
आदि पर्व, अध्याय 67 — गान्धर्वविवाह-समयः (Duḥṣanta–Śakuntalā: Gandharva Marriage and Succession Condition)
Upa-parva: Śakuntalopākhyāna (Episode of Śakuntalā and Duḥṣanta)
Chapter 67 records a structured negotiation between King Duḥṣanta and Śakuntalā. Duḥṣanta proposes immediate union, offering royal gifts and explicitly recommending gāndharva-vivāha as superior among marriage forms for their context. Śakuntalā initially requests deference to her father Kaṇva’s return, but Duḥṣanta argues from dharma and self-agency, introducing the doctrinal list of eight vivāhas and their varṇa-specific acceptability, while rejecting paiśāca and āsura as impermissible. Śakuntalā then sets a binding condition: Duḥṣanta must acknowledge that her future son will hold succession immediately after him. Duḥṣanta assents, takes her hand according to due form, and departs promising later escort to his city. Kaṇva returns and, through ascetic insight, confirms that the union is not a dharma-violation for a kṣatriya; he blesses the outcome and foretells the birth of a powerful son destined for universal sovereignty. Śakuntalā requests Kaṇva’s favor toward Duḥṣanta; Kaṇva grants a boon, and she prays for Duḥṣanta’s steadfast righteousness and stable kingship.
Chapter Arc: Janamejaya, eager to know the true origins of the great-souled men among humans, asks Vaishampayana to narrate—step by step—the births and deeds of those beings whose splendor seems more than mortal. → Vaishampayana begins the vast catalogue of aṁśāvataraṇa: devas, dānavas, gandharvas, and other celestial orders descending into earthly kingship. Name after name is laid like a genealogical thundercloud, hinting that these births are not random but arranged for a coming cosmic reckoning. → The roll-call swells to famous, fate-heavy figures—Jarāsandha and other formidable rulers—revealing that many ‘human’ monarchs are in truth embodiments of older powers, destined to collide in pride and war. → The narrator closes the enumeration by affirming its fruit: hearing this descent of portions (aṁśas) grants clarity about rise and fall, steadies the wise in distress, and frames worldly conflict as part of a larger design. → The listener is left poised for the next movement of the epic: how these incarnate powers will converge into alliances, rivalries, and the inevitable great war.
Verse 1
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ ३ श्लोक मिलाकर कुल ७६३ “लोक हैं) #फशलारल (0) अन्अान- > मनुस्मृतिमें प्रजापति दक्षको ही पुत्रिका-विधिका प्रवर्तक बताकर उसका लक्षण इस प्रकार दिया है-- अपुत्रो&नेन विधिना सुतां कुर्वीत पुत्रिकाम् । यदपत्यं भवेदस्यां तन््मम स्यात् स्वधाकरम् ।। (९।१२७) जिसके पुत्र न हों वह निम्नांकित विधिसे अपनी कन्याको पुत्रिका बना ले--यह संकल्प कर ले कि इस कन्याके गर्भसे जो बालक उत्पन्न हो, वह मेरा श्राद्धादि कर्म करनेवाला पुत्ररूप हो। > किसी-किसीके मतमें शाख, विशाख और नैगमेय--ये तीनों नाम कुमार कार्तिकेयके ही हैं। किन्हींके मतमें कुमार कार्तिकेयके पुत्रोंकी संज्ञा शाख, विशाख और नैगमेय है। कल्पभेदसे सभी ठीक हो सकते हैं। > खर्जूरं तालहिन्तालौ ताली खर्जूरिका तथा । गुणका नारिकेलश्न सप्त पिण्डफला द्रुमा: ।। (खजूर, ताल, हिन्ताल, ताली, छोटे खजूर, सोपारी और नारियल--ये सात पिण्डाकार फलवाले वृक्ष हैं।) सप्तषष्टितमो< ध्याय: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन जनमेजय उवाच देवानां दानवानां च गन्धर्वोरगरक्षसाम् । सिंहव्याप्रमृदगाणां च पन्नगानां पतत्त्रिणाम्
ジャナメージャヤは言った。「(お聞かせください)神々とダーナヴァ、ガンダルヴァ、蛇族とラークシャサについて。獅子や虎、その他の獣について。さらにナーガと鳥たちについて。」
Verse 2
सर्वेषां चैव भूतानां सम्भवं भगवन्नहम् । श्रोतुमिच्छामि तत्त्वेन मानुषेषु महात्मनाम् । जन्म कर्म च भूतानामेतेषामनुपूर्वश:
ジャナメージャヤは言った。「尊き御方よ、真実に即して、あらゆる存在の起源を—とりわけ人間の中の大いなる魂を—聞きたい。これらの者たちの出生と行いを、順序立てて語ってください。」
Verse 3
वैशम्पायन उवाच मानुषेषु मनुष्येन्द्र सम्भूता ये दिवौकस: । प्रथमं दानवांश्वैव तांस््ते वक्ष्यामि सर्वश:,वैशम्पायनजी बोले--नरेन्द्र! मनुष्योंमें जो देवता और दानव प्रकट हुए थे, उन सबके जन्मका ही पहले तुम्हें परिचय दे रहा हूँ। विप्रचित्ति नामसे विख्यात जो दानवोंका राजा था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ जरासन्ध नामसे विख्यात हुआ। राजन! हिरण्यकशिपु नामसे प्रसिद्ध जो दितिका पुत्र था, वही मनुष्यलोकमें नरश्रेष्ठ शिशुपालके रूपमें उत्पन्न हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「人の王よ、まずは人間の世に生まれ出た天界の者たちを、ダーナヴァから始めて、余すところなく語ろう。」
Verse 4
विप्रचित्तिरिति ख्यातो य आसीद् दानवर्षभ: । जरासन्ध इति ख्यात: स आसीन्मनुजर्षभ:,वैशम्पायनजी बोले--नरेन्द्र! मनुष्योंमें जो देवता और दानव प्रकट हुए थे, उन सबके जन्मका ही पहले तुम्हें परिचय दे रहा हूँ। विप्रचित्ति नामसे विख्यात जो दानवोंका राजा था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ जरासन्ध नामसे विख्यात हुआ। राजन! हिरण्यकशिपु नामसे प्रसिद्ध जो दितिका पुत्र था, वही मनुष्यलोकमें नरश्रेष्ठ शिशुपालके रूपमें उत्पन्न हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「王よ、まず人間の世に現れたデーヴァとダーナヴァの出生を知らせよう。ダーナヴァの中の雄牛、ヴィプラチッティ(Vipracitti)と名高き者は、人間界において卓越したジャラーサンダ(Jarāsandha)として生まれた。」
Verse 5
दिते: पुत्रस्तु यो राजन् हिरण्यकशिपु: स्मृतः । स जज्ञे मानुषे लोके शिशुपालो नरर्षभ:,वैशम्पायनजी बोले--नरेन्द्र! मनुष्योंमें जो देवता और दानव प्रकट हुए थे, उन सबके जन्मका ही पहले तुम्हें परिचय दे रहा हूँ। विप्रचित्ति नामसे विख्यात जो दानवोंका राजा था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ जरासन्ध नामसे विख्यात हुआ। राजन! हिरण्यकशिपु नामसे प्रसिद्ध जो दितिका पुत्र था, वही मनुष्यलोकमें नरश्रेष्ठ शिशुपालके रूपमें उत्पन्न हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「王よ、ディティの子としてヒラニヤカシプと記憶される者は、人間界に再び生まれてシシュパーラとなり、人々の中の雄牛であった。」
Verse 6
संह्ाद इति विख्यात: प्रह्मादस्यानुजस्तु यः । स शल्य इति विख्यातो जज्ञे बाह्लीकपुज्रव:,प्रहादका छोटा भाई जो संह्ादके नामसे विख्यात था, वही बाह्लीक देशका सुप्रसिद्ध राजा शल्य हुआ। प्रह्मदका ही दूसरा छोटा भाई जिसका नाम अनुह्ाद था, धृष्टकेतु नामक राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「プラフラーダの弟で、サンフラーダとして名高い者は、バーフリーカの中で最も卓越した統治者として名を馳せるシャリヤとして生まれた。」
Verse 7
अनुह्वादस्तु तेजस्वी यो5भूत् ख्यातो जघन्यज: । धृष्टकेतुरिति ख्यात: स बभूव नरेश्वर:,प्रहादका छोटा भाई जो संह्ादके नामसे विख्यात था, वही बाह्लीक देशका सुप्रसिद्ध राजा शल्य हुआ। प्रह्मदका ही दूसरा छोटा भाई जिसका नाम अनुह्ाद था, धृष्टकेतु नामक राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「その中でアヌフヴァーダは武威に輝き、末弟でありながら名声を得た。彼はドゥリシュタケートゥと称えられ、人々の王となった。」
Verse 8
यस्तु राजज्छिबिरनाम दैतेय:ः परिकीर्तित: । द्रुम इत्यभिविख्यात: स आसीदू भुवि पार्थिव:,राजन्! जो शिबि नामका दैत्य कहा गया है, वही इस पृथ्वीपर ट्रुम नामसे विख्यात राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「王よ、シビの名で称えられるそのダイティヤこそ、この地上でドルマと名高い王となった。」
Verse 9
बाष्कलो नाम यस्तेषामासीदसुरसत्तम: । भगदत्त इति ख्यात: स जज्ञे पुरुषर्षभ:,असुरोंमें श्रेष्ठ जो बाष्कल था, वही नरश्रेष्ठ भगदत्तके नामसे उत्पन्न हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「それらの中にバーシュカラという者がいた。彼はアスラの最上であり、この世にバガダッタとして生まれ、人々の中の雄牛であった。」
Verse 10
अयःशिरा अश्वशिरा अय:शड्कुश्च वीर्यवान् तथा गगनमूर्धा च वेगवांश्षात्र पजचम:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「アヤḥシラス、アシュヴァシラス、剛力のアヤḥシャンク、さらにガガナムールダーと俊速のヴェーガヴァーン——王よ——この五柱の強大なる大ダーナヴァは、ケーカヤの国に生まれ、諸王のうちでも筆頭の、高き魂を備えた統治者として現れたのである。」
Verse 11
पज्चैते जज्ञिरे राजन् वीर्यवन्तो महासुरा: । केकयेषु महात्मान: पार्थिवर्षभसत्तमा: | केतुमानिति विख्यातो यस्ततो<न्य: प्रतापवान्,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「王よ、この五柱の大アスラは、ケーカヤの中に生まれ、偉大なる魂を備えた統治者として現れた——諸王の中の雄牛である。彼らとは別に、ケートゥマーンと名高いもう一人の強者があり、勇猛なる者であった。(また名として)アヤḥシラス、アシュヴァシラス、剛強のアヤḥシャンク、そして武威に迅いガガナムールダンが挙げられる。」
Verse 12
जनमेजयने कहा--भगवन्! मैं मनुष्य-योनिमें अंशतः उत्पन्न हुए देवता, दानव, गन्धर्व, नाग, राक्षस, सिंह, व्याप्र, हरिण, सर्प, पक्षी एवं सम्पूर्ण भूतोंके जन्मका वृत्तान्त यथार्थरूपसे सुनना चाहता हूँ। मनुष्योंमें जो महात्मा पुरुष हैं, उनके तथा इन सभी प्राणियोंके जन्म-कर्मका क्रमश: वर्णन सुनना चाहता हूँ,अमितौजा इति ख्यात: सोग्रकर्मा नराधिप: । स्वर्भानुरिति विख्यात: श्रीमान् यस्तु महासुर: अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ジャナメージャヤは言った。「尊き御方よ、私は、人の胎に部分として生まれ出た神々、ダーナヴァ、ガンダルヴァ、ナーガ、ラークシャサ、また獅子・虎・鹿・蛇・鳥——まことに一切の生きもの——その出生の次第を、真実のまま順序立てて聞きたい。さらに、人間のうちの大いなる魂をもつ者たち、そしてこれらすべての生類の出生と行い(ジャナマ・カルマ)を、段を追って聞きたいのだ。」
Verse 13
उग्रसेन इति ख्यात उग्रकर्मा नराधिप: । यस्त्वश्व इति विख्यात: श्रीमानासीन्महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「人の世にはウグラセーナと名高い王がいた。苛烈なる業をなす支配者である。また、かつて『アシュヴァ』として知られた光輝ある大アスラも、この人間界に生まれ出た(王の姿を取って現れた)のである。」
Verse 14
अशोको नाम राजाभूनन््महावीर्योडपराजित: । तस्मादवरजो यस्तु राजन्नश्वपति: स्मृत:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「アショーカという王がいた。大いなる武勇を備え、いまだ敗れぬ者であった。そして王よ、その弟はアシュヴァパティと呼ばれていた。」
Verse 15
दैतेय: सो5भवद् राजा हार्दिक्यो मनुजर्षभ: । वृषपर्वेति विख्यात: श्रीमान् यस्तु महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「そのダイティヤは人間界に生まれてハールディキヤ王となり、人々の中の雄牛のごとき者であった。また、ヴリシャパルヴァン(Vṛṣaparvan)として名高い光輝ある大アスラも、人の世において同じ名で知られるようになった。」かくして、力あるアスラとダイティヤの幾柱かは地上の王として生を受け、のちの争乱が展開する政治と道義の地平を形づくったのである。
Verse 16
दीर्घप्रज्ञ इति ख्यात: पृथिव्यां सोडभवन्नूप: । अजक स्त्ववरो राजन् य आसीद् वृषपर्वण:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「地上において彼はディールガプラジュニャ(Dīrghaprajña)と呼ばれる王となった。さらに、王よ、ヴリシャパルヴァンの弟であったアジャカ(Ajaka)は、この世にアヌーパ(Anūpa)と称される統治者として生まれた。」かくして語り手は、強大なダイティヤとアスラが人間の王統へと転生してゆくさまを次々に示し、恐るべき、しかも倫理的に曖昧な力が王権として再来し、その行いが後の争乱を形づくることを暗に告げるのである。
Verse 17
स शाल्व इति विख्यात: पृथिव्यामभवन्नूप: । अश्वग्रीव इति ख्यातः सत्त्ववान् यो महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「王よ、アスラの間でアシュヴァグリーヴァ(Aśvagrīva)と名高く、力と気概に満ちたその強者は、地上に人として生まれ、シャールヴァ(Śālva)と称される王となった。」
Verse 18
रोचमान इति ख्यात:ः पृथिव्यां सो5भवन्नूष: । सूक्ष्मस्तु मतिमान् राजन् कीर्तिमान् यः प्रकीर्तित:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「その強者は地上においてローチャマーナ(Rocamāna)と名高い王となった。また、王よ、聡明にして名声高いと称えられるスークシュマ(Sūkṣma)というダイティヤも、この世に人の王として生まれた。」この段では、系譜に潜む倫理的警告がさらに示される。苛烈で恐るべき業に駆られた力は、人間界に王として再来し得る。ゆえに世俗の王権は、古く非人の衝動を覆い隠すことがある。だからこそ、君主とその行いを裁くには、明察(mati)と自制が肝要なのである。
Verse 19
बृहद्रथ इति ख्यात: क्षितावासीत् स पार्थिव: । तुहुण्ड इति विख्यातो य आसीदसुरोत्तम:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「地上にはブリハドラタ(Bṛhadratha)と名高い王があり、またトゥフンダ(Tuhuṇḍa)と称される卓越したアスラもいた。」この箇所(ギーター・プレス版の提示によれば)では、語りはさらに多くの強大なアスラとダーナヴァを、各地に生まれ出た人間の王たちの後身として結びつけてゆく。そこに潜む倫理の要点はこうである。世俗の王権と武勇は、さまざまな、時に魔族にさえ連なる系譜から生じ得る。だが王として身を受けた以上、彼らは人間界のダルマ、責務、そして報いの場に入る。ゆえにこの段は、政治史をより大いなる宇宙的輪廻の一環として枠づける—力はそれ自体で徳ではなく、統治者は出自のいかんを問わず、その行いに責任を負うのである。
Verse 20
सेनाबिन्दुरिति ख्यात: स बभूव नराधिप: । इषुपान्नाम यस्तेषामसुराणां बलाधिक:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「その中でセーナービンドゥと名高い者は、人間界に王として生まれた。また、アスラのうち力において最も勝れていたイシュパードという名のアスラは、この地上で剛勇の君主として名を馳せた。」
Verse 21
नग्नजिन्नाम राजासीद् भुवि विख्यातविक्रम: । एकचक्र इति ख्यात आसीद्ू यस्तु महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「地上にはナグナジトという王がいて、その武勇で名高かった。また、エーカチャクラと呼ばれた大アスラもここ(人間界)に生まれ、まさにその名のままに称えられる王となった。この段では、並外れた力をもつ王たちがアスラの化身・顕現として語られ、ダルマに統べられぬ強大な力は、世に恐怖と乱れをもたらし得ることが示唆されている。」
Verse 22
प्रतिविन्ध्य इति ख्यातो बभूव प्रथित: क्षितौ । विरूपाक्षस्तु दैतेयश्चित्रयोधी महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「地上にはプラティヴィンドゥヤと名高い王が現れ、その名声は広く行き渡った。また、ヴィルーパークシャという名のダイティヤ—奇怪多様な戦いぶりで知られる大アスラ—はここに生まれ、チトラダルマーと呼ばれる統治者となった。このように、アスラやダイティヤの一族が人間界に王として生まれると説かれ、隠れた非人の気質が世俗の権力と王国の道徳的気配をいかに形づくるかが暗示される。」
Verse 23
चित्रधर्मेति विख्यात: क्षितावासीत् स पार्थिव: । हरस्त्वरिहरो वीर आसीद्ू यो दानवोत्तम:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「地上にはチトラダルマと名高い王がいた。そして、敵を滅ぼす者として名高い勇猛なるダーナヴァの主ハラも、ここに(化身して)その王として生まれた。この一節は、人の王権をより大きな道徳宇宙の中に据える。すなわち、恐るべき非人の力が人間界に生を受け、その力が敵意へと向かうとき、争いの因となり、ダルマを試すものとなるのである。」
Verse 24
सुबाहुरिति विख्यात: श्रीमानासीत् स पार्थिव: । अहरस्तु महातेजा: शत्रुपक्षक्षयंकर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「スバーフと名高い、富み栄える王がいた。また、アハラという者もいて、偉大な光輝を帯び、敵軍を滅ぼす者であった。(本章のより広い叙述では、こうした者たちはかつてダイティヤ/アスラの群に属した強大な存在が人間の王として生まれたものとされ、君主に宿る強大な力は国を護る盾とも、敵にとっての恐怖ともなり得ることが示される。)」
Verse 25
बाह्लीको नाम राजा स बभूव प्रथित: क्षितौ । निचन्द्रश्नन्द्रवक््त्रस्तु य आसीदसुरोत्तम:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「地上にはバーフリーカという王が現れ、諸王の中に名声を轟かせた。またニチャンドラ—月のごとく麗しい面貌に輝く、すぐれたアスラ—も同様に(人の世に)生まれた。」このように物語は、恐るべきアスラの力が人間界で王として生を受けるさまを辿り、権勢と名望が暗い衝動を覆い隠しうること、ゆえに統治者は華やかさではなく行いによって見極めるべきであり、そのためにダルマの智慧が要ることを示している。
Verse 26
मुञ्जकेश इति ख्यात: श्रीमानासीत् स पार्थिव: । निकुम्भस्त्वजित: संख्ये महामतिरजायत,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「繁栄ある王が生まれ、ムンジャケーシャの名で知られるようになった。またニクンバ—大いなる知恵を備え、戦において不敗の者—も同様に生まれた。」この『アーディ・パルヴァ』の段では、語り手は系譜と倫理の枠組みをさらに進め、敵対する系統(アスラ/ダーナヴァ)の強大な存在が人間の王として生を受けることを述べる。そこには、隠れた気質と古の怨讐が、世の政治と戦争に再び姿を現すという予兆が込められている。
Verse 27
भूमौ भूमिपति: क्षेष्ठो देवाधिप इति स्मृतः । शरभो नाम यस्तेषां दैतेयानां महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「地上において、王たちの中の最上者は『デーヴァーディパ』(Devādhipa、諸天の主)という称号で記憶される。そのダイティヤの中に、シャラバ(Śarabha)という大アスラがいた。」 ここで物語は、地上の王権を、先なる宇宙的系譜の顕現として位置づける。すなわちダイティヤ—アスラの強大な存在が、人間界に名高い王として生まれるというのである。含意する倫理は、世の権力の興亡は偶然ではなく、本性(svabhāva)と過去の業に結びつくということ。ゆえに王は自らを戒めねばならぬ。ダルマによって抑えられぬなら、偉大さは破壊の衝動という影を伴い得るからである。
Verse 28
पौरवो नाम राजर्षि: स बभूव नरोत्तम: । कुपटस्तु महावीर्य: श्रीमान् राजन् महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「人々の中に、パウラヴァという名のすぐれた王仙が現れた。また、強大な威力と栄光を備えた大アスラ、クパタも、王よ、この地上に力ある統治者として生まれた。」
Verse 29
सुपार्श्व इति विख्यात: क्षितौ जज्ञे महीपति: । क्रथस्तु राजन् राजर्षि: क्षितौ जज्ञे महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。地上にスパールシュヴァの名で知られる王が生まれた。また王よ、大アスラのクラタも地上に生まれ、王仙(rājarṣi)となった。
Verse 30
पार्वतेय इति ख्यात: काउज्चनाचलसंनिभ: । द्वितीय: शलभस्तेषामसुराणां बभूव ह,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「強大なるダーナヴァ、クラタ(Kratha)は人間界に生まれ、パールヴァテーヤ(Pārvateya)として知られるようになった。その身は黄金の山のごとく広大であった。また彼らアスラのうち第二の者、シャラバ(Śalabha)も同じく(人の世に)生を受けた。」この化生の目録において叙事詩は道徳的な警めを示す。すなわち、破壊の力が人の姿を取るとき、それはしばしば名高き王として現れ、その栄光は、のちにダルマの均衡を乱す危険で不義の衝動を覆い隠しうるのである。
Verse 31
प्रह्दो नाम बाह्लीक: स बभूव नराधिप: । चन्द्रस्तु दितिजश्रेष्ठो लोके ताराधिपोपम:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「プラフダ(Prahda)という王が、バーフリーカ(Bāhlīka)の系統に生まれた。また、ディティの子なるダイティヤのうち最上の者チャンドラ(Candra)は、世において星々の主(すなわち月)のごとく輝き、やはり王として生を受けた。」
Verse 32
चन्द्रवर्मेति विख्यात: काम्बोजानां नराधिप: । अर्क इत्यभिविख्यातो यस्तु दानवपुड्रव:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「カーンボージャ(Kāmboja)のうちに、チャンドラヴァルマン(Candravarman)と名高い王が現れた。また、ダーナヴァの中で最上と称えられるアルカ(Arka)は、この地において人々の間の卓越した王仙(ラージャルシ)として生を受けた。」
Verse 33
ऋषिको नाम राजर्षिबभूव नृपसत्तम: । मृतपा इति विख्यातो य आसीदसुरोत्तम:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「王の中の最上よ、リシカ(Ṛṣika)という王仙が現れた。また、アスラのうち最上で、ムリタパー(Mṛtapā)と名高い者も、人の世において広く知られるようになった。」
Verse 34
पश्चिमानूपकं विद्धि तं नूपं नृपसत्तम | गविष्ठस्तु महातेजा य: प्रख्यातो महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「王の中の最上よ、ムリタパー(Mṛtapā)は西方アヌーパ(Anūpa)の国主となったことを知れ。また、大いなる光威を備え、巨悪の中に名高いアスラ、ガヴィシュタ(Gaviṣṭha)は、地上においてドルマセーナ(Drumasena)王として生まれた。」
Verse 35
ट्रुमसेन इति ख्यातः पृथिव्यां सो5भवन्नूष: । मयूर इति विख्यात: श्रीमान् यस्तु महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「王よ、阿修羅の間でドゥルマセーナと名高かった者は、地上において人の王として生まれた。また、マユ―ラと呼ばれる光輝ある大阿修羅も同じくここに生を受けた。王よ、アヤḥシラー、アシュヴァシラー、勇猛なるアヤḥシャングク、ガガナムールダー、そして疾き者——この五柱の強大なダイティヤは、ケカヤ国において第一の高徳なる王たちとして出生したのである。かくして物語は、強大な非人の存在が人王の系譜に入り込み、のちに大戦へともつれる政治の世を形づくったことを示し、さらに内なる性向(神性/阿修羅性、daiva/āsurī)が権勢と王位を通じて顕れるという倫理的警めをも含んでいる。」
Verse 36
स विश्व इति विख्यातो बभूव पृथिवीपति: । सुपर्ण इति विख्यातस्तस्मादवरजस्तु य:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「その者はヴィシュヴァの名で知られる地上の主となった。そしてその弟で、スパルナと称えられる者が、彼から生まれた。」
Verse 37
कालकीर्तिरिति ख्यात: पृथिव्यां सो5भवन्नूप: । चन्द्रहन्तेति यस्तेषां कीर्तित: प्रवरोडसुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「王よ、彼らのうち一人は地上でカーラキールティの名で知られるようになった。また、阿修羅の中でも第一と称えられ、チャンドラハンター(『月を屠る者』)と呼ばれた者も、人の世に生を受けた。」
Verse 38
शुनको नाम राजर्षि: स बभूव नराधिप: । विनाशनस्तु चन्द्रस्य य आख्यातो महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「シュナカという名の王仙は、人の世に王として生まれた。また、『月を滅ぼす者』として知られたその強大な阿修羅も、同じく人界に(王の姿で)生を受けた。」
Verse 39
जानकिरननम विख्यात: सो5भवन्मनुजाधिप: । दीर्घजिद्वस्तु कौरव्य य उक्तो दानवर्षभ:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「ジャーナキーと名高い者は、人の世で王となった。さらに、カウラヴァよ、ディールガジフヴァと呼ばれた強大なダーナヴァは、人間の王となり、カーシー王として知られた。同様に、多くの強力なダーナヴァや阿修羅が地上に生まれ、名高い支配者の姿を取った——とりわけケカヤや他国において——それぞれ人の名を帯びながら、なお凶烈な気質と恐るべき威力を宿していた。物語はこれらの同定を一人ずつ列挙する。ウグラセーナ、アショーカ、ハールディキヤ、ディールガプラジュニャ、シャールヴァ、ローチャマーナ、ブリハドラタ、セーナービンドゥ、ナグナジト、プラティヴィンドゥヤ、チトラダルマー、スバーフ、バーフリカ、ムンジャケーシャ、デーヴァーディパ、パウラヴァ、スパールシュヴァ、パールヴァティーヤ、プラフマダ、チャンドラヴァルマー、リシカ等々である。この段の倫理的な力は、来たる争いが単なる政争ではないことを示す点にある。破壊的で不義なる傾向(阿修羅的性向)が王たちのうちに受生し、アダルマと戦乱の広がりを準備する。そして、権勢と王位は徳を保証しないという警めでもある。」
Verse 40
काशिराज: स विख्यात: पृथिव्यां पृथिवीपते । ग्रहं तु सुषुवे यं तु सिंहिकार्केन्दुमर्दनम् । स क्राथ इति विख्यातो बभूव मनुजाधिप:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「大地の主よ、カーシーの王は世に名高かった。そしてシンヒカーが産んだグラハ(天体)—太陽と月を襲うラーフ—は、この人間界において『クラートハ(Krātha)』の名で知られる統治者として生まれたのである。この段は、宇宙的で攪乱的な力すら人の姿を取ることを示し、王たちに告げる。名声と権勢は恐るべき起源からも生じうるゆえ、節制をもって治めねばならぬ、と。」
Verse 41
दनायुषस्तु पुत्राणां चतुर्णा प्रवरो5सुर: । विक्षरो नाम तेजस्वी वसुमित्रो नृप: स्मृत:,दनायुके चार पुत्रोंमें जो सबसे बड़ा है, वह विक्षर नामक तेजस्वी असुर यहाँ राजा वसुमित्र बताया गया है
ヴァイシャンパーヤナは言った。「ダナーユの四人の子のうち、最も優れた者は、光輝あるアスラ、ヴィクシャラ(Vikṣara)であった。この物語では、彼は王ヴァスミトラ(Vasumitra)として記憶されている。」
Verse 42
द्वितीयो विक्षराद् यस्तु नराधिप महासुर: । पाण्ड्यराष्ट्राधिप इति विख्यात: सो5भवन्नूप:,नराधिप! विक्षरसे छोटा उसका दूसरा भाई बल, जो असुरोंका राजा था, पाण्ड्य देशका सुविख्यात राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「第二の兄弟は、ヴィクシャラに次ぐ者で—大いなる力を備え、また人々の間で統べる者でもあったアスラ—パーンディヤ(Pāṇḍya)国の主として名を成した。ゆえに、王よ、彼は地上において称えられる統治者となった。」
Verse 43
बली वीर इति ख्यातो यस्त्वासीदसुरोत्तम: । पौण्ड्रमात्स्यक इत्येवं बभूव स नराधिप:,महाबली वीर नामसे विख्यात जो श्रेष्ठ असुर (विक्षरका तीसरा भाई) था, पौण्ड्रमात्स्यक नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「アスラの中でも最上と称えられ、『バリー・ヴィーラ(Balī Vīra)』の名で知られた者は、のちに人間の王となり、世に『パウンḍラマーッスヤカ(Pauṇḍramātsyaka)』として知られた。」
Verse 44
वृत्र इत्यभिविख्यातो यस्तु राजन् महासुर: । मणिमाजन्नाम राजर्षि: स बभूव नराधिप:,राजन! जो वृत्र नामसे विख्यात (और विक्षरका चौथा भाई) महान् असुर था, वही पृथ्वीपर राजर्षि मणिमानके नामसे प्रसिद्ध भूपाल हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「王よ、『ヴリトラ(Vṛtra)』の名で名高いその強大なアスラは、のちに地上で人間の統治者となり、『マニマーン(Maṇimān)』という王仙として称えられた。」
Verse 45
क्रोधहन्तेति यस्तस्य बभूवावरजो5सुर: । दण्ड इत्यभिविख्यात: स आसीन्नूपति: क्षितौ,क्रोधहन्ता नामक असुर जो उसका छोटा भाई (कालाके पुत्रोंमें तीसरा) था, वह इस पृथ्वीपर दण्ड नामसे विख्यात नरेश हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。彼の弟であるアスラは、クローダハンター(「憤怒を滅する者」)と呼ばれ、地上に王として現れ、ダンダ(「刑罰/規律」)の名で広く名高くなった。
Verse 46
क्रोधवर्धन इत्येवं यस्त्वन्य: परिकीर्तित: । दण्डधार इति ख्यात: सो5भवन्मनुजर्षभ:,क्रोधवर्धन नामक जो दूसरा दैत्य कहा गया है, वह मनुष्योंमें श्रेष्ठ दण्डधार नामसे विख्यात हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。もう一人、クローダヴァルダナ(「憤怒を増す者」)と称された者は、人々の間でダンダダーラ(「杖を執る者」)として名高くなり、人中の雄牛であった。
Verse 47
कालेयानां तु ये पुत्रास्तेषामष्टी नराधिपा: । जज्ञिरे राजशार्दूल शार्टूलसमविक्रमा:,नृपश्रेष्ठत कालेय नामक दैत्योंके जो पुत्र थे, उनमेंसे आठ इस पृथ्वीपर सिंहके समान पराक्रमी राजा हुए
ヴァイシャンパーヤナは語った。カーリヤ族の子らのうち、八十人が地上に王として生まれた――おお、王たちの中の虎よ――その武勇は虎に等しかった。
Verse 48
मगधेषु जयत्सेनस्तेषामासीत् स पार्थिव: । अष्टानां प्रवरस्तेषां कालेयानां महासुरः,उन आठों कालेयोंमें श्रेष्ठ जो महान् असुर था, वही मगध देशमें जयत्सेन नामक राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。マガダ国にはジャヤツェーナという王が現れた。彼こそ、八人のカーリヤの中で最も卓越した、あの強大なるアスラであり、やがてマガダの地を治めたのである。
Verse 49
द्वितीयस्तु ततस्तेषां श्रीमान् हरिहयोपमः । अपराजित इत्येवं स बभूव नराधिप:,उन कालेयोंमेंसे जो दूसरा इन्द्रके समान श्रीसम्पन्न था, वही अपराजित नामक राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。そのうち第二の者は、繁栄の光に輝き、インドラの駿馬にも比せられて、アパラージタ(「不敗の者」)と名づけられた王となった。
Verse 50
तृतीयस्तु महातेजा महामायो महासुर: । निषादाधिपतिर्जज्ञे भुवि भीमपराक्रम:,तीसरा जो महान् तेजस्वी और महामायावी महादैत्य था, वह इस पृथ्वीपर भयंकर पराक्रमी निषादनरेशके रूपमें उत्पन्न हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「第三の者は大いなる光輝を放ち、広大な幻力(マーヤー)を備えた強大なアスラであった。彼は地上に生まれてニシャーダ族(Niṣāda)の主となり、恐るべき武勇をもつ王として現れた。」
Verse 51
तेषामन्यतमो यस्तु चतुर्थ: परिकीर्तित: । श्रेणिमानिति विख्यात: क्षितौ राजर्षिसत्तम:,कालेयोंमेंसे ही एक जो चौथा बताया गया है, वह इस भूमण्डलमें राजर्षिप्रवर श्रेणिमान्के नामसे विख्यात हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「彼ら(カーリヤ Kāleya)のうち、第四と数えられる者がいた。彼は地上でシュレーニマーン(Śreṇimān)と名高く、王仙(ラージャリシ rājaṛṣi)の中でも最勝と称えられた。」
Verse 52
पजञ्चमस्त्वभवत् तेषां प्रवरो यो महासुर: । महौजा इति विख्यातो बभूवेह परंतप:,कालेयोंमें जो पाँचवाँ श्रेष्ठ महादैत्य था, वही इस लोकमें शत्रुतापन महौजाके नामसे विख्यात हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「彼らのうち第五の者は、偉大なるアスラの中でも最も卓れた存在であった。彼はこの世でマハウジャー(Mahaujā)と名高く、敵を灼き尽くす者であった。」
Verse 53
षष्ठस्तु मतिमान् यो वै तेषामासीन्महासुर: । अभीरुरिति विख्यात: क्षितौ राजर्षिसत्तम:,उन कालेयोंमें जो छठा महान् असुर था, वह भूमण्डलमें राजर्षिशिरोमणि अभीरुके नामसे प्रसिद्ध हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「彼ら(カーリヤ Kāleya)のうち第六の者は、聡明なる大アスラであった。地上ではアビー ル(Abhīru)という名で知られ、卓越した王仙(ラージャリシ rājaṛṣi)として称えられた。」
Verse 54
समुद्रसेनस्तु नृपस्तेषामेवाभवद् गणात् । विश्रुत: सागरान्तायां क्षितौ धर्मार्थतत्त्ववित्,उन्हींमेंसे सातवाँ असुर राजा समुद्रसेन हुआ, जो समुद्रपर्यन्त पृथ्वीपर सब ओर विख्यात और धर्म एवं अर्थतत्त्वका ज्ञाता था
ヴァイシャンパーヤナは語った。「同じ一族の中からサムドラセーナ(Samudrasena)という王が現れた。彼は海の果てに至るまで大地に名を轟かせ、ダルマとアルタ(dharma, artha)—正しき道と統治の要—の真髄を知る者であった。」
Verse 55
बृहन्नामाष्टमस्तेषां कालेयानां नराधिप । बभूव राजा धर्मात्मा सर्वभूतहिते रत:,राजन! कालेयोंमें जो आठवाँ था, वह बृहत् नामसे प्रसिद्ध सर्वभूतहितकारी धर्मात्मा राजा हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「おお人の主よ、かのカーリヤ族のうち第八の者は、ブリハト(Bṛhat)という名で名高かった。彼は法(ダルマ)にかなう心を備え、あらゆる生きとし生けるものの安寧に身を捧げる王となった。」
Verse 56
कुक्षिस्तु राजन् विख्यातो दानवानां महाबल: । पार्वतीय इति ख्यात: काउज्चनाचलसंनिभ:,महाराज! दानवोंमें कुक्षि नामसे प्रसिद्ध जो महाबली राजा था, वह पार्वतीय नामक राजा हुआ; जो मेरुगिरिके समान तेजस्वी एवं विशाल था
ヴァイシャンパーヤナは言った。「おお王よ、ダーナヴァの中に、ククシ(Kukṣi)という名で知られる、名高く並外れて強大な支配者がいた。のちに彼はパールヴァティーヤ(Pārvatīya)と称され、黄金の山のごとく高くそびえ、光り輝いた。」
Verse 57
क्रथनश्न महावीर्य: श्रीमान् राजा महासुर: । सूर्याक्ष इति विख्यात: क्षितौ जज्ञे महीपति:,महापराक्रमी क्रथन नामक जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वह भूमण्डलमें पृथ्वीपति राजा सूर्याक्ष नामसे उत्पन्न हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「勇力に満ち、栄光ある王—大アスラたるクラタナシュナ(Krathanaśna)—は地上に生まれ、国土の主となって、スーリヤークシャ(Sūryākṣa)の名で知られた。」
Verse 58
असुराणां तु यः सूर्य: श्रीमांश्नैव महासुर: । दरदो नाम बाह्लीको वर: सर्वमहीक्षिताम्,असुरोंमें जो सूर्य नामक श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही पृथ्वीपर सब राजाओंमें श्रेष्ठ दरद नामक बाह्लीकराज हुआ
ヴァイシャンパーヤナは言った。「アスラの中に、スーリヤ(Sūrya)という名の、光輝と威光に満ちた大アスラがいた。その者こそ地上に生まれて、バーフリーカ(Bāhlīka)の王ダラダ(Darada)となり、諸王の中の第一と称えられた。」
Verse 59
गण: क्रोधवशो नाम यस्ते राजन् प्रकीर्तित: । तत: संजज्षिरे वीरा: क्षिताविह नराधिपा:,राजन! क्रोधवश नामक जिन असुरगणोंका तुम्हें परिचय दिया है, उन्हींमेंसे कुछ लोग इस पृथ्वीपर निम्नांकित वीर राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए
ヴァイシャンパーヤナは言った。「おお王よ、すでに汝に語っておいた『クローダヴァシャ』(Krodhavaśa)と呼ばれる一群から、この地上において、幾人かは人々の勇猛なる王として生まれ出た。」
Verse 60
मद्रक: कण्विष्टश्ष॒ सिद्धार्थ: कीटकस्तथा । सुवीरश्न सुबाहुश्च महावीरो5थ बाह्विक:,मद्रक, क्णवेष्ट, सिद्धार्थ, कीटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लिक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्रीमान् नील नरेश, चीरवासा, भूमिपाल, दन्तवक्त्र, दानव दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ, वायुवेग, भूरितेजा, एकलव्य, सुमित्र, वाटधान, गोमुख, करूषदेशके अनेक राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेम, उग्रतीर्थ, कलिंग-नरेश कुहर तथा परम बुद्धिमान् मनुष्योंका राजा ईश्वर
ヴァイシャンパーヤナは語った。「そこにはまた、マドラカ、カンヴィシュタ、シッダールタ、キータカの諸王がおり、さらにスヴィーラとスバーフもいた。ついで、剛勇の英雄バーフリカもまた名を連ねていた。」
Verse 61
क्रथो विचित्र: सुरथ: श्रीमान् नीलश्न भूमिप: । चीरवासाश्न कौरव्य भूमिपालश्न नामत:,मद्रक, क्णवेष्ट, सिद्धार्थ, कीटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लिक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्रीमान् नील नरेश, चीरवासा, भूमिपाल, दन्तवक्त्र, दानव दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ, वायुवेग, भूरितेजा, एकलव्य, सुमित्र, वाटधान, गोमुख, करूषदेशके अनेक राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेम, उग्रतीर्थ, कलिंग-नरेश कुहर तथा परम बुद्धिमान् मनुष्योंका राजा ईश्वर
ヴァイシャンパーヤナは語った。「おおクル族の裔よ、名を挙げれば、クラタ、ヴィチトラ、スラタ、栄光あるニーラ、チーラヴァーサー、ブーミパーラがいた。さらにマドラカ、クリナヴェーシュタ、シッダールタ、キータカ、スヴィーラ、スバーフ、マハーヴィーラ、バーフリカ。ダンタヴァクトラ、そして征し難きダーナヴァ、ドゥルジャヤ。諸王の虎ルクミー、ジャナメージャヤ王。アーシャーダ、ヴァーユヴェーガ、ブーリテージャー。エーカラヴィヤ、スミトラ、ヴァータダーナ、ゴームカ。さらにカルーシャ国の多くの君主、クシェーマドゥールティ、シュルターユ、ウドヴァハ、ブリハトセーナ、クシェーマ、ウグラティールタ。カリンガ国王クハラ、そして人間の王のうち至高の叡智を備えたイーシュヴァラもいた。」
Verse 62
दन्तवक्त्रश्न नामासीद् दुर्जयश्वैव दानव: । रुक्मी च नृपशार्दूलो राजा च जनमेजय:,मद्रक, क्णवेष्ट, सिद्धार्थ, कीटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लिक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्रीमान् नील नरेश, चीरवासा, भूमिपाल, दन्तवक्त्र, दानव दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ, वायुवेग, भूरितेजा, एकलव्य, सुमित्र, वाटधान, गोमुख, करूषदेशके अनेक राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेम, उग्रतीर्थ, कलिंग-नरेश कुहर तथा परम बुद्धिमान् मनुष्योंका राजा ईश्वर
ヴァイシャンパーヤナは語った。「ダーナヴァにダンタヴァクトラという者があり、また別のダーナヴァにドゥルジャヤという者もいた。諸王の虎ルクミーがあり、ジャナメージャヤ王もまたそこにいた。」
Verse 63
आषाढो वायुवेगश्च भूरितेजास्तथैव च । एकलव्य: सुमित्रश्न वाटधानो5थ गोमुख:,मद्रक, क्णवेष्ट, सिद्धार्थ, कीटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लिक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्रीमान् नील नरेश, चीरवासा, भूमिपाल, दन्तवक्त्र, दानव दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ, वायुवेग, भूरितेजा, एकलव्य, सुमित्र, वाटधान, गोमुख, करूषदेशके अनेक राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेम, उग्रतीर्थ, कलिंग-नरेश कुहर तथा परम बुद्धिमान् मनुष्योंका राजा ईश्वर
ヴァイシャンパーヤナは語った。「そこに集った多くの王の中には、アーシャーダ、ヴァーユヴェーガ、ブーリテージャスがあり、またエーカラヴィヤ、スミトラ、ヴァータダーナ、ゴームカもいた。」
Verse 64
कारूषकाश्न राजान: क्षेमधूर्तिस्तथैव च । श्रुतायुरुद्वहश्चैव बृहत्सेनस्तथैव च,मद्रक, क्णवेष्ट, सिद्धार्थ, कीटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लिक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्रीमान् नील नरेश, चीरवासा, भूमिपाल, दन्तवक्त्र, दानव दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ, वायुवेग, भूरितेजा, एकलव्य, सुमित्र, वाटधान, गोमुख, करूषदेशके अनेक राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेम, उग्रतीर्थ, कलिंग-नरेश कुहर तथा परम बुद्धिमान् मनुष्योंका राजा ईश्वर
ヴァイシャンパーヤナは語った。「カルーシャ国および他の地より、多くの王が来た。クシェーマドゥールティもまた、シュルターユ、ウドヴァハ、ブリハトセーナもまた、そこに加わっていた。」
Verse 65
क्षेमोग्रतीर्थ: कुहर: कलिज्ेषु नराधिप: । मतिमांश्व मनुष्येन्द्र ईश्वरश्वेति विश्वुत:ः,मद्रक, क्णवेष्ट, सिद्धार्थ, कीटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लिक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्रीमान् नील नरेश, चीरवासा, भूमिपाल, दन्तवक्त्र, दानव दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ, वायुवेग, भूरितेजा, एकलव्य, सुमित्र, वाटधान, गोमुख, करूषदेशके अनेक राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेम, उग्रतीर्थ, कलिंग-नरेश कुहर तथा परम बुद्धिमान् मनुष्योंका राजा ईश्वर
ヴァイシャンパーヤナは語った。カリンガの諸王のうちには、クハラとクシェーマ=ウグラティールタがあり、また人の世において至高の叡智を備えた主として名高い王イーシュヴァラもいた。さらに多くの君主たち—マドラカ、クリナヴェーシュタ、シッダールタ、キータカ、スヴィーラ、スバーフ、マハーヴィーラ、バーフリカ、クラタ、ヴィチトラ、スラタ、栄光ある王ニーラ、チーラヴァーサー、ブーミパーラ、ダンタヴァクトラ、ダーナヴァ=ドゥルジャヤ、名高き王ルクミー、王ジャナメージャヤ、アーシャーダ、ヴァーユヴェーガ、ブーリテージャー、エーカラヴィヤ、スミトラ、ヴァータダーナ、ゴームカ、そしてカルーシャの地より来た数多の支配者—に加え、クシェーマドゥールティ、シュルターユ、ウドヴァハ、ブリハトセーナらも列せられた。かくして物語は集いし諸王の名を挙げ、王権の広がりと、智慧と主宰に結びつく名声とを際立たせるのである。
Verse 66
गणात् क्रोधवशादेष राजपूगो5भवत् क्षितौ | जात: पुरा महाभागो महाकीर्तिमहाबल:,इतने राजाओंका समुदाय पहले इस पृथ्वीपर क्रोधवश नामक दैत्यगणसे उत्पन्न हुआ था। ये सब राजा परम सौभाग्यशाली, महान् यशस्वी और अत्यन्त बलशाली थे
ヴァイシャンパーヤナは語った。「『クローダヴァシャ』—すなわち『怒りに支配される者たち』と呼ばれる存在の群れから、かつてこの大勢の王たちが地上に現れた。古の時代、彼らは大いなる幸運を備えた人として生まれ、広大な名声と恐るべき武威によって知られたのである。」
Verse 67
कालनेमिरिति ख्यातो दानवानां महाबल: । स कंस इति विख्यात उग्रसेनसुतो बली,दानवोंमें जो महाबली कालनेमि था, वही राजा उग्रसेनके पुत्र बलवान् कंसके नामसे विख्यात हुआ इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि अंशावतरणसमाप्तौ सप्तषष्टितमो5ध्याय:
ヴァイシャンパーヤナは語った。ダーナヴァの中でも大いなる力を誇り、カーラネーミと名高かった者は再び生を受け、ウグラセーナ王の剛なる子、カンサとして世に知られるようになった。
Verse 68
यस्त्वासीद् देवको नाम देवराजसमझ्युति: । स गन्धर्वपतिर्मुख्य: क्षितौ जज्ञे नराधिप:,इन्द्रके समान कान्तिमान् राजा देवकके रूपमें इस पृथ्वीपर श्रेष्ठ गन्धर्वराज ही उत्पन्न हुआ था
ヴァイシャンパーヤナは語った。かつてデーヴァカと呼ばれ、神々の王インドラに等しい輝きを放っていた者は、地上に生まれて人間の王となり、ガンダルヴァの第一の主として、インドラに比すべき光彩を具えていた。
Verse 69
बृहस्पतेर्बृहत्कीरतेंदिवर्षेविद्धि भारत । अंशाद् द्रोणं समुत्पन्नं भारद्वाजमयोनिजम्,भारत! महान् कीर्तिशाली देवर्षि बृहस्पतिके अंशसे अयोनिज भरद्वाजनन्दन द्रोण उत्पन्न हुए, यह जान लो
ヴァイシャンパーヤナは語った。バーラタよ、知れ。ドローナ—胎を経ずに生まれたバラドヴァージャの子—は、偉大にして名高き天の聖仙ブリハスパティの一分より現れ出たのである。
Verse 70
धन्विनां नृपशार्दूल यः सर्वस्त्रिविदुत्तम: । महाकीर्तिमिहातेजा: स जज्ञे मनुजेश्वर,नृपश्रेष्ठ राजा जनमेजय! आचार्य द्रोण समस्त धनुर्धर वीरोंमें उत्तम और सम्पूर्ण अस्त्रोंके ज्ञाता थे। उनकी कीर्ति बहुत दूरतक फैली हुई थी। वे महान् तेजस्वी थे
ヴァイシャンパーヤナは言った。「王たちの中の虎よ、人々の主よ、統治者のうち最上なる者—ジャナメージャヤ王よ—弓を執る者の中で最も卓越し、武器の学の全てを知り尽くす者のうち第一の人物が生まれた。その名声は遠く広く行き渡り、彼は大いなる光輝を具えていた。」
Verse 71
धनुर्वेदे च वेदे च यं त॑ वेदविदो विदु: । वरिष्ठ चित्रकर्माणं द्रोणं स्वकुलवर्धनम्,वेदवेत्ता विद्वान् द्रोणको धनुर्वेद और वेद दोनोंमें सर्वश्रेष्ठ मानते थे। वे विचित्र कर्म करनेवाले तथा अपने कुलकी मर्यादाको बढ़ानेवाले थे
ヴァイシャンパーヤナは言った。「ヴェーダに通じた者たちは、ドローナを弓術の学においてもヴェーダの学においても第一と認めた。奇特な業によって名高く、また自らの家系の名誉を高めた彼は、聖なる知と武の規律とを結び合わせる最高の権威として立っていた。」
Verse 72
महादेवान्तकाभ्यां च कामात् क्रोधाच्च भारत । एकत्वमुपपन्नानां जज्ञे शूर: परंतप:,भारत! उनके यहाँ महादेव, यम, काम और क्रोधके सम्मिलित अंशसे शत्रुसंतापी शूरवीर अश्वत्थामाका जन्म हुआ, जो इस पृथ्वीपर महापराक्रमी और शत्रुपक्षका संहार करनेवाला वीर था। राजन! उसके नेत्र कमलदलके समान विशाल थे
ヴァイシャンパーヤナは言った。「バーラタよ、マハーデーヴァとアンタカ(ヤマ)の分、さらにカーマとクローダ(欲と怒り)の分が、一つに合して一体となり、敵を灼く英雄が生まれた。ここではその誕生が、苦行の力と死の峻厳さが、欲望と憤怒と結びついたものとして語られ、比類なき武威と同時に、激しい情念の危うさをも示している。」
Verse 73
अश्वत्थामा महावीर्य: शत्रुपक्षभयावह: । वीर: कमलपत्राक्ष: क्षितावासीन्नराधिप,भारत! उनके यहाँ महादेव, यम, काम और क्रोधके सम्मिलित अंशसे शत्रुसंतापी शूरवीर अश्वत्थामाका जन्म हुआ, जो इस पृथ्वीपर महापराक्रमी और शत्रुपक्षका संहार करनेवाला वीर था। राजन! उसके नेत्र कमलदलके समान विशाल थे
ヴァイシャンパーヤナは言った。「アシュヴァッターマは大いなる武威を備え、敵陣に恐怖をもたらす者であった。蓮の花弁のごとき眼を持つ英雄は、この地上に生き、王よ—勇猛にして、対する勢力を打ち砕くにふさわしかった。」
Verse 74
जज्ञिरे वसवस्त्वष्टौ गज़ायां शान्तनो: सुता: | वसिष्ठस्य च शापेन नियोगाद् वासवस्य च,महर्षि वसिष्ठके शाप और इन्द्रके आदेशसे आठों वसु गंगाजीके गर्भसे राजा शान्तनुके पुत्ररूपमें उत्पन्न हुए
ヴァイシャンパーヤナは言った。「聖仙ヴァシシュタの呪いにより、またヴァーサヴァ(インドラ)の命によって、八柱のヴァスはガンガーの胎内に生まれ、シャーンタヌ王の子となった。」
Verse 75
तेषामवरजो भीष्म: कुरूणामभयंकर: । मतिमान् वेदविद् वाग्मी शत्रुपक्षक्षयंकर:,उनमें सबसे छोटे भीष्म थे, जिन्होंने कौरववंशको निर्भय बना दिया था। वे परम बुद्धिमान, वेदवेत्ता, वक्ता तथा शत्रुपक्षका संहार करनेवाले थे
ヴァイシャンパーヤナは語った。「彼らのうち最も年少であったのはビーシュマであり、クル族の血統を恐れなきものとした者である。鋭い判断力を備え、ヴェーダに通じ、言葉は雄弁、敵軍の陣列を打ち砕く恐るべき勇士であった。」
Verse 76
जामदग्न्येन रामेण सर्वास्त्रिविदुषां वर: । योब्युध्यत महातेजा भार्गवेण महात्मना,सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्रोंके दिद्वानोंमें श्रेष्ठ महातेजस्वी भीष्मने भृगुवंशी महात्मा जमदग्निनन्दन परशुरामजीके साथ युद्ध किया था
ヴァイシャンパーヤナは語った。「大いなる威光を備え、武器の学に通じる者の中で最も優れたビーシュマは、ジャマダグニの子ラーマ(パラシュラーマ)――大魂のバールガヴァ――と戦うため立ち上がった。」
Verse 77
यस्तु राजन् कृपो नाम ब्रह्मूर्षिरभवत् क्षितौ । रुद्राणां तु गणाद् विद्धि सम्भूतमतिपौरुषम्,महाराज! जो कृप नामसे प्रसिद्ध ब्रह्मर्षि इस पृथ्वीपर प्रकट हुए थे, उनका पुरुषार्थ असीम था। उन्हें रुद्रणणके अंशसे उत्पन्न हुआ समझो
ヴァイシャンパーヤナは語った。「王よ、この地上に現れた『クリパ』と名高いブラフマ仙について知れ。彼はルドラ神群の一部より生じ、並外れた武勇を具えていたのだ。」
Verse 78
शकुनिर्नाम यस्त्वासीद् राजा लोके महारथ: । द्वापरं विद्धि तं राजन् सम्भूतमरिमर्दनम्,राजन्! जो इस जगत्में महारथी राजा शकुनिके नामसे विख्यात था, उसे तुम द्वापरके अंशसे उत्पन्न हुआ मानो। वह शत्रुओंका मान-मर्दन करनेवाला था
ヴァイシャンパーヤナは語った。「王よ、この世で『シャクニ』の名で知られた王、偉大なる戦車武者について言えば、彼はドヴァーパラの時代の一分より生まれ、敵を打ち砕く者であったと知れ。」
Verse 79
सात्यकि: सत्यसन्धश्न योडसौ वृष्णिकुलोद्वह: । पक्षात् स जज्ञे मरुतां देवानामरिमर्दन:,वृष्णिवंशका भार वहन करनेवाले जो सत्यप्रतिज्ञ शत्रुमर्दन सात्यकि थे, वे मरुत्- देवताओंके अंशसे उत्पन्न हुए थे
ヴァイシャンパーヤナは語った。「サーティヤキは、誓いに真実であり、ヴリシュニ族の誉れを担う第一の者、そして敵を打ち砕く勇士であった。彼はマルト神群の一分としてこの世に生まれたのである。」
Verse 80
द्रुपदश्चैव राजर्षिसतत एवाभवद् गणात् | मानुषे नृप लोकेडस्मिन् सर्वशस्त्रभूृतां वर:,राजा जनमेजय! सम्पूर्ण शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि द्रपद भी इस मनुष्यलोकमें उस मरुदगणसे ही उत्पन्न हुए थे
ヴァイシャンパーヤナは言った。「ジャナメージャヤ王よ、王仙ドルパダは――この人間界において武器を執る者すべての中で常に最上であったが――まさしくそのマルットの群(gaṇa)から生まれたのである。この語りは、卓越した王たちが神々の系譜に連なることを示し、世の武威を聖なる起源と結びつけ、かかる高位に伴う責務をも示唆する。」
Verse 81
ततश्न कृतवर्माणं विद्धि राजज्जनाधिपम् । तमप्रतिमकर्माणि क्षत्रियर्षभसत्तमम्,महाराज! अनुपम कर्म करनेवाले, क्षत्रियोंमें श्रेष्ठ राजा कृतवर्माको भी तुम मरुदगणोंसे ही उत्पन्न मानो
ヴァイシャンパーヤナは言った。「また知るがよい、王よ、人々の主たるクリタヴァルマーを。彼の業は比類なく、クシャトリヤの中の最上の雄牛である。大王よ、その無双の行いをなすクリタヴァルマーもまた、マルットの群から生まれたと見なせ。」
Verse 82
मरुतां तु गणाद् विद्धि संजातमरिमर्दनम् | विराट नाम राजानं परराष्ट्प्रतापनम्,शत्रुराष्ट्रको संताप देनेवाले शत्रुमर्दन राजा विराटको भी मरुदगणोंसे ही उत्पन्न समझो
また知るがよい。敵を砕く王、ヴィラータという名の王――敵国に苦患をもたらす者――もまた、マルットの群(gaṇa)から生まれた。ここにヴィラータは神に源をもつ王たちの列に置かれ、真の王権とは民を護ること、そして侵略者を討つために要る節制と剛力とによって量られるのだと示される。
Verse 83
अरिष्ायास्तु यः पुत्रो हंस इत्यभिविश्रुत: । स गन्धर्वपतिर्जज्ञे कुरुवंशविवर्धन:
ヴァイシャンパーヤナは言った。「アリシュターから、ハンサと広く称えられる पुत्रが生まれた。彼はガンダルヴァの主として生まれ、クル族の系譜を増し、強める者となった。」
Verse 84
धृतराष्ट्र इति ख्यात: कृष्णद्वैपायनात्मज: । दीर्घबाहुर्महातेजा: प्रज्ञाचक्षुर्नराधिप:
ヴァイシャンパーヤナは言った。「彼はドリタラーシュトラの名で知られた――クリシュナ・ドヴァイパーヤナ(ヴィヤーサ)の पुत्रである。長い腕を備え、大いなる光輝を放ち、肉眼の視力は欠けていても、真の眼は智慧である王であった。」
Verse 85
मातुर्दोषादृषे: कोपादनन््ध एव व्यजायत | अरिष्टाका पुत्र जो हंस नामसे विख्यात गन्धर्वराज था, वही कुरुवंशकी वृद्धि करनेवाले व्यासनन्दन धृतराष्ट्रके नामसे प्रसिद्ध हुआ। धृतराष्ट्रकी बाँहें बहुत बड़ी थीं। वे महातेजस्वी नरेश प्रज्ञाचक्षु (अन्धे) थे। वे माताके दोष और महर्षिके क्रोधसे अन्धे ही उत्पन्न हुए ।। ८३-८४ $।। तस्यैवावरजो भ्राता महासत्त्वो महाबल:,उन्हींके छोटे भाई महान् शक्तिशाली महाबली पाण्डुके नामसे विख्यात हुए। वे सत्य- धर्ममें तत्पर और पवित्र थे। पुत्रवानोंमें श्रेष्ठ और बुद्धिमानोंमें उत्तम परम सौभाग्यशाली विदुरको तुम इस लोकमें सूर्यपुत्र धर्मके अंशसे उत्पन्न हुआ समझो
ヴァイシャンパーヤナは語った。母の過失と聖仙の怒りによって、彼は盲として生まれた。アリシュタカーの子にして名高きガンダルヴァ王ハンサは、クル族を繁栄させるべきヴィヤーサの子となり、ドリタラーシュトラの名で知られるようになった。ドリタラーシュトラの腕はきわめて大きく長かった。大いなる威光を具えた王でありながら、「智慧を眼とする者」すなわち盲人であった。かくして母の咎と大リシの憤怒により、彼は視力なきまま世に出たのである。彼の弟は大いなる気魄と大いなる力を備え、パーンドゥの名で名声を得た—真実とダルマに励み、行い清浄であった。そしてヴィドゥラ—賢者のうち最も卓れ、徳ある者の先頭に立つ者—この世においては、ダルマの一分より生まれた太陽の子であると知れ。
Verse 86
स पाण्डुरिति विख्यात: सत्यधर्मरत: शुचि: । अत्रेस्तु- सुमहाभागं पुत्र पुत्रवतां वरम् । विदुरं विद्धि तं लोके जात॑ बुद्धिमतां वरम्,उन्हींके छोटे भाई महान् शक्तिशाली महाबली पाण्डुके नामसे विख्यात हुए। वे सत्य- धर्ममें तत्पर और पवित्र थे। पुत्रवानोंमें श्रेष्ठ और बुद्धिमानोंमें उत्तम परम सौभाग्यशाली विदुरको तुम इस लोकमें सूर्यपुत्र धर्मके अंशसे उत्पन्न हुआ समझो
ヴァイシャンパーヤナは語った。彼はパーンドゥの名で名高くなった—行い清浄にして、真実とダルマに心を尽くした。さらにヴィドゥラをこの世において、至上の幸運に恵まれ、子を授かった者のうち最も優れ、賢者の先頭に立つ者として知れ—ダルマの一分より生まれた太陽の子である。
Verse 87
कलेरंशस्तु संजज्ञे भुवि दुर्योधनो नृप: । दुर्बृद्धिर्दुर्मतिश्वैव कुरूणामयशस्कर:,खोटी बुद्धि और दूषित विचारवाले कुरुकुलकलंक राजा दुर्योधनके रूपमें इस पृथ्वीपर कलिका अंश ही उत्पन्न हुआ था
ヴァイシャンパーヤナは語った。地上において王ドゥルヨーダナは、まさにカリの一分として生まれた—理解は歪み、意図は穢れ、クル族の名に恥辱をもたらす者として。
Verse 88
जगतो यस्तु सर्वस्य विद्विष्ट: कलिपूरुष: । य: सर्वा घातयामास पृथिवीं पृथिवीपते,राजन्! वह कलिस्वरूप पुरुष सबका द्वेषपात्र था। उसने सारी पृथ्वीके वीरोंको लड़ाकर मरवा दिया था
ヴァイシャンパーヤナは語った。「全世界に憎まれたその“カリの人”は、万人の嫌悪の的となった。おお王よ、大地の主よ、彼は地上の勇士たちを互いに討たせ、広く破滅をもたらした。」
Verse 89
उद्दीपितं येन वैरं भूतान्तकरणं महत् | पौलस्त्या भ्रातरश्नास्य जज्ञिरे मनुजेष्विह,उसके द्वारा प्रजजलित की हुई वैरकी भारी आग असंख्य प्राणियोंके विनाशका कारण बन गयी। पुलस्त्य-कुलके राक्षस भी मनुष्योंमें दुर्योधनके भाइयोंके रूपमें उत्पन्न हुए थे
ヴァイシャンパーヤナは語った。彼によって怨讐の炎は煽り立てられた—巨大にして破滅をもたらし、数えきれぬ生きものの滅亡の因となった。そしてこの人間界において、彼の兄弟たちはプラスタヤの系譜に属するラークシャサとして生まれたのである。
Verse 90
शतं दुःशासनादीनां सर्वेषां क्रूरकर्मणाम् । दुर्मुखो दुःसहश्नैव ये चान्ये नानुकीर्तिता:,उसके दुःशासन आदि सौ भाई थे। वे सभी क्रूरतापूर्ण कर्म किया करते थे। दुर्मुख, दुःसह तथा अन्य कौरव जिनका नाम यहाँ नहीं लिया गया है, दुर्योधनके सहायक थे। भरतश्रेष्ठ! धृतराष्ट्रके वे सब पुत्र पूर्वजन्मके राक्षस थे। धृतराष्ट्रपुत्र युयुत्सु वैश्य-जातीय सत्रीसे उत्पन्न हुआ था। वह दुर्योधन आदि सौ भाइयोंके अतिरिक्त था
ヴァイシャンパーヤナは語った。「ドゥフシャーサナを筆頭に、ちょうど百人がいた。いずれも残酷な所業をなす者たちである。その中にはドゥルムカ、ドゥフサハがあり、ほかにもここでは名を唱えぬ者が多くいた。」
Verse 91
दुर्योधनसहायास्ते पौलस्त्या भरतर्षभ । वैश्यापुत्रो युयुत्सुश्न धार्तराष्ट्र: शताधिक:,उसके दुःशासन आदि सौ भाई थे। वे सभी क्रूरतापूर्ण कर्म किया करते थे। दुर्मुख, दुःसह तथा अन्य कौरव जिनका नाम यहाँ नहीं लिया गया है, दुर्योधनके सहायक थे। भरतश्रेष्ठ! धृतराष्ट्रके वे सब पुत्र पूर्वजन्मके राक्षस थे। धृतराष्ट्रपुत्र युयुत्सु वैश्य-जातीय सत्रीसे उत्पन्न हुआ था। वह दुर्योधन आदि सौ भाइयोंके अतिरिक्त था
ヴァイシャンパーヤナは語った。「バーラタ族の雄牛よ、パウラスティヤの系より生じた者どもはドゥルヨーダナの同盟者であった。またヴァイシャの女より生まれたユユツも、やはりドゥリタラーシュトラの子であり—ゆえに数は百を超えた。」
Verse 92
जनमेजय उवाच ज्येष्ठानुज्येष्ठतामेषां नामधेयानि वा विभो । धृतराष्ट्रस्य पुत्राणामानुपूर्व्येण कीर्तय,जनमेजयने कहा--प्रभो! धृतराष्ट्रके जो सौ पुत्र थे, उनके नाम मुझे बड़े-छोटेके क्रमसे एक-एक करके बताइये
ジャナメージャヤは言った。「大いなる御方よ、ドゥリタラーシュトラの子らの名を、長幼の順に、ひとりひとり順次に語ってください。」
Verse 93
वैशम्पायन उवाच दुर्योधनो युयुत्सुश्न राजन् दुःशासनस्तथा । दुःसहो दुःशलश्चैव दुर्मुखश्च॒ तथापर:
ヴァイシャンパーヤナは語った。「王よ、(ドゥリタラーシュトラの子らには)ドゥルヨーダナ、ユユツ、そしてドゥフシャーサナがいる。さらにドゥフサハ、ドゥフシャラー、ドゥルムカ、そしてもう一人がいた。」
Verse 94
विविंशतिर्विकर्णश्व जलसन्ध: सुलोचन: । विन्दानुविन्दी दुर्धर्ष: सुबाहुर्दुष्प्रधर्षण:
ヴァイシャンパーヤナは語った。「(その中には)ヴィヴィンシャティとヴィカルナ、ジャラサンダ、スローチャナ、兄弟のヴィンダとアヌヴィンダ、ドゥルダルシャ、スバーフ、そしてドゥシュプラダルシャナがいた。」
Verse 95
दुर्मर्षणो दुर्मुखश्न दुष्कर्ण: कर्ण एव च । चित्रोपचित्रौ चित्राक्षक्षारुक्षित्राड्रदश्ष ह
ヴァイシャンパーヤナは語った。「その中にはドゥルマルシャナ、ドゥルムカ、ドゥシュカルナ、そしてカルナがいた。さらにチトロパチトラ、チトラークシャ、クシャールクシトラ、アドラダシャもいた。」
Verse 96
दुर्मदो दुष्प्रधर्षश्व विवित्सुर्विकट: सम: । ऊर्णनाभ: पद्मनाभस्तथा नन्दोपनन्दकौ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「そこにはドゥルマダ、ドゥシュプラダルシャ、ヴィヴィツ、ヴィカタ、サマ、ウールナナーバ、パドマナーバがいた。さらにナンダとウパナンダもいた。」
Verse 97
सेनापति: सुषेणश्न॒ कुण्डोदरमहोदरौ । चित्रबाहुश्नित्रवर्मा सुवर्मा दुर्विरोचन:
ヴァイシャンパーヤナは語った。「その中には将帥スシェーナがおり、また二人—クンドーダラとマホーダラ—がいた。さらにチトラバーフ、チトラヴァルマー、スヴァルマー、ドゥルヴィローチャナもいた。」
Verse 98
अयोबाहुर्महाबाहुश्रित्रचापसुकुण्डलौ । भीमवेगो भीमबलो बलाकी भीमविक्रमौ
ヴァイシャンパーヤナは語った。彼らは鉄のごとき腕、巨き腕を持ち、彩りの弓と見事な耳飾りで身を飾っていた。速さも力も恐るべく、鶴が一気に襲いかかるように疾く突進し、武勇においても並ぶ者なき者たちであった。
Verse 99
उग्रायुधो भीमशर: कनकायुर्दढायुध: । दृढवर्मा दृढक्षत्र: सोमकीर्तिरनूदर:
ヴァイシャンパーヤナは語った。恐るべき武器と揺るがぬ決意を備えた戦士たち—ウグラーユダ、ビーマシャラ、カナカー ইউ、ドリダーユダ—がいた。さらにドリダヴァルマーとドリダクシャトラ、そしてソーマキールティとアヌーダラもいた。
Verse 100
जरासन्धो दृढसन्ध: सत्यसन्ध: सहस्रवाक् । उग्रश्नवा उग्रसेन: क्षेममूर्तिस्तथैव च
ヴァイシャンパーヤナは語った。「(そこには)ジャラーサンダがいた。盟約に堅きドリḍハサンダ、誓約の言葉に真実なるサティヤサンダ、千の言葉で名高いサハスラヴァーク。さらにウグラシュナヴァ、ウグラセーナ、クシェーマムールティもまたいた。」
Verse 101
अपराजित: पण्डितको विशालाक्षो दुराधन:
ヴァイシャンパーヤナは語った。「(彼は)不敗にして博識、眼は大きく、屈せしめ難き者であった。」
Verse 102
दृढ्हस्त: सुहस्तश्न॒ वातवेगसुवर्चसौ । आदित्यकेतुर्बह्वाशी नागदत्तानुयायिनौ
ヴァイシャンパーヤナは語った。「ドリḍハハスタとスハスタ、ヴァータヴェーガとスヴァルチャス、アーディティヤケートゥとバフヴァーシー、さらにナーガダッタに従う者たちもいた。」
Verse 103
कवची निषज्जी दण्डी दण्डधारो धरनुग्रहः । उग्रो भीमरथो वीरो वीरबाहुरलोलुप:
ヴァイシャンパーヤナは語った。「彼は鎧をまとい常に備え、杖を携えてその扱いに巧みであった。大地の堅き支えにして恵みを施す者。力は猛く、戦車は恐るべく、まことの勇者—腕は強く、貪りを知らぬ。」
Verse 104
अभयो रौद्रकर्मा च तथा दृढरथश्न यः । अनाधृष्य: कुण्डभेदी विरावी दीर्घलोचन:
ヴァイシャンパーヤナは語った。「アバヤ—苛烈なる業をなす者—がいた。さらに堅き戦車の技で名高い者、攻め難きクンḍベーディー、ヴィラーヴィー、そして長き眼のディールガローチャナもいた。」
Verse 105
दीर्घबाहुर्महाबाहुर्व्यूडोरु: कनकाज्भद: । कुण्डजश्ित्रकश्चैव द:ःशला च शताधिका
ヴァイシャンパーヤナは語った。「子らの中には、ディールガバーフとマハーバーフ、ヴューḍホルとカナカーンガダがあり、またクンダジャとチトラカがあり、さらにドゥフシャラーもいた――そのほかにも百余名がいたのである。」この列挙は、クル族の系譜の巨大さを際立たせ、節制と正しい行い(ダルマ)に導かれぬまま権勢と血縁が膨張すれば、やがて争いとアダルマの温床となることを予兆している。
Verse 106
वैशम्पायनजी बोले--राजन्! सुनो--१ दुर्योधन, २ युयुत्सु, ३ दुःशासन, ४ दुःसह, ५ दुःशल, ६ दुर्मुख, ७ विविंशति, ८ विकर्ण, ९ जलसन्ध, १० सुलोचन, ११ विन्द, १२ अनुविन्द, १३ दुर्धर्ष, १४ सुबाहु, १५ दुष्प्रधर्षण, १६ दुर्मर्षण, १७ दुर्मुख, १८ दुष्कर्ण, १९ कर्ण, २० चित्र, २१ उपचित्र, २२ चित्राक्ष, २३ चारु, २४ चित्रांगद, २५ दुर्मद, २६ दुष्प्रधर्ष, २७ विवित्सु, २८ विकट, २९ सम, ३० ऊर्णनाभ, ३१ पद्मानाभ, ३२ नन्द, ३३ उपनन्द, ३४ सेनापति, ३५ सुषेण, ३६ कुण्डोदर, ३७ महोदर, ३८ चित्रबाहु, ३९ चित्रवर्मा, ४० सुवर्मा, ४१ दुर्विरोचन, ४२ अयोबाहु, ४३ महाबाहु, ४४ चित्रचाप, ४५ सुकुण्डल, ४६ भीमवेग, ४७ भीमबल, ४८ बलाकी, ४९ भीम, ५० विक्रम, ५१ उम्रायुध, ५२ भीमशर, ५३ कनकायु, ५४ दृढायुध, ५५ दृढवर्मा, ५६ दृढक्षत्र, ५७ सोमकीर्ति, ५८ अनूदर, ५९ जरासन्ध, ६० दृढ्सन्ध, ६१ सत्यसन्ध, ६२ सहस्रवाक्, ६३ उग्रश्नवा, ६४ उग्रसेन, ६५ क्षेममूर्ति, ६६ अपराजित, ६७ पण्डितक, ६८ विशालाक्ष, ६९ दुराधन, ७० दृढ्हस्त, ७१ सुहस्त, ७२ वातवेग, ७३ सुवर्चा, ७४ आदित्यकेतु, ७५ बह्चाशी, ७६ नागदत्त, ७७ अनुयायी, ७८ कवची, ७९ निषंगी, ८० दण्डी, ८१ दण्डधार, ८२ थधरनुग्रह, ८३ उग्र, ८४ भीमरथ, ८५ वीर, ८६ वीरबाहु, ८७ अलोलुप, ८८ अभय, ८९ रौद्रकर्मा, ९० दृढरथ, ९१ अनाधृष्य, ९२ कुण्डभेदी, ९३ विरावी, ९४ दीर्घलोचन, ९५ दीर्घबाहु, ९६ महाबाहु, ९७ व्यूढोरु, ९८ कनकांगद, ९९ कुण्डज और १०० चित्रक--ये धृतराष्ट्रके सौ पुत्र थे। इनके सिवा दुःशला नामकी एक कन्या थी ॥। ९३ १०५ || वैश्यापुत्रो युयुत्सुश्न धार्तराष्ट्र: शताधिक: । एतदेकशतं राजन् कन्या चैका प्रकीर्तिता,धृतराष्ट्रका वह पुत्र जिसका नाम युयुत्सु था, वैश्याके गर्भसे उत्पन्न हुआ था। वह दुर्योधन आदि सौ पुत्रोंसे अतिरिक्त था। राजन! इस प्रकार धृतराष्ट्रके एक सौ एक पुत्र तथा एक कन्या बतायी गयी है
ヴァイシャンパーヤナは語った。「王よ、ヴァイシャの女から生まれたユユツもまた、ドリタラーシュトラの子であり、その数は百を超えた。ゆえに王よ、百人の息子が数え挙げられ、さらに一人の娘もまた宣言される。」この箇所は、クル家における血統と責務の複雑さを示す。正式に認められた後継者たちの傍らに、母の身分を異にする一子がありながら、彼もまた同じ家族的・道義的帰結に結びつけられ、その帰結が王朝の争いの中で展開してゆくのである。
Verse 107
नामथधेयानुपूर्व्या च ज्येष्ठानुज्जेष्ठतां विदु: । सर्वे त्वतिरथा: शूरा: सर्वे युद्धविशारदा:,इनके नामोंका जो क्रम दिया गया है, उसीके अनुसार विद्वान् पुरुष इन्हें जेठा और छोटा समझते हैं। धृतराष्ट्रके सभी पुत्र उत्कृष्ट रथी, शूरवीर और युद्धकी कलामें कुशल थे
名が挙げられたその順序によって、賢者たちは誰が長子で誰が末子かを知る。ドリタラーシュトラの息子たちは皆、アティラタの勇士であり、戦の術に通じていた。
Verse 108
सर्वे वेदविदश्नैव राजच्छास्त्रे च पारगा: । सर्वे संग्रामविद्यासु विद्याभिजनशोभिन:,राजन! वे सब-के-सब वेददवेत्ता, शास्त्रोंके पारंगत विद्वान, संग्राम-विद्यामें प्रवीण तथा उत्तम विद्या और उत्तम कुलसे सुशोभित थे
ヴァイシャンパーヤナは語った。彼らは皆ヴェーダに通じ、王道の学にも完全に達していた。皆が戦の諸芸に巧みで、洗練された学識と高貴な家柄によって輝いていた――その資質ゆえ、評議の座においても戦場においても敬われるに足る者たちであった。
Verse 109
सर्वेषामनुरूपाश्न कृता दारा महीपते । दुःशलां समये राजन् सिन्धुराजाय कौरव:,भूपाल! उन सबका सुयोग्य स्त्रियोंक साथ विवाह हुआ था। महाराज! कुरुराज दुर्योधनने समय आनेपर शकुनिकी सलाहसे अपनी बहिन दुःशलाका विवाह सिन्धुदेशके राजा जयद्रथके साथ कर दिया। जनमेजय! राजा युधिष्ठिरको तो तुम धर्मका अंश जानो
ヴァイシャンパーヤナは語った。「王よ、彼らすべてにふさわしい婚姻が整えられた。そして時が満ちると、統べる者よ、カウラヴァは妹ドゥフシャラーをシンドゥの王に嫁がせた。」
Verse 110
जयद्रथाय प्रददौ सौबलानुमते तदा । धर्मस्यांशं तु राजानं विद्धि राजन् युधिष्ठिरम्,भूपाल! उन सबका सुयोग्य स्त्रियोंक साथ विवाह हुआ था। महाराज! कुरुराज दुर्योधनने समय आनेपर शकुनिकी सलाहसे अपनी बहिन दुःशलाका विवाह सिन्धुदेशके राजा जयद्रथके साथ कर दिया। जनमेजय! राजा युधिष्ठिरको तो तुम धर्मका अंश जानो
ヴァイシャンパーヤナは語った。「その時、サウバラ(シャクニ)の承認を得て、彼は(妹を)ジャヤドラタに嫁がせた。王よ、ユディシュティラ王はダルマそのものの一分であると知るがよい。」
Verse 111
भीमसेनं तु वातस्य देवराजस्य चार्जुनम् । अश्रिनोस्तु तथैवांशौ रूपेणाप्रतिमौ भुवि,भीमसेनको वायुका और अर्जुनको देवराज इन्द्रका अंश जानो। रूप-सौन्दर्यकी दृष्टिसे इस पृथ्वीपर जिनकी समानता करनेवाला कोई नहीं था, वे समस्त प्राणियोंका मन मोह लेनेवाले नकुल और सहदेव अश्विनीकुमारोंके अंशसे उत्पन्न हुए थे। वर्चा नामसे विख्यात जो चन्द्रमाका प्रतापी पुत्र था, वही महायशस्वी अर्जुनकुमार अभिमन्यु हुआ। जनमेजय! उसके अवतार-कालनमें चन्द्रमाने देवताओंसे इस प्रकार कहा--
ヴァイシャンパーヤナは語った。「ビーマセーナは風神ヴァーユの一分、アルジュナは神々の王インドラの一分であると知れ。同様に、ナクラとサハデーヴァはアシュヴィン双神の分身として生まれ、地上に比類なき容姿で、あらゆる生きものの心を魅了した。」
Verse 112
नकुल: सहदेवश्व सर्वभूतमनोहरौ । यस्तु वर्चा इति ख्यात: सोमपुत्र: प्रतापवान्,भीमसेनको वायुका और अर्जुनको देवराज इन्द्रका अंश जानो। रूप-सौन्दर्यकी दृष्टिसे इस पृथ्वीपर जिनकी समानता करनेवाला कोई नहीं था, वे समस्त प्राणियोंका मन मोह लेनेवाले नकुल और सहदेव अश्विनीकुमारोंके अंशसे उत्पन्न हुए थे। वर्चा नामसे विख्यात जो चन्द्रमाका प्रतापी पुत्र था, वही महायशस्वी अर्जुनकुमार अभिमन्यु हुआ। जनमेजय! उसके अवतार-कालनमें चन्द्रमाने देवताओंसे इस प्रकार कहा--
ヴァイシャンパーヤナは語った。「ナクラとサハデーヴァは、あらゆる生きものの心を喜ばせる者として、アシュヴィニー・クマーラの分身より生まれ、地上に比類なき美と魅力を備えていた。また“ヴァルチャー”と名高いソーマ(月)の勇猛なる子は、アルジュナの輝かしき子アビマンニュとなった。」
Verse 113
सोअभिमन्युर्बृहत्कीर्तिर्जुनस्य सुतो5भवत् । यस्यावतरणे राजन् सुरान् सोमो5ब्रवीदिदम्,भीमसेनको वायुका और अर्जुनको देवराज इन्द्रका अंश जानो। रूप-सौन्दर्यकी दृष्टिसे इस पृथ्वीपर जिनकी समानता करनेवाला कोई नहीं था, वे समस्त प्राणियोंका मन मोह लेनेवाले नकुल और सहदेव अश्विनीकुमारोंके अंशसे उत्पन्न हुए थे। वर्चा नामसे विख्यात जो चन्द्रमाका प्रतापी पुत्र था, वही महायशस्वी अर्जुनकुमार अभिमन्यु हुआ। जनमेजय! उसके अवतार-कालनमें चन्द्रमाने देवताओंसे इस प्रकार कहा--
ヴァイシャンパーヤナは語った。「そのアビマンニュは大いなる名声を備え、アルジュナの子として生まれた。王よ、彼がこの世に降る時、ソーマ(月神)は神々に向かって次のように告げた。」
Verse 114
नाहं दद्यां प्रियं पुत्र मम प्राणैर्गरीयसम् । समय: क्रियतामेष न शक््यमतिवर्तितुम्,“मेरा पुत्र मुझे अपने प्राणोंसे भी अधिक प्रिय है, अतः मैं इसे अधिक दिनोंके लिये नहीं दे सकता। इसलिये मृत्युलोकमें इसके रहनेकी कोई अवधि निश्चित कर दी जाय। फिर उस अवधिका उल्लंघन नहीं किया जा सकता
ヴァイシャンパーヤナは語った。「わが愛し子は、わが命にも勝って尊い。ゆえに長き日々、彼を差し出すことはできぬ。人界に留まる期間を定めよ――ひとたび定まれば、その限りを越えることはできない。」
Verse 115
सुरकार्य हि नः कार्यमसुराणां क्षितौ वध: । तत्र यास्यत्ययं वर्चा न च स्थास्यति वै चिरम्,'पृथ्वीपर असुरोंका वध करना देवताओंका कार्य है और वह हम सबके लिये करनेयोग्य है। अतः उस कार्यकी सिद्धिके लिये यह वर्चा भी वहाँ अवश्य जायगा। परंतु दीर्घकालतक वहाँ नहीं रह सकेगा
地上においてアスラを討つことは、まことに神々の務めであり、われらすべてが成すべき業である。ゆえにその事業を成就させるため、この威光も必ずそこへ赴く。しかし久しく留まることはできぬ。
Verse 116
ऐन्द्रिनरस्तु भविता यस्य नारायण: सखा । सोर्ड्जुनेत्यभिविख्यात: पाण्डो: पुत्र: प्रतापवान्,“भगवान् नर, जिनके सखा भगवान् नारायण हैं, इन्द्रके अंशसे भूतलमें अवतीर्ण होंगे। वहाँ उनका नाम अर्जुन होगा और वे पाण्डुके प्रतापी पुत्र माने जायँगे
ヴァイシャンパーヤナは言った。「インドラの一分を宿し、ナーラーヤナを親しき友とするそのナラは、地上に生まれ出るであろう。そこで彼はアルジュナの名で名高くなり、パーンドゥの勇猛なる子として数えられる。」
Verse 117
तस्यायं भविता पुत्रो बालो भुवि महारथ: । ततः: षोडश वर्षाणि स्थास्यत्यमरसत्तमा:,'श्रेष्ठ देवगण! पृथ्वीपर यह वर्चा उन्हीं अर्जुनका पुत्र होगा, जो बाल्यावस्थामें ही महारथी माना जायगा। जन्म लेनेके बाद सोलह वर्षकी अवस्थातक यह वहाँ रहेगा
ヴァイシャンパーヤナは言った。「この者には一人の子が生まれよう。その子は幼くしてなお、地上において大車戦士として名を馳せる。しかるのち、不死者のうち最勝なる者たちよ、彼は十六歳に至るまでそこに留まるであろう。」
Verse 118
अस्य षोडशवर्षस्य स संग्रामो भविष्यति । यत्रांशा व: करिष्यन्ति कर्म वीरनिषूदनम्,“इसके सोलहवें वर्षमें वह महाभारत-युद्ध होगा, जिसमें आपलोगोंके अंशसे उत्पन्न हुए वीर-पुरुष शत्रुवीरोंका संहार करनेवाला अद्भुत पराक्रम कर दिखायेंगे
ヴァイシャンパーヤナは言った。「彼の十六年目に、あの大戦が起こる。そこでは、汝らの分身より生まれた英雄たちが驚くべき武勇の業を成し、敵の勇将を滅ぼす者となる。」
Verse 119
नरनारायणाभ्यां तु स संग्रामो विना कृत: । चक्रव्यूहं समास्थाय योधयिष्यन्ति व: सुरा:,“देवताओ! एक दिन जब कि उस युद्धमें नर और नारायण (अर्जुन और श्रीकृष्ण) उपस्थित न रहेंगे, उस समय शत्रुपक्षके लोग चक्रव्यूहकी रचना करके आप-लोगोंके साथ युद्ध करेंगे। उस युद्धमें मेरा यह पुत्र समस्त शत्रु-सैनिकोंको युद्धसे मार भगायेगा और बालक होनेपर भी उस अभेद्य व्यूहमें घुसकर निर्भय विचरण करेगा
ヴァイシャンパーヤナは言った。「その戦いは、ナラとナーラーヤナが不在であっても行われる。敵は輪陣(チャクラヴ्यूーハ)を組み、神々は汝らに対して戦うであろう。」この言葉は備えの武の掟を示す。最大の守護者がいない時でさえ争いは起こり得て、策と揺るがぬ勇気こそが決意を試すのである。
Verse 120
विमुखाउ्छात्रवान् सर्वान् कारयिष्यति मे सुत: । बाल: प्रविश्य च व्यूहमभेद्यं विचरिष्यति,“देवताओ! एक दिन जब कि उस युद्धमें नर और नारायण (अर्जुन और श्रीकृष्ण) उपस्थित न रहेंगे, उस समय शत्रुपक्षके लोग चक्रव्यूहकी रचना करके आप-लोगोंके साथ युद्ध करेंगे। उस युद्धमें मेरा यह पुत्र समस्त शत्रु-सैनिकोंको युद्धसे मार भगायेगा और बालक होनेपर भी उस अभेद्य व्यूहमें घुसकर निर्भय विचरण करेगा
ヴァイシャンパーヤナは言った。「わが子はあの敵どもをことごとく敗走させ、その驕りと頼みの守りを奪い去るであろう。まだ幼子でありながら、破ることかなわぬ戦陣に踏み入り、その内を恐れなく行き来するのだ。」
Verse 121
महारथानां वीराणां कदनं च करिष्यति । सर्वेषामेव शत्रूणां चतुर्थाशं नयिष्यति,“तथा बड़े-बड़े महारथी वीरोंका संहार कर डालेगा। आधे दिनमें ही महाबाहु अभिमन्यु समस्त शत्रुओंके एक चौथाई भागको यमलोक पहुँचा देगा। तदनन्तर बहुत-से महारथी एक साथ ही उसपर टूट पड़ेंगे और वह महाबाहु उन सबका सामना करते हुए संध्या होते-होते पुनः मुझसे आ मिलेगा। वह एक ही वंशप्रवर्तक वीर पुत्रको जन्म देगा, जो नष्ट हुए भरतकुलको पुनः धारण करेगा।” सोमका यह वचन सुनकर समस्त देवताओंने “तथास्तु/ कहकर उनकी बात मान ली और सबने चन्द्रमाका पूजन किया। राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने तुम्हारे पिताके पिताका जन्म-रहस्य बताया है
ヴァイシャンパーヤナは言った。「彼は大車戦士と勇士たちの間に大いなる殺戮をもたらし、敵のすべての四分の一を死王ヤマの国へ送るであろう。」
Verse 122
दिनार्थेन महाबाहु: प्रेतराजपुरं प्रति । ततो महारथैवीरि: समेत्य बहुशो रणे,“तथा बड़े-बड़े महारथी वीरोंका संहार कर डालेगा। आधे दिनमें ही महाबाहु अभिमन्यु समस्त शत्रुओंके एक चौथाई भागको यमलोक पहुँचा देगा। तदनन्तर बहुत-से महारथी एक साथ ही उसपर टूट पड़ेंगे और वह महाबाहु उन सबका सामना करते हुए संध्या होते-होते पुनः मुझसे आ मिलेगा। वह एक ही वंशप्रवर्तक वीर पुत्रको जन्म देगा, जो नष्ट हुए भरतकुलको पुनः धारण करेगा।” सोमका यह वचन सुनकर समस्त देवताओंने “तथास्तु/ कहकर उनकी बात मान ली और सबने चन्द्रमाका पूजन किया। राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने तुम्हारे पिताके पिताका जन्म-रहस्य बताया है
ヴァイシャンパーヤナは言った。「半日のうちに、その剛腕の英雄は多くの戦士を、亡者の主ヤマの都へ送り込む。やがて多くの大車戦士が集い、戦場で幾度も彼に襲いかかるであろう。」
Verse 123
दिनक्षये महाबाहुर्मया भूय: समेष्यति । एकं वंशकरं पुत्र वीर॑ वै जनयिष्यति,“तथा बड़े-बड़े महारथी वीरोंका संहार कर डालेगा। आधे दिनमें ही महाबाहु अभिमन्यु समस्त शत्रुओंके एक चौथाई भागको यमलोक पहुँचा देगा। तदनन्तर बहुत-से महारथी एक साथ ही उसपर टूट पड़ेंगे और वह महाबाहु उन सबका सामना करते हुए संध्या होते-होते पुनः मुझसे आ मिलेगा। वह एक ही वंशप्रवर्तक वीर पुत्रको जन्म देगा, जो नष्ट हुए भरतकुलको पुनः धारण करेगा।” सोमका यह वचन सुनकर समस्त देवताओंने “तथास्तु/ कहकर उनकी बात मान ली और सबने चन्द्रमाका पूजन किया। राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने तुम्हारे पिताके पिताका जन्म-रहस्य बताया है
日が尽きるころ、剛腕の英雄は再び私と相まみえる。彼はただ一人の勇ましい子をもうけて血脈を継がせる——滅びののちに家の筋を立て直し、担いゆく者を。
Verse 124
प्रणष्टं भारतं वंशं स भूयो धारयिष्यति । एतत् सोमवच: श्रुत्वा तथास्त्विति दिवौकस:,“तथा बड़े-बड़े महारथी वीरोंका संहार कर डालेगा। आधे दिनमें ही महाबाहु अभिमन्यु समस्त शत्रुओंके एक चौथाई भागको यमलोक पहुँचा देगा। तदनन्तर बहुत-से महारथी एक साथ ही उसपर टूट पड़ेंगे और वह महाबाहु उन सबका सामना करते हुए संध्या होते-होते पुनः मुझसे आ मिलेगा। वह एक ही वंशप्रवर्तक वीर पुत्रको जन्म देगा, जो नष्ट हुए भरतकुलको पुनः धारण करेगा।” सोमका यह वचन सुनकर समस्त देवताओंने “तथास्तु/ कहकर उनकी बात मान ली और सबने चन्द्रमाका पूजन किया। राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने तुम्हारे पिताके पिताका जन्म-रहस्य बताया है
ヴァイシャンパーヤナは言った。「彼は滅びに瀕したバラタの血統を、再び立て直し支えるであろう。」ソーマの言葉を聞くと、神々は「タター・アストゥ(然り、かくあれ)」と答えて同意した。
Verse 125
प्रत्यूचु: सहिता: सर्वे ताराधिपमपूजयन् । एवं ते कथितं राजंस्तव जन्म पितु: पितु:,“तथा बड़े-बड़े महारथी वीरोंका संहार कर डालेगा। आधे दिनमें ही महाबाहु अभिमन्यु समस्त शत्रुओंके एक चौथाई भागको यमलोक पहुँचा देगा। तदनन्तर बहुत-से महारथी एक साथ ही उसपर टूट पड़ेंगे और वह महाबाहु उन सबका सामना करते हुए संध्या होते-होते पुनः मुझसे आ मिलेगा। वह एक ही वंशप्रवर्तक वीर पुत्रको जन्म देगा, जो नष्ट हुए भरतकुलको पुनः धारण करेगा।” सोमका यह वचन सुनकर समस्त देवताओंने “तथास्तु/ कहकर उनकी बात मान ली और सबने चन्द्रमाका पूजन किया। राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने तुम्हारे पिताके पिताका जन्म-रहस्य बताया है
ヴァイシャンパーヤナは語った。「諸神は一つに結ばれて同意の声を返し、星々の主たる月神を礼拝した。かくして王よ、汝の父の父の誕生の由来を、我は汝に語り終えた—王統の継続の背後には、神々の承認と宇宙の秩序への敬虔があることを示すために。」
Verse 126
अन्नेर्भागं तु विद्धि त्वं धृष्टद्युम्न॑ं महारथम् । शिखण्डिनमथो राजन स्त्रीपूर्व विद्धि राक्षमम्,महाराज! महारथी धृष्टद्युम्नको तुम अग्निका भाग समझो। शिखण्डी राक्षसके अंशसे उत्पन्न हुआ था। वह पहले कन्यारूपमें उत्पन्न होकर पुनः पुरुष हो गया था
ヴァイシャンパーヤナは語った。「大車戦士ドリシュタデュムナは、火神アグニの一分であると知れ。さらに王よ、シカンディンは羅刹の血脈に属する者—かつて女として生まれ、のちに男となった者であると知れ。」
Verse 127
द्रौपदेयाश्व ये पडच बभूवुर्भरतर्षभ । विश्वान् देवगणान् विद्धि संजातान् भरतर्षभ,भरतर्षभ! तुम्हें मालूम होना चाहिये कि द्रौपदीके जो पाँच पुत्र थे, उनके रूपमें पाँच विश्वेदेवगण ही प्रकट हुए थे
ヴァイシャンパーヤナは語った。「バーラタ族の雄牛よ、ドラウパディーに生まれた五人の子らは、まことにヴィシュヴェデーヴァ(万神)の群れの顕現であると知れ。」
Verse 128
प्रतिविन्ध्य: सुतसोम: श्रुतकीर्तिस्तथापर: । नाकुलिस्तु शतानीक: श्रुतसेनश्न वीर्यवान्,उनके नाम क्रमशः इस प्रकार हैं--प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकीर्ति, नकुलनन्दन शतानीक तथा पराक्रमी श्रुतसेन
ヴァイシャンパーヤナは語った。「その名は順に、プラティヴィンドゥヤ、スータソーマ、シュルタキールティ。さらに、ナクラの子シャターニーカ、そして勇猛なるシュルタセーナである。」
Verse 129
शूरो नाम यदुश्रेष्ठो वसुदेवपिताभवत् । तस्य कन्या पृथा नाम रूपेणासदृशी भुवि,वसुदेवजीके पिताका नाम था शूरसेन। वे यदुवंशके एक श्रेष्ठ पुरुष थे। उनके पृथा नामवाली एक कन्या हुई, जिसके समान रूपवती स्त्री इस पृथ्वीपर दूसरी नहीं थी
ヴァイシャンパーヤナは語った。「ヤドゥ族の中にシュूरラ(Śūra)という最もすぐれた者があり、彼はヴァスデーヴァの父となった。彼にはプリター(Pṛthā)という娘がいて、その美しさは地上に比ぶべき者がなかった。」
Verse 130
पितुः स्वस्नीयपुत्राय सो5नपत्याय वीर्यवान् । अग्रमग्रे प्रतिज्ञाय स्वस्यापत्यस्य वै तदा,उग्रसेनके फुफेरे भाई कुन्तिभोज संतानहीन थे। पराक्रमी शूरसेनने पहले कभी उनके सामने यह प्रतिज्ञा की थी कि “मैं अपनी पहली संतान आपको दे दूँगा”
ヴァイシャンパーヤナは語った。父の姉の子が子孫なくしているのを見たその剛勇の者は、かつて彼に厳粛な誓いを立てていた――「我が初子を汝に与えよう」と。これは、親族としての義務と子なき者への憐れみから生まれた拘束力ある誓約であり、個人の誓願が王統の運命をいかに形づくるかを示すのである。
Verse 131
अग्रजातेति तां कन्यां शूरो<नुग्रहकाड्क्षया । अददात् कुन्तिभोजाय स तां दुहितरं तदा,तदनन्तर सबसे पहले उनके यहाँ कन्या ही उत्पन्न हुई। शूरसेनने अनुग्रहकी इच्छासे राजा कुन्तिभोजको अपनी वह पुत्री पृथा प्रथम संतान होनेके कारण गोद दे दी
ヴァイシャンパーヤナは語った。彼女が初子の娘であったゆえに、シュūrasenaは恩寵を示さんとして、その乙女をその時クンティボージャ王に与え、自らの娘を王の娘として育てさせたのである。
Verse 132
सा नियुक्ता पितुर्गेहे ब्राह्मणातिथिपूजने । उग्र॑ पर्यचरद् घोरें ब्राह्मणं संशितव्रतम्,पिताके घरपर रहते समय पृथाको ब्राह्मणों और अतिथियोंके स्वागत-सत्कारका कार्य सौंपा गया था। एक दिन उसने कठोर व्रतका पालन करनेवाले भयंकर क्रोधी तथा उग्र प्रकृतिवाले एक ब्राह्मण महर्षिकी, जो धर्मके विषयमें अपने निश्चयको छिपाये रखते थे और लोग जिन्हें दुर्वासाके नामसे जानते हैं, सेवा की। वे ऊपरसे तो उग्र स्वभावके थे, परंतु उनका हृदय महान् होनेके कारण सबके द्वारा प्रशंसित था। पृथाने पूरा प्रयत्न करके अपनी सेवाओंद्वारा मुनिको संतुष्ट किया
ヴァイシャンパーヤナは語った。父の家に住むあいだ、プリターは婆羅門を敬い、客人をもてなす務めを託されていた。ある時、彼女は厳しい誓戒に堅く、恐るべきほど気性荒く怒りやすい婆羅門の大仙に、怠りなく仕えた。外面は苛烈であっても内心は大いなる器で、万人に讃えられる者であった。プリターは細やかな奉仕によって、その苦行者を満足させようと努めたのである。
Verse 133
निगूढनिश्चयं धर्मे यं तं दुर्वाससं विदु: । तमुग्रं शंसितात्मानं सर्वयत्नैरतोषयत्,पिताके घरपर रहते समय पृथाको ब्राह्मणों और अतिथियोंके स्वागत-सत्कारका कार्य सौंपा गया था। एक दिन उसने कठोर व्रतका पालन करनेवाले भयंकर क्रोधी तथा उग्र प्रकृतिवाले एक ब्राह्मण महर्षिकी, जो धर्मके विषयमें अपने निश्चयको छिपाये रखते थे और लोग जिन्हें दुर्वासाके नामसे जानते हैं, सेवा की। वे ऊपरसे तो उग्र स्वभावके थे, परंतु उनका हृदय महान् होनेके कारण सबके द्वारा प्रशंसित था। पृथाने पूरा प्रयत्न करके अपनी सेवाओंद्वारा मुनिको संतुष्ट किया
ヴァイシャンパーヤナは語った。法(ダルマ)に関する己の決意を秘しているその者を、人々はドゥルヴァーサスと知っていた。彼は荒々しく怒りやすいが、魂は高潔で万人に讃えられる。プリターはあらゆる努力を尽くして彼を満足させた。
Verse 134
तुष्टोडभिचारसंयुक्तमाचचक्षे यथाविधि । उवाच चैनां भगवान् प्रीतो5स्मि सुभगे तव,भगवान् दुर्वासाने संतुष्ट होकर पृथाको प्रयोग-विधिसहित एक मन्त्रका विधिपूर्वक उपदेश किया और कहा--'सुभगे! मैं तुमपर बहुत प्रसन्न हूँ
ヴァイシャンパーヤナは語った。満足した尊き仙人は、儀礼における用法を伴う一つの真言(マントラ)を、定められた作法のとおり彼女に授けた。さらに祝福されたその聖者は言った――「幸いなる乙女よ、我は汝に大いに満足した」。
Verse 135
य॑ य॑ देवं त्वमेतेन मन्त्रेणावाहयिष्यसि । तस्य तस्य प्रसादात् त्वं देवि पुत्राउजनिष्यसि,'देवि! तुम इस मन्त्रद्वारा जिस-जिस देवताका आवाहन करोगी, उसी-उसीके कृपाप्रसादसे पुत्र उत्पन्न करोगी”
ヴァイシャンパーヤナは言った。「女神のごとき御方よ、この真言によって汝が招来するいかなる神であれ、その神の御慈悲の加護により、汝は男子をもうけるであろう。」
Verse 136
एवमुक्ता च सा बाला तदा कौतूहलान्विता । कन्या सती देवमर्कमाजुहाव यशस्विनी,दुर्वासाके ऐसा कहनेपर वह सती-साध्वी यशस्विनी बाला यद्यपि अभी कुमारी कन्या थी, तो भी कौतूहलवश उसने भगवान् सूर्यका आवाहन किया
かく告げられるや、若き乙女は好奇の念に満たされた。まだ嫁がぬ処女でありながら、貞淑にして名高き彼女は、ただその好奇心ゆえに太陽神アルカを招来した。
Verse 137
प्रकाशकर्ता भगवांस्तस्यां गर्भ दधौ तदा । अजीजनत् सुतं चास्यां सर्वशस्त्रभृतां वरम्,तब सम्पूर्ण जगतमें प्रकाश फैलानेवाले भगवान् सूर्यने कुन्तीके उदरमें गर्भ स्थापित किया और उस गर्भसे एक ऐसे पुत्रको जन्म दिया, जो समस्त श्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ था
ヴァイシャンパーヤナは言った。かくして光を成す福徳の太陽神は、彼女の胎内に胚を宿らせた。その懐妊より、彼女は一子を産んだが、その子は武器を執る者すべての中で最も卓越する者となる。
Verse 138
सकुण्डलं सकवचं देवगर्भश्रियान्वितम् । दिवाकरसमं दीप्त्या चारुसर्वाजड़भूषितम्,वह कुण्डल और कवचके साथ ही प्रकट हुआ था। देवताओंके बालकोंमें जो सहज कान्ति होती है, उसीसे वह सुशोभित था। अपने तेजसे वह सूर्यके समान जान पड़ता था। उसके सभी अंग मनोहर थे, जो उसके सम्पूर्ण शरीरकी शोभा बढ़ा रहे थे
ヴァイシャンパーヤナは言った。彼は耳環と胸甲をすでに備えて現れ、神々の子に固有の生得の輝きを帯びていた。その光彩は太陽に比すべく、四肢のいずれも麗しく、全身の優美をいよいよ際立たせた。
Verse 139
निगूहमाना जात वै बन्धुपक्षभयात् तदा | उत्ससर्ज जले कुन्ती तं कुमारं यशस्विनम्,उस समय कुन्तीने पिता-माता आदि बान्धव-पक्षके भयसे उस यशस्वी कुमारको छिपाकर एक पेटीमें रखकर जलमें छोड़ दिया
ヴァイシャンパーヤナは言った。ついでクンティーは、親族一門を恐れて新生児を秘し、名高きその幼子を箱に納めて水に流し、漂わせた。
Verse 140
तमुत्सूष्टं जले गर्भ राधाभर्ता महायशा: । राधाया: कल्पयामास पुत्रं सोडधिरथस्तदा,जलमें छोड़े हुए उस बालकको राधाके पति महायशस्वी अधिरथ सूतने लेकर राधाकी गोदमें दे दिया और उसे राधाका पुत्र बना लिया
ヴァイシャンパーヤナは語った。水に捨てられていた嬰児を見て、ラーダーの夫で名高い御者アディラタはその子を抱き上げ、正式にラーダーの子として受け入れた。
Verse 141
चक्रतुर्नामधेयं च तस्य बालस्य तावुभौ । दम्पती वसुषेणेति दिक्षु सर्वासु विश्वुतम्,उन दोनों दम्पतिने उस बालकका नाम वसुषेण रखा। वह सम्पूर्ण दिशाओंमें भलीभाँति विख्यात था
ヴァイシャンパーヤナは語った。夫婦はその子に「ヴァスシェーナ」という名を授けた。かくしてその名は四方に知れ渡った。
Verse 142
संवर्धमानो बलवान् स्वस्त्रिषूत्तमो5भवत् | वेदाड़ानि च सर्वाणि जजाप जयतां वर:,बड़ा होनेपर वह बलवान् बालक सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्रोंकोी चलानेकी कलामें उत्तम हुआ। उस विजयी वीरने सम्पूर्ण वेदांगोंका अध्ययन कर लिया
成長するにつれ、その少年は剛健となり、武器と飛び道具の扱いにおいて抜きんでた。勝者の中の第一人者たる彼は、厳しい修学と誦習によってヴェーダの補助学(ヴェーダーンガ)全体をも修め尽くした。
Verse 143
यस्मिन् काले जपन्नास्ते धीमान् सत्यपराक्रम: । नादेयं ब्राह्मणेष्वासीत् तस्मिन् काले महात्मन:,वसुषेण (कर्ण) बड़ा बुद्धिमान् और सत्यपराक्रमी था। जिस समय वह जपमें लगा होता, उस समय उस महात्माके पास ऐसी कोई वस्तु नहीं थी, जिसे वह ब्राह्मणोंके माँगनेपर न दे डाले
ヴァスシェーナ(カルナ)はきわめて聡明で、真実に根ざした勇を備えていた。彼がジャパ(真言の反復誦持)に没して座すとき、その大丈夫は、バラモンに乞われて与えぬものを何一つ持たなかった。
Verse 144
तमिन्द्रो ब्राह्मणो भूत्वा पुत्रार्थे भूतभावन: । ययाचे कुण्डले वीर॑ कवचं च सहाड्गजजम्,भूतभावन इन्द्रने अपने पुत्र अर्जुनके हितके लिये ब्राह्मणका रूप धारण करके वीर कर्णसे दोनों कुण्डल तथा उसके शरीरके साथ ही उत्पन्न हुआ कवच माँगा
ヴァイシャンパーヤナは語った。わが子のために、生きとし生けるものの恩恵者インドラはバラモンの姿を取り、勇士カルナに、二つのクンダラ(耳飾り)と、身体とともに生まれついた鎧(カヴァチャ)を乞い求めた。
Verse 145
उत्कृत्य कर्णो ह्ददात् कवचं कुण्डले तथा । शक्ति शक्रो ददौ तस्मै विस्मितश्नलेदमब्रवीत्,कर्णने अपने शरीरमें चिपके हुए कवच और कुण्डलोंको उधेड़कर दे दिया। इन्द्रने विस्मित होकर कर्णको एक शक्ति प्रदान की और कहा--दुर्धर्ष वीर! तुम देवता, असुर, मनुष्य, गन्धर्व, नाग और राक्षसोंमेंसे जिसपर भी इस शक्तिको चलाओगे, वह एक व्यक्ति निश्चय ही अपने प्राणोंसे हाथ धो बैठेगा”
ヴァイシャンパーヤナは語った。カルナは、自らの身に生まれつき貼りついていた甲冑と耳飾りとを、身を裂くようにして引き剥がし、施しとして差し出した。驚嘆したインドラは、神なる投槍「シャクティ(śakti)」を授け、こう告げた。「おお、征服しがたき勇士よ。神々、アスラ、人間、ガンダルヴァ、ナーガ、ラクシャサのいずれであれ、このシャクティを投げつけられた者は、そのただ一人、必ず命を落とすであろう。」
Verse 146
देवासुरमनुष्याणां गन्धर्वोरगरक्षसाम् । यस्मिन् क्षेप्स्यसि दुर्धर्ष स एको न भविष्यति,कर्णने अपने शरीरमें चिपके हुए कवच और कुण्डलोंको उधेड़कर दे दिया। इन्द्रने विस्मित होकर कर्णको एक शक्ति प्रदान की और कहा--दुर्धर्ष वीर! तुम देवता, असुर, मनुष्य, गन्धर्व, नाग और राक्षसोंमेंसे जिसपर भी इस शक्तिको चलाओगे, वह एक व्यक्ति निश्चय ही अपने प्राणोंसे हाथ धो बैठेगा”
ヴァイシャンパーヤナは語った。「おお、征服しがたき勇士よ。神々、アスラ、人間、ガンダルヴァ、ナーガ、ラクシャサのうち、誰にこの武器を投げつけようとも、そのただ一人は生き延びることはない。」
Verse 147
पुरा नाम च तस्यासीद् वसुषेण इति क्षितौ । ततो वैकर्तन: कर्ण: कर्मणा तेन सो5भवत्,पहले कर्णका नाम इस पृथ्वीपर वसुषेण था। फिर कवच और कुण्डल काटनेके कारण वह वैकर्तन नामसे प्रसिद्ध हुआ
ヴァイシャンパーヤナは語った。かつてこの地上で、彼の名はヴァスシェーナ(Vasuṣeṇa)であった。だがその後、生まれつきの甲冑と耳飾りを切り離したその行いゆえに、カルナは「ヴァイカルタナ(Vaikartana)」の異名で知られるようになった。
Verse 148
आमुक्तकवचो वीरो यस्तु जज्ञे महायशा: । स कर्ण इति विख्यात: पृथाया: प्रथम: सुतः,जो महायशस्वी वीर कवच धारण किये हुए ही उत्पन्न हुआ, वह पृथाका प्रथम पुत्र कर्ण नामसे ही सर्वत्र विख्यात था
ヴァイシャンパーヤナは語った。大いなる名声を備え、甲冑をまとったまま生まれ出たその勇士は、プリター(Pṛthā)の第一子として、カルナの名で遍く世に知られていた。
Verse 149
स तु सूतकुले वीरो ववृधे राजसत्तम | कर्ण नरवरश्रेष्ठ सर्वशस्त्रभूृतां वरम्,महाराज! वह वीर सूतकुलमें पाला-पोसा जाकर बड़ा हुआ था। नरश्रेष्ठ कर्ण सम्पूर्ण शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ था
ヴァイシャンパーヤナは語った。おお、王の中の最上なる者よ。あの勇士カルナは、スータ(御者にして讃歌をうたう者)の家に養われ、そこで成長した。武器を帯びる者すべての中で、カルナは人中第一と称えられ、最も優れた者と見なされた。
Verse 150
दुर्योधनस्यथ सचिवं मित्र शत्रुविनाशनम् | दिवाकरस्य त॑ विद्धि राजन्नंशमनुत्तमम्,वह दुर्योधनका मन्त्री और मित्र होनेके साथ ही उसके शत्रुओंका नाश करनेवाला था। राजन! तुम कर्णको साक्षात् सूर्यदेवका सर्वोत्तम अंश जानो
ヴァイシャンパーヤナは語った。「彼はドゥルヨーダナの大臣にして友であり、その敵を滅ぼす者であった。王よ、彼を太陽神の比類なき分身と知れ。」
Verse 151
यस्तु नारायणो नाम देवदेव: सनातन: । तस्यांशो मानुषेष्वासीद् वासुदेव: प्रतापवान्,देवताओंके भी देवता जो सनातन पुरुष भगवान् नारायण हैं, उन्हींके अंशस्वरूप प्रतापी वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण मनुष्योंमें अवतीर्ण हुए थे
ヴァイシャンパーヤナは語った。「ナーラーヤナ—永遠にして神々の神、主の中の主—その御方の一分が人間界に顕れ、威力あるヴァースデーヴァ(クリシュナ)となった。これは凡庸な誕生ではなく、ダルマを支え、衆生を至上の善へ導くための神聖なる降臨である。」
Verse 152
शेषस्यांशश्ष नागस्य बलदेवो महाबल: । सनत्कुमार प्रद्युम्न॑ विद्धि राजन् महौजसम्,महाबली बलदेवजी शेषनागके अंश थे। राजन! महातेजस्वी प्रद्युम्मनको तुम सनत्कुमारका अंश जानो
ヴァイシャンパーヤナは語った。「大いなる力を備えたバラデーヴァは、大蛇シェーシャの一分である。さらに王よ、強大な光輝を放つプラデュムナは、サナトクマーラの一分と知れ。」
Verse 153
एवमन्ये मनुष्येन्द्रा बहवों5शा दिवौकसाम् | जज्ञिरे वसुदेवस्य कुले कुलविवर्धना:,इस प्रकार वसुदेवजीके कुलमें बहुत-से दूसरे-दूसरे नरेन्द्र उत्पन्न हुए, जो देवताओंके अंश थे। वे सभी अपने कुलकी वृद्धि करनेवाले थे
ヴァイシャンパーヤナは語った。「同じように、ヴァースデーヴァの家系には他にも多くの王たちが生まれた。いずれも神々の部分的顕現であり、自らの一族を繁栄させた者たちであった。」
Verse 154
गणस्त्वप्सरसां यो वै मया राजन प्रकीर्तित: । तस्य भाग: क्षितौ जज्ञे नियोगाद् वासवस्य ह,महाराज! मैंने अप्सराओोंके जिस समुदायका वर्णन किया है, उसका अंश भी इन्द्रके आदेशसे इस पृथ्वीपर उत्पन्न हुआ था
ヴァイシャンパーヤナは語った。「王よ、私が語ったアプサラスの群れについて言えば、その一部が、まさしくヴァーサヴァ(インドラ)の命により、この地上に生まれ出たのである。」
Verse 155
तानि षोडश देवीनां सहस्राणि नराधिप । बभूवुर्मानुषे लोके वासुदेवपरिग्रह:,नरेश्वर! वे अप्सराएँ मनुष्यलोकमें सोलह हजार देवियोंके रूपमें उत्पन्न हुई थीं, जो सब-की-सब भगवान् श्रीकृष्णकी पत्नियाँ हुईं
ヴァイシャンパーヤナは言った。「大王よ、かの一万六千の天界の乙女たちは人間界に生まれ、一万六千の王女のごとき女となり、ことごとくヴァースデーヴァ(聖なるクリシュナ)の妃となった。これは神意に定められた結縁である。」
Verse 156
श्रियस्तु भाग: संजज्ञे रत्यर्थ पृथिवीतले । भीष्मकस्य कुले साध्वी रुक्मिणी नाम नामत:,नारायणस्वरूप भगवान् श्रीकृष्णको आनन्द प्रदान करनेके लिये भूतलपर विदर्भराज भीष्मकके कुलमें सती-साध्वी रुक्मिणीदेवीके नामसे लक्ष्मीजीका ही अंश प्रकट हुआ था
ヴァイシャンパーヤナは言った。「地上の世に歓喜と吉祥をもたらすため、シュリー(ラクシュミー)の一分が生まれ、ビーシュマカの高貴なる家に、貞淑なるルクミニーという名で現れた。」
Verse 157
द्रौपदी त्वथ संजज्ञे शचीभागादनिन्दिता । द्रुपदस्य कुले कन्या वेदिमध्यादनिन्दिता,सती-साध्वी द्रौपदी शचीके अंशसे उत्पन्न हुई थी। वह राजा द्रुपदके कुलमें यज्ञकी वेदीके मध्यभागसे एक अनिन्द्य सुन्दरी कुमारी कन्याके रूपमें प्रकट हुई थी
ヴァイシャンパーヤナは言った。「ついで、非難の余地なきドラウパディーが、シャチーの一分より生まれた。ドルパダ王の家において、彼女は供犠の祭壇のまさに中央から乙女として現れた—その奇瑞の誕生は、天の承認と徳の清らかさを示している。」
Verse 158
नातिहस्वा न महती नीलोत्पलसुगन्धिनी । पद्मायताक्षी सुश्रोणी स्वसिताज्चितमूर्थजा,वह न तो बहुत छोटी थी और न बहुत बड़ी ही। उसके अंगोंसे नीलकमलकी सुगन्ध फैलती रहती थी। उसके नेत्र कमलदलके समान सुन्दर और विशाल थे, नितम्बभाग बड़ा ही मनोहर था और उसके काले-काले घूँघराले बालोंका सौन्दर्य भी अद्भुत था
ヴァイシャンパーヤナは言った。「彼女は小さすぎもせず、大きすぎもしなかった。青蓮華の香りがその肢体から漂うかのようであった。眼は蓮の花弁のごとく大きく麗しく、腰つきはしなやかで、黒く巻く髪の美しさもまた比類なかった。」
Verse 159
सर्वलक्षणसम्पूर्णा वैदूर्यमणिसंनिभा । पज्चानां पुरुषेन्द्राणां चित्तप्रमथनी रह:,वह समस्त शुभ लक्षणोंसे सम्पन्न तथा वैदूर्य मणिके समान कान्तिमती थी। एकान्तमें रहकर वह पाँचों पुरुषप्रवर पाण्डवोंके मनको मुग्ध किये रहती थी
ヴァイシャンパーヤナは言った。「彼女はあらゆる吉祥の相を具え、猫眼石(ヴァイドゥーリヤ)のごとく輝いていた。人目を避けてなお、五人の最上の男—パーンダヴァの王子たち—の心を絶えず魅了し、揺り動かしたのである。」
Verse 160
सिद्धिर्धतिश्व ये देव्यौ पज्चानां मातरौ तु ते । कुन्ती माद्री च जज्ञाते मतिस्तु सुबलात्मजा,सिद्धि और धृति नामवाली जो दो देवियाँ हैं, वे ही पाँचों पाण्डवोंकी दोनों माताओं-- कुन्ती और माद्रीके रूपमें उत्पन्न हुई थीं। सुबल-नरेशकी पुत्री गान्धारीके रूपमें साक्षात् मतिदेवी ही प्रकट हुई थीं
ヴァイシャンパーヤナは語った。「シッディとドゥリティという二柱の女神は地上に生まれ、五人のパーンドゥ子の二人の母――クンティーとマードリー――となった。さらに女神マティそのものが、スバラ王の娘ガーンダーリーとして顕現したのである。」かくして叙事詩は、クル族—パーンドゥ族の主要な母たちを、成就・堅忍・明察という神聖な徳の化身として描き、来たる争いを形づくる道徳と心の力が聖なる起源に根差すことを示唆する。
Verse 161
इति देवासुराणां ते गन्धर्वाप्सरसां तथा । अंशावतरणं राजन् राक्षसानां च कीर्तितम्,राजन! इस प्रकार तुम्हें देवताओं, असुरों, गन्धर्वों, अप्सराओं तथा राक्षसोंके अंशोंका अवतरण बताया गया। युद्धमें उन््मत्त रहनेवाले जो-जो राजा इस पृथ्वीपर उत्पन्न हुए थे और जो-जो महात्मा क्षत्रिय यादवोंके विशाल कुलमें प्रकट हुए थे, वे ब्राह्मण, क्षत्रिय अथवा वैश्य जो भी रहे हैं, उन सबके स्वरूपका परिचय मैंने तुम्हें दे दिया है। मनुष्यको चाहिये कि वह दोष-दृष्टिका त्याग करके इस अंशावतरणके प्रसंगको सुने। यह धन, यश, पुत्र, आयु तथा विजयकी प्राप्ति करानेवाला है
ヴァイシャンパーヤナは言った。「かくして、王よ、神々とアスラ、またガンダルヴァとアプサラス、さらにラクシャサたちの“分身”(aṃśa)の降下について、汝に語り終えた。」文脈上これは、地上の王侯や英雄の系譜に現れた「部分的化身」の列挙を締めくくる言葉であり、来たる出来事を単なる人間同士の争いではなく宇宙的な合流として示し、聞き手に欠点探しをせず受け取るよう促している。
Verse 162
ये पृथिव्यां समुद्भूता राजानो युद्ध दुर्मदा: । महात्मानो यदूनां च ये जाता विपुले कुले,राजन! इस प्रकार तुम्हें देवताओं, असुरों, गन्धर्वों, अप्सराओं तथा राक्षसोंके अंशोंका अवतरण बताया गया। युद्धमें उन््मत्त रहनेवाले जो-जो राजा इस पृथ्वीपर उत्पन्न हुए थे और जो-जो महात्मा क्षत्रिय यादवोंके विशाल कुलमें प्रकट हुए थे, वे ब्राह्मण, क्षत्रिय अथवा वैश्य जो भी रहे हैं, उन सबके स्वरूपका परिचय मैंने तुम्हें दे दिया है। मनुष्यको चाहिये कि वह दोष-दृष्टिका त्याग करके इस अंशावतरणके प्रसंगको सुने। यह धन, यश, पुत्र, आयु तथा विजयकी प्राप्ति करानेवाला है
ヴァイシャンパーヤナは語った。「地上に起こり、戦の狂気に酔いしれた王たち、また広大なるヤドゥ族の系譜に生まれた大魂の戦士たち——そのすべてについて、我はすでに真の性質と由来を説き明かした。人はこの分身降下の物語を、咎を探す心なく聴くべきである。これは富と名声、子孫、長寿、そして勝利をもたらす。」
Verse 163
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्या मया ते परिकीर्तिता: । धन्यं यशस्यं पुत्रीयमायुष्यं विजयावहम् । इदमंशावतरणं श्रोतव्यमनसूयता,राजन! इस प्रकार तुम्हें देवताओं, असुरों, गन्धर्वों, अप्सराओं तथा राक्षसोंके अंशोंका अवतरण बताया गया। युद्धमें उन््मत्त रहनेवाले जो-जो राजा इस पृथ्वीपर उत्पन्न हुए थे और जो-जो महात्मा क्षत्रिय यादवोंके विशाल कुलमें प्रकट हुए थे, वे ब्राह्मण, क्षत्रिय अथवा वैश्य जो भी रहे हैं, उन सबके स्वरूपका परिचय मैंने तुम्हें दे दिया है। मनुष्यको चाहिये कि वह दोष-दृष्टिका त्याग करके इस अंशावतरणके प्रसंगको सुने। यह धन, यश, पुत्र, आयु तथा विजयकी प्राप्ति करानेवाला है
ヴァイシャンパーヤナは語った。「かくして我は、バラモン、クシャトリヤ、ヴァイシャを汝に説き示した。この分身降下(aṃśāvataraṇa)の物語は吉祥であり、富と名声、子孫、長寿、そして勝利をもたらす。王よ、嫉みや咎め立ての心なく聴くがよい。」
Verse 164
अंशावतरणं श्रुत्वा देवगन्धर्वरक्षसाम् । प्रभवाप्ययवित् प्राज्ञो न कृच्छेष्ववसीदति,देवता, गन्धर्व तथा राक्षसोंके इस अंशावतरणको सुनकर विश्वकी उत्पत्ति और प्रलयके अधिष्ठान परमात्माके स्वरूपको जाननेवाला प्राज्ञ पुरुष बड़ी-बड़ी विपत्तियोंमें भी दुःखी नहीं होता
神々・ガンダルヴァ・ラクシャサの分身降下を聞き、宇宙の生起と消滅の拠り所として主(至上者)を悟る賢者は、いかなる苛烈な艱難のただ中にあっても、絶望に沈むことがない。
The dilemma concerns how desire and immediacy can be reconciled with dharma: whether a union without the father’s immediate participation is legitimate, and which vivāha form is ethically permissible for a kṣatriya in this setting.
Ethical action is framed as context-sensitive: dharma is articulated through recognized social categories (vivāha types, varṇa appropriateness), but it is stabilized by truthful promises that protect vulnerable parties and secure legitimate succession.
There is no explicit phalaśruti formula; instead, a functional meta-commentary appears as Kaṇva’s validation and prophecy, which positions the union as dharmya and narratively anchors the future imperial outcome of their lineage.