Opening the text

Sukta 1.62
Gautama (Gotamāsaḥ)
Indra (with Angiras lineage imagery)
Triṣṭubh
This Triṣṭubh hymn offers a crafted “new” brahman (sacred formulation) to Indra, praising him in the Angirasa manner as the widely-heard lord of inspired speech and victorious force. It evokes Angiras-lineage imagery—seerly praise, cosmic upholding of heaven and earth, and Indra’s radiant chariot-team—to secure right guidance, protection, and dawn-borne inspiration for the worshippers.
Mantra 1
प्र मन्महे शवसानाय शूषमाङ्गूषं गिर्वणसे अङ्गिरस्वत् । सुवृक्तिभिः स्तुवत ऋग्मियायार्चामार्कं नरे विश्रुताय ॥
हम इंद्र के बारे में सोचते हैं जो बहुत पावरफुल हैं। अंगिरस रिशि की तरह हम भी प्रायर करते हैं। अच्छे वर्ड्स से हम इंद्र की तारीफ करते हैं। वो सुनने वाला है, इसलिए हमारी आवाज़ तक पहुँचती है।
Mantra 2
प्र वो महे महि नमो भरध्वमाङ्गूष्यं शवसानाय साम । येना नः पूर्वे पितरः पदज्ञा अर्चन्तो अङ्गिरसो गा अविन्दन् ॥
बड़े भगवान को बड़ा नमस्कार करो। अंगिरस रिशि की तरह प्रायर करो। पहले के रिशि यही रास्ते से गए थे। उन्होंने ध्यान किया और ज्ञान पाया। वो लाइट वाले थे जो अंधेरा दूर करके रास्ता दिखाते हैं।
Mantra 3
इन्द्रस्याङ्गिरसां चेष्टौ विदत्सरमा तनयाय धासिम् । बृहस्पतिर्भिनदद्रिं विदद्गाः समुस्रियाभिर्वावशन्त नरः ॥
इंद्र और अंगिरस रिशि ने मिलकर काम किया। सरमा नाम की कुत्ती ने छुपा हुआ खज़ाना ढूँढ लिया। बृहस्पति ने पहाड़ तोड़ दिया और अंदर से ज्ञान निकाला। लोगों ने उस लाइट को देखा और खुश हो गए।
Mantra 4
स सुष्टुभा स स्तुभा सप्त विप्रैः स्वरेणाद्रिं स्वर्यो नवग्वैः । सरण्युभिः फलिगमिन्द्र शक्र वलं रवेण दरयो दशग्वैः ॥
इंद्र ने सबसे अच्छा गाना गाके एक पत्थर तोड़ दिया। साथ में सात रिशि थे और एक ऐसी आवाज़ थी जो रोशनी लाई। नवग्व नाम के लोग भी थे जो उजिया दुनिया ढूंढ रहे थे। इंद्र, जो बहुत ताकतवाला है, उसने जल्दी-चल्दी शक्तियों का इस्तेमाल किया। उसने चिल्लाके वल को तोड़ दिया, दसग्व लोग भी साथ थे।
Mantra 5
गृणानो अङ्गिरोभिर्दस्म वि वरुषसा सूर्येण गोभिरन्धः । वि भूम्या अप्रथय इन्द्र सानु दिवो रज उपरमस्तभायः ॥
इंद्र अंगिरस रिशियों के साथ गाना गा रहा था। वो अंधेरा दूर कर दिया, सुबह की रोशनी से, सूरज से, और रोशनी वाली गायों से। उसने धरती से पहाड़ की चोटी को फैला दिया। आसमान का हिस्सा ऊपर से पक्का कर दिया।
Mantra 6
तदु प्रयक्षतममस्य कर्म दस्मस्य चारुतममस्ति दंसः । उपह्वरे यदुपरा अपिन्वन्मध्वर्णसो नद्यश्चतस्रः ॥
यह इंद्र का सबसे बड़ा काम है जो सामने दिख रहा है। उसकी ताकत सबसे अच्छी है। जब ऊपर वाली शक्तियां फैली, तो चार नदियां भी बहने लगीं। उनमें शहद जैसा मीठा पानी था।
Mantra 7
द्विता वि वव्रे सनजा सनीळे अयास्यः स्तवमानेभिरर्कैः । भगो न मेने परमे व्योमन्नधारयद्रोदसी सुदंसाः ॥
इंद्र दो बार आसमान खोला, वो बहुत पुराना है, वहीं रहता है। लोग उसकी तारीफ के गाना गाते हैं। वो भगवान जैसा बनके सबसे ऊपर आसमान में बैठ गया। उसने दोनों दुनिया को संभाल के रखा।
Mantra 8
सनाद्दिवं परि भूमा विरूपे पुनर्भुवा युवती स्वेभिरेवैः । कृष्णेभिरक्तोषा रुशद्भिर्वपुर्भिरा चरतो अन्यान्या ॥
पुराने ज़माने से आसमान और धरती अलग-अलग रूप में हैं। दोनों नए बनते रहते हैं, जैसे दो जवान लड़कियां अपनी मर्ज़ी से चलती हैं। रात अंधेरे से ढाकी होती है, और सुबह रोशनी लेकर आती है। दोनों एक के बाद एक आती हैं।
Mantra 9
सनेमि सख्यं स्वपस्यमानः सूनुर्दाधार शवसा सुदंसाः । आमासु चिद्दधिषे पक्वमन्तः पयः कृष्णासु रुशद्रोहिणीषु ॥
यह मंत्र इंद्र की ताकत की बात करता है। वो अपने काम में बहुत स्किल्ड है और दोस्ती ढूंढता है। वो एक ऐसा बेटा है जो अपनी ताकत से सबको संभाल के रखता है। कच्ची चीज़ों में भी वो पक्का पैदा कर देता है। अंधेरी चीज़ों में भी रोशनी दिख जाती है।
Mantra 10
सनात्सनीळा अवनीरवाता व्रता रक्षन्ते अमृताः सहोभिः । पुरू सहस्रा जनयो न पत्नीर्दुवस्यन्ति स्वसारो अह्रयाणम् ॥
यह मंत्र बताता है कि देवता पुराने ज़माने से एक साथ रहते हैं। वो अपने नियम को पक्का करके रखते हैं। हज़ारों लोग उनकी सेवा करते हैं। जैसे पत्नियाँ और बहनें अपने घर वाले की सेवा करती हैं, वैसे ही यह लोग भी करते हैं। वो कभी थकते नहीं हैं।
Mantra 11
सनायुवो नमसा नव्यो अर्कैर्वसूयवो मतयो दस्म दद्रुः । पतिं न पत्नीरुशतीरुशन्तं स्पृशन्ति त्वा शवसावन्मनीषाः ॥
यह मंत्र इंद्र को समझाता है कि वो पुराना है पर फिर भी नया है। लोग नए गीत और नमन के साथ उसके पास आते हैं। वो समझते हैं कि इंद्र जो चाहता है वो कर सकता है। जैसे पत्नियाँ अपने पति को छूती हैं, वैसे ही यह भाव उस तक पहुँचते हैं। वो ताकत में बहुत स्ट्रॉन्ग है।
Mantra 12
सनादेव तव रायो गभस्तौ न क्षीयन्ते नोप दस्यन्ति दस्म । द्युमाँ असि क्रतुमाँ इन्द्र धीरः शिक्षा शचीवस्तव नः शचीभिः ॥
यह मंत्र कहता है कि इंद्र के पास धन बहुत पुराना है। उसका धन कभी खत्म नहीं होता। वो रोशनी से भरा है और इरादा पक्का रखता है। वो समझदार है और अपनी ताकत से काम करता है। वो हमें सिखाता है कि सही काम कैसे करते हैं।
Mantra 13
सनायते गोतम इन्द्र नव्यमतक्षद्ब्रह्म हरियोजनाय । सुनीथाय नः शवसान नोधाः प्रातर्मक्षू धियावसुर्जगम्यात् ॥
यह मंत्र गोतम ऋषि की बात करता है। उन्होंने इंद्र के लिए नया मंत्र बनाया है। यह मंत्र इंद्र के घोड़े जोड़ने के लिए है जो रोशनी में चलें। नोधा नाम का ऋषि सुबह जल्दी आता है। वो अपनी बुद्धि से धन लाता है और हमें सही रास्ता दिखाता है।
It is a hymn of praise to Indra that presents the poet’s speech as a carefully crafted offering, while asking Indra for strength, protection, and right guidance—especially at dawn.
The hymn aligns its praise with the revered Angirasa seer-tradition, suggesting that inspired speech and seerly “crafting” of mantra is itself a power that draws Indra and opens higher vision.
It means the seer consciously composes a fresh, potent sacred formulation (brahman/mantra) to ‘yoke’ Indra’s power—inviting the deity to arrive and act effectively for the worshippers.
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