Opening the text

Sukta 7.36
Vasiṣṭha (opening of RV 7.36, Vasiṣṭha cycle)
Agni (with Sūrya as supporting power of illumination)
Triṣṭubh (typical for Agni hymns; cadence suggests triṣṭubh)
This hymn opens the Vasiṣṭha cycle by setting the rite within ṛta (cosmic order): inspired speech arises from the seat of Truth, Sūrya releases the “cows” of light, and Agni is kindled at the altar’s center. It praises Agni as the mediating flame who establishes clarity, vitality, and right relationship between gods and humans, while briefly widening the invocation to allied powers (notably Rudra, the Maruts, and Viṣṇu) for protection and increase. The overall purpose is to sanctify the sacrifice—speech, light, and fire working together—so that wellbeing, offspring, and expansive life-force are secured.
Mantra 1
प्र ब्रह्मैतु सदनादृतस्य वि रश्मिभिः ससृजे सूर्यो गाः । वि सानुना पृथिवी सस्र उर्वी पृथु प्रतीकमध्येधे अग्निः ॥
भगवान का शब्द उस जगह से निकले जहाँ सत्य बसता है। सूर्य अपनी किरणों से रोशनी के धन छोड़ा। धरती अपने पहाड़ियों के साथ फैल गई। अग्नि पूजा के बीच में जल उठा।
Mantra 2
इमां वां मित्रावरुणा सुवृक्तिमिषं न कृण्वे असुरा नवीयः । इनो वामन्यः पदवीरदब्धो जनं च मित्रो यतति ब्रुवाणः ॥
मित्र और वरुण, मैं आपके लिए यह अच्छा शब्द बना रहा हूँ, नया और ताज़ा। आप दोनों अंदर की शक्ति के मालिक हैं। एक रास्ता ढूँढने वाला है जो कभी गलत नहीं होता। मित्र लोगों को सही रास्ता दिखाता है और उन्हे ठीक रखता है।
Mantra 3
आ वातस्य ध्रजतो रन्त इत्या अपीपयन्त धेनवो न सूदाः । महो दिवः सदने जायमानोऽचिक्रदद्वृषभः सस्मिन्नूधन् ॥
हवा के झंडे की तरफ सब खुशी से जा रहे हैं। यह शक्तियाँ दूध देती हैं जैसे गायें, भरी हुई। आसमान के बड़े स्थान में पैदा होके, बैल की आवाज़ निकली। वो दूध निकाल रहा है जो रोशनी और पोषण देता है।
Mantra 4
गिरा य एता युनजद्धरी त इन्द्र प्रिया सुरथा शूर धायू । प्र यो मन्युं रिरिक्षतो मिनात्या सुक्रतुमर्यमणं ववृत्याम् ॥
जो शक्तियाँ इंद्र के लिए तैयार करता है, वो इंद्र के प्यारे घोड़े बन जाते हैं। यह दोनों शक्तियाँ चमकदार हैं और रथ में जुड़े हैं। इंद्र एक बहादुर है जो सबको संभालता है। जो यह शक्तियाँ जोड़ता है, वो गुस्से को हरा देता है जो हमे तकलीफ देना चाहता है। वो हमे अर्यमन की तरफ ले जाता है जो सही काम करता है और सही फैसला लेता है।
Mantra 5
यजन्ते अस्य सख्यं वयश्च नमस्विनः स्व ऋतस्य धामन् । वि पृक्षो बाबधे नृभिः स्तवान इदं नमो रुद्राय प्रेष्ठम् ॥
जो लोग भगवान की पूजा करते हैं, वो उसकी दोस्ती और उसकी शक्ति को अपने घर में मानते हैं। यह सब सत के घर में होता है। जब लोग उसकी तारीफ करते हैं, वो शक्ति फैलने लगती है। यह रुद्र के लिए सबसे प्यारी पूजा है। रुद्र वो शक्ति है जो इंसान को जाग्रत रखती है।
Mantra 6
आ यत्साकं यशसो वावशानाः सरस्वती सप्तथी सिन्धुमाता । याः सुष्वयन्त सुदुघाः सुधारा अभि स्वेन पयसा पीप्यानाः ॥
जब यह सब नदियाँ साथ में आगे बढ़ती हैं, सरस्वती उनमें सबसे बड़ी है। यह सात रस्तों वाली नदी है और बाकी नदियों की माँ है। यह नदियाँ ऐसे हैं जैसे दूध देती हैं, और उनका पानी साफ बहता है। अपने ही पानी से भर के वो सबको पोषण देती हैं।
Mantra 7
उत त्ये नो मरुतो मन्दसाना धियं तोकं च वाजिनोऽवन्तु । मा नः परि ख्यदक्षरा चरन्त्यवीवृधन्युज्यं ते रयिं नः ॥
मरुत देवता खुश रहते हैं और अपनी खुशी में मग्न होते हैं। वो हमारे अच्छे विचारों की रक्षा करें, हमारे बच्चों की रक्षा करें, और हमारी शक्ति को बढ़ा दें। जो शक्ति कभी खत्म नहीं होती, वो हमे देख कर न छोड़ दे। बल्कि वो हमारे लिए धरम की धन बढ़ा दे जो भगवान के साथ चलती है।
Mantra 8
प्र वो महीमरमतिं कृणुध्वं प्र पूषणं विदथ्यं न वीरम् । भगं धियोऽवितारं नो अस्याः सातौ वाजं रातिषाचं पुरंधिम् ॥
अपने लिए बड़ी अरमति को बुलाओ जो सही मन वाली है और स्थिर है। पूषन को बुलाओ जो लोगों के बीच में काम करता है और रास्ता दिखाता है। भगवान के लिए हमारी सोच की रक्षा करें। हमारे काम में सफलता दे, धन दे, और पूरी तरह से पोषण दे।
Mantra 9
अच्छायं वो मरुतः श्लोक एत्वच्छा विष्णुं निषिक्तपामवोभिः । उत प्रजायै गृणते वयो धुर्यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः ॥
यह गाना सीधा तुम तक पहुँचे, मरुत्स के लिए। और विष्णु तक भी, पानी से धोका हुआ, तुम्हारी मदद से। जो गाता है उसकी औलाद के लिए, ज़िन्दगी बढ़ा दो। तुम हमेशा अपनी शान्ति से हमें बचाओ।
It establishes the sacrifice in ṛta (cosmic truth-order): inspired speech begins the rite, Sūrya brings illumination, and Agni is kindled at the altar as the priestly mediator who grants vitality and wellbeing.
In Vedic symbolism, “cows” often mean rays or lights. The hymn says Sūrya releases these lights, suggesting clarity and revelation that support Agni’s ritual work and the mind’s awakening.
Agni is the main deity, but the hymn briefly widens the invocation to allied powers for protection and increase. Rudra represents intense awakening and safeguarding, while the Maruts and Viṣṇu are asked to guard the singer and grant wellbeing and offspring.
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