देखावहिं। बंस प्रसंसक बिरिद सुनावहिं।। जेहि तुरंग पर रामु बिराजे। गति बिलोकि खगनायकु लाजे।। कहि न जाइ सब भाँति सुहावा। बाजि बेषु जनु काम बनावा।।
تنافست رقاب الطاووس مع لمعان أطرافه الداكنة؛ وثيابه، المشرقة كومضات البرق، كانت بألوان كثيرة. وللزفاف زُين بزخارف متنوعة؛ وزادت كل العلامات الميمونة من جماله بكل طريق. وكان وجهه جميلاً كقمر الخريف الصافي؛ وعيناه، الطازجتان كاللوتس، أخجلتا اللوتس. وكل جماله كان غير أرضي؛ لا يمكن وصفه، فالقلب نفسه مفتون. وركب إخوة وسيمون بجانبه، يوجهون خيولهم النشيطة وهم يسيرون. وأظهر الأمراء خيولهم النبيلة وأعلنوا مجد سلالتهم. وعلى الحصان الذي امتطاه راما، عند رؤية مشيته، خجل ملك الطيور. لا يمكن وصف كم كان جميلاً بكل طريق؛ فالحصان وزينته بدا وكأنهما خلق من الحب نفسه.
Verse 656 (छंद)
जनु बाजि बेषु बनाइ मनसिजु राम हित अति सोहई। आपनें बय बल रूप गुन गति सकल भुवन बिमोहई।। जगमगत जीनु जराव जोति सुमोति मनि मानिक लगे। किंकिनि ललाम लगामु ललित बिलोकि सुर नर मुनि ठगे।।
كأن كاماديفا إله الحب نفسه قد صنع زينة الحصان لسرور راما، فكانت في غاية الجمال. وبجمالها وقوتها وحسنها وفضائلها، سحرت جميع العوالم. كان السرج يلمع واللجام يشع نوراً، وقد رُصّع باللآلئ والياقوت. أجراس الجلاجل الرنانة واللجام الجميل، عند رؤيتها، سُحرت الآلهة والبشر والحكماء.
Verse 657 (दोहा/सोरठा)
प्रभु मनसहिं लयलीन मनु चलत बाजि छबि पाव। भूषित उड़गन तड़ित घनु जनु बर बरहि नचाव।।316।।
كان ذهن الرب منغمراً كلياً بسيطاً، وبينما كان يركب، كان جمال حصانه نعيماً للعيون. زُينت السماء بالغيوم كالبرق، وكأن أجود الخيول قد جُعلت ترقص.
Verse 658 (चौपाई)
जेहिं बर बाजि रामु असवारा। तेहि सारदउ न बरनै पारा।। संकरु राम रूप अनुरागे। नयन पंचदस अति प्रिय लागे।। हरि हित सहित रामु जब जोहे। रमा समेत रमापति मोहे।। निरखि राम छबि बिधि हरषाने। आठइ नयन जानि पछिताने।। सुर सेनप उर बहुत उछाहू। बिधि ते डेवढ़ लोचन लाहू।। रामहि चितव सुरेस सुजाना। गौतम श्रापु परम हित माना।। देव सकल सुरपतिहि सिहाहीं। आजु पुरंदर सम कोउ नाहीं।। मुदित देवगन रामहि देखी। नृपसमाज दुहुँ हरषु बिसेषी।।
الحصان النبيل الذي امتطاه راما، لم تستطع سارادا أن تُثني عليه بما يكفي. تعلق شانكارا بشكل راما، وبدا لعينيه الخمس محبوباً جداً. عندما نظر راما مع سيطا إلى هاري بمحبة، سُحر رب لاكشمي مع لاكشمي. عند رؤية جمال راما، ابتهج براهما، وعندما علم أن له ثماني عيون فقط، ندم. في قلوب جيش الآلهة كان ابتهاج عظيم، ومن براهما اكتسبوا ربح عيون إضافية. نظر ملك الآلهة الحكيم إلى راما واعتبر لعنة غوتاما أعظم نعمة. حسد جميع الآلهة ملك الآلهة، فلا يوجد اليوم من هو مثل إندرا. نظرت مجموعة الآلهة المسرورة إلى راما، وفي كلا مجلسي الملوك كان الفرح فائقاً.
Verse 659 (छंद)
अति हरषु राजसमाज दुहु दिसि दुंदुभीं बाजहिं घनी। बरषहिं सुमन सुर हरषि कहि जय जयति जय रघुकुलमनी।। एहि भाँति जानि बरात आवत बाजने बहु बाजहीं। रानि सुआसिनि बोलि परिछनि हेतु मंगल साजहीं।।
في كلا المجلسين الملكيين كان فرح عظيم، ومن كل جانب كانت الطبول تدق بكثافة. ابتهجت الآلهة وأمطرت الزهور صارخة: النصر، النصر لجوهرة سلالة راغو! هكذا اقتربت موكب الزفاف مع العديد من الآلات الموسيقية تعزف. نادت الملكات مع الزوجات المباركات بالبركات وهيّأن جميع الاستعدادات لمراسم الزفاف.
Verse 660 (दोहा/सोरठा)
सजि आरती अनेक बिधि मंगल सकल सँवारि। चलीं मुदित परिछनि करन गजगामिनि बर नारि।।317।।
بعد تحضير الآراتي بطرق عديدة وترتيب جميع الأشياء المباركة، خرجت نساء القصر بفرح لأداء المراسم، تلك النساء الفاضلات يتحركن بمشية الفيلة.
Verse 661 (चौपाई)
बिधुबदनीं सब सब मृगलोचनि। सब निज तन छबि रति मदु मोचनि।। पहिरें बरन बरन बर चीरा। सकल बिभूषन सजें सरीरा।। सकल सुमंगल अंग बनाएँ। करहिं गान कलकंठि लजाएँ।। कंकन किंकिनि नूपुर बाजहिं। चालि बिलोकि काम गज लाजहिं।। बाजहिं बाजने बिबिध प्रकारा। नभ अरु नगर सुमंगलचारा।। सची सारदा रमा भवानी। जे सुरतिय सुचि सहज सयानी।। कपट नारि बर बेष बनाई। मिलीं सकल रनिवासहिं जाई।। करहिं गान कल मंगल बानीं। हरष बिबस सब काहुँ न जानी।।
كانت جميعهن ذوات وجوه كالقمر وعيون كأعين الغزال، وكان كل جسد مزيناً بالجمال يفيض بسكر الحب. لبسن ملابس بألوان متنوعة، وزُينت أجسادهن بجميع أنواع الحلي. زُينت أطرافهن بجميع العلامات المباركة، وغنين بأصوات أخجلت طيور الوقواق. رنت الأساور والأحزمة والخلاخيل، وعند رؤية مشيتهن، حتى فيل كاماديفا خجل. عزفت آلات موسيقية بأنواع كثيرة، وامتلأت السماء والمدينة بالأصوات المباركة. ساتشي وشاردا وراما وبهافاني، تلك الإلهات الجميلات الطاهرات الحكيمات بطبيعتهن، اتخذن هيئة نساء جميلات متنكرات، وذهبن جميعاً وانضممن إلى نساء القصر. غنين أغاني مباركة بأصوات عذبة، وغمرهن الفرح حتى لم يعرفن شيئاً عن أحد.
Verse 662 (छंद)
को जान केहि आनंद बस सब ब्रह्मु बर परिछन चली। कल गान मधुर निसान बरषहिं सुमन सुर सोभा भली।। आनंदकंदु बिलोकि दूलहु सकल हियँ हरषित भई। अंभोज अंबक अंबु उमगि सुअंग पुलकावलि छई।।
من يمكنه أن يعرف بأي فرح خرجت جميع نساء براهما بزينتهن الجميلة؟ بأغاني عذبة وطبول، أمطرت الآلهة الزهور، وتألق الجمال. عند رؤية العريس، أصل كل فرح، امتلأت جميع القلوب بسرور. فيضت العيون كاللوتس والقلوب والمياه، وظهرت قشعريرة النشوة في كل مكان.
Verse 663 (दोहा/सोरठा)
जो सुख भा सिय मातु मन देखि राम बर बेषु। सो न सकहिं कहि कलप सत सहस सारदा सेषु।।318।।
الفرح الذي ملأ قلب والدة سيطا عند رؤية راما بملابس زفافه، ذلك الفرح لم تستطع سارادا وشيشا أن تصفه حتى في مئة ألف سنة.
Verse 664 (चौपाई)
नयन नीरु हटि मंगल जानी। परिछनि करहिं मुदित मन रानी।। बेद बिहित अरु कुल आचारू। कीन्ह भली बिधि सब ब्यवहारू।। पंच सबद धुनि मंगल गाना। पट पाँवड़े परहिं बिधि नाना।। करि आरती अरघु तिन्ह दीन्हा। राम गमनु मंडप तब कीन्हा।। दसरथु सहित समाज बिराजे। बिभव बिलोकि लोकपति लाजे।। समयँ समयँ सुर बरषहिं फूला। सांति पढ़हिं महिसुर अनुकूला।। नभ अरु नगर कोलाहल होई। आपनि पर कछु सुनइ न कोई।। एहि बिधि रामु मंडपहिं आए। अरघु देइ आसन बैठाए।।
عندما علمن أن الدموع في عيونهن فأل حسن، قامت الملكات بالمراسم بقلوب فرحة. وفقاً للطقوس الفيدية وتقاليد العائلة، أديت جميع الشعائر بشكل جيد. مع الأصوات الموسيقية الخمسة والأغاني المباركة، فُرشت الأقمشة والمظلات بطرق عديدة. أديت الآراتي وقُدمت القرابين، ثم سار راما إلى جناح الزفاف. جلس داشاراثا مع حاشيته، وعند رؤية ذلك البهاء، خجل رب العالمين. في الوقت المناسب أمطرت الآلهة الزهور، وتلى الحكماء بركات السلام. امتلأت السماء والمدينة بالضجيج، ولم يسمع أحد شيئاً، لا لنفسه ولا لغيره. بهذه الطريقة جاء راما إلى الجناح، وتقبل القرابين وجلس على العرش.
Verse 665 (छंद)
बैठारि आसन आरती करि निरखि बरु सुखु पावहीं। मनि बसन भूषन भूरि वारहिं नारि मंगल गावहीं।। ब्रह्मादि सुरबर बिप्र बेष बनाइ कौतुक देखहीं। अवलोकि रघुकुल कमल रबि छबि सुफल जीवन लेखहीं।।
بعد إجلاسهن وأداء مراسم الآراتي، ينظرن إلى العريس ويحصلن على السرور. تغني النساء أغاني مباركة ويقدمن بكثرة الجواهر والملابس والحلي. اتخذ براهما وغيره من الآلهة هيئة براهمة ليشهدوا هذا المشهد ببهجة. عند تأملهم لوتس سلالة راغو، يعتبرون حياتهم مثمرة، كبهاء الشمس.
Verse 666 (दोहा/सोरठा)
नाऊ बारी भाट नट राम निछावरि पाइ। मुदित असीसहिं नाइ सिर हरषु न हृदयँ समाइ।।319।।
الحلاق، والربان، والشاعر، والممثل، بعد أن نالوا عطايا راما الكريمة، يحنون رؤوسهم ببركة فرحة، وقلوبهم لا تسع فرحها.
परंपरानुसार यह ‘विवाह-उत्सव/बरात-दर्शन’ खंड पढ़ने-सुनने से मंगल-बुद्धि, गृह-कलह-शमन, और ‘राम-रूप-स्मृति’ दृढ़ होती है। ‘जिन्ह कर नामु लेत…’ जैसी पंक्तियाँ नाम-स्मरण का फल—अमंगल-नाश—प्रत्यक्ष करती हैं; अतः इसे शुभ-कार्य, विवाह, गृह-प्रवेश, और सत्संग में मंगल-पाठ हेतु विशेष मानते हैं।
मंगल-प्रसंगों में प्रचलित समपुट: (1) ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ (नाम-जप-समपुट), या (2) ‘सियावर रामचंद्र की जय’ को प्रत्येक दोहे/खंड के अंत में। कुछ परंपराओं में ‘राम रामेति रामेति…’ (विष्णु-सहस्रनाम-प्रसिद्ध) को भी समपुट रूप में जोड़ा जाता है।
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