
Sukta 7.35
Vasiṣṭha (traditional for 7.35 Śaṃ no devīr… type benedictions in Mandala 7 context; exact attribution may vary by Anukramaṇī)
Multiple paired deities (Indra-Agni; Indra-Varuṇa; Indra-Soma; Indra-Pūṣan)
Triṣṭubh (probable; requires metrical verification)
This hymn is a broad śānti (peace) and svasti (well-being) benediction that invokes many divine pairs—especially Indra joined with other powers—to secure protection, right movement, and victory for the worshippers. It expands from ritual allies (Indra–Agni, Indra–Varuṇa, Indra–Soma, Indra–Pūṣan) to cosmic supports such as Sūrya, the quarters, mountains, rivers, and waters, asking that all directions of life become auspicious. The closing prayer gathers “all sacrifice-worthy immortals” to grant wide-going felicity and continual safeguarding.
Mantra 1
शं न इन्द्राग्नी भवतामवोभिः शं न इन्द्रावरुणा रातहव्या । शमिन्द्रासोमा सुविताय शं योः शं न इन्द्रापूषणा वाजसातौ ॥
इंद्र और अग्नि हमारे मदद करने वाले हों। इंद्र और वरुण हमारी पूजा को पक्का करें। इंद्र और सोम हमें सही रास्ता दिखायें। इंद्र और पूषन हमें जीत दिलायें। सब शांति हो।
Mantra 2
शं नो भगः शमु नः शंसो अस्तु शं नः पुरंधिः शमु सन्तु रायः । शं नः सत्यस्य सुयमस्य शंसः शं नो अर्यमा पुरुजातो अस्तु ॥
भग हमारे साथ हों। हमारी बात अच्छी लगे। पुरंधि हमें खुश रखे। पैसा और समझ हमारे पास आये। सच और सही काम की बात चले। अर्यमन सब ठीक करे।
Mantra 3
शं नो धाता शमु धर्ता नो अस्तु शं न उरूची भवतु स्वधाभिः । शं रोदसी बृहती शं नो अद्रिः शं नो देवानां सुहवानि सन्तु ॥
धाता और धरता हमें संभालें। वो ताकत अपने काम से चमके। दोनों बड़ी दुनिया अच्छी हो। पहाड़ हमारे लिए अच्छा हो। भगवान को हमारी पूजा पसंद आये।
Mantra 4
शं नो अग्निर्ज्योतिरनीको अस्तु शं नो मित्रावरुणावश्विना शम् । शं नः सुकृतां सुकृतानि सन्तु शं न इषिरो अभि वातु वातः ॥
यह मंत्र शांति माँगता है। अग्नि ऐसे चमके जैसे रोशनी का चेहरा हो। मित्र और वरुण, अश्विन भाई साथ दें। हमारी अच्छी हरकतें काम आएँ। हवा साफ चले और हमें ठीक रखे।
Mantra 5
शं नो द्यावापृथिवी पूर्वहूतौ शमन्तरिक्षं दृशये नो अस्तु । शं न ओषधीर्वनिनो भवन्तु शं नो रजसस्पतिरस्तु जिष्णुः ॥
आसमान और धरती हमें शांति दें। यह दोनों सबसे पहले बुलाए जाते हैं। बीच का आसमान साफ दिखे। पेड़-पौधों और जंगल की शक्तियाँ हमारे साथ हों। जगह का मालिक हमें जीता रखे और शांति में रखे।
Mantra 6
शं न इन्द्रो वसुभिर्देवो अस्तु शमादित्येभिर्वरुणः सुशंसः । शं नो रुद्रो रुद्रेभिर्जलाषः शं नस्त्वष्टा ग्नाभिरिह शृणोतु ॥
इंद्र देवता वसु गण के साथ हमें शांति दें। वरुण, आदित्य के साथ आशीर्वाद दें। रुद्र भी अपने गण के साथ हमें ठीक रखें। त्वष्ट्र देवी माताओं के साथ हमारी सुन लें।
Mantra 7
शं नः सोमो भवतु ब्रह्म शं नः शं नो ग्रावाणः शमु सन्तु यज्ञाः । शं नः स्वरूणां मितयो भवन्तु शं नः प्रस्वः शम्वस्तु वेदिः ॥
सोम देव हमें सही बात बोलें। यज्ञ के पत्थर और सारी क्रिया शांति से चलें। देवताओं की शक्तियाँ सही नाप में काम करें। हवा साफ चले और यज्ञ की वेदी शांति में बनी रहे।
Mantra 8
शं नः सूर्य उरुचक्षा उदेतु शं नश्चतस्रः प्रदिशो भवन्तु । शं नः पर्वता ध्रुवयो भवन्तु शं नः सिन्धवः शमु सन्त्वापः ॥
सूरज चमक के उठे और हमें शांति दें। चारों दिशाओं में शांति हो। पहाड़ ऐसे खड़े रहें जैसे पक्के हो। नदियाँ और पानी सब शांति में रहें।
Mantra 9
शं नो अदितिर्भवतु व्रतेभिः शं नो भवन्तु मरुतः स्वर्काः । शं नो विष्णुः शमु पूषा नो अस्तु शं नो भवित्रं शम्वस्तु वायुः ॥
यह मंत्र सबसे शांति माँगता है। अदिति हमारे लिए शांति लाए, अपने नियम से। मरुत देवता जो चमकते हैं, वो भी शांति लाए। विष्णु हमारे लिए शांति हो। पूषन देवता भी शांति लाए। हमारे आने वाला कल भी शांति में हो। वायु देवता भी शांति दे।
Mantra 10
शं नो देवः सविता त्रायमाणः शं नो भवन्तूषसो विभातीः । शं नः पर्जन्यो भवतु प्रजाभ्यः शं नः क्षेत्रस्य पतिरस्तु शम्भुः ॥
सविता देवता जो हमें सही रास्ते पे ले चलते हैं, वो शांति दे। सुबह की रोशनी भी शांति लाए। पर्जन्य देवता जो बारिश लाते हैं, वो हमारे बच्चों और परिवार के लिए शांति हो। खेतों के मालिक भी शांति दें, जो लोगों का भला करते हैं।
Mantra 11
शं नो देवा विश्वदेवा भवन्तु शं सरस्वती सह धीभिरस्तु । शमभिषाचः शमु रातिषाचः शं नो दिव्याः पार्थिवाः शं नो अप्याः ॥
सब देवता मिलकर हमें शांति दें। सरस्वती माता हमारे दिमाग और समझ के साथ रहे। जो ताकत हमें दबाए, वो भी शांति हो। जो कुछ देते हैं, वो भी शांति दें। आसमान के देवता, ज़मीन के देवता, और पानी के देवता सब शांति दें।
Mantra 12
शं नः सत्यस्य पतयो भवन्तु शं नो अर्वन्तः शमु सन्तु गावः । शं न ऋभवः सुकृतः सुहस्ताः शं नो भवन्तु पितरो हवेषु ॥
सच्चाई के मालिक भी हमारे लिए शांति हो। घोड़े जो तेज़ दौड़ते हैं, वो भी शांति में रहें। गाय और रोशनी भी शांति दे। रिभु देवता जो काम में माहिर हैं, वो भी शांति दें। हमारे पूर्वज जब हम उन्हे याद करते हैं, वो भी शांति में रहें।
Mantra 13
शं नो अज एकपाद्देवो अस्तु शं नोऽहिर्बुध्न्यः शं समुद्रः । शं नो अपां नपात्पेरुरस्तु शं नः पृश्निर्भवतु देवगोपा ॥
अज एकपद देवता भी शांति दें। अहि बुध्न्य जो नीचे रहते हैं, वो भी शांति हो। समुंदर भी शांति दे। अपाम नपात जो पानी में चमकते हैं, वो भी शांति हो। पृश्नि देवी जो देवताओं की रक्षा करती हैं, वो भी शांति दें।
Mantra 14
आदित्या रुद्रा वसवो जुषन्तेदं ब्रह्म क्रियमाणं नवीयः । शृण्वन्तु नो दिव्याः पार्थिवासो गोजाता उत ये यज्ञियासः ॥
आदित्य, रुद्र और वसु, यह तीन ग्रुप देवता हैं। यह मंत्र उन्हे बुलाता है कि वो इस नए पूजा में खुश हों। आसमान वाली शक्तियाँ और धरती वाली शक्तियाँ, सब हमारी सुन लें। यह वो हैं जो रोशनी से पैदा हुए हैं और यज्ञ के लायक हैं।
Mantra 15
ये देवानां यज्ञिया यज्ञियानां मनोर्यजत्रा अमृता ऋतज्ञाः । ते नो रासन्तामुरुगायमद्य यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः ॥
जो देवता यज्ञ के लायक हैं, सबसे ज़्यादा लायक, वो अमर हैं और सच्चाई जानते हैं। आज हमें बड़ा आशीर्वाद दें। आप हमेशा अपनी शक्ति से हमें रक्षा करो और भला करते रहो।
A direct petition for peace and help through divine pairs, led by Indra joined with Agni, Varuṇa, Soma, and Pūṣan (RV 7.35.1).
The prayer widens from ritual efficacy and victory to a total-field blessing, extending peace to the Sun, the four directions, and the stable features of the world—mountains, rivers, and waters (e.g., RV 7.35.8).
A comprehensive cosmic pacification in which every quarter and sustaining element is asked to become śaṃ (peace) for the worshipper, implying alignment of human life with ṛta.
The hymn closes by addressing all sacrifice-worthy immortals together, asking for “wide-going” felicity and continual protection through svasti powers (RV 7.35.15).
śaṃ na indrāgnī … śaṃ na indrāpūṣaṇā
śaṃ naḥ sūrya urucakṣā ud etu
yūyaṃ pāta svastibhiḥ sadā naḥ
It is a śānti and svasti hymn: it asks for peace, protection, and smooth progress in life by invoking divine pairs and the supportive powers of the whole cosmos.
The pairs express complementary powers working together—strength with ritual fire, power with moral order (ṛta), inspiration with guidance—so the blessing covers every need from many angles.
Yes. Even without a full ritual, it can be recited as an auspicious prayer at dawn, before travel, or at the start of important work, since its focus is universal peace and well-being.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
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