
Sukta 8.67
Ādityas (collective)
This hymn petitions the Ādityas—royal upholders of ṛta (cosmic order)—for shelter, graciousness, and the successful attainment of aims. Moving from invocation to urgent protection in danger and finally to a sweeping banishment of hatred, sin, and oppressive affliction, it frames the Ādityas as both guardians of law and healers of social and inner disorder.
Mantra 1
त्यान्नु क्षत्रियाँ अव आदित्यान्याचिषामहे । सुमृळीकाँ अभिष्टये ॥
अब हम उन राजा जैसी ताकतों से सुरक्षा माँग रहे हैं, आदित्य देवताओं से। वो सब दयालु हैं और अच्छा चाहते हैं। हमें अपनी इच्छा पूरी करने में मदद करें।
Mantra 2
मित्रो नो अत्यंहतिं वरुणः पर्षदर्यमा । आदित्यासो यथा विदुः ॥
मित्र देवता हमें तंगी और परेशानी से पार ले जाएँ। वरुण और अर्यमन हमें रास्ता दिखाएँ। आदित्य देवता जानते हैं क्या सही है, वो हमें सेफ रास्ते पे लगाएँ।
Mantra 3
तेषां हि चित्रमुक्थ्यं वरूथमस्ति दाशुषे । आदित्यानामरंकृते ॥
उनकी सुरक्षा चमकदार है और जो लोग भगवान को भजन गाते हैं उनके लिए काम करती है। जो लोग सही दिल से देते हैं, उनके लिए यह आदित्य देवता हमेशा तैयार रहते हैं।
Mantra 4
महि वो महतामवो वरुण मित्रार्यमन् । अवांस्या वृणीमहे ॥
वरुण, मित्र, अर्यमन, तुम तीनों की हिफ़ाज़त बहुत बड़ी है। हम तुम्हारी पनाह माँगते हैं। तुम्हारा बड़ा सहायक हमारे ऊपर रहे और हम सही रास्ते पर चल सकें।
Mantra 5
जीवान्नो अभि धेतनादित्यासः पुरा हथात् । कद्ध स्थ हवनश्रुतः ॥
हे आदित्य देवता, हमें ज़िंदा और सुरक्षित रखना। मौत के मारे से पहले ही हमें बचा लेना। तुम लोग तो पुकार सुनने वाले हो, तो कहाँ हो?
Mantra 6
यद्वः श्रान्ताय सुन्वते वरूथमस्ति यच्छर्दिः । तेना नो अधि वोचत ॥
जब कोई थक के सोम का जूस निकालता है, तब तुम उसकी हिफ़ाज़त करते हो। उसी तरह हम पे भी अपनी पनाह डाल के हमें सुरक्षित रखना।
Mantra 7
अस्ति देवा अंहोरुर्वस्ति रत्नमनागसः । आदित्या अद्भुतैनसः ॥
देवियों, परेशानी के बाद एक बड़ी जगह है। वहाँ कोई दोष नहीं, सिर्फ ख़ज़ाना है। आदित्य देवता, तुम्हारी शक्ति से पाप भी ख़त्म हो जाता है।
Mantra 8
मा नः सेतुः सिषेदयं महे वृणक्तु नस्परि । इन्द्र इद्धि श्रुतो वशी ॥
यह पुल हमारे लिए टूट न जाए। यह हमें बड़े सफ़र के लिए पकड़ के रखे। इंद्र की बात सुनी गई है, वो शक्ति का मालिक है।
Mantra 9
मा नो मृचा रिपूणां वृजिनानामविष्यवः । देवा अभि प्र मृक्षत ॥
बुरा लोग जो सीधी राह नहीं चलते, उनकी हरकत हम तक न पहुँचे। भगवान, इनको हमारे पास से हटा दो और दूर भगा दो।
Mantra 10
उत त्वामदिते मह्यहं देव्युप ब्रुवे । सुमृळीकामभिष्टये ॥
अदिति, तुम बहुत बड़ी हो, आसमान जैसी। मैं तुमसे दुआ कर रहा हूँ। तुम बड़ी दयालु हो और बीमारी ठीक करती हो। मेरे दिल की बात पूरी करो।
Mantra 11
पर्षि दीने गभीर आँ उग्रपुत्रे जिघांसतः । माकिस्तोकस्य नो रिषत् ॥
जब हम गिरने लगें या गहरे पानी में फंसें, तब हमको पार लगा लो। तुम बड़े बलवान की बेटी हो। जो लोग हमे मारना चाहते हैं, उनसे बचा लो। हमारे बच्चों को तकलीफ न हो।
Mantra 12
अनेहो न उरुव्रज उरूचि वि प्रसर्तवे । कृधि तोकाय जीवसे ॥
हमें ऐसा रास्ता दो जो चौड़ा हो और जिसमें जल्दी न हो। तुम चमक रही हो, बहुत दूर तक। हमें आगे बढ़ने दो। हमारे बच्चे जीते रहें।
Mantra 13
ये मूर्धानः क्षितीनामदब्धासः स्वयशसः । व्रता रक्षन्ते अद्रुहः ॥
यह लोग दुनिया के ऊपर वाले हैं, सबसे बड़े। कोई इनको धोखा नहीं दे सकता। इनकी अपनी बड़ाई है। यह नियम बनाके रखते हैं और धोखा नहीं देते।
Mantra 14
ते न आस्नो वृकाणामादित्यासो मुमोचत । स्तेनं बद्धमिवादिते ॥
आदित्य देवता हमें भेड़िये के दाँत से बचाएँ। जैसे कोई चोर को बंधन से आज़ाद करता है, वैसे ही अदिति, यह देवता हमें भी रिश्तों से मुक्त करें।
Mantra 15
अपो षु ण इयं शरुरादित्या अप दुर्मतिः । अस्मदेत्वजघ्नुषी ॥
आदित्य देवता, हमसे यह बुरी नज़र और बुरी सोच दूर कर दो। जो चीज़ हमारे ऊपर वार करती है, वो हमसे जाती रहे।
Mantra 16
शश्वद्धि वः सुदानव आदित्या ऊतिभिर्वयम् । पुरा नूनं बुभुज्महे ॥
आदित्य देवता, तुम लोग बहुत अच्छे हो। पहले भी तुमने हमारी मदद की, अभी भी कर रहे हो। तुम्हारी सहायता हमेशा से है।
Mantra 17
शश्वन्तं हि प्रचेतसः प्रतियन्तं चिदेनसः । देवाः कृणुथ जीवसे ॥
हे देवता, तुम लोग समझदार हो। हमें ज़िंदा रहने लायक बना दो। अगर हमसे कोई गलती भी हो जाए, तो भी हमें सही रास्ते पर ला देना।
Mantra 18
तत्सु नो नव्यं सन्यस आदित्या यन्मुमोचति । बन्धाद्बद्धमिवादिते ॥
आदित्य देवता, यह तुम्हारी नयी कृपा है। अदिति, तुम बाँधे हुए इंसान को रिश्तों से आज़ाद करती हो। जैसे कोई बाँधी हुई चीज़ को खोलता है।
Mantra 19
नास्माकमस्ति तत्तर आदित्यासो अतिष्कदे । यूयमस्मभ्यं मृळत ॥
आदित्य देवताओं से हमारी यही बात है, हमारे लिए उनसे बड़ा कोई नहीं है। जब बड़ा खतरा आ जाए, तब हमारे ऊपर दया करो। हमें सुरक्षित रखना आपका काम है।
Mantra 20
मा नो हेतिर्विवस्वत आदित्याः कृत्रिमा शरुः । पुरा नु जरसो वधीत् ॥
आदित्य देवता, विवस्वत का अस्त्र हम पे लगे, यह मत होने दो। कोई भी बना-बनाया बाला हम पे आए, वो भी नहीं। हम मरने से पहले, बुढ़ापे से पहले, ऐसे में मत मारो।
Mantra 21
वि षु द्वेषो व्यंहतिमादित्यासो वि संहितम् । विष्वग्वि वृहता रपः ॥
आदित्य देवता, नफरत और तकलीफ को दूर भाग जाओ। जो भी बांधा हुआ है, उसे तोड़ दो। जो भी दबाके रखा है, उसे चारों तरफ फैला दो।
A direct appeal for the protective ‘royal powers’ of the Ādityas, praised as gracious and favorable to the seeker’s aim.
The hymn intensifies into practical safeguarding—crossing perilous conditions, warding off would-be harmers, and preserving the ‘toka’ (child/lineage/continuity).
A decisive protective turn: the Ādityas are asked to actively dismantle what is ‘knotted/compacted’—the tight formations of distress and hostility.
It closes with a broad apotropaic sweep: hatred, distress, and oppressive affliction are scattered in all directions, restoring space for ṛta and well-being.
sumṛḷīkān abhiṣṭaye
mākis tokasya no riṣat
vi ṣu dveṣo vy aṃhatim
The Ādityas are a group of deities linked with the sun and with moral-cosmic law (ṛta). They include figures like Varuṇa, Mitra, and Aryaman, invoked here together as protectors.
The hymn asks for Āditya protection—safe passage through dangers, safeguarding of one’s child/lineage (toka), and the removal of hatred, distress, and oppressive affliction.
Because they are seen as sovereign guardians of order: they rule by truth and law, restrain harmful forces, and ensure stability in the world and in human life.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
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