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यह सोपान ‘त्याग-धर्म’ और ‘अन्तः-राज्य’ का द्वार है: राजसुख के बीच राम-धर्म का चुनाव, और फिर वन-जीवन में भी ‘अयोध्या’ (अन्तर-नगर) की स्थापना। प्रस्तुत अंश में सोपान-गति स्पष्ट है—पहले ‘भक्त-लक्षण’ (अहंकार, काम-क्रोध-लोभ आदि का क्षय) का निरूपण, फिर ‘सत्संग-निर्देश’ (चित्रकूट-निवास), और अंततः ‘प्रकृति का रूपान्तरण’ (वन का मंगलमय हो जाना) जो संकेत करता है कि भगवान के सान्निध्य से बाह्य जगत भी साधना-क्षेत्र बन जाता है।
《阿逾陀篇》的滋味之心,是悲悯与寂静的合一;在弃国之痛中,离欲之光渐现。本段结构使“界限/法度(मर्यादा)”不止为社会政道,更成解脱之路的纪律:为罗摩舍尽一切者,罗摩便在其心中“安营(उर-डेरा)”。文中列举信徒之相(舍弃欲、嗔、醉、慢、迷等;视他人之妻如母;见他人之财不喜、见他人之难而悲)将心理学转为修行法门——此乃“内净(अन्तःशुद्धि)”的可行规约。继而指向吉多拘多,并非仅为朝圣地理,而是修行地理:曼达吉尼河、仙人精舍、林野平等——共同构成归依的实验场。末了科尔、基拉塔之爱与森林的吉祥,昭示罗摩临在能使自然、社会与心识——三者皆发生“法之转化(धर्म-परिवर्तन)”。
Verse 266 (चौपाई)
काम कोह मद मान न मोहा। लोभ न छोभ न राग न द्रोहा।। जिन्ह कें कपट दंभ नहिं माया। तिन्ह कें हृदय बसहु रघुराया।। सब के प्रिय सब के हितकारी। दुख सुख सरिस प्रसंसा गारी।। कहहिं सत्य प्रिय बचन बिचारी। जागत सोवत सरन तुम्हारी।। तुम्हहि छाड़ि गति दूसरि नाहीं। राम बसहु तिन्ह के मन माहीं।। जननी सम जानहिं परनारी। धनु पराव बिष तें बिष भारी।। जे हरषहिं पर संपति देखी। दुखित होहिं पर बिपति बिसेषी।। जिन्हहि राम तुम्ह प्रानपिआरे। तिन्ह के मन सुभ सदन तुम्हारे।।
心中无欲念、无嗔怒、无傲慢、无虚荣、无迷妄、无贪婪、无恐惧、无执着、无仇恨者,心中无欺诈、无虚伪、无幻象者,罗怙之主啊,愿您安住于他们心中。
Verse 267 (दोहा/सोरठा)
स्वामि सखा पितु मातु गुर जिन्ह के सब तुम्ह तात। मन मंदिर तिन्ह कें बसहु सीय सहित दोउ भ्रात।।130।।
主人、朋友、父亲、母亲、上师,在他们眼中这一切皆是您,主啊,愿您与悉多及您的兄弟一同安住于他们心灵的殿堂。
Verse 268 (चौपाई)
अवगुन तजि सब के गुन गहहीं। बिप्र धेनु हित संकट सहहीं।। नीति निपुन जिन्ह कइ जग लीका। घर तुम्हार तिन्ह कर मनु नीका।। गुन तुम्हार समुझइ निज दोसा। जेहि सब भाँति तुम्हार भरोसा।। राम भगत प्रिय लागहिं जेही। तेहि उर बसहु सहित बैदेही।। जाति पाँति धनु धरम बड़ाई। प्रिय परिवार सदन सुखदाई।। सब तजि तुम्हहि रहइ उर लाई। तेहि के हृदयँ रहहु रघुराई।। सरगु नरकु अपबरगु समाना। जहँ तहँ देख धरें धनु बाना।। करम बचन मन राउर चेरा। राम करहु तेहि कें उर डेरा।।
舍弃他人过失、持守他人美德者,为婆罗门、牛和善行而忍受苦难者,精通正道、行走世间正路者,心常系念您之居所者,主啊,将您的美德归于自身而视己过为无物者,以一切方式信赖您者。
Verse 269 (दोहा/सोरठा)
जाहि न चाहिअ कबहुँ कछु तुम्ह सन सहज सनेहु। बसहु निरंतर तासु मन सो राउर निज गेहु।।131।।
从不向您索取任何事物,却以自然而真挚之情爱您者,愿您永远安住于他们心中,以那里为您之家。
Verse 270 (चौपाई)
एहि बिधि मुनिबर भवन देखाए। बचन सप्रेम राम मन भाए।। कह मुनि सुनहु भानुकुलनायक। आश्रम कहउँ समय सुखदायक।। चित्रकूट गिरि करहु निवासू। तहँ तुम्हार सब भाँति सुपासू।। सैलु सुहावन कानन चारू। करि केहरि मृग बिहग बिहारू।। नदी पुनीत पुरान बखानी। अत्रिप्रिया निज तपबल आनी।। सुरसरि धार नाउँ मंदाकिनि। जो सब पातक पोतक डाकिनि।। अत्रि आदि मुनिबर बहु बसहीं। करहिं जोग जप तप तन कसहीं।। चलहु सफल श्रम सब कर करहू। राम देहु गौरव गिरिबरहू।।
圣者以此方式向他们展示居所,其言语充满爱意,令罗摩心中欢喜。圣者说:太阳族之主啊,请听,我将为您讲述一处适于此时节的美好修行地。请于质多罗俱吒山安住,在那里一切皆将顺遂如意。山峦秀丽,森林迷人,象、狮、鹿、鸟嬉戏其间。河流神圣,如古籍所载,阿特里之爱妻以其苦行之力将其引来。此河名为曼达基尼,能灭一切罪恶污垢。阿特里等众多大仙居住于此,修习瑜伽、诵经、苦行以炼身心。请来吧,愿您一切辛劳皆得圆满,罗摩啊,愿您荣耀此庄严山岳。
Verse 271 (दोहा/सोरठा)
चित्रकूट महिमा अमित कहीं महामुनि गाइ। आए नहाए सरित बर सिय समेत दोउ भाइ।।132।।
大仙歌颂质多罗俱吒无量之荣耀。他们来到河边,悉多与二兄弟一同沐浴于圣河之中。
Verse 272 (चौपाई)
रघुबर कहेउ लखन भल घाटू। करहु कतहुँ अब ठाहर ठाटू।। लखन दीख पय उतर करारा। चहुँ दिसि फिरेउ धनुष जिमि नारा।। नदी पनच सर सम दम दाना। सकल कलुष कलि साउज नाना।। चित्रकूट जनु अचल अहेरी। चुकइ न घात मार मुठभेरी।। अस कहि लखन ठाउँ देखरावा। थलु बिलोकि रघुबर सुखु पावा।। रमेउ राम मनु देवन्ह जाना। चले सहित सुर थपति प्रधाना।। कोल किरात बेष सब आए। रचे परन तृन सदन सुहाए।। बरनि न जाहि मंजु दुइ साला। एक ललित लघु एक बिसाला।।
罗摩对罗什曼那说:此处河岸甚佳,我们便在此安顿下来吧。罗什曼那四处察看,选定一处佳地,如彩虹环绕弓身般巡视四方。河流、池塘、树荫、水泽、森林皆令人愉悦,能除迦利时代一切污垢。质多罗俱吒山宛如静立之猎人,从不失手,击灭忧愁苦难。罗什曼那如此说罢,展示此地,罗怙之主见此地,心中欢喜。罗摩心中喜悦,诸神知晓,便与众神之首一同离去。科尔人与基拉特人以其装扮前来,建造可爱的茅草叶舍。两座美丽殿堂难以言表,一座小巧玲珑,一座宽敞宏大。
Verse 273 (दोहा/सोरठा)
लखन जानकी सहित प्रभु राजत रुचिर निकेत। सोह मदनु मुनि बेष जनु रति रितुराज समेत।।133।।
主与罗什曼那及雅那基同在,于那可爱居所中闪耀,宛如爱神化身为仙,与罗提及季节之王相伴。
Verse 274 (चौपाई)
अमर नाग किंनर दिसिपाला। चित्रकूट आए तेहि काला।। राम प्रनामु कीन्ह सब काहू। मुदित देव लहि लोचन लाहू।। बरषि सुमन कह देव समाजू। नाथ सनाथ भए हम आजू।। करि बिनती दुख दुसह सुनाए। हरषित निज निज सदन सिधाए।। चित्रकूट रघुनंदनु छाए। समाचार सुनि सुनि मुनि आए।। आवत देखि मुदित मुनिबृंदा। कीन्ह दंडवत रघुकुल चंदा।। मुनि रघुबरहि लाइ उर लेहीं। सुफल होन हित आसिष देहीं।। सिय सौमित्र राम छबि देखहिं। साधन सकल सफल करि लेखहिं।।
天神、那伽、紧那罗及四方守护者于此时来到质多罗俱吒。众人皆向罗摩顶礼,欢喜的天神得以目睹其尊容。天神众洒落天花,说道:主啊,今日我们真正得福了。他们祈祷并诉说难以忍受的痛苦后,欢喜地返回各自居所。当罗怙族之喜悦罗摩安住于质多罗俱吒,众仙闻讯相继而来。见众仙到来,仙众欢喜,向罗怙族之月五体投地顶礼。众仙将罗摩拥入怀中,赐予祝福,愿其一切事业圆满成就。目睹悉多、罗什曼那、罗摩之妙相,他们视一切修行皆已圆满。
Verse 275 (दोहा/सोरठा)
जथाजोग सनमानि प्रभु बिदा किए मुनिबृंद। करहि जोग जप जाग तप निज आश्रमन्हि सुछंद।।134।।
主依礼恭敬众仙,并向其辞别。众仙返回各自修行地,心怀喜悦,修习瑜伽、诵经、守夜与苦行。
Verse 276 (चौपाई)
यह सुधि कोल किरातन्ह पाई। हरषे जनु नव निधि घर आई।। कंद मूल फल भरि भरि दोना। चले रंक जनु लूटन सोना।। तिन्ह महँ जिन्ह देखे दोउ भ्राता। अपर तिन्हहि पूँछहि मगु जाता।। कहत सुनत रघुबीर निकाई। आइ सबन्हि देखे रघुराई।। करहिं जोहारु भेंट धरि आगे। प्रभुहि बिलोकहिं अति अनुरागे।। चित्र लिखे जनु जहँ तहँ ठाढ़े। पुलक सरीर नयन जल बाढ़े।। राम सनेह मगन सब जाने। कहि प्रिय बचन सकल सनमाने।। प्रभुहि जोहारि बहोरि बहोरी। बचन बिनीत कहहिं कर जोरी।।
科尔族和基拉特族得知此消息,欢喜雀跃,如同新宝降临家中。他们装满一篮篮的根茎、果实和球茎,出发前行,如同穷人去采集黄金。人群中,那些看见两兄弟的人,一边前行一边向他们问路。听闻并谈论着罗怙族之主,他们前来,所有人都瞻仰了罗摩。他们合掌致敬,上前顶礼膜拜,怀着深切的爱意凝视着主。他们伫立各处,如同画中人像一般,身体因喜悦而颤栗,眼中充满泪水。所有人都沉浸在罗摩的爱中,他说出亲切的话语,礼敬众人。他们一次又一次地向主顶礼,双手合十,说出谦卑的话语。
Verse 277 (दोहा/सोरठा)
अब हम नाथ सनाथ सब भए देखि प्रभु पाय। भाग हमारे आगमनु राउर कोसलराय।।135।।
主啊,如今瞻仰您的双足,我们所有人都找到了主人。拘萨罗王啊,我们来到此地,真是福报深厚。
Verse 278 (चौपाई)
धन्य भूमि बन पंथ पहारा। जहँ जहँ नाथ पाउ तुम्ह धारा।। धन्य बिहग मृग काननचारी। सफल जनम भए तुम्हहि निहारी।। हम सब धन्य सहित परिवारा। दीख दरसु भरि नयन तुम्हारा।। कीन्ह बासु भल ठाउँ बिचारी। इहाँ सकल रितु रहब सुखारी।। हम सब भाँति करब सेवकाई। करि केहरि अहि बाघ बराई।। बन बेहड़ गिरि कंदर खोहा। सब हमार प्रभु पग पग जोहा।। तहँ तहँ तुम्हहि अहेर खेलाउब। सर निरझर जलठाउँ देखाउब।। हम सेवक परिवार समेता। नाथ न सकुचब आयसु देता।।
大地、林间小径和山峦都是有福的,因为主啊,您的双足曾踏足其上。飞鸟和林中漫游的鹿都是有福的,因瞻仰您而圆满了此生。我们与家人一起都是有福的,得见您的圣容,双眼充满喜悦。经过深思熟虑,我们找到了美好的居所,在这里我们将四季安住,心满意足。我们将以各种方式侍奉您,猎取狮子、毒蛇和猛虎。森林、灌木丛、山峦和洞穴都是我们的,主啊,我们在每一步都顶礼您的双足。我们将带您在各处狩猎,为您展示湖泊、瀑布和水源。我们与全家都是您的仆人,主啊,请不要犹豫,赐予我们命令。
Verse 279 (दोहा/सोरठा)
बेद बचन मुनि मन अगम ते प्रभु करुना ऐन। बचन किरातन्ह के सुनत जिमि पितु बालक बैन।।136।।
主的慈悲正是吠陀圣言的精髓,连圣人的心智也无法企及。聆听基拉特族的话语,他心生欢喜,如同父亲聆听孩童说话。
Verse 280 (चौपाई)
रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जाननिहारा।। राम सकल बनचर तब तोषे। कहि मृदु बचन प्रेम परिपोषे।। बिदा किए सिर नाइ सिधाए। प्रभु गुन कहत सुनत घर आए।। एहि बिधि सिय समेत दोउ भाई। बसहिं बिपिन सुर मुनि सुखदाई।। जब ते आइ रहे रघुनायकु। तब तें भयउ बनु मंगलदायकु।। फूलहिं फलहिं बिटप बिधि नाना।।मंजु बलित बर बेलि बिताना।। सुरतरु सरिस सुभायँ सुहाए। मनहुँ बिबुध बन परिहरि आए।। गंज मंजुतर मधुकर श्रेनी। त्रिबिध बयारि बहइ सुख देनी।।
要知道罗摩只钟爱虔诚之心,愿明白此理者铭记于心。于是罗摩取悦了所有林中众生,说着温柔的话语,以爱滋养他们。他低头辞别,启程离去,一路诵念并聆听主的功德,回到家中。如此,两兄弟与悉多一起,安住在森林中,为天神和仙人带来喜悦。自从罗怙族之主来到并驻留此地,这片森林便成为吉祥之源。树木以各种奇妙的方式开花结果,美丽的藤蔓舒展着可爱的华盖。天界神树天生美丽,仿佛天神离弃了自己的园林来到此处。一片片树林比另一片更加美丽,蜂群成行,三种和风吹拂,带来舒适。
Verse 281 (दोहा/सोरठा)
नीलकंठ कलकंठ सुक चातक चक्क चकोर। भाँति भाँति बोलहिं बिहग श्रवन सुखद चित चोर।।137।।
青颈鸟、迦罗甘塔、鹦鹉、查塔卡、查克瓦和查科拉,各种鸟儿以多种方式鸣唱,悦耳动听,令人心醉神迷。
Verse 282 (चौपाई)
केरि केहरि कपि कोल कुरंगा। बिगतबैर बिचरहिं सब संगा।। फिरत अहेर राम छबि देखी। होहिं मुदित मृगबंद बिसेषी।। बिबुध बिपिन जहँ लगि जग माहीं। देखि राम बनु सकल सिहाहीं।। सुरसरि सरसइ दिनकर कन्या। मेकलसुता गोदावरि धन्या।। सब सर सिंधु नदी नद नाना। मंदाकिनि कर करहिं बखाना।। उदय अस्त गिरि अरु कैलासू। मंदर मेरु सकल सुरबासू।। सैल हिमाचल आदिक जेते। चित्रकूट जसु गावहिं तेते।। बिंधि मुदित मन सुखु न समाई। श्रम बिनु बिपुल बड़ाई पाई।।
孔雀、猛虎、猴子、野猪和鹿,消除了敌意,全都和睦共处。当它们漫游时瞻仰罗摩的风采,鹿群格外欢欣。世间凡有天神森林之处,一见罗摩,无不欢欣鼓舞。恒河、亚穆纳河、太阳之女、梅卡拉之女和高达维里河都是有福的。所有的湖泊、海洋、大小河流,都在赞颂曼达基尼河。日出日落之山、凯拉萨山、曼达拉山、弥卢山和所有天神的居所,喜马拉雅山和所有其他山峦,都在歌颂质多罗拘吒的荣耀。毗谛以欢喜之心,怀着无尽的喜悦,毫不费力地获得了巨大的荣耀。
Verse 283 (दोहा/सोरठा)
चित्रकूट के बिहग मृग बेलि बिटप तृन जाति। पुन्य पुंज सब धन्य अस कहहिं देव दिन राति।।138।।
质多罗拘吒的飞鸟、鹿群、藤蔓、树木和草木,日夜都在说:功德无量,一切皆有福。
Verse 284 (चौपाई)
नयनवंत रघुबरहि बिलोकी। पाइ जनम फल होहिं बिसोकी।। परसि चरन रज अचर सुखारी। भए परम पद के अधिकारी।। सो बनु सैलु सुभायँ सुहावन। मंगलमय अति पावन पावन।। महिमा कहिअ कवनि बिधि तासू। सुखसागर जहँ कीन्ह निवासू।। पय पयोधि तजि अवध बिहाई। जहँ सिय लखनु रामु रहे आई।। कहि न सकहिं सुषमा जसि कानन। जौं सत सहस होंहिं सहसानन।। सो मैं बरनि कहौं बिधि केहीं। डाबर कमठ कि मंदर लेहीं।। सेवहिं लखनु करम मन बानी। जाइ न सीलु सनेहु बखानी।।
有眼之人瞻仰罗怙族之最者,便获得生的果实,远离忧愁。触其足尘,不动之物也得安乐,获得无上境界的资格。那片森林和山峦天生美丽,充满吉祥,是神圣中最神圣者。如何能描述其荣耀?喜乐之海洋曾在此安住。舍弃阿逾陀,离开乳海,悉多、罗什曼那和罗摩来到此地安住。那片森林的美丽无法言说,即使有千首千面者也无法道尽。我又如何能描述?无论我举起乌龟还是曼达拉山。罗什曼那以身、心、语侍奉他,他的品德和爱心无法形容。
Verse 285 (दोहा/सोरठा)
-छिनु छिनु लखि सिय राम पद जानि आपु पर नेहु। करत न सपनेहुँ लखनु चितु बंधु मातु पितु गेहु।।139।।
她时时刻刻凝视着悉多和罗摩的双足,将对他们的爱视为自己的生命;罗什曼那即使在梦中也不曾想起自己、自己的心、父母或家园。
परंपरागत मान्यता के अनुसार दोहा 130–131 के ‘भक्त-लक्षण’ का पाठ/श्रवण चित्त-शुद्धि, परदोष-दर्शन से निवृत्ति, और शरणागति की दृढ़ता देता है; चित्रकूट-प्रसंग (132–139) का पाठ ‘तीर्थ-स्मरण’ के समान पुण्यकारी माना जाता है और गृहस्थ/वनस्थ दोनों के लिए ‘राम-निवास’ (मन में) की सिद्धि का साधन कहा जाता है।
सामान्य सत्संग-परंपरा में शरणागति-प्रधान संपुट जोड़ा जाता है: ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ या ‘राम रामेति रामेति…’ (नाम-संपुट) — विशेषतः दोहा 131 के बाद, क्योंकि वहीं ‘बसहु निरंतर तासु मन’ का शरण-निष्कर्ष आता है।
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