Opening the text

Sukta 7.67
Vasiṣṭha
Aśvins (Nāsatyā)
Triṣṭubh
In this Triṣṭubh hymn, Vasiṣṭha calls the Aśvins to arrive swiftly on their chariot and accept the offering, addressing them with the intimacy of a son speaking to his parents. The poet asks for protection of the inner faculties, fertile and unharmed creative power, prosperity in children and lineage, and a god-guided path marked by well-being (svasti). The sukta concludes with a direct plea for treasures, the ripening of seers, and continual safeguarding by the Aśvins’ beneficent presence.
Mantra 1
प्रति वां रथं नृपती जरध्यै हविष्मता मनसा यज्ञियेन । यो वां दूतो न धिष्ण्यावजीगरच्छा सूनुर्न पितरा विवक्मि ॥
आप दोनों के रथ की तरफ मैं अपना मन लगाता हूँ। पूजा के लिए तय्यार हूँ। मैं आपके पास पैग़हाम ले कर आया हूँ, जैसे बेटा बाप के पास जाता है। आपसे सीधा बात करता हूँ।
Mantra 2
अशोच्यग्निः समिधानो अस्मे उपो अदृश्रन्तमसश्चिदन्ताः । अचेति केतुरुषसः पुरस्ताच्छ्रिये दिवो दुहितुर्जायमानः ॥
अग्नि चमक उठा है। हमारे लिए जल गया है। अंधेरा भी साफ दिखने लगा है। सुबह की पहचान नज़र आ रही है। यह आसमान की बेटी के लिए है।
Mantra 3
अभि वां नूनमश्विना सुहोता स्तोमैः सिषक्ति नासत्या विवक्वान् । पूर्वीभिर्यातं पथ्याभिरर्वाक्स्वर्विदा वसुमता रथेन ॥
पंडित अब अश्विन भाइयों के लिए गा रहा है। वो उन्हे बुला रहा है, नासत्या कहते हैं उन्हे। आप पुराने रास्ते से आओ, सीधा यहाँ। आपकी रथ में खज़ाना है और वो सूरज की दुनिया तक पहुँचती है।
Mantra 4
अवोर्वां नूनमश्विना युवाकुर्हुवे यद्वां सुते माध्वी वसूयुः । आ वां वहन्तु स्थविरासो अश्वाः पिबाथो अस्मे सुषुता मधूनि ॥
मैं अश्विन भाइयों को बुला रहा हूँ, मदद के लिए। जब मीठा पानी भगवान के लिए निकाला जाता है, तब आओ। तुम्हारे घोड़े मज़बूत हैं, वो तुम्हे ले कर आओ। यहाँ बैठ के मीठा पानी पियो।
Mantra 5
प्राचीमु देवाश्विना धियं मेऽमृध्रां सातये कृतं वसूयुम् । विश्वा अविष्टं वाज आ पुरंधीस्ता नः शक्तं शचीपती शचीभिः ॥
अश्विन भगवान, मेरी सोच को साफ रखना। मैं चाहता हूँ कि मुझे अच्छा मिले, कोई तकलीफ न हो। हमारे पास जो शक्ति है, उसको बचाओ। तुम दोनों शक्ति के मालिक हो, हमारे काम आओ।
Mantra 6
अविष्टं धीष्वश्विना न आसु प्रजावद्रेतो अह्रयं नो अस्तु । आ वां तोके तनये तूतुजानाः सुरत्नासो देववीतिं गमेम ॥
अश्विन भगवान, हमारे अंदर जो शक्ति है, उसको सेफ रखना। हमारी औलाद में कोई दोष न आए, वो मज़बूत हो। तुम्हारी तरफ बढ़ते रहो, बच्चों के साथ। भगवान की तरफ ले जाने वाला रास्ता हमें मिल जाए।
Mantra 7
एष स्य वां पूर्वगत्वेव सख्ये निधिर्हितो माध्वी रातो अस्मे । अहेळता मनसा यातमर्वागश्नन्ता हव्यं मानुषीषु विक्षु ॥
यह तो तुम्हारा पुराना खज़ाना है, दोस्ती में रखा हुआ। तुमने हमें मीठा पानी दिया है। गुस्सा छोड़ के आओ, मन साफ करके। लोगों के बीच बैठ के यह भोग खाओ।
Mantra 8
एकस्मिन्योगे भुरणा समाने परि वां सप्त स्रवतो रथो गात् । न वायन्ति सुभ्वो देवयुक्ता ये वां धूर्षु तरणयो वहन्ति ॥
एक बार में, एक ही ताकत से, तुम्हारी रथ सात नदियों के पास जाती है। जो घोड़े तुम्हारी रथ में जुड़े हैं, वो थके नहीं। वो तेज़ हैं और तुम्हे ले के चलते हैं।
Mantra 9
असश्चता मघवद्भ्यो हि भूतं ये राया मघदेयं जुनन्ति । प्र ये बन्धुं सूनृताभिस्तिरन्ते गव्या पृञ्चन्तो अश्व्या मघानि ॥
जो लोग देते हैं, उनके साथ रहो। यह लोग जो देते हैं, उससे दूसरों को भी देने की सोच रखते हैं। सच बोल के रिश्ता निभाते हैं। अपनी बरकत और ताकत को भी बांटते हैं।
Mantra 10
नू मे हवमा शृणुतं युवाना यासिष्टं वर्तिरश्विनाविरावत् । धत्तं रत्नानि जरतं च सूरीन्यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः ॥
अब मेरी सुनो, अश्विन भाई। सही रास्ते आओ, जहाँ खाना-पानी और खुशी मिले। हमें अच्छी चीज़ें दो। जो लोग भगवान को जानते हैं, उनको भी देखो। हमेशा हमारी रक्षा करो।
The Aśvins (Nāsatyā) are youthful twin deities known for swift help, healing, rescue, and bringing prosperity—often invoked at dawn as they ‘arrive’ on their chariot.
It asks for quick arrival and acceptance of offerings, protection of the inner faculties (dhī), an unharmed and fruitful creative power (reto), prosperity in children and lineage, and continual well-being (svasti).
Devavīti means a “god-led path” or mode of living guided by divine help—here, the Aśvins’ guidance that leads to safety, right movement, and enjoyment of their beneficence.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
A free sign-in with Google or Apple keeps your chat saved across web and the app.
Read Rig Veda in the Vedapath app
Scan the QR code to open this directly in the app, with word-by-word meanings, Sanskrit recitation where available, and more.