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त्याग-दीक्षा का सोपान: राज्य-सुख और गृह-रमणीयता के बीच ‘राम-आज्ञा’ को सर्वोच्च मानकर वैराग्य, करुणा, और धर्म-निष्ठा की परीक्षा। यह चरण साधक को सिखाता है कि प्रेम (स्नेह) को आसक्ति न बनने देकर उसे ‘आज्ञा-पालन’ और ‘राम-चरणानुराग’ में रूपान्तरित किया जाए।
此段将“离别所生之悲悯”转为“法之智慧”。四日既过,城中众人恳求“无西娅与罗摩归来则不善”,在民心中确立罗摩—西娅双侣不可分离;又称林居“胜似亿万天城之安乐”,宣示舍离即为至乐。继而后宫与遮那迦家眷的对话,使悲味愈浓,却不令其坠为绝望:苏蜜特拉与考萨利娅之言,以“自在天之旨(Īśa-rajāī)”为前,禁止归咎怨尤。于此地基上,婆罗多行传之伟大显现——信爱的典范在于融入“罗摩之命”,超越私利与所谓公益。由是此段教行者:净炼情爱,使之成为清净“深恋(anurāga)”——此即阶梯之行。
Verse 572 (चौपाई)
एहि बिधि बासर बीते चारी। रामु निरखि नर नारि सुखारी।। दुहु समाज असि रुचि मन माहीं। बिनु सिय राम फिरब भल नाहीं।। सीता राम संग बनबासू। कोटि अमरपुर सरिस सुपासू।। परिहरि लखन रामु बैदेही। जेहि घरु भाव बाम बिधि तेही।। दाहिन दइउ होइ जब सबही। राम समीप बसिअ बन तबही।। मंदाकिनि मज्जनु तिहु काला। राम दरसु मुद मंगल माला।। अटनु राम गिरि बन तापस थल। असनु अमिअ सम कंद मूल फल।। सुख समेत संबत दुइ साता। पल सम होहिं न जनिअहिं जाता।।
如此四日过去,男女众人瞻仰罗摩,心中充满喜悦。两群人心中生起如此爱意,没有悉多,罗摩根本不愿出行。悉多与罗摩在林中流放,胜过居住在天神之城千万倍。罗什曼那避开罗摩与毗提诃女,他喜欢哪户人家,就去那里。但当发现不合适时,他便回来住在罗摩附近的林中。每日三时在曼达基尼河沐浴,得见罗摩即是喜悦与吉祥的花鬘。罗摩游历山峦、森林与仙人居所,以此为乐,以根茎、果实、块茎为食,如甘露一般。如此十二年幸福度过,不觉得是片刻,也不觉得是岁月流逝。
Verse 573 (दोहा/सोरठा)
एहि सुख जोग न लोग सब कहहिं कहाँ अस भागु।। सहज सुभायँ समाज दुहु राम चरन अनुरागु।।280।।
见此幸福,众人皆说:何处有如此福分?两群人自然而然地虔诚依止于罗摩足下。
Verse 574 (चौपाई)
एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं। बचन सप्रेम सुनत मन हरहीं।। सीय मातु तेहि समय पठाईं। दासीं देखि सुअवसरु आईं।। सावकास सुनि सब सिय सासू। आयउ जनकराज रनिवासू।। कौसल्याँ सादर सनमानी। आसन दिए समय सम आनी।। सीलु सनेह सकल दुहु ओरा। द्रवहिं देखि सुनि कुलिस कठोरा।। पुलक सिथिल तन बारि बिलोचन। महि नख लिखन लगीं सब सोचन।। सब सिय राम प्रीति कि सि मूरती। जनु करुना बहु बेष बिसूरति।। सीय मातु कह बिधि बुधि बाँकी। जो पय फेनु फोर पबि टाँकी।।
如此他们满足一切心愿,听闻罗摩充满爱意的话语,心被摄受。那时悉多的母亲派遣侍女,见良机已至。听说遮那迦王后到来,悉多的婆婆急忙相迎。憍萨厘雅恭敬接待,赐座于适当之时。两人皆充满德行与慈爱,见之闻之,金刚亦会融化。身体颤栗,眼中含泪,以指甲在地上画线,陷入沉思。众人见悉多与罗摩之爱,如慈悲化现。悉多母亲言辞巧妙智慧,如以针刺穿乳上之沫。
Verse 575 (दोहा/सोरठा)
सुनिअ सुधा देखिअहिं गरल सब करतूति कराल। जहँ तहँ काक उलूक बक मानस सकृत मराल।।281।।
听此甘露,见彼毒药,世间一切作为皆可怖。处处有乌鸦、猫头鹰、苍鹭,人中罕见天鹅。
Verse 576 (चौपाई)
सुनि ससोच कह देबि सुमित्रा। बिधि गति बड़ि बिपरीत बिचित्रा।। जो सृजि पालइ हरइ बहोरी। बाल केलि सम बिधि मति भोरी।। कौसल्या कह दोसु न काहू। करम बिबस दुख सुख छति लाहू।। कठिन करम गति जान बिधाता। जो सुभ असुभ सकल फल दाता।। ईस रजाइ सीस सबही कें। उतपति थिति लय बिषहु अमी कें।। देबि मोह बस सोचिअ बादी। बिधि प्रपंचु अस अचल अनादी।। भूपति जिअब मरब उर आनी। सोचिअ सखि लखि निज हित हानी।। सीय मातु कह सत्य सुबानी। सुकृती अवधि अवधपति रानी।।
须弥特拉听闻后忧愁地说:命运的途径极其奇特不可思议。那创造、护持、又毁灭者,如孩童嬉戏,其道难测。憍萨厘雅说:不应责怪任何人,在业力支配下,苦乐来去。造物主知晓业力之难行,他是善恶一切果报的赐予者。主之意志为一切之首,创造、护持、毁灭皆为其戏。女神为执着所覆,徒然忧愁,命运之幻象自古如此不变。国王或生或死,皆自招致。朋友啊,见己损失,勿忧愁。悉多母亲说真实语:善德之人啊,阿逾陀之主。
Verse 577 (दोहा/सोरठा)
लखनु राम सिय जाहुँ बन भल परिनाम न पोचु। गहबरि हियँ कह कौसिला मोहि भरत कर सोचु।।282।।
让罗什曼那、罗摩和悉多去森林吧,结果会是好的,不要悲伤。乔萨莱雅心情沉重地说道:我唯一的忧虑是为婆罗多。
Verse 578 (चौपाई)
ईस प्रसाद असीस तुम्हारी। सुत सुतबधू देवसरि बारी।। राम सपथ मैं कीन्ह न काऊ। सो करि कहउँ सखी सति भाऊ।। भरत सील गुन बिनय बड़ाई। भायप भगति भरोस भलाई।। कहत सारदहु कर मति हीचे। सागर सीप कि जाहिं उलीचे।। जानउँ सदा भरत कुलदीपा। बार बार मोहि कहेउ महीपा।। कसें कनकु मनि पारिखि पाएँ। पुरुष परिखिअहिं समयँ सुभाएँ। अनुचित आजु कहब अस मोरा। सोक सनेहँ सयानप थोरा।। सुनि सुरसरि सम पावनि बानी। भईं सनेह बिकल सब रानी।।
承蒙上主恩典与您的祝福,我的儿子和儿媳如同森林中的神明。我从未违背对罗摩的誓言,这一点我以真诚之心向您宣告,我的朋友。婆罗多的品德、美德、谦逊和伟大众所周知,他对兄弟的虔诚与信任是善良的。即使辩才天女试图描述他,也会不知所措,就像用贝壳去舀干大海。我一直知道婆罗多是家族的光芒,国王一次又一次地告诉我。黄金用试金石检验,人在时机中考验。我今天所说的不恰当,在悲伤与深情中,我智慧浅薄。听到这些如天神之河般纯净的话语,所有王后都被爱所感动。
Verse 579 (दोहा/सोरठा)
कौसल्या कह धीर धरि सुनहु देबि मिथिलेसि। को बिबेकनिधि बल्लभहि तुम्हहि सकइ उपदेसि।।283।।
乔萨莱雅说:要耐心,听我说,女神啊,弥提罗国王的女儿。谁是智慧之宝,能够给您的心上人或您本人提出建议呢?
Verse 580 (चौपाई)
रानि राय सन अवसरु पाई। अपनी भाँति कहब समुझाई।। रखिअहिं लखनु भरतु गबनहिं बन। जौं यह मत मानै महीप मन।। तौ भल जतनु करब सुबिचारी। मोरें सौचु भरत कर भारी।। गूढ़ सनेह भरत मन माही। रहें नीक मोहि लागत नाहीं।। लखि सुभाउ सुनि सरल सुबानी। सब भइ मगन करुन रस रानी।। नभ प्रसून झरि धन्य धन्य धुनि। सिथिल सनेहँ सिद्ध जोगी मुनि।। सबु रनिवासु बिथकि लखि रहेऊ। तब धरि धीर सुमित्राँ कहेऊ।। देबि दंड जुग जामिनि बीती। राम मातु सुनी उठी सप्रीती।।
王后找到机会与国王交谈,便以自己的方式开始解释。如果国王的心接受这个建议,那就让罗什曼那和婆罗多不要去森林。那么我将深思熟虑地采取适当措施,我对婆罗多的忧虑很深。婆罗多心中怀着深厚的感情,我担心他不会安好。看到他的本性,听到他朴实的话语,盖凯伊王后被慈悲之情所感动。天空中落下花雨,到处响起祝福之声,连成就者、瑜伽士和仙人都被柔情所感动。整个宫殿一片混乱,这时苏米特拉镇定下来,开口说话。夜晚过去,清晨来临,罗摩的母亲怀着爱意起身。
Verse 581 (दोहा/सोरठा)
बेगि पाउ धारिअ थलहि कह सनेहँ सतिभाय। हमरें तौ अब ईस गति के मिथिलेस सहाय।।284।।
她说:快把脚踏在地上,怀着爱与真诚说话。对我来说,现在唯一的依靠就是弥提罗之主的帮助。
Verse 582 (चौपाई)
लखि सनेह सुनि बचन बिनीता। जनकप्रिया गह पाय पुनीता।। देबि उचित असि बिनय तुम्हारी। दसरथ घरिनि राम महतारी।। प्रभु अपने नीचहु आदरहीं। अगिनि धूम गिरि सिर तिनु धरहीं।। सेवकु राउ करम मन बानी। सदा सहाय महेसु भवानी।। रउरे अंग जोगु जग को है। दीप सहाय कि दिनकर सोहै।। रामु जाइ बनु करि सुर काजू। अचल अवधपुर करिहहिं राजू।। अमर नाग नर राम बाहुबल। सुख बसिहहिं अपनें अपने थल।। यह सब जागबलिक कहि राखा। देबि न होइ मुधा मुनि भाषा।।
看到她的爱,听到她谦卑的话语,遮纳迦的女儿抱住她神圣的双足。王后啊,您的恳求是恰当的,您是达沙拉塔家中罗摩的母亲。他们甚至尊敬自己的下属,他们把火的烟雾顶在头上。仆人在行动、思想和言语上都是王者,愿湿婆和帕尔瓦蒂永远帮助您。您的身体值得世人的尊敬,就像一盏如太阳般闪耀的灯。罗摩将去森林完成众神的事业,并将坚定不移地在阿约提亚统治。凭借罗摩臂膀的力量,天神、那伽和人类将在各自的居所幸福地生活。我把这一切作为预言说出,王后啊,不要认为仙人的话语是徒劳的。
Verse 583 (दोहा/सोरठा)
अस कहि पग परि पेम अति सिय हित बिनय सुनाइ।। सिय समेत सियमातु तब चली सुआयसु पाइ।।285।।
说完这些,她伏在她的脚下,表现出深厚的爱,并为悉多请求。然后悉多和她的母亲一起,得到许可后离开了。
Verse 584 (चौपाई)
प्रिय परिजनहि मिली बैदेही। जो जेहि जोगु भाँति तेहि तेही।। तापस बेष जानकी देखी। भा सबु बिकल बिषाद बिसेषी।। जनक राम गुर आयसु पाई। चले थलहि सिय देखी आई।। लीन्हि लाइ उर जनक जानकी। पाहुन पावन पेम प्रान की।। उर उमगेउ अंबुधि अनुरागू। भयउ भूप मनु मनहुँ पयागू।। सिय सनेह बटु बाढ़त जोहा। ता पर राम पेम सिसु सोहा।। चिरजीवी मुनि ग्यान बिकल जनु। बूड़त लहेउ बाल अवलंबनु।। मोह मगन मति नहिं बिदेह की। महिमा सिय रघुबर सनेह की।।
毗提诃女见到了她亲爱的家人,每个人都以自己的方式相待。遮纳姬看到苦行者的装束,所有人都陷入特别的悲伤之中。得到遮纳迦和罗摩上师的许可后,她走到地面,看到悉多来了。遮纳迦把遮纳姬抱在怀里,她是客人、净化者,是他生命的爱。爱的海洋在他心中涌动,国王的心就像在普拉亚格沐浴过一样。悉多之爱的绳结越结越紧,罗摩的爱如孩子般闪耀。长寿的仙人仿佛失去了智慧,像溺水者找到了支撑。毗提诃的心沉醉于迷恋之中,想着悉多和罗怙族之主之爱的荣耀。
Verse 585 (दोहा/सोरठा)
सिय पितु मातु सनेह बस बिकल न सकी सँभारि। धरनिसुताँ धीरजु धरेउ समउ सुधरमु बिचारि।।286।।
悉多的父亲和母亲被爱所征服,无法控制自己。大地之女考虑到场合的得体,保持了镇定。
Verse 586 (चौपाई)
तापस बेष जनक सिय देखी। भयउ पेमु परितोषु बिसेषी।। पुत्रि पवित्र किए कुल दोऊ। सुजस धवल जगु कह सबु कोऊ।। जिति सुरसरि कीरति सरि तोरी। गवनु कीन्ह बिधि अंड करोरी।। गंग अवनि थल तीनि बड़ेरे। एहिं किए साधु समाज घनेरे।। पितु कह सत्य सनेहँ सुबानी। सीय सकुच महुँ मनहुँ समानी।। पुनि पितु मातु लीन्ह उर लाई। सिख आसिष हित दीन्हि सुहाई।। कहति न सीय सकुचि मन माहीं। इहाँ बसब रजनीं भल नाहीं।। लखि रुख रानि जनायउ राऊ। हृदयँ सराहत सीलु सुभाऊ।।
遮纳迦和悉多看到他身着苦行者的装束,心中生起爱意,特别的喜悦充满心间。他使女儿和家族都变得纯洁,他们清白的名声被世人传颂。他渡过了恒河荣耀之流,又渡过了旅程之海,正如创造者所安排。恒河、大地和三界都很广阔,在此场合聚集了众多圣人。她的父亲说着真诚慈爱的话语,悉多感到羞涩,但心中得到了安慰。然后她的父母把她抱在怀里,给了她教导、祝福和慈爱的忠告。悉多因羞涩而说不出话,她想:我今晚留在这里不好。王后看到她的窘态,便告诉了国王,国王在心中赞许她高尚的品德。
Verse 587 (दोहा/सोरठा)
बार बार मिलि भेंट सिय बिदा कीन्ह सनमानि। कही समय सिर भरत गति रानि सुबानि सयानि।।287।।
悉多一次又一次地会见他们,并怀着应有的敬意告别。那位贤明仁慈的王后,讲述了婆罗多归来的时辰。
Verse 588 (चौपाई)
सुनि भूपाल भरत ब्यवहारू। सोन सुगंध सुधा ससि सारू।। मूदे सजल नयन पुलके तन। सुजसु सराहन लगे मुदित मन।। सावधान सुनु सुमुखि सुलोचनि। भरत कथा भव बंध बिमोचनि।। धरम राजनय ब्रह्मबिचारू। इहाँ जथामति मोर प्रचारू।। सो मति मोरि भरत महिमाही। कहै काह छलि छुअति न छाँही।। बिधि गनपति अहिपति सिव सारद। कबि कोबिद बुध बुद्धि बिसारद।। भरत चरित कीरति करतूती। धरम सील गुन बिमल बिभूती।। समुझत सुनत सुखद सब काहू। सुचि सुरसरि रुचि निदर सुधाहू।।
听闻婆罗多的品行,国王心中欢喜,如同黄金、芬芳、甘露与明月精华。他双眼盈泪,全身颤栗,心中喜悦,赞颂他的美名。"专心聆听吧,面容姣好、莲花眼者;婆罗多的故事是解脱生死轮回之法。这是正法、治国之道与灵性智慧;我在此依我所知宣说。然而我的心智能道出婆罗多的伟大吗?连其阴影都无法触及,更遑论欺瞒。梵天、象头神、蛇神、湿婆与辩才天女,以及诗人、智者与通晓经典者,婆罗多的品格、名声与事迹,他的正法、德行与无瑕荣耀,凡听闻理解者皆得欢喜;纯净如恒河,甘美如甘露,无所畏惧。"
Verse 589 (दोहा/सोरठा)
निरवधि गुन निरुपम पुरुषु भरतु भरत सम जानि। कहिअ सुमेरु कि सेर सम कबिकुल मति सकुचानि।।288।।
婆罗多德行无量,是无可比拟之人;当知他与婆罗多齐名。试问,将须弥山与一粒谷物相比是否恰当?愿诗人世系之心不要迟疑。
Verse 590 (चौपाई)
अगम सबहि बरनत बरबरनी। जिमि जलहीन मीन गमु धरनी।। भरत अमित महिमा सुनु रानी। जानहिं रामु न सकहिं बखानी।। बरनि सप्रेम भरत अनुभाऊ। तिय जिय की रुचि लखि कह राऊ।। बहुरहिं लखनु भरतु बन जाहीं। सब कर भल सब के मन माहीं।। देबि परंतु भरत रघुबर की। प्रीति प्रतीति जाइ नहिं तरकी।। भरतु अवधि सनेह ममता की। जद्यपि रामु सीम समता की।। परमारथ स्वारथ सुख सारे। भरत न सपनेहुँ मनहुँ निहारे।। साधन सिद्ध राम पग नेहू।।मोहि लखि परत भरत मत एहू।।
众人都说他无法形容,如同无水之鱼无法到达陆地。王后啊,请听婆罗多那无边的荣耀;认识罗摩者也无法完全言说。国王怀着爱意描述婆罗多的性情,因为他看到了王后心中的倾向。罗什曼那和婆罗多再次前往森林;这对众人都是好事,也令每个人心中欢喜。但是,女神啊,婆罗多对罗怙之主的敬爱与信心,不可动摇,不可舍弃。婆罗多是情感与依恋的极致,虽然罗摩是平等的化身。他从未在梦中或心中,视财富、私利或享乐为根本。罗摩的双足是方法也是目标;见我之后,婆罗多的心便远离此世。
Verse 591 (दोहा/सोरठा)
भोरेहुँ भरत न पेलिहहिं मनसहुँ राम रजाइ। करिअ न सोचु सनेह बस कहेउ भूप बिलखाइ।।289।।
即使在思想中,婆罗多也不会违背罗摩的命令;不要忧伤,国王说道,心中充满爱意。
परम्परानुसार यह खण्ड ‘वैराग्य-प्रबोध’ और ‘राम-आज्ञा-परायणता’ देता है: गृह-शोक/वियोग को धर्म-बुद्धि में बदलकर मन को स्थिर करता है, तथा भरत-चरित के श्रवण से ‘भव-बन्धन-बिमोचनि’ (पाठ में ही संकेत) फल माना जाता है।
सत्संग-परम्परा में प्रसंगानुसार ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ नाम-संपुट या ‘राम रामेति’ जप-संपुट जोड़ा जाता है; विशेषतः भरत-चरित/आज्ञा-पालन के भाव में ‘राम-आज्ञा गुरु समान’ भाव-स्मरण हेतु नाम-संपुट प्रचलित है।
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