
आदि पर्व, अध्याय 67 — गान्धर्वविवाह-समयः (Duḥṣanta–Śakuntalā: Gandharva Marriage and Succession Condition)
Upa-parva: Śakuntalopākhyāna (Episode of Śakuntalā and Duḥṣanta)
Chapter 67 records a structured negotiation between King Duḥṣanta and Śakuntalā. Duḥṣanta proposes immediate union, offering royal gifts and explicitly recommending gāndharva-vivāha as superior among marriage forms for their context. Śakuntalā initially requests deference to her father Kaṇva’s return, but Duḥṣanta argues from dharma and self-agency, introducing the doctrinal list of eight vivāhas and their varṇa-specific acceptability, while rejecting paiśāca and āsura as impermissible. Śakuntalā then sets a binding condition: Duḥṣanta must acknowledge that her future son will hold succession immediately after him. Duḥṣanta assents, takes her hand according to due form, and departs promising later escort to his city. Kaṇva returns and, through ascetic insight, confirms that the union is not a dharma-violation for a kṣatriya; he blesses the outcome and foretells the birth of a powerful son destined for universal sovereignty. Śakuntalā requests Kaṇva’s favor toward Duḥṣanta; Kaṇva grants a boon, and she prays for Duḥṣanta’s steadfast righteousness and stable kingship.
Chapter Arc: Janamejaya, eager to know the true origins of the great-souled men among humans, asks Vaishampayana to narrate—step by step—the births and deeds of those beings whose splendor seems more than mortal. → Vaishampayana begins the vast catalogue of aṁśāvataraṇa: devas, dānavas, gandharvas, and other celestial orders descending into earthly kingship. Name after name is laid like a genealogical thundercloud, hinting that these births are not random but arranged for a coming cosmic reckoning. → The roll-call swells to famous, fate-heavy figures—Jarāsandha and other formidable rulers—revealing that many ‘human’ monarchs are in truth embodiments of older powers, destined to collide in pride and war. → The narrator closes the enumeration by affirming its fruit: hearing this descent of portions (aṁśas) grants clarity about rise and fall, steadies the wise in distress, and frames worldly conflict as part of a larger design. → The listener is left poised for the next movement of the epic: how these incarnate powers will converge into alliances, rivalries, and the inevitable great war.
Verse 1
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ ३ श्लोक मिलाकर कुल ७६३ “लोक हैं) #फशलारल (0) अन्अान- > मनुस्मृतिमें प्रजापति दक्षको ही पुत्रिका-विधिका प्रवर्तक बताकर उसका लक्षण इस प्रकार दिया है-- अपुत्रो&नेन विधिना सुतां कुर्वीत पुत्रिकाम् । यदपत्यं भवेदस्यां तन््मम स्यात् स्वधाकरम् ।। (९।१२७) जिसके पुत्र न हों वह निम्नांकित विधिसे अपनी कन्याको पुत्रिका बना ले--यह संकल्प कर ले कि इस कन्याके गर्भसे जो बालक उत्पन्न हो, वह मेरा श्राद्धादि कर्म करनेवाला पुत्ररूप हो। > किसी-किसीके मतमें शाख, विशाख और नैगमेय--ये तीनों नाम कुमार कार्तिकेयके ही हैं। किन्हींके मतमें कुमार कार्तिकेयके पुत्रोंकी संज्ञा शाख, विशाख और नैगमेय है। कल्पभेदसे सभी ठीक हो सकते हैं। > खर्जूरं तालहिन्तालौ ताली खर्जूरिका तथा । गुणका नारिकेलश्न सप्त पिण्डफला द्रुमा: ।। (खजूर, ताल, हिन्ताल, ताली, छोटे खजूर, सोपारी और नारियल--ये सात पिण्डाकार फलवाले वृक्ष हैं।) सप्तषष्टितमो< ध्याय: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन जनमेजय उवाच देवानां दानवानां च गन्धर्वोरगरक्षसाम् । सिंहव्याप्रमृदगाणां च पन्नगानां पतत्त्रिणाम्
ຈະນະເມຊະຍະ ກ່າວວ່າ: «(ຂໍໃຫ້ເລົ່າ) ເຖິງເທວະ ແລະ ດານະວະ, ເຖິງຄັນທັບພະ, ນາກ ແລະ ຣາກສະ; ເຖິງສິງ ເສືອ ແລະສັດປ່າອື່ນໆ; ແລະເຖິງນາກາ ແລະນົກທັງຫຼາຍ».
Verse 2
सर्वेषां चैव भूतानां सम्भवं भगवन्नहम् । श्रोतुमिच्छामि तत्त्वेन मानुषेषु महात्मनाम् । जन्म कर्म च भूतानामेतेषामनुपूर्वश:
ຈະນະເມຊະຍະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ທ່ານຜູ້ນ່າເຄົາລົບ, ຂ້າພະເຈົ້າປາຖະນາຟັງຕາມຄວາມຈິງ ເຖິງກຳເນີດຂອງສັດທັງປວງ—ໂດຍສະເພາະມະຫາວິນຍານໃນຫມູ່ມະນຸດ. ຂໍໃຫ້ເລົ່າຕາມລຳດັບ ເຖິງການເກີດ ແລະກຳກັບການກະທຳຂອງສັດເຫຼົ່ານີ້».
Verse 3
वैशम्पायन उवाच मानुषेषु मनुष्येन्द्र सम्भूता ये दिवौकस: । प्रथमं दानवांश्वैव तांस््ते वक्ष्यामि सर्वश:,वैशम्पायनजी बोले--नरेन्द्र! मनुष्योंमें जो देवता और दानव प्रकट हुए थे, उन सबके जन्मका ही पहले तुम्हें परिचय दे रहा हूँ। विप्रचित्ति नामसे विख्यात जो दानवोंका राजा था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ जरासन्ध नामसे विख्यात हुआ। राजन! हिरण्यकशिपु नामसे प्रसिद्ध जो दितिका पुत्र था, वही मनुष्यलोकमें नरश्रेष्ठ शिशुपालके रूपमें उत्पन्न हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຈອມແຫ່ງມະນຸດ, ຂ້າພະເຈົ້າຈະເລົ່າໃຫ້ທ່ານຟັງກ່ອນ ຢ່າງຄົບຖ້ວນ ເຖິງຜູ້ຢູ່ສະຫວັນທີ່ໄດ້ບັງເກີດໃນຫມູ່ມະນຸດ—ໂດຍເລີ່ມຈາກດານະວະ.»
Verse 4
विप्रचित्तिरिति ख्यातो य आसीद् दानवर्षभ: । जरासन्ध इति ख्यात: स आसीन्मनुजर्षभ:,वैशम्पायनजी बोले--नरेन्द्र! मनुष्योंमें जो देवता और दानव प्रकट हुए थे, उन सबके जन्मका ही पहले तुम्हें परिचय दे रहा हूँ। विप्रचित्ति नामसे विख्यात जो दानवोंका राजा था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ जरासन्ध नामसे विख्यात हुआ। राजन! हिरण्यकशिपु नामसे प्रसिद्ध जो दितिका पुत्र था, वही मनुष्यलोकमें नरश्रेष्ठ शिशुपालके रूपमें उत्पन्न हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ, ຂ້າພະເຈົ້າຈະແນະນຳໃຫ້ທ່ານຮູ້ກ່ອນ ເຖິງການເກີດຂອງເທວະ ແລະ ດານະວະທີ່ປາກົດໃນຫມູ່ມະນຸດ. ຜູ້ເປັນຍອດໃນດານະວະ ຜູ້ມີນາມລືຊາ ວິປຣະຈິດຕິ ໄດ້ບັງເກີດໃນຫມູ່ມະນຸດ ເປັນຜູ້ມີຊື່ວ່າ ຈະຣາສັນທະ ອັນໂດດເດັ່ນ.»
Verse 5
दिते: पुत्रस्तु यो राजन् हिरण्यकशिपु: स्मृतः । स जज्ञे मानुषे लोके शिशुपालो नरर्षभ:,वैशम्पायनजी बोले--नरेन्द्र! मनुष्योंमें जो देवता और दानव प्रकट हुए थे, उन सबके जन्मका ही पहले तुम्हें परिचय दे रहा हूँ। विप्रचित्ति नामसे विख्यात जो दानवोंका राजा था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ जरासन्ध नामसे विख्यात हुआ। राजन! हिरण्यकशिपु नामसे प्रसिद्ध जो दितिका पुत्र था, वही मनुष्यलोकमें नरश्रेष्ठ शिशुपालके रूपमें उत्पन्न हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ, ຜູ້ທີ່ຖືກຈື່ຈຳວ່າ ຮິຣັນຍະກະຊິປຸ ບຸດຂອງ ດິຕິ ນັ້ນ ໄດ້ເກີດຄືນໃນໂລກມະນຸດ ເປັນ ສິຊຸປາລະ—ຜູ້ປະເສີດໃນຫມູ່ມະນຸດ».
Verse 6
संह्ाद इति विख्यात: प्रह्मादस्यानुजस्तु यः । स शल्य इति विख्यातो जज्ञे बाह्लीकपुज्रव:,प्रहादका छोटा भाई जो संह्ादके नामसे विख्यात था, वही बाह्लीक देशका सुप्रसिद्ध राजा शल्य हुआ। प्रह्मदका ही दूसरा छोटा भाई जिसका नाम अनुह्ाद था, धृष्टकेतु नामक राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ນ້ອງຊາຍຂອງ ປຣາຫລາດະ ຜູ້ມີນາມລືຊາວ່າ ສັມຮາດະ ນັ້ນ ໄດ້ເກີດເປັນ ສັລຍະ ອັນໂດ່ງດັງ ເປັນຜູ້ປົກຄອງສູງສຸດໃນຫມູ່ຊາວບາຫລີກ».
Verse 7
अनुह्वादस्तु तेजस्वी यो5भूत् ख्यातो जघन्यज: । धृष्टकेतुरिति ख्यात: स बभूव नरेश्वर:,प्रहादका छोटा भाई जो संह्ादके नामसे विख्यात था, वही बाह्लीक देशका सुप्रसिद्ध राजा शल्य हुआ। प्रह्मदका ही दूसरा छोटा भाई जिसका नाम अनुह्ाद था, धृष्टकेतु नामक राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ອະນຸຫວາດະ ຜູ້ມີເດຊະພາບສະຫວ່າງໄສ ເປັນນ້ອງສຸດທ້າຍ ແຕ່ກໍໂດ່ງດັງ; ຖືກເອີ້ນວ່າ ທຣິສຕະເກຕຸ ແລະໄດ້ຂຶ້ນເປັນກະສັດໃນຫມູ່ມະນຸດ».
Verse 8
यस्तु राजज्छिबिरनाम दैतेय:ः परिकीर्तित: । द्रुम इत्यभिविख्यात: स आसीदू भुवि पार्थिव:,राजन्! जो शिबि नामका दैत्य कहा गया है, वही इस पृथ्वीपर ट्रुम नामसे विख्यात राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ, ໄດຕະຍະຜູ້ທີ່ເລົ່າຂານວ່າ ສິບິ ນັ້ນ ໄດ້ກາຍມາໃນແຜ່ນດິນນີ້ ເປັນກະສັດຜູ້ມີນາມລືຊາວ່າ ດຣຸມ».
Verse 9
बाष्कलो नाम यस्तेषामासीदसुरसत्तम: । भगदत्त इति ख्यात: स जज्ञे पुरुषर्षभ:,असुरोंमें श्रेष्ठ जो बाष्कल था, वही नरश्रेष्ठ भगदत्तके नामसे उत्पन्न हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນຫມູ່ພວກນັ້ນ ມີຜູ້ໜຶ່ງຊື່ ບາສກະລະ ເປັນອະສຸຣະຜູ້ປະເສີດ; ລາວໄດ້ເກີດໃນໂລກ ເປັນ ພະຄະດັດຕະ—ຜູ້ປະເສີດໃນຫມູ່ມະນຸດ».
Verse 10
अयःशिरा अश्वशिरा अय:शड्कुश्च वीर्यवान् तथा गगनमूर्धा च वेगवांश्षात्र पजचम:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ອະຍະສິຣະ, ອັດສະວະສິຣະ, ອະຍະສັງກຸຜູ້ມີພະລັງ, ແລະຍັງມີ ກະກະນະມູຣທາ ແລະ ເວກະວານ—ໂອ ພະຣາຊາ—ດານະວະມະຫາອຳນາດທັງຫ້ານີ້ ໄດ້ເກີດໃນແດນເກກະຍະ ເປັນກະສັດຜູ້ມີຈິດໃຫຍ່ ເປັນຫົວໜ້າໃນບັນດາກະສັດສຳຄັນ».
Verse 11
पज्चैते जज्ञिरे राजन् वीर्यवन्तो महासुरा: । केकयेषु महात्मान: पार्थिवर्षभसत्तमा: | केतुमानिति विख्यातो यस्ततो<न्य: प्रतापवान्,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ, ມະຫາອະສຸຣະຜູ້ມີພະລັງທັງຫ້ານີ້ ໄດ້ເກີດໃນຫມູ່ເກກະຍະ ເປັນກະສັດຜູ້ມີຈິດໃຫຍ່—ເປັນດັ່ງງົວຜູ້ປະເສີດໃນບັນດາກະສັດ. ແຕ່ຕ່າງຈາກເຂົາເຈົ້າ ຍັງມີອີກຜູ້ໜຶ່ງຜູ້ມີອຳນາດ ມີນາມລືຊາ ວ່າ ເກຕຸມານ—ຜູ້ກ້າຫານມີລັດສະໝີ. (ພ້ອມກັນນັ້ນ ຍັງໄດ້ເອີ້ນນາມ) ອະຍະສິຣະ, ອັດສະວະສິຣະ, ອະຍະສັງກຸຜູ້ແຂງແຮງ, ແລະ ກະກະນະມູຣທານ ຜູ້ວ່ອງໄວໃນລິດເດດ».
Verse 12
जनमेजयने कहा--भगवन्! मैं मनुष्य-योनिमें अंशतः उत्पन्न हुए देवता, दानव, गन्धर्व, नाग, राक्षस, सिंह, व्याप्र, हरिण, सर्प, पक्षी एवं सम्पूर्ण भूतोंके जन्मका वृत्तान्त यथार्थरूपसे सुनना चाहता हूँ। मनुष्योंमें जो महात्मा पुरुष हैं, उनके तथा इन सभी प्राणियोंके जन्म-कर्मका क्रमश: वर्णन सुनना चाहता हूँ,अमितौजा इति ख्यात: सोग्रकर्मा नराधिप: । स्वर्भानुरिति विख्यात: श्रीमान् यस्तु महासुर: अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ຈະນະເມຊະຍະ ກ່າວວ່າ: «ຂ້າແຕ່ທ່ານຜູ້ເຄົາລົບ, ຂ້າພະເຈົ້າປາຖະນາຈະໄດ້ຟັງໂດຍຖືກຕ້ອງ ແລະຕາມລຳດັບ ເລື່ອງການເກີດຂອງເທວະ, ດານະວະ, ຄັນທະວະ, ນາກ, ຣາກສະສະ, ແລະຍັງມີ ສິງ, ເສືອ, ກວາງ, ງູ, ນົກ—ແທ້ຈິງແລ້ວ ສັດທັງປວງ—ຜູ້ທີ່ເກີດມາໂດຍສ່ວນໜຶ່ງໃນຄັນມະນຸດ. ຂ້າພະເຈົ້າຍັງປາຖະນາຈະໄດ້ຟັງເປັນຂັ້ນເປັນຕອນ ເລື່ອງການເກີດແລະກຳກັບການກະທຳຂອງບຸລຸດຈິດໃຫຍ່ໃນມະນຸດ ແລະຂອງສັດເຫຼົ່ານີ້ທັງໝົດ».
Verse 13
उग्रसेन इति ख्यात उग्रकर्मा नराधिप: । यस्त्वश्व इति विख्यात: श्रीमानासीन्महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນຫມູ່ມະນຸດ ມີກະສັດຜູ້ໜຶ່ງມີນາມລືຊາວ່າ ອຸກຣະເສນະ, ເປັນຜູ້ປົກຄອງທີ່ກະທຳການອັນດຸຮ້າຍ. ແລະມະຫາອະສຸຣະຜູ້ຮຸ່ງເຮືອງ ຜູ້ເຄີຍມີນາມວ່າ ‘ອັດສະວະ’ ກໍໄດ້ເກີດມາໃນໂລກມະນຸດນີ້ (ໃນຮູບແຫ່ງກະສັດ)».
Verse 14
अशोको नाम राजाभूनन््महावीर्योडपराजित: । तस्मादवरजो यस्तु राजन्नश्वपति: स्मृत:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ມີກະສັດຜູ້ໜຶ່ງຊື່ ອະໂສກະ, ມີວິຣະຍະອັນໃຫຍ່ ແລະບໍ່ຖືກພິຊິດ. ແລະ ໂອ ພະຣາຊາ, ນ້ອງຊາຍຂອງລາວ ຖືກຈື່ຈຳວ່າ ອັດສະວະປະຕິ.»
Verse 15
दैतेय: सो5भवद् राजा हार्दिक्यो मनुजर्षभ: । वृषपर्वेति विख्यात: श्रीमान् यस्तु महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໄດຕະຍະນັ້ນໄດ້ເກີດໃນໝູ່ມະນຸດເປັນພະຣາຊາ ຮາຣດິກຍະ ເປັນດັ່ງງົວຜູ້ປະເສີດໃນມະນຸດ. ແລະ ອະສຸຣະຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ຜູ້ມີສິຣີ ຜູ້ລືຊື່ວ່າ ວຶຣສະປະຣວັນ ກໍໄດ້ປາກົດໃນໂລກມະນຸດດ້ວຍນາມນັ້ນເອງ. ດັ່ງນີ້ ອະສຸຣະ ແລະ ໄດຕະຍະຜູ້ມີພະລັງຫຼາຍບາງພວກ ໄດ້ມາເກີດເປັນກະສັດໃນແຜ່ນດິນ ກໍ່ຮ່າງພາບການເມືອງ ແລະ ຄຸນທຳ ທີ່ຈະນຳໄປສູ່ສົງຄາມໃນພາຍຫຼັງ.
Verse 16
दीर्घप्रज्ञ इति ख्यात: पृथिव्यां सोडभवन्नूप: । अजक स्त्ववरो राजन् य आसीद् वृषपर्वण:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນແຜ່ນດິນນີ້ ລາວໄດ້ເກີດເປັນກະສັດທີ່ຮູ້ຈັກກັນວ່າ ດີຣຄະປຣັຊຍະ (Dīrghaprajña). ແລະ ໂອ້ ພະຣາຊາ, ອະຊະກະ (Ajaka) ຜູ້ເຄີຍເປັນນ້ອງຊາຍຂອງ ວຶຣສະປະຣວັນ ໄດ້ເກີດຢູ່ນີ້ເປັນຜູ້ປົກຄອງຊື່ ອະນູປະ (Anūpa). ດັ່ງນີ້ ຜູ້ເລົ່າເລື່ອງຍັງສືບຕໍ່ຜູກພັນການເກີດໃໝ່ຂອງໄດຕະຍະ ແລະ ອະສຸຣະຜູ້ມີອຳນາດ ເຂົ້າກັບສາຍລາຊະວົງມະນຸດ ຊີ້ໃຫ້ເຫັນວ່າ ພະລັງອັນນ່າຢ້ານ ແລະ ຄວາມຄົບຄືນທາງຄຸນທຳ ອາດປາກົດຄືນໃນຮູບກະສັດ ເພື່ອກຳນົດເຫດການໃນພາຍຫຼັງ.
Verse 17
स शाल्व इति विख्यात: पृथिव्यामभवन्नूप: । अश्वग्रीव इति ख्यातः सत्त्ववान् यो महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ້ ພະຣາຊາ, ຜູ້ມີພະລັງຍິ່ງໃຫຍ່ ຜູ້ລືຊື່ໃນໝູ່ອະສຸຣະວ່າ ອັສວະຄຣີວະ (Aśvagrīva) ຜູ້ມີກຳລັງແລະຈິດໃຈອັນແຂງກ້າ ໄດ້ເກີດໃນແຜ່ນດິນເປັນມະນຸດ ເປັນກະສັດຜູ້ມີນາມລືຊື່ວ່າ ຊາລວະ (Śālva).
Verse 18
रोचमान इति ख्यात:ः पृथिव्यां सो5भवन्नूष: । सूक्ष्मस्तु मतिमान् राजन् कीर्तिमान् यः प्रकीर्तित:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຜູ້ມີພະລັງນັ້ນໄດ້ເກີດໃນແຜ່ນດິນເປັນກະສັດຜູ້ລືຊື່ວ່າ ໂຣຈະມານະ (Rocamāna). ແລະ ໂອ້ ພະຣາຊາ, ໄດຕະຍະທີ່ເອີ້ນວ່າ ຊູກສະມະ (Sūkṣma) ຜູ້ຖືກສັນລະເສີນວ່າມີປັນຍາ ແລະ ມີກຽດສັກສີ ກໍໄດ້ເກີດຢູ່ນີ້ເປັນຜູ້ປົກຄອງມະນຸດ. ໃນຕອນນີ້ ຜູ້ເລົ່າເລື່ອງຍັງສືບຕໍ່ຄຳເຕືອນທາງຄຸນທຳທີ່ແຝງຢູ່ໃນສາຍພົວພັນ: ພະລັງທີ່ຖືກຂັບເຄື່ອນໂດຍການກະທຳອັນໂຫດຮ້າຍ ຫຼື ນ່າຢ້ານ ອາດກັບຄືນມາໃນໝູ່ມະນຸດເປັນກະສັດ; ດັ່ງນັ້ນ ອຳນາດໂລກອາດປິດບັງແຮງດັ້ງເດີມທີ່ບໍ່ແມ່ນມະນຸດ. ເພາະສະນັ້ນ ປັນຍາພິຈາລະນາ (mati) ແລະ ການຢັບຢັ້ງ ເປັນສິ່ງຈຳເປັນໃນການຕັດສິນກະສັດ ແລະ ການກະທຳຂອງພວກເຂົາ.
Verse 19
बृहद्रथ इति ख्यात: क्षितावासीत् स पार्थिव: । तुहुण्ड इति विख्यातो य आसीदसुरोत्तम:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນແຜ່ນດິນນີ້ ມີກະສັດຜູ້ລືຊື່ວ່າ ບຶຣຫັດຣະຖະ (Bṛhadratha); ແລະຍັງມີອະສຸຣະຜູ້ສູງສົ່ງ ຜູ້ລືຊື່ວ່າ ຕຸຫຸນຑະ (Tuhuṇḍa). ໃນຕອນນີ້ (ຕາມສະບັບ Gītā Press) ການເລົ່າເລື່ອງດຳເນີນຕໍ່ໄປ ໂດຍຜູກພັນອະສຸຣະ ແລະ ດານະວະຜູ້ມີອຳນາດຫຼາຍພວກ ກັບການເກີດໃໝ່ຂອງພວກເຂົາເປັນກະສັດມະນຸດໃນດິນແດນຕ່າງໆ. ຄວາມໝາຍທາງຄຸນທຳທີ່ແຝງຢູ່ໃນບັນຊີນີ້ຄື: ອຳນາດໂລກ ແລະ ຄວາມກ້າຫານໃນສົງຄາມ ອາດເກີດຈາກສາຍເລືອດຫຼາກຫຼາຍ ແມ່ນແຕ່ຈາກສາຍທີ່ເປັນອະສຸຣະ; ແຕ່ເມື່ອເກີດເປັນກະສັດ ພວກເຂົາກໍເຂົ້າສູ່ສະໜາມມະນຸດຂອງທັມມະ, ໜ້າທີ່, ແລະ ຜົນຕາມມາ. ດັ່ງນັ້ນ ຂໍ້ຄວາມນີ້ວາງປະຫວັດການເມືອງໄວ້ໃນວົງຈອນຄອສມິກຂອງການເກີດໃໝ່: ອຳນາດບໍ່ແມ່ນຄຸນທຳໂດຍຕົວມັນເອງ, ແລະ ຜູ້ປົກຄອງ—ບໍ່ວ່າມາຈາກໃສ—ຕ້ອງຮັບຜິດຊອບຕໍ່ການກະທຳຂອງຕົນ.
Verse 20
सेनाबिन्दुरिति ख्यात: स बभूव नराधिप: । इषुपान्नाम यस्तेषामसुराणां बलाधिक:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນພວກເຂົານັ້ນ ຜູ້ທີ່ມີຊື່ສຽງວ່າ ເສນາບິນດຸ ໄດ້ເກີດເປັນກະສັດໃນມະນຸດ. ແລະ ອະສຸຣະນາມ ອິສຸປາດ—ຜູ້ເປັນເລີດດ້ວຍກຳລັງໃນຫມູ່ອະສຸຣະ—ກໍໄດ້ກາຍເປັນຜູ້ປົກຄອງຜູ້ກ້າຫານ ມີຊື່ສຽງໃນແຜ່ນດິນ».
Verse 21
नग्नजिन्नाम राजासीद् भुवि विख्यातविक्रम: । एकचक्र इति ख्यात आसीद्ू यस्तु महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນແຜ່ນດິນນີ້ ມີກະສັດນາມ ນັກນະຈິດ ຜູ້ມີຊື່ສຽງດ້ວຍວິລະກຳ. ແລະ ອະສຸຣະໃຫຍ່ຜູ້ຮູ້ຈັກກັນວ່າ ເອກະຈັກຣະ ກໍໄດ້ເກີດໃນໂລກມະນຸດນີ້ ເປັນກະສັດທີ່ຖືກສັນລະເສີນດ້ວຍນາມນັ້ນເອງ. ໃນຕອນນີ້ ເລື່ອງໄດ້ວາງກອບວ່າ ກະສັດຜູ້ມີອຳນາດຫຼາຍບາງອົງ ເປັນດັ່ງການອະວະຕານ ຫຼື ການປາກົດຂອງອະສຸຣະ—ຊີ້ວ່າ ພະລັງອັນພິເສດ ຫາກບໍ່ຢູ່ໃຕ້ການນຳຂອງທຳມະ ອາດກາຍເປັນແຫຼ່ງແຫ່ງຄວາມຢ້ານກົວ ແລະ ຄວາມວຸ່ນວາຍໃນໂລກ.»
Verse 22
प्रतिविन्ध्य इति ख्यातो बभूव प्रथित: क्षितौ । विरूपाक्षस्तु दैतेयश्चित्रयोधी महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນແຜ່ນດິນນີ້ ມີກະສັດຜູ້ໂດງດັງນາມ ປຣະຕິວິນດະຍະ ມີກຽດສຽງແຜ່ໄກ. ແລະ ໄດຕະຍະນາມ ວິຣູປາກສະ—ອະສຸຣະໃຫຍ່ຜູ້ຂື້ນຊື່ວ່າຮົບພິລຶກພິລັນ—ໄດ້ເກີດໃນໂລກນີ້ເປັນຜູ້ປົກຄອງນາມ ຈິຕຣະທັມມາ. ໃນທຳນອງນີ້ ບັນດາຜູ້ຢູ່ໃນວົງອະສຸຣະ ແລະ ໄດຕະຍະ ຖືກພັນລະນາວ່າໄດ້ມາເກີດເປັນກະສັດໃນມະນຸດ ຊີ້ນຳລ່ວງໜ້າວ່າ ອຸປະນິໄສທີ່ຊ່ອນເຮັ້ນ ບໍ່ແມ່ນມະນຸດ ອາດປັ້ນແຕ່ງອຳນາດໂລກີ ແລະ ບັນຍາກາດທາງທຳມະຂອງອານາຈັກ.»
Verse 23
चित्रधर्मेति विख्यात: क्षितावासीत् स पार्थिव: । हरस्त्वरिहरो वीर आसीद्ू यो दानवोत्तम:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນແຜ່ນດິນນີ້ ມີກະສັດຜູ້ໂດງດັງນາມ ຈິຕຣະທັມມະ. ແລະ ຮະຣະ ຈອມດານະວະຜູ້ກ້າຫານ ຜູ້ຂື້ນຊື່ວ່າຜູ້ປະຫານສັດຕູ ກໍໄດ້ເກີດຢູ່ນີ້ເປັນກະສັດນັ້ນ. ຕອນນີ້ໄດ້ວາງການເປັນກະສັດຂອງມະນຸດໄວ້ໃນຈັກກະວານແຫ່ງສິນທຳ: ອຳນາດອັນແຂງກ້າທີ່ບໍ່ແມ່ນມະນຸດ ມາເກີດໃນມະນຸດ ແລະ ພະລັງຂອງພວກເຂົາ ຫາກຫັນໄປສູ່ຄວາມປະທະ ກໍຈະເປັນເຫດໃຫ້ເກີດສົງຄາມ ແລະ ການທົດສອບທຳມະ.»
Verse 24
सुबाहुरिति विख्यात: श्रीमानासीत् स पार्थिव: । अहरस्तु महातेजा: शत्रुपक्षक्षयंकर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ມີກະສັດຜູ້ຮັ່ງມີ ໂດງດັງນາມ ສຸບາຫຸ. ແລະ ອະຫະຣະ ຜູ້ມີຣັດສະຫມີຍິ່ງໃຫຍ່ ເປັນຜູ້ທຳລາຍກອງພັກສັດຕູ. (ໃນການເລົ່າທີ່ກວ້າງຂວາງຂອງບົດນີ້ ບຸກຄົນເຫຼົ່ານີ້ຖືກນຳສະເໜີວ່າເປັນຜູ້ມີອຳນາດຍິ່ງ—ເຄີຍຢູ່ໃນຫມູ່ໄດຕະຍະ/ອະສຸຣະ—ແລ້ວມາເກີດເປັນກະສັດມະນຸດ ຊີ້ວ່າ ພະລັງອັນແຂງກ້າເມື່ອສະຖິດໃນຜູ້ປົກຄອງ ອາດເປັນເກາະປ້ອງກັນແຜ່ນດິນ ຫຼື ເປັນຄວາມຫວາດຫວັນແກ່ສັດຕູ)».
Verse 25
बाह्लीको नाम राजा स बभूव प्रथित: क्षितौ । निचन्द्रश्नन्द्रवक््त्रस्तु य आसीदसुरोत्तम:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນແຜ່ນດິນ ມີກະສັດນາມ ບາຫລີກະ ເກີດຂຶ້ນ ໂດດເດັ່ນມີຊື່ສຽງໃນບັນດາຜູ້ປົກຄອງ. ແລະ ນິຈັນດຣະ—ອະສຸຣະຜູ້ປະເສີດ ມີໃບໜ້າສະຫວ່າງດັ່ງດວງຈັນ—ກໍເກີດມາໃນມະນຸດເຊັ່ນກັນ. ດັ່ງນີ້ ນິທານໄດ້ຕິດຕາມວ່າ ອໍານາດອະສຸຣະອັນນ່າຢ້ານ ໄດ້ມາເກີດເປັນກະສັດໃນໂລກມະນຸດ; ຊີ້ວ່າ ອໍານາດແລະຊື່ສຽງອາດປົກປິດແຮງດຳມືດໄດ້, ແລະຈໍາເປັນຕ້ອງມີປັນຍາແຫ່ງທຳ ເພື່ອຕັດສິນຜູ້ປົກຄອງຕາມການກະທໍາ ບໍ່ແມ່ນຕາມຄວາມສະຫງ່າງາມ.
Verse 26
मुञ्जकेश इति ख्यात: श्रीमानासीत् स पार्थिव: । निकुम्भस्त्वजित: संख्ये महामतिरजायत,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ກະສັດຜູ້ມີສິຣິມົງຄຸນ ໄດ້ເກີດຂຶ້ນ ແລະໂດງດັງດ້ວຍນາມ ມຸນຈະເກສະ. ແລະ ນິກຸມພະ—ຜູ້ມີປັນຍາຍິ່ງ ແລະບໍ່ຖືກພິຊິດໃນສົງຄາມ—ກໍເກີດມາເຊັ່ນກັນ. ໃນຕອນນີ້ຂອງ ອາດິປະຣະວະ ຜູ້ເລົ່າໄດ້ສືບຕໍ່ກອບເລື່ອງທາງສາຍພົວພັນ-ຈັນຍາ: ບັນດາຜູ້ມີອໍານາດຈາກສາຍພັນທີ່ເປັນປະປັກ (ອະສຸຣະ/ດານະວະ) ໄດ້ມາເກີດໃນບັນດາກະສັດມະນຸດ, ປູທາງວ່າ ອຸປະນິໄສທີ່ຊ່ອນເຮັດ ແລະຄວາມອາຄາດແຄ້ນແຕ່ບູຮານ ຈະກັບຄືນມາໃນການເມືອງແລະສົງຄາມໂລກມະນຸດ.
Verse 27
भूमौ भूमिपति: क्षेष्ठो देवाधिप इति स्मृतः । शरभो नाम यस्तेषां दैतेयानां महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ໃນແຜ່ນດິນ ຜູ້ເປັນກະສັດທີ່ຍິ່ງທີ່ສຸດ ຖືກຈື່ຈໍາດ້ວຍສະຫຼຸບນາມ ‘ເທວາທິປະ’ (ຈອມເທວະ). ໃນບັນດາໄດຕະຍະເຫຼົ່ານັ້ນ ມີອະສຸຣະໃຫຍ່ນາມ ສະຣະພະ.” ໃນຕອນນີ້ ນິທານໄດ້ວາງກອບວ່າ ອໍານາດກະສັດໃນໂລກມະນຸດ ແມ່ນການປາກົດຂອງສາຍພັນຄອສມິກແຕ່ກ່ອນ: ອໍານາດໄດຕະຍະ–ອະສຸຣະ ຖືກເວົ້າວ່າມາເກີດເປັນກະສັດມະນຸດຜູ້ມີຊື່ສຽງ. ນັຍທາງຈັນຍາຄື: ອໍານາດໃນໂລກບໍ່ແມ່ນເກີດຂຶ້ນໂດຍບັງເອີນ—ມັນຜູກພັນກັບສະພາວະ (svabhāva) ແລະກຳເກົ່າ; ດັ່ງນັ້ນ ກະສັດຕ້ອງລະວັງ: ຄວາມຍິ່ງໃຫຍ່ອາດພາເງົາແຫ່ງການທໍາລາຍມາດ້ວຍ ຖ້າບໍ່ຖືກຄວບຄຸມໂດຍທຳ.
Verse 28
पौरवो नाम राजर्षि: स बभूव नरोत्तम: । कुपटस्तु महावीर्य: श्रीमान् राजन् महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ໃນບັນດາມະນຸດ ມີຣາຊະຣິສິຜູ້ປະເສີດນາມ ປາວະຣະ ເກີດຂຶ້ນ. ແລະ ອະສຸຣະໃຫຍ່ຜູ້ມີພະລັງຫນັກ ແລະມີສິຣິ ນາມ ກຸປະຕະ, ໂອ ພະຣາຊາ, ກໍເກີດມາໃນໂລກມະນຸດ ເປັນຜູ້ປົກຄອງຜູ້ມີອໍານາດ.”
Verse 29
सुपार्श्व इति विख्यात: क्षितौ जज्ञे महीपति: । क्रथस्तु राजन् राजर्षि: क्षितौ जज्ञे महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ກະສັດຜູ້ໜຶ່ງໄດ້ເກີດຂຶ້ນໃນແຜ່ນດິນ ໂດງດັງດ້ວຍນາມ ສຸປາຣສະວະ. ແລະ ໂອ ພະຣາຊາ, ອະສຸຣະໃຫຍ່ ກຣະຖະ ກໍເກີດຂຶ້ນໃນແຜ່ນດິນ ເປັນຣາຊະຣິສິ (rājarṣi) ເຊັ່ນກັນ.
Verse 30
पार्वतेय इति ख्यात: काउज्चनाचलसंनिभ: । द्वितीय: शलभस्तेषामसुराणां बभूव ह,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ດານະວະຜູ້ມີລິດໃຫຍ່ ຊື່ ກຣະຖະ (Kratha) ໄດ້ກາຍເປັນທີ່ຮູ້ຈັກໃນຫມູ່ມະນຸດວ່າ «ປາຣະວະເຕຍ» (Pārvateya) ໂດຍຮ່າງກາຍກວ້າງໃຫຍ່ດັ່ງພູຄຳ. ແລະອະສຸຣະອົງທີສອງໃນພວກນັ້ນ ຊື່ «ສະລະພະ» (Śalabha) ກໍໄດ້ເກີດມາໃນໂລກມະນຸດເຊັ່ນກັນ. ບັນຊີແຫ່ງການອວະຕານນີ້ ຊີ້ໃຫ້ເຫັນຄຳເຕືອນທາງທຳມະ: ເມື່ອພະລັງອັນທຳລາຍໄດ້ຮັບຮູບມະນຸດ ມັນມັກປາກົດເປັນກະສັດຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ ແລະຄວາມສະຫງ່າງາມອາດປິດບັງແຮງຈູງໃຈອັນອະທຳ ທີ່ພາຍຫຼັງຈະກໍໃຫ້ດຸນຍະພາບແຫ່ງທຳມະສັ່ນຄອນ.
Verse 31
प्रह्दो नाम बाह्लीक: स बभूव नराधिप: । चन्द्रस्तु दितिजश्रेष्ठो लोके ताराधिपोपम:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ປຣະຫະດ» (Prahda) ນາມ ໄດ້ເກີດເປັນກະສັດໃນສາຍບາຫລີກ (Bāhlīka). ແລະ «ຈັນທຣະ» (Candra) ຜູ້ເປັນເລີດໃນຫມູ່ໄດຕະຍະຜູ້ເກີດຈາກດິຕິ ສ່ອງສະຫວ່າງໃນໂລກດັ່ງຈັນທຣາ—ເຈົ້າແຫ່ງດາວ—ກໍໄດ້ເກີດເປັນຜູ້ປົກຄອງເຊັ່ນກັນ.
Verse 32
चन्द्रवर्मेति विख्यात: काम्बोजानां नराधिप: । अर्क इत्यभिविख्यातो यस्तु दानवपुड्रव:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນຫມູ່ກາມໂບຊະ (Kāmboja) ມີກະສັດຜູ້ໂດງດັງນາມ «ຈັນທຣະວັຣມັນ» (Candravarman). ແລະຜູ້ທີ່ເລື່ອງລືວ່າ «ອັຣກະ» (Arka) ຜູ້ເປັນເລີດໃນຫມູ່ດານະວະ ໄດ້ເກີດຢູ່ນີ້ເປັນຣາຊະຣິສີຜູ້ສູງສົ່ງໃນຫມູ່ມະນຸດ.
Verse 33
ऋषिको नाम राजर्षिबभूव नृपसत्तम: । मृतपा इति विख्यातो य आसीदसुरोत्तम:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ໂອ ກະສັດຜູ້ປະເສີດ, ມີຣາຊະຣິສີນາມ «ຣິສິກະ» (Ṛṣika) ໄດ້ປາກົດຂຶ້ນ. ແລະ «ມຣິຕະປາ» (Mṛtapā) ຜູ້ເປັນເລີດໃນຫມູ່ອະສຸຣະ ກໍໄດ້ເປັນທີ່ຮູ້ຈັກຢ່າງກວ້າງຂວາງໃນໂລກມະນຸດນີ້.”
Verse 34
पश्चिमानूपकं विद्धि तं नूपं नृपसत्तम | गविष्ठस्तु महातेजा य: प्रख्यातो महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ໂອ ກະສັດຜູ້ປະເສີດ, ຈົ່ງຮູ້ໄວ້ວ່າ ຜູ້ມີອຳນາດນາມ «ມຣິຕະປາ» (Mṛtapā) ໄດ້ເປັນຜູ້ປົກຄອງແຫ່ງອະນູປະ (Anūpa) ທາງຕາເວັນຕົກ. ແລະ «ກະວິສະຖະ» (Gaviṣṭha) ອະສຸຣະຜູ້ມີຣັດສະມີແຮງ ມີເຕຊະຫຼາຍ ຜູ້ໂດງດັງໃນຫມູ່ມະຫາອະສຸຣະ ໄດ້ເກີດລົງສູ່ແຜ່ນດິນເປັນກະສັດ «ດຣຸມະເສນະ» (Drumasena).”
Verse 35
ट्रुमसेन इति ख्यातः पृथिव्यां सो5भवन्नूष: । मयूर इति विख्यात: श्रीमान् यस्तु महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະຣາຊາ, ຜູ້ທີ່ເຄີຍໂດງດັງໃນຫມູ່ອະສຸຣະວ່າ ດຣຸມະເສນະ ໄດ້ເກີດລົງມາໃນໂລກມະນຸດເປັນກະສັດ. ແລະ ອະສຸຣະໃຫຍ່ຜູ້ຮຸ່ງເຮືອງທີ່ຮູ້ຈັກກັນວ່າ ມະຍູຣະ ກໍໄດ້ຈຸດກຳເນີດຢູ່ນີ້ເຊັ່ນກັນ. ໂອ ພຣະຣາຊາ, ໄດຕະຍະໃຫຍ່ຜູ້ກ້າຫານຫ້າຕົນ—ອະຍະຫະສິຣາ, ອັສວະສິຣາ, ອະຍະຫະສັງກຸ (ຜູ້ກ້າ), ກະກະນະມູຣທາ, ແລະ ຜູ້ວ່ອງໄວ—ໄດ້ເກີດໃນແດນເກກະຍະ ເປັນກະສັດຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ມີໃຈສູງ. ດັ່ງນັ້ນ ເລື່ອງນີ້ຊີ້ໃຫ້ເຫັນວ່າ ອຳນາດຂອງສັດບໍ່ແມ່ນມະນຸດໄດ້ເຂົ້າສູ່ສາຍພົນກະສັດ ແລະປັ້ນແຕ່ງໂລກການເມືອງທີ່ຈະພັນພົວກັບສົງຄາມໃຫຍ່; ພ້ອມທັງເປັນຄຳເຕືອນວ່າ ນິສັຍພາຍໃນ (ເທວ/ອາສຸຣີ) ອາດປາກົດຜ່ານອຳນາດແລະລາຊະສະຖານະໄດ້.
Verse 36
स विश्व इति विख्यातो बभूव पृथिवीपति: । सुपर्ण इति विख्यातस्तस्मादवरजस्तु य:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຜູ້ນັ້ນໄດ້ເປັນເຈົ້າແຜ່ນດິນ ໂດຍມີນາມວ່າ ວິສະວະ. ແລະນ້ອງຊາຍຂອງລາວ ຜູ້ມີນາມວ່າ ສຸປັນນະ ກໍໄດ້ເກີດອອກມາຈາກລາວ».
Verse 37
कालकीर्तिरिति ख्यात: पृथिव्यां सो5भवन्नूप: । चन्द्रहन्तेति यस्तेषां कीर्तित: प्रवरोडसुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະຣາຊາ, ຜູ້ໜຶ່ງໃນພວກນັ້ນໄດ້ໂດງດັງໃນໂລກດ້ວຍນາມ ກາລາກີຣຕິ. ແລະອະສຸຣະຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ທີ່ຖືກຂານວ່າ ຈັນດຣະຫັນຕາ (‘ຜູ້ສັງຫານດວງຈັນ’) ກໍໄດ້ເກີດລົງມາໃນໂລກມະນຸດເຊັ່ນກັນ».
Verse 38
शुनको नाम राजर्षि: स बभूव नराधिप: । विनाशनस्तु चन्द्रस्य य आख्यातो महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ພຣະຣາຊະຣິສີ ນາມ ຊຸນະກະ ໄດ້ເກີດໃນຫມູ່ມະນຸດເປັນກະສັດຜູ້ປົກຄອງ. ແລະອະສຸຣະຜູ້ມີລິດທີ່ໂດງດັງວ່າ ‘ຜູ້ທຳລາຍດວງຈັນ’ ກໍໄດ້ເກີດລົງມາໃນໂລກມະນຸດ (ໃນຮູບກະສັດ) ເຊັ່ນກັນ».
Verse 39
जानकिरननम विख्यात: सो5भवन्मनुजाधिप: । दीर्घजिद्वस्तु कौरव्य य उक्तो दानवर्षभ:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຜູ້ທີ່ໂດງດັງວ່າ ຈານະກີ ໄດ້ເປັນກະສັດໃນຫມູ່ມະນຸດ. ແລະ ໂອ ກະວະ, ດານະວະຜູ້ກ້າຫານທີ່ຊື່ ດີຣຄະຊິຫວາ ໄດ້ເປັນກະສັດມະນຸດທີ່ໂດງດັງວ່າ ກະສັດແຫ່ງກາຊີ. ດັ່ງນັ້ນ ດານະວະ ແລະ ອະສຸຣະຜູ້ມີພະລັງຫຼາຍອີກຫຼາຍຕົນ ໄດ້ເກີດລົງມາໃນໂລກເປັນຜູ້ປົກຄອງອັນມີຊື່ສຽງ—ໂດຍສະເພາະໃນແດນເກກະຍະ ແລະ ອານາຈັກອື່ນໆ—ແຕ່ລະຕົນຮັບນາມມະນຸດ ແຕ່ຍັງຄົງນິສັຍດຸຮ້າຍ ແລະ ພະລັງອັນນ່າຢ້ານ. ການເລົ່າໄດ້ລຽນລຳດັບການຈຳແນກເຫຼົ່ານີ້ທີລະຄົນ: ອະສຸຣະບາງຕົນໄດ້ເປັນກະສັດເຊັ່ນ ອຸກຣະເສນະ, ອະໂສກະ, ຮາຣດິກຍະ, ດີຣຄະປຣັຊຍາ, ຊາລວະ, ໂຣຈະມານະ, ບຣຶຫັດຣະຖະ, ເສນາບິນດຸ, ນັກນະຈິດ, ປຣະຕິວິນດຍະ, ຈິຕຣະທັມມາ, ສຸບາຫຸ, ບາຫລິກະ, ມຸນຈະເກສະ, ເທວາທິປະ, ເປົາຣະວະ, ສຸປາຣສວະ, ປາຣວະເຕຍ, ປຣະຫມະດະ, ຈັນດຣະວັມມາ, ຣຶສິກະ ແລະອື່ນໆ. ພະລັງທາງຈິດທຳຂອງຂໍ້ຄວາມນີ້ ຄືການຊີ້ວ່າ ສົງຄາມທີ່ຈະມາບໍ່ແມ່ນແຕ່ການເມືອງ: ຄວາມໂຫດຮ້າຍ ແລະ ອະທັມ (ນິສັຍອາສຸຣີ) ໄດ້ຈຸດກຳເນີດໃນຫມູ່ຜູ້ປົກຄອງ ປູທາງໃຫ້ແກ່ອະທັມ ແລະ ສົງຄາມອັນກວ້າງໃຫຍ່; ແລະຍັງເຕືອນວ່າ ອຳນາດ ແລະ ສະຖານະກະສັດ ບໍ່ໄດ້ຮັບປະກັນຄຸນທຳ.»
Verse 40
काशिराज: स विख्यात: पृथिव्यां पृथिवीपते । ग्रहं तु सुषुवे यं तु सिंहिकार्केन्दुमर्दनम् । स क्राथ इति विख्यातो बभूव मनुजाधिप:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान् अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान् नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान् असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान् महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान् और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित् नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान् असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान् निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान् असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान् असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान् एवं महान् असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान् असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ຈອມແຜ່ນດິນ! ກະສັດແຫ່ງກາສີນັ້ນ ໂດ່ງດັງໄປທົ່ວໂລກ. ແລະ ດາວເຄາະ (graha) ທີ່ ສິງຫິກາ ໄດ້ໃຫ້ກຳເນີດ—ຣາຫູ ຜູ້ບຸກຮຸກຕໍ່ ພະອາທິດ ແລະ ພະຈັນ—ໄດ້ມາເກີດໃນມະນຸດໂລກນີ້ ເປັນຜູ້ປົກຄອງທີ່ມີຊື່ສຽງວ່າ ‘ກຣາຖ’. ຕອນນີ້ຊີ້ໃຫ້ເຫັນວ່າ ອຳນາດອັນປັ່ນປ່ວນແຫ່ງຈັກກະວານ ອາດຮັບຮູບເປັນມະນຸດໄດ້; ເພື່ອເຕືອນກະສັດທັງຫຼາຍວ່າ ຊື່ສຽງ ແລະ ອຳນາດ ອາດເກີດຈາກຕົ້ນກຳເນີດອັນນ່າຢ້ານ ແລະ ຈຳເປັນຕ້ອງປົກຄອງດ້ວຍຄວາມສຳລວມ.
Verse 41
दनायुषस्तु पुत्राणां चतुर्णा प्रवरो5सुर: । विक्षरो नाम तेजस्वी वसुमित्रो नृप: स्मृत:,दनायुके चार पुत्रोंमें जो सबसे बड़ा है, वह विक्षर नामक तेजस्वी असुर यहाँ राजा वसुमित्र बताया गया है
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນບັນດາລູກຊາຍສີ່ຄົນຂອງ ດະນາຍຸ ຜູ້ເປັນເລີດຄື ອະສຸຣະຜູ້ສະຫວ່າງໄສ ນາມ ວິກສະຣະ; ໃນຕຳນານນີ້ ທ່ານຖືກຈື່ຈຳໃນນາມກະສັດ ວະສຸມິດຣະ.
Verse 42
द्वितीयो विक्षराद् यस्तु नराधिप महासुर: । पाण्ड्यराष्ट्राधिप इति विख्यात: सो5भवन्नूप:,नराधिप! विक्षरसे छोटा उसका दूसरा भाई बल, जो असुरोंका राजा था, पाण्ड्य देशका सुविख्यात राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຜູ້ເປັນນ້ອງຄົນທີສອງ ຖັດຈາກ ວິກສະຣະ—ເປັນອະສຸຣະຜູ້ມີພະລັງອັນໃຫຍ່ ແລະເປັນຜູ້ປົກຄອງໃນມະນຸດໂລກ—ໄດ້ກາຍເປັນກະສັດຜູ້ໂດ່ງດັງ ເປັນອະທິປະໄຕແຫ່ງແດນປານດະຍະ (Pāṇḍya). ດັ່ງນັ້ນ ໂອ ພະຣາຊາ, ທ່ານຈຶ່ງເປັນຜູ້ປົກຄອງທີ່ມີຊື່ສຽງໃນໂລກມະນຸດ».
Verse 43
बली वीर इति ख्यातो यस्त्वासीदसुरोत्तम: । पौण्ड्रमात्स्यक इत्येवं बभूव स नराधिप:,महाबली वीर नामसे विख्यात जो श्रेष्ठ असुर (विक्षरका तीसरा भाई) था, पौण्ड्रमात्स्यक नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ອະສຸຣະຜູ້ເປັນເລີດ ຜູ້ໂດ່ງດັງໃນນາມ «ບະລີ ວີຣະ» ຕໍ່ມາໄດ້ກາຍເປັນກະສັດມະນຸດ ແລະໃນໂລກຖືກຮູ້ຈັກວ່າ ເປົານດຣະມາດສະຍະກະ (Pauṇḍramātsyaka).
Verse 44
वृत्र इत्यभिविख्यातो यस्तु राजन् महासुर: । मणिमाजन्नाम राजर्षि: स बभूव नराधिप:,राजन! जो वृत्र नामसे विख्यात (और विक्षरका चौथा भाई) महान् असुर था, वही पृथ्वीपर राजर्षि मणिमानके नामसे प्रसिद्ध भूपाल हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ, ອະສຸຣະຜູ້ມີພະລັງອັນໃຫຍ່ ຜູ້ໂດ່ງດັງໃນນາມ ວຣິຕຣະ (Vṛtra) ຕໍ່ມາໄດ້ກາຍເປັນຜູ້ປົກຄອງມະນຸດໃນແຜ່ນດິນ ແລະຖືກສັນລະເສີນໃນນາມ ຣາຊະຣິຊິ ມະນິມານ (Maṇimān).»
Verse 45
क्रोधहन्तेति यस्तस्य बभूवावरजो5सुर: । दण्ड इत्यभिविख्यात: स आसीन्नूपति: क्षितौ,क्रोधहन्ता नामक असुर जो उसका छोटा भाई (कालाके पुत्रोंमें तीसरा) था, वह इस पृथ्वीपर दण्ड नामसे विख्यात नरेश हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ອະສຸຣະຜູ້ເປັນນ້ອງຊາຍຂອງລາວ ມີນາມວ່າ ກໂຣທະຫັນຕາ («ຜູ້ຂ້າຄວາມໂກດ») ໄດ້ກາຍເປັນກະສັດໃນແຜ່ນດິນ ແລະໂດງດັງຢ່າງກວ້າງຂວາງວ່າ ດັນຑະ («ການລົງໂທດ/ວິໄນ»).
Verse 46
क्रोधवर्धन इत्येवं यस्त्वन्य: परिकीर्तित: । दण्डधार इति ख्यात: सो5भवन्मनुजर्षभ:,क्रोधवर्धन नामक जो दूसरा दैत्य कहा गया है, वह मनुष्योंमें श्रेष्ठ दण्डधार नामसे विख्यात हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ອີກຜູ້ໜຶ່ງທີ່ຖືກເວົ້າຖຶງວ່າ ກໂຣທະວັດທະນະ («ຜູ້ເພີ່ມຄວາມໂກດ») ໄດ້ໂດງດັງໃນຫມູ່ມະນຸດວ່າ ດັນຑະທາຣະ, ເປັນດັ່ງງົວຜູ້ກ້າໃນຫມູ່ຄົນ.
Verse 47
कालेयानां तु ये पुत्रास्तेषामष्टी नराधिपा: । जज्ञिरे राजशार्दूल शार्टूलसमविक्रमा:,नृपश्रेष्ठत कालेय नामक दैत्योंके जो पुत्र थे, उनमेंसे आठ इस पृथ्वीपर सिंहके समान पराक्रमी राजा हुए
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນຫມູ່ລູກຊາຍຂອງກາເລຍະນັ້ນ ມີແປດສິບຄົນໄດ້ເກີດເປັນກະສັດໃນແຜ່ນດິນ—ໂອ ຜູ້ເປັນເສືອໃນຫມູ່ກະສັດ—ມີຄວາມກ້າຫານດຸດັ່ງເສືອ.
Verse 48
मगधेषु जयत्सेनस्तेषामासीत् स पार्थिव: । अष्टानां प्रवरस्तेषां कालेयानां महासुरः,उन आठों कालेयोंमें श्रेष्ठ जो महान् असुर था, वही मगध देशमें जयत्सेन नामक राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນແດນມະຄະທະ ມີກະສັດນາມ ຊະຍະຕເສນ ເກີດຂຶ້ນ. ລາວນັ້ນແມ່ນອະສຸຣະຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ຄົນນັ້ນເອງ ເປັນຜູ້ເລີດສຸດໃນຫມູ່ກາເລຍະທັງແປດ ແລະຕໍ່ມາໄດ້ຄອງແຜ່ນດິນມະຄະທະ.
Verse 49
द्वितीयस्तु ततस्तेषां श्रीमान् हरिहयोपमः । अपराजित इत्येवं स बभूव नराधिप:,उन कालेयोंमेंसे जो दूसरा इन्द्रके समान श्रीसम्पन्न था, वही अपराजित नामक राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນຫມູ່ພວກເຂົາ ຄົນທີສອງນັ້ນ ສະຫງ່າງາມດ້ວຍສິຣິມົງຄຸນ ແລະປຽບດັ່ງມ້າຂອງພຣະອິນທຣາ ໄດ້ກາຍເປັນກະສັດນາມ ອະປະຣາຊິຕະ («ຜູ້ບໍ່ຖືກພິຊິດ»).
Verse 50
तृतीयस्तु महातेजा महामायो महासुर: । निषादाधिपतिर्जज्ञे भुवि भीमपराक्रम:,तीसरा जो महान् तेजस्वी और महामायावी महादैत्य था, वह इस पृथ्वीपर भयंकर पराक्रमी निषादनरेशके रूपमें उत्पन्न हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຜູ້ທີສາມນັ້ນ ສ່ອງສະຫວ່າງດ້ວຍລັດສະໝີອັນຍິ່ງ ເປັນອະສຸຣະຜູ້ມີມາຍາອັນໃຫຍ່—ໄດ້ເກີດລົງມາໃນໂລກ ເປັນເຈົ້າແຫ່ງຊົນນິສາດ (Niṣāda) ມີວິລະກຳນ່າຢ້ານກົວ.
Verse 51
तेषामन्यतमो यस्तु चतुर्थ: परिकीर्तित: । श्रेणिमानिति विख्यात: क्षितौ राजर्षिसत्तम:,कालेयोंमेंसे ही एक जो चौथा बताया गया है, वह इस भूमण्डलमें राजर्षिप्रवर श्रेणिमान्के नामसे विख्यात हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນພວກກາເລຍະ (Kāleya) ນັ້ນ ມີຜູ້ໜຶ່ງທີ່ຖືກເວົ້າວ່າເປັນຄົນທີສີ່; ລາວໄດ້ໂດງດັງໃນໂລກໃນນາມ «ເສຣນີມານ» (Śreṇimān) ເປັນຣາຊະຣິຊິຜູ້ຍິ່ງ.
Verse 52
पजञ्चमस्त्वभवत् तेषां प्रवरो यो महासुर: । महौजा इति विख्यातो बभूवेह परंतप:,कालेयोंमें जो पाँचवाँ श्रेष्ठ महादैत्य था, वही इस लोकमें शत्रुतापन महौजाके नामसे विख्यात हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນພວກນັ້ນ ຜູ້ທີຫ້າ—ເປັນອະສຸຣະໃຫຍ່ຜູ້ເລີດທີ່ສຸດ—ໄດ້ໂດງດັງໃນໂລກນີ້ວ່າ «ມະໂຫອຸຈາ» (Mahaujā) ຜູ້ເຜົາຜານສັດຕູ.
Verse 53
षष्ठस्तु मतिमान् यो वै तेषामासीन्महासुर: । अभीरुरिति विख्यात: क्षितौ राजर्षिसत्तम:,उन कालेयोंमें जो छठा महान् असुर था, वह भूमण्डलमें राजर्षिशिरोमणि अभीरुके नामसे प्रसिद्ध हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນພວກກາເລຍະ (Kāleya) ນັ້ນ ຜູ້ທີຫົກເປັນອະສຸຣະໃຫຍ່ຜູ້ມີປັນຍາ. ເມື່ອມາຢູ່ໃນໂລກ ລາວໂດງດັງໃນນາມ «ອະພີຣຸ» (Abhīru) ເປັນຣາຊະຣິຊິຜູ້ສູງສຸດ.
Verse 54
समुद्रसेनस्तु नृपस्तेषामेवाभवद् गणात् । विश्रुत: सागरान्तायां क्षितौ धर्मार्थतत्त्ववित्,उन्हींमेंसे सातवाँ असुर राजा समुद्रसेन हुआ, जो समुद्रपर्यन्त पृथ्वीपर सब ओर विख्यात और धर्म एवं अर्थतत्त्वका ज्ञाता था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນກຸ່ມນັ້ນເອງ ມີກະສັດນາມ «ສະມຸດຣະເສນະ» (Samudrasena) ເກີດຂຶ້ນ. ລາວໂດງດັງທົ່ວແຜ່ນດິນຈົນຮອດຂອບທະເລ ແລະເປັນຜູ້ຮູ້ແທ້ໃນຫຼັກທຳແຫ່ງ ທັມມະ ແລະ ອັດຖະ (dharma, artha)—ຄວາມຖືກຕ້ອງແລະການປົກຄອງອັນສະຫຼາດ.
Verse 55
बृहन्नामाष्टमस्तेषां कालेयानां नराधिप । बभूव राजा धर्मात्मा सर्वभूतहिते रत:,राजन! कालेयोंमें जो आठवाँ था, वह बृहत् नामसे प्रसिद्ध सर्वभूतहितकारी धर्मात्मा राजा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ຈອມກະສັດແຫ່ງມະນຸດ, ຜູ້ທີ່ແປດໃນຫມູ່ກາເລຍະນັ້ນ ໂດຍນາມວ່າ ບຣິຫັດ (Bṛhat) ເປັນທີ່ຮູ້ຈັກກວ້າງຂວາງ. ທ່ານໄດ້ເປັນກະສັດຜູ້ມີຈິດໃຈແຫ່ງທຳ ອຸທິດຕົນເພື່ອປະໂຫຍດແກ່ສັດມີຊີວິດທັງປວງ.
Verse 56
कुक्षिस्तु राजन् विख्यातो दानवानां महाबल: । पार्वतीय इति ख्यात: काउज्चनाचलसंनिभ:,महाराज! दानवोंमें कुक्षि नामसे प्रसिद्ध जो महाबली राजा था, वह पार्वतीय नामक राजा हुआ; जो मेरुगिरिके समान तेजस्वी एवं विशाल था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ພຣະມະຫາກະສັດ, ໃນຫມູ່ດານະວະ ມີຜູ້ປົກຄອງຜູ້ໂດດເດັ່ນ ແລະມີພະລັງອັນໃຫຍ່ ຊື່ ກຸກສິ (Kukṣi). ຕໍ່ມາ ທ່ານໄດ້ຮັບການຂານນາມວ່າ ປາຣະວະຕີຍະ (Pārvatīya), ສູງສົງແລະສະຫວ່າງໄສ ດຸດດັ່ງພູຄຳອັນສົງ່າ.
Verse 57
क्रथनश्न महावीर्य: श्रीमान् राजा महासुर: । सूर्याक्ष इति विख्यात: क्षितौ जज्ञे महीपति:,महापराक्रमी क्रथन नामक जो श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वह भूमण्डलमें पृथ्वीपति राजा सूर्याक्ष नामसे उत्पन्न हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ກະສັດຜູ້ກ້າແກ່ນ ແລະມີສິຣິສົງ່າ—ກຣະຖະນັດນະ (Krathanaśna) ອະສຸຣະຜູ້ໃຫຍ່—ໄດ້ກຳເນີດລົງມາໃນໂລກ ເປັນຈອມແຜ່ນດິນ ມີນາມວ່າ ສູຣະຍາກສະ (Sūryākṣa).
Verse 58
असुराणां तु यः सूर्य: श्रीमांश्नैव महासुर: । दरदो नाम बाह्लीको वर: सर्वमहीक्षिताम्,असुरोंमें जो सूर्य नामक श्रीसम्पन्न महान् असुर था, वही पृथ्वीपर सब राजाओंमें श्रेष्ठ दरद नामक बाह्लीकराज हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນຫມູ່ອະສຸຣະ ມີອະສຸຣະຜູ້ໃຫຍ່ຜູ້ສະຫວ່າງໄສ ແລະມີສິຣິ ຊື່ ສູຣະຍະ (Sūrya). ຜູ້ນັ້ນເອງໄດ້ກຳເນີດລົງມາໃນໂລກ ເປັນກະສັດບາຫລີກະ ນາມ ດາຣະດະ (Darada), ໂດຍໄດ້ຮັບການຍົກຍ້ອງວ່າເປັນຜູ້ປະເສີດສຸດໃນຫມູ່ກະສັດທັງປວງ.
Verse 59
गण: क्रोधवशो नाम यस्ते राजन् प्रकीर्तित: । तत: संजज्षिरे वीरा: क्षिताविह नराधिपा:,राजन! क्रोधवश नामक जिन असुरगणोंका तुम्हें परिचय दिया है, उन्हींमेंसे कुछ लोग इस पृथ्वीपर निम्नांकित वीर राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ພຣະມະຫາກະສັດ, ຈາກຫມູ່ຄະນະທີ່ເອີ້ນວ່າ “ກຣົດຫະວະສະ” (Krodhavaśa) ທີ່ຂ້າໄດ້ເລົ່າໃຫ້ພຣະອົງຟັງແລ້ວນັ້ນ, ມີບາງຜູ້ໄດ້ກຳເນີດຢູ່ໃນແຜ່ນດິນນີ້ ເປັນກະສັດວີຣະບຸຣຸດແຫ່ງມະນຸດ.
Verse 60
मद्रक: कण्विष्टश्ष॒ सिद्धार्थ: कीटकस्तथा । सुवीरश्न सुबाहुश्च महावीरो5थ बाह्विक:,मद्रक, क्णवेष्ट, सिद्धार्थ, कीटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लिक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्रीमान् नील नरेश, चीरवासा, भूमिपाल, दन्तवक्त्र, दानव दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ, वायुवेग, भूरितेजा, एकलव्य, सुमित्र, वाटधान, गोमुख, करूषदेशके अनेक राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेम, उग्रतीर्थ, कलिंग-नरेश कुहर तथा परम बुद्धिमान् मनुष्योंका राजा ईश्वर
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ທີ່ນັ້ນຍັງມີກະສັດເຫຼົ່ານີ້ອີກ—ມັດຣະກະ, ກັນວິດຖະ, ສິດທາຣຖະ, ກີຕະກະ; ແລະຍັງມີ ສຸວີຣະ ແລະ ສຸບາຫຸ; ຕໍ່ມາຄື ວີລະບຸລຸດຜູ້ກ້າຫານ ບາຫລິກະ».
Verse 61
क्रथो विचित्र: सुरथ: श्रीमान् नीलश्न भूमिप: । चीरवासाश्न कौरव्य भूमिपालश्न नामत:,मद्रक, क्णवेष्ट, सिद्धार्थ, कीटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लिक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्रीमान् नील नरेश, चीरवासा, भूमिपाल, दन्तवक्त्र, दानव दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ, वायुवेग, भूरितेजा, एकलव्य, सुमित्र, वाटधान, गोमुख, करूषदेशके अनेक राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेम, उग्रतीर्थ, कलिंग-नरेश कुहर तथा परम बुद्धिमान् मनुष्योंका राजा ईश्वर
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ກົວຣະວະຍະ, ຍັງມີກະສັດເຫຼົ່ານີ້ຕາມນາມ—ກຣະຖະ, ວິຈິຕຣະ, ສຸຣະຖະ, ນີລະຜູ້ຮຸ່ງເຮືອງ, ຈີຣະວາສາ, ພູມິປາລະ; ແລະຍັງມີ ມັດຣະກະ, ກຣຶນະເວດຖະ, ສິດທາຣຖະ, ກີຕະກະ, ສຸວີຣະ, ສຸບາຫຸ, ມະຫາວີຣະ, ບາຫລິກະ, ດັນຕະວັກຕຣະ, ດານະວະນາມ ດຸຣຊະຍະ ຜູ້ຍາກຈະພິຊິດ, ຣຸກມີຜູ້ເປັນເສືອໃນຫມູ່ກະສັດ, ກະສັດ ຈະນະເມຊະຍະ, ອາສາດະ, ວາຍຸເວກະ, ພູຣີເຕຊາ, ເອກະລະວະຍະ, ສຸມິຕຣະ, ວາຕະທານະ, ໂກມຸຂະ; ແລະອີກຫຼາຍຜູ້ປົກຄອງແຫ່ງດິນແດນກາຣູສະ—ກະເສມະທູຣຕິ, ສຣຸຕາຍຸ, ອຸດວະຫະ, ບຣຶຫັດເສນະ, ກະເສມະ, ອຸກຣະຕີຣຖະ, ກະສັດແຫ່ງກະລິງຄະນາມ ກຸຫະຣະ, ແລະ ອີສະວະຣະ—ຜູ້ເປັນອະທິລາດຜູ້ປັນຍາສູງສຸດໃນຫມູ່ມະນຸດ»។
Verse 62
दन्तवक्त्रश्न नामासीद् दुर्जयश्वैव दानव: । रुक्मी च नृपशार्दूलो राजा च जनमेजय:,मद्रक, क्णवेष्ट, सिद्धार्थ, कीटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लिक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्रीमान् नील नरेश, चीरवासा, भूमिपाल, दन्तवक्त्र, दानव दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ, वायुवेग, भूरितेजा, एकलव्य, सुमित्र, वाटधान, गोमुख, करूषदेशके अनेक राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेम, उग्रतीर्थ, कलिंग-नरेश कुहर तथा परम बुद्धिमान् मनुष्योंका राजा ईश्वर
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ມີດານະວະຜູ້ໜຶ່ງນາມ ດັນຕະວັກຕຣະ; ແລະຍັງມີດານະວະອີກຜູ້ໜຶ່ງນາມ ດຸຣຊະຍະ. ມີຣຸກມີ—ເສືອໃນຫມູ່ກະສັດ—ແລະກະສັດ ຈະນະເມຊະຍະ ດ້ວຍ.»
Verse 63
आषाढो वायुवेगश्च भूरितेजास्तथैव च । एकलव्य: सुमित्रश्न वाटधानो5थ गोमुख:,मद्रक, क्णवेष्ट, सिद्धार्थ, कीटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लिक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्रीमान् नील नरेश, चीरवासा, भूमिपाल, दन्तवक्त्र, दानव दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ, वायुवेग, भूरितेजा, एकलव्य, सुमित्र, वाटधान, गोमुख, करूषदेशके अनेक राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेम, उग्रतीर्थ, कलिंग-नरेश कुहर तथा परम बुद्धिमान् मनुष्योंका राजा ईश्वर
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນຫມູ່ກະສັດຫຼາຍພະອົງທີ່ມາຊຸມນຸມນັ້ນ ມີ ອາສາດະ, ວາຍຸເວກະ, ແລະ ພູຣີເຕຊາ; ອີກທັງ ເອກະລະວະຍະ, ສຸມິຕຣະ, ວາຕະທານະ, ແລະ ໂກມຸຂະ.»
Verse 64
कारूषकाश्न राजान: क्षेमधूर्तिस्तथैव च । श्रुतायुरुद्वहश्चैव बृहत्सेनस्तथैव च,मद्रक, क्णवेष्ट, सिद्धार्थ, कीटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लिक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्रीमान् नील नरेश, चीरवासा, भूमिपाल, दन्तवक्त्र, दानव दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ, वायुवेग, भूरितेजा, एकलव्य, सुमित्र, वाटधान, गोमुख, करूषदेशके अनेक राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेम, उग्रतीर्थ, कलिंग-नरेश कुहर तथा परम बुद्धिमान् मनुष्योंका राजा ईश्वर
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຈາກດິນແດນກາຣູສະ ແລະ ພື້ນຖິ່ນອື່ນໆ ມີກະສັດຫຼາຍພະອົງມາ—ກະເສມະທູຣຕິກໍມາດ້ວຍ; ສຣຸຕາຍຸ, ອຸດວະຫະ, ແລະ ບຣຶຫັດເສນະ ກໍມາດ້ວຍ.»
Verse 65
क्षेमोग्रतीर्थ: कुहर: कलिज्ेषु नराधिप: । मतिमांश्व मनुष्येन्द्र ईश्वरश्वेति विश्वुत:ः,मद्रक, क्णवेष्ट, सिद्धार्थ, कीटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लिक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्रीमान् नील नरेश, चीरवासा, भूमिपाल, दन्तवक्त्र, दानव दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ, वायुवेग, भूरितेजा, एकलव्य, सुमित्र, वाटधान, गोमुख, करूषदेशके अनेक राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेम, उग्रतीर्थ, कलिंग-नरेश कुहर तथा परम बुद्धिमान् मनुष्योंका राजा ईश्वर
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນບັນດາກະສັດແຫ່ງກາລິງຄະ ມີ ກຸຫະຣະ ແລະ ກເສມ–ອຸກຣະຕີຣຖະ; ຍັງມີຜູ້ປົກຄອງອີສະວະຣະ ຜູ້ມີຊື່ສຽງ ເປັນເຈົ້ານາຍຜູ້ມີປັນຍາສູງສຸດໃນຫມູ່ມະນຸດ. ພ້ອມກັບພວກເຂົາ ຍັງມີກະສັດອື່ນໆອີກຫຼາຍ—ມັດຣະກະ, ກຣະນະເວດຕະ, ສິດທາຣຖະ, ກີຕະກະ, ສຸວີຣະ, ສຸບາຫຸ, ມະຫາວີຣະ, ບາຫລິກະ, ກຣະຖະ, ວິຈິຕຣະ, ສຸຣະຖະ, ກະສັດນີລະຜູ້ຮຸ່ງເຮືອງ, ຈີຣະວາສາ, ພູມິປາລະ, ດັນຕະວັກຕຣະ, ດານະວະ–ດຸຣຊະຍະ, ກະສັດຣຸກມີຜູ້ໂດດເດັ່ນ, ກະສັດຊະນະເມຊະຍະ, ອາສາດຫະ, ວາຍຸເວກະ, ພູຣີເຕຊາ, ເອກະລະວະຍະ, ສຸມິຕຣະ, ວາຕະດານະ, ໂຄມຸຂະ ແລະບັນດາຜູ້ປົກຄອງຈາກແຜ່ນດິນກາຣູສະ—ພ້ອມທັງ ກເສມະທູຣຕິ, ສຣຸຕາຍຸ, ອຸດວະຫະ, ບຣິຫັດເສນະ ແລະອື່ນໆ. ດັ່ງນັ້ນ ການເລົ່າໄດ້ລຽງນາມກະສັດຜູ້ມາຊຸມນຸມ ເນັ້ນໃຫ້ເຫັນຄວາມກວ້າງໃຫຍ່ແຫ່ງອໍານາດຣາຊະ ແລະກຽດສັກທີ່ຜູກພັນກັບປັນຍາ ແລະຄວາມເປັນເຈົ້ານາຍ.
Verse 66
गणात् क्रोधवशादेष राजपूगो5भवत् क्षितौ | जात: पुरा महाभागो महाकीर्तिमहाबल:,इतने राजाओंका समुदाय पहले इस पृथ्वीपर क्रोधवश नामक दैत्यगणसे उत्पन्न हुआ था। ये सब राजा परम सौभाग्यशाली, महान् यशस्वी और अत्यन्त बलशाली थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ຈາກຝູງສັດຕະວະທີ່ເອີ້ນວ່າ ກໂຣທະວະສະ (ຜູ້ຖືກຄວາມໂກດຄອບງໍາ) ຝູງກະສັດອັນຫຼາຍນີ້ ເຄີຍເກີດຂຶ້ນເທິງແຜ່ນດິນ. ໃນການກ່ອນໆ ພວກເຂົາເກີດເປັນມະນຸດຜູ້ມີວາສະນາຍິ່ງ—ມີຊື່ສຽງກວ້າງໄກ ແລະມີພະລັງອັນນ່າຢ້ານ.”
Verse 67
कालनेमिरिति ख्यातो दानवानां महाबल: । स कंस इति विख्यात उग्रसेनसुतो बली,दानवोंमें जो महाबली कालनेमि था, वही राजा उग्रसेनके पुत्र बलवान् कंसके नामसे विख्यात हुआ इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि अंशावतरणसमाप्तौ सप्तषष्टितमो5ध्याय:
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ດານະວະຜູ້ມີພະລັງຍິ່ງ ຜູ້ມີນາມລືອຊາວ່າ ກາລະເນມິ ນັ້ນ ໄດ້ກັບມາເກີດໃໝ່ ແລະກາຍເປັນຜູ້ທີ່ຮູ້ຈັກກັນວ່າ ກັງສະ—ບຸດຜູ້ກ້າແຂງຂອງກະສັດອຸກຣະເສນະ.
Verse 68
यस्त्वासीद् देवको नाम देवराजसमझ्युति: । स गन्धर्वपतिर्मुख्य: क्षितौ जज्ञे नराधिप:,इन्द्रके समान कान्तिमान् राजा देवकके रूपमें इस पृथ्वीपर श्रेष्ठ गन्धर्वराज ही उत्पन्न हुआ था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຜູ້ທີ່ເຄີຍມີນາມວ່າ ເທວະກະ ຜູ້ສ່ອງສະຫວ່າງດັ່ງພະຣາຊາແຫ່ງເທວະ (ອິນທຣະ) ໄດ້ເກີດລົງມາໃນໂລກເປັນກະສັດໃນຫມູ່ມະນຸດ—ເປັນເຈົ້ານາຍສູງສຸດແຫ່ງຄັນທະວະ ມີສິຣິສົມບັດທຽບເທົ່າອິນທຣະ.
Verse 69
बृहस्पतेर्बृहत्कीरतेंदिवर्षेविद्धि भारत । अंशाद् द्रोणं समुत्पन्नं भारद्वाजमयोनिजम्,भारत! महान् कीर्तिशाली देवर्षि बृहस्पतिके अंशसे अयोनिज भरद्वाजनन्दन द्रोण उत्पन्न हुए, यह जान लो
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ພາຣະຕະ, ຈົ່ງຮູ້ໄວ້ວ່າ ໂດຣນະ—ຜູ້ເກີດໂດຍບໍ່ມີຄັນມານດາ, ບຸດຂອງ ພາຣະດວາຊະ—ໄດ້ອຸບັດຂຶ້ນຈາກສ່ວນໜຶ່ງຂອງເທວະຣິສີ ບຣິຫັສປະຕິ ຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ແລະມີກຽດສຽງ.
Verse 70
धन्विनां नृपशार्दूल यः सर्वस्त्रिविदुत्तम: । महाकीर्तिमिहातेजा: स जज्ञे मनुजेश्वर,नृपश्रेष्ठ राजा जनमेजय! आचार्य द्रोण समस्त धनुर्धर वीरोंमें उत्तम और सम्पूर्ण अस्त्रोंके ज्ञाता थे। उनकी कीर्ति बहुत दूरतक फैली हुई थी। वे महान् तेजस्वी थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ກະສັດຜູ້ດຸດັນດັ່ງເສືອ, ໂອ ເຈົ້າແຫ່ງມະນຸດ, ໂອ ຜູ້ປົກຄອງອັນປະເສີດ—ພຣະຣາຊາ ຈະນະເມຊະຍະ! ມີຜູ້ໜຶ່ງເກີດຂຶ້ນ ເປັນຜູ້ເລີດລ້ຳໃນບັນດານັກທະນູ ແລະເປັນຜູ້ຮູ້ວິທະຍາອາວຸດທັງປວງຢ່າງຄົບຖ້ວນ. ຊື່ສຽງຂອງລາວແຜ່ໄກກວ້າງ ແລະລາວມີສະຫງ່າລາສີອັນຍິ່ງໃຫຍ່.
Verse 71
धनुर्वेदे च वेदे च यं त॑ वेदविदो विदु: । वरिष्ठ चित्रकर्माणं द्रोणं स्वकुलवर्धनम्,वेदवेत्ता विद्वान् द्रोणको धनुर्वेद और वेद दोनोंमें सर्वश्रेष्ठ मानते थे। वे विचित्र कर्म करनेवाले तथा अपने कुलकी मर्यादाको बढ़ानेवाले थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ບັນດານັກຮູ້ເວດາ ຮັບຮູ້ວ່າ ດໂຣນະ ເປັນຜູ້ເລີດລ້ຳທັງໃນວິທະຍາທະນູ ແລະໃນຄວາມຮູ້ເວດາ. ລາວໂດດເດັ່ນດ້ວຍກິດຈະກຳອັນພິສູດພິເສດ ແລະດ້ວຍການສົ່ງເສີມກຽດສັກສີແຫ່ງວົງຕະກູນຂອງຕົນ.
Verse 72
महादेवान्तकाभ्यां च कामात् क्रोधाच्च भारत । एकत्वमुपपन्नानां जज्ञे शूर: परंतप:,भारत! उनके यहाँ महादेव, यम, काम और क्रोधके सम्मिलित अंशसे शत्रुसंतापी शूरवीर अश्वत्थामाका जन्म हुआ, जो इस पृथ्वीपर महापराक्रमी और शत्रुपक्षका संहार करनेवाला वीर था। राजन! उसके नेत्र कमलदलके समान विशाल थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ພາຣະຕະ! ຈາກສ່ວນປະກອບທີ່ມາຮວມເປັນໜຶ່ງດຽວ—ຂອງ ມະຫາເທວະ ແລະ ອັນຕະກະ (ຍະມະ), ພ້ອມທັງ ກາມະ ແລະ ໂກຣດະ—ໄດ້ເກີດວີລະບຸລຸດຜູ້ເຜົາຜານສັດຕູ. ການເກີດນີ້ຊີ້ໃຫ້ເຫັນການປະສານຂອງພະລັງສະຫງົບສົມາທິ ແລະຄວາມເຂັ້ມງວດແຫ່ງຄວາມຕາຍ ກັບຄວາມປາຖະໜາ ແລະຄວາມໂກດ—ເປັນທຳມະຊາດນັກຮົບທີ່ກ້າແກ່ ແຕ່ມີເງົາແຫ່ງອາລົມຮຸນແຮງ.
Verse 73
अश्वत्थामा महावीर्य: शत्रुपक्षभयावह: । वीर: कमलपत्राक्ष: क्षितावासीन्नराधिप,भारत! उनके यहाँ महादेव, यम, काम और क्रोधके सम्मिलित अंशसे शत्रुसंतापी शूरवीर अश्वत्थामाका जन्म हुआ, जो इस पृथ्वीपर महापराक्रमी और शत्रुपक्षका संहार करनेवाला वीर था। राजन! उसके नेत्र कमलदलके समान विशाल थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ອັດສະວັດຖາມາ ມີພະລັງກ້າຫານອັນຍິ່ງໃຫຍ່ ເປັນຄວາມຫວາດຫວັນແກ່ກອງສັດຕູ. ວີລະບຸລຸດຜູ້ມີດວງຕາດັ່ງກີບດອກບົວ ໄດ້ດຳລົງຢູ່ເທິງແຜ່ນດິນນີ້, ໂອ ພຣະຣາຊາ—ກ້າແກ່ໃນວິລະຍະ ແລະເໝາະສົມທີ່ຈະບົດຂີ້ກຳລັງຝ່າຍຕໍ່ຕ້ານ.
Verse 74
जज्ञिरे वसवस्त्वष्टौ गज़ायां शान्तनो: सुता: | वसिष्ठस्य च शापेन नियोगाद् वासवस्य च,महर्षि वसिष्ठके शाप और इन्द्रके आदेशसे आठों वसु गंगाजीके गर्भसे राजा शान्तनुके पुत्ररूपमें उत्पन्न हुए
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂດຍຄຳສາບຂອງລະສີ ວະສິດຖະ ແລະໂດຍຄຳສັ່ງຂອງ ວາສະວະ (ອິນທຣະ), ວະສຸທັງແປດ ໄດ້ເກີດໃນຄັນຂອງ ຄັງຄາ ເປັນລູກຊາຍຂອງພຣະຣາຊາ ຊານຕະນຸ.
Verse 75
तेषामवरजो भीष्म: कुरूणामभयंकर: । मतिमान् वेदविद् वाग्मी शत्रुपक्षक्षयंकर:,उनमें सबसे छोटे भीष्म थे, जिन्होंने कौरववंशको निर्भय बना दिया था। वे परम बुद्धिमान, वेदवेत्ता, वक्ता तथा शत्रुपक्षका संहार करनेवाले थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນພວກເຂົາ ຜູ້ນ້ອຍສຸດແມ່ນ ພີສະມະ—ຜູ້ເຮັດໃຫ້ວົງສາກຸຣຸກ້າຫານບໍ່ຫວາດຫວັນ. ທ່ານມີປັນຍາແຫຼມຄົມ ຮູ້ວິທະຍາແຫ່ງເວດ ເວົ້າຈາຄົມຄາຍ ແລະເປັນຜູ້ທຳລາຍແຖວທັບສັດຕູຢ່າງນ່າຢ້ານ.
Verse 76
जामदग्न्येन रामेण सर्वास्त्रिविदुषां वर: । योब्युध्यत महातेजा भार्गवेण महात्मना,सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्रोंके दिद्वानोंमें श्रेष्ठ महातेजस्वी भीष्मने भृगुवंशी महात्मा जमदग्निनन्दन परशुरामजीके साथ युद्ध किया था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ພີສະມະຜູ້ມີລັງສີອຳນາດຍິ່ງ—ເປັນຜູ້ເລີດສຸດໃນບັນດາຜູ້ຮູ້ວິຊາອາວຸດ—ໄດ້ລຸກຂຶ້ນສູ້ຮົບກັບ ຣາມະ ຈາມະດັກນະ (ປະຣະຊຸຣາມະ) ຜູ້ເປັນພາຣຄະວະຜູ້ໃຈໃຫຍ່.
Verse 77
यस्तु राजन् कृपो नाम ब्रह्मूर्षिरभवत् क्षितौ । रुद्राणां तु गणाद् विद्धि सम्भूतमतिपौरुषम्,महाराज! जो कृप नामसे प्रसिद्ध ब्रह्मर्षि इस पृथ्वीपर प्रकट हुए थे, उनका पुरुषार्थ असीम था। उन्हें रुद्रणणके अंशसे उत्पन्न हुआ समझो
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ! ພຣະພຣະຫມະຣິສີ ນາມ ກຣິປະ ຜູ້ປາກົດຂຶ້ນໃນໂລກນີ້—ຈົ່ງຮູ້ໄວ້ວ່າ ທ່ານເກີດຈາກຫມູ່ຮຸດຣະ ແລະມີວິລະກຳອັນເຫຼືອລົ້ນ»។
Verse 78
शकुनिर्नाम यस्त्वासीद् राजा लोके महारथ: । द्वापरं विद्धि तं राजन् सम्भूतमरिमर्दनम्,राजन्! जो इस जगत्में महारथी राजा शकुनिके नामसे विख्यात था, उसे तुम द्वापरके अंशसे उत्पन्न हुआ मानो। वह शत्रुओंका मान-मर्दन करनेवाला था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ! ກະສັດຜູ້ໂດ່ງດັງໃນໂລກນີ້ຊື່ ຊະກຸນິ ເປັນມະຫາຣະຖີ—ຈົ່ງຮູ້ວ່າ ທ່ານເກີດຈາກສ່ວນໜຶ່ງຂອງຍຸກ ດວາປະຣະ ເປັນຜູ້ບີບຂະຍີ້ສັດຕູ»។
Verse 79
सात्यकि: सत्यसन्धश्न योडसौ वृष्णिकुलोद्वह: । पक्षात् स जज्ञे मरुतां देवानामरिमर्दन:,वृष्णिवंशका भार वहन करनेवाले जो सत्यप्रतिज्ञ शत्रुमर्दन सात्यकि थे, वे मरुत्- देवताओंके अंशसे उत्पन्न हुए थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ສາຕະຍະກິ—ຜູ້ຍຶດຫມັ້ນຄຳສັດ ເປັນຫລັກພາວົງສາວຣິສນິ ແລະເປັນຜູ້ບີບຂະຍີ້ສັດຕູ—ໄດ້ເກີດມາເປັນພາກສ່ວນໜຶ່ງຂອງເທວະມາຣຸດ.
Verse 80
द्रुपदश्चैव राजर्षिसतत एवाभवद् गणात् | मानुषे नृप लोकेडस्मिन् सर्वशस्त्रभूृतां वर:,राजा जनमेजय! सम्पूर्ण शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि द्रपद भी इस मनुष्यलोकमें उस मरुदगणसे ही उत्पन्न हुए थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ຂ້າແຕ່ພະຣາຊາ ຈະນະເມຊະຍະ, ຣາຊະຣິສິ ດຣຸປະດະ—ຜູ້ເປັນຍອດເລີດເຫນືອຜູ້ຖືອາວຸດທັງປວງໃນໂລກມະນຸດນີ້—ແທ້ຈິງແລ້ວເກີດຈາກຫມູ່ (gaṇa) ຂອງພຣະມາຣຸດນັ້ນເອງ. ຄຳບອກເລົ່ານີ້ຊີ້ໃຫ້ເຫັນວ່າ ກະສັດຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ຖືກສືບສາຍມາຈາກຊາດກຳເນີດທິບ ເຊື່ອມພະລັງໃນໂລກກັບຕົ້ນກຳເນີດອັນສັກສິດ ແລະພາລະຫນ້າທີ່ທີ່ສະຖານະນັ້ນນຳມາ.”
Verse 81
ततश्न कृतवर्माणं विद्धि राजज्जनाधिपम् । तमप्रतिमकर्माणि क्षत्रियर्षभसत्तमम्,महाराज! अनुपम कर्म करनेवाले, क्षत्रियोंमें श्रेष्ठ राजा कृतवर्माको भी तुम मरुदगणोंसे ही उत्पन्न मानो
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ແລະຈົ່ງຮູ້ໄວ້ອີກດ້ວຍ ຂ້າແຕ່ພະຣາຊາ ຜູ້ເປັນເຈົ້າແຫ່ງມະນຸດ, ຄື ກຣິຕະວັຣມາ—ຜູ້ມີກຳລັງການກະທຳບໍ່ມີໃຜເທົ່າ, ເປັນຍອດອຸສະພະໃນຫມູ່ກະສັດນັກຮົບ (kṣatriya). ຂ້າແຕ່ມະຫາຣາຊາ, ຈົ່ງນັບຖືກຣິຕະວັຣມາ ຜູ້ກະທຳອັນຫາຜູ້ເທົ່າບໍ່ໄດ້ນັ້ນດ້ວຍ ວ່າເກີດຈາກຫມູ່ຂອງພຣະມາຣຸດ.»
Verse 82
मरुतां तु गणाद् विद्धि संजातमरिमर्दनम् | विराट नाम राजानं परराष्ट्प्रतापनम्,शत्रुराष्ट्रको संताप देनेवाले शत्रुमर्दन राजा विराटको भी मरुदगणोंसे ही उत्पन्न समझो
ຈົ່ງຮູ້ວ່າ ກະສັດວິຣາຕະ ນາມ—ຜູ້ບົດບີ້ສັດຕູ ແລະນຳຄວາມຮ້ອນຮົນໃຫ້ແດ່ດິນແດນຂອງຝ່າຍຕໍ່ຕ້ານ—ເກີດຈາກຫມູ່ (gaṇa) ຂອງພຣະມາຣຸດ. ຄຳກ່າວນີ້ຈັດວາງວິຣາຕະໃນຫມູ່ກະສັດຜູ້ມີຊາດກຳເນີດທິບ ແລະຊີ້ວ່າ ຄວາມເປັນກະສັດທີ່ແທ້ ຖືກວັດດ້ວຍການປົກປ້ອງປະຊາ ພ້ອມທັງພະລັງແລະຄວາມອົດກັ້ນທີ່ຈຳເປັນເພື່ອປະຫານຜູ້ຮຸກຮານ.
Verse 83
अरिष्ायास्तु यः पुत्रो हंस इत्यभिविश्रुत: । स गन्धर्वपतिर्जज्ञे कुरुवंशविवर्धन:
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ຈາກອະຣິສະຕາ ໄດ້ເກີດບຸດຜູ້ໜຶ່ງ ທີ່ຖືກຮູ້ຈັກຢ່າງກວ້າງຂວາງວ່າ ຫັມສະ; ຜູ້ນັ້ນໄດ້ຂຶ້ນເປັນເຈົ້າແຫ່ງຄົນທັຣວະ (Gandharva) ແລະເປັນຜູ້ເພີ່ມພູນ ແລະເສີມແຮງວົງສາກຸຣຸ.”
Verse 84
धृतराष्ट्र इति ख्यात: कृष्णद्वैपायनात्मज: । दीर्घबाहुर्महातेजा: प्रज्ञाचक्षुर्नराधिप:
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ຜູ້ນັ້ນໂດຍນາມເປັນທີ່ຮູ້ຈັກວ່າ ທຣິຕະຣາສະຕຣະ—ເປັນບຸດຂອງ ກຣິສນະ ດວຍປາຍະນະ (ວຽາສະ). ແຂນຍາວ ມີຣັດສະຫມີອັນໃຫຍ່; ເປັນຈອມກະສັດຜູ້ທີ່ ‘ດວງຕາ’ ທີ່ແທ້ຂອງລາວແມ່ນປັນຍາ ແມ່ນແມ່ນວ່າສາຍຕາທາງກາຍຈະບໍ່ມີ.”
Verse 85
मातुर्दोषादृषे: कोपादनन््ध एव व्यजायत | अरिष्टाका पुत्र जो हंस नामसे विख्यात गन्धर्वराज था, वही कुरुवंशकी वृद्धि करनेवाले व्यासनन्दन धृतराष्ट्रके नामसे प्रसिद्ध हुआ। धृतराष्ट्रकी बाँहें बहुत बड़ी थीं। वे महातेजस्वी नरेश प्रज्ञाचक्षु (अन्धे) थे। वे माताके दोष और महर्षिके क्रोधसे अन्धे ही उत्पन्न हुए ।। ८३-८४ $।। तस्यैवावरजो भ्राता महासत्त्वो महाबल:,उन्हींके छोटे भाई महान् शक्तिशाली महाबली पाण्डुके नामसे विख्यात हुए। वे सत्य- धर्ममें तत्पर और पवित्र थे। पुत्रवानोंमें श्रेष्ठ और बुद्धिमानोंमें उत्तम परम सौभाग्यशाली विदुरको तुम इस लोकमें सूर्यपुत्र धर्मके अंशसे उत्पन्न हुआ समझो
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເນື່ອງຈາກຄວາມຜິດພາດຂອງແມ່ ແລະ ຄວາມໂກດຂອງລະສີ ລາວຈຶ່ງເກີດມາເປັນຄົນຕາບອດ. ຮັມສະ ກະສັດແຫ່ງຄັນທະວະ ຜູ້ມີຊື່ສຽງ ບຸດຂອງອະຣິສຕະກາ ໄດ້ກາຍເປັນບຸດຂອງວະຍາສະ ຜູ້ຈະເພີ່ມພູນວົງກຸຣຸ ແລະ ເປັນທີ່ຮູ້ຈັກໃນນາມ ທຣິຕະຣາດຣະ. ແຂນຂອງທຣິຕະຣາດຣະ ໃຫຍ່ຍາວຫຼາຍ; ແມ່ນກະສັດຜູ້ມີລັດສະໝີອັນຍິ່ງໃຫຍ່ ແຕ່ຖືກເອີ້ນວ່າ “ຜູ້ມີປັນຍາເປັນດວງຕາ” ຄື ຕາບອດ. ດັ່ງນັ້ນ ເນື່ອງຈາກຄວາມຜິດຂອງແມ່ ແລະ ຄວາມໂກດຂອງມະຫາລະສີ ລາວຈຶ່ງເກີດມາໂດຍບໍ່ມີສາຍຕາ. ນ້ອງຊາຍຂອງລາວ ຜູ້ມີຈິດໃຈໃຫຍ່ ແລະ ກຳລັງໃຫຍ່ ໄດ້ໂດງດັງໃນນາມ ປານດຸ—ມຸ່ງໝັ້ນໃນສັດຈະ ແລະ ທຳມະ ແລະ ບໍລິສຸດໃນຄວາມປະພຶດ. ສ່ວນ ວິດຸຣະ—ຜູ້ຍອດເຢັ້ນໃນບັນດາຜູ້ມີປັນຍາ ແລະ ເປັນຫົວໜ້າໃນບັນດາຜູ້ມີຄຸນທຳ—ຈົ່ງຮູ້ໄວ້ວ່າ ໃນໂລກນີ້ ລາວເກີດຈາກສ່ວນໜຶ່ງຂອງ ທຳມະ ເປັນບຸດແຫ່ງພຣະອາທິດ.
Verse 86
स पाण्डुरिति विख्यात: सत्यधर्मरत: शुचि: । अत्रेस्तु- सुमहाभागं पुत्र पुत्रवतां वरम् । विदुरं विद्धि तं लोके जात॑ बुद्धिमतां वरम्,उन्हींके छोटे भाई महान् शक्तिशाली महाबली पाण्डुके नामसे विख्यात हुए। वे सत्य- धर्ममें तत्पर और पवित्र थे। पुत्रवानोंमें श्रेष्ठ और बुद्धिमानोंमें उत्तम परम सौभाग्यशाली विदुरको तुम इस लोकमें सूर्यपुत्र धर्मके अंशसे उत्पन्न हुआ समझो
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ລາວໂດງດັງໃນນາມ ປານດຸ—ບໍລິສຸດໃນຄວາມປະພຶດ ແລະ ມຸ່ງໝັ້ນໃນສັດຈະ ແລະ ທຳມະ. ແລະ ຈົ່ງຮູ້ວ່າ ວິດຸຣະ ໃນໂລກນີ້ ເປັນຜູ້ມີສິຣິມົງຄຸນສູງສຸດ, ຍອດເຢັ້ນໃນບັນດາຜູ້ມີບຸດ, ແລະ ເປັນຫົວໜ້າໃນບັນດາຜູ້ມີປັນຍາ—ເກີດຈາກສ່ວນໜຶ່ງຂອງ ທຳມະ, ເປັນບຸດແຫ່ງພຣະອາທິດ.
Verse 87
कलेरंशस्तु संजज्ञे भुवि दुर्योधनो नृप: । दुर्बृद्धिर्दुर्मतिश्वैव कुरूणामयशस्कर:,खोटी बुद्धि और दूषित विचारवाले कुरुकुलकलंक राजा दुर्योधनके रूपमें इस पृथ्वीपर कलिका अंश ही उत्पन्न हुआ था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນແຜ່ນດິນນີ້ ກະສັດ ດຸຣະໂຢທະນະ ເກີດມາເປັນສ່ວນໜຶ່ງຂອງ ກະລິ—ມີປັນຍາບິດເບືອນ ແລະ ໃຈຄິດເສື່ອມຊົ່ວ—ນຳຄວາມອັບອາຍມາໃຫ້ແກ່ວົງກຸຣຸ.
Verse 88
जगतो यस्तु सर्वस्य विद्विष्ट: कलिपूरुष: । य: सर्वा घातयामास पृथिवीं पृथिवीपते,राजन्! वह कलिस्वरूप पुरुष सबका द्वेषपात्र था। उसने सारी पृथ्वीके वीरोंको लड़ाकर मरवा दिया था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ບຸກຄົນແຫ່ງກະລິນັ້ນ ຖືກໂລກທັງປວງຊັງຊັງ ແລະ ກາຍເປັນສິ່ງທີ່ທຸກຄົນລັງກຽດ. ໂອ ກະສັດ ເຈົ້າແຫ່ງແຜ່ນດິນ! ລາວເຮັດໃຫ້ວີຣະຊົນທົ່ວແຜ່ນດິນ ຟັນຟາດກັນເອງຈົນລົ້ມຕາຍ ນຳຄວາມພິນາດອັນກວ້າງໃຫຍ່ມາ.”
Verse 89
उद्दीपितं येन वैरं भूतान्तकरणं महत् | पौलस्त्या भ्रातरश्नास्य जज्ञिरे मनुजेष्विह,उसके द्वारा प्रजजलित की हुई वैरकी भारी आग असंख्य प्राणियोंके विनाशका कारण बन गयी। पुलस्त्य-कुलके राक्षस भी मनुष्योंमें दुर्योधनके भाइयोंके रूपमें उत्पन्न हुए थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂດຍລາວ ໄຟແຫ່ງຄວາມພະຍາດສັດຕູ ຖືກຈຸດໃຫ້ລຸກໂຊນ—ໃຫຍ່ຫຼວງ ແລະ ນຳຄວາມພິນາດ—ເປັນເຫດໃຫ້ສັດມີຊີວິດນັບບໍ່ຖ້ວນພິນາດ. ແລະ ໃນໂລກມະນຸດນີ້ ພີ່ນ້ອງຂອງລາວໄດ້ເກີດມາເປັນຣາກຊະສະ ຈາກສາຍພົວພັນຂອງ ປຸລັສຕະຍະ.
Verse 90
शतं दुःशासनादीनां सर्वेषां क्रूरकर्मणाम् । दुर्मुखो दुःसहश्नैव ये चान्ये नानुकीर्तिता:,उसके दुःशासन आदि सौ भाई थे। वे सभी क्रूरतापूर्ण कर्म किया करते थे। दुर्मुख, दुःसह तथा अन्य कौरव जिनका नाम यहाँ नहीं लिया गया है, दुर्योधनके सहायक थे। भरतश्रेष्ठ! धृतराष्ट्रके वे सब पुत्र पूर्वजन्मके राक्षस थे। धृतराष्ट्रपुत्र युयुत्सु वैश्य-जातीय सत्रीसे उत्पन्न हुआ था। वह दुर्योधन आदि सौ भाइयोंके अतिरिक्त था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ມີຢູ່ຄົນຄົບຮ້ອຍ—ເລີ່ມຈາກ ດຸຫສາສະນະ—ທັງໝົດເປັນຜູ້ກະທຳການອັນໂຫດຮ້າຍ. ໃນພວກນັ້ນມີ ດຸຣມຸຂ ແລະ ດຸຫສະຫະ ພ້ອມທັງອື່ນໆອີກຫຼາຍ ທີ່ບໍ່ໄດ້ຂານນາມໄວ້ໃນທີ່ນີ້.
Verse 91
दुर्योधनसहायास्ते पौलस्त्या भरतर्षभ । वैश्यापुत्रो युयुत्सुश्न धार्तराष्ट्र: शताधिक:,उसके दुःशासन आदि सौ भाई थे। वे सभी क्रूरतापूर्ण कर्म किया करते थे। दुर्मुख, दुःसह तथा अन्य कौरव जिनका नाम यहाँ नहीं लिया गया है, दुर्योधनके सहायक थे। भरतश्रेष्ठ! धृतराष्ट्रके वे सब पुत्र पूर्वजन्मके राक्षस थे। धृतराष्ट्रपुत्र युयुत्सु वैश्य-जातीय सत्रीसे उत्पन्न हुआ था। वह दुर्योधन आदि सौ भाइयोंके अतिरिक्त था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ໂອ ຜູ້ເປັນດັ່ງງົວຜູ້ປະເສີດໃນວົງພັນພາຣະຕະ, ບັນດາຜູ້ເກີດຈາກສາຍພັນເປົາລັສຕະຍະນັ້ນ ເປັນພັນທະມິດຂອງ ດຸຣະໂຢທະນະ. ແລະ ຢຸຍຸດສຸ ຜູ້ເກີດຈາກຍິງວັຍສະຍາ ກໍເປັນລູກຂອງ ທາຣຕະຣາສະຕຣະ ດ້ວຍ—ຈຶ່ງເຮັດໃຫ້ຈຳນວນເກີນຮ້ອຍ.”
Verse 92
जनमेजय उवाच ज्येष्ठानुज्येष्ठतामेषां नामधेयानि वा विभो । धृतराष्ट्रस्य पुत्राणामानुपूर्व्येण कीर्तय,जनमेजयने कहा--प्रभो! धृतराष्ट्रके जो सौ पुत्र थे, उनके नाम मुझे बड़े-छोटेके क्रमसे एक-एक करके बताइये
ຈະນະເມຊະຍະ ກ່າວວ່າ: “ໂອ ຜູ້ມີລິດອຳນາດ, ຂໍໃຫ້ທ່ານຂານນາມລູກຊາຍຂອງ ທຣິຕະຣາສະຕຣະ ຕາມລຳດັບຜູ້ໃຫຍ່ແລະຜູ້ນ້ອຍ—ຂານທີລະຄົນ.”
Verse 93
वैशम्पायन उवाच दुर्योधनो युयुत्सुश्न राजन् दुःशासनस्तथा । दुःसहो दुःशलश्चैव दुर्मुखश्च॒ तथापर:
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ໂອ ພະຣາຊາ, (ໃນບັນດາລູກຊາຍຂອງ ທຣິຕະຣາສະຕຣະ ມີ) ດຸຣະໂຢທະນະ, ຢຸຍຸດສຸ, ແລະ ດຸຫສາສະນະ. ຍັງມີ ດຸຫສະຫະ, ດຸຫສະລາ, ດຸຣມຸຂ ແລະອີກຜູ້ໜຶ່ງ.”
Verse 94
विविंशतिर्विकर्णश्व जलसन्ध: सुलोचन: । विन्दानुविन्दी दुर्धर्ष: सुबाहुर्दुष्प्रधर्षण:
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “(ໃນພວກນັ້ນມີ) ວິວິມຊະຕິ ແລະ ວິກັນນະ; ຈະລະສັນທະ; ສຸໂລຈະນະ; ພີ່ນ້ອງ ວິນດາ ແລະ ອະນຸວິນດາ; ດຸຣະທັຣສະ; ສຸບາຫຸ; ແລະ ດຸສປະຣະທັຣສະນະ.”
Verse 95
दुर्मर्षणो दुर्मुखश्न दुष्कर्ण: कर्ण एव च । चित्रोपचित्रौ चित्राक्षक्षारुक्षित्राड्रदश्ष ह
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນພວກເຂົານັ້ນມີ ດຸຣມະຣສະນະ, ດຸຣມຸຂະ, ດຸສກັນນະ ແລະ ກັນນະ; ຍັງມີ ຈິດໂຣປະຈິດຣະ, ຈິດຣາກສະ, ກະສາຣຸກສິດຣະ ແລະ ອັດຣະດະສະ»។
Verse 96
दुर्मदो दुष्प्रधर्षश्व विवित्सुर्विकट: सम: । ऊर्णनाभ: पद्मनाभस्तथा नन्दोपनन्दकौ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ມີ ດຸຣມະດະ, ດຸສປຣະທັຣສະ, ວິວິດສຸ, ວິກະຕະ, ສະມະ, ອູຣນະນາພະ, ປັດມະນາພະ; ແລະຍັງມີ ນັນດະ ແລະ ອຸປະນັນດະ»។
Verse 97
सेनापति: सुषेणश्न॒ कुण्डोदरमहोदरौ । चित्रबाहुश्नित्रवर्मा सुवर्मा दुर्विरोचन:
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນພວກເຂົານັ້ນມີ ນາຍກອງ ສຸເສນະ; ແລະສອງຄົນ—ກຸນດໂອດະຣະ ແລະ ມະໂຫດະຣະ; ຍັງມີ ຈິດຣະບາຫຸ, ຈິດຣະວັຣມາ, ສຸວັຣມາ ແລະ ດຸຣວິໂຣຈະນະ»។
Verse 98
अयोबाहुर्महाबाहुश्रित्रचापसुकुण्डलौ । भीमवेगो भीमबलो बलाकी भीमविक्रमौ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ພວກເຂົາເປັນຜູ້ມີແຂນດັ່ງເຫຼັກ ແລະ ແຂນອັນຍິ່ງໃຫຍ່, ປະດັບດ້ວຍຄັນທະນູລາຍສີ ແລະ ຕຸ້ມຫູອັນງາມ—ມີຄວາມໄວແລະກຳລັງອັນນ່າຢ້ານ, ພຸ້ນເຂົ້າດັ່ງນົກກະຮອກທີ່ພຸ້ນວ່ອງໄວ, ແລະກ້າຫານຢ່າງຫນັກແນ່ນ.
Verse 99
उग्रायुधो भीमशर: कनकायुर्दढायुध: । दृढवर्मा दृढक्षत्र: सोमकीर्तिरनूदर:
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ມີນັກຮົບຜູ້ມີອາວຸດອັນນ່າຢ້ານ ແລະ ຈິດໃຈອັນໝັ້ນຄົງ—ອຸກຣາຍຸທະ, ພີມະສະຣະ, ກະນະກາຍຸ, ແລະ ດຣິດຫາຍຸທະ; ຍັງມີ ດຣິດຫະວັຣມາ ແລະ ດຣິດຫະກສັດຣະ, ພ້ອມດ້ວຍ ໂສມະກີຣຕິ ແລະ ອະນູດະຣະ.
Verse 100
जरासन्धो दृढसन्ध: सत्यसन्ध: सहस्रवाक् । उग्रश्नवा उग्रसेन: क्षेममूर्तिस्तथैव च
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ມີກະສັດທັງຫຼາຍ ເຊັ່ນ ຈະຣາສັນທະ; ດຣິດຫະສັນທະ ຜູ້ໝັ້ນຄົງໃນພັນທະສັນຍາ; ສັດຍະສັນທະ ຜູ້ສັດຊື່ຕໍ່ຄໍາປະຕິຍານ; ສະຫັດສະຣະວາກ ຜູ້ລືຊາດ້ວຍຖ້ອຍຄໍານັບພັນ; ແລະຍັງມີ ອຸກຣະຊນະວາ, ອຸກຣະເສນ, ແລະ ກເສມະມູຣຕິ ອີກດ້ວຍ»។
Verse 101
अपराजित: पण्डितको विशालाक्षो दुराधन:
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ຜູ້ບໍ່ເຄີຍພ່າຍ, ຜູ້ຮອບຮູ້, ຕາໃຫຍ່, ແລະຍາກຈະປາບໄດ້»។
Verse 102
दृढ्हस्त: सुहस्तश्न॒ वातवेगसुवर्चसौ । आदित्यकेतुर्बह्वाशी नागदत्तानुयायिनौ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ມີ ດຣິດຫະຫັດສະ ແລະ ສຸຫັດສະ; ວາຕະເວກະ ແລະ ສຸວັຣຈະສະ; ອາທິດຕະຍະເກຕຸ ແລະ ບະຫວາຊີ; ແລະຍັງມີຜູ້ທີ່ຕິດຕາມ ນາກະດັດຕະ ອີກດ້ວຍ»។
Verse 103
कवची निषज्जी दण्डी दण्डधारो धरनुग्रहः । उग्रो भीमरथो वीरो वीरबाहुरलोलुप:
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ລາວສວມເກາະ ແລະພ້ອມຮົບຢູ່ເສມອ; ຖືຄະທາ ແລະຊໍານານໃນການໃຊ້ມັນ; ເປັນຜູ້ຄ້ຳຈຸນ ແລະອຸປະຖຳພື້ນດິນຢ່າງໝັ້ນຄົງ. ເດືອດດານດ້ວຍພະລັງ, ມີລົດຮົບນ່າຢ້ານ, ເປັນວີລະບຸລຸດແທ້—ແຂນແຮງ ແລະບໍ່ໂລບ»។
Verse 104
अभयो रौद्रकर्मा च तथा दृढरथश्न यः । अनाधृष्य: कुण्डभेदी विरावी दीर्घलोचन:
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ມີ ອະພະຍະ ຜູ້ກະທໍາການອັນດຸເດືອດ; ແລະຍັງມີຜູ້ທີ່ລືຊາດ້ວຍລົດຮົບອັນໝັ້ນຄົງ; ກຸນຑະເພທີ ຜູ້ບໍ່ອາດຖືກລຸກລານ; ວິຣາວີ; ແລະ ດີຣຄະໂລຈະນະ»។
Verse 105
दीर्घबाहुर्महाबाहुर्व्यूडोरु: कनकाज्भद: । कुण्डजश्ित्रकश्चैव द:ःशला च शताधिका
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນບັນດາລູກໆນັ້ນ ມີ ດີຣຄະບາຫຸ ແລະ ມະຫາບາຫຸ, ວະຍູດໂອຣຸ ແລະ ກະນະກາງກະດ; ຍັງມີ ກຸນດະຈະ ແລະ ຈິຕຣະກະ; ແລະ ດຸຫະຊະລາ—ພ້ອມກັບອື່ນໆອີກເກີນຫນຶ່ງຮ້ອຍຄົນ. ການເລົ່ານີ້ເນັ້ນໃຫ້ເຫັນຄວາມໃຫຍ່ໂຕຂອງວົງສາກຸຣຸ ແລະຊີ້ນໍາລ່ວງໜ້າວ່າ ການຂະຫຍາຍອໍານາດແລະຍາດພີ່ນ້ອງໂດຍບໍ່ມີການຍັບຍັ້ງແລະທໍາອັນຖືກຕ້ອງ ຈະກາຍເປັນແຫຼ່ງເກີດຂອງການແຂ່ງຂັນແລະອະທັມ.
Verse 106
वैशम्पायनजी बोले--राजन्! सुनो--१ दुर्योधन, २ युयुत्सु, ३ दुःशासन, ४ दुःसह, ५ दुःशल, ६ दुर्मुख, ७ विविंशति, ८ विकर्ण, ९ जलसन्ध, १० सुलोचन, ११ विन्द, १२ अनुविन्द, १३ दुर्धर्ष, १४ सुबाहु, १५ दुष्प्रधर्षण, १६ दुर्मर्षण, १७ दुर्मुख, १८ दुष्कर्ण, १९ कर्ण, २० चित्र, २१ उपचित्र, २२ चित्राक्ष, २३ चारु, २४ चित्रांगद, २५ दुर्मद, २६ दुष्प्रधर्ष, २७ विवित्सु, २८ विकट, २९ सम, ३० ऊर्णनाभ, ३१ पद्मानाभ, ३२ नन्द, ३३ उपनन्द, ३४ सेनापति, ३५ सुषेण, ३६ कुण्डोदर, ३७ महोदर, ३८ चित्रबाहु, ३९ चित्रवर्मा, ४० सुवर्मा, ४१ दुर्विरोचन, ४२ अयोबाहु, ४३ महाबाहु, ४४ चित्रचाप, ४५ सुकुण्डल, ४६ भीमवेग, ४७ भीमबल, ४८ बलाकी, ४९ भीम, ५० विक्रम, ५१ उम्रायुध, ५२ भीमशर, ५३ कनकायु, ५४ दृढायुध, ५५ दृढवर्मा, ५६ दृढक्षत्र, ५७ सोमकीर्ति, ५८ अनूदर, ५९ जरासन्ध, ६० दृढ्सन्ध, ६१ सत्यसन्ध, ६२ सहस्रवाक्, ६३ उग्रश्नवा, ६४ उग्रसेन, ६५ क्षेममूर्ति, ६६ अपराजित, ६७ पण्डितक, ६८ विशालाक्ष, ६९ दुराधन, ७० दृढ्हस्त, ७१ सुहस्त, ७२ वातवेग, ७३ सुवर्चा, ७४ आदित्यकेतु, ७५ बह्चाशी, ७६ नागदत्त, ७७ अनुयायी, ७८ कवची, ७९ निषंगी, ८० दण्डी, ८१ दण्डधार, ८२ थधरनुग्रह, ८३ उग्र, ८४ भीमरथ, ८५ वीर, ८६ वीरबाहु, ८७ अलोलुप, ८८ अभय, ८९ रौद्रकर्मा, ९० दृढरथ, ९१ अनाधृष्य, ९२ कुण्डभेदी, ९३ विरावी, ९४ दीर्घलोचन, ९५ दीर्घबाहु, ९६ महाबाहु, ९७ व्यूढोरु, ९८ कनकांगद, ९९ कुण्डज और १०० चित्रक--ये धृतराष्ट्रके सौ पुत्र थे। इनके सिवा दुःशला नामकी एक कन्या थी ॥। ९३ १०५ || वैश्यापुत्रो युयुत्सुश्न धार्तराष्ट्र: शताधिक: । एतदेकशतं राजन् कन्या चैका प्रकीर्तिता,धृतराष्ट्रका वह पुत्र जिसका नाम युयुत्सु था, वैश्याके गर्भसे उत्पन्न हुआ था। वह दुर्योधन आदि सौ पुत्रोंसे अतिरिक्त था। राजन! इस प्रकार धृतराष्ट्रके एक सौ एक पुत्र तथा एक कन्या बतायी गयी है
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ພະຣາຊາ, ຢຸຍຸດສຸ—ຜູ້ເກີດຈາກຍິງວັຍສະຍາ—ກໍເປັນລູກຊາຍຂອງ ທຣິຕະຣາສະຕຣະ ເຊັ່ນກັນ, ເຮັດໃຫ້ຈໍານວນເກີນຫນຶ່ງຮ້ອຍ. ດັ່ງນັ້ນ ໂອ ພະຣາຊາ, ໄດ້ລະບຸລາຍຊື່ລູກຊາຍຫນຶ່ງຮ້ອຍ ແລະປະກາດວ່າມີລູກສາວຫນຶ່ງຄົນດ້ວຍ. ຂໍ້ຄວາມນີ້ເນັ້ນຄວາມສັບຊ້ອນຂອງສາຍເລືອດແລະພາລະຮັບຜິດຊອບໃນຕະກູນກຸຣຸ: ນອກເຫນືອຈາກທາຍາດທີ່ຖືກຍອມຮັບຢ່າງເປັນທາງການ ຍັງມີລູກຊາຍຜູ້ມີສະຖານະມານດາແຕກຕ່າງ, ແຕ່ກໍຖືກຜູກພັນກັບຜົນຕາມມາທາງຄອບຄົວແລະທາງທໍາອັນຈະປະທຸຂຶ້ນໃນຄວາມຂັດແຍ່ງຂອງລາຊະວົງ.
Verse 107
नामथधेयानुपूर्व्या च ज्येष्ठानुज्जेष्ठतां विदु: । सर्वे त्वतिरथा: शूरा: सर्वे युद्धविशारदा:,इनके नामोंका जो क्रम दिया गया है, उसीके अनुसार विद्वान् पुरुष इन्हें जेठा और छोटा समझते हैं। धृतराष्ट्रके सभी पुत्र उत्कृष्ट रथी, शूरवीर और युद्धकी कलामें कुशल थे
ຕາມລໍາດັບຊື່ທີ່ໄດ້ກ່າວໄວ້ນັ້ນ ນັກປັນຍາຈຶ່ງຮູ້ວ່າໃຜເປັນຜູ້ໃຫຍ່ ແລະໃຜເປັນຜູ້ນ້ອຍ. ລູກຊາຍທັງຫມົດຂອງ ທຣິຕະຣາສະຕຣະ ລ້ວນເປັນອະຕິຣະຖະ, ກ້າຫານ, ແລະຊໍານານໃນສິລະປະແຫ່ງສົງຄາມ.
Verse 108
सर्वे वेदविदश्नैव राजच्छास्त्रे च पारगा: । सर्वे संग्रामविद्यासु विद्याभिजनशोभिन:,राजन! वे सब-के-सब वेददवेत्ता, शास्त्रोंके पारंगत विद्वान, संग्राम-विद्यामें प्रवीण तथा उत्तम विद्या और उत्तम कुलसे सुशोभित थे
ໂອ ພະຣາຊາ, ພວກເຂົາທັງຫມົດເປັນຜູ້ຮູ້ແຈ້ງໃນເວດ ແລະສໍາເລັດພ້ອມໃນວິຊາແຫ່ງການປົກຄອງ. ທຸກຄົນຊໍານານໃນສິລະປະການຮົບ ແລະໂດດເດັ່ນດ້ວຍການຮຽນຮູ້ອັນປະນີດ ແລະຊາດຕະກູນອັນສູງສົ່ງ—ເປັນຄຸນສົມບັດທີ່ເຮັດໃຫ້ພວກເຂົາຄວນແກ່ການເຄົາລົບ ທັງໃນສະພາປຶກສາ ແລະໃນສະໜາມຮົບ.
Verse 109
सर्वेषामनुरूपाश्न कृता दारा महीपते । दुःशलां समये राजन् सिन्धुराजाय कौरव:,भूपाल! उन सबका सुयोग्य स्त्रियोंक साथ विवाह हुआ था। महाराज! कुरुराज दुर्योधनने समय आनेपर शकुनिकी सलाहसे अपनी बहिन दुःशलाका विवाह सिन्धुदेशके राजा जयद्रथके साथ कर दिया। जनमेजय! राजा युधिष्ठिरको तो तुम धर्मका अंश जानो
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ພະຣາຊາ, ການແຕ່ງງານອັນເໝາະສົມໄດ້ຖືກຈັດໃຫ້ແກ່ພວກເຂົາທຸກຄົນ. ແລະເມື່ອເວລາອັນຄວນຄ່າມາຮອດ, ໂອ ຜູ້ປົກຄອງ, ກະວະຣະໄດ້ຍົກນ້ອງສາວ ດຸຫະຊະລາ ໃຫ້ແຕ່ງງານກັບກະສັດແຫ່ງສິນດຸ.
Verse 110
जयद्रथाय प्रददौ सौबलानुमते तदा । धर्मस्यांशं तु राजानं विद्धि राजन् युधिष्ठिरम्,भूपाल! उन सबका सुयोग्य स्त्रियोंक साथ विवाह हुआ था। महाराज! कुरुराज दुर्योधनने समय आनेपर शकुनिकी सलाहसे अपनी बहिन दुःशलाका विवाह सिन्धुदेशके राजा जयद्रथके साथ कर दिया। जनमेजय! राजा युधिष्ठिरको तो तुम धर्मका अंश जानो
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນເວລານັ້ນ ໂດຍຄຳເຫັນຊອບຂອງ ສໍບາລະ (ຊະກຸນິ) ລາວໄດ້ຍົກ (ນ້ອງສາວ) ໃຫ້ແຕ່ງງານກັບ ຈະຍະດຣະຖະ. ແລະຂໍໃຫ້ພຣະອົງຮູ້ໄວ້ວ່າ ພຣະຣາຊາ ຢຸທິສຖິຣະ ແມ່ນສ່ວນໜຶ່ງແຫ່ງ ທັມມະ ໂດຍແທ້.
Verse 111
भीमसेनं तु वातस्य देवराजस्य चार्जुनम् । अश्रिनोस्तु तथैवांशौ रूपेणाप्रतिमौ भुवि,भीमसेनको वायुका और अर्जुनको देवराज इन्द्रका अंश जानो। रूप-सौन्दर्यकी दृष्टिसे इस पृथ्वीपर जिनकी समानता करनेवाला कोई नहीं था, वे समस्त प्राणियोंका मन मोह लेनेवाले नकुल और सहदेव अश्विनीकुमारोंके अंशसे उत्पन्न हुए थे। वर्चा नामसे विख्यात जो चन्द्रमाका प्रतापी पुत्र था, वही महायशस्वी अर्जुनकुमार अभिमन्यु हुआ। जनमेजय! उसके अवतार-कालनमें चन्द्रमाने देवताओंसे इस प्रकार कहा--
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຈົ່ງຮູ້ວ່າ ພີມເສນະ ແມ່ນສ່ວນໜຶ່ງຂອງ ວາຍຸ; ແລະ ອັຣຈຸນະ ແມ່ນສ່ວນໜຶ່ງຂອງ ອິນທຣະ ຈອມເທວະ. ສ່ວນ ນະກຸລະ ແລະ ສະຫະເທວະ ນັ້ນ ເກີດຈາກສ່ວນໜຶ່ງຂອງ ອັສວິນຄູ່—ງາມຫາຜູ້ເທົ່າບໍ່ໄດ້ໃນແຜ່ນດິນ ແລະຊັກຈູງໃຈສັດທັງປວງ.
Verse 112
नकुल: सहदेवश्व सर्वभूतमनोहरौ । यस्तु वर्चा इति ख्यात: सोमपुत्र: प्रतापवान्,भीमसेनको वायुका और अर्जुनको देवराज इन्द्रका अंश जानो। रूप-सौन्दर्यकी दृष्टिसे इस पृथ्वीपर जिनकी समानता करनेवाला कोई नहीं था, वे समस्त प्राणियोंका मन मोह लेनेवाले नकुल और सहदेव अश्विनीकुमारोंके अंशसे उत्पन्न हुए थे। वर्चा नामसे विख्यात जो चन्द्रमाका प्रतापी पुत्र था, वही महायशस्वी अर्जुनकुमार अभिमन्यु हुआ। जनमेजय! उसके अवतार-कालनमें चन्द्रमाने देवताओंसे इस प्रकार कहा--
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ນະກຸລະ ແລະ ສະຫະເທວະ—ຜູ້ເຮັດໃຫ້ໃຈສັດທັງປວງຊື່ນບານ—ເກີດຈາກສ່ວນໜຶ່ງຂອງ ອັສວິນີກຸມາຣະ ແລະງາມຫາຜູ້ເທົ່າບໍ່ໄດ້ໃນແຜ່ນດິນ. ສ່ວນ ວັຣຈາ ຜູ້ມີນາມລືຊາ ອັນເປັນບຸດຜູ້ກ້າແຂງຂອງ ໂສມະ (ພຣະຈັນ) ນັ້ນ ໄດ້ກາຍເປັນ ອະພິມັນຍຸ ບຸດຜູ້ມີກຽດຍົດຂອງ ອັຣຈຸນະ.
Verse 113
सोअभिमन्युर्बृहत्कीर्तिर्जुनस्य सुतो5भवत् । यस्यावतरणे राजन् सुरान् सोमो5ब्रवीदिदम्,भीमसेनको वायुका और अर्जुनको देवराज इन्द्रका अंश जानो। रूप-सौन्दर्यकी दृष्टिसे इस पृथ्वीपर जिनकी समानता करनेवाला कोई नहीं था, वे समस्त प्राणियोंका मन मोह लेनेवाले नकुल और सहदेव अश्विनीकुमारोंके अंशसे उत्पन्न हुए थे। वर्चा नामसे विख्यात जो चन्द्रमाका प्रतापी पुत्र था, वही महायशस्वी अर्जुनकुमार अभिमन्यु हुआ। जनमेजय! उसके अवतार-कालनमें चन्द्रमाने देवताओंसे इस प्रकार कहा--
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ອະພິມັນຍຸ ຜູ້ມີກຽດຍົດຍິ່ງ ໄດ້ເກີດເປັນບຸດຂອງ ອັຣຈຸນະ. ໃນຍາມທີ່ລາວລົງມາບັງເກີດ ໂອ້ ພຣະຣາຊາ, ໂສມະ (ພຣະຈັນ) ໄດ້ກ່າວຕໍ່ເທວະທັງຫຼາຍດັ່ງນີ້.
Verse 114
नाहं दद्यां प्रियं पुत्र मम प्राणैर्गरीयसम् । समय: क्रियतामेष न शक््यमतिवर्तितुम्,“मेरा पुत्र मुझे अपने प्राणोंसे भी अधिक प्रिय है, अतः मैं इसे अधिक दिनोंके लिये नहीं दे सकता। इसलिये मृत्युलोकमें इसके रहनेकी कोई अवधि निश्चित कर दी जाय। फिर उस अवधिका उल्लंघन नहीं किया जा सकता
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ລູກອັນເປັນທີ່ຮັກຂອງຂ້າ ມີຄ່າຍິ່ງກວ່າຊີວິດຂອງຂ້າເອງ; ດັ່ງນັ້ນ ຂ້າບໍ່ອາດຍົກໃຫ້ໄດ້ເປັນເວລາດົນ. ຈົ່ງກຳນົດໄລຍະເວລາໃຫ້ແນ່ນອນ ສຳລັບການຢູ່ໃນໂລກມະນຸດ—ເມື່ອຕົກລົງແລ້ວ ຂອບເຂດນັ້ນຈະລ່ວງເກີນບໍ່ໄດ້.”
Verse 115
सुरकार्य हि नः कार्यमसुराणां क्षितौ वध: । तत्र यास्यत्ययं वर्चा न च स्थास्यति वै चिरम्,'पृथ्वीपर असुरोंका वध करना देवताओंका कार्य है और वह हम सबके लिये करनेयोग्य है। अतः उस कार्यकी सिद्धिके लिये यह वर्चा भी वहाँ अवश्य जायगा। परंतु दीर्घकालतक वहाँ नहीं रह सकेगा
ການປາບປະຫານອະສຸຣາໃນແຜ່ນດິນ ແມ່ນໜ້າທີ່ຂອງເທວະ ແລະເປັນກິດທີ່ພວກເຮົາທຸກຄົນຄວນເຮັດ. ດັ່ງນັ້ນ ເພື່ອໃຫ້ກິດນັ້ນສຳເລັດ ພະລັງວິລະນີ້ກໍຈະໄປທີ່ນັ້ນແນ່ນອນ ແຕ່ຈະຢູ່ດົນບໍ່ໄດ້.
Verse 116
ऐन्द्रिनरस्तु भविता यस्य नारायण: सखा । सोर्ड्जुनेत्यभिविख्यात: पाण्डो: पुत्र: प्रतापवान्,“भगवान् नर, जिनके सखा भगवान् नारायण हैं, इन्द्रके अंशसे भूतलमें अवतीर्ण होंगे। वहाँ उनका नाम अर्जुन होगा और वे पाण्डुके प्रतापी पुत्र माने जायँगे
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ນຣະຜູ້ມີພຣະນາຣາຍະນະເປັນສະຫາຍສະໜິດ ແລະຖືສ່ວນໜຶ່ງແຫ່ງພຣະອິນທຣະ ຈະບັງເກີດລົງສູ່ແຜ່ນດິນ. ທີ່ນັ້ນ ລາວຈະໂດງດັງນາມວ່າ ‘ອັຣຈຸນ’ ແລະຈະຖືກນັບເປັນບຸດຜູ້ກ້າຫານ ມີອຳນາດຂອງປານດຸ.”
Verse 117
तस्यायं भविता पुत्रो बालो भुवि महारथ: । ततः: षोडश वर्षाणि स्थास्यत्यमरसत्तमा:,'श्रेष्ठ देवगण! पृथ्वीपर यह वर्चा उन्हीं अर्जुनका पुत्र होगा, जो बाल्यावस्थामें ही महारथी माना जायगा। जन्म लेनेके बाद सोलह वर्षकी अवस्थातक यह वहाँ रहेगा
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ຜູ້ນີ້ຈະມີບຸດຄົນໜຶ່ງ ຜູ້ຈະໂດງດັງໃນແຜ່ນດິນ ແມ່ນແຕ່ຍັງເປັນເດັກ ວ່າເປັນມະຫາຣະຖະ—ນັກຮົບລົດສົງຄາມຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່. ຫຼັງຈາກນັ້ນ ໂອ ຜູ້ປະເສີດໃນຫມູ່ອະມະຕະ, ລາວຈະຢູ່ທີ່ນັ້ນຈົນອາຍຸສິບຫົກປີ.”
Verse 118
अस्य षोडशवर्षस्य स संग्रामो भविष्यति । यत्रांशा व: करिष्यन्ति कर्म वीरनिषूदनम्,“इसके सोलहवें वर्षमें वह महाभारत-युद्ध होगा, जिसमें आपलोगोंके अंशसे उत्पन्न हुए वीर-पुरुष शत्रुवीरोंका संहार करनेवाला अद्भुत पराक्रम कर दिखायेंगे
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ໃນປີທີ່ສິບຫົກຂອງລາວ ສົງຄາມໃຫຍ່ນັ້ນຈະເກີດຂຶ້ນ—ສົງຄາມທີ່ບຸລຸດວິລະຊົນຜູ້ເກີດຈາກສ່ວນຂອງພວກເຈົ້າ ຈະກະທຳກິດອັນນ່າພິສູດແຫ່ງຄວາມກ້າຫານ ແລະຈະເປັນຜູ້ທຳລາຍວິລະຊົນຂອງສັດຕູ.”
Verse 119
नरनारायणाभ्यां तु स संग्रामो विना कृत: । चक्रव्यूहं समास्थाय योधयिष्यन्ति व: सुरा:,“देवताओ! एक दिन जब कि उस युद्धमें नर और नारायण (अर्जुन और श्रीकृष्ण) उपस्थित न रहेंगे, उस समय शत्रुपक्षके लोग चक्रव्यूहकी रचना करके आप-लोगोंके साथ युद्ध करेंगे। उस युद्धमें मेरा यह पुत्र समस्त शत्रु-सैनिकोंको युद्धसे मार भगायेगा और बालक होनेपर भी उस अभेद्य व्यूहमें घुसकर निर्भय विचरण करेगा
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ສົງຄາມນັ້ນຈະຖືກຮົບພົນ ແມ່ນແຕ່ໃນຍາມທີ່ນຣະ ແລະ ນາຣາຍະນະ ບໍ່ຢູ່. ຝ່າຍສັດຕູຈະຈັດຮູບຂະບວນຈັກຣະ (cakravyūha) ແລະເທວະທັງຫຼາຍຈະຮົບກັບພວກເຈົ້າ.” ຖ້ອຍຄຳນີ້ຊີ້ໃຫ້ເຫັນຈັນຍາຂອງສົງຄາມ: ແມ່ນແຕ່ເມື່ອຜູ້ປົກປ້ອງຍິ່ງໃຫຍ່ບໍ່ຢູ່ ຄວາມຂັດແຍ່ງກໍອາດເກີດຂຶ້ນໄດ້ ແລະກຸລະຍຸດກັບຄວາມກ້າຫານອັນໝັ້ນຄົງ ແມ່ນບົດທົດສອບແຫ່ງຈິດໃຈ.
Verse 120
विमुखाउ्छात्रवान् सर्वान् कारयिष्यति मे सुत: । बाल: प्रविश्य च व्यूहमभेद्यं विचरिष्यति,“देवताओ! एक दिन जब कि उस युद्धमें नर और नारायण (अर्जुन और श्रीकृष्ण) उपस्थित न रहेंगे, उस समय शत्रुपक्षके लोग चक्रव्यूहकी रचना करके आप-लोगोंके साथ युद्ध करेंगे। उस युद्धमें मेरा यह पुत्र समस्त शत्रु-सैनिकोंको युद्धसे मार भगायेगा और बालक होनेपर भी उस अभेद्य व्यूहमें घुसकर निर्भय विचरण करेगा
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ລູກຊາຍຂອງຂ້າຈະໄລ່ສັດຕູທັງປວງໃຫ້ແຕກພ່າຍ ຖອນຄວາມຫຍິ່ງຍະໂສ ແລະການຄຸ້ມຄອງຂອງເຂົາເຈົ້າ. ແມ່ນແຕ່ເປັນເດັກນ້ອຍ ລາວກໍຈະເຂົ້າໄປໃນຮູບແບບກອງທັບທີ່ບໍ່ອາດທະລຸໄດ້ ແລະເຄື່ອນໄຫວຢູ່ພາຍໃນນັ້ນດ້ວຍຄວາມກ້າຫານ»។
Verse 121
महारथानां वीराणां कदनं च करिष्यति । सर्वेषामेव शत्रूणां चतुर्थाशं नयिष्यति,“तथा बड़े-बड़े महारथी वीरोंका संहार कर डालेगा। आधे दिनमें ही महाबाहु अभिमन्यु समस्त शत्रुओंके एक चौथाई भागको यमलोक पहुँचा देगा। तदनन्तर बहुत-से महारथी एक साथ ही उसपर टूट पड़ेंगे और वह महाबाहु उन सबका सामना करते हुए संध्या होते-होते पुनः मुझसे आ मिलेगा। वह एक ही वंशप्रवर्तक वीर पुत्रको जन्म देगा, जो नष्ट हुए भरतकुलको पुनः धारण करेगा।” सोमका यह वचन सुनकर समस्त देवताओंने “तथास्तु/ कहकर उनकी बात मान ली और सबने चन्द्रमाका पूजन किया। राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने तुम्हारे पिताके पिताका जन्म-रहस्य बताया है
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ລາວຈະກໍ່ໃຫ້ເກີດການຂ້າຟັນຢ່າງໜັກໃນບັນດາວີລະຊົນແລະມະຫາຣະຖີ ແລະຈະສົ່ງສັດຕູທັງປວງໄປຫາພຣະຍະມະເທວະ ເປັນສ່ວນໜຶ່ງໃນສີ່»។
Verse 122
दिनार्थेन महाबाहु: प्रेतराजपुरं प्रति । ततो महारथैवीरि: समेत्य बहुशो रणे,“तथा बड़े-बड़े महारथी वीरोंका संहार कर डालेगा। आधे दिनमें ही महाबाहु अभिमन्यु समस्त शत्रुओंके एक चौथाई भागको यमलोक पहुँचा देगा। तदनन्तर बहुत-से महारथी एक साथ ही उसपर टूट पड़ेंगे और वह महाबाहु उन सबका सामना करते हुए संध्या होते-होते पुनः मुझसे आ मिलेगा। वह एक ही वंशप्रवर्तक वीर पुत्रको जन्म देगा, जो नष्ट हुए भरतकुलको पुनः धारण करेगा।” सोमका यह वचन सुनकर समस्त देवताओंने “तथास्तु/ कहकर उनकी बात मान ली और सबने चन्द्रमाका पूजन किया। राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने तुम्हारे पिताके पिताका जन्म-रहस्य बताया है
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນເວລາພຽງຄື່ງມື້ ວີລະຊົນແຂນແຂງຈະສົ່ງນັກຮົບຈຳນວນຫຼາຍໄປສູ່ນະຄອນຂອງພຣະຍະມະ ຜູ້ເປັນເຈົ້າແຫ່ງຜູ້ລ່ວງລັບ. ຫຼັງຈາກນັ້ນ ມະຫາຣະຖີຈຳນວນຫຼາຍຈະຮວມກັນ ແລະຈະບຸກໂຈມລາວຊ້ຳໆໃນສົງຄາມ»។
Verse 123
दिनक्षये महाबाहुर्मया भूय: समेष्यति । एकं वंशकरं पुत्र वीर॑ वै जनयिष्यति,“तथा बड़े-बड़े महारथी वीरोंका संहार कर डालेगा। आधे दिनमें ही महाबाहु अभिमन्यु समस्त शत्रुओंके एक चौथाई भागको यमलोक पहुँचा देगा। तदनन्तर बहुत-से महारथी एक साथ ही उसपर टूट पड़ेंगे और वह महाबाहु उन सबका सामना करते हुए संध्या होते-होते पुनः मुझसे आ मिलेगा। वह एक ही वंशप्रवर्तक वीर पुत्रको जन्म देगा, जो नष्ट हुए भरतकुलको पुनः धारण करेगा।” सोमका यह वचन सुनकर समस्त देवताओंने “तथास्तु/ कहकर उनकी बात मान ली और सबने चन्द्रमाका पूजन किया। राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने तुम्हारे पिताके पिताका जन्म-रहस्य बताया है
ເມື່ອວັນຈະສິ້ນ ວີລະຊົນແຂນແຂງຈະກັບມາພົບຂ້າອີກຄັ້ງ. ລາວຈະໃຫ້ກຳເນີດບຸດຜູ້ກ້າຫານເພີງຄົນດຽວ ເພື່ອສືບຕໍ່ສາຍວົງ—ຜູ້ຈະຟື້ນຟູແລະສືບສານຕະກູນຫຼັງຄວາມພິນາດ.
Verse 124
प्रणष्टं भारतं वंशं स भूयो धारयिष्यति । एतत् सोमवच: श्रुत्वा तथास्त्विति दिवौकस:,“तथा बड़े-बड़े महारथी वीरोंका संहार कर डालेगा। आधे दिनमें ही महाबाहु अभिमन्यु समस्त शत्रुओंके एक चौथाई भागको यमलोक पहुँचा देगा। तदनन्तर बहुत-से महारथी एक साथ ही उसपर टूट पड़ेंगे और वह महाबाहु उन सबका सामना करते हुए संध्या होते-होते पुनः मुझसे आ मिलेगा। वह एक ही वंशप्रवर्तक वीर पुत्रको जन्म देगा, जो नष्ट हुए भरतकुलको पुनः धारण करेगा।” सोमका यह वचन सुनकर समस्त देवताओंने “तथास्तु/ कहकर उनकी बात मान ली और सबने चन्द्रमाका पूजन किया। राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने तुम्हारे पिताके पिताका जन्म-रहस्य बताया है
ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ລາວຈະຟື້ນຟູແລະຄ້ຳຈຸນວົງສາບາຣະຕະທີ່ຖືກທຳລາຍໃຫ້ຕັ້ງຢູ່ອີກຄັ້ງ»។ ເມື່ອໄດ້ຍິນຖ້ອຍຄຳຂອງໂສມະ ບັນດາເທວະດາກໍຕອບວ່າ «ຂໍໃຫ້ເປັນເຊັ່ນນັ້ນ» ເພື່ອຍອມຮັບ.
Verse 125
प्रत्यूचु: सहिता: सर्वे ताराधिपमपूजयन् । एवं ते कथितं राजंस्तव जन्म पितु: पितु:,“तथा बड़े-बड़े महारथी वीरोंका संहार कर डालेगा। आधे दिनमें ही महाबाहु अभिमन्यु समस्त शत्रुओंके एक चौथाई भागको यमलोक पहुँचा देगा। तदनन्तर बहुत-से महारथी एक साथ ही उसपर टूट पड़ेंगे और वह महाबाहु उन सबका सामना करते हुए संध्या होते-होते पुनः मुझसे आ मिलेगा। वह एक ही वंशप्रवर्तक वीर पुत्रको जन्म देगा, जो नष्ट हुए भरतकुलको पुनः धारण करेगा।” सोमका यह वचन सुनकर समस्त देवताओंने “तथास्तु/ कहकर उनकी बात मान ली और सबने चन्द्रमाका पूजन किया। राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने तुम्हारे पिताके पिताका जन्म-रहस्य बताया है
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ພຣະເທວະທັງປວງໄດ້ຕອບຮັບພ້ອມກັນ ແລະໄດ້ນະມັດສະການບູຊາພຣະຈັນ ຜູ້ເປັນເຈົ້າແຫ່ງດາວທັງຫຼາຍ. ດັ່ງນັ້ນ ໂອ້ ພຣະຣາຊາ, ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ເລົ່າໃຫ້ພຣະອົງຟັງແລ້ວເຖິງເລື່ອງກຳເນີດຂອງພໍ່ຂອງພໍ່ພຣະອົງ—ໃຫ້ເຫັນວ່າ ການຍອມຮັບຂອງເທວະ ແລະຄວາມເຄົາລົບຕໍ່ລະບຽບແຫ່ງຈັກກະວານ ເປັນພື້ນຖານໃຫ້ສາຍພົວພັນລາຊະວົງສ໌ດຳລົງຕໍ່ໄປ.
Verse 126
अन्नेर्भागं तु विद्धि त्वं धृष्टद्युम्न॑ं महारथम् । शिखण्डिनमथो राजन स्त्रीपूर्व विद्धि राक्षमम्,महाराज! महारथी धृष्टद्युम्नको तुम अग्निका भाग समझो। शिखण्डी राक्षसके अंशसे उत्पन्न हुआ था। वह पहले कन्यारूपमें उत्पन्न होकर पुनः पुरुष हो गया था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ຈົ່ງຮູ້ໄວ້ວ່າ ທະຫານລົດຮົບຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ ທຣິສຕະດຸມນະ ແມ່ນສ່ວນໜຶ່ງຂອງອັກນິ (ເທວະແຫ່ງໄຟ). ແລະ ໂອ້ ພຣະຣາຊາ, ຈົ່ງຮູ້ວ່າ ສິຂັນດິນ ມີກຳເນີດຈາກຣາກສະ—ເຄີຍເກີດເປັນຍິງ ແລ້ວພາຍຫຼັງກາຍເປັນຊາຍ.”
Verse 127
द्रौपदेयाश्व ये पडच बभूवुर्भरतर्षभ । विश्वान् देवगणान् विद्धि संजातान् भरतर्षभ,भरतर्षभ! तुम्हें मालूम होना चाहिये कि द्रौपदीके जो पाँच पुत्र थे, उनके रूपमें पाँच विश्वेदेवगण ही प्रकट हुए थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ້ ຜູ້ປະເສີດໃນຫມູ່ພວກພາຣະຕະ, ຈົ່ງຮູ້ວ່າ ລູກຊາຍທັງຫ້າຂອງດຣາວປະດີ ແທ້ຈິງແມ່ນການປາກົດກາຍຂອງຫມູ່ເທວະ ວິສະເວດະເທວະ.
Verse 128
प्रतिविन्ध्य: सुतसोम: श्रुतकीर्तिस्तथापर: । नाकुलिस्तु शतानीक: श्रुतसेनश्न वीर्यवान्,उनके नाम क्रमशः इस प्रकार हैं--प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकीर्ति, नकुलनन्दन शतानीक तथा पराक्रमी श्रुतसेन
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ຊື່ຂອງພວກເຂົາຕາມລຳດັບແມ່ນ ປຣະຕິວິນທະຍະ, ສຸຕະໂສມະ, ແລະ ສຣຸຕະກີຣຕິ; ຕໍ່ຈາກນັ້ນ ລູກຂອງນະກຸລະ ຊື່ ສະຕານີກະ, ແລະ ສຣຸຕະເສນະ ຜູ້ກ້າຫານ.”
Verse 129
शूरो नाम यदुश्रेष्ठो वसुदेवपिताभवत् । तस्य कन्या पृथा नाम रूपेणासदृशी भुवि,वसुदेवजीके पिताका नाम था शूरसेन। वे यदुवंशके एक श्रेष्ठ पुरुष थे। उनके पृथा नामवाली एक कन्या हुई, जिसके समान रूपवती स्त्री इस पृथ्वीपर दूसरी नहीं थी
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນຫມູ່ພວກຢະດຸ ມີບຸລຸດຜູ້ເປັນເລີດຊື່ ຊູຣະ (Śūra) ຜູ້ໄດ້ເປັນບິດາຂອງ ວະສຸເທວະ. ທ່ານມີທິດາຊື່ ປຣິຖາ (Pṛthā) ຜູ້ມີຄວາມງາມຫາຜູ້ໃດເທົ່າທຽມບໍ່ໄດ້ໃນແຜ່ນດິນ.
Verse 130
पितुः स्वस्नीयपुत्राय सो5नपत्याय वीर्यवान् । अग्रमग्रे प्रतिज्ञाय स्वस्यापत्यस्य वै तदा,उग्रसेनके फुफेरे भाई कुन्तिभोज संतानहीन थे। पराक्रमी शूरसेनने पहले कभी उनके सामने यह प्रतिज्ञा की थी कि “मैं अपनी पहली संतान आपको दे दूँगा”
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ບຸລຸດຜູ້ມີລິດທິນັ້ນ ເຫັນລູກຊາຍຂອງນ້ອງສາວຂອງພໍ່ຕົນ ເປັນຜູ້ບໍ່ມີລູກຫຼານ ຈຶ່ງເຄີຍປະກາດສັດຈະຢ່າງໜັກແນ່ວ່າ: «ລູກຄົນທໍາອິດຂອງຂ້າ ຂ້າຈະມອບໃຫ້ເຈົ້າ». ເຫດການນີ້ສະທ້ອນຄໍາສັນຍາອັນຜູກມັດ ທີ່ເກີດຈາກໜ້າທີ່ຍາດພີ່ນ້ອງ ແລະຄວາມເມດຕາຕໍ່ຜູ້ບໍ່ມີທາຍາດ ຊີ້ໃຫ້ເຫັນວ່າຄໍາສັດຈະສ່ວນຕົວອາດກໍ່ຮູບຊະຕາກໍາຂອງລາຊະວົງໄດ້.
Verse 131
अग्रजातेति तां कन्यां शूरो<नुग्रहकाड्क्षया । अददात् कुन्तिभोजाय स तां दुहितरं तदा,तदनन्तर सबसे पहले उनके यहाँ कन्या ही उत्पन्न हुई। शूरसेनने अनुग्रहकी इच्छासे राजा कुन्तिभोजको अपनी वह पुत्री पृथा प्रथम संतान होनेके कारण गोद दे दी
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເນື່ອງຈາກນາງເປັນລູກຄົນທໍາອິດ ແລະເປັນທິດາ, ສູຣະເສນະ ດ້ວຍຄວາມປາດຖະນາຈະອຸປະກາຣະ ໄດ້ມອບກັນຍານັ້ນໃຫ້ແກ່ພຣະຣາຊາກຸນຕິໂພຊະ ໃນເວລານັ້ນ ໃຫ້ຮັບໄປລ້ຽງເປັນທິດາຂອງພຣະອົງ.
Verse 132
सा नियुक्ता पितुर्गेहे ब्राह्मणातिथिपूजने । उग्र॑ पर्यचरद् घोरें ब्राह्मणं संशितव्रतम्,पिताके घरपर रहते समय पृथाको ब्राह्मणों और अतिथियोंके स्वागत-सत्कारका कार्य सौंपा गया था। एक दिन उसने कठोर व्रतका पालन करनेवाले भयंकर क्रोधी तथा उग्र प्रकृतिवाले एक ब्राह्मण महर्षिकी, जो धर्मके विषयमें अपने निश्चयको छिपाये रखते थे और लोग जिन्हें दुर्वासाके नामसे जानते हैं, सेवा की। वे ऊपरसे तो उग्र स्वभावके थे, परंतु उनका हृदय महान् होनेके कारण सबके द्वारा प्रशंसित था। पृथाने पूरा प्रयत्न करके अपनी सेवाओंद्वारा मुनिको संतुष्ट किया
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນຍາມທີ່ນາງປຣຶຖາອາໄສຢູ່ໃນເຮືອນຂອງພໍ່, ນາງໄດ້ຮັບມອບໜ້າທີ່ໃນການນັບຖືບູຊາພຣາຫມັນ ແລະຕ້ອນຮັບແຂກ. ຄັ້ງໜຶ່ງ ນາງໄດ້ປະຄອງຮັບໃຊ້ດ້ວຍຄວາມພາກພຽນ ຕໍ່ພຣາຫມັນມະຫາລິສີຜູ້ນ່າກົວ, ຜູ້ຖືວຣະຕະອັນເຂັ້ມງວດ ແລະມີອາລົມຮ້ອນ. ແມ່ນແຕ່ພາຍນອກຈະດຸຮ້າຍ, ແຕ່ໃນໃຈກັບຍິ່ງໃຫຍ່ ແລະເປັນທີ່ສັນລະເສີນ. ດ້ວຍການບໍລິການຢ່າງລະມັດລະວັງ, ປຣຶຖາພະຍາຍາມໃຫ້ຕະປະສີນັ້ນພໍໃຈ.
Verse 133
निगूढनिश्चयं धर्मे यं तं दुर्वाससं विदु: । तमुग्रं शंसितात्मानं सर्वयत्नैरतोषयत्,पिताके घरपर रहते समय पृथाको ब्राह्मणों और अतिथियोंके स्वागत-सत्कारका कार्य सौंपा गया था। एक दिन उसने कठोर व्रतका पालन करनेवाले भयंकर क्रोधी तथा उग्र प्रकृतिवाले एक ब्राह्मण महर्षिकी, जो धर्मके विषयमें अपने निश्चयको छिपाये रखते थे और लोग जिन्हें दुर्वासाके नामसे जानते हैं, सेवा की। वे ऊपरसे तो उग्र स्वभावके थे, परंतु उनका हृदय महान् होनेके कारण सबके द्वारा प्रशंसित था। पृथाने पूरा प्रयत्न करके अपनी सेवाओंद्वारा मुनिको संतुष्ट किया
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຜູ້ທີ່ຊ່ອນເກັບຄວາມຕັ້ງໃຈໃນທາງທຳມະ ຜູ້ນັ້ນຜູ້ຄົນຮູ້ຈັກວ່າ ດຸຣວາສະ; ທ່ານດຸຮ້າຍ ແລະມີອາລົມຮ້ອນ ແຕ່ຈິດໃຈສູງສົ່ງ ເປັນທີ່ສັນລະເສີນຂອງທຸກຄົນ. ປຣຶຖາໄດ້ພະຍາຍາມດ້ວຍທຸກວິທີ ເພື່ອໃຫ້ທ່ານພໍໃຈ.
Verse 134
तुष्टोडभिचारसंयुक्तमाचचक्षे यथाविधि । उवाच चैनां भगवान् प्रीतो5स्मि सुभगे तव,भगवान् दुर्वासाने संतुष्ट होकर पृथाको प्रयोग-विधिसहित एक मन्त्रका विधिपूर्वक उपदेश किया और कहा--'सुभगे! मैं तुमपर बहुत प्रसन्न हूँ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອທ່ານຣິສີຜູ້ນ່າເຄົາລົບນັ້ນພໍໃຈແລ້ວ, ທ່ານໄດ້ສອນມັນຕຣາບົດໜຶ່ງອັນຜູກພັນກັບວິທີນໍາໃຊ້ຕາມພິທີ, ສອນຢ່າງຖືກຕ້ອງຕາມຂະບວນ. ແລ້ວພຣະອົງຜູ້ເປັນພຣະຣິສີໄດ້ກ່າວກັບນາງວ່າ: «ໂອ ນາງຜູ້ມີສິຣິ, ຂ້າພໍໃຈໃນເຈົ້າຢ່າງຍິ່ງ».
Verse 135
य॑ य॑ देवं त्वमेतेन मन्त्रेणावाहयिष्यसि । तस्य तस्य प्रसादात् त्वं देवि पुत्राउजनिष्यसि,'देवि! तुम इस मन्त्रद्वारा जिस-जिस देवताका आवाहन करोगी, उसी-उसीके कृपाप्रसादसे पुत्र उत्पन्न करोगी”
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ນາງຜູ້ດຸດດັ່ງເທວະທິດາ, ເທວະໃດກໍຕາມທີ່ເຈົ້າເຊີນມາດ້ວຍມົນຕຣານີ້, ດ້ວຍພຣະກະລຸນາຂອງເທວະນັ້ນໆ ເຈົ້າຈະໄດ້ໃຫ້ກຳເນີດບຸດ»។
Verse 136
एवमुक्ता च सा बाला तदा कौतूहलान्विता । कन्या सती देवमर्कमाजुहाव यशस्विनी,दुर्वासाके ऐसा कहनेपर वह सती-साध्वी यशस्विनी बाला यद्यपि अभी कुमारी कन्या थी, तो भी कौतूहलवश उसने भगवान् सूर्यका आवाहन किया
ເມື່ອນາງສາວນ້ອຍນັ້ນຖືກກ່າວເຊັ່ນນັ້ນ ນາງກໍເກີດຄວາມຢາກຮູ້. ແມ່ນແຕ່ຍັງເປັນກະນຍາບໍ່ທັນແຕ່ງງານ, ນາງຜູ້ມີສິນທຳ ແລະມີຊື່ສຽງ ກໍໄດ້ເຊີນພຣະອາທິດ (ອາຣກະ) ດ້ວຍຄວາມຢາກຮູ້ນັ້ນເອງ.
Verse 137
प्रकाशकर्ता भगवांस्तस्यां गर्भ दधौ तदा । अजीजनत् सुतं चास्यां सर्वशस्त्रभृतां वरम्,तब सम्पूर्ण जगतमें प्रकाश फैलानेवाले भगवान् सूर्यने कुन्तीके उदरमें गर्भ स्थापित किया और उस गर्भसे एक ऐसे पुत्रको जन्म दिया, जो समस्त श्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ແລ້ວພຣະອາທິດຜູ້ມີພຣະພາກ ຜູ້ໃຫ້ກຳເນີດແສງສະຫວ່າງ ໄດ້ວາງຄັນຢູ່ໃນຄອບຄອງຂອງນາງ. ຈາກການປະສົມນັ້ນ ນາງໄດ້ໃຫ້ກຳເນີດບຸດຜູ້ເປັນເລີດໃນບັນດາຜູ້ຖືອາວຸດທັງປວງ.
Verse 138
सकुण्डलं सकवचं देवगर्भश्रियान्वितम् । दिवाकरसमं दीप्त्या चारुसर्वाजड़भूषितम्,वह कुण्डल और कवचके साथ ही प्रकट हुआ था। देवताओंके बालकोंमें जो सहज कान्ति होती है, उसीसे वह सुशोभित था। अपने तेजसे वह सूर्यके समान जान पड़ता था। उसके सभी अंग मनोहर थे, जो उसके सम्पूर्ण शरीरकी शोभा बढ़ा रहे थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ລາວປາກົດຕົວມາພ້ອມຕຸ້ມຫູ ແລະ ເກາະອົກ, ມີສິຣິອັນເປັນເທວະກຳເນີດ. ດ້ວຍລັດສະໝີຂອງລາວ ລາວດູປານດັ່ງພຣະອາທິດ, ແລະອະວັຍະວະທຸກສ່ວນງາມສົດ ເພີ່ມພູນຄວາມສະງ່າງາມໃຫ້ຮ່າງກາຍທັງມວນ.
Verse 139
निगूहमाना जात वै बन्धुपक्षभयात् तदा | उत्ससर्ज जले कुन्ती तं कुमारं यशस्विनम्,उस समय कुन्तीने पिता-माता आदि बान्धव-पक्षके भयसे उस यशस्वी कुमारको छिपाकर एक पेटीमें रखकर जलमें छोड़ दिया
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ແລ້ວກຸນຕີ ເພາະຢ້ານກົວຕໍ່ວົງຍາດແລະຄອບຄົວ ຈຶ່ງປິດບັງເດັກເກີດໃໝ່ນັ້ນ, ວາງກຸມານຜູ້ມີກຽດສັກສີໃນຫີບ ແລ້ວປ່ອຍໃຫ້ລອຍໄປຕາມນ້ຳ.
Verse 140
तमुत्सूष्टं जले गर्भ राधाभर्ता महायशा: । राधाया: कल्पयामास पुत्रं सोडधिरथस्तदा,जलमें छोड़े हुए उस बालकको राधाके पति महायशस्वी अधिरथ सूतने लेकर राधाकी गोदमें दे दिया और उसे राधाका पुत्र बना लिया
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອເຫັນທາຣົກນ້ອຍທີ່ຖືກປ່ອຍທິ້ງໃນນ້ຳ ອະທິຣະຖະ ຜູ້ຂັບລົດສົງຄາມຜູ້ມີກຽດສຽງ ແລະເປັນສາມີຂອງ ຣາທາ ໄດ້ອຸ້ມເອົາລາວຂຶ້ນ ແລະຮັບເປັນລູກຂອງ ຣາທາ ຢ່າງເປັນທາງການ.
Verse 141
चक्रतुर्नामधेयं च तस्य बालस्य तावुभौ । दम्पती वसुषेणेति दिक्षु सर्वासु विश्वुतम्,उन दोनों दम्पतिने उस बालकका नाम वसुषेण रखा। वह सम्पूर्ण दिशाओंमें भलीभाँति विख्यात था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ສາມີພັນລະຍາທັງສອງນັ້ນ ໄດ້ຕັ້ງຊື່ໃຫ້ເດັກນ້ອຍວ່າ “ວະສຸເສນະ” ແລະຊື່ນັ້ນກໍແຜ່ກະຈາຍລືຊາໄປທົ່ວທິດທັງປວງ.
Verse 142
संवर्धमानो बलवान् स्वस्त्रिषूत्तमो5भवत् | वेदाड़ानि च सर्वाणि जजाप जयतां वर:,बड़ा होनेपर वह बलवान् बालक सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्रोंकोी चलानेकी कलामें उत्तम हुआ। उस विजयी वीरने सम्पूर्ण वेदांगोंका अध्ययन कर लिया
ເມື່ອເຂົາເຕີບໃຫຍ່ ເດັກນ້ອຍນັ້ນກໍແຂງແຮງ ແລະເກັ່ງກາດໃນການໃຊ້ອາວຸດ ແລະອາສະຕຣາທັງຫຼາຍ. ຜູ້ເປັນຍອດໃນບັນດາຜູ້ຊະນະນັ້ນ ຍັງໄດ້ຮຽນຮູ້ແລະທ່ອງຈຳ ວິທະຍາວິຊາເວດາງຄະທັງປວງຈົນຄົບຖ້ວນ.
Verse 143
यस्मिन् काले जपन्नास्ते धीमान् सत्यपराक्रम: । नादेयं ब्राह्मणेष्वासीत् तस्मिन् काले महात्मन:,वसुषेण (कर्ण) बड़ा बुद्धिमान् और सत्यपराक्रमी था। जिस समय वह जपमें लगा होता, उस समय उस महात्माके पास ऐसी कोई वस्तु नहीं थी, जिसे वह ब्राह्मणोंके माँगनेपर न दे डाले
ວະສຸເສນະ (ກັນນະ) ເປັນຜູ້ມີປັນຍາ ແລະກ້າຫານດ້ວຍຄວາມສັດຊື່. ໃນເວລາທີ່ເຂົານັ່ງປະກອບຈະປະ (ສວດມົນ) ນັ້ນ ບໍ່ມີສິ່ງໃດໃນຄອບຄອງຂອງມະຫາຕະມະນັ້ນ ທີ່ຈະບໍ່ຍອມມອບໃຫ້ແກ່ພຣາຫມະນະ ເມື່ອຖືກຂໍ.
Verse 144
तमिन्द्रो ब्राह्मणो भूत्वा पुत्रार्थे भूतभावन: । ययाचे कुण्डले वीर॑ कवचं च सहाड्गजजम्,भूतभावन इन्द्रने अपने पुत्र अर्जुनके हितके लिये ब्राह्मणका रूप धारण करके वीर कर्णसे दोनों कुण्डल तथा उसके शरीरके साथ ही उत्पन्न हुआ कवच माँगा
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເພື່ອປະໂຫຍດແກ່ລູກຊາຍຂອງຕົນ ອິນທຣະ—ຜູ້ເກື້ອກູນສັດທັງປວງ—ໄດ້ປອມຕົວເປັນພຣາຫມະນະ ແລະໄປຂໍຈາກວີຣະບຸລຸດ ກັນນະ ຕຸ້ມຫູຄູ່ໜຶ່ງ ແລະເກາະກຳບັງ (ກະວະຈະ) ທີ່ເກີດມາພ້ອມກັບຮ່າງກາຍຂອງເຂົາ.
Verse 145
उत्कृत्य कर्णो ह्ददात् कवचं कुण्डले तथा । शक्ति शक्रो ददौ तस्मै विस्मितश्नलेदमब्रवीत्,कर्णने अपने शरीरमें चिपके हुए कवच और कुण्डलोंको उधेड़कर दे दिया। इन्द्रने विस्मित होकर कर्णको एक शक्ति प्रदान की और कहा--दुर्धर्ष वीर! तुम देवता, असुर, मनुष्य, गन्धर्व, नाग और राक्षसोंमेंसे जिसपर भी इस शक्तिको चलाओगे, वह एक व्यक्ति निश्चय ही अपने प्राणोंसे हाथ धो बैठेगा”
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ກັນນະໄດ້ດຶງຖອນອອກຈາກຮ່າງກາຍຂອງຕົນ ກະວະຈະ (ເກາະປ້ອງກັນທີ່ຕິດມາແຕ່ກຳເນີດ) ແລະ ກຸນດະລະ (ຕຸ້ມຫູ) ທີ່ຕິດຢູ່ກັບຕົນ ແລ້ວມອບໃຫ້. ອິນທຣະຕື່ນຕະລຶງ ຈຶ່ງປະທານອາວຸດເທວະ «ສັກຕິ» ແລະກ່າວວ່າ: «ໂອ ວີຣະບຸລຸດຜູ້ບໍ່ອາດຖືກພິຊິດ! ໃນບັນດາເທວະ, ອະສຸຣະ, ມະນຸດ, ຄັນທະວະ, ນາຄ, ແລະ ຣາກສະສະ—ເຈົ້າຂວ້າງສັກຕິນີ້ໃສ່ຜູ້ໃດ ຜູ້ນັ້ນພຽງຄົນດຽວ ຈະສູນຊີວິດແນ່ນອນ»។
Verse 146
देवासुरमनुष्याणां गन्धर्वोरगरक्षसाम् । यस्मिन् क्षेप्स्यसि दुर्धर्ष स एको न भविष्यति,कर्णने अपने शरीरमें चिपके हुए कवच और कुण्डलोंको उधेड़कर दे दिया। इन्द्रने विस्मित होकर कर्णको एक शक्ति प्रदान की और कहा--दुर्धर्ष वीर! तुम देवता, असुर, मनुष्य, गन्धर्व, नाग और राक्षसोंमेंसे जिसपर भी इस शक्तिको चलाओगे, वह एक व्यक्ति निश्चय ही अपने प्राणोंसे हाथ धो बैठेगा”
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ວີຣະບຸລຸດຜູ້ບໍ່ອາດຖືກພິຊິດ! ໃນບັນດາເທວະ, ອະສຸຣະ, ມະນຸດ, ຄັນທະວະ, ນາຄ, ແລະ ຣາກສະສະ—ເຈົ້າຂວ້າງອາວຸດນີ້ໃສ່ຜູ້ໃດ ຜູ້ນັ້ນພຽງຄົນດຽວ ຈະບໍ່ລອດຊີວິດ»។
Verse 147
पुरा नाम च तस्यासीद् वसुषेण इति क्षितौ । ततो वैकर्तन: कर्ण: कर्मणा तेन सो5भवत्,पहले कर्णका नाम इस पृथ्वीपर वसुषेण था। फिर कवच और कुण्डल काटनेके कारण वह वैकर्तन नामसे प्रसिद्ध हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນກ່ອນນັ້ນ ໃນແຜ່ນດິນນີ້ ຊື່ຂອງເຂົາແມ່ນ ວະສຸເສນະ (Vasuṣeṇa). ຕໍ່ມາ ເນື່ອງຈາກການກະທຳນັ້ນ—ການຕັດຖອນກະວະຈະ ແລະ ກຸນດະລະ—ກັນນະຈຶ່ງໄດ້ຮັບນາມວ່າ «ໄວກັຣຕະນະ» (Vaikartana).
Verse 148
आमुक्तकवचो वीरो यस्तु जज्ञे महायशा: । स कर्ण इति विख्यात: पृथाया: प्रथम: सुतः,जो महायशस्वी वीर कवच धारण किये हुए ही उत्पन्न हुआ, वह पृथाका प्रथम पुत्र कर्ण नामसे ही सर्वत्र विख्यात था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ວີຣະບຸລຸດຜູ້ມີກຽດຍົດຍິ່ງ ຜູ້ເກີດມາພ້ອມກະວະຈະທີ່ສວມຢູ່ແຕ່ເກີດ ເປັນທີ່ຮູ້ຈັກທົ່ວໄປດ້ວຍນາມ «ກັນນະ»—ບຸດຄົນທຳອິດຂອງ ປຣິຖາ (Pṛthā).
Verse 149
स तु सूतकुले वीरो ववृधे राजसत्तम | कर्ण नरवरश्रेष्ठ सर्वशस्त्रभूृतां वरम्,महाराज! वह वीर सूतकुलमें पाला-पोसा जाकर बड़ा हुआ था। नरश्रेष्ठ कर्ण सम्पूर्ण शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ກະສັດຜູ້ປະເສີດ! ກັນນະ ວີຣະບຸລຸດນັ້ນ ຖືກລ້ຽງດູ ແລະເຕີບໃຫຍ່ໃນຕະກູນຂອງ ສູຕະ (ຄົນຂັບລົດສົງຄາມ-ນັກຂັບຂານ). ໃນບັນດາຜູ້ຖືອາວຸດທັງປວງ ກັນນະ—ຜູ້ເປັນເລີດໃນບັນດາບຸລຸດ—ຖືກນັບວ່າຍອດຢ່າງຫາຜູ້ເທົ່າບໍ່ໄດ້.
Verse 150
दुर्योधनस्यथ सचिवं मित्र शत्रुविनाशनम् | दिवाकरस्य त॑ विद्धि राजन्नंशमनुत्तमम्,वह दुर्योधनका मन्त्री और मित्र होनेके साथ ही उसके शत्रुओंका नाश करनेवाला था। राजन! तुम कर्णको साक्षात् सूर्यदेवका सर्वोत्तम अंश जानो
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ລາວເປັນທັງລັດຖະມົນຕີ ແລະ ມິດສະຫາຍຂອງທຸຣະໂຍທະນະ ແລະເປັນຜູ້ທຳລາຍສັດຕູຂອງລາວ. ໂອ ພະຣາຊາ, ຈົ່ງຮູ້ວ່າລາວແມ່ນສ່ວນອັນສູງສຸດອັນຫາທຽບບໍ່ໄດ້ຂອງພະເທວະສຸຣິຍະ».
Verse 151
यस्तु नारायणो नाम देवदेव: सनातन: । तस्यांशो मानुषेष्वासीद् वासुदेव: प्रतापवान्,देवताओंके भी देवता जो सनातन पुरुष भगवान् नारायण हैं, उन्हींके अंशस्वरूप प्रतापी वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण मनुष्योंमें अवतीर्ण हुए थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ນາຣາຍະນະ ຜູ້ເປັນພະເຈົ້າແຫ່ງພະເຈົ້າທັງປວງ ແລະດຳລົງຢູ່ຊົ່ວນິລັນດອນ—ຈາກພະອົງນັ້ນ ມີສ່ວນໜຶ່ງປາກົດໃນມະນຸດໂລກ ເປັນວາສຸເທວະ (ກຣິດສະນະ) ຜູ້ມີລິດເດດ. ການປາກົດນີ້ບໍ່ແມ່ນການເກີດທົ່ວໄປ ແຕ່ເປັນການອະວະຕານເພື່ອຄ້ຳຈຸນທຳມະ ແລະນຳພາສັດທັງຫຼາຍໄປສູ່ປະໂຫຍດອັນສູງສຸດ».
Verse 152
शेषस्यांशश्ष नागस्य बलदेवो महाबल: । सनत्कुमार प्रद्युम्न॑ विद्धि राजन् महौजसम्,महाबली बलदेवजी शेषनागके अंश थे। राजन! महातेजस्वी प्रद्युम्मनको तुम सनत्कुमारका अंश जानो
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ພະບະລະເທວະ ຜູ້ມີກຳລັງຍິ່ງໃຫຍ່ ແມ່ນສ່ວນໜຶ່ງຂອງເສສະ ນາກາອັນຍິ່ງໃຫຍ່. ແລະ ໂອ ພະຣາຊາ, ຈົ່ງຮູ້ວ່າ ປຣະດຍຸມນະ ຜູ້ສ່ອງສະຫວ່າງດ້ວຍພະລັງອັນໃຫຍ່ ແມ່ນສ່ວນໜຶ່ງຂອງສະນັດກຸມາຣະ».
Verse 153
एवमन्ये मनुष्येन्द्रा बहवों5शा दिवौकसाम् | जज्ञिरे वसुदेवस्य कुले कुलविवर्धना:,इस प्रकार वसुदेवजीके कुलमें बहुत-से दूसरे-दूसरे नरेन्द्र उत्पन्न हुए, जो देवताओंके अंश थे। वे सभी अपने कुलकी वृद्धि करनेवाले थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໃນທຳນອງດຽວກັນນີ້ ມີກະສັດອື່ນໆອີກຫຼາຍພະອົງ ເກີດຂຶ້ນໃນວົງສານຂອງວາສຸເທວະ—ແຕ່ລະພະອົງເປັນສ່ວນໜຶ່ງຂອງເທວະ—ເປັນຜູ້ເພີ່ມພູນວົງສານຂອງຕົນ».
Verse 154
गणस्त्वप्सरसां यो वै मया राजन प्रकीर्तित: । तस्य भाग: क्षितौ जज्ञे नियोगाद् वासवस्य ह,महाराज! मैंने अप्सराओोंके जिस समुदायका वर्णन किया है, उसका अंश भी इन्द्रके आदेशसे इस पृथ्वीपर उत्पन्न हुआ था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພະຣາຊາ, ຝູງອັບສະຣາທີ່ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ກ່າວເຖິງນັ້ນ—ມີສ່ວນໜຶ່ງຂອງຝູງນັ້ນເກີດຂຶ້ນໃນແຜ່ນດິນນີ້ ແທ້ໆ ໂດຍຄຳສັ່ງຂອງວາສະວະ (ພະອິນທຣະ)».
Verse 155
तानि षोडश देवीनां सहस्राणि नराधिप । बभूवुर्मानुषे लोके वासुदेवपरिग्रह:,नरेश्वर! वे अप्सराएँ मनुष्यलोकमें सोलह हजार देवियोंके रूपमें उत्पन्न हुई थीं, जो सब-की-सब भगवान् श्रीकृष्णकी पत्नियाँ हुईं
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ພະຣາຊາ, ນາງອັບສະຣາທິບທັງ ໑໖,໐໐໐ ນັ້ນ ໄດ້ມາເກີດໃນໂລກມະນຸດ ເປັນສະຕຣີດັ່ງເຈົ້າຍິງ ໑໖,໐໐໐ ແລະທຸກນາງລ້ວນເປັນພຣະມະເຫສີຂອງ ວາສຸເທວະ (ພຣະສີກຣິດ) ຕາມພຣະປະສົງແຫ່ງເທວະ.
Verse 156
श्रियस्तु भाग: संजज्ञे रत्यर्थ पृथिवीतले । भीष्मकस्य कुले साध्वी रुक्मिणी नाम नामत:,नारायणस्वरूप भगवान् श्रीकृष्णको आनन्द प्रदान करनेके लिये भूतलपर विदर्भराज भीष्मकके कुलमें सती-साध्वी रुक्मिणीदेवीके नामसे लक्ष्मीजीका ही अंश प्रकट हुआ था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເພື່ອຄວາມຊື່ນບານແລະຄວາມສຸກຂອງສັດທັງຫຼາຍໃນພື້ນພິພົບ, ສ່ວນໜຶ່ງແຫ່ງ ສຣີ (ພຣະລັກສະມີ) ໄດ້ບັງເກີດໃນຕະກູນອັນສູງສົ່ງຂອງ ພີສະມະກະ ເປັນນາງຜູ້ມີຄຸນທຳນາມວ່າ ຣຸກມິນີ.
Verse 157
द्रौपदी त्वथ संजज्ञे शचीभागादनिन्दिता । द्रुपदस्य कुले कन्या वेदिमध्यादनिन्दिता,सती-साध्वी द्रौपदी शचीके अंशसे उत्पन्न हुई थी। वह राजा द्रुपदके कुलमें यज्ञकी वेदीके मध्यभागसे एक अनिन्द्य सुन्दरी कुमारी कन्याके रूपमें प्रकट हुई थी
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຕໍ່ມາ ດຣອບະດີ ຜູ້ບໍ່ມີມົນທິນ ໄດ້ເກີດຈາກສ່ວນໜຶ່ງຂອງ ສະຈີ. ໃນຕະກູນຂອງພຣະຣາຊາ ດຣຸປະດະ, ນາງປາກົດເປັນສາວນ້ອຍອອກມາຈາກກາງເວທີບູຊາຍັນ—ເປັນກໍາເນີດອັນອັດສະຈັນທີ່ມີເທວະຮັບຮອງ.
Verse 158
नातिहस्वा न महती नीलोत्पलसुगन्धिनी । पद्मायताक्षी सुश्रोणी स्वसिताज्चितमूर्थजा,वह न तो बहुत छोटी थी और न बहुत बड़ी ही। उसके अंगोंसे नीलकमलकी सुगन्ध फैलती रहती थी। उसके नेत्र कमलदलके समान सुन्दर और विशाल थे, नितम्बभाग बड़ा ही मनोहर था और उसके काले-काले घूँघराले बालोंका सौन्दर्य भी अद्भुत था
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ນາງບໍ່ເຕັ້ຍເກີນ ແລະບໍ່ສູງເກີນ. ກິ່ນຫອມດັ່ງດອກບົວສີນ້ຳເງິນ (ບົວຟ້າ) ຄືຈະອອກຈາກອວັຍວະຂອງນາງ. ດວງຕາກວ້າງງາມດັ່ງກີບບົວ; ສະໂພກອ່ອນຊ້ອຍສົມສ່ວນ; ແລະຜົມດຳຫຍຸ້ງຄົງຂອງນາງກໍງາມພິສົດ.
Verse 159
सर्वलक्षणसम्पूर्णा वैदूर्यमणिसंनिभा । पज्चानां पुरुषेन्द्राणां चित्तप्रमथनी रह:,वह समस्त शुभ लक्षणोंसे सम्पन्न तथा वैदूर्य मणिके समान कान्तिमती थी। एकान्तमें रहकर वह पाँचों पुरुषप्रवर पाण्डवोंके मनको मुग्ध किये रहती थी
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ນາງພ້ອມດ້ວຍລັກສະນະມົງຄຸນທຸກປະການ ແລະສະຫວ່າງໄສດັ່ງແກ້ວໄວດູຣະຍະ (ແກ້ວຕາແມວ). ຢູ່ໃນທີ່ສະງົບສ່ວນຕົວ, ນາງຍັງຄົງຊັກນໍາໃຈຂອງບຸລຸດຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ທັງຫ້າ—ເຈົ້າຊາຍປານດະວະ—ໃຫ້ຫວັ່ນໄຫວຢູ່ເສມອ.
Verse 160
सिद्धिर्धतिश्व ये देव्यौ पज्चानां मातरौ तु ते । कुन्ती माद्री च जज्ञाते मतिस्तु सुबलात्मजा,सिद्धि और धृति नामवाली जो दो देवियाँ हैं, वे ही पाँचों पाण्डवोंकी दोनों माताओं-- कुन्ती और माद्रीके रूपमें उत्पन्न हुई थीं। सुबल-नरेशकी पुत्री गान्धारीके रूपमें साक्षात् मतिदेवी ही प्रकट हुई थीं
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເທວີສອງອົງນາມ ສິດທິ ແລະ ທຶຣຕິ ໄດ້ມາເກີດໃນໂລກ ເປັນແມ່ທັງສອງຂອງປານດະວະທັງຫ້າ—ຄຸນຕີ ແລະ ມາດຣີ. ແລະ ເທວີ ມະຕິ ເອງ ກໍໄດ້ປາກົດເປັນ ຄັນທາຣີ ທິດາຂອງພຣະຣາຊາ ສຸບະລະ. ດັ່ງນັ້ນ ມະຫາກາບນີ້ໄດ້ວາງພາບວ່າ ແມ່ຜູ້ສຳຄັນໃນສາຍຄຸຣຸ–ປານດະວະ ແມ່ນຮ່າງປະກົດຂອງຄຸນທຳເທວະ—ຄວາມສຳເລັດ, ຄວາມໝັ້ນຄົງ, ແລະ ປັນຍາຮູ້ແຍກ—ຊີ້ວ່າ ພະລັງທາງສິນທຳແລະຈິດໃຈທີ່ຈະຫຼ້າຫຼັງສົງຄາມ ມີຮາກຖານຈາກຄວາມສັກສິດ.
Verse 161
इति देवासुराणां ते गन्धर्वाप्सरसां तथा । अंशावतरणं राजन् राक्षसानां च कीर्तितम्,राजन! इस प्रकार तुम्हें देवताओं, असुरों, गन्धर्वों, अप्सराओं तथा राक्षसोंके अंशोंका अवतरण बताया गया। युद्धमें उन््मत्त रहनेवाले जो-जो राजा इस पृथ्वीपर उत्पन्न हुए थे और जो-जो महात्मा क्षत्रिय यादवोंके विशाल कुलमें प्रकट हुए थे, वे ब्राह्मण, क्षत्रिय अथवा वैश्य जो भी रहे हैं, उन सबके स्वरूपका परिचय मैंने तुम्हें दे दिया है। मनुष्यको चाहिये कि वह दोष-दृष्टिका त्याग करके इस अंशावतरणके प्रसंगको सुने। यह धन, यश, पुत्र, आयु तथा विजयकी प्राप्ति करानेवाला है
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ດັ່ງນັ້ນ ໂອ ພຣະຣາຊາ, ການຈຸດລົງມາເກີດເປັນສ່ວນ (ອັມສະ) ຂອງເທວະ ແລະ ອະສຸຣະ, ພ້ອມທັງ ຄັນທັຣວະ ແລະ ອັບສະຣາ, ແລະຍັງຮວມເຖິງ ຣາກສະສະ, ໄດ້ຖືກເລົ່າໃຫ້ທ່ານຟັງແລ້ວ.” ໃນບົດບາດຂອງເລື່ອງ ນີ້ແມ່ນການປິດທ້າຍບັນຊີຂອງ “ອະວະຕານສ່ວນ” ທີ່ປາກົດໃນບັນດາກະສັດແລະວີຣະຊົນໃນໂລກ, ຊີ້ວ່າເຫດການຂ້າງໜ້າແມ່ນການມາພົບກັນຂອງພະລັງສາກົນ ບໍ່ແມ່ນແຕ່ການແຂ່ງຂັນຂອງມະນຸດເທົ່ານັ້ນ, ແລະເຊີນໃຫ້ຜູ້ຟັງຮັບຟັງໂດຍບໍ່ຈ້ອງຈັບຜິດ.
Verse 162
ये पृथिव्यां समुद्भूता राजानो युद्ध दुर्मदा: । महात्मानो यदूनां च ये जाता विपुले कुले,राजन! इस प्रकार तुम्हें देवताओं, असुरों, गन्धर्वों, अप्सराओं तथा राक्षसोंके अंशोंका अवतरण बताया गया। युद्धमें उन््मत्त रहनेवाले जो-जो राजा इस पृथ्वीपर उत्पन्न हुए थे और जो-जो महात्मा क्षत्रिय यादवोंके विशाल कुलमें प्रकट हुए थे, वे ब्राह्मण, क्षत्रिय अथवा वैश्य जो भी रहे हैं, उन सबके स्वरूपका परिचय मैंने तुम्हें दे दिया है। मनुष्यको चाहिये कि वह दोष-दृष्टिका त्याग करके इस अंशावतरणके प्रसंगको सुने। यह धन, यश, पुत्र, आयु तथा विजयकी प्राप्ति करानेवाला है
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ບັນດາກະສັດທີ່ເກີດຂຶ້ນໃນແຜ່ນດິນ ມຶນເມົາດ້ວຍຄວາມຄືກຄືນແຫ່ງສົງຄາມ, ແລະບັນດາວີຣະຊົນໃຈໃຫຍ່ທີ່ເກີດໃນວົງສາຍຢະດຸອັນກວ້າງໃຫຍ່—ກ່ຽວກັບຄົນເຫຼົ່ານັ້ນທັງໝົດ ຂ້ອຍໄດ້ກ່າວແຈ້ງແລ້ວເຖິງສະພາບແທ້ ແລະ ຕົ້ນກຳເນີດຂອງເຂົາ. ຄວນຟັງເລື່ອງອັມສາວະຕານນີ້ໂດຍບໍ່ຈ້ອງຈັບຜິດ; ມັນນຳມາຊັບສິນ, ຊື່ສຽງ, ລູກຫຼານ, ອາຍຸຍືນ, ແລະ ໄຊຊະນະ.”
Verse 163
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्या मया ते परिकीर्तिता: । धन्यं यशस्यं पुत्रीयमायुष्यं विजयावहम् । इदमंशावतरणं श्रोतव्यमनसूयता,राजन! इस प्रकार तुम्हें देवताओं, असुरों, गन्धर्वों, अप्सराओं तथा राक्षसोंके अंशोंका अवतरण बताया गया। युद्धमें उन््मत्त रहनेवाले जो-जो राजा इस पृथ्वीपर उत्पन्न हुए थे और जो-जो महात्मा क्षत्रिय यादवोंके विशाल कुलमें प्रकट हुए थे, वे ब्राह्मण, क्षत्रिय अथवा वैश्य जो भी रहे हैं, उन सबके स्वरूपका परिचय मैंने तुम्हें दे दिया है। मनुष्यको चाहिये कि वह दोष-दृष्टिका त्याग करके इस अंशावतरणके प्रसंगको सुने। यह धन, यश, पुत्र, आयु तथा विजयकी प्राप्ति करानेवाला है
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: “ຂ້ອຍໄດ້ເລົ່າໃຫ້ທ່ານຟັງແລ້ວ ເຖິງພວກພຣາຫມະນະ, ກະສັດຕະຣິຍະ, ແລະ ໄວສະຍະ. ເລື່ອງອັມສາວະຕານນີ້ເປັນມົງຄຸນ: ມັນນຳມາຊັບສິນ, ຊື່ສຽງ, ລູກຫຼານ, ອາຍຸຍືນ, ແລະ ໄຊຊະນະ. ໂອ ພຣະຣາຊາ, ຄວນຟັງມັນໂດຍບໍ່ມີຈິດອິດສາ ຫຼື ຈ້ອງຈັບຜິດ.”
Verse 164
अंशावतरणं श्रुत्वा देवगन्धर्वरक्षसाम् । प्रभवाप्ययवित् प्राज्ञो न कृच्छेष्ववसीदति,देवता, गन्धर्व तथा राक्षसोंके इस अंशावतरणको सुनकर विश्वकी उत्पत्ति और प्रलयके अधिष्ठान परमात्माके स्वरूपको जाननेवाला प्राज्ञ पुरुष बड़ी-बड़ी विपत्तियोंमें भी दुःखी नहीं होता
ເມື່ອໄດ້ຟັງເລື່ອງການຈຸດລົງມາເກີດເປັນສ່ວນຂອງເທວະ, ຄັນທັຣວະ, ແລະ ຣາກສະສະ ແລ້ວ, ຜູ້ມີປັນຍາ—ຜູ້ຮູ້ວ່າພຣະເຈົ້າແມ່ນຖານຮອງແຫ່ງການເກີດຂຶ້ນ ແລະ ການດັບສູນຂອງສາກົນ—ຈະບໍ່ຈົມຢູ່ໃນຄວາມທໍ້ໃຈ ແມ່ນແຕ່ໃນຄວາມລຳບາກຮ້າຍແຮງກໍຕາມ.
The dilemma concerns how desire and immediacy can be reconciled with dharma: whether a union without the father’s immediate participation is legitimate, and which vivāha form is ethically permissible for a kṣatriya in this setting.
Ethical action is framed as context-sensitive: dharma is articulated through recognized social categories (vivāha types, varṇa appropriateness), but it is stabilized by truthful promises that protect vulnerable parties and secure legitimate succession.
There is no explicit phalaśruti formula; instead, a functional meta-commentary appears as Kaṇva’s validation and prophecy, which positions the union as dharmya and narratively anchors the future imperial outcome of their lineage.