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Sukta 8.22
Aśvins (Nāsatyā)
This hymn is an urgent dawn-invocation to the Aśvins (Nāsatyā), calling their wondrous chariot to arrive swiftly with healing, protection, and abundance. It recalls their readiness for Sūryā and repeatedly asks them to mount the golden-seated car and bring “full nourishment” (iṣaḥ) and luminous wealth to the worshipper.
Mantra 1
ओ त्यमह्व आ रथमद्या दंसिष्ठमूतये । यमश्विना सुहवा रुद्रवर्तनी आ सूर्यायै तस्थथुः ॥
आज मैं उस रथ को बुला रहा हूँ जो सबसे ज़्यादा हेल्प करता है। अश्विन भाई, तुम दोनों जो रुद्र के रास्ते पर चलते हो, सूर्य के लिए उस रथ पर खड़े थे। अब उस रथ को लेकर हमारी हेल्प के लिए आओ।
Mantra 2
पूर्वायुषं सुहवं पुरुस्पृहं भुज्युं वाजेषु पूर्व्यम् । सचनावन्तं सुमतिभिः सोभरे विद्वेषसमनेहसम् ॥
वह पुराना देवता जो जीवन देता है, उसे बुलाना आसान है, सब उसको चाहते हैं। भुज्यु नाम का राजा जो बहुत पावरफुल था, उसकी हेल्प करते हैं। हम अपनी सोच से उसका साथ देते हैं। वह झगड़ा दूर करता है, कभी थकता नहीं।
Mantra 3
इह त्या पुरुभूतमा देवा नमोभिरश्विना । अर्वाचीना स्ववसे करामहे गन्तारा दाशुषो गृहम् ॥
हम अश्विन ब्रदर्स को यहाँ बुला रहे हैं। वो दोनों देवता हैं जो बहुत काम करते हैं। हम उनके सामने झुक के नमस्ते करते हैं। वो खुशी से हमारे पास आएँ। वो दान देने वाले के घर जाएँ।
Mantra 4
युवो रथस्य परि चक्रमीयत ईर्मान्यद्वामिषण्यति । अस्माँ अच्छा सुमतिर्वां शुभस्पती आ धेनुरिव धावतु ॥
अश्विन ब्रदर्स की रथ का पहिया घूमता है। उनकी शक्ति उसे आगे बढ़ाती है। उनकी कृपा हमारे पास आए, जैसे गाय अपने बच्चे के पास दौड़ती है। वो जल्दी आएँ और हमें पोषण दें।
Mantra 5
रथो यो वां त्रिवन्धुरो हिरण्याभीशुरश्विना । परि द्यावापृथिवी भूषति श्रुतस्तेन नासत्या गतम् ॥
अश्विन ब्रदर्स की रथ है जिसमे तीन लोग बैठ सकते हैं। उसके लगाम सोने के हैं। यह रथ आसमान और धरती के चारों तरफ घूमता है। लोग उसे सुनते हैं। इस रथ से अश्विन हमारे पास आएँ।
Mantra 6
दशस्यन्ता मनवे पूर्व्यं दिवि यवं वृकेण कर्षथः । ता वामद्य सुमतिभिः शुभस्पती अश्विना प्र स्तुवीमहि ॥
अश्विन ब्रदर्स ने मनु की इज्जत की। उन्होंने आसमान में से पुराना जौ निकाला, हल जोड़ के। आज हम उनकी तारीफ करते हैं। वो हमें सही सोच दें। उनकी वजह से हमें पुराना पोषण मिले।
Mantra 7
उप नो वाजिनीवसू यातमृतस्य पथिभिः । येभिस्तृक्षिं वृषणा त्रासदस्यवं महे क्षत्राय जिन्वथः ॥
अश्विन ब्रदर्स हमारे पास आएँ। वो सचाई के रास्ते से आएँ। जैसे उन्होंने त्रासदस्यु को बड़ा बनाया, वैसे ही हमें भी बड़ा बनाएँ। वो हमारे अंदर ताकत पैदा करें।
Mantra 8
अयं वामद्रिभिः सुतः सोमो नरा वृषण्वसू । आ यातं सोमपीतये पिबतं दाशुषो गृहे ॥
यह सोम रस पत्थरों से निचोड़ा गया है। अश्विन भाइयों, तुम दोनों बहुत बलवान हो। आओ और इस सोम को पियो। जो यह भेज रहा है, उसके घर आओ। वहाँ बैठ के पियो।
Mantra 9
आ हि रुहतमश्विना रथे कोशे हिरण्यये वृषण्वसू । युञ्जाथां पीवरीरिषः ॥
अश्विन भाई, अपने रथ पर चढ़ो। उस रथ में सोना लगा है, बहुत चमकदार है। तुम दोनों में बहुत ताकत है। अपने लिए अच्छी ताकत जोड़ो जो तुम्हे आगे ले जाए।
Mantra 10
याभिः पक्थमवथो याभिरध्रिगुं याभिर्बभ्रुं विजोषसम् । ताभिर्नो मक्षू तूयमश्विना गतं भिषज्यतं यदातुरम् ॥
पहले पक्थ की मदद की थी। फिर अध्रिगु की मदद की। फिर बभ्रु की मदद की जब वो दुखी था। उसी ताकत से जल्दी आओ हमारे पास। जो भी हम में बीमारी है, उसको ठीक करो।
Mantra 11
यदध्रिगावो अध्रिगू इदा चिदह्नो अश्विना हवामहे । वयं गीर्भिर्विपन्यवः ॥
अगर हम छोटे लोग भी हैं, तो भी अश्विन भाइयों को बुलाते हैं। अभी इस वक्त हम उन्हे पुकारते हैं। हम अपनी आवाज़ से उन्हे जगाते हैं। अपने गानों से उन्हे बुलाते हैं।
Mantra 12
ताभिरा यातं वृषणोप मे हवं विश्वप्सुं विश्ववार्यम् । इषा मंहिष्ठा पुरुभूतमा नरा याभिः क्रिविं वावृधुस्ताभिरा गतम् ॥
उसी ताकत से मेरे पास आओ। मैं तुम्हे बुला रहा हूँ। तुम्हारी ताकत सब जगह काम करती है। तुम सबको खुश करते हो। जिस ताकत से तुमने क्रिवि को बड़ा किया, उसी से हमारे पास आओ।
Mantra 13
ताविदा चिदहानां तावश्विना वन्दमान उप ब्रुवे । ता उ नमोभिरीमहे ॥
आज के दिन में भी मैं उन दोनों अश्विन भाइयों को पुकारता हूँ। मैं उनके सामने झुक के उनसे बात करता हूँ। हम उनकी हेल्प माँगते हैं, उनको रिस्पेक्ट देके। उनकी कृपा से ही काम बनता है।
Mantra 14
ताविद्दोषा ता उषसि शुभस्पती ता यामन्रुद्रवर्तनी । मा नो मर्ताय रिपवे वाजिनीवसू परो रुद्रावति ख्यतम् ॥
वो दोनों रात को भी होते हैं, सुबह को भी। उनकी चमक बहुत खूबसूरत है। वो अपना रास्ता तेज़ी से काट के चलते हैं। हे अश्विन भाई, तुम्हारे पास ताकत है, हमें दुश्मन के हाथ नहीं देना। बुरे लोगों से हमें दूर रखना, उनकी गुस्सा वाली हरकत से बचा लेना।
Mantra 15
आ सुग्म्याय सुग्म्यं प्राता रथेनाश्विना वा सक्षणी । हुवे पितेव सोभरी ॥
सुबह-सुबह मैं अश्विन भाइयों को बुलाता हूँ। उनका रथ है, वो आते हैं। मैं उनसे कहता हूँ, आओ और हमारा काम आसान करो। रास्ता साफ हो, हम सेफ पहुँचें। सोभरि नाम का रिशि उन्हे पुकारता है जैसे बेटा बाप को बुलाता है। वो उनकी गाइडेंस माँगता है।
Mantra 17
आ नो अश्वावदश्विना वर्तिर्यासिष्टं मधुपातमा नरा । गोमद्दस्रा हिरण्यवत् ॥
अश्विन भाई, हमारे पास आओ। तुम्हारा रथ बहुत ताकतवाला है, उसी रास्ते आओ। तुम मधु पियो, वो मीठा रस है। तुम दोनों बहुत बड़े हीरो हो। हमें धन दो, ग्यान दो, चमकदार चीज़ें लाओ। तुम्हारे पास सब कुछ है।
The Aśvins (Nāsatyā) are twin divine horsemen associated with dawn. In the Veda they are famous for swift help, healing, rescue, and bringing nourishment and prosperity.
The hymn asks the Aśvins to come quickly in their radiant chariot and grant protection, healing strength, abundant nourishment (iṣ), and prosperous increase described as “go-mat” and “hiraṇya-vat.”
It is especially fitting at dawn or at the beginning of a rite, journey, or healing prayer—times when the Aśvins’ swift, restoring aid is traditionally invoked.
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