Opening the text

Sukta 6.60
Bharadvāja (Bārhaspatya)
Indrāgnī (with Indra foregrounded as Vṛtra-slayer, Agni as co-power)
Triṣṭubh (probable for RV 6.60 opening; cadence suggests triṣṭubh)
RV 6.60 invokes the paired power Indrāgnī, with Indra foregrounded as Vṛtra-slayer and Agni as the co-operant force that makes the victory effective in the sacrifice. The hymn asks the twin heroes to come with their swift teams, accept the offerings, and pour into the worshipper strength, abundance, and victorious energy. It frames the yajña as the meeting-point where divine might (Indra) and sacred fire/illumination (Agni) unite to break obstruction and increase vāja (winning power).
Mantra 1
श्नथद्वृत्रमुत सनोति वाजमिन्द्रा यो अग्नी सहुरी सपर्यात् । इरज्यन्ता वसव्यस्य भूरेः सहस्तमा सहसा वाजयन्ता ॥
वोह वृक को तोड़ देता है और जीत की ताकत पा लेता है। यह इन्द्र है, जो अग्नि के साथ मिल के दो बड़े शक्ति हैं। दोनों अच्छे भाग्य के लिए कोशिश करते हैं। अपनी ताकत से जीत की शक्ति हमारे अंदर बढ़ा देते हैं।
Mantra 2
ता योधिष्टमभि गा इन्द्र नूनमपः स्वरुषसो अग्न ऊळ्हाः । दिशः स्वरुषस इन्द्र चित्रा अपो गा अग्ने युवसे नियुत्वान् ॥
इंद्र और अग्नि, अब लड़ाई शुरू करो। इंद्र, चमकते हुए गायों की तरफ जाओ। अग्नि, पानी और सवेरे की रोशनी की तरफ बढ़ो। इंद्र, चारों दिशाओं को सवेरे की रोशनी से चमका दो। अग्नि, अपने घोड़ों के साथ पानी और रोशनी को ले आओ। यह हमारे अंदर ताकत और जवानी लाएँ।
Mantra 3
आ वृत्रहणा वृत्रहभिः शुष्मैरिन्द्र यातं नमोभिरग्ने अर्वाक् । युवं राधोभिरकवेभिरिन्द्राग्ने अस्मे भवतमुत्तमेभिः ॥
इंद्र और अग्नि, हमारे पास आओ। तुम दोनों बड़े बलवान हो, दुश्मनों को हराने वाले हो। हम तुम्हारे सामने झुकते हैं। तुम दोनों हमें सही तोहफे दो, जो हमारे काम आएँ। तुम हमारे सबसे बड़े सहायक बनो।
Mantra 4
ता हुवे ययोरिदं पप्ने विश्वं पुरा कृतम् । इन्द्राग्नी न मर्धतः ॥
मैं उन दोनों को पुकारता हूँ। उनकी वजह से यह पूरा दुनिया बनी है, पुराने समय से। इंद्र और अग्नि कभी थकते नहीं, अपना काम करते रहते हैं।
Mantra 5
उग्रा विघनिना मृध इन्द्राग्नी हवामहे । ता नो मृळात ईदृशे ॥
हम इंद्र और अग्नि को पुकारते हैं। यह दोनों बड़े ताकतवर हैं, रास्ते में आने वाली रुकावटों को तोड़ने वाले हैं। आशा है कि वो हमारे हाल पर तरस खाएँ और हमारे काम आएँ।
Mantra 6
हतो वृत्राण्यार्या हतो दासानि सत्पती । हतो विश्वा अप द्विषः ॥
इन दोनों के हाथों दुश्मनी करने वाले सब कुछ टूट गए। बुरी ताकतें हार गई, दुश्मन मिट गए। सारी बुराई और नफरत खत्म हो गई।
Mantra 7
इन्द्राग्नी युवामिमेऽभि स्तोमा अनूषत । पिबतं शम्भुवा सुतम् ॥
इन्द्र और अग्नि, यह सब स्तुति गाने तुम्हारे लिए गाए जा रहे हैं। तुम दोनों के लिए सोम रस निकाला है जो सुख और शांति देता है। आओ और इसको पियो।
Mantra 8
या वां सन्ति पुरुस्पृहो नियुतो दाशुषे नरा । इन्द्राग्नी ताभिरा गतम् ॥
जो लोग दान करते हैं, उनके लिए तुम्हारी बहुत ताकतें हैं। इन्द्र और अग्नि, तुम दोनों बहुत बड़े हो। अपनी सारी ताकतों के साथ हमारे पास आओ।
Mantra 9
ताभिरा गच्छतं नरोपेदं सवनं सुतम् । इन्द्राग्नी सोमपीतये ॥
अपनी ताकतों के साथ यहाँ आओ, तुम दोनों बड़े वीर हो। सोम रस तैयार है, इस यज्ञ के लिए। आओ और इसको पियो, खुशी के लिए।
Mantra 10
तमीळिष्व यो अर्चिषा वना विश्वा परिष्वजत् । कृष्णा कृणोति जिह्वया ॥
उस भगवान की स्तुति करो जो आग के सारे जंगल को अपनी रोशनी में ले लेता है। उसकी जीभ से अंधेरा चमक उठता है, काम साफ हो जाता है।
Mantra 11
य इद्ध आविवासति सुम्नमिन्द्रस्य मर्त्यः । द्युम्नाय सुतरा अपः ॥
जब आग जल रही हो, जो इंसान इन्द्र की भक्ति करता है, उसे इन्द्र का आशीर्वाद मिलता है। वो ऐसे रास्ते मिल जाते हैं जिससे वो जीत के पास साफ पहुँच जाता है।
Mantra 12
ता नो वाजवतीरिष आशून्पिपृतमर्वतः । इन्द्रमग्निं च वोळ्हवे ॥
यह ताकतें हमारे लिए काम करें। तेज़ घोड़ों में ताकत भरें। इंद्र और अग्नि को लेकर आएं। वो दोनों हमारे काम में आगे बढ़ें।
Mantra 13
उभा वामिन्द्राग्नी आहुवध्या उभा राधसः सह मादयध्यै । उभा दाताराविषां रयीणामुभा वाजस्य सातये हुवे वाम् ॥
मैं इंद्र और अग्नि दोनों को बुलाता हूँ। आओ और मिलके खुश हो। तुम दोनों इंसान को ताकत और धन देते हो। मैं तुम दोनों को जीत के लिए बुलाता हूँ।
Mantra 14
आ नो गव्येभिरश्व्यैर्वसव्यैरुप गच्छतम् । सखायौ देवौ सख्याय शम्भुवेन्द्राग्नी ता हवामहे ॥
हमारे पास आओ। गायें और घोड़े और धन लेकर आओ। तुम दोनों हमारे दोस्त हो। दोस्ती निभाओ और शांति दो। इंद्र और अग्नि, हम तुम्हे बुलाते हैं।
Mantra 15
इन्द्राग्नी शृणुतं हवं यजमानस्य सुन्वतः । वीतं हव्यान्या गतं पिबतं सोम्यं मधु ॥
इंद्र और अग्नि, हमारी सुनो। जो यज्ञ कर रहा है और सोम रस निकाल रहा है, उसकी पुकार सुनो। हमारी भेंट लेके यहाँ आओ। सोम रस पियो, यह मीठा है।
Indrāgnī is the paired deity Indra and Agni addressed together. Indra leads as the breaker of obstruction (Vṛtra-slayer), while Agni supports as the sacrificial fire that carries offerings and awakens luminous power.
The hymn seeks victory over obstacles, increase of strength (vāja), and prosperity for the worshipper. It asks Indra-and-Agni to come to the sacrifice, accept the offerings, and empower the sacrificer.
Because this sukta fits Soma-pressing worship: the gods are invited to drink the Soma (somya madhu). In Vedic symbolism, Soma is delight and clarity that becomes strength when received by the gods and returned as blessing to the devotee.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
A free sign-in with Google or Apple keeps your chat saved across web and the app.
Read Rig Veda in the Vedapath app
Scan the QR code to open this directly in the app, with word-by-word meanings, Sanskrit recitation where available, and more.