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Sukta 4.38
Vāmadeva Gautama (traditional for RV 4.38)
Aśvins (Nāsatyā) as divine benefactors (dual 'vām')
Triṣṭubh (probable)
This hymn celebrates the swift, victorious power (Dadhikrā/Dadhikrāvan) moving at the head of chariots, scattering dust like streaming rays and bringing triumph and delight. It praises this radiant force as a giver of strength and expansion for the peoples, and asks it to fill the poet’s words with “honey” (inspiration, sweetness, success). The imagery blends martial speed, solar brilliance, and sacrificial auspiciousness into a single beneficent presence.
Mantra 1
उतो हि वां दात्रा सन्ति पूर्वा या पूरुभ्यस्त्रसदस्युर्नितोशे । क्षेत्रासां ददथुरुर्वरासां घनं दस्युभ्यो अभिभूतिमुग्रम् ॥
पहले भी तुमने लोगों को दिए थे। त्रसदस्यु नाम का राजा पुरु लोगों के लिए ज़मीन जीता। उसने दुश्मनों को हराया और उनकी ज़मीन ली। तुमने उसको खेत और खुला मैदान दिया। दुश्मनों के ऊपर बड़ी ताकत छा गई।
Mantra 2
उत वाजिनं पुरुनिष्षिध्वानं दधिक्रामु ददथुर्विश्वकृष्टिम् । ऋजिप्यं श्येनं प्रुषितप्सुमाशुं चर्कृत्यमर्यो नृपतिं न शूरम् ॥
तुमने दधिक्रवन नाम का घोड़ा दिया जो बहुत तेज़ था। वो हर जगह जाता है और सब लोग उसको जानते हैं। वो बाज़ की तरह सीधा उड़ता है, जल्दी से पहुँचता है। थकता नहीं, चलता रहता है। ऐसा है जैसे कोई बहादुर राजा हो।
Mantra 3
यं सीमनु प्रवतेव द्रवन्तं विश्वः पूरुर्मदति हर्षमाणः । पड्भिर्गृध्यन्तं मेधयुं न शूरं रथतुरं वातमिव ध्रजन्तम् ॥
लोग उसके पीछे भागते हैं खुशी से। वो नदी की तरह तेज़ चलता है। उसकी शक्ति लोग चाहते हैं। वो समझदार है और रथ से जीता है। हवा की तरह तेज़ है उसकी चाल।
Mantra 4
यः स्मारुन्धानो गध्या समत्सु सनुतरश्चरति गोषु गच्छन् । आविॠजीको विदथा निचिक्यत्तिरो अरतिं पर्याप आयोः ॥
युद्ध में वो पक्का रहता है और आगे बढ़ता है। वो चमकता है और सीधा चलता है। यज्ञ का काम समझता है। बुरी शक्ति को पार करके ताकत हासिल करता है।
Mantra 5
उत स्मैनं वस्त्रमथिं न तायुमनु क्रोशन्ति क्षितयो भरेषु । नीचायमानं जसुरिं न श्येनं श्रवश्चाच्छा पशुमच्च यूथम् ॥
लोग उसके पीछे चिल्लाते हैं जब वो लड़ाई में आगे बढ़ता है। जैसे कोई चोर कपड़ा फाड़ के भागता है, वैसे लोग उसके पीछे पड़े हैं। वो बाज़ की तरह नीचे आता है और आगे बढ़ता है। उसका मक़्सद नाम कमाना है और वो जानवरों का ग्रुप जीतना है।
Mantra 6
उत स्मासु प्रथमः सरिष्यन्नि वेवेति श्रेणिभी रथानाम् । स्रजं कृण्वानो जन्यो न शुभ्वा रेणुं रेरिहत्किरणं ददश्वान् ॥
वो सबसे पहले आगे निकलता है। वो रथों की लाइन के बीच से गुज़रता है। जैसे कोई हार बना रहा हो, वैसे वो चमकता हुआ योद्धा है। वो धूल उड़ाता है और रोशनी में चमकता है। उसने रोशनी का खेल समझ लिया है।
Mantra 7
उत स्य वाजी सहुरिॠतावा शुश्रूषमाणस्तन्वा समर्ये । तुरं यतीषु तुरयन्नृजिप्योऽधि भ्रुवोः किरते रेणुमृञ्जन् ॥
यह घोड़ा बहुत ताकतवाला है और सच का साथ लेकर चलता है। वो लड़ाई के लिए तैयार है। वो तेज़ी से आगे बढ़ता है और दूसरों को भी तेज़ करता है। वो सीधी टांग वाला है और भागते वक़्त धूल ऊपर उड़ाता है। अपने आप को धूल से रंग लेता है।
Mantra 8
उत स्मास्य तन्यतोरिव द्योॠघायतो अभियुजो भयन्ते । यदा सहस्रमभि षीमयोधीद्दुर्वर्तुः स्मा भवति भीम ऋञ्जन् ॥
जैसे आसमान गरजता है, उसके आने से दुश्मन डर जाते हैं। जब वो एक हज़ार लोगों से लड़ता है, रास्ता मुश्किल हो जाता है। वो रास्ता डर से भर जाता है और वो जीत के लिए रास्ता बना लेता है।
Mantra 9
उत स्मास्य पनयन्ति जना जूतिं कृष्टिप्रो अभिभूतिमाशोः । उतैनमाहुः समिथे वियन्तः परा दधिक्रा असरत्सहस्रैः ॥
लोग उसकी तारीफ़ करते हैं जब वो तेज़ी से आगे बढ़ता है। वो लोगों को जीत के साथ आगे ले जाता है। लोग लड़ाई में कहते हैं कि दधिक्रा हज़ार लोगों को पीछे छोड़ के आगे निकल गया है।
Mantra 10
आ दधिक्राः शवसा पञ्च कृष्टीः सूर्य इव ज्योतिषापस्ततान । सहस्रसाः शतसा वाज्यर्वा पृणक्तु मध्वा समिमा वचांसि ॥
दधिक्रा की यह प्रार्थना है। वो अपनी ताकत से पाँच प्रजाओं को फैलाए, जैसे सूरज अपनी रोशनी से पानी फैलाता है। यह तेज़ घोड़ा हज़ारों और सौओं में जीता है। भगवान करे कि हमारी बातें मीठी हो जाएँ।
The hymn praises Dadhikrā (Dadhikrāvan), a swift, victorious power pictured like a radiant racer at the head of chariots, bringing success and delight.
It asks for victorious forward movement and strength, and it also prays for inner clarity—so that the poet’s words become “honeyed,” sweet, and effective.
It is especially fitting at dawn or before beginning an important journey, contest, or undertaking where speed, success, and confident inspired speech are desired.
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