Adhyaya 189
Vana ParvaAdhyaya 189152 Verses

Adhyaya 189

कृतयुगवर्णनम् तथा राजधर्मोपदेशः (Kṛtayuga Description and Instruction on Royal Dharma)

Upa-parva: Mārkaṇḍeya–Yuga-Dharma Upadeśa (Prophecy and Royal Ethics Episode)

This chapter continues Mārkaṇḍeya’s account of cyclical time and social restoration. He describes a future re-establishment of order: the protection of the earth for the twice-born, the performance of a great horse-sacrifice, and the installation of auspicious boundaries (maryādā) said to be primordial in origin. The narrative includes a program of security and pacification—suppression of predatory bands and the placement of emblems and weapons in conquered regions as signs of stabilized rule—culminating in the decline of adharma and the increase of dharma when the Kṛta age is attained. Mārkaṇḍeya outlines markers of societal flourishing: ritual activity, public works, thriving agriculture across seasons, and a varṇa-based division of duties presented as normative for that age. The discourse then pivots to direct counsel: Yudhiṣṭhira is urged to resolve dharma-doubt by aligning himself with dharma, practicing compassion, protecting subjects as one’s own children, honoring ancestors and deities, correcting errors through proper giving, and avoiding contempt toward Brahmins. The frame closes with Yudhiṣṭhira’s assent and the listeners’ astonishment at the purāṇic instruction.

Chapter Arc: युधिष्ठिर के समक्ष महर्षि मार्कण्डेय काल-चक्र का द्वार खोलते हैं—चारों युगों की वर्ष-संख्या, ब्रह्मा के दिन-रात का मान, और वह अद्भुत तथ्य कि प्रलय के महाशून्य में भी एक साक्षी बना रहता है। → वर्णाश्रम-धर्म के ढहने का चित्र उभरता है: कलियुग में क्षत्रिय-वैश्य विकर्म में पड़ते हैं, अल्पायु और स्वल्पबल हो जाते हैं; ब्राह्मण बाह्य वेश से मुनि-सा कपट धारण कर जीविका के लिए अधर्म का सहारा लेते हैं। समाज का ताना-बाना उलटता जाता है और नैतिक दिशा धुँधली पड़ती जाती है। → प्रलय का दृश्य: जब लोक देव-दानव-समेत शून्य हो जाते हैं, तब भी मार्कण्डेय का दीर्घजीवी अस्तित्व बना रहता है—और वे उस परम रहस्य के निकट पहुँचते हैं जहाँ ब्रह्मा के दिन-रात में समस्त विश्व का परिवर्तन होता है। इस विराट विनाश के बीच एक दिव्य बालक का दर्शन होता है—लाल-लाल तलवों और कोमल अँगुलियों वाला—जिसे मार्कण्डेय श्रद्धा से मस्तक पर उठाकर प्रणाम करते हैं। → महर्षि काल-मान (युग, सहस्रयुग, ब्राह्म-अहः) का विधान स्थापित करते हैं और कलियुग के लक्षणों द्वारा यह बोध देते हैं कि धर्म का क्षय भी नियति के चक्र में आता है; फिर भी साक्षी-चेतना और परम सत्ता का संकेत प्रलय में भी बना रहता है। → दिव्य बालक का रहस्य—वह कौन है और प्रलय के पार किस सत्य की ओर संकेत करता है—अगले प्रसंग की ओर कथा को धकेल देता है।

Shlokas

Verse 1

हि >> आय न हुक है 7 अष्टा शीर्त्याधिकशततमोब् ध्याय: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको ४ (02०8 कुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान्‌के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना वैशम्पायन उवाच ततः स पुनरेवाथ मार्कण्डेयं यशस्विनम्‌ । पप्रच्छ विनयोपेतो धर्मराजो युधिषिर:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! तदनन्तर विनयशील धर्मराज युधिष्ठिरने यशस्वी मार्कण्डेय मुनिसे पुनः इस प्रकार प्रश्न किया--

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຕໍ່ຈາກນັ້ນ ພະຣາຊາ ຢຸທິສຖິຣະ ຜູ້ມີຊື່ສຽງເປັນຜູ້ທຳນຸບຳລຸງທັມມະ ແລະມີຄວາມຖ່ອມຕົນ ໄດ້ຖາມມະຫາລຶດສີ ມາຣະກັນເດຍະ ຜູ້ຮຸ່ງເຮືອງ ອີກຄັ້ງ ດ້ວຍຄວາມເຄົາລົບ.

Verse 2

नैके युगसहस्रान्तास्त्वया दृष्टा महामुने । न चापीह सम: कश्रिदायुष्मान्‌ दृश्यते तव,“महामुने! आपने हजार-हजार युगोंके अन्तमें होनेवाले अनेक महाप्रलयके दृश्य देखे हैं। इस संसारमें आपके समान बड़ी आयुवाला दूसरा कोई पुरुष नहीं दिखायी देता

«ໂອ ມະຫາລຶດສີ! ທ່ານໄດ້ເຫັນພະຍຸການລະລາຍໂລກອັນໃຫຍ່ຫຼາຍຄັ້ງ ທີ່ເກີດຂຶ້ນໃນທ້າຍຂອງຍຸກນັບພັນໆ. ແລະໃນໂລກນີ້ ບໍ່ມີໃຜປາກົດວ່າຈະເທົ່າທ່ານໃນຄວາມຍືນຍາວແຫ່ງອາຍຸ».

Verse 3

वर्जयित्वा महात्मानं ब्रह्माणं परमेषछ्ठिनम्‌ । न ते$स्ति सदृश: ककश्रिदायुषा ब्रह्मवित्तम,ब्रह्मवेत्ताओंमें श्रेष्ठ महर्षे! परमेष्ठी महात्मा ब्रह्माजीको छोड़कर दूसरा कोई आपके समान दीर्घायु नहीं है

«ເວັ້ນແຕ່ ພຣະພຣະຫມາ ຜູ້ມີຈິດໃຫຍ່ ພຣະປະຣະເມດຖິນ ຜູ້ຈັດວາງສັບພະສິ່ງ, ບໍ່ມີໃຜເທົ່າທ່ານໃນຄວາມຍືນຍາວແຫ່ງອາຍຸ, ໂອ ຜູ້ຮູ້ພຣະພຣະຫມັນອັນປະເສີດ».

Verse 4

अनन्तरिक्षे लोके5स्मिन्‌ देवदानववर्जिते । त्वमेव प्रलये विप्र ब्रह्माणमुपतिष्ठसे,ब्रह्म! जब यह संसार देवता, दानव तथा अन्तरिक्ष आदि लोकोंसे शून्य हो जाता है उस प्रलयकालमें केवल आप ही ब्रह्माजीके पास रहकर उनकी उपासना करते हैं

«ໂອ ພຣາຫມັນ! ເມື່ອເຖິງເວລາລະລາຍຈັກກະວານ ໂລກນີ້ພ້ອມທັງພາກກາງ (ອັນຕະຣິກສະ) ກາຍເປັນຄວາມຫວ່າງເປົ່າ ປາດສະຈາກເທວະ ແລະ ອະສຸຣະ, ມີແຕ່ທ່ານຜູ້ດຽວທີ່ຍັງຄົງຢູ່ ເພື່ອປະຄອງຮັບໃຊ້ພຣະພຣະຫມາດ້ວຍຄວາມເຄົາລົບ».

Verse 5

प्रलये चापि निर्वत्ति प्रबुद्धे च पितामहे । त्वमेक: सृज्यमानानि भूतानीह प्रपश्यसि,ब्रह्मर्ष! फिर प्रलयकाल व्यतीत होनेपर जब पितामह ब्रह्मा जागते हैं, तब सम्पूर्ण दिशाओंमें वायुको फैलाकर उसके द्वारा समस्त जलराशिको इधर-उधर छितराकर (सूखे स्थानोंमें) ब्रह्माजीके द्वारा जो जरायुज, अण्डज, स्वेदज और उद्धिज्ज नामक चार प्रकारके प्राणी रचे जाते हैं, उन्हें एकमात्र आप ही (सबसे पहले) अच्छी तरह देख पाते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ແມ່ນແຕ່ໃນຍາມມະຫາປະລະຍະ ແລະເມື່ອການສ້າງສັນກັບຄືນມາອີກຄັ້ງ—ເມື່ອປິຕາມະຫະ ພຣະພຣະຫມາ ຕື່ນຂຶ້ນ—ມີແຕ່ທ່ານຜູ້ດຽວ, ໂອ ພຣະຣິສີພຣາຫມັນ, ທີ່ເຫັນສັດທັງຫຼາຍໃນນີ້ ໃນຂະນະທີ່ພວກມັນກໍາລັງຖືກບັງເກີດ».

Verse 6

चतुर्विधानि विप्रर्षे यथावत्‌ परमेछ्िना । वायुभूता दिश: कृत्वा विक्षिप्यापस्ततस्तत:,ब्रह्मर्ष! फिर प्रलयकाल व्यतीत होनेपर जब पितामह ब्रह्मा जागते हैं, तब सम्पूर्ण दिशाओंमें वायुको फैलाकर उसके द्वारा समस्त जलराशिको इधर-उधर छितराकर (सूखे स्थानोंमें) ब्रह्माजीके द्वारा जो जरायुज, अण्डज, स्वेदज और उद्धिज्ज नामक चार प्रकारके प्राणी रचे जाते हैं, उन्हें एकमात्र आप ही (सबसे पहले) अच्छी तरह देख पाते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣາຫມັນຣິສີຜູ້ປະເສີດ, ເມື່ອພຣະຜູ້ສ້າງ (ປະຣະເມດຖິນ) ຫຼັງຈາກຍາມປະລະຍະຜ່ານພົ້ນ ຕື່ນຂຶ້ນເປັນປິຕາມະຫະ ພຣະພຣະຫມາ, ພຣະອົງແຜ່ລົມໄປທົ່ວທິດທັງປວງ ແລະໃຫ້ລົມນັ້ນພັດກະຈາຍນ້ໍາໄປທົ່ວ ເພື່ອໃຫ້ເກີດພື້ນທີ່ແຫ້ງ. ແລ້ວຈຶ່ງບັງເກີດສັດມີຊີວິດ 4 ຈໍາພວກ—ເກີດຈາກຄັນ, ເກີດຈາກໄຂ່, ເກີດຈາກຄວາມຊຸ່ມ/ຄວາມຮ້ອນ, ແລະເກີດຈາກການງອກງາມ. ໃນການສ້າງສັນຄັ້ງທໍາອິດນັ້ນ ມີແຕ່ທ່ານຜູ້ດຽວທີ່ເຫັນໄດ້ຢ່າງແຈ້ງຊັດຕັ້ງແຕ່ເລີ່ມຕົ້ນ».

Verse 7

त्वया लोकगुरु: साक्षात्‌ सर्वलोकपितामह: । आराधितो द्विजश्रेष्ठ तत्परेण समाधिना,द्विजश्रेष्ठी आपने तत्परतापूर्वक चित्तवृत्तियोंका निरोध करके सम्पूर्ण लोकोंके पितामह साक्षात्‌ लोकगुरु ब्रह्माजीकी आराधना की है। विप्रवर! आपने अनेक बार इस जगत्‌की प्रारम्भिक सृष्टिको प्रत्यक्ष किया है और घोर तपस्याद्वारा (मरीचि आदि) प्रजापतियोंको भी जीत लिया है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣາຫມັນຜູ້ປະເສີດ, ທ່ານໄດ້ນະມັດສະການ ແລະບໍລິບູຊາພຣະພຣະຫມາໂດຍກົງ—ຜູ້ເປັນຄູຂອງໂລກທັງປວງ ແລະເປັນປິຕາມະຫະຂອງສັດທັງຫຼາຍ—ດ້ວຍສະມາທິທີ່ມຸ່ງໄປຫາພຣະອົງແຕ່ຜູ້ດຽວ. ດ້ວຍການຂົມຂື່ນຈິດໃນຢ່າງເອກະຈິດນີ້ ທ່ານໄດ້ຮັບພຣະອະນຸຄອນອັນສູງສຸດ».

Verse 8

स्वप्रमाणमथो विप्र त्वया कृतमनेकश: । घोरेणाविश्य तपसा वेधसो निर्जितास्त्वया,द्विजश्रेष्ठी आपने तत्परतापूर्वक चित्तवृत्तियोंका निरोध करके सम्पूर्ण लोकोंके पितामह साक्षात्‌ लोकगुरु ब्रह्माजीकी आराधना की है। विप्रवर! आपने अनेक बार इस जगत्‌की प्रारम्भिक सृष्टिको प्रत्यक्ष किया है और घोर तपस्याद्वारा (मरीचि आदि) प्रजापतियोंको भी जीत लिया है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣາຫມັນ, ຕົວທ່ານເອງແມ່ນຫຼັກຖານຂອງສິ່ງທີ່ທ່ານໄດ້ສໍາເລັດ—ຊໍ້າແລ້ວຊໍ້າອີກ. ເມື່ອເຂົ້າສູ່ຕະປະສະຍາອັນຮ້າຍແຮງ, ທ່ານໄດ້ຊະນະແມ່ນແຕ່ອໍານາດຂອງຜູ້ສ້າງ—ພຣະປຣະຊາປະຕິ—ດ້ວຍຕະປະຂອງທ່ານ.»

Verse 9

नारायणाड्कप्रख्यस्त्वं साम्परायेडतिपठ्यसे । भगवाननेकश: कृत्वा त्वया विष्णोश्व विश्वकृत्‌,आप भगवान्‌ नारायणके समीप रहनेवाले भक्तोंमें सबसे श्रेष्ठ हैं। परलोकमें आपकी महिमाका सर्वत्र गान होता है। आपने पहले स्वेच्छासे प्रकट होनेवाले सर्वव्यापक ब्रह्मकी उपलब्धिके स्थानभूत हृदयकमलकी कर्णिकाका (योगकी कलासे) अलौकिक उद्घाटन कर वैराग्य और अभ्याससे प्राप्त हुई दिव्य दृष्टिद्वारा विश्वरचयिता भगवान्‌का अनेक बार साक्षात्कार किया है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ທ່ານຖືກສັນລະເສີນວ່າເປັນດັ່ງນາຣາຍະນະເອງ, ແລະໃນໂລກຫຼັງ ກຽດສັກສີຂອງທ່ານຖືກຂັບຮ້ອງທົ່ວໄປ. ດ້ວຍວິໄນທາງຈິດວິນຍານຂອງທ່ານ, ທ່ານໄດ້ເຫັນພຣະວິສນຸ—ຜູ້ສ້າງສັບພະຈັກກະວານ—ຊໍ້າແລ້ວຊໍ້າອີກ, ໂດຍເປີດເຜີຍດ້ວຍພະລັງໂຢກະ ດອກບົວພາຍໃນໃຈອັນອັດສະຈັນ, ແລະດ້ວຍທັດສະນະທິບທີ່ໄດ້ມາຈາກຄວາມຄາຍຄວາມຍຶດຕິດ ແລະການຝຶກຝົນຢ່າງຕໍ່ເນື່ອງ.»

Verse 10

कर्णिकोद्धरणं दिव्यं ब्रह्यण: कामरूपिण: । रत्नालंकारयोगाशभ्यां दृग्भ्यां दुष्टस्त्वया पुरा,आप भगवान्‌ नारायणके समीप रहनेवाले भक्तोंमें सबसे श्रेष्ठ हैं। परलोकमें आपकी महिमाका सर्वत्र गान होता है। आपने पहले स्वेच्छासे प्रकट होनेवाले सर्वव्यापक ब्रह्मकी उपलब्धिके स्थानभूत हृदयकमलकी कर्णिकाका (योगकी कलासे) अलौकिक उद्घाटन कर वैराग्य और अभ्याससे प्राप्त हुई दिव्य दृष्टिद्वारा विश्वरचयिता भगवान्‌का अनेक बार साक्षात्कार किया है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນອະດີດ ທ່ານໄດ້ເຫັນດ້ວຍທິດສະນະອັນເທວະດາ ທີ່ເກີດຈາກການຝຶກຝົນຢ່າງມີວິໄນ ແລະຄວາມວາງວຽງພາຍໃນ ການ “ເປີດເຜີຍ” ອັນອັດສະຈັນຂອງກະໂປງກາງແຫ່ງດອກບົວໃນຫົວໃຈ—ປະສົບການທີ່ເປີດໃຫ້ເຫັນພຣະພຣະຫມັນອັນແຜ່ຊາຍທົ່ວສັບພະສິ່ງ ຜູ້ສາມາດຮັບຮູບຕາມປາຖະໜາ ແຫ່ງຕົ້ນກຳເນີດຈັກກະວານ ອັນປະດັບດ້ວຍລັດສະຫມີສະຫວ່າງໄສ. ດັ່ງນັ້ນ ດ້ວຍພຣະສັດທາ (ພັກຕິ) ແລະຄວາມສຳເລັດໃນໂຍຄະ ທ່ານຈຶ່ງເປັນຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ທີ່ສຸດໃນບັນດາຜູ້ຢູ່ໃກ້ນາຣາຍະນະ ແລະກຽດສັກຂອງທ່ານຖືກຂັບຮ້ອງສັນລະເສີນໃນໂລກຫຼັງ»។

Verse 11

तस्मात्‌ तवान्तको मृत्युर्जरा वा देहनाशिनी । नत्वां विशति विप्रर्षे प्रसादात्‌ परमेछ्चिन:,इसीलिये सबको मारनेवाली मृत्यु तथा शरीरको जर्जर बना देनेवाली जरा आपका स्पर्श नहीं करती है। ब्रह्मर्ष! इसमें भगवान्‌ परमेष्ठीका कृपाप्रसाद ही कारण है

ດັ່ງນັ້ນ ໂອ ຜູ້ເຫັນທີ່ປະເສີດທີ່ສຸດໃນບັນດາພຣາຫມັນ, ທັງມໍລະນະ—ຜູ້ປິດສຸດທ້າຍຂອງສັບພະສິ່ງ—ແລະຊະຣາ ຜູ້ກັດກິນຮ່າງກາຍ ລ້ວນບໍ່ອາດແຕະຕ້ອງທ່ານໄດ້. ຄວາມພົ້ນຈາກຄວາມເສື່ອມແລະຄວາມຕາຍນີ້ ເກີດຈາກພຣະກະລຸນາປະສາດຂອງພຣະປະຣະເມດຖີ (ພຣະພຣະຫມາ).

Verse 12

यदा नैवं रविनग्निर्न वायुर्न च चन्द्रमा: । नैवान्तरिक्ष नैवोर्वी शेष भवति किंचन,(महाप्रलयके समय) जब सूर्य, अग्नि, वायु, चन्द्रमा, अन्तरिक्ष और पृथ्वी आदिमेंसे कोई भी शेष नहीं रह जाता, समस्त चराचर जगत्‌ उस एकार्णवके जलमें डूबकर अदृश्य हो जाता है, देवता और असुर नष्ट हो जाते हैं तथा बड़े-बड़े नागोंका संहार हो जाता है, उस समय कमल और उत्पलमें निवास तथा शयन करनेवाले सर्वभूतेश्वर अमितात्मा ब्रह्माजीके पास रहकर केवल आप ही उनकी उपासना करते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອເຖິງການລະລາຍອັນໃຫຍ່, ບໍ່ຫຼືອທັງຕາເວັນ ຫຼືໄຟ, ບໍ່ຫຼືອທັງລົມ ຫຼືແມ່ນແຕ່ດວງຈັນ; ບໍ່ຫຼືອທັງອາກາດກາງ ແລະບໍ່ຫຼືອທັງແຜ່ນດິນ—ບໍ່ຫຼືອຫຍັງເລີຍ. ສັບພະສິ່ງທີ່ເຄື່ອນໄຫວແລະບໍ່ເຄື່ອນໄຫວທັງປວງ ຈົມລົງໃນມະຫາສະຫມຸດອັນດຽວຂອງຈັກກະວານ ແລະຫາຍໄປຈາກສາຍຕາ. ເທວະດາແລະອະສຸຣະພິນາດ, ແມ່ນແຕ່ນາຄາຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ກໍຖືກທຳລາຍ. ໃນເວລານັ້ນ ພຣະເຈົ້າແຫ່ງສັບພະສິ່ງ ຜູ້ມີອາຕະມາອັນຫາຂອບເຂດບໍ່ໄດ້, ຜູ້ພັກອາໄສແລະບັນທົມໃນດອກບົວແລະອຸດປະລະ, ຢູ່ໃກ້ພຣະພຣະຫມາ; ແລະມີແຕ່ທ່ານຜູ້ດຽວທີ່ຍັງຄົງນະມັດສະການພຣະອົງ.

Verse 13

तस्मिन्नेकार्णवे लोके नष्टे स्थावरजड़मे । नष्टे देवासुरगणे समुत्सन्नमहोरगे,(महाप्रलयके समय) जब सूर्य, अग्नि, वायु, चन्द्रमा, अन्तरिक्ष और पृथ्वी आदिमेंसे कोई भी शेष नहीं रह जाता, समस्त चराचर जगत्‌ उस एकार्णवके जलमें डूबकर अदृश्य हो जाता है, देवता और असुर नष्ट हो जाते हैं तथा बड़े-बड़े नागोंका संहार हो जाता है, उस समय कमल और उत्पलमें निवास तथा शयन करनेवाले सर्वभूतेश्वर अमितात्मा ब्रह्माजीके पास रहकर केवल आप ही उनकी उपासना करते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອໂລກກາຍເປັນມະຫາສະຫມຸດອັນດຽວ ແລະສິ່ງທີ່ຕັ້ງຢູ່ນິ່ງໆອັນອຶດອັດທັງປວງພິນາດ; ເມື່ອຝູງເທວະດາແລະອະສຸຣະຖືກທຳລາຍ ແລະແມ່ນແຕ່ນາຄາຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ກໍຖືກລ້າງຜານ—ໃນການລະລາຍອັນໃຫຍ່ນັ້ນ ບໍ່ຫຼືອທັງຕາເວັນ, ໄຟ, ລົມ, ດວງຈັນ, ຟ້າ, ຫຼືແຜ່ນດິນ. ສັບພະສິ່ງທີ່ເຄື່ອນໄຫວແລະບໍ່ເຄື່ອນໄຫວທັງປວງ ຈົມລົງໃນນ້ຳຖ້ວມອັນດຽວ ແລະຫາຍໄປຈາກສາຍຕາ. ໃນເວລານັ້ນ ພຣະພຣະຫມາ ຜູ້ມີອາຕະມາອັນຫາຂອບເຂດບໍ່ໄດ້ ແຫ່ງສັບພະສິ່ງທັງປວງ ຍັງຄົງດຳລົງ; ແລະມີແຕ່ການນະມັດສະການອັນສັດຊື່ຕໍ່ພຣະອົງເທົ່ານັ້ນທີ່ຍັງຄົງຢູ່.

Verse 14

शयानममितात्मानं पद्मोत्पलनिकेतनम्‌ | त्वमेक: सर्वभूतेशं ब्रह्माणमुपतिष्ठसि,(महाप्रलयके समय) जब सूर्य, अग्नि, वायु, चन्द्रमा, अन्तरिक्ष और पृथ्वी आदिमेंसे कोई भी शेष नहीं रह जाता, समस्त चराचर जगत्‌ उस एकार्णवके जलमें डूबकर अदृश्य हो जाता है, देवता और असुर नष्ट हो जाते हैं तथा बड़े-बड़े नागोंका संहार हो जाता है, उस समय कमल और उत्पलमें निवास तथा शयन करनेवाले सर्वभूतेश्वर अमितात्मा ब्रह्माजीके पास रहकर केवल आप ही उनकी उपासना करते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນຍາມການລະລາຍອັນໃຫຍ່, ເມື່ອບໍ່ຫຼືອທັງຕາເວັນ, ໄຟ, ລົມ, ດວງຈັນ, ຟ້າ, ແລະແຜ່ນດິນ; ເມື່ອໂລກທັງປວງທີ່ເຄື່ອນໄຫວແລະບໍ່ເຄື່ອນໄຫວ ຈົມລົງໃນມະຫາສະຫມຸດອັນດຽວ ແລະຫາຍໄປ—ເມື່ອເທວະດາແລະອະສຸຣະພິນາດ ແລະແມ່ນແຕ່ນາຄາຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ກໍຖືກທຳລາຍ—ໃນເວລານັ້ນ ພຣະເຈົ້າແຫ່ງສັບພະສິ່ງ, ພຣະພຣະຫມາຜູ້ມີອາຕະມາອັນຫາຂອບເຂດບໍ່ໄດ້, ບັນທົມພັກຢູ່ໃນທີ່ຢູ່ແຫ່ງດອກບົວແລະອຸດປະລະ; ແລະມີແຕ່ທ່ານຜູ້ດຽວທີ່ຢູ່ໃກ້ພຣະອົງ, ຢືນປະຄອງຮັບໃຊ້ ແລະນະມັດສະການ»។

Verse 15

एतत्‌ प्रत्यक्षत: सर्व पूर्व वृत्तं द्विजोत्तम । तस्मादिच्छाम्यहं श्रोतुं सर्वहेत्वात्मिकां कथाम्‌,द्विजोत्तम! यह सारा पुरातन इतिहास आपका प्रत्यक्ष देखा हुआ है। इसलिये मैं आपके मुखसे सबके हेतुभूत कालका निरूपण करनेवाली कथा सुनना चाहता हूँ

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣາຫມັນຜູ້ປະເສີດ ຜູ້ເກີດສອງຄັ້ງ, ເລື່ອງລາວໂບຮານທັງໝົດນີ້ ທ່ານຮູ້ໂດຍປະຈັກຕາ. ດັ່ງນັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າປາຖະໜາຈະຟັງຈາກປາກທ່ານ ກະທາທີ່ອະທິບາຍເຫດປັດໃຈເບື້ອງລຶກ—ການເວລາ ແລະ ເງື່ອນໄຂ—ທີ່ເປັນເຫດໃຫ້ເກີດທຸກສິ່ງ».

Verse 16

अनुभूतं हि बहुशस्त्वयैकेन द्विजोत्तम | न ते<स्त्यविदितं किंचित्‌ सर्वलोकेषु नित्यदा,विप्रवर! केवल आपने ही अनेक कल्पोंकी श्रेष्ठ रचनाका बहुत बार अनुभव किया है। सम्पूर्ण लोकोंमें कभी कोई ऐसी वस्तु नहीं है, जो आपको ज्ञात न हो'

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຜູ້ເກີດສອງຄັ້ງຜູ້ປະເສີດ, ທ່ານຜູ້ດຽວໄດ້ເຫັນແລະປະສົບຫຼາຍຢ່າງ ຊ້ຳໆ ຕະຫຼອດຫຼາຍຍຸກຫຼາຍການ. ໃນທຸກໂລກ ໃນທຸກເວລາ ບໍ່ມີສິ່ງໃດທີ່ທ່ານບໍ່ຮູ້, ໂອ ພຣາຫມັນຜູ້ສູງສຸດ».

Verse 17

मार्कण्डेय उदाच हन्त ते वर्णयिष्यामि नमस्कृत्वा स्वयम्भुवे । पुरुषाय पुराणाय शाश्वतायाव्ययाय च

ມາຣະກັນເດຍ ກ່າວວ່າ: «ດີແລ້ວ—ຈົ່ງຟັງ; ຂ້າພະເຈົ້າຈະພັນລະນາໃຫ້ທ່ານ. ກ່ອນອື່ນ ຂ້າພະເຈົ້າຂໍນົບນ້ອມແດ່ພຣະຜູ້ເກີດຂຶ້ນເອງ (ສະວະຍັມພູ), ແດ່ພຣະບຸລຸດບູຮານ—ນິລັນດອນ ແລະ ບໍ່ເສື່ອມສະລາຍ—ແລ້ວຈຶ່ງເລີ່ມ».

Verse 18

अव्यक्ताय सुसूक्ष्माय निर्गुणाय गुणात्मने । स एष पुरुषव्याघत्र पीतवासा जनार्दन:

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ແດ່ພຣະອະວະຍັກຕະ—ຜູ້ບໍ່ປາກົດ—ຜູ້ລະອຽດລຶກຢ່າງຍິ່ງ; ແດ່ຜູ້ບໍ່ມີຄຸນລັກສະນະ ແຕ່ເປັນພື້ນຖານແຫ່ງຄຸນທັງປວງ—ນັ້ນແຫຼະແມ່ນ ຈະນາຣະດະນະ ຜູ້ນຸ່ງຜ້າສີເຫຼືອງ, ໂອ ພະຍັກຄະໃນຫມູ່ມະນຸດ».

Verse 19

एष कर्ता विकर्ता च भूतात्मा भूतकृत्‌ प्रभु: । अचिन्त्यं महदाश्चर्य पवित्रमिति चोच्यते

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ພຣະອົງເປັນຜູ້ກະທຳ ແລະ ເປັນຜູ້ຈັດສັນຜົນກຳ (ຜູ້ປ່ຽນແປງແລະກຳນົດຜົນ). ເປັນອາດຕະພາຍໃນຂອງສັດທັງປວງ, ເປັນຜູ້ສ້າງສັດ, ເປັນພຣະເຈົ້າຜູ້ເປັນໃຫຍ່. ພຣະອົງຖືກເອີ້ນວ່າ ຜູ້ຢາກຄິດກໍຄິດບໍ່ຖືກ, ຜູ້ອັດສະຈັນຢ່າງຍິ່ງ, ແລະ ຜູ້ຊຳລະໃຫ້ບໍລິສຸດ.»

Verse 20

मार्कण्डेयजी बोले--राजन! मैं स्वयं प्रकट होनेवाले सनातन, अविनाशी, अव्यक्त, सूक्ष्म, निर्गुण एवं गुणस्वरूप पुराणपुरुषको नमस्कार करके तुम्हें वह कथा अभी सुनाता हूँ। पुरुषसिंह! ये जो हमलोगोंके पास बैठे हुए पीताम्बरधारी भगवान्‌ जनार्दन हैं, ये ही संसारकी सृष्टि और संहार करनेवाले हैं। ये ही भगवान्‌ समस्त प्राणियोंके अन्तर्यामी आत्मा और उनके रचयिता हैं। ये पवित्र, अचिन्त्य एवं महान्‌ आश्वर्यमय तत्त्व कहे जाते हैं ।। १७ -7१९ || अनादिनिधनं भूत॑ विश्वमव्ययमक्षयम्‌ | एष कर्ता न क्रियते कारणं चापि पौरुषे,इनका न आदि है, न अन्त। ये सर्वभूतस्वरूप, अव्यय और अक्षय हैं। ये ही सबके कर्ता हैं, इनका कोई कर्ता नहीं है। पुरुषार्थकी प्राप्तिमें भी ये ही कारण हैं

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ພຣະອົງນັ້ນ ບໍ່ມີຕົ້ນ ບໍ່ມີປາຍ—ເປັນຈັກກະວານເອງ ບໍ່ເສື່ອມສະລາຍ ບໍ່ຜຸພັງ. ພຣະອົງພຽງຜູ້ດຽວເປັນຜູ້ກະທຳ; ບໍ່ມີຜູ້ສ້າງໃດຈະສ້າງພຣະອົງໄດ້. ແມ່ນແຕ່ໃນການບັນລຸເປົ້າໝາຍຂອງມະນຸດ (puruṣārtha) ພຣະອົງກໍເປັນເຫດປັດໃຈອັນຕັດສິນ».

Verse 21

यद्येष पुरुषो वेद वेदा अपि न त॑ विदुः । सर्वमाश्नर्यमेवैतन्निवृत्तं राजसत्तम

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຖ້າຊາຍຜູ້ນີ້ຮູ້ຄວາມຈິງແທ້ ແມ່ນແຕ່ເວດາທັງຫຼາຍກໍບໍ່ອາດ ‘ຮູ້’ ເຂົາໄດ້—ສະພາບຂອງເຂົາລະອຽດລຶກ ເກີນການເຂົ້າເຖິງທົ່ວໄປ. ທັງໝົດນີ້ແມ່ນນ່າອັດສະຈັນແທ້ ໂອ ກະສັດຜູ້ປະເສີດ, ເພາະເຂົາໄດ້ຫັນກັບຈາກການພົວພັນໂລກີ ແລະຢືນຢູ່ໃນຄວາມຖອນຕົວ (ຈາກຕັນຫາແລະການກະທຳ).»

Verse 22

चत्वार्याहु: सहस्राणि वर्षाणां तत्‌ कृतं युगम्‌

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ເຂົາກ່າວກັນວ່າ ສີ່ພັນປີ ເປັນກຣິຕະຍຸກ (Kṛta Yuga) ນັ້ນ.»

Verse 23

तस्य तावच्छती संध्या संध्यांशक्ष तथाविध: । चार हजार दिव्य वर्षोका एक सत्ययुग बताया गया है, उतने ही सौ वर्ष उसकी संध्या और संध्यांशके होते हैं (इस प्रकार कुल अड़तालीस सौ दिव्य वर्ष सत्ययुगके हैं) ।। २२३ || त्रीणि वर्षसहस्राणि त्रेतायुगमिहोच्यते

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຊ່ວງຮອຍຕໍ່ (sandhyā) ຂອງຍຸກນັ້ນ ຍາວໜຶ່ງຮ້ອຍປີ (ປີເທວະ) ແລະຊ່ວງຮອຍຕໍ່ສິ້ນສຸດ (sandhyāṃśa) ກໍມີຂະໜາດເທົ່າກັນ. ດັ່ງນັ້ນ ສັດຍະຍຸກ (Satya Yuga) ມີສີ່ພັນປີເທວະ ແລະເພີ່ມອີກຮ້ອຍປີເທວະສຳລັບຮອຍຕໍ່ເປີດ ແລະຮອຍຕໍ່ປິດ—ລວມເປັນສີ່ພັນແປດຮ້ອຍປີເທວະ. ຫຼັງຈາກນັ້ນ ຕຣີຕາຍຸກ (Tretā Yuga) ຖືກກ່າວວ່າຍາວສາມພັນປີເທວະ.»

Verse 24

तथा वर्षसहसे द्वे द्वापरं परिमाणत:

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ເຊັ່ນດຽວກັນ ຕາມມາດຕະຖານ ດວາປະຣະຍຸກ (Dvāpara) ຍາວສອງພັນປີ.»

Verse 25

सहस्रमेकं वर्षाणां तत: कलियुगं स्मृतम्‌,तदनन्तर एक हजार दिव्य वर्ष कलियुगका मान कहा गया है, सौ वर्ष उसकी संध्याके और सौ वर्ष संध्यांशके बताये गये हैं (इस प्रकार कलियुग बारह सौ दिव्य वर्षोंका होता है)। संध्या और संध्यांशका मान बराबर-बराबर ही समझो

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຫຼັງຈາກນັ້ນ ກະລິຍຸກ ຖືກຈື່ຈຳວ່າຍາວນານໜຶ່ງພັນປີເທວະ. ຕໍ່ຈາກນັ້ນ ໄດ້ກຳນົດໃຫ້ຮ້ອຍປີເປັນສັນທະຍາ (ເວລາຮອຍຕໍ່) ແລະອີກຮ້ອຍປີເປັນສັນທະຍາອັມສະ (ຊ່ວງຫຼັງຮອຍຕໍ່). ດັ່ງນັ້ນ ກະລິຍຸກລວມເປັນໜຶ່ງພັນສອງຮ້ອຍປີເທວະ; ຈົ່ງເຂົ້າໃຈວ່າ ມາດຕາຂອງສັນທະຍາ ແລະ ສັນທະຍາອັມສະ ເທົ່າກັນ.

Verse 26

तस्य वर्षशतं संधि: संध्यांशश्व॒ ततः परम्‌ | संधिसंध्यांशयोस्तुल्यं प्रमाणमुपधारय,तदनन्तर एक हजार दिव्य वर्ष कलियुगका मान कहा गया है, सौ वर्ष उसकी संध्याके और सौ वर्ष संध्यांशके बताये गये हैं (इस प्रकार कलियुग बारह सौ दिव्य वर्षोंका होता है)। संध्या और संध्यांशका मान बराबर-बराबर ही समझो

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ສຳລັບຍຸກນັ້ນ ຊ່ວງຮອຍຕໍ່ (sandhi) ຍາວຮ້ອຍປີ ແລະຕໍ່ຈາກນັ້ນ ສ່ວນຮອຍຕໍ່ທ້າຍ (sandhyāṁśa) ກໍຮ້ອຍປີເຊັ່ນກັນ. ຈົ່ງຖືວ່າ ມາດຕາຂອງ sandhi ແລະ sandhyāṁśa ເທົ່າກັນ».

Verse 27

क्षीणे कलियुगे चैव प्रवर्तेत कृतं युगम्‌ । एषा द्वादशसाहस्त्री युगाख्या परिकीर्तिता,कलियुगके क्षीण हो जानेपर पुनः सत्ययुगका आरम्भ होता है। इस तरह बारह हजार दिव्य वर्षोकी एक चतुर्युगी बतायी गयी है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ເມື່ອກະລິຍຸກ ໄດ້ດຳເນີນຈົນສິ້ນສຸດ ແລະໝົດກຳລັງແລ້ວ ກຣິຕະຍຸກ (ສັດຕະຍຸກ) ຈະເລີ່ມຂຶ້ນອີກຄັ້ງ. ດັ່ງນີ້ແຫຼະ ວົງຈອນຂອງສີ່ຍຸກ ຖືກຂານຂານວ່າ ‘ສິບສອງພັນ’ (ປີເທວະ)».

Verse 28

एतत्‌ सहस्रपर्यन्तमहो ब्राह्ममुदाह्नतम्‌ । विश्व हि ब्रह्मभवने सर्वत: परिवर्त्तते

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ດັ່ງນີ້ ຄຳບອກເລົ່າອັນສູງສົ່ງ ອັນເກືອບກຽວກັບພຣະພຣະຫມາ (Brahmā) ໄດ້ຖືກປະກາດແລ້ວ ຈົນເຖິງຂອບເຂດໜຶ່ງພັນ (ໃນມາດຕາ/ຈຳນວນ). ເພາະແທ້ຈິງ ຈັກກະວານທັງປວງ ພາຍໃນສະຖານພຳນັກຂອງພຣະພຣະຫມາ ຍ່ອມຫມຸນວຽນ ແລະປ່ຽນຜັນໄປທຸກທິດທາງ».

Verse 29

अल्पावशिष्टे तु तदा चुगान्ते भरतर्षभ

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ແຕ່ເມື່ອເວລານັ້ນ ໃນທ້າຍຍຸກ ເຫຼືອເວລາອີກໜ້ອຍດຽວ, ໂອ ຜູ້ເປັນດັ່ງງົວຜູ້ປະເສີດໃນວົງພັນບາຣະຕະ…»

Verse 30

सहस्रान्ते नरा: सर्वे प्रायशो5नृतवादिन: । यज्ञप्रतिनिधि: पार्थ दानप्रतिनिधिस्तथा

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ເມື່ອຄົບພັນປີ ມະນຸດເກືອບທັງໝົດມັກກາຍເປັນຜູ້ເວົ້າຄຳບໍ່ຈິງ. ໃນກາລນັ້ນ ໂອ ປາຣຖະ ພິທີຍັດຍະ (ຍະຊະ) ກໍກາຍເປັນແຕ່ການເຮັດແທນ ແລະການໃຫ້ທານກໍເປັນແຕ່ທານແທນເທົ່ານັ້ນ».

Verse 31

व्रतप्रतिनिधिश्वैव तस्मिन्‌ काले प्रवर्तते । भरतश्रेष्ठ सहस्र युगकी समाप्तिमें जब थोड़ा-सा ही समय शेष रह जाता है, उस समय कलियुगके अन्तिम भागमें प्राय: सभी मनुष्य मिथ्यावादी हो जाते हैं। पार्थ! उस समय यज्ञ, दान और व्रतके प्रतिनिधि कर्म चालू हो जाते हैं अर्थात्‌ यज्ञ, दान, तप मुख्य विधिसे न होकर गौण विधिसे नाममात्र होने लगते हैं || २९-३० $ ।। ब्राह्मणा: शूद्रकर्माणस्तथा शूद्रा धनार्जका:

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນເວລານັ້ນ ການປະຕິບັດວັດຕະ (ວຣະຕະ) ແບບແທນໆ ຈະເຂົ້າມາເປັນນິຍົມ. ພຣາຫມັນຈະໄປເຮັດອາຊີບຂອງຊູດຣະ ແລະຊູດຣະຈະມຸ່ງໝັ້ນໃນການຫາຊັບ—ເປັນເຄື່ອງໝາຍແຫ່ງຄວາມເສື່ອມໃນປາຍຍຸກ ເມື່ອຄວາມຈິງ ແລະການປະກອບຍັດຍະ, ທານ, ແລະຕະປະ ຕາມຫຼັກການອັນເຕັມຖ້ວນ ຖືກລະທິ້ງ».

Verse 32

निवृत्तयज्ञस्वाध्याया दण्डाजिनविवर्जिता:,(सहस्र चतुर्युगके अन्तिम) कलियुगके अन्तिम भागमें ब्राह्मण यज्ञ, स्वाध्याय, दण्ड और मृगचर्मका त्याग कर देंगे और (भनक्ष्याभक्ष्यका विचार छोड़कर) सब कुछ खाने- पीनेवाले हो जायँगे। तात! ब्राह्मण तो जपसे दूर भागेंगे और शूद्र वैदिक मन्त्रोंके जपमें संलग्न होंगे

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນຊ່ວງທ້າຍສຸດຂອງກະລິຍຸກ—ໃນທ້າຍສຸດຂອງວົງຈອນຍຸກອັນຍາວ—ພຣາຫມັນຈະລະທິ້ງຍັດຍະ ແລະການສຶກສາພຣະເວດ (ສະວາດຢາຍ). ພວກເຂົາຈະປະຖິ້ມໄມ້ທ່ອນ (ດັນດະ) ແລະໜັງກວາງ ອັນເປັນເຄື່ອງໝາຍແຫ່ງຊີວິດມີວິໄນ. ເມື່ອລະທິ້ມການພິຈາລະນາວ່າອາຫານໃດຄວນຫຼືບໍ່ຄວນ ພວກເຂົາຈະກາຍເປັນຜູ້ກິນດື່ມບໍ່ເລືອກ. ລູກເອີຍ, ພຣາຫມັນຈະຫນີຈາກຈະປະ (ການສວດທ່ອງມົນສັກສິດ) ແຕ່ຊູດຣະຈະໝັ້ນໃນການຈະປະມົນພຣະເວດ».

Verse 33

ब्राह्मणा: सर्वभक्षाश्न॒ भविष्यन्ति कलौ युगे । अजपा ब्राह्मणास्तात शूद्रा जपपरायणा:,(सहस्र चतुर्युगके अन्तिम) कलियुगके अन्तिम भागमें ब्राह्मण यज्ञ, स्वाध्याय, दण्ड और मृगचर्मका त्याग कर देंगे और (भनक्ष्याभक्ष्यका विचार छोड़कर) सब कुछ खाने- पीनेवाले हो जायँगे। तात! ब्राह्मण तो जपसे दूर भागेंगे और शूद्र वैदिक मन्त्रोंके जपमें संलग्न होंगे

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນກະລິຍຸກ ພຣາຫມັນຈະກາຍເປັນຜູ້ກິນທຸກຢ່າງ ກິນສິ່ງໃດກໍໄດ້ທີ່ມີ. ລູກເອີຍ, ພຣາຫມັນຈະລະທິ້ງວິໄນແຫ່ງຈະປະ ແຕ່ຊູດຣະຈະອຸທິດຕົນໃນມົນຈະປະ.»

Verse 34

विपरीते तदा लोके पूर्वरूपं क्षयस्य तत्‌ । बहवो म्लेच्छराजान: पृथिव्यां मनुजाधिप,नरेश्वर! इस प्रकार जब लोगोंके विचार और व्यवहार विपरीत हो जाते हैं, तब प्रलयका पूर्वरूप आरम्भ हो जाता है। उस समय इस पृथ्वीपर बहुत-से म्लेच्छ राजा राज्य करने लगते हैं

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ເມື່ອທັດສະນະ ແລະການປະພຶດຂອງໂລກກັບຕາລະປັດ—ເມື່ອຜູ້ຄົນຫັນຫນີຈາກລະບຽບອັນຖືກຕ້ອງ—ນັ້ນແຫຼະແມ່ນເຄື່ອງໝາຍລ່ວງໜ້າແຫ່ງຄວາມພິນາດ. ໃນເວລານັ້ນ ໂອ ຈອມເຈົ້າແຫ່ງມະນຸດ ຈະມີກະສັດມເລັດຈະ (mleccha) ຫຼາຍອົງຂຶ້ນປົກຄອງເທິງແຜ່ນດິນ.»

Verse 35

मृषानुशासिन: पापा मृषावादपरायणा: । आन्ध्रा: शका: पुलिन्दाश्न यवनाश्न नराधिपा:,छलसे शासन करनेवाले, पापी और असत्यवादी आन्ध्र, शक, पुलिन्द, यवन, काम्बोज, बाह्लीक तथा शौर्यसम्पन्न आभीर इस देशके राजा होंगे। नरश्रेष्ठी उस समय कोई ब्राह्मण अपने धर्मके अनुसार जीविका चलानेवाला न होगा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຈະມີກະສັດຊົ່ວ ປົກຄອງດ້ວຍການຫລອກລວງ ແລະຍຶດມັ່ນໃນຄຳມຸສາ. ກະສັດເຫຼົ່ານັ້ນຈະເປັນອັນທຣະ, ສະກະ, ພຸລິນດະ, ແລະ ຢະວະນະ».

Verse 36

काम्बोजा बाह्लिका: शूरास्तथा5<5भीरा नरोत्तम | न तदा ब्राह्मण: कश्रनित्‌ स्वधर्ममुपजीवति,छलसे शासन करनेवाले, पापी और असत्यवादी आन्ध्र, शक, पुलिन्द, यवन, काम्बोज, बाह्लीक तथा शौर्यसम्पन्न आभीर इस देशके राजा होंगे। नरश्रेष्ठी उस समय कोई ब्राह्मण अपने धर्मके अनुसार जीविका चलानेवाला न होगा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຜູ້ປະເສີດໃນມະນຸດ! ໃນການນັ້ນ ກາມໂບຊະ ແລະ ບາຫລີກະ ພ້ອມທັງ ອາພີຣະຜູ້ກ້າຫານ ຈະຄອງອຳນາດ. ແລ້ວບໍ່ມີພຣາຫມະນະຜູ້ໃດເລີຍ ຈະດຳລົງຊີວິດໄດ້ດ້ວຍທຳຂອງຕົນ».

Verse 37

क्षत्रियाश्षापि वैश्याश्ष विकर्मस्था नराधिप । अल्पायुष: स्वल्पबला: स्वल्पवीर्यपराक्रमा:,नरेश्वर! क्षत्रिय और वैश्य भी अपना-अपना धर्म छोड़कर दूसरे वर्णोके कर्म करने लगेंगे। सबकी आयु कम होगी, सबके बल, वीर्य और पराक्रम घट जायँगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະຣາຊາ, ແມ່ນແຕ່ ກະສັດຊັ້ນກະສັດ (ກະສັຕຣິຍະ) ແລະ ວາຍສະຍະ ກໍຈະລະທິ້ງໜ້າທີ່ຂອງຕົນ ແລ້ວໄປເຮັດວຽກຂອງວັນນະອື່ນ. ດ້ວຍເຫດນັ້ນ ມະນຸດຈະອາຍຸສັ້ນ, ກຳລັງຈະຫຼຸດລົງ, ແລະພະລັງຊີວິດກັບຄວາມກ້າຫານຈະເສື່ອມຖອຍ».

Verse 38

अल्पसाराल्पदेहाश्व॒ तथा सत्याल्पभाषिण: । बहुशून्या जनपदा मृगव्यालावृता दिश:,मनुष्य नाटे कदके होंगे। उनकी शरीरिक शक्ति बहुत कम हो जायगी और उनकी बातोंमें सत्यका अंश बहुत कम होगा। बहुधा सारे जनपद जनशून्य होंगे। सम्पूर्ण दिशाएँ पशुओं और सर्पोसे भरी होंगी। युगान्तकाल उपस्थित होनेपर अधिकांश मनुष्य (अनुभव न होते हुए भी) वृथा ही ब्रह्मज्ञानकी बातें कहेंगे। शूद्र द्विजातियोंको भो (ऐ) कहकर पुकारेंगे और ब्राह्मणलोग शूट्रोंको आर्य अर्थात्‌ आप कहकर सम्बोधन करेंगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ມະນຸດຈະເປັນຜູ້ມີແກ່ນສານນ້ອຍ ຮ່າງກາຍອ່ອນແອ ແລະເວົ້າຄຳທີ່ມີຄວາມຈິງເພີຍນ້ອຍ. ເມືອງແລະແຄວ້ນຫຼາຍແຫ່ງຈະວ່າງເປົ່າ, ແລະທິດທາງທັງປວງຈະຖືກຄອບຄອງໂດຍສັດປ່າແລະສັດດຸຮ້າຍ».

Verse 39

युगान्ते समनुप्राप्ते वृथा च ब्रह्मवादिन: । भोवादिनस्तथा शाद्रा ब्राह्मणाश्चार्यवादिन:,मनुष्य नाटे कदके होंगे। उनकी शरीरिक शक्ति बहुत कम हो जायगी और उनकी बातोंमें सत्यका अंश बहुत कम होगा। बहुधा सारे जनपद जनशून्य होंगे। सम्पूर्ण दिशाएँ पशुओं और सर्पोसे भरी होंगी। युगान्तकाल उपस्थित होनेपर अधिकांश मनुष्य (अनुभव न होते हुए भी) वृथा ही ब्रह्मज्ञानकी बातें कहेंगे। शूद्र द्विजातियोंको भो (ऐ) कहकर पुकारेंगे और ब्राह्मणलोग शूट्रोंको आर्य अर्थात्‌ आप कहकर सम्बोधन करेंगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ເມື່ອວາລະສິ້ນຍຸກໃກ້ມາ ຄົນຈຳນວນຫຼາຍຈະເວົ້າເຖິງ ພຣະພຣະຫມັນ (Brahman) ຢ່າງເປົ່າໆ—ເປັນແຕ່ຄຳພູດ ບໍ່ມີການຮູ້ແຈ້ງ. ຊູດຣະຈະເອີ້ນຜູ້ເກີດສອງຄັ້ງ (ດວິຊະ) ດ້ວຍຄຳຫຍາບ ‘ໂບ!’ ແລະພຣາຫມະນະຈະເອີ້ນຊູດຣະດ້ວຍຄຳຍົກຍ້ອງ ‘ອາຣະຍະ’ (‘ທ່ານ’).»

Verse 40

युगान्ते मनुजव्याप्र भवन्ति बहुजन्तवः । न तथा घ्राणयुक्ताश्न सर्वगन्धा विशाम्पते,पुरुषसिंह राजन! युगान्तकालमें बहुतसे जीव-जन्तु उत्पन्न हो जायँगे। सब प्रकारके सुगन्धित पदार्थ नासिकाको उतने गन्धयुक्त नहीं प्रतीत होंगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນຍາມສິ້ນສຸດແຫ່ງຍຸກ (ຍຸການຕະ) ສັດມີຊີວິດຫຼາຍປະເພດຈະເກີດຂຶ້ນ. ແມ່ນແຕ່ຜູ້ມີປະສາດດົມກິ່ນ ກໍຈະບໍ່ຮັບຮູ້ກິ່ນຫອມຕ່າງໆ ຕາມຄວາມເປັນຈິງຂອງມັນ. ໂອ ຈອມເຈົ້າແຫ່ງປະຊາ, ໂອ ສິງໃນຫມູ່ມະນຸດ, ໂອ ພະຣາຊາ—ໃນເວລານັ້ນ ກິ່ນທັງປວງຈະເສື່ອມອຳນາດ ບໍ່ເຕັມສົມບູນ».

Verse 41

रसाश्च मनुजव्यात्र न तथा स्वादुयोगिन: । बहुप्रजा हस्वदेहा: शीलाचारविवर्जिता: । मुखे भगा: स्त्रियो राजन्‌ भविष्यन्ति युगक्षये,नरव्याप्र! इसी प्रकार रसीले पदार्थभी जैसे चाहिये वैसे स्वादिष्ट नहीं होंगे। राजन्‌! उस समयकी स्त्रियाँ नाटे कदकी और बहुत संतान (बच्चा) पैदा करनेवाली होंगी। उनमें शील और सदाचारका अभाव होगा। युगान्तकालमें स्त्रियाँ मुखसे भगसम्बन्धी यानी व्यभिचारकी ही बातें करनेवाली होंगी। राजन! युगान्त-कालमें हर देशके लोग अन्न बेचनेवाले होंगे। ब्राह्मण वेद बेचनेवाले तथा (प्रायः) स्त्रियाँ वेश्यावृत्तिको अपनानेवाली होंगी-

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ເສືອໃນຫມູ່ມະນຸດ, ອາຫານແລະນ້ຳຫວານທັງຫຼາຍກໍຈະບໍ່ມີຄວາມຫວານ ແລະລົດຊາດອັນດີດັ່ງທີ່ຄວນຈະເປັນ. ໃນຍາມສິ້ນຍຸກ, ໂອ ພະຣາຊາ, ຍິງທັງຫຼາຍຈະຕົວເຕັ້ຍ ແລະມີລູກຫຼາຍ, ແຕ່ຂາດຄວາມລະອາຍ ແລະຄວາມປະພຶດດີ. ໃນເວລາແຫ່ງການສະລາຍນັ້ນ, ຍິງຈະເວົ້າເລື່ອງກາມະຢ່າງເປີດເຜີຍ ແລະບໍ່ຢຸດຢັ້ງ».

Verse 42

अट्टशूला जनपदा: शिवशूलाश्षतुष्पथा: । केशशूला: स्त्रियो राजन्‌ भविष्यन्ति युगक्षये,नरव्याप्र! इसी प्रकार रसीले पदार्थभी जैसे चाहिये वैसे स्वादिष्ट नहीं होंगे। राजन्‌! उस समयकी स्त्रियाँ नाटे कदकी और बहुत संतान (बच्चा) पैदा करनेवाली होंगी। उनमें शील और सदाचारका अभाव होगा। युगान्तकालमें स्त्रियाँ मुखसे भगसम्बन्धी यानी व्यभिचारकी ही बातें करनेवाली होंगी। राजन! युगान्त-कालमें हर देशके लोग अन्न बेचनेवाले होंगे। ब्राह्मण वेद बेचनेवाले तथा (प्रायः) स्त्रियाँ वेश्यावृत्तिको अपनानेवाली होंगी-

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນຍາມສິ້ນຍຸກ, ໂອ ພະຣາຊາ—ໂອ ເສືອໃນຫມູ່ມະນຸດ—ບັນດາແຄວ້ນແດນຈະເປັນດັ່ງຖືກທຽບທອນດ້ວຍຫຼັກແຫຼມ. ແມ່ນແຕ່ສາມແຍກສີ່ແຍກກໍຈະຖືກໝາຍໄວ້ດ້ວຍ ‘ຫອກພຣະສິວະ’ ອັນເປັນລາງຮ້າຍ. ຍິງທັງຫຼາຍກໍຈະຖືກທຸກທ້ອນ ດັ່ງຖືກ ‘ຕຳດ້ວຍເສັ້ນຜົມ’ ແລະປ່ວຍໄຂ້. ນີ້ແມ່ນລາງອັນເຈັບປວດແຫ່ງການພັງທະລາຍທາງສິນທຳ ໃນຍາມຍຸກຈົບ».

Verse 43

अल्पक्षीरास्तथा गावो भविष्यन्ति जनाधिप । अल्पपुष्पफलाश्चापि पादपा बहुवायसा:,जनेश्वर! युगान्तकालमें गायोंके थनोंमें बहुत कम दूध होगा। वृक्षपर फल और फूल बहुत कम होंगे और उनपर (अच्छे पक्षियोंकी अपेक्षा) कौए ही अधिक बसेरे लेंगे। भूपाल! ब्राह्मणगलोग (लोभवश) ब्रह्महत्या-जैसे पापोंसे लिप्त और मिथ्यावादी नरेशोंसे ही दान- दक्षिणा लेंगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຈອມເຈົ້າແຫ່ງມະນຸດ, ໃນເວລານັ້ນ ງົວຈະໃຫ້ນ້ຳນົມແຕ່ໜ້ອຍ. ຕົ້ນໄມ້ກໍຈະອອກດອກອອກຜົນໜ້ອຍ, ແລະຈະມີຝູງກາກວ່ານົກມົງຄຸນມາເກາະອາໄສ. ດັ່ງນັ້ນ ເມື່ອຍຸກເສື່ອມລົງ, ລາງແຫ່ງຄວາມອຸດົມແລະຄວາມບໍລິສຸດຈະຫຼຸດຫາຍ, ແລະສິ່ງຕ່ຳຊ້າກັບອັບມົງຄຸນຈະເດັ່ນຂຶ້ນ».

Verse 44

ब्रह्मवध्यानुलिप्तानां तथा मिथ्याभिशंसिनाम्‌ । नृपाणां पृथिवीपाल प्रतिगृह्नन्ति वै द्विजा:,जनेश्वर! युगान्तकालमें गायोंके थनोंमें बहुत कम दूध होगा। वृक्षपर फल और फूल बहुत कम होंगे और उनपर (अच्छे पक्षियोंकी अपेक्षा) कौए ही अधिक बसेरे लेंगे। भूपाल! ब्राह्मणगलोग (लोभवश) ब्रह्महत्या-जैसे पापोंसे लिप्त और मिथ्यावादी नरेशोंसे ही दान- दक्षिणा लेंगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຜູ້ພິທັກແຜ່ນດິນ, ພຣາຫມັນທັງຫຼາຍຈະຮັບຂອງທານຈາກກະສັດຜູ້ປົ່ນເປື້ອນດ້ວຍບາບພຣະຫມັນຂ້າ (brahma-hatyā) ແລະຈາກຜູ້ກ່າວຮ້າຍ ເວົ້າຄຳມຸສາ. ນີ້ແມ່ນລາງແຫ່ງການເສື່ອມສິນທຳຂອງຍຸກ: ແມ່ນແຕ່ຜູ້ຄວນຈະຄ້ຳຈຸນທຳມະ ກໍຖືກພັນທະດ້ວຍຄວາມໂລບ ແລະການປະນີປະນອມ; ແລະຜູ້ປົກຄອງທີ່ບໍ່ບໍລິສຸດກໍຍັງຫາການຮັບຮອງທາງສາສະໜາໄດ້ ດ້ວຍອຳນາດແຫ່ງການອຸປະຖຳ».

Verse 45

लोभमोहपरीताश्च मिथ्याधर्मध्वजावृता: । भिक्षार्थ पृथिवीपाल चज्चूर्यन्ते द्विजैर्दिश:,राजन! वे ब्राह्मण लोभ और मोहमें फँसकर झूठे धर्मका ढोंग रचनेवाले होंगे, इतना ही नहीं, वे भिक्षाके लिये सारी दिशाओंके लोगोंको पीड़ित करते रहेंगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະຣາຊາ, ພວກພຣາຫມັນທີ່ຖືກຄວາມໂລບ ແລະ ຄວາມຫຼົງຄອບງຳ ແລະ ປົກຄຸມດ້ວຍທຸງແຫ່ງທຳປອມ ຈະບໍ່ແມ່ນແຕ່ຂໍທານເທົ່ານັ້ນ; ໃນນາມຂໍທານ ພວກເຂົາຈະກໍ່ກວນ ແລະ ກົດຂີ່ຜູ້ຄົນທຸກທິດ».

Verse 46

करभारभयाद्‌ भीता गृहस्था: परिमोषका: | मुनिच्छञाकृतिच्छन्ना वाणिज्यमुपजीविन:

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ເພາະຢ້ານໄພຈາກການຕ້ອງແບກພາລະໜັກ ພວກໂຈນເຫຼົ່ານັ້ນຈຶ່ງຢູ່ພາຍນອກເຫມືອນຄົນຄອບຄົວ. ພວກເຂົາປອມຕົວໃຕ້ຮູບລັກຂອງນັກບວດ ແລະ ດຳລົງຊີວິດດ້ວຍການຄ້າ—ໃຊ້ບົດບາດທີ່ນ່ານັບຖືເປັນການປົກປິດການລັກຂໂມຍ».

Verse 47

अर्थलोभान्नरव्याप्र तथा च ब्रह्म॒चारिण:

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ເພາະຄວາມໂລບໃນຊັບສິນ ຜູ້ຄົນຈະພາກັນຫຍຸ້ງຢາກໃນກິດຈະກຳໂລກີ. ແມ່ນດັ່ງນັ້ນ ແມ່ນແຕ່ຜູ້ຖືພຣະພຣົມຈັນ (brahmacārin) ກໍອາດຖືກດຶງເຂົ້າໄປໃນຄວາມກະສັບກະສ່າຍນັ້ນ».

Verse 48

आश्रमेषु वृथाचारा: पानपा गुरुतल्पगा: । इह लौकिकमीहन्ते मांसशोणितवर्धनम्‌

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນອາສຣົມຈະມີຜູ້ທີ່ປະພຶດຕົວຫຼອກລວງ—ເປັນຄົນດື່ມເຫຼົ້າ ແລະ ຜູ້ລ່ວງລະເມີດຕຽງຂອງຄູອາຈານ (guru). ຢູ່ນີ້ພວກເຂົາຈະມຸ່ງແຕ່ເປົ້າໝາຍໂລກີ ສະແຫວງຫາການເພີ່ມພູນເນື້ອແລະເລືອດ».

Verse 49

नरश्रेष्ठल धनके लोभसे ब्रह्मचारी भी आश्रमोंमें दम्भपूर्ण आचारको अपनायेंगे और मद्यपान करके गुरुपत्नीगमन करेंगे। लोग अपने शरीरके मांस और रक्त बढ़ानेवाले इहलौकिक कर्मांमें ही लगे रहेंगे ।। बहुपाषण्डसंकीर्णा: परान्नगुणवादिन: । आश्रमा मनुजव्यात्र भविष्यन्ति युगक्षये,नरश्रेष्ठ) युगान्तकालमें सभी आश्रम अनेक प्रकारके पाखण्डोंसे व्याप्त और दूसरोंसे मिले हुए भोजनका ही गुणगान करनेवाले होंगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຜູ້ປະເສີດໃນຫມູ່ມະນຸດ, ໃນຍຸກສິ້ນສຸດ ອາສຣົມທັງຫມົດຈະຖືກຄອບງຳດ້ວຍການສະແດງອັນເປັນພາກັນດາ (ຄວາມຫຼອກລວງທາງສາສະໜາ) ຫຼາຍຮູບແບບ ແລະ ຄວາມສັບສົນ. ຜູ້ຄົນຈະສັນລະເສີນ ແລະ ໄລ່ຕາມອາຫານທີ່ໄດ້ມາຈາກຄົນອື່ນ; ວິໄນຂອງອາສຣົມຈະຖືກກັດກິນຈາກພາຍໃນ—ຈົນເຄື່ອງໝາຍພາຍນອກແທນທີ່ການຂົ່ມໃຈພາຍໃນ ແລະ ທຳຈະຕົກຕ່ຳເປັນຄວາມຢາກ ແລະ ຄວາມໜ້າໄຫວ້ຫຼັງຫຼອກ».

Verse 50

यर्थर्तुवर्षी भगवान्‌ न तथा पाकशासन: । न चापि सर्वबीजानि सम्यगू रोहन्ति भारत,भगवान्‌ इन्द्र भी ठीक वर्षाऋतुके समय जलकी वर्षा नहीं करेंगे। भारत! भूमिमें बोये हुए सभी बीज ठीकसे नहीं जमेंगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ດັ່ງພຣະຜູ້ເປັນເຈົ້າຜູ້ປະທານຝົນໃຫ້ຕົກຕາມລະດູການອັນຄວນ ພາກະສາສະນະ (ພຣະອິນທຣາ) ກໍຄວນປະພຶດຕາມນັ້ນ. ຖ້າພຣະອິນທຣາບໍ່ປະທານນ້ຳຝົນໃນເວລາອັນຄວນ ໂອ ພາຣະຕະ ແມ່ນແຕ່ເມັດພືດທີ່ຫວ່ານລົງໃນດິນ ກໍຈະບໍ່ງອກງາມດີ».

Verse 51

हिंसाभिरामश्न जनस्तथा सम्पद्यते5शुचि: । अधर्मफलमत्यर्थ तदा भवति चानघ,कलियुगमें सब लोग हिंसामें ही सुख माननेवाले तथा अपवित्र रहेंगे। निष्पाप! उस समय अधर्मका फल बहुत अधिक मात्रामें मिलेगा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນຍຸກກະລິ ຜູ້ຄົນຈະພາກັນຍິນດີໃນຄວາມຮຸນແຮງ ແລະດ້ວຍເຫດນັ້ນຈະກາຍເປັນຜູ້ບໍ່ບໍລິສຸດໃນຄວາມປະພຶດ. ໂອ ຜູ້ບໍ່ມີມົນທິນ, ໃນເວລານັ້ນ ຜົນຂອງອະທັມຈະເພີ່ມພູນຢ່າງຫຼາຍຫຼວງ—ອອກຜົນຫນັກໜ່ວງແລະຫຼາຍລົ້ນ».

Verse 52

तदा च पृथिवीपाल यो भवेद्‌ धर्मसंयुतः । अल्पायु: स हि मन्तव्यो न हि धर्मो5स्ति कश्नन,भूपाल! उस समय जो भी धर्ममें तत्पर रहेगा, उसकी आयु बहुत थोड़ी देखनेमें आयेगी; क्योंकि उस समय कोई भी धर्म टिक नहीं सकेगा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ແລ້ວໃນເວລານັ້ນ ໂອ ພຣະຣາຊາ, ຜູ້ໃດໃນບັນດາຜູ້ປົກຄອງທີ່ຍຶດໝັ້ນຢູ່ກັບທັມຢ່າງໝັ້ນຄົງ ຈະຖືກເຫັນວ່າເປັນຜູ້ອາຍຸສັ້ນ; ເພາະໃນຍຸກນັ້ນ ທັມຈະບໍ່ອາດດຳລົງຢູ່ໄດ້ເລີຍ».

Verse 53

भूयिष्ठं कूटमानैश्व पण्यं विक्रीणते जना: । वणिजकश्न नरव्यात्र बहुमाया भवन्त्युत,लोग बाजारमें झूठे माप-तौल बनाकर बहुत-सा माल बेचते रहेंगे। नरश्रेष्ठीी उस समयके बनिये भी बहुत माया जाननेवाले (धूर्त) होंगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນເວລານັ້ນ ຜູ້ຄົນສ່ວນໃຫຍ່ຈະຂາຍສິນຄ້າດ້ວຍຕາຊັ່ງແລະມາດຕາວັດທີ່ປອມ. ແລະພໍ່ຄ້າທັງຫຼາຍ ໂອ ຜູ້ປະເສີດໃນມະນຸດ ຈະເຕັມໄປດ້ວຍກົນລະຍຸດແລະການຫຼອກລວງ—ຊ່ຽວຊານໃນມາຍາຫຼາຍປະການ».

Verse 54

धर्मिष्ठा: परिहीयन्ते पापीयान्‌ वर्धते जन: । धर्मस्य बलहानि: स्यादधर्मश्ष बली तथा,धर्मात्मा पुरुष हानि उठाते दीखेंगे और बड़े-बड़े पापी लौकिक दृष्टिसे उन्नतिशील होंगे। धर्मका बल घटेगा और अधर्म बलवान्‌ होगा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຜູ້ທີ່ເຄົາລົບທັມຢ່າງແທ້ຈິງຈະຖືກຫຼຸດຄ່າແລະຖືກລະເລີຍ; ແຕ່ຜູ້ບາບຫນັກຈະຮຸ່ງເຮືອງແລະເພີ່ມພູນ. ກຳລັງຂອງທັມຈະອ່ອນລົງ ແລະອະທັມຈະແຂງແຮງຂຶ້ນ».

Verse 55

अल्पायुषो दरिद्राश्न॒ धर्मिष्ठा मानवास्तथा । दीर्घायुष: समृद्धाश्व विधर्माणो युगक्षये,युगान्तकालमें धर्मिष्ठ मानव अल्पायु तथा दरिद्र देखे जायँगे और अधर्मी मनुष्य दीर्घायु तथा समृद्धिशाली देखे जायँगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນຍຸກສິ້ນສຸດ (ຍຸການຕະ) ແມ່ນແຕ່ຜູ້ຍຶດໝັ້ນໃນທຳມະ ກໍຈະຖືກເຫັນວ່າອາຍຸສັ້ນ ແລະຍາກຈົນ; ແຕ່ຜູ້ປະພຶດຜິດທຳມະ ຈະຖືກເຫັນວ່າອາຍຸຍືນ ແລະຮັ່ງມີ.

Verse 56

नगराणां विहारेषु विधर्माणो युगक्षये । अधर्मिष्ठिरुपायैश्व प्रजा व्यवहरन्त्युत,युगान्तके समय नगरोंके उद्यानोंमें पापी पुरुष अड्डा जमायेंगे और पापपूर्ण उपायोंद्वारा प्रजाके साथ दुर्व्यवहार करेंगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນຍຸກສິ້ນສຸດ ໃນສວນພັກຜ່ອນຂອງນະຄອນ ຜູ້ຫຼຸດອອກຈາກທຳມະຈະມາຊຸມນຸມ ແລະຕັ້ງເປັນທີ່ສິງສູ່; ແລ້ວດ້ວຍກົນອຸບາຍອະທຳອັນຊົ່ວຮ້າຍ ຈະຂົ່ມເຫັງປະຊາຊົນ.

Verse 57

संचयेन तथाल्पेन भवन्त्याब्यमदान्विता: । धनं विश्वासतो न्यस्तं मिथो भूयिष्ठशो नरा:,राजन! थोड़ेसे धनका संग्रह हो जानेपर लोग धनाढ्यताके मदसे उन्मत्त हो उठेंगे। यदि किसीने विश्वास करके अपने धनको धरोहरके रूपमें रख दिया तो अधिकांश पापाचारी और निर्लज मनुष्य उस धरोहरको हड़प लेनेकी चेष्टा करेंगे और उससे साफ कह देंगे कि हमारे यहाँ तुम्हारा कुछ भी नहीं है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ພຣະຣາຊາ, ແມ່ນແຕ່ການສະສົມຊັບເພີຍນ້ອຍ ກໍເຮັດໃຫ້ຄົນເມົາມົນດ້ວຍຄວາມຫຍິ່ງຍໂສແຫ່ງຄວາມຮັ່ງມີ. ແລະເມື່ອເງິນຖືກຝາກໄວ້ດ້ວຍຄວາມໄວ້ໃຈ ຄົນສ່ວນໃຫຍ່ຈະພາກັນພະຍາຍາມຍຶດເອົາ ແລະປະກາດຢ່າງບໍ່ອາຍວ່າ: «ທີ່ນີ້ ເຈົ້າບໍ່ມີຫຍັງດອກ».

Verse 58

हर्तु व्यवसिता राजन्‌ पापाचारसमन्विता: । नैतदस्तीति मनुजा वर्तन्ते निरपत्रपा:,राजन! थोड़ेसे धनका संग्रह हो जानेपर लोग धनाढ्यताके मदसे उन्मत्त हो उठेंगे। यदि किसीने विश्वास करके अपने धनको धरोहरके रूपमें रख दिया तो अधिकांश पापाचारी और निर्लज मनुष्य उस धरोहरको हड़प लेनेकी चेष्टा करेंगे और उससे साफ कह देंगे कि हमारे यहाँ तुम्हारा कुछ भी नहीं है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ພຣະຣາຊາ, ເມື່ອພວກເຂົາຕັ້ງໃຈຈະຍຶດເອົາແລ້ວ—ຜູ້ຈົມຢູ່ໃນການປະພຶດບາບ—ຄົນບໍ່ຮູ້ອາຍຈະກ່າວໄປຮອດຂັ້ນວ່າ: «ມັນບໍ່ມີຢູ່ທີ່ນີ້ເລີຍ». ດັ່ງນັ້ນ ເມື່ອມີຊັບເພີຍນ້ອຍຖືກສະສົມ ຄົນຈະເມົາມົນດ້ວຍຄວາມຫຍິ່ງຍໂສແຫ່ງຄວາມຮັ່ງມີ; ແລະຖ້າຜູ້ໃດໄວ້ໃຈຝາກຊັບເປັນຫຼັກປະກັນ ຫຼືໃຫ້ຮັກສາໄວ້ ຄົນຊົ່ວຫຼາຍຈະພາກັນຍຶດເອົາ ແລະປະຕິເສດຢ່າງຕົງໆ.

Verse 59

पुरुषादानि सत्त्वानि पक्षिणो5थ मृगास्तथा । नगराणां विहारेषु चैत्येष्वपि च शेरते,मनुष्यका मांस खानेवाले हिंसक जीव तथा पशु-पक्षी नागरिकोंके बगीचों और देवालयोंमें भी शयन करेंगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ສັດດຸຮ້າຍທີ່ລ່າກິນມະນຸດ—ທັງນົກ ແລະສັດປ່າ—ຈະນອນຢູ່ແມ່ນແຕ່ໃນສວນພັກຜ່ອນຂອງນະຄອນ ແລະໃນສະຖານທີ່ບູຊາອັນສັກສິດ.

Verse 60

सप्तवर्षष्टवर्षाश्च स्त्रियों गर्भधरा नूप । दशद्वादशवर्षाणां पुंसां पुत्र: प्रजायते,राजन! युगान्तकालमें सात-आठ वर्षकी स्त्रियाँ गर्भ धारण करेंगी और दस-बारह वर्षकी अवस्थावाले पुरुषोंके भी पुत्र होंगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ! ໃນຍຸກແຫ່ງຄວາມເສື່ອມຖອຍນັ້ນ ແມ່ນແຕ່ເດັກຍິງອາຍຸເຈັດ ຫຼື ແປດປີ ກໍຈະຕັ້ງຄັນ; ແລະແມ່ນແຕ່ເດັກຊາຍອາຍຸສິບ ຫຼື ສິບສອງປີ ກໍຈະໃຫ້ກຳເນີດບຸດໄດ້»។

Verse 61

भवन्ति षोडशे वर्षे नरा: पलितिनस्तथा । आयु:क्षयो मनुष्याणां क्षिप्रमेव प्रपद्यते,सोलहवें वर्षमें मनुष्योंक बाल पक जायँगे और उनकी आयु शीघ्र ही समाप्त हो जायगी

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ເມື່ອຮອດອາຍຸສິບຫົກປີ ຊາຍທັງຫຼາຍຈະມີຜົມຫງອກແລ້ວ; ແລະອາຍຸຂອງມະນຸດຈະຫົດສັ້ນລົງຢ່າງວ່ອງໄວ ແລະເຖິງການສິ້ນສຸດ»។

Verse 62

क्षीणायुषो महाराज तरुणा वृद्धशीलिन: । तरुणानां च यच्छीलं तद्‌ वृद्धेषु प्रजायते,महाराज! उस समयके तरुणोंकी आयु क्षीण होगी और उनका शील-स्वभाव बूढ़ोंका- सा हो जायगा और तरुणोंका जो शील-स्वभाव होना चाहिये, वह बूढ़ोंमें प्रकट होगा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່, ໃນເວລານັ້ນ ຄົນໜຸ່ມຈະມີອາຍຸສັ້ນ ແລະຈະມີກິລິຍາມາລະຍາດ ແລະນິໄສດັ່ງຄົນເຖົ້າ; ແລະກິລິຍາທີ່ຄວນເປັນຂອງຄົນໜຸ່ມ ຈະກັບໄປປາກົດໃນຄົນເຖົ້າແທນ»។

Verse 63

विपरीतास्तदा नार्यो वज्चयित्वारहत: पतीन्‌ | व्युच्चरन्त्यपि दुःशीला दासै: पशुभिरेव च,उस समयकी विपरीत स्वभाववाली स्त्रियाँ अपने योग्य पतियोंको भी धोखा देकर बुरे शील-स्वभावकी हो जायँगी और सेवकों तथा पशुओंके साथ भी व्यभिचार करेंगी

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນເວລານັ້ນ ຍິງທີ່ມີນິໄສຜິດປົກກະຕິ ຈະຫລອກລວງແມ່ນແຕ່ຜົວທີ່ຄວນຄູ່ຂອງຕົນ ແລະຈະກາຍເປັນຜູ້ມີສີນທຳຊົ່ວ; ພວກນາງຈະປະພຶດຜິດແມ່ນແຕ່ກັບຄົນຮັບໃຊ້ ແລະກັບສັດເດຍວກັນ»។

Verse 64

वीरपत्न्यस्तथा नार्य: संश्रयन्ति नरान्‌ नृप । भर्तारमपि जीवन्तमन्यान्‌ व्यभिचरन्त्युत,राजन! वीर पुरुषोंकी पत्नियाँ भी परपुरुषोंका आश्रय लेंगी और पतिके जीते हुए भी दूसरोंसे व्यभिचार करेंगी

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ! ແມ່ນແຕ່ເມຍຂອງວີຣະຊົນກໍຈະໄປພຶ່ງພາຊາຍອື່ນ; ແລະແມ່ນແຕ່ໃນຂະນະທີ່ຜົວຍັງມີຊີວິດ ພວກນາງກໍຈະປະພຶດຜິດກັບຄົນອື່ນ»។

Verse 65

तस्मिन्‌ युगसहस्रान्ते सम्प्राप्ते चायुष: क्षये । अनावृष्टिर्महाराज जायते बहुवार्षिकी,महाराज! इस प्रकार आयुको क्षीण करनेवाले सहस्र युगोंके अन्तिम भागकी समाप्ति होनेपर बहुत वर्षोतक वृष्टि बंद हो जाती है

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ມະຫາລາຊາ, ເມື່ອການສິ້ນສຸດແຫ່ງພັນຍຸກມາຮອດ ແລະອາຍຸຂອງສັດໂລກຫຼຸດລົງໄປສູ່ທ້າຍສຸດ, ຄວາມແຫ້ງແລ້ງອັນຍາວນານກໍເກີດຂຶ້ນ—ຝົນຢຸດຕົກຫຼາຍປີ»។

Verse 66

ततस्तान्यल्पसाराणि सत्त्वानि क्षुधितानि वै । प्रलयं यान्ति भूयिष्ठं पृथिव्यां पृथिवीपते,पृथ्वीपते! इससे भूतलके थोड़ी शक्तिवाले अधिकांश प्राणी भूखसे व्याकुल होकर मर जाते हैं

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ແລ້ວຕໍ່ມາ ໂອ ຈອມແຜ່ນດິນ, ສັດທັງຫຼາຍທີ່ມີກຳລັງນ້ອຍ—ຖືກຄວາມຫິວໂຫຍບີບຄັ້ນ—ສ່ວນໃຫຍ່ກໍພາກັນພິນາດລົງໃນແຜ່ນດິນນີ້»។

Verse 67

ततो दिनकरेदीप्तै: सप्तभिर्मनुजाधिप । पीयते सलिल ॑ सर्व समुद्रेषु सरित्सु च,नरेश्वर! तदनन्तर प्रचण्ड तेजवाले सात सूर्य उदित होकर सरिताओं और समुद्रोंका सारा जल सोख लेते हैं

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຕໍ່ຈາກນັ້ນ ໂອ ຈອມມະນຸດ, ດ້ວຍລັງສີອັນແຜດເຜົາຂອງຕາເວັນເຈັດດວງ, ນ້ຳທັງໝົດຖືກດື່ມກິນໝົດ—ທັງໃນມະຫາສະໝຸດ ແລະໃນແມ່ນ້ຳ»។

Verse 68

यच्च काष्ठ॑ तृणं चापि शुष्कं चार्द्र च भारत । सर्व तद्‌ भस्मसाद्‌ भूत॑ दृश्यते भरतर्षभ,भरतकुलभूषण! उस समय जो भी तृण-काष्ठ अथवा सूखे-गीले पदार्थ होते हैं, वे सभी भस्मीभूत दिखायी देने लगते हैं

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພາຣະຕະ, ບໍ່ວ່າໄມ້ ຫຼືຫຍ້າ, ຈະແຫ້ງຫຼືຊຸ່ມກໍຕາມ, ທັງໝົດຖືກເຫັນວ່າກາຍເປັນຂີ້ເທົ່າ, ໂອ ຜູ້ກ້າແຫ່ງວົງພາຣະຕະ»។

Verse 69

तत: संवर्तको वह्निवायुना सह भारत | लोकमाविशते पूर्वमादित्यैरुपशोषितम्‌,भारत! इसके बाद '“संवर्तक” नामकी प्रलयकालीन अग्नि वायुके साथ उन सम्पूर्ण लोकोंमें फैल जाती है, जहाँका जल पहले सात सूर्योंद्वारा सोख लिया गया है

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ແລ້ວຕໍ່ມາ ໂອ ພາຣະຕະ, ໄຟ ‘ສຳວັດຕະກະ’ ແຫ່ງການພິນາດ—ພ້ອມກັບລົມ—ແຜ່ຂະຫຍາຍເຂົ້າໄປໃນທຸກໂລກ, ຫຼັງຈາກນ້ຳທັງຫຼາຍຖືກຕາເວັນດູດໃຫ້ແຫ້ງໄປກ່ອນແລ້ວ»។

Verse 70

ततः स पृथिवीं भिनत्त्वा प्रविश्य च रसातलम्‌ । देवदानवयक्षाणां भयं जनयते महत्‌,तत्पश्चात्‌ पृथ्वीका भेदन कर वह अग्नि रसातलतक पहुँच जाती है तथा देवता, दानव और यक्षोंके लिये महान्‌ भय उपस्थित कर देती है

ຈາກນັ້ນ ມັນຜ່າແຜ່ນດິນ ແລ້ວເຂົ້າໄປສູ່ ຣະສາຕະລະ (Rasātala) ກໍ່ໃຫ້ເກີດຄວາມຢ້ານກົວຢ່າງໃຫຍ່ໃນຫມູ່ເທວະ, ດານະວະ ແລະ ຢັກສະ.

Verse 71

निर्दहन्‌ नागलोकं च यच्च किज्चित्‌ क्षिताविह । अधस्तात्‌ पृथिवीपाल सर्व नाशयते क्षणात्‌,राजन्‌! वह नागलोकको जलाती हुई इस पृथ्वीके नीचे जो कुछ भी है, उस सबको क्षणभरमें नष्ट कर देती है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະຣາຊາ! ມັນເຜົາໄໝ້ນາຄະໂລກ (Nāgaloka) ແລະທໍາລາຍໃນພິບຕາດຽວ ທຸກສິ່ງທີ່ມີຢູ່ເທິງແຜ່ນດິນນີ້ ແລະທຸກສິ່ງທີ່ຢູ່ໃຕ້ມັນ».

Verse 72

ततो योजनविंशानां सहस्राणि शतानि च । निर्दहत्यशिवो वायु: स च संवर्तकोडनल:,इसके बाद वह अमंगलकारी प्रचण्ड वायु और वह संवर्तक अग्नि बाईस हजार योजन तकके लोगोंको भस्म कर डालती है

ຈາກນັ້ນ ລົມຮຸນແຮງອັນເປັນອັປະມົງຄົນໄດ້ເກີດຂຶ້ນ ແລະພ້ອມກັນນັ້ນກໍມີໄຟສັມວັດຕະກະ (Saṁvartaka) ເກີດຂຶ້ນ; ມັນທັງສອງເຜົາໄໝ້ຈົນເຫຼືອແຕ່ຂີ້ເຖົ່າ ບັນດາສັດທັງຫຼາຍໃນອານາເຂດກວ້າງໃຫຍ່ຮອດ ຊາວສອງພັນ ໂຢຊະນະ.

Verse 73

सदेवासुरगन्धर्व सयक्षोरगराक्षसम्‌ । ततो दहति दीप्त: स सर्वमेव जगद्‌ विभु:,इस प्रकार सर्वत्र फैली हुई वह प्रज्वलित अग्नि देवता, असुर, गन्धर्व, यक्ष, नाग तथा राक्षसोंसहित सम्पूर्ण विश्वको भस्म कर डालती है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຈາກນັ້ນ ໄຟອັນສະຫວ່າງໄສ ແຜ່ກວ້າງໄປທົ່ວທິດ ໄດ້ເຜົາໄໝ້ໂລກທັງປວງ ພ້ອມທັງເທວະ, ອະສຸຣະ, ຄັນທະວະ, ຢັກສະ, ນາຄະ ແລະ ຣາກສະສະ.

Verse 74

ततो गजकुलप्रख्यास्तडिन्मालाविभूषिता: । उत्तिष्ठन्ति महामेघा नभस्यद्भुतदर्शना:,इसके बाद आकाशमें महान्‌ मेघोंकी घोर घटा घिर आती है, जो अद्भुत दिखायी देता है। उनमेंसे प्रत्येक मेघ-समूह हाथियोंके झुंडकी भाँति विशालकाय और श्यामवर्ण तथा बिजलीकी मालाओंसे विभूषित होता है

ຈາກນັ້ນ ໃນຟ້າ ມີເມກໃຫຍ່ມະຫາສານ ນ່າພິສູດນ່າອັດສະຈັນ ລຸກຂຶ້ນ; ແຕ່ລະກຸ່ມເມກໃຫຍ່ດຸດດັ່ງຝູງຊ້າງ ດໍາຄືຄືນ ແລະປະດັບດ້ວຍສາຍຟ້າຜ່າດຸດດັ່ງພວງມາລາ.

Verse 75

केचिन्नीलोत्पलश्यामा: केचित्‌ कुमुदसंनि भा: । केचित्‌ किज्जल्कसंकाशा: केचित्‌ पीता: पयोधरा:,कुछ बादल नील कमलक समान श्याम और कुछ कुमुद-कुसुमके समान सफेद होते हैं। कुछ जलधरोंकी कान्ति केसरोंके समान दिखायी देती है। कुछ मेघ हल्दीके सदृश पीले और कुछ कारण्डव पक्षीके समान दृष्टिगोचर होते हैं। कोई-कोई कमलदलके समान और कुछ हिंगुल-जैसे जान पड़ते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ເມກບາງກ້ອນມືດດັ່ງດອກບົວສີຟ້າ; ບາງກ້ອນຂາວດັ່ງດອກກຸມຸດ. ບາງກ້ອນຄ້າຍສີລະອອງເກສອນ, ແລະບາງກ້ອນ—ຜູ້ຫາບນ້ຳ—ປາກົດເປັນສີເຫຼືອງ».

Verse 76

केचिद्धारिद्रसंकाशा: कारण्डवनिभास्तथा । केचित्‌ कमलपत्राभा: केचिद्धिड्डुलसप्रभा:,कुछ बादल नील कमलक समान श्याम और कुछ कुमुद-कुसुमके समान सफेद होते हैं। कुछ जलधरोंकी कान्ति केसरोंके समान दिखायी देती है। कुछ मेघ हल्दीके सदृश पीले और कुछ कारण्डव पक्षीके समान दृष्टिगोचर होते हैं। कोई-कोई कमलदलके समान और कुछ हिंगुल-जैसे जान पड़ते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ບາງກ້ອນຄ້າຍສີຂີ້ໝິ້ນ; ບາງກ້ອນຄ້າຍນົກກາຣັນດະວະ. ບາງກ້ອນສ່ອງສະຫວ່າງດັ່ງໃບບົວ, ແລະບາງກ້ອນມີປະກາຍແດງດັ່ງຫິງກຸລາ (ສີຊາດ/ວີມິລຽນ)».

Verse 77

केचित्‌ पुरवराकारा: केचिद्‌ गजकुलोपमा: । केचिदञ्जनसंकाशा: केचिन्मकरसंनिभा:,कुछ श्रेष्ठ नगरोंके समान, कुछ हाथियोंके झुंड-जैसे, कुछ काजलके रंगवाले और कुछ मगरोंकी-सी आकृतिवाले होते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ບາງກ້ອນມີຮູບຮ່າງດັ່ງນະຄອນອັນວິເສດ; ບາງກ້ອນຄ້າຍຝູງຊ້າງ. ບາງກ້ອນດຳດັ່ງອັນຈະນະ (ຂີ້ຕາ), ແລະບາງກ້ອນຄ້າຍມະກະຣະ (ຈະເຂ້)».

Verse 78

विद्युन्मालापिनद्धाड: समुत्तिष्ठन्ति वै घना: । घोररूपा महाराज घोरस्वननिनादिता: । ततो जलधरा: सर्वे व्याप्रुवन्ति नभस्तलम्‌,वे सभी बादल विद्युन्मालाओंसे अलंकृत होकर घिर आते हैं। महाराज! भयंकर गर्जना करनेके कारण उनका स्वरूप बड़ा भयानक जान पढ़ता है। धीरे-धीरे वे सभी जलधर समूचे आकाशमण्डलको ढक लेते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ມະຫາຣາຊາ, ເມກທັງຫຼາຍລຸກຂຶ້ນ ພ້ອມມາລາແຫ່ງຟ້າຜ່າພັນຮອບ. ຮູບຮ່າງຂອງມັນນ່າສະພຶງກົວ ແລະຍິ່ງນ່າຢ້ານເພາະສຽງຄຳຮ້ອງຄືຟ້າຮ້ອງ. ແລ້ວເມກຜູ້ຫາບນ້ຳທັງປວງກໍແຜ່ອອກ ປົກຄຸມຟ້າທັງສິ້ນ».

Verse 79

तैरियं पृथिवी सर्वा सपर्वतवनाकरा । आपूर्यते महाराज सलिलौघपरिप्लुता,महाराज! उनके वर्षा करनेपर पर्वत, वन और खानोंसहित यह सारी पृथ्वी अगाध जलराशिमें ड्ूबकर सब ओरसे भर जाती है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ມະຫາຣາຊາ, ເມື່ອພວກມັນຫຼັ່ງຝົນລົງ, ແຜ່ນດິນທັງປວງນີ້—ພ້ອມພູເຂົາ ປ່າໄມ້ ແລະແຫຼ່ງແຮ່—ຖືກນ້ຳຖ້ວມດ້ວຍກະແສນ້ຳອັນເຊົາບໍ່ຢຸດ ແລະເຕັມລົ້ນທຸກທິດ.»

Verse 80

ततस्ते जलदा घोरा राविण: पुरुषर्षभ । सर्वतः प्लावयन्त्याशु चोदिता: परमेछ्िना,पुरुषरत्न! तदनन्तर विधातासे प्रेरित हो गर्जन-तर्जन करनेवाले वे भयंकर मेघ शीघ्र सब ओर वर्षा करके सबको जलसे आप्लावित कर देते हैं

ຕໍ່ມາ ໂອ ຜູ້ປະເສີດໃນບັນດາມະນຸດ ເມກຝົນອັນນ່າຢ້ານກົວ ທີ່ຄຳຮ້ອງຟ້າຮ້ອງກຶກກ້ອງ—ຖືກຜູ້ສ້າງ (ວິທາຕາ) ຜັກດັນ—ໄດ້ເທຝົນລົງຢ່າງວ່ອງໄວຈາກທຸກທິດ ແລະທຳໃຫ້ທຸກສິ່ງຖືກນ້ຳຖ້ວມ.

Verse 81

वर्षमाणा महत्‌ तोयं पूरयन्तो वसुंधराम्‌ । सुघोरमशिवं रौद्रं नाशयन्ति च पावकम्‌,महान्‌ जल-समूहकी वर्षा करके वसुन्धराको जलमें डुबोनेवाले वे समस्त मेघ उस अत्यन्त घोर, अमंगलकारी और भयानक अग्निको बुझा देते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ເມກເຫຼົ່ານັ້ນເທນ້ຳຈຳນວນມະຫາສານ ຈົນທ່ວມແຜ່ນດິນ ແລະດັບໄຟອັນນ່າຢ້ານຢ່າງຍິ່ງ—ອັບມົງຄົນ ແລະດຸຮ້າຍ—ໃຫ້ສິ້ນລົງ.”

Verse 82

ततो द्वादशवर्षाणि पयोदास्त उपप्लवे । धाराभि: पूरयन्तो वै चोद्यमाना महात्मना,तदनन्तर प्रलयकालके वे पयोधर महात्मा ब्रह्माजीकी प्रेरणा पाकर पृथ्वीको परिपूर्ण करनेके लिये बारह वर्षोतक धारावाहिक वृष्टि करते हैं

ຕໍ່ມາ ໃນການທ່ວມທົ່ວອັນໃຫຍ່ ເມກທີ່ອຸ້ມນ້ຳຝົນ—ຖືກຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ຜັກດັນ—ໄດ້ເທສາຍນ້ຳຢ່າງຕໍ່ເນື່ອງຕະຫຼອດສິບສອງປີ ຈົນເຕັມແຜ່ນດິນທຸກທິດ.

Verse 83

ततः समुद्र: स्वां वेलामतिक्रामति भारत । पर्वताश्च विदीर्यन्ते मही चाप्सु निमज्जति,भारत! तदनन्तर समुद्र अपनी सीमाको लाँघ जाता है, पर्वत फट जाते और पृथ्वी पानीमें डूब जाती है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ແລ້ວແຕ່ນັ້ນ ໂອ ພາຣະຕະ ມະຫາສະໝຸດກ້າວຂ້າມຂອບເຂດຝັ່ງຂອງຕົນ; ພູເຂົາທັງຫຼາຍແຕກອອກ ແລະແຜ່ນດິນເອງກໍຈົມລົງໃນນ້ຳ.”

Verse 84

सर्वतः सहसा भ्रान्तास्ते पयोदा नभस्तलम्‌ । संवेष्टयित्वा नश्यन्ति वायुवेगपराहता:,तत्पश्चात्‌ समस्त आकाशको घेरकर सब ओर फैले हुए वे मेघ वायुके प्रचण्ड वेगसे छिन्न-भिन्न होकर सहसा अदृश्य हो जाते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ເມກເຫຼົ່ານັ້ນສັບສົນຂຶ້ນທັນໃດທັນໜຶ່ງຈາກທຸກທິດ ແລະຫໍ້ຫຸ້ມທ້ອງຟ້າທັງປວງ; ແລ້ວຖືກລົມອັນແຮງກະແທກຈົນແຕກກະຈາຍ ແລະຫາຍໄປຈາກສາຍຕາຢ່າງວ່ອງໄວ.”

Verse 85

ततस्तं मारुतं घोरं स्वयम्भूमनुजाधिप । आदि: पद्मालयो देव: पीत्वा स्वपिति भारत,नरेश्वरर इसके बाद कमलमें निवास करनेवाले आदिदेव स्वयं ब्रह्माजी उस भयंकर वायुको पीकर सो जाते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຕໍ່ມາ ໂອ ຈອມເຈົ້າແຫ່ງມະນຸດ, ລົມອັນນ່າຢ້ານນັ້ນ ຖືກຜູ້ເກີດຂຶ້ນເອງ—ອາທິເທວະຜູ້ສະຖິດໃນດອກບົວ—ກືນເຂົ້າໄປ. ເມື່ອດື່ມມັນເຂົ້າໄປແລ້ວ ພຣະພຣະຫມາ ກໍຫຼັບໄປ, ໂອ ພາຣະຕະ»។

Verse 86

तस्मिन्नेकार्णवे घोरे नष्टे स्थावरजड्रमे । नष्टे देवासुरगणे यक्षराक्षसवर्जिते,इस प्रकार चराचर प्राणियों, देवताओं तथा असुर आदिके नष्ट हो जानेपर यक्ष, राक्षस, मनुष्य, हिंसक जीव, वृक्ष तथा अन्तरिक्षसे शून्य उस घोर एकार्णवमय जगतमें मैं अकेला ही इधर-उधर मारा-मारा फिरता हूँ

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນມະຫາສະໝຸດອັນນ່າຢ້ານແຫ່ງການລະລາຍທີ່ເປັນພຽງຫນຶ່ງນັ້ນ—ເມື່ອສິ່ງທີ່ຢືນຢູ່ແລະສິ່ງທີ່ເຄື່ອນໄຫວພິນາດ, ເມື່ອຝູງເທວະແລະອະສຸຣະຫາຍໄປ, ແມ່ນກະທັ້ງຍັກສະແລະຣາກສະກໍບໍ່ຫຼືອ—ມີແຕ່ຄວາມວ່າງເປົ່າອັນນ່າສະພຶງກົວນັ້ນເທົ່ານັ້ນ»។

Verse 87

निर्मनुष्ये महीपाल निःश्वापदमहीरुहे । अनन्तरिक्षे लोके5स्मिन्‌ भ्रमाम्पेकोडहमाहत:,इस प्रकार चराचर प्राणियों, देवताओं तथा असुर आदिके नष्ट हो जानेपर यक्ष, राक्षस, मनुष्य, हिंसक जीव, वृक्ष तथा अन्तरिक्षसे शून्य उस घोर एकार्णवमय जगतमें मैं अकेला ही इधर-उधर मारा-मारा फिरता हूँ

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະຣາຊາ, ໃນໂລກນີ້ທີ່ບໍ່ມີມະນຸດ, ຂາດສັດແລະຕົ້ນໄມ້, ແລະວ່າງເປົ່າແມ່ນກະທັ້ງສັດໃນພາກກາງ, ຂ້ອຍຜູ້ຖືກກະທົບແລະຢູ່ຜູ້ດຽວ ພາກັນພະເລີນໄປມາໂດຍບໍ່ມີທິດທາງ»។

Verse 88

एकार्णवे जले घोरे विचरन्‌ पार्थिवोत्तम | अपश्यन्‌ सर्वभूतानि वैक्लव्यमगमं तत:,नृपश्रेष्ठी एकार्णवके उस भयंकर जलमें विचरते हुए जब मैंने किसी भी प्राणीको नहीं देखा, तब मुझे बड़ी व्याकुलता हुई

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະຣາຊາຜູ້ປະເສີດ, ເມື່ອຂ້ອຍເດີນທາງໄປມາໃນນ້ຳອັນນ່າຢ້ານຂອງມະຫາສະໝຸດອັນດຽວທີ່ກືນກິນທຸກສິ່ງ, ແລະບໍ່ເຫັນສັດມີຊີວິດໃດໆເລີຍ, ຂ້ອຍກໍຖືກຄວາມທຸກໃຈລຶກໆ ແລະຄວາມອ່ອນແອຫວາດຫວັນຄອບງຳ»។

Verse 89

ततः सुदीर्घ गत्वाहं प्लवमानो नराधिप । श्रान्त: क्वचिन्न शरणं लभाम्यहमतन्द्रित:,नरेश्वरर उस समय आलस्यशून्य होकर सुदीर्घकाल-तक तैरता हुआ मैं दूर जाकर बहुत थक गया। परंतु कहीं भी मुझे कोई आश्रय नहीं मिला

ຕໍ່ມາ ໂອ ພຣະຣາຊາ, ຂ້ອຍລອຍນ້ຳໄປໄກດົນນານ ໂດຍບໍ່ຍອມຜ່ອນ; ຈົນເມື່ອຍລ້າຢ່າງຫນັກ. ແຕ່ກໍບໍ່ພົບທີ່ພຶ່ງ ຫຼືທີ່ຫຼົບໄພໃດໆເລີຍ.

Verse 90

ततः कदाचित्‌ पश्यामि तस्मिन्‌ सलिलसंचये । न्यग्रोधं सुमहान्तं वै विशालं पृथिवीपते,राजन्‌! तदनन्तर एक दिन एकार्णवकी उस अगाध जलराशिमें मैंने एक बहुत विशाल बरगदका वृक्ष देखा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຕໍ່ມາ ໃນຄັ້ງໜຶ່ງ ເມື່ອຂ້າພະເຈົ້າເບິ່ງໄປຍັງກອງນ້ຳອັນກວ້າງໃຫຍ່ນັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນຢູ່ທີ່ນັ້ນ ຕົ້ນນະຍະໂກຣດ (ຕົ້ນບານຽນ) ອັນໃຫຍ່ຫຼວງ ແຜ່ກວ້າງ—ໂອ ພຣະເຈົ້າແຫ່ງແຜ່ນດິນ, ໂອ ພຣະຣາຊາ!»

Verse 91

शाखायां तस्य वृक्षस्य विस्तीर्णायां नराधिप । पर्यड्के पृथिवीपाल दिव्यास्तरणसंस्तृते,नराधिप! उस वृक्षकी चौड़ी शाखापर एक पलंग था, जिसके ऊपर दिव्य बिछौने बिछे हुए थे। महाराज! उस पलंगपर एक सुन्दर बालक बैठा दिखायी दिया, जिसका मुख कमलके समान कमनीय शोभा धारण करनेवाला तथा चन्द्रमाके समान नेत्रोंको आनन्द देनेवाला था। उसके नेत्र प्रफुल्ल पद्मदलके समान विशाल थे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະຣາຊາ, ຢູ່ເທິງກິ່ງອັນກວ້າງແຜ່ຂອງຕົ້ນໄມ້ນັ້ນ ມີຕຽງພັກຜ່ອນໜຶ່ງ—ໂອ ຜູ້ພິທັກແຜ່ນດິນ—ປູດ້ວຍເຄື່ອງປູອັນເທວະດາ.»

Verse 92

उपविष्टं महाराज पद्मेन्दुसद्शाननम्‌ | फुल्लपद्मविशालाक्षं बालं पश्यामि भारत,नराधिप! उस वृक्षकी चौड़ी शाखापर एक पलंग था, जिसके ऊपर दिव्य बिछौने बिछे हुए थे। महाराज! उस पलंगपर एक सुन्दर बालक बैठा दिखायी दिया, जिसका मुख कमलके समान कमनीय शोभा धारण करनेवाला तथा चन्द्रमाके समान नेत्रोंको आनन्द देनेवाला था। उसके नेत्र प्रफुल्ल पद्मदलके समान विशाल थे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະມະຫາຣາຊາ, ໂອ ພາຣະຕະ, ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນເດັກນ້ອຍຄົນໜຶ່ງນັ່ງຢູ່ທີ່ນັ້ນ; ໃບໜ້າງາມດັ່ງດອກບົວ ແລະ ດວງຈັນ; ດວງຕາກວ້າງດັ່ງກີບດອກບົວທີ່ບານເຕັມ.»

Verse 93

ततो मे पृथिवीपाल विस्मय: सुमहानभूत्‌ | कथं त्वयं शिशु: शेते लोके नाशमुपागते,पृथ्वीनाथ! उसे देखकर मुझे बड़ा विस्मय हुआ। मैं सोचने लगा--'सारे संसारके नष्ट हो जानेपर भी यह बालक यहाँ कैसे सो रहा है?”

ຕໍ່ມາ ໂອ ພຣະເຈົ້າແຫ່ງແຜ່ນດິນ, ຄວາມພິສົດອັນໃຫຍ່ຫຼວງເກີດຂຶ້ນໃນໃຈຂ້າພະເຈົ້າ. ຂ້າພະເຈົ້າຄິດວ່າ: «ເປັນໄປໄດ້ແນວໃດທີ່ເດັກນ້ອຍນີ້ນອນຫຼັບຢູ່ທີ່ນີ້—ໂອ ພຣະນາຍົກແຜ່ນດິນ—ໃນເວລາທີ່ໂລກໄດ້ຖືກທຳລາຍ?»

Verse 94

तपसा चिन्तयंश्वापि तं शिशुं नोपलक्षये । भूतं भव्यं भविष्यं च जानन्नपि नराधिप,नरेश्वर! मैं भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालोंका ज्ञाता होनेपर भी तपस्यासे भलीभाँति चिन्तन करता (ध्यान लगाता) रहा, तो भी उस शिशुके विषयमें कुछ न जान सका

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ແມ່ນແຕ່ຂ້າພະເຈົ້າປະພຶດຕະປະ (ຕະປັດ) ແລະ ຈົ່ງໃຈພິຈາລະນາຢ່າງເຂັ້ມຂັ້ນ ກໍຍັງບໍ່ອາດຮູ້ເລື່ອງໃດໆກ່ຽວກັບເດັກນ້ອຍນັ້ນ. ໂອ ພຣະຣາຊາ, ໂອ ພຣະເຈົ້າແຫ່ງມະນຸດ—ແມ່ນແຕ່ຂ້າພະເຈົ້າຮູ້ອະດີດ ປັດຈຸບັນ ແລະ ອະນາຄົດ ກໍຍັງບໍ່ອາດເຂົ້າເຖິງຄວາມຮູ້ກ່ຽວກັບລາວໄດ້.»

Verse 95

अतसीपुष्पवर्णा भ: श्रीवत्सकृतभूषण: । साक्षाल्लक्ष्म्या इवावास: स तदा प्रतिभाति मे,उसकी अंगकान्ति अलसीके फूलकी भाँति श्याम थी। उसका वक्ष:स्थल श्रीवत्सचिह्नसे विभूषित था। वह उस समय मुझे साक्षात्‌ लक्ष्मीका निवासस्थान-सा प्रतीत होता था

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ປະກາຍກາຍຂອງພຣະອົງປາກົດເປັນສີຟ້າເຂັ້ມ ດັ່ງສີດອກອະຕະສີ (flax). ອົງອົກຖືກປະດັບດ້ວຍເຄື່ອງໝາຍ “ສຣີວັດສະ”. ໃນຂະນະນັ້ນ ພຣະອົງດູເຫມືອນເປັນທີ່ພັກອາໄສຂອງນາງລັກສະມີໂດຍແທ້».

Verse 96

ततो मामब्रवीद्‌ बाल: स पद्मनिभलोचन: । श्रीवत्सधारी द्युतिमान्‌ वाक्‍्यं श्रुतिसुखावहम्‌

ແລ້ວເດັກນ້ອຍຜູ້ມີປະກາຍຮຸ່ງເຮືອງ ມີດວງຕາດັ່ງດອກບົວ ແລະຖືເຄື່ອງໝາຍ “ສຣີວັດສະ” ກໍໄດ້ເວົ້າກັບຂ້ອຍ ດ້ວຍຖ້ອຍຄໍາທີ່ຟັງແລ້ວຊື່ນໃຈ ອ່ອນໂຍນແລະປະເສີດ.

Verse 97

जानामि त्वां परिश्रान्तं ततो विश्रामकाड्क्षिणम्‌ । मार्कण्डेय इहास्स्व त्वं यावदिच्छसि भार्गव

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຂ້ອຍຮູ້ວ່າເຈົ້າເມື່ອຍລ້າ ແລະປາຖະໜາຈະພັກ. ໂອ ມາຣະກັນເດຍ, ຈົ່ງຢູ່ນີ້ຕາມທີ່ເຈົ້າປາຖະໜາ, ໂອ ພາຣກະວະ.»

Verse 98

मुझे विस्मयमें पड़ा देख कमलके समान नेत्रवाले उस श्रीवत्सधारी कान्तिमान्‌ बालकने मुझसे इस प्रकार श्रवणसुखद वचन कहा--'भृगुवंशी मार्कण्डेय! मैं तुम्हें जानता हूँ। तुम बहुत थक गये हो और विश्राम चाहते हो। तुम्हारी जबतक इच्छा हो यहाँ बैठो ।। अभ्यन्तरं शरीरे मे प्रविश्य मुनिसत्तम । आस्स्व भो विहितो वास: प्रसादस्ते कृतो मया,“'मुनिश्रेष्ठ! मैंने तुमपर कृपा की है। तुम मेरे शरीरके भीतर प्रवेश करके विश्राम करो। वहाँ तुम्हारे रहनेके लिये व्यवस्था की गयी है”

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອເຂົາເຫັນຂ້ອຍຕົກຢູ່ໃນຄວາມພິສົດ, ເດັກນ້ອຍຜູ້ມີປະກາຍຮຸ່ງເຮືອງ—ມີດວງຕາດັ່ງດອກບົວ ແລະຖືເຄື່ອງໝາຍ “ສຣີວັດສະ”—ໄດ້ເວົ້າກັບຂ້ອຍດ້ວຍຖ້ອຍຄໍາທີ່ຟັງແລ້ວຊື່ນໃຈວ່າ: «ໂອ ມາຣະກັນເດຍ ແຫ່ງວົງສາພຣຶກຸ, ຂ້ອຍຮູ້ຈັກເຈົ້າ. ເຈົ້າເມື່ອຍລ້າຫນັກ ແລະປາຖະໜາຈະພັກ. ນັ່ງຢູ່ນີ້ຕາມທີ່ເຈົ້າປາຖະໜາ. ເຂົ້າໄປພາຍໃນກາຍຂອງຂ້ອຍ, ໂອ ມຸນີຜູ້ປະເສີດ, ແລະພັກຢູ່ທີ່ນັ້ນ. ທີ່ພັກຖືກຈັດໄວ້ແລ້ວ; ຂ້ອຍໄດ້ປະທານພຣະກະລຸນາແກ່ເຈົ້າ».

Verse 99

ततो बालेन तेनैवमुक्तस्थासीत्‌ तदा मम । निर्वेदो जीविते दीर्घे मनुष्यत्वे च भारत,उस बालकके ऐसा कहनेपर उस समय मुझे अपने दीर्घ-जीवन और मानव-शरीरपर बड़ा खेद और वैराग्य हुआ

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ເມື່ອເດັກນ້ອຍນັ້ນເວົ້າກັບຂ້ອຍແບບນີ້, ໃນຂະນະນັ້ນເອງ ຄວາມເບື່ອໜ່າຍແລະຄວາມຫຼຸດພົ້ນຈາກຄວາມຍຶດຕິດໄດ້ເກີດຂຶ້ນໃນໃຈຂ້ອຍ—ເບື່ອໜ່າຍຕໍ່ຊີວິດອັນຍາວນານ ແລະກະທັ້ງຕໍ່ສະພາບການເປັນມະນຸດ, ໂອ ພາຣະຕະ.»

Verse 100

ततो बालेन तेनास्यं सहसा विवृतं कृतम्‌ । तस्याहमवशो वकत्रे दैवयोगात्‌ प्रवेशित:,तदनन्तर उस बालकने सहसा अपना मुख खोला और मैं दैवयोगसे परवशकी भाँति उसमें प्रवेश कर गया

ແລ້ວເດັກນ້ອຍນັ້ນກໍເປີດປາກກວ້າງຢ່າງກະທັນຫັນ. ໂດຍອຳນາດແຫ່ງຊະຕາກຳ ຂ້ອຍ—ບໍ່ອາດຕ້ານທານ ດັ່ງຖືກບັງຄັບ—ຖືກດຶງໃຫ້ເຂົ້າໄປໃນປາກຂອງເຂົາ.

Verse 101

ततः प्रविष्टस्तत्कुक्षिं सहसा मनुजाधिप । सराष्ट्रनगराकीर्णा कृत्स्नां पश्यामि मेदिनीम्‌,राजन! उसमें प्रवेश करते ही मैं सहसा उस बालकके उदरमें जा पहुँचा। वहाँ मुझे समस्त राष्ट्रों और नगरोंसे भरी हुई यह सारी पृथ्वी दिखायी दी

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ໂອ ຈອມເຈົ້າແຫ່ງມະນຸດ, ທັນທີທີ່ຂ້ອຍເຂົ້າໄປ ຂ້ອຍກໍຢູ່ໃນທ້ອງຂອງເດັກນ້ອຍນັ້ນຢ່າງກະທັນຫັນ. ຢູ່ທີ່ນັ້ນ ຂ້ອຍເຫັນແຜ່ນດິນທັງປວງ—ຄົບຖ້ວນທຸກສ່ວນ—ແອດແນ່ນໄປດ້ວຍອານາຈັກແລະນະຄອນ.”

Verse 102

गड्डां शतद्रं सीतां च यमुनामथ कौशिकीम्‌ । चर्मण्वतीं वेत्रवर्ती चन्द्रभागां सरस्वतीम्‌,नरश्रेष्ठ फिर तो मैं उस महात्मा बालकके उदरमें घूमने लगा। घूमते हुए मैंने वहाँ गंगा, सतलज, सीता, यमुना, कोसी, चम्बल, वेत्रवती, चिनाव, सरस्वती, सिन्धु, व्यास, गोदावरी, वस्वोकसारा, नलिनी, नर्मदा, ताम्रपर्णी, वेणा, शुभदायिनी पुण्यतोया, सुवेणा, कृष्णवेणा, महानदी इरामा, वितस्ता (झेलम), महानदी कावेरी, शोणभद्र, विशल्या तथा किम्पुना--इन सबको तथा इस पृथ्वीपर जो अन्य नदियाँ हैं, उनको भी देखा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອຂ້ອຍເດີນທ່ອງຢູ່ໃນທ້ອງຂອງເດັກນ້ອຍຜູ້ມີຈິດໃຫຍ່ນັ້ນ ຂ້ອຍໄດ້ເຫັນແມ່ນ້ຳອັນສັກສິດຫຼາຍສາຍ—ຄື ຄັງຄາ, ສະຕະດຣູ, ສີຕາ, ຢະມຸນາ, ກໍຊິກີ, ຈະຣະມະນວະຕີ, ເວຕຣະວະຕີ, ຈັນທຣະພາກາ, ແລະ ສະຣັສວະຕີ.

Verse 103

सिन्धुं चैव विपाशां च नदीं गोदावरीमपि । वस्वोकसारां नलिनीं नर्मदां चैव भारत,नरश्रेष्ठ फिर तो मैं उस महात्मा बालकके उदरमें घूमने लगा। घूमते हुए मैंने वहाँ गंगा, सतलज, सीता, यमुना, कोसी, चम्बल, वेत्रवती, चिनाव, सरस्वती, सिन्धु, व्यास, गोदावरी, वस्वोकसारा, नलिनी, नर्मदा, ताम्रपर्णी, वेणा, शुभदायिनी पुण्यतोया, सुवेणा, कृष्णवेणा, महानदी इरामा, वितस्ता (झेलम), महानदी कावेरी, शोणभद्र, विशल्या तथा किम्पुना--इन सबको तथा इस पृथ्वीपर जो अन्य नदियाँ हैं, उनको भी देखा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ໂອ ພາຣະຕະ, ຂ້ອຍເຫັນແມ່ນ້ຳສິນທຸ ແລະ ວິປາຊາ, ພ້ອມທັງແມ່ນ້ຳໂກດາວະຣີ; ອີກທັງ ວັສໂວກະສາຣາ, ນະລິນີ, ແລະ ນະຣະມະດາ ດ້ວຍ.”

Verse 104

नदीं ताम्रां च वेणां च पुण्यतोयां शुभावहाम्‌ । सुवेणां कृष्णवेणां च इरामां च महानदीम्‌,नरश्रेष्ठ फिर तो मैं उस महात्मा बालकके उदरमें घूमने लगा। घूमते हुए मैंने वहाँ गंगा, सतलज, सीता, यमुना, कोसी, चम्बल, वेत्रवती, चिनाव, सरस्वती, सिन्धु, व्यास, गोदावरी, वस्वोकसारा, नलिनी, नर्मदा, ताम्रपर्णी, वेणा, शुभदायिनी पुण्यतोया, सुवेणा, कृष्णवेणा, महानदी इरामा, वितस्ता (झेलम), महानदी कावेरी, शोणभद्र, विशल्या तथा किम्पुना--इन सबको तथा इस पृथ्वीपर जो अन्य नदियाँ हैं, उनको भी देखा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ຢູ່ທີ່ນັ້ນ ຂ້ອຍເຫັນແມ່ນ້ຳຕາມຣາ ແລະ ເວນາ, ພ້ອມທັງແມ່ນ້ຳອັນສັກສິດ ປຸນຍະໂຕຍາ ຜູ້ນຳພາຄວາມສຸກສະຫວັດ; ອີກທັງ ສຸເວນາ ແລະ ກຣິສນະເວນາ, ແລະ ອິຣາມາ ແມ່ນ້ຳໃຫຍ່.”

Verse 105

वितस्तां च महाराज कावेरीं च महानदीम्‌ । शोणं च पुरुषव्याप्र विशल्यां किम्पुनामपि,नरश्रेष्ठ फिर तो मैं उस महात्मा बालकके उदरमें घूमने लगा। घूमते हुए मैंने वहाँ गंगा, सतलज, सीता, यमुना, कोसी, चम्बल, वेत्रवती, चिनाव, सरस्वती, सिन्धु, व्यास, गोदावरी, वस्वोकसारा, नलिनी, नर्मदा, ताम्रपर्णी, वेणा, शुभदायिनी पुण्यतोया, सुवेणा, कृष्णवेणा, महानदी इरामा, वितस्ता (झेलम), महानदी कावेरी, शोणभद्र, विशल्या तथा किम्पुना--इन सबको तथा इस पृथ्वीपर जो अन्य नदियाँ हैं, उनको भी देखा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ມະຫາກະສັດ, ໂອ ເສືອໃນຫມູ່ມະນຸດ, ຂ້າພະເຈົ້າຍັງໄດ້ເຫັນແມ່ນ້ຳ ວິຕັສຕາ ແລະ ກາເວຣີ—ຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ໃນຫມູ່ແມ່ນ້ຳ—ພ້ອມທັງ ໂຊນະ, ວິຊະລະຍາ, ແລະ ກິມປຸນາ ດ້ວຍ».

Verse 106

एताश्षान्याश्व नद्यो5हं पृथिव्यां या नरोत्तम । परिक्रामन्‌ प्रपश्यामि तस्य कुक्षौ महात्मन:,नरश्रेष्ठ फिर तो मैं उस महात्मा बालकके उदरमें घूमने लगा। घूमते हुए मैंने वहाँ गंगा, सतलज, सीता, यमुना, कोसी, चम्बल, वेत्रवती, चिनाव, सरस्वती, सिन्धु, व्यास, गोदावरी, वस्वोकसारा, नलिनी, नर्मदा, ताम्रपर्णी, वेणा, शुभदायिनी पुण्यतोया, सुवेणा, कृष्णवेणा, महानदी इरामा, वितस्ता (झेलम), महानदी कावेरी, शोणभद्र, विशल्या तथा किम्पुना--इन सबको तथा इस पृथ्वीपर जो अन्य नदियाँ हैं, उनको भी देखा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຜູ້ປະເສີດໃນຫມູ່ມະນຸດ, ເມື່ອຂ້າພະເຈົ້າເຄື່ອນໄຫວວຽນໄປ, ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ເຫັນໃນທ້ອງຂອງຜູ້ມີຈິດໃຈຍິ່ງໃຫຍ່ນັ້ນ ແມ່ນ້ຳເຫຼົ່ານີ້ທັງໝົດ—ແລະຍັງເຫັນແມ່ນ້ຳອື່ນໆທີ່ໄຫຼຢູ່ເທິງແຜ່ນດິນດ້ວຍ».

Verse 107

ततः समुद्र पश्यामि यादोगणनिषेवितम्‌ । रत्नाकरममित्रघ्न पयसो निधिमुत्तमम्‌,शत्रुसूदन! इसके बाद जलजन्तुओंसे भरे हुए अगाध जलके भण्डार परम उत्तम रत्नाकर समुद्रको भी देखा

ຕໍ່ມາ ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ເຫັນມະຫາສະໝຸດ—ທີ່ຝູງສັດນ້ຳຫຼາຍຫມູ່ເຂົ້າໄປອາໄສ—ເປັນຄັງນ້ຳອັນລຶກລັບຫາຂອບບໍ່ໄດ້ ແລະເປັນຄັງແກ້ວມະນີ. ໂອ ຜູ້ປະຫານສັດຕູ, ຜູ້ປະລາບປະລົງສັດຕູ, ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ເຫັນທະເລອັນສູງສຸດນັ້ນແລ້ວ.

Verse 108

तत्र पश्यामि गगन चन्द्रसूर्यविराजितम्‌ । जाज्वल्यमानं तेजोभि: पावकार्कसमप्रभम्‌,वहाँ मुझे चन्द्रमा और सूर्यसे सुशोभित आकाशमण्डल दिखायी दिया, जो अनन्त तेजसे प्रज्वलित तथा अग्नि एवं सूर्यके समान देदीप्यमान था

ທີ່ນັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ເຫັນພື້ນຟ້າ ທີ່ປະດັບດ້ວຍດວງຈັນ ແລະ ດວງອາທິດ—ລຸກໂຊດດ້ວຍລັດສະໝີອັນບໍ່ມີຂອບເຂດ ແລະສ່ອງສະຫວ່າງດັ່ງໄຟ ແລະ ດວງອາທິດ.

Verse 109

पश्यामि च महीं राजन्‌ काननैरुपशोभिताम्‌ । (सपर्वतवनद्वीपां निमग्नाशतसड्कुलाम्‌ ।) यजन्ते हि तदा राजन्‌ ब्राह्मणा बहुभिर्मखै:,राजन! वहाँकी भूमि विविध काननोंसे सुशोभित, पर्वत, वन और द्वीपोंसे उपलक्षित तथा सैकड़ों सरिताओंसे संयुक्त दिखायी देती थी। ब्राह्मणलोग नाना प्रकारके यज्ञोंद्वारा भगवान्‌ यज्ञपुरुषकी आराधना करते थे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ, ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນແຜ່ນດິນນັ້ນ ງາມດ້ວຍປ່າຫຼາຍຫມູ່—ມີພູເຂົາ, ປ່າໄມ້, ແລະ ເກາະເປັນເຄື່ອງໝາຍ, ແອອັດດ້ວຍແມ່ນ້ຳແລະລຳທານນັບຮ້ອຍ. ໃນການນັ້ນ ໂອ ພະຣາຊາ, ພວກພຣາຫມັນໄດ້ປະກອບພິທີຍັດຫຼາຍປະເພດ ເພື່ອນະມັດສະການພຣະອົງຜູ້ເປັນບຸກຄົນແຫ່ງຍັດ (ຍັດຍະປຸຣຸສ)».

Verse 110

क्षत्रियाश्ष प्रवर्तन्ते सर्ववर्णानुरंजनै: । वैश्या: कृषिं यथान्यायं कारयन्ति नराधिप,नरेश्वर! क्षत्रिय राजा सब वर्णोकी प्रजाका अनुरंजन करते--सबको सुखी और प्रसन्न रखते थे। वैश्य न्यायपूर्वक खेतीका काम और व्यापार करते थे

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ພວກກະສັດຕະຣິຍະ ປະຕິບັດໜ້າທີ່ຂອງຕົນ ໂດຍເຮັດໃຫ້ວັນນະທັງປວງເກີດຄວາມພໍໃຈ—ໃຫ້ທຸກຄົນຢູ່ດີມີສຸກ ແລະມີໃຈດີຕໍ່ກັນ. ສ່ວນພວກໄວສະຍະ ໂອ ພະຣາຊາ ກໍໃຫ້ການກະສິກຳເກີດຂຶ້ນຕາມຄວາມຍຸດຕິທຳ ແລະລະບຽບອັນຖືກຕ້ອງ».

Verse 111

शुश्रूषायां च निरता द्विजानां वृषलास्तदा । ततः परिपतन्‌ राजंस्तस्य कुक्षौ महात्मन:,शूद्र तीनों द्विजातियोंकी सेवा-शुश्रूषामें लगे रहते थे। राजन! यह सब देखते हुए जब मैं उस महात्मा बालकके उदरमें भ्रमण करता आगे बढ़ा, तब हिमवान्‌, हेमकूट, निषध, रजतयुक्त श्वेतगिरि, गन्धमादन, मन्दराचल, महागिरि नील, सुवर्णमय पर्वत मेरु, महेन्द्र, उत्तम विन्ध्यगिरि, मलय तथा पारियात्र पर्वत देखे। ये तथा और भी बहुत-से पर्वत मुझे उस बालकके उदरमें दिखायी दिये। वे सब-के-सब नाना प्रकारके रत्नोंसे विभूषित थे। राजन! वहाँ घूमते हुए मैंने सिंह, व्याप्र और वाराह आदि पशु भी देखे

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນຄາວນັ້ນ ພວກຊູດຣະ ອຸທິດຕົນໃນການປະຄອງຮັບໃຊ້ ແລະບຳລຸງພວກທະວິຊະ (ຜູ້ເກີດສອງຄັ້ງ). ຕໍ່ມາ ໂອ ພະຣາຊາ ເມື່ອຂ້າພະເຈົ້າເຄື່ອນໄຫວທ່ອງທ່ຽວຢູ່ໃນທ້ອງຂອງຜູ້ມີຈິດໃຈຍິ່ງໃຫຍ່ນັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ເຫັນພູເຂົາຫຼາຍລູກ—ຫິມະວານ, ເຫມະກູຕະ, ນິສະທະ, ສະເວຕະຄິຣິທີ່ຂາວພຣາວດັ່ງເງິນ, ຄັນທະມາດະນະ, ມັນດະຣາຈະລະ, ພູນີລະອັນໃຫຍ່, ເມຣຸອັນເປັນທອງ, ມະເຫນທຣະ, ວິນທະຍະອັນສູງສົ່ງ, ມະລະຍະ, ແລະ ປາຣິຍາຕຣະ—ພ້ອມທັງອີກຫຼາຍລູກ, ທັງໝົດປະດັບດ້ວຍແກ້ວມະນີນານາ. ເມື່ອທ່ອງທ່ຽວຢູ່ນັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າຍັງເຫັນສັດປ່າເຊັ່ນ ສິງ, ເສືອ, ແລະ ໝູປ່າ ອີກດ້ວຍ».

Verse 112

हिमवन्तं च पश्यामि हेमकूटं च पर्वतम्‌ । निषध॑ चापि पश्यामि श्वेतं च रजतान्वितम्‌,शूद्र तीनों द्विजातियोंकी सेवा-शुश्रूषामें लगे रहते थे। राजन! यह सब देखते हुए जब मैं उस महात्मा बालकके उदरमें भ्रमण करता आगे बढ़ा, तब हिमवान्‌, हेमकूट, निषध, रजतयुक्त श्वेतगिरि, गन्धमादन, मन्दराचल, महागिरि नील, सुवर्णमय पर्वत मेरु, महेन्द्र, उत्तम विन्ध्यगिरि, मलय तथा पारियात्र पर्वत देखे। ये तथा और भी बहुत-से पर्वत मुझे उस बालकके उदरमें दिखायी दिये। वे सब-के-सब नाना प्रकारके रत्नोंसे विभूषित थे। राजन! वहाँ घूमते हुए मैंने सिंह, व्याप्र और वाराह आदि पशु भी देखे

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນຫິມະວານ ແລະເຫັນພູເຫມະກູຕະ; ຂ້າພະເຈົ້າຍັງເຫັນນິສະທະ ແລະເຫັນສະເວຕະທີ່ສ່ອງປະກາຍດ້ວຍເງິນ».

Verse 113

पश्यामि च महीपाल पर्वतं गन्धमादनम्‌ । मन्दरं मनुजव्याप्र नीलं चापि महागिरिम्‌,शूद्र तीनों द्विजातियोंकी सेवा-शुश्रूषामें लगे रहते थे। राजन! यह सब देखते हुए जब मैं उस महात्मा बालकके उदरमें भ्रमण करता आगे बढ़ा, तब हिमवान्‌, हेमकूट, निषध, रजतयुक्त श्वेतगिरि, गन्धमादन, मन्दराचल, महागिरि नील, सुवर्णमय पर्वत मेरु, महेन्द्र, उत्तम विन्ध्यगिरि, मलय तथा पारियात्र पर्वत देखे। ये तथा और भी बहुत-से पर्वत मुझे उस बालकके उदरमें दिखायी दिये। वे सब-के-सब नाना प्रकारके रत्नोंसे विभूषित थे। राजन! वहाँ घूमते हुए मैंने सिंह, व्याप्र और वाराह आदि पशु भी देखे

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາຜູ້ປົກຄອງແຜ່ນດິນ, ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນພູຄັນທະມາດະນະ; ແລະ ໂອ ເສືອແຫ່ງມະນຸດ, ຂ້າພະເຈົ້າຍັງເຫັນມັນດະຣາ ແລະພູນີລະອັນໃຫຍ່».

Verse 114

पश्यामि च महाराज मेरुं कनकपर्वतम्‌ | महेन्द्र चैव पश्यामि विन्ध्यं च गिरिमुत्तमम्‌,शूद्र तीनों द्विजातियोंकी सेवा-शुश्रूषामें लगे रहते थे। राजन! यह सब देखते हुए जब मैं उस महात्मा बालकके उदरमें भ्रमण करता आगे बढ़ा, तब हिमवान्‌, हेमकूट, निषध, रजतयुक्त श्वेतगिरि, गन्धमादन, मन्दराचल, महागिरि नील, सुवर्णमय पर्वत मेरु, महेन्द्र, उत्तम विन्ध्यगिरि, मलय तथा पारियात्र पर्वत देखे। ये तथा और भी बहुत-से पर्वत मुझे उस बालकके उदरमें दिखायी दिये। वे सब-के-सब नाना प्रकारके रत्नोंसे विभूषित थे। राजन! वहाँ घूमते हुए मैंने सिंह, व्याप्र और वाराह आदि पशु भी देखे

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່, ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນເມຣຸ ພູເຂົາທອງ; ຂ້າພະເຈົ້າຍັງເຫັນມະເຫນທຣະ ແລະເຫັນວິນທະຍະ ອັນເປັນພູເຂົາທີ່ດີເລີດທີ່ສຸດ».

Verse 115

मलयं चापि पश्यामि पारियात्र च पर्वतम्‌ | एते चान्ये च बहवो यावन्त: पृथिवीधरा:,शूद्र तीनों द्विजातियोंकी सेवा-शुश्रूषामें लगे रहते थे। राजन! यह सब देखते हुए जब मैं उस महात्मा बालकके उदरमें भ्रमण करता आगे बढ़ा, तब हिमवान्‌, हेमकूट, निषध, रजतयुक्त श्वेतगिरि, गन्धमादन, मन्दराचल, महागिरि नील, सुवर्णमय पर्वत मेरु, महेन्द्र, उत्तम विन्ध्यगिरि, मलय तथा पारियात्र पर्वत देखे। ये तथा और भी बहुत-से पर्वत मुझे उस बालकके उदरमें दिखायी दिये। वे सब-के-सब नाना प्रकारके रत्नोंसे विभूषित थे। राजन! वहाँ घूमते हुए मैंने सिंह, व्याप्र और वाराह आदि पशु भी देखे

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຂ້າພະເຈົ້າຍັງເຫັນເທືອກເຂົາມະລະຍະ ແລະ ພູພາຣິຍາຕຣ; ຍັງເຫັນພູອື່ນໆອີກຫຼາຍ—ຫຼາຍດັ່ງຜູ້ຄ້ຳຈຸນແຜ່ນດິນ. ເມື່ອຂ້າພະເຈົ້າເຄື່ອນໄຫວຢູ່ໃນທ້ອງຂອງເດັກນ້ອຍຜູ້ມີຈິດໃຫຍ່ນັ້ນ, ເທືອກເຂົາອັນຍິ່ງໃຫຍ່ເຫຼົ່ານັ້ນປາກົດແກ່ຂ້າພະເຈົ້າ ທັງໝົດປະດັບດ້ວຍແກ້ວມະນີນານາ—ເປັນດັ່ງການເຜີຍໃຫ້ເຫັນວ່າ ໂລກທັງປວງພ້ອມພູມສັນຖານອັນສັກສິດ ອາດຖືກບັນຈຸໃນກາຍອັນອັດສະຈັນພຽງອົງດຽວ ແລະ ສາຍຕາຂອງຜູ້ເຫັນຈະກວ້າງຂຶ້ນດ້ວຍຄວາມອົດທົນ ແລະ ການສັງເກດຢ່າງລະມັດລະວັງ»។

Verse 116

तस्योदरे मया दृष्टा: सर्वे रत्नविभूषिता: । सिंहान्‌ व्याप्रान्‌ वराहांश्न॒ पश्यामि मनुजाधिप,शूद्र तीनों द्विजातियोंकी सेवा-शुश्रूषामें लगे रहते थे। राजन! यह सब देखते हुए जब मैं उस महात्मा बालकके उदरमें भ्रमण करता आगे बढ़ा, तब हिमवान्‌, हेमकूट, निषध, रजतयुक्त श्वेतगिरि, गन्धमादन, मन्दराचल, महागिरि नील, सुवर्णमय पर्वत मेरु, महेन्द्र, उत्तम विन्ध्यगिरि, मलय तथा पारियात्र पर्वत देखे। ये तथा और भी बहुत-से पर्वत मुझे उस बालकके उदरमें दिखायी दिये। वे सब-के-सब नाना प्रकारके रत्नोंसे विभूषित थे। राजन! वहाँ घूमते हुए मैंने सिंह, व्याप्र और वाराह आदि पशु भी देखे

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນທ້ອງຂອງເດັກນ້ອຍນັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນທຸກສິ່ງປະດັບດ້ວຍແກ້ວມະນີ. ໂອ ຈອມເຈົ້າແຫ່ງມະນຸດ, ເມື່ອຂ້າພະເຈົ້າເຄື່ອນໄຫວຢູ່ທີ່ນັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າກໍເຫັນສິງ, ເສືອ, ແລະ ໝູປ່າດ້ວຍ»។

Verse 117

पृथिव्यां यानि चान्यानि सत्त्वानि जगतीपते । तानि सर्वाण्यहं तत्र पश्यन्‌ पर्यचरं तदा,पृथ्वीपते! भूमण्डलमें जितने प्राणी हैं, उन सबको देखते हुए मैं उस समय उस बालकके उदरमें विचरता रहा

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຈອມເຈົ້າແຫ່ງໂລກ, ໂອ ຈອມເຈົ້າແຫ່ງແຜ່ນດິນ—ເມື່ອຂ້າພະເຈົ້າຢູ່ທີ່ນັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນສັດມີຊີວິດທັງປວງທີ່ມີຢູ່ໃນແຜ່ນດິນ; ແລະ ເມື່ອເຫັນພວກມັນທັງໝົດ ຂ້າພະເຈົ້າກໍເຄື່ອນໄຫວວຽນວົນຢູ່ໃນທ້ອງຂອງເດັກນ້ອຍນັ້ນໃນເວລານັ້ນ»។

Verse 118

कुक्षौ तस्य नरव्याघ्र प्रविष्ट: संचरन्‌ दिश: । शक्रादींश्वापि पश्यामि कृत्स्नान्‌ देवगणानहम्‌,नरश्रेष्ठ उस शिशुके उदरमें प्रविष्ट हो सम्पूर्ण दिशाओंमें भ्रमण करते हुए इन्द्र आदि सम्पूर्ण देवताओंके भी दर्शन हुए

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ເສືອໃນຫມູ່ມະນຸດ, ເມື່ອເຂົ້າໄປໃນທ້ອງຂອງເດັກນ້ອຍນັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ວຽນວົນໄປທົ່ວທຸກທິດ. ທີ່ນັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນແມ່ນແຕ່ພຣະອິນທຣາ ແລະ ອົງອື່ນໆ—ແທ້ຈິງແລ້ວ ເຫັນຫມູ່ເທວະທັງປວງ»។

Verse 119

साध्यान्‌ रुद्रांस्तथा5<दित्यान्‌ गुह्मकान्‌ पितरस्तदा । सर्पान्‌ नागान्‌ सुपर्णाश्च वसूनप्यश्चिनावपि,पृथ्वीपते! साध्य, रुद्र, आदित्य, गुह्यक, पितर, सर्प, नाग, सुपर्ण, वसु, अश्विनीकुमार, गन्धर्व, अप्सरा, यक्ष तथा ऋषियोंका भी मैंने दर्शन किया। दैत्य-दानवसमूह, नाग, सिंहिकाके पुत्र (राहु आदि) तथा अन्य देवशत्रुओंको भी देखा। राजन्‌! इस लोकमें मैंने जो कुछ भी स्थावर-जंगम पदार्थ देखे थे, वे सब मुझे उस महात्माकी कुक्षिमें दृष्टिगोचर हुए। महाराज! मैं प्रतिदिन फलाहार करता और इस सम्पूर्ण जगतमें घूमता रहता

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຈອມເຈົ້າແຫ່ງແຜ່ນດິນ, ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນພວກສາທຍະ, ພວກຣຸດຣະ, ແລະ ພວກອາທິຕຍະ; ພວກກຸຫຍະກະ ແລະ ພິຕຣິ. ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນງູ ແລະ ນາກ; ສຸປັນນະ (ຜູ້ມີປີກຍິ່ງໃຫຍ່); ພວກວະສຸ ແລະ ແມ່ນແຕ່ຝາແຝດອັດສະວິນ. ຂ້າພະເຈົ້າຍັງເຫັນຄົນທິບພະດົນຕີ (ກັນທັຣວະ), ອັບສະຣາ, ຢັກສະ, ແລະ ຣິສິ. ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນຫມູ່ໄດຕຍະ ແລະ ດານະວະ, ລູກຂອງສິມຫິກາ ເຊັ່ນ ຣາຫູ, ແລະ ສັດຕູຂອງເທວະອື່ນໆ. ໂອ ພຣະຣາຊາ, ສິ່ງໃດກໍຕາມ—ທັງທີ່ເຄື່ອນໄຫວ ແລະ ທີ່ຢູ່ນິ່ງ—ທີ່ຂ້າພະເຈົ້າເຄີຍເຫັນໃນໂລກນີ້, ທັງໝົດນັ້ນປາກົດແກ່ຂ້າພະເຈົ້າໃນທ້ອງຂອງຜູ້ມີຈິດໃຫຍ່ນັ້ນ. ແລະ ໂອ ພຣະຣາຊາຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່, ຂ້າພະເຈົ້າດຳລົງຊີວິດໃນແຕ່ລະວັນດ້ວຍຜົນໄມ້ ແລະ ຍັງຄົງວຽນວົນໄປທົ່ວໂລກນີ້»។

Verse 120

गन्धर्वाप्सरसो यक्षानषींश्वैव महीपते । देत्यदानवसड्घांश्व नागांश्न मनुजाधिप,पृथ्वीपते! साध्य, रुद्र, आदित्य, गुह्यक, पितर, सर्प, नाग, सुपर्ण, वसु, अश्विनीकुमार, गन्धर्व, अप्सरा, यक्ष तथा ऋषियोंका भी मैंने दर्शन किया। दैत्य-दानवसमूह, नाग, सिंहिकाके पुत्र (राहु आदि) तथा अन्य देवशत्रुओंको भी देखा। राजन्‌! इस लोकमें मैंने जो कुछ भी स्थावर-जंगम पदार्थ देखे थे, वे सब मुझे उस महात्माकी कुक्षिमें दृष्टिगोचर हुए। महाराज! मैं प्रतिदिन फलाहार करता और इस सम्पूर्ण जगतमें घूमता रहता

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ! ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ເຫັນພວກ ຄັນທະວະ ແລະ ອັບສະຣາ, ພວກ ຢັກສະ ແລະ ຣິສີ; ຝູງດາຍຕະ ແລະ ດານະວະ; ແລະ ພວກນາກ ດ້ວຍ, ໂອ ຈອມເຈົ້າແຫ່ງມະນຸດ. ໂອ ຜູ້ປົກຄອງແຜ່ນດິນ! ຂ້າພະເຈົ້າຍັງໄດ້ເຫັນ ສາດຍະ, ຣຸດຣະ, ອາທິດຕະ, ກຸຫຍະກະ, ປິຕຣະ; ງູ ແລະ ນາກ, ສຸປັນນະ, ວະສຸ, ແລະ ອັສວິນຄູ່; ຄັນທະວະ, ອັບສະຣາ, ຢັກສະ ແລະ ອື່ນໆອີກຫຼາຍ. ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ເຫັນຊຸມນຸມຂອງດາຍຕະ ແລະ ດານະວະ, ພວກນາກ, ແລະ ລູກຂອງ ສິມຫິກາ (ເຊັ່ນ ຣາຫຸ) ພ້ອມທັງສັດຕູຂອງເທວະອື່ນໆ. ໂອ ພະຣາຊາ! ສິ່ງໃດກໍຕາມ—ທັງຢູ່ນິ່ງ ແລະ ເຄື່ອນໄຫວ—ທີ່ຂ້າພະເຈົ້າເຄີຍເຫັນໃນໂລກນີ້, ທັງໝົດນັ້ນປາກົດໃຫ້ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນຢູ່ໃນທ້ອງຂອງຜູ້ມີຈິດໃຈຍິ່ງໃຫຍ່ນັ້ນ. ແລະ ໂອ ພະຣາຊາຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່! ຂ້າພະເຈົ້າດຳລົງຊີວິດດ້ວຍການກິນໝາກໄມ້ທຸກມື້ ແລະ ທ່ອງໄປທົ່ວໂລກນີ້»។

Verse 121

सिंहिकातनयांश्वापि ये चान्ये सुरशत्रव: । यच्च किंचिन्मया लोके दृष्टं स्थावरजड्रमम्‌,पृथ्वीपते! साध्य, रुद्र, आदित्य, गुह्यक, पितर, सर्प, नाग, सुपर्ण, वसु, अश्विनीकुमार, गन्धर्व, अप्सरा, यक्ष तथा ऋषियोंका भी मैंने दर्शन किया। दैत्य-दानवसमूह, नाग, सिंहिकाके पुत्र (राहु आदि) तथा अन्य देवशत्रुओंको भी देखा। राजन्‌! इस लोकमें मैंने जो कुछ भी स्थावर-जंगम पदार्थ देखे थे, वे सब मुझे उस महात्माकी कुक्षिमें दृष्टिगोचर हुए। महाराज! मैं प्रतिदिन फलाहार करता और इस सम्पूर्ण जगतमें घूमता रहता

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຂ້າພະເຈົ້າຍັງໄດ້ເຫັນລູກຂອງ ສິມຫິກາ ແລະ ສັດຕູຂອງເທວະອື່ນໆ. ແລະ ສິ່ງໃດກໍຕາມທີ່ຂ້າພະເຈົ້າເຄີຍເຫັນໃນໂລກນີ້—ທັງຢູ່ນິ່ງ ແລະ ເຄື່ອນໄຫວ—ໂອ ຈອມເຈົ້າແຫ່ງແຜ່ນດິນ, ທັງໝົດນັ້ນປາກົດໃຫ້ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນຢູ່ໃນທ້ອງຂອງຜູ້ມີຈິດໃຈຍິ່ງໃຫຍ່ນັ້ນ. ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນ ສາດຍະ, ຣຸດຣະ, ອາທິດຕະ, ກຸຫຍະກະ, ປິຕຣະ; ງູ ແລະ ນາກ, ສຸປັນນະ, ວະສຸ, ຄູ່ອັສວິນ; ຄັນທະວະ, ອັບສະຣາ, ຢັກສະ ແລະ ຣິສີ. ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນຝູງດາຍຕະ ແລະ ດານະວະ, ນາກ, ລູກຂອງ ສິມຫິກາ (ຣາຫຸ ແລະ ອື່ນໆ) ແລະ ສັດຕູຂອງເທວະອື່ນໆ. ໂອ ພະຣາຊາ! ທຸກສິ່ງທີ່ຂ້າພະເຈົ້າເຄີຍຮັບຮູ້ວ່າເປັນຂອບເຂດແຫ່ງການມີຢູ່ ປາກົດໃຫ້ເຫັນວ່າຖືກຮວບຮວມຢູ່ໃນພຣະອົງນັ້ນ. ແລະ ໂອ ພະຣາຊາຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່! ຂ້າພະເຈົ້າດຳລົງຊີວິດທຸກມື້ດ້ວຍໝາກໄມ້ ແລະ ຍັງຄົງທ່ອງໄປທົ່ວໂລກນີ້»។

Verse 122

सर्व पश्याम्यहं राजंस्तस्य कुक्षौ महात्मन: । चरमाण: फलाहार: कृत्स्नं जगदिदं विभो,पृथ्वीपते! साध्य, रुद्र, आदित्य, गुह्यक, पितर, सर्प, नाग, सुपर्ण, वसु, अश्विनीकुमार, गन्धर्व, अप्सरा, यक्ष तथा ऋषियोंका भी मैंने दर्शन किया। दैत्य-दानवसमूह, नाग, सिंहिकाके पुत्र (राहु आदि) तथा अन्य देवशत्रुओंको भी देखा। राजन्‌! इस लोकमें मैंने जो कुछ भी स्थावर-जंगम पदार्थ देखे थे, वे सब मुझे उस महात्माकी कुक्षिमें दृष्टिगोचर हुए। महाराज! मैं प्रतिदिन फलाहार करता और इस सम्पूर्ण जगतमें घूमता रहता

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ, ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນທຸກສິ່ງຢູ່ໃນທ້ອງຂອງຜູ້ມີຈິດໃຈຍິ່ງໃຫຍ່ນັ້ນ. ດຳລົງຊີວິດດ້ວຍໝາກໄມ້ ແລະ ທ່ອງໄປ, ໂອ ຈອມຜູ້ມີອຳນາດ, ໂອ ຜູ້ປົກຄອງແຜ່ນດິນ, ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ເຫັນໂລກທັງໝົດຢູ່ທີ່ນັ້ນ»។

Verse 123

अन्तःशरीरे तस्याहं वर्षाणामधिकं शतम्‌ । न च पश्यामि तस्याहं देहस्यान्तं कदाचन,उस बालकके शरीरके भीतर मैं सौ वर्षमे अधिक कालतक घूमता रहा, तो भी कभी उसके शरीरका अन्त नहीं दिखायी दिया

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ພາຍໃນຮ່າງກາຍຂອງເດັກນ້ອຍນັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າທ່ອງໄປເກີນກວ່າໜຶ່ງຮ້ອຍປີ; ແຕ່ບໍ່ມີເວລາໃດເລີຍທີ່ຂ້າພະເຈົ້າຈະເຫັນຂອບເຂດ ຫຼື ຈຸດສິ້ນສຸດຂອງຮ່າງກາຍຂອງລາວ»។

Verse 124

सततं धावमानश्ष्‌ चिन्तयानो विशाम्पते । (भ्रमंस्तत्र महीपाल यदा वर्षगणान्‌ बहून्‌ ।) आसादयामि नैवान्तं तस्य राजन्‌ महात्मन:,युधिष्ठिर! मैं निरन्तर दौड़ लगाता और चिन्तामें पड़ा रहता था। महाराज! जब बहुत वर्षोतक भ्रमण करनेपर भी उस महात्माके शरीरका अन्त नहीं मिला, तब मैंने मन, वाणी और क्रियाद्वारा उन वरदायक एवं वरेण्य देवताकी ही विधिपूर्वक शरण ली

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຂ້າພະເຈົ້າແລ່ນໄປມາບໍ່ຂາດ ແລະ ຖືກຄວາມກັງວົນກິນໃຈ, ໂອ ຈອມເຈົ້າແຫ່ງປະຊາ. ໂອ ພະຣາຊາ! ຂ້າພະເຈົ້າທ່ອງໄປຢູ່ນັ້ນຫຼາຍປີ, ແຕ່ກໍບໍ່ອາດພົບຂອບເຂດສຸດທ້າຍຂອງຜູ້ມີຈິດໃຈຍິ່ງໃຫຍ່ນັ້ນ. ແລ້ວ, ໂອ ພະຣາຊາ, ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ເຂົ້າພຶ່ງ—ດ້ວຍພິທີອັນຖືກຕ້ອງ ແລະ ຄວາມເຄົາລົບຄົບຖ້ວນ—ຕໍ່ເທວະຜູ້ຄວນເຄົາລົບ ແລະ ຜູ້ປະທານພອນນັ້ນ, ດ້ວຍໃຈ ຄຳ ແລະ ກາຍ»។

Verse 125

ततस्तमेव शरणं गतो<5स्मि विधिवत्‌ तदा । वरेण्यं वरदं देव॑ं मनसा कर्मणैव च,युधिष्ठिर! मैं निरन्तर दौड़ लगाता और चिन्तामें पड़ा रहता था। महाराज! जब बहुत वर्षोतक भ्रमण करनेपर भी उस महात्माके शरीरका अन्त नहीं मिला, तब मैंने मन, वाणी और क्रियाद्वारा उन वरदायक एवं वरेण्य देवताकी ही विधिपूर्वक शरण ली

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຕໍ່ຈາກນັ້ນ ໃນເວລານັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ເຂົ້າໄປພຶ່ງພາອາໄສຕາມພິທີ ຕໍ່ພຣະເທວະອົງນັ້ນເອງ—ຜູ້ຄວນແກ່ການເລືອກ ແລະເປັນຜູ້ປະທານພອນ—ດ້ວຍໃຈ ແລະດ້ວຍການກະທຳດ້ວຍ. ໂອ ຢຸດທິສຖິຣະ, ຂ້າພະເຈົ້າແລ່ນວຸ່ນວາຍບໍ່ຢຸດ ແລະມີຄວາມກັງວົນ; ແລະເມື່ອແມ່ນວ່າຈະພະເຈົ້າພະເຈົ້າເດີນທາງຫຼາຍປີ ກໍຍັງບໍ່ພົບຈຸດສິ້ນສຸດແຫ່ງຮ່າງກາຍຂອງມະຫາວິນຍານນັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າຈຶ່ງພຶ່ງພາອາໄສຕາມຮູບແບບອັນຖືກຕ້ອງ ຕໍ່ພຣະເທວະຜູ້ປະທານພອນ ແລະຄວນແກ່ການນະມັດສະການນັ້ນ.»

Verse 126

ततो<5हं सहसा राजन्‌ वायुवेगेन नि:सृतः । महात्मनो मुखात्‌ तस्य विवृतात्‌ पुरुषोत्तम,पुरुषरत्न युधिष्ठिर! उनकी शरण लेते ही मैं वायुके समान वेगसे उक्त महात्मा बालकके खुले हुए मुखकी राहसे सहसा बाहर निकल आया

ຕໍ່ມາ ໂອ ພຣະຣາຊາ, ຂ້າພະເຈົ້າຖືກຂັບອອກຢ່າງກະທັນຫັນ ດ້ວຍຄວາມໄວດັ່ງລົມ, ອອກມາທາງປາກທີ່ເປີດອອກຂອງມະຫາວິນຍານນັ້ນ. ໂອ ຜູ້ປະເສີດໃນມະນຸດ—ໂອ ເພັດແຫ່ງມະນຸດ ຢຸດທິສຖິຣະ—ເມື່ອຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ພຶ່ງພາອາໄສພຣະອົງນັ້ນ ຂ້າພະເຈົ້າກໍອອກມາຢ່າງວ່ອງໄວໃນທາງນີ້.

Verse 127

ततस्तस्यैव शाखायां न्यग्रोधस्य विशाम्पते । आस्ते मनुजशार्दूल कृत्स्नमादाय वै जगत्‌,नरश्रेष्ठ राजन! बाहर आकर देखा तो उसी बरगदकी शाखापर उसी बाल-वेषसे सम्पूर्ण जगत्‌को अपने उदरमें लेकर श्रीवत्सचिह्लसे सुशोभित वह अमिततेजस्वी बालक पूर्ववत्‌ बैठा हुआ है

ແລ້ວ ໂອ ຜູ້ປົກຄອງປະຊາ—ໂອ ເສືອໃນມະນຸດ—ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນວ່າ ຢູ່ເທິງກິ່ງຂອງຕົ້ນນະຍະໂກຣດ (ຕົ້ນໄຊ) ຕົ້ນນັ້ນເອງ, ເດັກນ້ອຍຜູ້ນັ້ນຢູ່ໃນຮູບເດັກເຊັ່ນເກົ່າ ນັ່ງຢູ່ດັ່ງເດີມ, ປານດັ່ງວ່າໄດ້ອຸ້ມໂລກທັງປວງໄວ້ໃນທ້ອງຂອງຕົນ.

Verse 128

तेनैव बालवेषेण श्रीवत्सकृतलक्षणम्‌ | आसीन तं॑ नरव्याप्र पश्याम्यमिततेजसम्‌,नरश्रेष्ठ राजन! बाहर आकर देखा तो उसी बरगदकी शाखापर उसी बाल-वेषसे सम्पूर्ण जगत्‌को अपने उदरमें लेकर श्रीवत्सचिह्लसे सुशोभित वह अमिततेजस्वी बालक पूर्ववत्‌ बैठा हुआ है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ເສືອໃນມະນຸດ, ໂອ ຜູ້ປະເສີດໃນມະນຸດ, ໂອ ພຣະຣາຊາ—ເມື່ອຂ້າພະເຈົ້າອອກມາ ຂ້າພະເຈົ້າເຫັນເດັກນ້ອຍຄົນນັ້ນອີກຄັ້ງ, ໃນຮູບເດັກເຊັ່ນເກົ່າ, ນັ່ງຢູ່ດັ່ງເດີມເທິງກິ່ງຕົ້ນນະຍະໂກຣດ (ຕົ້ນໄຊ) ນັ້ນ. ມີເຄື່ອງໝາຍມົງຄຸນ ສຣີວັດສະ (Śrīvatsa) ແລະສ່ອງປະກາຍດ້ວຍລັດສະຫມີອັນຫາຂອບເຂດບໍ່ໄດ້; ປານດັ່ງຜູ້ທີ່ບັນຈຸໂລກທັງປວງໄວ້ໃນຕົນຢ່າງລຶກລັບ—ເປີດເຜີຍວ່າ ຄວາມເທວະອາດສະຖິດຢູ່ໃນຮູບອັນງ່າຍທີ່ສຸດ ແລະສາຍຕາມະນຸດຕ້ອງນ້ອມລົງຕໍ່ຄວາມເປັນຈິງແຫ່ງຈັກກະວານ.»

Verse 129

ततो मामब्रवीद्‌ बाल: स प्रीत: प्रहसन्निव । श्रीवत्सधारी द्युतिमान्‌ पीतवासा महाद्युति:,तब महातेजस्वी पीताम्बरधारी श्रीवत्सभूषित कान्तिमान्‌ उस बालकने प्रसन्न होकर हँसते हुए-से मुझसे कहा--

ຕໍ່ມາ ເດັກນ້ອຍຜູ້ນັ້ນ—ມີໃຈຍິນດີ ແລະປານດັ່ງຍິ້ມຫົວ—ໄດ້ກ່າວກັບຂ້າພະເຈົ້າ. ລາວສ່ອງປະກາຍ, ນຸ່ງຜ້າສີເຫຼືອງ (ປີຕະວາສາ) ແລະປະດັບດ້ວຍເຄື່ອງໝາຍ Śrīvatsa, ສະຫວ່າງໄສດ້ວຍລັດສະຫມີອັນຍິ່ງໃຫຍ່.

Verse 130

अपीदानीं शरीरेडस्मिन्‌ मामके मुनिसत्तम | उषितस्त्व॑ सुविश्रान्तो मार्कण्डेय ब्रवीहि मे,“'मुनिश्रेष्ठ मार्कण्डेय! क्या तुम मेरे इस शरीरमें रहकर विश्राम कर चुके? मुझे बताओ”

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ນັກບວດຜູ້ປະເສີດ ມາຣກັນເດຍ! ບັດນີ້ ເຈົ້າໄດ້ພັກອາໄສຢູ່ໃນກາຍຂອງຂ້າ ແລະໄດ້ພັກຜ່ອນຢ່າງເຕັມທີ່ແລ້ວບໍ? ຈົ່ງບອກຂ້າ»។

Verse 131

मुहूर्तादथ मे दृष्टि: प्रादुर्भूता पुनर्नवा । यया निर्मुक्तमात्मानमपश्यं लब्धचेतसम्‌,फिर दो ही घड़ीमें मुझे एक नवीन दृष्टि प्राप्त हुई, जिससे मैं अपने-आपको मायासे मुक्त और सचेत अनुभव करने लगा

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ບໍ່ດົນນັກ ຄວາມແຈ້ງຊັດໃໝ່ໄດ້ເກີດຂຶ້ນໃນຂ້າອີກຄັ້ງ. ດ້ວຍມັນ ຂ້າເຫັນຕົນເອງວ່າພົ້ນຈາກຄວາມຫຼົງລວງ ແລະກັບຄືນສູ່ສະຕິອັນເຕັມທີ່—ໃຈຖືກຟື້ນຄືນ ແລະໝັ້ນຄົງ.

Verse 132

तस्य ताम्रतलौ तात चरणौ सुप्रतिषछ्ितौ । सुजातौ मृदुरक्ताभिरड्जुलीभिविराजितौ

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ລູກເອີຍ, ຕີນຂອງທ່ານ—ຝາຕີນມີສີຄ້າຍທອງແດງ—ຕັ້ງຢູ່ຢ່າງໝັ້ນຄົງ. ຮູບງາມ ແລະປະນີດ, ມັນສ່ອງປະກາຍດ້ວຍນິ້ວຕີນອ່ອນນຸ່ມສີແດງອ່ອນ»។

Verse 133

दृष्टवा परिमितं तस्य प्रभावममितौजस:,उस अमित तेजस्वी शिशुका अनन्त प्रभाव देखकर मैं यत्नपूर्वक उसके समीप गया और विनीतभावसे हाथ जोड़कर सम्पूर्ण भूतोंके आत्मा उस कमलनयन देवताका दर्शन किया

ເມື່ອເຫັນອຳນາດອັນມີຂອບເຂດແຕ່ພິສູດຄວາມອັດສະຈັນຂອງຜູ້ມີພະລັງອັນຫາຂອບບໍ່ໄດ້ ແລະເຫັນເດັກນ້ອຍຜູ້ສ່ອງສະຫວ່າງດ້ວຍສະຫງ່າລາສີອັນບໍ່ມີທີ່ສິ້ນສຸດ, ຂ້າຈຶ່ງເຂົ້າໄປໃກ້ດ້ວຍຄວາມລະມັດລະວັງ. ດ້ວຍຄວາມນອບນ້ອມ ຂ້າປະນົມມື ແລະໄດ້ເຫັນເທວະດາຜູ້ມີດວງຕາດັ່ງດອກບົວ—ອາດຕະມະພາຍໃນຂອງສັດທັງປວງ—ແລະໄດ້ນົບນ້ອມຕໍ່ພຣະສະຖິດອັນສັກສິດນັ້ນດ້ວຍຄວາມເຄົາລົບອັນໝັ້ນຄົງ.

Verse 134

विनयेनाञ्जलिं कृत्वा प्रयत्नेनोपगम्य ह । दृष्टो मया स भूतात्मा देवः कमललोचन:,उस अमित तेजस्वी शिशुका अनन्त प्रभाव देखकर मैं यत्नपूर्वक उसके समीप गया और विनीतभावसे हाथ जोड़कर सम्पूर्ण भूतोंके आत्मा उस कमलनयन देवताका दर्शन किया

ດ້ວຍຄວາມນອບນ້ອມ ຂ້າປະນົມມື ແລະດ້ວຍຄວາມພາກພຽນອັນລະມັດລະວັງ ເຂົ້າໄປໃກ້ທ່ານ. ແລ້ວຂ້າໄດ້ເຫັນເທວະດາຜູ້ມີດວງຕາດັ່ງດອກບົວ—ອາດຕະມະພາຍໃນຂອງສັດທັງປວງ—ສ່ອງສະຫວ່າງດ້ວຍສະຫງ່າລາສີອັນຫາຂອບບໍ່ໄດ້.

Verse 135

तमहं प्राउ्जलिर्भूत्वा नमस्कृत्येदमन्रुवम्‌ । ज्ञातुमिच्छामि देव त्वां मायां चैतां तवोत्तमाम्‌,फिर हाथ जोड़े नमस्कार करके मैंने उससे इस प्रकार कहा--देव! मैं आपको और आपकी इस उत्तम मायाको जानना चाहता हूँ

ຂ້າພະເຈົ້າປະນົມມືດ້ວຍຄວາມເຄົາລົບ ແລ້ວກໍ່ກົ້ມກາບທ່ານ ແລະເວົ້າວ່າ: «ໂອ ຜູ້ເປັນເທວະ! ຂ້າພະເຈົ້າປາດຖະນາຈະຮູ້ຈັກທ່ານ ແລະມາຍາ (māyā) ອັນສູງສຸດນີ້ຂອງທ່ານ»។

Verse 136

आस्थयेनानुप्रविष्टो5हं शरीरे भगवंस्तव । दृष्टवानखिलान्‌ सर्वान्‌ समस्तान्‌ जठरे हि ते,'भगवन्‌! मैंने आपके मुखकी राहसे शरीरमें प्रवेश करके आपके उदरमें समस्त सांसारिक पदार्थोका अवलोकन किया है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະຜູ້ມີພອນ! ຂ້າພະເຈົ້າເຂົ້າໄປໃນພຣະກາຍຂອງທ່ານທາງປາກ ແລະໄດ້ເຫັນໃນພຣະອຸທອນຂອງທ່ານ ທັງໂລກທັງປວງ—ທຸກສິ່ງທຸກຢ່າງ ຢ່າງຄົບຖ້ວນ ບໍ່ເຫຼືອຂາດ»។

Verse 137

तव देव शरीरस्था देवदानवराक्षसा: । यक्षगन्धर्वनागाश्न जगत्‌ स्थावरजड्रमम्‌

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນພຣະກາຍອັນເທວະຂອງທ່ານ ມີທັງເທວະ, ດານະວະ, ແລະຣາກສະສະ; ມີຍັກສະ, ຄັນທັບພະ, ແລະນາກະດ້ວຍ—ແທ້ຈິງແລ້ວ ຄືໂລກທັງປວງ ທັງສິ່ງຢືນຢູ່ນິ່ງ ແລະສິ່ງອັນອຶດທຶບ/ບໍ່ເຄື່ອນໄຫວ»។

Verse 138

“देव! आपके शरीरमें देवता, दानव, यक्ष, राक्षस, गन्धर्व, नाग तथा समस्त स्थावर- जंगमरूप जगत्‌ विद्यमान है ।। त्वत्प्रसादाच्च मे देव स्मृतिर्न परिहीयते । ट्रुतमन्त:शरीरे ते सततं परिवर्तिन:,'प्रभो! आपकी कृपासे आपके शरीरके भीतर निरन्तर शीघ्र गतिसे घूमते रहनेपर भी मेरी स्मरणशक्ति नष्ट नहीं हुई है

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະຜູ້ເປັນເຈົ້າ! ໃນພຣະກາຍຂອງທ່ານ ມີເທວະ, ອະສຸຣະ/ດານະວະ, ຍັກສະ, ຣາກສະສະ, ຄັນທັບພະ, ນາກະ ແລະທັງຈັກກະວານທັງປວງໃນຮູບແບບທຸກຢ່າງ—ທັງທີ່ເຄື່ອນໄຫວ ແລະທັງທີ່ຢືນນິ່ງ. ແລະໂດຍພຣະກະລຸນາຂອງທ່ານ, ໂອ ຜູ້ເປັນເທວະ, ຄວາມຈື່ຈຳຂອງຂ້າພະເຈົ້າບໍ່ໄດ້ສູນເສຍ: ແມ່ນແຕ່ຖືກພາໃຫ້ຫມຸນວຽນຢ່າງໄວ ແລະຕໍ່ເນື່ອງຢູ່ໃນພາຍໃນຂອງທ່ານ, ໂອ ນາຍທ່ານ, ພະລັງແຫ່ງການລະລຶກຂອງຂ້າພະເຈົ້າບໍ່ໄດ້ຖືກທຳລາຍ»។

Verse 139

निर्गतो5हमकामस्तु इच्छया ते महाप्रभो । इच्छामि पुण्डरीकाक्ष ज्ञातुं त्वाहमनिन्दितम्‌,“महाप्रभो! मैं अपनी अभिलाषा न रहनेपर भी केवल आपकी इच्छासे बाहर निकल आया हूँ। कमलनयन! आप सर्वोत्कृष्ट देवताको मैं जानना चाहता हूँ

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ມະຫາພຣະຜູ້ເປັນເຈົ້າ! ແມ່ນແຕ່ຂ້າພະເຈົ້າບໍ່ມີຄວາມປາດຖະນາສ່ວນຕົວ ກໍ່ອອກມາພາຍນອກໄດ້ ແຕ່ໂດຍພຣະປະສົງຂອງທ່ານເທົ່ານັ້ນ. ໂອ ຜູ້ມີນັຍນາດັ່ງດອກບົວ! ຂ້າພະເຈົ້າປາດຖະນາຈະຮູ້ຈັກທ່ານ—ຜູ້ບໍ່ມີມົນທິນ ແລະສູງສຸດໃນບັນດາເທວະ»។

Verse 140

इह भूत्वा शिशु: साक्षात्‌ कि भवानवतिष्ठते । पीत्वा जगदिदं सर्वमेतदाख्यातुमहसि,“आप इस सम्पूर्ण जगत्‌को पी करके यहाँ साक्षात्‌ बालकवेषमें क्‍यों विराजमान हैं? यह सब बतानेकी कृपा करें

ພຣະອົງໄດ້ປາກົດຢູ່ນີ້ໃນຮູບເດັກນ້ອຍຢ່າງແຈ້ງຊັດ—ເປັນຫຍັງຈຶ່ງປະທັບຢູ່ໃນຮູບນັ້ນ? ຫຼັງຈາກດື່ມກືນຈັກກະວານທັງໝົດນີ້ແລ້ວ ຂໍພຣະອົງເມດຕາອະທິບາຍເລື່ອງນີ້ໃຫ້ຊັດເຈນເຖີດ.

Verse 141

किमर्थ च जगत्‌ सर्व शरीरस्थं तवानघ । कियन्तं च त्वया कालमिह स्थेयमरिंदम,“अनघ! यह सारा संसार आपके शरीरमें किसलिये स्थित है? शत्रुदमन! आप कितने समयतक यहाँ इस रूपमें रहेंगे?

ໄວສຳປາຍະນະກ່າວວ່າ: «ໂອ ຜູ້ບໍ່ມີມົນທິນ, ເພາະເຫດໃດຈັກກະວານທັງໝົດນີ້ຈຶ່ງສະຖິດຢູ່ໃນພຣະວິກາຍຂອງທ່ານ? ແລະ ໂອ ຜູ້ປາບສັດຕູ, ທ່ານຈະປະທັບຢູ່ນີ້ໃນຮູບທີ່ປາກົດນີ້ອີກດົນເທົ່າໃດ?»

Verse 142

एतदिच्छामि देवेश श्रोतु ब्राह्मणकाम्यया । त्वत्त: कमलपत्राक्ष विस्तरेण यथातथम्‌,'देवेश्वर! कमलनयन! ब्राह्मणमें जो सहज जिज्ञासा होती है, उससे प्रेरित होकर मैं आपसे यह सब बातें यथाविधि विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ

ໄວສຳປາຍະນະກ່າວວ່າ: «ໂອ ຈອມເທວະ, ຜູ້ມີນັຍນາດັ່ງກີບດອກບົວ, ໂດຍຖືກກະຕຸ້ນດ້ວຍຄວາມຢາກຮູ້ຕາມທຳມະຊາດຂອງພຣາຫມະນ, ຂ້າພະເຈົ້າປາຖະໜາຈະຟັງເລື່ອງນີ້ທັງໝົດຈາກພຣະອົງໂດຍກົງ ແລະໂດຍລະອຽດ ຕາມຄວາມເປັນຈິງ.»

Verse 143

महद्धयेतदचिन्त्यं च यदहं दृष्टवान्‌ प्रभो । इत्युक्त: स मया श्रीमान्‌ देवदेवो महाद्युति: । सान्त्वयन्‌ मामिदं वाक्यमुवाच वदतां वर:,'प्रभो! मैंने जो कुछ देखा है, यह अगाध और अचिन्त्य है।” मेरे इस प्रकार पूछनेपर वे वक्ताओंमें श्रेष्ठ महातेजस्वी देवाधिदेव श्रीभगवान्‌ मुझे सान्त्वना देते हुए इस प्रकार बोले

«ໂອ ພຣະອົງ, ສິ່ງທີ່ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ເຫັນນັ້ນ ຍິ່ງໃຫຍ່ແລະເກີນກວ່າຈະຄິດໄດ້.» ເມື່ອຂ້າພະເຈົ້າກ່າວດັ່ງນັ້ນ ພຣະເທວະເທວະຜູ້ສະຫງ່າງາມ ຜູ້ມີລັດສະໝີອັນຍິ່ງໃຫຍ່ ຜູ້ເປັນຍອດແຫ່ງນັກກ່າວ ໄດ້ປອບໃຈຂ້າພະເຈົ້າ ແລະກ່າວຖ້ອຍຄຳນີ້ວ່າ—

Verse 187

इस प्रकार श्रीम्याभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वनें मत्स्योपाख्यानविषयक एक सौ सतासीवाँ अध्याय पूरा हुआ

ດັ່ງນີ້ ບົດທີ 187 ຂອງ «ມັດສະຍະ-ອຸປາຂະຍານະ» (ຕອນວ່າດ້ວຍພຣະຣາຊາມັດສະຍະ) ໃນ «ມາກັນເດຍ-ສະມາສະຍາ-ປະຣະວັນ» ອັນຢູ່ໃນ «ວະນະປະຣະວະ» ຂອງມະຫາພາຣະຕະອັນສັກສິດ ໄດ້ສິ້ນສຸດລົງ. ຂໍ້ຄຳລົງທ້າຍນີ້ເປັນເຄື່ອງໝາຍວ່າ ຕອນເລົ່າ-ສອນນີ້ໄດ້ຈົບລົງ ແລະຖືກຈັດວາງໃນບໍລິບົດຂອງພາກປ່າໃຫຍ່.

Verse 188

इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि अष्टाशीत्यधिकशततमो<ध्याय:

ດັ່ງນັ້ນ ບົດທີ 188 ໃນ ວນະປະວະ (Vana Parva) ແຫ່ງ «ສີຣີ ມະຫາພາຣະຕະ» ພາຍໃນພາກທີ່ເອີ້ນວ່າ «ມາຣກັນເດຍ-ສະມາສະຍາ» (ບົດປະມວນຂອງມາຣກັນເດຍ) ກໍໄດ້ສິ້ນສຸດລົງແລ້ວ. ນີ້ແມ່ນຄໍາລົງທ້າຍ (colophon) ເພື່ອປິດບົດ ແລະຊີ້ບອກຕໍາແໜ່ງຂອງມັນໃນກອບເນື້ອເລື່ອງແລະຄໍາສອນດ້ານຈັນຍາຂອງປື້ມປ່າ ທີ່ຮວບຮວມຄໍາສອນແລະຕົວຢ່າງເພື່ອນໍາທາງການປະພຶດໃນຍາມທຸກຍາກ.

Verse 213

आदितो मनुजव्याप्र कृत्स्नस्य जगत: क्षये । ये अन्तर्यामी आत्मा होनेसे सबको जानते हैं, परंतु इन्हें वेद भी नहीं जानते। नृपशिरोमणे! नरश्रेष्ठ! सम्पूर्ण जगत्‌का प्रलय होनेके पश्चात्‌ इन आदिभूत परमेश्वरसे ही यह सम्पूर्ण आश्वर्यमय जगत्‌ पुनः उत्पन्न हो जाता है

ໂອ ຜູ້ກ້າຫານດັ່ງເສືອໃນມະນຸດ! ອາດມາ (Ātman) ຜູ້ເປັນອັນຕະຣະຍາມີ—ຜູ້ສະຖິດຢູ່ພາຍໃນທຸກສິ່ງ—ຮູ້ແຈ້ງທຸກຄົນ; ແຕ່ແມ່ນແຕ່ພຣະເວດາກໍບໍ່ອາດຮູ້ພຣະອົງໄດ້ທັງໝົດ. ໂອ ມຸກກະດາແຫ່ງກະສັດ! ໂອ ຜູ້ປະເສີດໃນມະນຸດ! ຫຼັງຈາກການພິນາດ (ປະລະຍະ) ຂອງຈັກກະວານທັງປວງ ໂລກອັນອັດສະຈັນນີ້ກໍເກີດຂຶ້ນໃໝ່ ຈາກພຣະເຈົ້າສູງສຸດຜູ້ເປັນອາດິພູດ ແຕ່ພຣະອົງດຽວ.

Verse 236

तस्य तावच्छती संध्या संध्यांशश्व॒ ततः: परम्‌ । तीन हजार दिव्य वर्षोका त्रेतायुग बताया जाता है, उसकी संध्या और संध्यांशके भी उतने ही (तीन-तीन) सौ दिव्य वर्ष होते हैं (इस तरह यह युग छत्तीस सौ दिव्य वर्षोंका होता है)

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຕຣີຕາຍຸກ (Tretā-yuga) ຖືກກ່າວວ່າຍາວ 3,000 ປີທິບ (divine years). ຊ່ວງອາລຸນ (sandhyā) ແລະ ຊ່ວງສົ່ງທ້າຍ (sandhyāṃśa) ຂອງມັນ ມີຂະໜາດເທົ່າກັນ—ຢ່າງລະ 300 ປີທິບ. ດັ່ງນັ້ນ ເມື່ອລວມກັບຊ່ວງຜ່ານທັງສອງ ຍຸກນັ້ນຈຶ່ງເປັນ 3,600 ປີທິບ.

Verse 246

तस्यापि द्विशती संध्या संध्यांशश्ष तथाविध: । द्वापरका मान दो हजार दिव्य वर्ष है तथा उतने ही सौ दिव्य वर्ष उसकी संध्या और संध्यांशके हैं (अत: सब मिलकर चौबीस सौ दिव्य वर्ष द्वापरके हैं)

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ສໍາລັບ ດວາປະຣະຍຸກ (Dvāpara-yuga) ນັ້ນດ້ວຍ ຊ່ວງອາລຸນ (sandhyā) ມີ 200 ປີທິບ ແລະ ຊ່ວງສົ່ງທ້າຍ (sandhyāṃśa) ກໍມີຂະໜາດເທົ່າກັນ. ດັ່ງນັ້ນ ດວາປະຣະຍຸກ ຖືກເຂົ້າໃຈວ່າຍາວ 2,000 ປີທິບ ແລະເພີ່ມ 200 ທີ່ຕົ້ນ ແລະ 200 ທີ່ທ້າຍ—ລວມເປັນ 2,400 ປີທິບ.

Verse 283

लोकानां मनुजव्याघ्र प्रलयं त॑ विदुर्बुधा: । नरश्रेष्ठ] एक हजार चतुर्युग बीतनेपर ब्रह्माजीका एक दिन होता है। यह सारा जगत्‌ ब्रह्माके दिनभर ही रहता है (और वह दिन समाप्त होते ही नष्ट हो जाता है।) इसीको विद्वान्‌ पुरुष लोकोंका प्रलय मानते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ໂອ ເສືອໃນມະນຸດ! ບັນດາບຸນດິດຮູ້ວ່າ ນັ້ນແຫຼະແມ່ນການພິນາດ (ປະລະຍະ) ຂອງໂລກທັງປວງ. ໂອ ຜູ້ປະເສີດໃນມະນຸດ! ເມື່ອຜ່ານໄປ 1,000 ຮອບຂອງສີ່ຍຸກ (ຈະຕຸຣຍຸກ) ຈຶ່ງເປັນວັນໜຶ່ງຂອງພຣະພຣະຫມາ (Brahmā). ຈັກກະວານນີ້ດໍາລົງຢູ່ແຕ່ພຽງຊ່ວງວັນຂອງພຣະພຣະຫມາ; ເມື່ອວັນນັ້ນສິ້ນສຸດ ມັນກໍຖືກທໍາລາຍ. ຜູ້ຮູ້ທັງຫຼາຍເອີ້ນນີ້ວ່າ ‘ປະລະຍະ’—ການພິນາດເປັນວົງຮອບຂອງໂລກທັງປວງ.”

Verse 316

क्षत्रधर्मेण वाप्यत्र वर्तयन्ति गते युगे । युगकी समाप्तिके समय ब्राह्मण शूद्रोंके कर्म करते हैं और शाद्र वैश्योंकी भाँति धनोपार्जन करने लगते हैं अथवा क्षत्रियोंके कर्मसे जीविका चलाने लगते हैं

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນທີ່ນີ້ ເມື່ອຍຸກໜຶ່ງຜ່ານໄປ ແລະຮອດວາລະສິ້ນສຸດຂອງຍຸກ ຜູ້ຄົນຈະເລີ່ມດຳລົງຊີວິດໂດຍຮັບເອົາໜ້າທີ່ຂອງກະສັດຕຣິຍະ—ເປັນໝາຍແຫ່ງການແຕກສະລາຍ ແລະການປົນປົວຂອງບົດບາດສັງຄົມ ແລະຈັນຍາທຳ (ວັນນະ-ທັມ) ທີ່ເຄີຍຄວບຄຸມການດຳລົງຊີວິດ ແລະຄວາມປະພຶດ.»

Verse 463

मिथ्या च नखरोमाणि धारयन्ति तदा द्विजा: । गृहस्थलोग करके भारसे डरकर लुटेरे बन जायाँगे। ब्राह्मण मुनियों-जैसी कपटपूर्ण आकृति धारण किये वैश्यवृत्तिसे जीविका चलायेंगे और झूठे दिखावेके लिये नख तथा दाढ़ी-मूछ धारण करेंगे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນຍຸກນັ້ນ ພວກທະວິຊະ (ຜູ້ເກີດສອງຄັ້ງ) ຈະຮັກສາເລັບ ແລະຜົມດ້ວຍຄວາມຫຼອກລວງ—ຮັກສາເຄື່ອງໝາຍພາຍນອກເພື່ອອວດອ້າງເທົ່ານັ້ນ. ເມື່ອຢ້ານກົວພາລະຂອງຊີວິດຄອບຄົວ ຜູ້ຄົນຈະກາຍເປັນຜູ້ປົ່ນປີ້; ສວມຮູບລັກຫນ້າຕາອັນຫຼອກລວງດັ່ງມຸນີ ແລະດຳລົງຊີວິດດ້ວຍວິຖີພໍ່ຄ້າ; ແລະເພື່ອການອວດອ້າງອັນບໍ່ຈິງ ພວກເຂົາຈະໄວ້ເລັບ ແລະໜວດ-ເຄรາ.»

Verse 1323

प्रयत्नेन मया मूर्ध्ना गृहीत्वा हभिवन्दितौ | तात! तदनन्तर मैंने कोमल और लाल रंगकी अँगुलियोंसे सुशोभित लाल-लाल तलवेवाले उस बालकके सुन्दर एवं सुप्रतिष्ठित चरणोंको प्रयत्नपूर्वक पकड़कर उन्हें अपने मस्तकसे प्रणाम किया

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ດ້ວຍຄວາມພາກພຽນ ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ຈັບພຣະບາດນັ້ນ ແລະກໍ່ກົ້ມກາບ. ຕໍ່ຈາກນັ້ນ ໂອ ຜູ້ເປັນທີ່ຮັກ, ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ກຳພຣະບາດອັນງາມ ແລະຕັ້ງຢູ່ຢ່າງດີຂອງເດັກນ້ອຍນັ້ນ—ປະດັບດ້ວຍນິ້ວອ່ອນອ່ອນສີແດງ ແລະຝາຕີນສີແດງສົ່ງປະກາຍ—ແລ້ວນຳວາງໄວ້ເທິງສະຫຼອງຂອງຂ້າພະເຈົ້າ ເພື່ອຖວາຍຄວາມນົບນ້ອມຢ່າງເຄົາລົບ.»

Frequently Asked Questions

Yudhiṣṭhira asks how to remain established in dharma while protecting subjects and acting in the world without deviating from svadharma; the response frames doubt itself as a risk to dharmic stability when it becomes excessive suspicion toward sound counsel.

Govern through compassion and protection as if subjects were one’s own children; correct missteps through appropriate giving; honor ancestors and deities; and maintain disciplined respect toward learned authorities, treating dharma as the ruler’s continuous inner alignment in thought, speech, and action.

Yes. The chapter explicitly frames the discourse as conveying past and future knowledge remembered from Vāyu-proclaimed tradition and r̥ṣi-praised purāṇic material, and it closes by noting the audience’s astonishment at the purāṇa-style exposition—signaling its didactic and archival intent.