Mahabharata Adhyaya 183
Drona ParvaAdhyaya 18342 Versesकृष्ण के संकेत के अनुसार शत्रु-गर्जना बढ़ती है और अर्जुन की ओर की सेनाएँ/दल दसों दिशाओं में विद्रवित—क्षणिक रूप से पांडव पक्ष पर दबाव और अव्यवस्था का संकेत।

Adhyaya 183

Chapter Arc: रणभूमि के कोलाहल के बीच अर्जुन के मन में एक पुरानी जिज्ञासा उठती है—श्रीकृष्ण ने पहले जरासंध, शिशुपाल और अन्य ‘धर्मद्रोहियों’ का वध क्यों कराया, और उस नीति का युद्ध के आज के संकट से क्या संबंध है। → श्रीकृष्ण (वायुदेव-वचन के रूप में) समझाते हैं कि यदि जरासंध, शिशुपाल, नैषध आदि महाबल पूर्व में न मारे जाते, तो वे आज दुर्योधन के पक्ष में अनिवार्यतः जा मिलते और कौरव-बल को भयावह बना देते। कथा-धारा में जरासंध की उत्पत्ति (दो माताओं से आधा-आधा शरीर, ‘जरा’ द्वारा संधान) और उसकी अजेयता का वर्णन आता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समय रहते अधर्म-शक्ति का निराकरण क्यों आवश्यक था। → रण-चित्र में गदा का अस्त्र-वेग से प्रतिहत होकर पृथ्वी को विदीर्ण करते हुए गिरना—धरती का कम्पन और पर्वतों-सा थरथराना—युद्ध की चरम हिंसा और महाबलियों की टक्कर को चरम बिंदु पर ले आता है; साथ ही कृष्ण का निर्णायक आश्वासन कि कर्ण-विषयक चिंता का ‘उपाय’ वे स्वयं बताएँगे, रणनीति को निर्णायक मोड़ देता है। → कृष्ण का निष्कर्ष स्थिर होता है: पूर्वकाल के वध केवल व्यक्तिगत शत्रुता नहीं, बल्कि भविष्य के महायुद्ध में अधर्म के संभावित संधि-बल को काटने की दूरदर्शी नीति थे; और वर्तमान में भी अर्जुन को कर्ण के विरुद्ध मार्गदर्शन मिलेगा। → कृष्ण द्वारा संकेतित ‘उपाय’ क्या है—जिससे अर्जुन कर्ण को ‘प्रसहिष्यसि’—यह रहस्य अगले प्रसंग के लिए टिका रहता है।

Shlokas

Verse 1

हि 5 बछ। हि न न एकाशीरत्याधिकशततमो< ध्याय: भगवान्‌ श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना अजुन उवाच कथमस्मद्ितार्थ ते कैश्व योगैर्जनार्दन । जरासंधप्रभूतयो घातिता: पृथिवीश्व॒रा:

قال أرجونا: «يا جاناردانا، من أجل خيرنا، بأي وسائل وبأي حيلٍ وتدابير أوقعتَ قتلَ ملوك الأرض—وفي مقدمتهم جاراسنده؟»

Verse 2

श्रीवायुदेव उवाच जरासंधश्षेदिराजो नैषादिश्व महाबल: । यदि स्युर्न हता: पूर्वमिदानीं स्युर्भयंकरा:

قال شري فايوديفا: «جاراسنده، وملك تشيدي (شيشوبالا)، وذلك النيصادي الجبار (إيكالافيا)—لو لم يُقتل هؤلاء من قبل، لأصبحوا الآن خصوماً بالغَي الرهبة والخطر.»

Verse 3

दुर्योधनस्तानवश्यं वृणुयाद्‌ रथसत्तमान्‌ | तेडस्मासु नित्यविद्विष्टा: संश्रयेयुश्न कौरवान्‌

قال فايُو: «إن دوريوذانا سيطلب لا محالة أولئك الصفوة من فرسان المركبات حلفاء له؛ وهم، لعداوتهم الدائمة لنا، سيأوون يقيناً إلى جانب الكورافا.»

Verse 4

ते हि वीरा महेष्वासा: कृतास्त्रा दृढयोधिन: । धार्तराष्ट्रां चमूं कृत्स्नां रक्षेयुरमरा इव

قال فايُو: «فأولئك الأبطال كانوا رماةً عظاماً، قد أُحكمت لهم علوم السلاح، وثابتين في القتال. لذلك كان بوسعهم أن يحموا جيش الدهارتاراشترا كله كما لو أن الخالدين أنفسهم يحرسونه.»

Verse 5

सूतपुत्रो जरासंधश्वेदिराजो निषादज: । सुयोधनं समाश्रित्य जयेयु: पृथिवीमिमाम्‌

قال فايُو: «كارنا ابن السُّوتا (سائق العربة)، وجاراسنده، وملك تشيدي، وذلك المولود من النيصادة (إيكالافيا)—لو أن هؤلاء الأربعة احتمَوا بسويوذانا (دوريوذانا) قائداً لهم ووقفوا في صفّه، لَغلبوا هذه الأرض كلها لا محالة.»

Verse 6

योगैरपि हता यैस्ते तन्‍्मे शूणु धनंजय । अजय्या हि विना योगैर्म॒धे ते दैवतैरपि

قال الإله فايوديفا: «اسمع مني يا دهننْجَيا، بأيِّ حِيَلٍ وتدابير أُسقِطوا. فلولا اتخاذُ تلك الوسائل لكانوا في ساحة القتال حقًّا لا يُقهَرون—حتى الآلهة أنفسهم لا يقدرون عليهم، يا دهننْجَيا».

Verse 7

एकैको हि पृथक्‌ तेषां समस्तां सुरवाहिनीम्‌ । योधयेत्‌ समरे पार्थ लोकपालाभिरक्षिताम्‌

قال فايُو: «يا ابنَ كُنتي، إن كلَّ واحدٍ من أولئك الأبطال—إذا أُخِذ على حِدة—كان قادرًا، وحده في ساحة الوغى، أن يقاتل جيشَ الآلهة بأسره، وإن كان محروسًا باللوكبالات (حُرّاس الجهات).»

Verse 8

जरासंधो हि रुषितो रौहिणेयप्रधर्षित: । अस्मद्वधार्थ चिक्षेप गदां वै सर्वधातिनीम्‌

قال فايُو: «إن جاراسندها، وقد استبدّ به الغضب لأنه أُذِلَّ على يد راوهيṇeya (بالاراما)، قذف—قاصدًا هلاكَنا—هراوته، وهي حقًّا سلاحٌ يجلب الموتَ للجميع.»

Verse 9

सीमन्तमिव कुर्वाणा नभस: पावकप्रभा । अदृश्यतापतन्ती सा शक्रमुक्ता यथाशनि:,अग्निके समान प्रज्वलित वह गदा इन्द्रके चलाये हुए वज्गजकी भाँति आकाशमें सीमान्त- रेखा-सी बनाती हुई वहाँ गिरती दिखायी दी

كانت متوهِّجةً ببريق النار، تُرى تهوي عبر السماء كأنها ترسم خطًّا فاصلًا في قبة العُلا—كصاعقةٍ أطلقها إندرا.

Verse 10

तामापततन्तीं दृष्टवैव गदां रोहिणिनन्दन: । प्रतिघातार्थमस्त्रं वै स्थूणाकर्णमवासृजत्‌

فلما رأى بالاراما ابنَ روهِني تلك الهراوة تهوي، أطلق سلاحًا يُدعى «ستهوṇاكَرْنا» ليردَّ الضربة ويُبطل أثرها.

Verse 11

अस्त्रवेगप्रतिहता सा गदा प्रापतद्‌ भुवि । दारयन्ती धरां देवीं कम्पयन्तीव पर्वतान्‌,उस अस्त्रके वेगसे प्रतिहत होकर वह गदा पृथ्वीदेवीको विदीर्ण करती और पर्वतोंको कँपाती हुई-सी भूतलपर गिर पड़ी

وقد صُدَّت تلك الهراوةُ بقوةِ السلاح، فسقطت على الأرض—تَشُقُّ تُرابَ الأرضِ الإلهيّة وكأنها تُرجِفُ الجبال.

Verse 12

तत्र सा राक्षसी घोरा जरानाम्नी सुविक्रमा | संदधे सा हि संजातं जरासंधमरिंदमम्‌

وفي الموضع الذي سقطت فيه الهراوةُ كانت تقيم راكشسيّةٌ مروِّعة تُدعى «جارا»، ذاتُ قوةٍ وبأسٍ عظيمين. وهي التي، بعد مولده، ضمّت جسد «جاراسندها»—قاهرَ الأعداء—وجمعت شطريه في ذلك المكان.

Verse 13

द्वाभ्यां जातो हि मातृभ्यामर्धदेह: पृथक्‌ पृथक्‌ जरया संधितो यस्माज्जरासंधस्ततो5भवत्‌,उसका आधा-आधा शरीर अलग-अलग दो माताओंके पेटसे पैदा हुआ था। जराने उसे जोड़ा था; इसीलिये उसका नाम जरासंध हुआ

لقد وُلِد من أمّين، وجسده منقسمٌ إلى نصفين منفصلين. ولأن عجوزًا تُدعى «جارا» قد وصلت هذين النصفين، سُمّي «جاراسندها».

Verse 14

सा तु भूमिं गता पार्थ हता ससुतबान्धवा | गदया तेन चास्त्रेण स्थूणाकर्णेन राक्षसी,पार्थ! भूमिके भीतर रहनेवाली वह राक्षसी उस गदासे तथा स्थूणाकर्ण नामक अस्त्रके आघातसे पुत्र और बन्धु-बान्धवोंसहित मारी गयी

يا بارثا، تلك الراكشسيّة—التي انحدرت إلى باطن الأرض—قُتلت مع أبنائها وذويها، بضربة الهراوة وبالسلاح المسمّى «ستھوناکرنا».

Verse 15

विनाभूत: स गदया जरासंधो महामृधे । निहतो भीमसेनेन पश्यतस्ते धनंजय,धनंजय! उस महासमरमें जरासंध बिना गदाके हो गया था; इसीलिये तुम्हारे देखते- देखते भीमसेनने उसे मार डाला

يا دهننجايا، في ذلك القتال العظيم صار جاراسندها بلا هراوته؛ فلذلك، وأنت تنظر، صرعه بهيماسينا وقتله.

Verse 16

यदि हि स्याद्‌ गदापाणिर्जरासंध: प्रतापवान्‌ । सेन्द्रा देवा न तं हन्तुं रणे शक्ता नरोत्तम

قال فايُو: «يا خيرَ الرجال! لو أن جَرَاسَنْدَه الجبّار كان حقًّا ممسكًا بهراوته، لما استطاعت الآلهةُ بقيادة إندرا أن تقتله في ساحة القتال.»

Verse 17

त्वद्धितार्थ च नैषादिरड्गुछ्ेन वियोजित: । द्रोणेनाचार्यक॑ कृत्वा छद्मना सत्यविक्रम:,तुम्हारे हितके लिये ही द्रोणाचार्यने सत्यपराक्रमी एकलव्यका आचार्यत्व करके छलपूर्वक उसका अँगूठा कटवा दिया था

وكان ذلك لخيرك أنتَ: فالشابّ النِّشادي (إيكالافيا) فُصل عن إبهامه. لقد قبله درونا مُعلِّمًا بالاسم لا غير، ثم بخديعةٍ حمل إيكالافيا—الشجاع الصادق—على قطع إبهامه، كي تبقى سيادتك غير منقوصة.

Verse 18

सतु बद्धाड्गुलित्राणो नैषादिर्दूढविक्रम: । अतिमानी वनचरो बभौ राम इवापर:,सुदृढ़ पराक्रमसे सम्पन्न अत्यन्त अभिमानी एकलव्य जब हाथोंमें दस्ताने पहनकर वनमें विचरता, उस समय दूसरे परशुरामके समान जान पड़ता था

لكن ذلك المحارب المولود في النِّشادا—إيكالافيا، ثابتُ البأس مُجرَّبُه—كان يجوب الغابة مرتديًا واقياتٍ للأصابع؛ وفي كبريائه المتغطرس بدا كأنه راما آخر (باراشوراما).

Verse 19

एकलव्यं हि साड्गुष्ठमशक्ता देवदानवा: । सराक्षसोरगा: पार्थ विजेतुं युधि करहिचित्‌

قال فايُو: «يا بارثا، ابنَ كونتي! لو بقي إبهامُ إيكالافيا سليمًا، لما استطاعت الآلهةُ ولا الأسورا، ومعهم الرَّاكشاسا وكائناتُ الأفاعي (الناغا)، أن يهزموه في القتال أبدًا.»

Verse 20

किमु मानुषमात्रेण शक्‍्य: स्यात्‌ प्रतिवीक्षितुम्‌ | दृढ्मुष्टि: कृती नित्यमस्यमानो दिवानिशम्‌

وكيف لإنسانٍ مجرّد أن يقدر حتى على أن يحدّ النظر إليه؟ كانت قبضتُه صلبة، ومهارتُه بالغة؛ وكان ليلَ نهارَ لا يفتر عن التدرّب على إطلاق السهام.

Verse 21

तुम्हारे हितके लिये मैंने ही युद्धके मुहानेपर उसे मार डाला था। पराक्रमी चेदिराज शिशुपाल तो तुम्हारी आँखोंके सामने ही मारा गया था

لأجل مصلحتك أنا نفسي صرعته عند فمِ المعركة. وأما ملكُ تشيدي الشجاعُ شيشوبالا فقد قُتل أمام عينيك عينًا.

Verse 22

स चाप्यशक्य: संग्रामे जेतुं सर्वसुरासुरै: । वधार्थ तस्य जातो5हमन्येषां च सुरद्विषाम्‌

قال فايُو: «وهو أيضًا لا يُقهَر في القتال، ولو اجتمع جميعُ الآلهة والأسورا معًا. ولأجل هلاكه—وهلاكِ سائر أعداء الآلهة—وُلدتُ أنا.»

Verse 23

हिडिम्बवककिर्मीरा भीमसेनेन पातिता:

قال فايُو-ديفا: «إن هِديمبا وفاكا وكِرميرا قد صرعهم بهيماسينا.»

Verse 24

हतस्तथैव मायावी हैडिम्बेनाप्यलायुध:

قال فايُو: «وكذلك قُتل الساحرُ ماياڤي أيضًا—على يدِ هايديمبا؛ وكذلك ألاليودها.»

Verse 25

यदि होन॑ नाहनिष्यत्‌ कर्ण: शक्‍्त्या महामृथे

قال فايُو: «لو أن كارنا، في تلك المعركة العظمى، لم يقتلْ (إياه) بسلاحِ الشكتي…»

Verse 26

मया न निहतः: पूर्वमेष युष्मत्प्रियेप्सपा

قال الإله فايُو: «لم أقتله من قبل، إنما لأنني رغبتُ أن أفعل ما يرضيكم. غير أن ذلك الرّاكشسا كان آثمًا؛ يبغض البراهمة وطقوس اليَجْنَة، ويسعى إلى طمس الدارما. لذلك فقد جُعِل الآن يُقتَل.»

Verse 27

एष हि ब्राह्मणद्वेषी यज्ञद्वेषी च राक्षस: । धर्मस्य लोप्ता पापात्मा तस्मादेष निपातित:

«فإن هذا الرّاكشسا مبغضٌ للبراهمة، مبغضٌ لليَجْنَة؛ آثمٌ يطمس الدارما. لذلك أُسقِط صريعًا.»

Verse 28

व्यंसिता चाप्युपायेन शक्रदत्ता मयानघ । ये हि धर्मस्य लोप्तारो वध्यास्ते मम पाण्डव

قال فايُو: «يا پاندڤا الطاهر، بحيلةٍ محكمة جعلتُ أيضًا القوة التي وهبها إندرا تذهب سُدًى وتُنتزع من يد كارنا. فإن من يقوّض الدارما ويهدمها فهو عندي جديرٌ بالقتل.»

Verse 29

धर्मसंस्थापनार्थ हि प्रतिज्ैषा ममाव्यया । ब्रह्म सत्यं दम: शौचं धर्मों द्वी: श्रीर्धृति: क्षमा

قال فايُوديفا: «حقًّا، من أجل إقامة الدارما فهذا هو نذري الذي لا يخيب: البراهمان (الحقّ المقدّس)، الصدق، كبح النفس، الطهارة، الدارما نفسها، الثبات، الازدهار، الصبر القوي، والعفو.»

Verse 30

यत्र तत्र रमे नित्यमहं सत्येन ते शपे | धर्मकी स्थापनाके लिये ही मैंने यह अटल प्रतिज्ञा कर रखी है, मैं तुमसे सत्यकी शपथ खाकर कहता हूँ, जहाँ वेद, सत्य, दम, शौच, धर्म, लज्जा, श्री, धृति और क्षमाका निवास है, वहीं मैं सदा सुखपूर्वक रहता हूँ ।।

قال شري فايُوديفا: «أقسم لك بالحقّ نفسه: حيثما كان مقام الفيدا، والصدق، وكبح النفس، والطهارة، والدارما، والحياء (لاجّيا)، والازدهار، والثبات، والعفو—فهناك أقيم دائمًا في قناعة وسكينة. لذلك، يا كارنا، يا فايكارتانا ابن السائق، لا تُسلِم نفسك للحزن.»

Verse 31

सुयोधनं चापि रणे हनिष्यति वृकोदर:

أعلن فايو-ديفا أن سُيودَهَنَة (دوريودَهَنَة) نفسه سيُصرَع في ساحة القتال على يد فْرِكودَرَة (بهِيما). وتُقيم هذه الكلمة قوس الحرب الأخلاقي: فالكِبْرُ والأدهرما، وإن اشتدّا زمنًا، ينتهيان إلى سقوطٍ محتوم؛ ويغدو المعيَّنُ للقصاص أداةً تُستعاد بها العدالة.

Verse 32

तस्यापि च वधोपायं वक्ष्यामि तव पाण्डव । पाण्डुनन्दन! युद्धमें दुर्योधनका भी वध भीमसेन करेंगे। उसके वधका उपाय भी मैं तुम्हें बताऊँगा ।। वर्धते तुमुलस्त्वेष शब्द: परचमूं प्रति

قال فايو: «يا ابن باندو، سأخبرك أيضًا بالوسيلة التي يُمكن بها قتله. يا ابن باندو—في ساحة القتال سيُهلك بهيماسينا دوريودَهَنَة حقًّا، وسأشرح لك الحيلة التي تُنجز بها تلك القتلة. وها هو ذا الآن زئيرٌ عاصفٌ مضطربٌ يرتفع متجهًا نحو جموع العدو.»

Verse 33

लब्धलक्ष्या हि कौरव्या विधमन्ति चमूं तव । दहत्येष च व: सैन्यं द्रोण: प्रहरतां वर:

إن محاربي الكورافا، وقد صار تصويبهم لا يخطئ، يسحقون صفَّك القتالي. وها هنا درونا—أمضى الضاربين وأبرعهم—يحرق قواتك حرقًا، كأنما يلتهم جنودك في لهيب القتال نفسه. ويُبرز هذا القول وطأة الحرب الأخلاقية الكئيبة: فحين تتصلّب المهارة والعزيمة لتغدو عنفًا لا يلين، لا يعود انهيار الجيش مسألةَ تكتيك فحسب، بل يصير تهديدًا للوجود، يُلزم القادة أن يواجهوا في الميدان عواقب اختياراتهم.

Verse 180

इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें यात्रियुद्धके समय घटोत्कचका वध होनेपर श्रीकृष्णका हर्षविषयक एक सौ अस्सीवाँ अध्याय पूरा हुआ

وهكذا، في «المهابهارتا» الشريفة، ضمن «درونا بارفا»—وخاصة في قسم «مقتل غَطوتكَجَة»—حين يُقتل غَطوتكَجَة أثناء معركة المسير، يكتمل الفصل المئة والثمانون الذي يصف فرحَ شري كريشنا. وتُبرز هذه الخاتمة توترًا أخلاقيًا كئيبًا في الحرب: فحتى الجانب الذي يقف مع الدهرما قد يشعر بالارتياح أو بالرضا الاستراتيجي عند موتٍ ما إذا كان يدرأ كارثةً أعظم، كاشفًا أن دهرما القتال كثيرًا ما يكون اختيارَ الأقل تدميرًا لا الاحتفاءَ بالعنف ذاته.

Verse 181

इति श्रीमहा भारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे कृष्णवाक्ये एकाशीत्यधिकशततमो<ध्याय:

وهكذا، في «المهابهارتا» الشريفة، ضمن «درونا بارفا»—وخاصة في قسم «مقتل غَطوتكَجَة»—أثناء قتال الليل، في الفصل المعروف بـ«كلمات كريشنا»، ينتهي الفصل المئة والحادي والثمانون. ويؤطر هذا الخاتمُ الحدثَ بوصفه منعطفًا مشحونًا بالأخلاق في حرب الليل، حيث يتقدّم النصحُ والتدبير وسط عنفٍ يتصاعد.

Verse 226

त्वत्सहायो नरव्यात्र लोकानां हितकाम्यया । वह भी संग्राममें सम्पूर्ण देवताओं और असुरोंद्वारा जीता नहीं जा सकता था। नरव्याप्र! मैं सम्पूर्ण लोकोंके हितके लिये और शिशुपाल एवं अन्य देवद्रोहियोंका वध करनेके लिये ही तुम्हारे साथ इस जगतूमें अवतीर्ण हुआ हूँ

يا نَرَفْيَابْر! ما دمتَ عونًا لي، فلا يُمكن أن أُغلَب في ساحة القتال، لا من جميع الآلهة ولا من جميع الأسورا. إنما نزلتُ إلى هذا العالم معك ابتغاءَ خير العوالم كلها، ولقتلِ شيشوبالا وسائرِ أعداءِ الآلهة من المتمرّدين عليهم.

Verse 231

त्वद्धितार्थ तु स मया हतः संग्राममूर्थनि । चेदिराजकश्ष्‌ विक्रान्त: प्रत्यक्ष निहतस्तव

لأجل مصلحتك قتلتُه عند مقدّمة المعركة. لقد قُتل ملكُ تشيدي الشجاع—قتلًا ظاهرًا مباشرًا—أمام عينيك.

Verse 233

रावणेन समप्राणा ब्रह्म॒यज्ञविनाशना: । हिडिम्ब, वक और किर्मीर--ये रावणके समान बलवान्‌ थे और ब्राह्मणों तथा यज्ञोंका विनाश किया करते थे। इन तीनोंको भीमसेनने मार गिराया है

قال فايُو-ديفا: «إن هيديمبا وفَكا وكِرميرا—ذوي قوةٍ كقوة رافَنا، ميّالين إلى تخريب الشعائر المقدّسة—كانوا في بأسهم كرافَنا، وكانوا يُهلكون البراهمة ويُفسدون اليَجْنَيات. ومع ذلك فقد صرعهم بهيماسينا وقتلهم.»

Verse 243

हैडिम्बश्नाप्युपायेन शक्‍्त्या कर्णेन घातित: । मायावी अलायुध घटोत्कचके हाथसे मारा गया है और घटोत्कचको भी मैंने ही युक्ति लगाकर कर्णकी चलायी हुई शक्तिसे मरवा दिया है

قال شري فايُو-ديفا: «إن هايديمبا أيضًا قُتل على يد كارنا بسلاحه شاكتي بحيلةٍ مدبّرة. وأما الساحر ألايوده—غاتوتكاتشا—فقد قدتُه أنا كذلك إلى الموت، إذ استخدمتُ تدبيرًا ليُقتل بالشاكتي التي أطلقها كارنا.»

Verse 253

मया वध्यो5भविष्यत्‌ स भैमसेनिर्घटोत्कच: । यदि महासमरमें कर्ण अपनी शक्तिद्वारा भीमसेनपुत्र घटोत्कचको नहीं मारता तो एक दिन मुझे उसका वध करना पड़ता

قال فايُو-ديفا: «إن غاتوتكاتشا، ابن بهيماسينا، كان سيُقتل على يدي. فلو أن كارنا لم يقتل غاتوتكاتشا ابن بهيما في تلك المعركة العظمى برمحه الإلهي، لوقع عليّ يومًا ما واجبُ قتله.»

Verse 303

उपदेक्ष्याम्युपायं ते येन तं प्रसहिष्यसि । तुम्हें वैकर्तन कर्णके विषयमें चिन्ता करनेकी आवश्यकता नहीं है। मैं तुम्हें ऐसा उपाय बताऊँगा, जिससे तुम उसका सामना कर सकोगे

قال فايُو: «سأعلّمك وسيلةً تستطيع بها أن تصمد له بالقوة. لا تقلق بشأن فايكارتانا كارنا؛ سأخبرك بطريقةٍ عمليةٍ تمكّنك من مواجهته».

Verse 326

विद्रवन्ति च सैन्यानि त्वदीयानि दिशो दश । शत्रुओंकी सेनामें यह भयंकर गर्जनाका शब्द बढ़ता जा रहा है और तुम्हारे सैनिक दसों दिशाओंमें भाग रहे हैं

قال فايُو-ديفا: «إن جنودك قد تفرّقوا وولّوا هاربين إلى الجهات العشر. وفي معسكر العدوّ يتعاظم زئير القتال المروّع—وهو نذير شؤم يدلّ على أنّ الخوف قد استولى على جانبك وأنّ زخم الخصم آخذٌ في الازدياد».

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