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Sukta 8.35
Aśvins (invoked with the entire divine host as companions)
This hymn is an insistent dawn-invocation to the Aśvins, asking them to arrive swiftly and drink the pressed Soma in harmony with the entire divine host—Agni, Indra, the Ādityas, Rudras, Vasus, Dawn, and the Sun. It portrays the Aśvins as universal helpers who come with ṛta/dharma, respond to the singer’s call, and repay the sacrificer with “ratnāni” (treasures, plenitudes). The repeated summons (“ā yātam… ā gatam”) frames the sukta as a ritual welcome and a plea for protection, vitality, and prosperity.
Mantra 1
अग्निनेन्द्रेण वरुणेन विष्णुनादित्यै रुद्रैर्वसुभिः सचाभुवा । सजोषसा उषसा सूर्येण च सोमं पिबतमश्विना ॥
अग्नि और इन्द्र के साथ, वरुण और विष्णु के साथ, आदित्य, रुद्र और वसु सब के साथ मिलकर। सुबह और सूरज के साथ मिलके, अश्विन भाई, सोम पियो। यह खुशी अन्दर उतर के हमारे ज़िन्दगी में फैल जाए।
Mantra 2
विश्वाभिर्धीभिर्भुवनेन वाजिना दिवा पृथिव्याद्रिभिः सचाभुवा । सजोषसा उषसा सूर्येण च सोमं पिबतमश्विना ॥
अश्विन भाई, तुम सबके साथ आओ। आसमान और धरती, दोनों लेके आओ। सूर्य और उषा की रोशनी में, सोम पियो। यह सोम हमारे मन को खुश कर दे।
Mantra 3
विश्वैर्देवैस्त्रिभिरेकादशैरिहाद्भिर्मरुद्भिर्भृगुभिः सचाभुवा । सजोषसा उषसा सूर्येण च सोमं पिबतमश्विना ॥
अश्विन, सब देवता तुम्हारे साथ हैं। पानी और हवा के देवता भी साथ हैं। सूर्य और उषा के साथ मिलकर सोम पियो। हमारे अंदर भी ताकत आए।
Mantra 4
जुषेथां यज्ञं बोधतं हवस्य मे विश्वेह देवौ सवनाव गच्छतम् । सजोषसा उषसा सूर्येण चेषं नो वोळ्हमश्विना ॥
अश्विन, हमारी पूजा स्वीकारो। हमारी आवाज़ सुनो और यहाँ आओ। सोम का जूस निकल रहा है, उसको पियो। सूर्य और उषा के साथ आके हमारी मदद करो।
Mantra 5
स्तोमं जुषेथां युवशेव कन्यनां विश्वेह देवौ सवनाव गच्छतम् । सजोषसा उषसा सूर्येण चेषं नो वोळ्हमश्विना ॥
अश्विन, हमारी स्तुति सुनो। जैसे लड़के लड़कियों से खुश होते हैं, वैसे तुम भी खुश हो जाओ। सोम का जूस पियो और हमारी मदद के लिए आओ। सूर्य और उषा तुम्हारे साथ हैं।
Mantra 6
गिरो जुषेथामध्वरं जुषेथां विश्वेह देवौ सवनाव गच्छतम् । सजोषसा उषसा सूर्येण चेषं नो वोळ्हमश्विना ॥
अश्विन, हमारे गाने सुनो और यज्ञ का काम स्वीकारो। सोम का जूस निकल रहा है, उसको पियो। सूर्य और उषा के साथ मिलकर हमारी मदद लाओ। हमारे लिए कुछ अच्छा करो।
Mantra 7
हारिद्रवेव पतथो वनेदुप सोमं सुतं महिषेवाव गच्छथः । सजोषसा उषसा सूर्येण च त्रिर्वर्तिर्यातमश्विना ॥
अश्विनी कुमार, तुम दोनों पंछियों की तरह जंगल से उड़ कर आते हो। जैसे दो ताकतवर बैल, पिसदा हुआ सोम रस के पास आते हो। उषा और सूर्य के साथ मिलकर आओ। अपने रास्ते को तीन बार घुमा कर हमारे पास आओ।
Mantra 8
हंसाविव पतथो अध्वगाविव सोमं सुतं महिषेवाव गच्छथः । सजोषसा उषसा सूर्येण च त्रिर्वर्तिर्यातमश्विना ॥
अश्विनी कुमार, तुम दोनों हंस जैसे उड़ते हो, जैसे मुसाफिर रास्ते पर चलते हो। जैसे दो ताकतवर बैल, सोम रस के पास आते हो। उषा और सूर्य के साथ मिलकर आओ। अपने रास्ते को तीन बार घुमा कर हमारे पास आओ।
Mantra 9
श्येनाविव पतथो हव्यदातये सोमं सुतं महिषेवाव गच्छथः । सजोषसा उषसा सूर्येण च त्रिर्वर्तिर्यातमश्विना ॥
अश्विनी कुमार, तुम दोनों बाज़ की तरह हवा में उड़ते हो, भगवान के लिए सामग्री लेने। जैसे दो ताकतवर बैल, सोम रस के पास आते हो। उषा और सूर्य के साथ मिलकर आओ। अपने रास्ते को तीन बार घुमा कर हमारे पास आओ।
Mantra 10
पिबतं च तृप्णुतं चा च गच्छतं प्रजां च धत्तं द्रविणं च धत्तम् । सजोषसा उषसा सूर्येण चोर्जं नो धत्तमश्विना ॥
अश्विनी कुमार, तुम सोम रस पियो और खुश हो जाओ। हमारे पास आओ। हमें बच्चे दो और धन दो। उषा और सूर्य के साथ मिलकर हमें ताकत दो।
Mantra 11
जयतं च प्र स्तुतं च प्र चावतं प्रजां च धत्तं द्रविणं च धत्तम् । सजोषसा उषसा सूर्येण चोर्जं नो धत्तमश्विना ॥
अश्विनी कुमार, तुम जीतो और तुम्हारी जय हो। हमारे काम को आगे बढ़ाओ। हमें बच्चे दो और धन दो। उषा और सूर्य के साथ मिलकर हमें ताकत दो।
Mantra 12
हतं च शत्रून्यततं च मित्रिणः प्रजां च धत्तं द्रविणं च धत्तम् । सजोषसा उषसा सूर्येण चोर्जं नो धत्तमश्विना ॥
अश्विनी कुमार, दुश्मनों को मार डालो और दोस्तों को सही रास्ते पे लगा दो। हम में आगे बढ़ने की ताकत डालो और धन-दौलत भी भर दो। सुबह के साथ, सूरज के साथ मिलकर हमें ताकत दो।
Mantra 13
मित्रावरुणवन्ता उत धर्मवन्ता मरुत्वन्ता जरितुर्गच्छथो हवम् । सजोषसा उषसा सूर्येण चादित्यैर्यातमश्विना ॥
अश्विनी कुमार, तुम्हारे पास मित्र और वरुण की ताकत है। तुम धरम के साथ हो, मरुत देवताओं की शक्ति है तुम में। गायक के बुलावे पे आओ। सुबह और सूरज के साथ, आदित्य देवताओं को लेकर आओ।
Mantra 14
अङ्गिरस्वन्ता उत विष्णुवन्ता मरुत्वन्ता जरितुर्गच्छथो हवम् । सजोषसा उषसा सूर्येण चादित्यैर्यातमश्विना ॥
अश्विनी कुमार, तुम अंगिरस रिशियों की शक्ति लेकर आओ। विष्णु की ताकत भी है तुम में, मरुत देवताओं की शक्ति भी। गायक के बुलावे पे आओ। सुबह और सूरज के साथ, आदित्य देवताओं को लेकर आओ।
Mantra 15
ऋभुमन्ता वृषणा वाजवन्ता मरुत्वन्ता जरितुर्गच्छथो हवम् । सजोषसा उषसा सूर्येण चादित्यैर्यातमश्विना ॥
अश्विनी कुमार, तुम रिभु देवताओं जैसी कला रखते हो। तुम बलवान हो, विजय और ताकत तुम्हारे साथ है। मरुत देवताओं की शक्ति भी है तुम में। गायक के बुलावे पे आओ। सुबह और सूरज के साथ, आदित्य देवताओं को लेकर आओ।
Mantra 16
ब्रह्म जिन्वतमुत जिन्वतं धियो हतं रक्षांसि सेधतममीवाः । सजोषसा उषसा सूर्येण च सोमं सुन्वतो अश्विना ॥
अश्विनी कुमार, ब्रह्म शक्ति को बढ़ाओ और हमारे विचारों को भी आगे बढ़ाओ। बुरी ताकतों को मार डालो और बीमारियों को भगा दो। सुबह और सूरज के साथ मिलकर, सोम रस पियो जो हमने तुम्हारे लिए निकाला है।
Mantra 17
क्षत्रं जिन्वतमुत जिन्वतं नॄन्हतं रक्षांसि सेधतममीवाः । सजोषसा उषसा सूर्येण च सोमं सुन्वतो अश्विना ॥
अश्विनी कुमार, तुम राजा और वीर लोगों की ताकत बढ़ा दो। बुरी ताकें मारो और बिमारी भगाओ। सुबह और सूरज के साथ मिल के, जो सोम पीता है उसका प्याला पियो।
Mantra 18
धेनूर्जिन्वतमुत जिन्वतं विशो हतं रक्षांसि सेधतममीवाः । सजोषसा उषसा सूर्येण च सोमं सुन्वतो अश्विना ॥
अश्विनी कुमार, गायों का दूध बढ़ाओ और हमारे गाँव को आगे बढ़ाओ। अंधेरी ताकें मारो और बिमारी दूर भगाओ। सुबह और सूरज के साथ, जो सोम पीता है उसका प्याला पियो।
Mantra 19
अत्रेरिव शृणुतं पूर्व्यस्तुतिं श्यावाश्वस्य सुन्वतो मदच्युता । सजोषसा उषसा सूर्येण चाश्विना तिरोअह्न्यम् ॥
अश्विनी कुमार, जैसे अत्रि ऋषि ने पुराना गाना गाया था, वैसे ही श्यावाश्व का यह गाना सुनो। यह सोम पी रहा है। सुबह और सूरज के साथ आओ और दिन भर हमारे साथ रहो।
Mantra 20
सर्गाँ इव सृजतं सुष्टुतीरुप श्यावाश्वस्य सुन्वतो मदच्युता । सजोषसा उषसा सूर्येण चाश्विना तिरोअह्न्यम् ॥
अश्विनी कुमार, अच्छे गानों को बहता पानी की तरह बहा दो। श्यावाश्व सोम पी रहा है और तुम्हे बुला रहा है। सुबह और सूरज के साथ आओ और जल्दी मदद करो।
Mantra 21
रश्मीँरिव यच्छतमध्वराँ उप श्यावाश्वस्य सुन्वतो मदच्युता । सजोषसा उषसा सूर्येण चाश्विना तिरोअह्न्यम् ॥
अश्विनी कुमार, जैसे सूरज की किरण आती है, वैसे ही यज्ञ के पास आओ। श्यावाश्व सोम पी रहा है। सुबह और सूरज के साथ मिल के आओ और हमारी मदद करो।
Mantra 22
अर्वाग्रथं नि यच्छतं पिबतं सोम्यं मधु । आ यातमश्विना गतमवस्युर्वामहं हुवे धत्तं रत्नानि दाशुषे ॥
अश्विन भाइयों को बुलाया जा रहा है। अपनी रथ लेकर यहाँ आओ और यहीं रोक दो। सोम रस पीने का टाइम आ गया है, यह मीठा है। मैं तुम्हारी मदद माँग रहा हूँ, इसलिए तुम्हे पुकार रहा हूँ। जो यह पूजा कर रहा है, उसको ऐसे गिफ्ट्स दो जो उसके अंदर खुशियाँ लाएँ।
Mantra 23
नमोवाके प्रस्थिते अध्वरे नरा विवक्षणस्य पीतये । आ यातमश्विना गतमवस्युर्वामहं हुवे धत्तं रत्नानि दाशुषे ॥
यह पूजा शुरू हो चुकी है, लोग झुक के प्रणाम कर रहे हैं। अश्विन भाइयों, विवक्षण के लिए सोम रस पीने का टाइम है। आओ और पहुँच जाओ। मैं तुम्हारी मदद चाहता हूँ, इसलिए पुकार रहा हूँ। जो कुछ दे रहा है, उसको ऐसे खज़ाने दो जो उसे समझ में आएँ।
Mantra 24
स्वाहाकृतस्य तृम्पतं सुतस्य देवावन्धसः । आ यातमश्विना गतमवस्युर्वामहं हुवे धत्तं रत्नानि दाशुषे ॥
सोम रस तैयार है, स्वाहा बोल के दिया गया है। अश्विन भाइयों, इसको पीओ और खुश हो जाओ। आओ और पहुँच जाओ। मैं तुम्हारी मदद माँग रहा हूँ। जो यह सब कर रहा है, उसको ऐसे खज़ाने दो जो उसका पूरा करें।
The Aśvins are twin deities, swift like horsemen, closely linked with dawn. In RV 8.35 they are invited to arrive quickly, drink Soma, protect the worshipper, and grant prosperity.
It presents the Aśvins as coming in companionship with the whole divine order—Agni, Indra, Ādityas, Rudras, Vasus, Dawn, and the Sun—so the sacrifice is aligned with the full cosmic harmony (ṛta).
The poet asks them to come at dawn, accept the Soma offered with svāhā, give saving help, and bestow ‘ratnāni’—treasures or plenitudes—upon the sacrificer who offers.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
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