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Sukta 9.65
Ascribed to Soma Pavamāna seers (Mandala 9).
Soma Pavamāna.
Likely Jagatī (not metrically verified from input).
This Pavamāna Soma hymn celebrates the living current of Soma as he is pressed, filtered, and made radiant—praised as a kingly power that moves between worlds and establishes inspired clarity in the human mind. The verses repeatedly portray Soma’s “kin” (the pressing stones, waters, and streams of purification) urging him forward, so that his purified flow grants rayi (plenitude), protection, and uplift to the sacrificer and the community.
Mantra 1
हिन्वन्ति सूरमुस्रयः स्वसारो जामयस्पतिम् । महामिन्दुं महीयुवः ॥
सोमा की बहनें और रिश्तेदार उसे आगे बढ़ा रहे हैं। वो उसे अपना मुखिया मान के चला रहे हैं। यह सोमा बड़ा है और खुशी देता है। इससे पूरा जीवन ऊपर उठता है।
Mantra 2
पवमान रुचारुचा देवो देवेभ्यस्परि । विश्वा वसून्या विश ॥
हे सोमा, तू खुद को साफ करता चल। तेरी चमक बहुत तरह की है। तू भगवानों में एक भगवान है। हमारे पास आ और सारी सम्पत्ति ले कर आ, पूरी शक्ति और रोशनी।
Mantra 3
आ पवमान सुष्टुतिं वृष्टिं देवेभ्यो दुवः । इषे पवस्व संयतम् ॥
आ सोमा, तू खुद को साफ कर। भगवानों के लिए अच्छा गाना और बारिश ले कर आ। हमारे लिए बढ़ाव ला, सही दिशा में।
Mantra 4
वृषा ह्यसि भानुना द्युमन्तं त्वा हवामहे । पवमान स्वाध्यः ॥
तू रोशनी में बड़ा बलवान है। हम तुझे बुला रहे हैं, तू चमकता है। हे सोमा, तू खुद की शक्ति से मज़बूत है।
Mantra 5
आ पवस्व सुवीर्यं मन्दमानः स्वायुध । इहो ष्विन्दवा गहि ॥
अपने आप को साफ कर और हमारे लिए बड़ी शक्ति ला। खुश हो के चल, अपने आप में बल ले के। यहाँ आ सोमा, हमारे पास।
Mantra 6
यदद्भिः परिषिच्यसे मृज्यमानो गभस्त्योः । द्रुणा सधस्थमश्नुषे ॥
जब पानी से धो के साफ किया जाता है, दोनों हाथों में पकड़ के। तब वो पक्की जगह पहुँच जाता है। यह वही स्थान है जहाँ खुशी रह सकती है।
Mantra 7
प्र सोमाय व्यश्ववत्पवमानाय गायत । महे सहस्रचक्षसे ॥
सोम के लिए गाना गाओ। यह खुद को साफ करता है। गाना ऐसे चलो जैसे बहुत सारे घोड़े दौड़ रहे हों। वो बड़ा है, हज़ारों आँखों वाला, सब देख सकता है।
Mantra 8
यस्य वर्णं मधुश्चुतं हरिं हिन्वन्त्यद्रिभिः । इन्दुमिन्द्राय पीतये ॥
जिसका रंग शहद जैसा है, सुनहरा चमकता है। पत्थर से दबा के निकालते हैं। यह सोम रस इंद्र के लिए तैयार किया जाता है। इंद्र को पीने के लिए।
Mantra 9
तस्य ते वाजिनो वयं विश्वा धनानि जिग्युषः । सखित्वमा वृणीमहे ॥
तुम जीतने वाले हो, धन वाले हो। हम भी सारी धन की इच्छा रखते हैं। हम तुम्हारी दोस्ती चुनते हैं। साथ में रहना चाहते हैं।
Mantra 10
वृषा पवस्व धारया मरुत्वते च मत्सरः । विश्वा दधान ओजसा ॥
बैल जैसा बलवान हो, पानी की धार में साफ हो। मरुत के साथ खुशी मनाओ। अपनी ताकत से सब संभाल लो। सब कुछ अपने पास रखना।
Mantra 11
तं त्वा धर्तारमोण्योः पवमान स्वर्दृशम् । हिन्वे वाजेषु वाजिनम् ॥
हे सोम, तुम खुद को साफ करते हो और दो बर्तन में धरण करते हो। तुम ऊपर की दुनिया देख सकते हो। हम तुम्हे लड़ाई में आगे बढ़ा रहे हैं, क्योंकि तुम जीतने वाले हो।
Mantra 13
आ न इन्दो महीमिषं पवस्व विश्वदर्शतः । अस्मभ्यं सोम गातुवित् ॥
इन्दु, हमारे पास आ। बहुत सारा खाना लेकर आ। सोम, तुम सबसे अच्छे दिखते हो। हमें सही रास्ता दिखाओ।
Mantra 14
आ कलशा अनूषतेन्दो धाराभिरोजसा । एन्द्रस्य पीतये विश ॥
बर्तन तुम्हे बुला रहे हैं, इन्दु। तुम ताकत के साथ आ रहे हो। इन्द्र के लिए पियो, ताकि उनमें खुशी आए।
Mantra 15
यस्य ते मद्यं रसं तीव्रं दुहन्त्यद्रिभिः । स पवस्वाभिमातिहा ॥
तुम्हारा रस इतना तेज़ है, जैसे नशा हो। पत्थर से उस्से निचोड़ा जाता है। अपने आप को साफ करके दुश्मन को मारो।
Mantra 16
राजा मेधाभिरीयते पवमानो मनावधि । अन्तरिक्षेण यातवे ॥
सोम राजा है जो खुद को साफ करता है। वो बुद्धि लेकर आगे बढ़ता है। मन में बैठ के आसमान के रास्ते चलता है।
Mantra 17
आ न इन्दो शतग्विनं गवां पोषं स्वश्व्यम् । वहा भगत्तिमूतये ॥
हे इंदु, हमारे पास आ। तू सौ गुना ज़्यादा ला, गायों जैसी शक्ति और तेज़ ऊर्जा। हमें मदद के लिए भगवान का हिस्सा पहुँचा दे।
Mantra 18
आ नः सोम सहो जुवो रूपं न वर्चसे भर । सुष्वाणो देववीतये ॥
हे सोम, हमारे पास आ। तू ताकत और जोश ला, चमक के साथ। तू आवाज़ करके देवताओं के लिए चल।
Mantra 19
अर्षा सोम द्युमत्तमोऽभि द्रोणानि रोरुवत् । सीदञ्छ्येनो न योनिमा ॥
हे सोम, तू बह। तू सबसे ज़्यादा चमकता है। भांडों के ऊपर से गुज़रता है आवाज़ के साथ। अपने घर में आ जा, जैसे बाज़ अपने घोंसले में आता है।
Mantra 20
अप्सा इन्द्राय वायवे वरुणाय मरुद्भ्यः । सोमो अर्षति विष्णवे ॥
पानी में सोम बह रहा है। यह इंद्र के लिए है, वायु के लिए, वरुण के लिए, मरुत के लिए, और विष्णु के लिए।
Mantra 21
इषं तोकाय नो दधदस्मभ्यं सोम विश्वतः । आ पवस्व सहस्रिणम् ॥
हे सोम, तू हमारे बच्चों के लिए शक्ति रख। हमारे लिए भी हर तरफ से। तू खुद को साफ कर और हमें हज़ार गुना ला के दे।
Mantra 22
ये सोमासः परावति ये अर्वावति सुन्विरे । ये वादः शर्यणावति ॥
यह सोम रस जो दूर की जगह पे निकाला जा रहा है, जो पास की जगह पे निकाला जा रहा है, और जो सर्यानवत में है। यह सब मिलके एक ही जगह आते हैं। दूर और पास सब एक हो जाते हैं।
Mantra 23
य आर्जीकेषु कृत्वसु ये मध्ये पस्त्यानाम् । ये वा जनेषु पञ्चसु ॥
जो सोम की ताकत चमकदार खेत में काम कर रही है, जो हमारे घर के बीच में है, और जो पाँच तरह के लोगों में चल रही है। यह सब हमारे काम आते हैं और मदद करते हैं।
Mantra 24
ते नो वृष्टिं दिवस्परि पवन्तामा सुवीर्यम् । सुवाना देवास इन्दवः ॥
यह सोम की बूँदें आसमान से बारिश को साफ करते हैं। यह हमारे अंदर बहुत ताकत लाते हैं। जीतने वाली ऊर्जा हमारे पास आती है।
Mantra 25
पवते हर्यतो हरिर्गृणानो जमदग्निना । हिन्वानो गोरधि त्वचि ॥
वो सोम रस साफ हो रहा है, सुनहरा रंग चमक रहा है। अग्नि की तरह जगाने वाली ताकत उसे गा रही है। गाय की चमड़ी पर उसे आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि अंदर छुपा हुआ रोशनी बाहर आए।
Mantra 26
प्र शुक्रासो वयोजुवो हिन्वानासो न सप्तयः । श्रीणाना अप्सु मृञ्जत ॥
चमकदार ताकतें आगे बढ़ रही हैं, जीवन की ऊर्जा के साथ। सात घोड़े जैसे दौड़ रही हैं। पानी में मिलके यह सब साफ करते हैं और हमारे अंदर के रास्ते तैयार करते हैं।
Mantra 27
तं त्वा सुतेष्वाभुवो हिन्विरे देवतातये । स पवस्वानया रुचा ॥
यह सोम है। जब लोग यह बना रहे हैं, तब बड़े लोग उसे भगवान की तरफ ले जाते हैं। तू इस चमक से अपने आप को साफ कर। यह रोशनी तुम्हे सही रास्ता दिखाएगी।
Mantra 28
आ ते दक्षं मयोभुवं वह्निमद्या वृणीमहे । पान्तमा पुरुस्पृहम् ॥
आज हम तुम्हारी ताकत माँगते हैं। वो ताकत जो सही फैसला करने में मदद करती है और खुशी देती है। तू आग जैसी ताकत है। हम तुझे चाहते हैं। हमारे पास आ जा।
Mantra 29
आ मन्द्रमा वरेण्यमा विप्रमा मनीषिणम् । पान्तमा पुरुस्पृहम् ॥
हमारे पास वो लाओ जो खुशी देता है। सबसे अच्छा चुनो और लाओ। जो बड़ा समझदार है और सीधी सोच रखता है, उसे भी लाओ। हमें चाहिए, तुम्हारे पास आओ।
Mantra 30
आ रयिमा सुचेतुनमा सुक्रतो तनूष्वा । पान्तमा पुरुस्पृहम् ॥
हमारे पास पूरा लाओ। जो चमक रहा है और जाग रहा है, उसे लाओ। तुम्हारी नीयत साफ है। इसको हमारे शरीर में लाओ। हम उसे चाहते हैं, आओ।
Soma Pavamāna—the Soma juice as it is pressed and purified, praised as a radiant, kingly power that strengthens gods and people.
In the ritual, Soma is strained through a filter to become fit for offering; the hymn also uses this as a symbol of inner cleansing—turning raw energy into clear awareness and discernment.
It asks for rayi (plenitude/abundance), sucetunā (clear-awakened consciousness), protection, and an uplifted, well-ordered life-force established in the body and mind.
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