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यह सोपान ‘त्याग-धर्म’ और ‘भक्ति की परख’ का द्वार है: राजसुख का विसर्जन, भ्रातृ-प्रेम की अग्निपरीक्षा, और समाज-धर्म के भीतर रहकर राम-नाम के आश्रय में वैराग्य। इस काण्ड में साधक सीखता है कि मुक्ति-मार्ग केवल वनगमन नहीं, बल्कि अहं-त्याग, शरणागति, और निष्काम सेवाभाव है—भरत का ‘राज्य’ के प्रति वैराग्य तथा गुह (निषाद) की निष्कपट सख्यता इसी सीढ़ी की रीलिंग है।
『アヨーディヤー・カーンダ』の主たるラサは哀憐であるが、この哀憐は悲嘆に留まらず、信愛の成就へと熟してゆく。ラーマの森への旅立ちは社会的ダルマ(王のダルマ/父の言葉)のマリヤーダであり、バラタの来訪はそのマリヤーダの内的浄化——我執の捨離と無欲の奉仕——の姿である。本段(ドーハー190–199)では、グハの戦いに逸る心、兆しの考察による鎮静、ついでバラタとグハの抱擁とガンガー沐浴——これらすべてが「怨み」から「愛」への転化の旅である。トゥルシーはここでニルグナとサグナの橋も架ける。名号の功徳(ラーマ名の清浄、ヴァールミーキの例)は無形の原理を संकेतし、ラーマガート、御足の跡、敷物、バラタの五体投地はサグナ・リーラーの具象の修行である。この段で求道者は学ぶ。信愛の प्रमाणは外の जातや世間の承認ではなく、愛の相(プレーマ・ラクシャナ)にある。
Verse 388 (चौपाई)
होहु सँजोइल रोकहु घाटा। ठाटहु सकल मरै के ठाटा।। सनमुख लोह भरत सन लेऊँ। जिअत न सुरसरि उतरन देऊँ।। समर मरनु पुनि सुरसरि तीरा। राम काजु छनभंगु सरीरा।। भरत भाइ नृपु मै जन नीचू। बड़ें भाग असि पाइअ मीचू।। स्वामि काज करिहउँ रन रारी। जस धवलिहउँ भुवन दस चारी।। तजउँ प्रान रघुनाथ निहोरें। दुहूँ हाथ मुद मोदक मोरें।। साधु समाज न जाकर लेखा। राम भगत महुँ जासु न रेखा।। जायँ जिअत जग सो महि भारू। जननी जौबन बिटप कुठारू।।
警戒し、渡し場を守れ。死の壮麗さを完全に示せ。私は武器を持ってバラタと直面する。私が生きている限り、彼をガンガー川を渡らせない。ガンガー川の岸での戦いでの死、そしてラーマへの奉仕、たとえ体が一瞬で滅びても。バラタは兄弟であり王、私は卑しい召使い。大きな幸運によってこのような終わりを得る。私は戦場で主に仕え、私の名声は十四の世界で輝く。ラグの主の命令で命を捧げる。これは私にとって最も甘い喜び、心の喜びである。善人の仲間に場所がなく、ラーマの信者の中に痕跡を残さない。この世に生きる者は大地の重荷。母は青春の斧を受ける木。」
Verse 389 (दोहा/सोरठा)
बिगत बिषाद निषादपति सबहि बढ़ाइ उछाहु। सुमिरि राम मागेउ तुरत तरकस धनुष सनाहु।।190।।
ニシャダの主は悲しみを捨て、皆を熱心な意欲に駆り立てた。ラーマを念じて、すぐに矢筒、弓、鎧を求めた。
Verse 390 (चौपाई)
बेगहु भाइहु सजहु सँजोऊ। सुनि रजाइ कदराइ न कोऊ।। भलेहिं नाथ सब कहहिं सहरषा। एकहिं एक बढ़ावइ करषा।। चले निषाद जोहारि जोहारी। सूर सकल रन रूचइ रारी।। सुमिरि राम पद पंकज पनहीं। भाथीं बाँधि चढ़ाइन्हि धनहीं।। अँगरी पहिरि कूँड़ि सिर धरहीं। फरसा बाँस सेल सम करहीं।। एक कुसल अति ओड़न खाँड़े। कूदहि गगन मनहुँ छिति छाँड़े।। निज निज साजु समाजु बनाई। गुह राउतहि जोहारे जाई।। देखि सुभट सब लायक जाने। लै लै नाम सकल सनमाने।।
急げ、兄弟よ、装備を整えよ。命令を聞いて、誰も怠るな。皆は喜んで「よいことでございます、主よ」と言う。お互いに競い合う。ニシャダたちは何度も挨拶して出発した。すべての英雄たちは森を心地よく思った。ラーマの蓮の足を避難所として念じ、食料を縛って矢筒に詰めた。指カバーを着け、頭に矢筒を載せた。斧、杖、投石器を準備した。一人の非常に熟練した戦士は大きな盾を持って、地球を離れるかのように空に跳んだ。それぞれが自分の装備と仲間を整え、首長グハに挨拶しに行った。それを見て、ラーマは皆が適格な戦士であることを知り、一人一人の名を呼んで敬意を表した。
Verse 391 (दोहा/सोरठा)
भाइहु लावहु धोख जनि आजु काज बड़ मोहि। सुनि सरोष बोले सुभट बीर अधीर न होहि।।191।।
兄弟よ、今日欺瞞をもたらさないで。この務めは私にとって非常に重要だ。それを聞いて、怒って、勇敢な戦士は言った。「英雄よ、落ち着きを失ってはならない。」
Verse 392 (चौपाई)
राम प्रताप नाथ बल तोरे। करहिं कटकु बिनु भट बिनु घोरे।। जीवत पाउ न पाछें धरहीं। रुंड मुंडमय मेदिनि करहीं।। दीख निषादनाथ भल टोलू। कहेउ बजाउ जुझाऊ ढोलू।। एतना कहत छींक भइ बाँए। कहेउ सगुनिअन्ह खेत सुहाए।। बूढ़ु एकु कह सगुन बिचारी। भरतहि मिलिअ न होइहि रारी।। रामहि भरतु मनावन जाहीं। सगुन कहइ अस बिग्रहु नाहीं।। सुनि गुह कहइ नीक कह बूढ़ा। सहसा करि पछिताहिं बिमूढ़ा।। भरत सुभाउ सीलु बिनु बूझें। बड़ि हित हानि जानि बिनु जूझें।।
ラーマの力とあなたの力によって、主よ、彼らは兵士も恐ろしい馬もなしに大混乱を引き起こす。彼らは生きている限り後ろに足を置かない。大地を首のない胴体の塊にする。ニシャダの主の立派な部隊を見て、彼は「戦いの太鼓を鳴らせ」と言った。そう言っていると、左側でくしゃみが出た。占い師たちはその前兆を良いと宣言した。一人の老人が前兆を考慮して言った。「彼はバラタに会うだろう。戦いはないだろう。バラタはラーマを説得しに行く。」こうして前兆は語る。他の意味はない。これを聞いて、グハは「老人はよく言う」と言った。しかし突然、愚か者は後悔するだろう。バラタの性質と性格を理解せず、大きな害または利益をもたらし、知らずに突進するだろう。
Verse 393 (दोहा/सोरठा)
गहहु घाट भट समिटि सब लेउँ मरम मिलि जाइ। बूझि मित्र अरि मध्य गति तस तब करिहउँ आइ।।192।।
渡し場を確保せよ、兵士たちを集めよ。私が会いに行って真実を確かめよう。彼が味方か敵かを見極め、その時になって行動しよう。
Verse 394 (चौपाई)
लखन सनेहु सुभायँ सुहाएँ। बैरु प्रीति नहिं दुरइँ दुराएँ।। अस कहि भेंट सँजोवन लागे। कंद मूल फल खग मृग मागे।। मीन पीन पाठीन पुराने। भरि भरि भार कहारन्ह आने।। मिलन साजु सजि मिलन सिधाए। मंगल मूल सगुन सुभ पाए।। देखि दूरि तें कहि निज नामू। कीन्ह मुनीसहि दंड प्रनामू।। जानि रामप्रिय दीन्हि असीसा। भरतहि कहेउ बुझाइ मुनीसा।। राम सखा सुनि संदनु त्यागा। चले उतरि उमगत अनुरागा।। गाउँ जाति गुहँ नाउँ सुनाई। कीन्ह जोहारु माथ महि लाई।।
ラクシュマナの愛は自然で美しかった。敵意も愛情も心に隠すことはできなかった。こう言って、彼は会合の準備を始めた。根菜、果実、鳥、鹿を求めた。太って新鮮な上等な魚が、担い手たちによって何杯も運ばれた。会合の準備を整え、会合に向かった。吉祥の根と良い兆しを得た。遠くから彼を見て、自らの名を告げ、聖者に敬意を払った。彼がラーマの親友であると知り、聖者は祝福を与えた。彼にバラタを理解するよう告げた。彼がラーマの友と聞いて、杖を置いた。愛に満ちて出発した。村に行き、グハの名を告げた。地に頭をつけて敬意を払った。
Verse 395 (दोहा/सोरठा)
करत दंडवत देखि तेहि भरत लीन्ह उर लाइ। मनहुँ लखन सन भेंट भइ प्रेम न हृदयँ समाइ।।193।।
彼が敬意を払うのを見て、バラタは彼を抱きしめた。まるでラクシュマナがラクシュマナに会ったかのよう、心の愛は収まらなかった。
Verse 396 (चौपाई)
भेंटत भरतु ताहि अति प्रीती। लोग सिहाहिं प्रेम कै रीती।। धन्य धन्य धुनि मंगल मूला। सुर सराहि तेहि बरिसहिं फूला।। लोक बेद सब भाँतिहिं नीचा। जासु छाँह छुइ लेइअ सींचा।। तेहि भरि अंक राम लघु भ्राता। मिलत पुलक परिपूरित गाता।। राम राम कहि जे जमुहाहीं। तिन्हहि न पाप पुंज समुहाहीं।। यह तौ राम लाइ उर लीन्हा। कुल समेत जगु पावन कीन्हा।। करमनास जलु सुरसरि परई। तेहि को कहहु सीस नहिं धरई।। उलटा नामु जपत जगु जाना। बालमीकि भए ब्रह्म समाना।।
バラタは深い愛情で彼に会った。人々は愛の道を喜んだ。祝福された、祝福されたその音は、すべての吉祥の源であった。神々はそれを称え、花を降らせた。ヴェーダと世界はあらゆる点で低いが、その影に触れれば清められる。ラーマは弟を抱きしめた。会った時、体は喜びに満ちた。冗談で「ラーマ、ラーマ」と唱える者にも、罪の山は積もらない。これほどの者がラーマを心に抱き、一族と世界を清めた。カルマナシャ川の水はガンジスのようになる。頭を下げないと言う者がいようか。逆さまに名を唱えても、世界は彼を知った。ヴァールミーキはブラフマーと等しくなった。
Verse 397 (दोहा/सोरठा)
स्वपच सबर खस जमन जड़ पावँर कोल किरात। रामु कहत पावन परम होत भुवन बिख्यात।।194।।
アウトカーストのシャバラ、カシャ、ヤヴァナ、鈍い者、弱き者、コル族とキラータ族、ラーマの名を唱えることで聖なる至高の者となり、世界に名を知られる。
Verse 398 (चौपाई)
नहिं अचिरजु जुग जुग चलि आई। केहि न दीन्हि रघुबीर बड़ाई।। राम नाम महिमा सुर कहहीं। सुनि सुनि अवधलोग सुखु लहहीं।। रामसखहि मिलि भरत सप्रेमा। पूँछी कुसल सुमंगल खेमा।। देखि भरत कर सील सनेहू। भा निषाद तेहि समय बिदेहू।। सकुच सनेहु मोदु मन बाढ़ा। भरतहि चितवत एकटक ठाढ़ा।। धरि धीरजु पद बंदि बहोरी। बिनय सप्रेम करत कर जोरी।। कुसल मूल पद पंकज पेखी। मैं तिहुँ काल कुसल निज लेखी।। अब प्रभु परम अनुग्रह तोरें। सहित कोटि कुल मंगल मोरें।।
代々伝わる不思議ではない。ラーグヴァ卿が偉大さを与えなかった者などいないか。神々さえもラーマの名の栄光を語る。聞くたびにアヨーディヤの人々は喜びを得る。ラーマの友に会い、バラタは愛を込めて安否と吉祥を尋ねた。バラタの人柄と愛情を見て、ニシャーダはその時圧倒された。恥じらい、愛、喜びが心に増した。バラタだけを見つめて立ち尽くした。落ち着いて、再び足元にひれ伏した。愛を込めて謙虚に手を合わせて語った。吉祥の源である蓮の足を見て、私は三界で幸運と考えた。今、あなたの深い恩寵により、私と一族の幸福は確保された。
Verse 399 (दोहा/सोरठा)
समुझि मोरि करतूति कुलु प्रभु महिमा जियँ जोइ। जो न भजइ रघुबीर पद जग बिधि बंचित सोइ।।195।।
私の性質と一族を理解し、主よ、あなたの栄光を心に抱きます。ラーグヴァ卿の足を崇めない者は、世界と創造から見放される。
Verse 400 (चौपाई)
कपटी कायर कुमति कुजाती। लोक बेद बाहेर सब भाँती।। राम कीन्ह आपन जबही तें। भयउँ भुवन भूषन तबही तें।। देखि प्रीति सुनि बिनय सुहाई। मिलेउ बहोरि भरत लघु भाई।। कहि निषाद निज नाम सुबानीं। सादर सकल जोहारीं रानीं।। जानि लखन सम देहिं असीसा। जिअहु सुखी सय लाख बरीसा।। निरखि निषादु नगर नर नारी। भए सुखी जनु लखनु निहारी।। कहहिं लहेउ एहिं जीवन लाहू। भेंटेउ रामभद्र भरि बाहू।। सुनि निषादु निज भाग बड़ाई। प्रमुदित मन लइ चलेउ लेवाई।।
彼は欺瞞的で、臆病で、邪悪な心と卑しい生まれである。世界とヴェーダの道から外れている。ラーマが彼を自分のものとした時から、彼は三界の装飾となった。彼の愛を見て、謙虚な祈りを聞いて、バラタは弟に再会した。ニシャーダは優しい言葉で自らの名を告げ、敬意を持ってすべての王妃に挨拶した。ラクシュマナ同様と知って、彼らは祝福した。十万年、幸せに生きよと。ニシャーダは都の男女を見た。ラクシュマナを見たかのように喜んだ。彼らは言った。この人生で利益を得た。慈悲深いラーマに会えたと。これを聞いて、ニシャーダは自らの幸運を称え、喜びの心で去った。
Verse 401 (दोहा/सोरठा)
सनकारे सेवक सकल चले स्वामि रुख पाइ। घर तरु तर सर बाग बन बास बनाएन्हि जाइ।।196।।
すべての従者は主の命令を受けて出発した。家、木の下、湖のほとり、庭、森に住まいを構えた。
Verse 402 (चौपाई)
सृंगबेरपुर भरत दीख जब। भे सनेहँ सब अंग सिथिल तब।। सोहत दिएँ निषादहि लागू। जनु तनु धरें बिनय अनुरागू।। एहि बिधि भरत सेनु सबु संगा। दीखि जाइ जग पावनि गंगा।। रामघाट कहँ कीन्ह प्रनामू। भा मनु मगनु मिले जनु रामू।। करहिं प्रनाम नगर नर नारी। मुदित ब्रह्ममय बारि निहारी।। करि मज्जनु मागहिं कर जोरी। रामचंद्र पद प्रीति न थोरी।। भरत कहेउ सुरसरि तव रेनू। सकल सुखद सेवक सुरधेनू।। जोरि पानि बर मागउँ एहू। सीय राम पद सहज सनेहू।।
バラタがシュリンガヴェラプラを見た時、愛ですべての肢体が弱くなった。ニシャーダが謙虚と献身の体を得たかのように見えた。こうしてバラタは全軍と共に、世界を清めるガンジスを見に行った。ラーマの沐浴場で敬意を払った。心はラーマに会ったように満たされた。都の男女は敬意を払い、ブラフマンに満ちた水を喜んで見た。沐浴し、手を合わせて祈った。ラーマチャンドラの足への愛は深かった。バラタは神聖な川に言った。あなたの岸の塵、僕にすべての幸福を与える神牛よ。手を合わせて一つの願いを求める。シータとラーマの足への自然な愛を。
Verse 403 (दोहा/सोरठा)
एहि बिधि मज्जनु भरतु करि गुर अनुसासन पाइ। मातु नहानीं जानि सब डेरा चले लवाइ।।197।।
このようにバラタは沐浴し、師の教えを受けて、母たちが沐浴したことを知り、陣営を畳んで出発した。
Verse 404 (चौपाई)
जहँ तहँ लोगन्ह डेरा कीन्हा। भरत सोधु सबही कर लीन्हा।। सुर सेवा करि आयसु पाई। राम मातु पहिं गे दोउ भाई।। चरन चाँपि कहि कहि मृदु बानी। जननीं सकल भरत सनमानी।। भाइहि सौंपि मातु सेवकाई। आपु निषादहि लीन्ह बोलाई।। चले सखा कर सों कर जोरें। सिथिल सरीर सनेह न थोरें।। पूँछत सखहि सो ठाउँ देखाऊ। नेकु नयन मन जरनि जुड़ाऊ।। जहँ सिय रामु लखनु निसि सोए। कहत भरे जल लोचन कोए।। भरत बचन सुनि भयउ बिषादू। तुरत तहाँ लइ गयउ निषादू।।
人々はあちこちに陣営を張り、バラタはすべてを自らの配慮下に置いた。神々を礼拝し許可を得て、二人の兄弟はラーマの母のもとへ向かった。彼女の足を押し上げ、優しい言葉を繰り返し語り、あらゆる方法で母を敬った。母への奉仕を兄弟に委ね、ニシャーダを呼び寄せた。友の手に自らの手を合わせて進み、その体は深い愛情で弱り果てた。友に場所を示すよう頼み、涙に満ちた目と悲しみに燃える心であった。「あそこでシーター、ラーマ、ラクシュマナが夜眠った」と、涙に満ちた目で誰かが言った。バラタの言葉を聞いて、ニシャーダは悲しみ、すぐに彼をその場所へ導いた。
Verse 405 (दोहा/सोरठा)
जहँ सिंसुपा पुनीत तर रघुबर किय बिश्रामु। अति सनेहँ सादर भरत कीन्हेउ दंड प्रनामु।।198।।
聖なるシシュ樹がある場所、そこでラグの主は休息を取られた。深い愛情と敬意をもって、バラタは全身を地に伏せて拝礼した。
Verse 406 (चौपाई)
कुस साँथरीनिहारि सुहाई। कीन्ह प्रनामु प्रदच्छिन जाई।। चरन रेख रज आँखिन्ह लाई। बनइ न कहत प्रीति अधिकाई।। कनक बिंदु दुइ चारिक देखे। राखे सीस सीय सम लेखे।। सजल बिलोचन हृदयँ गलानी। कहत सखा सन बचन सुबानी।। श्रीहत सीय बिरहँ दुतिहीना। जथा अवध नर नारि बिलीना।। पिता जनक देउँ पटतर केही। करतल भोगु जोगु जग जेही।। ससुर भानुकुल भानु भुआलू। जेहि सिहात अमरावतिपालू।। प्राननाथु रघुनाथ गोसाई। जो बड़ होत सो राम बड़ाई।।
美しく敷かれたクシャ草の寝床を見て、彼は拝礼し、前に進んだ。ラーマの足元の塵を目に塗った、その愛は言葉で表せないほど大きかった。二つの金色の雫を見つけ、シーターと等しいとして頭に載せた。涙に満ちた目と重い心で、友に優しい言葉を語った。主との別離に苦しむシーター、アヨーディヤの男女は悲しみに沈んだ。父ジャナカは、この世界を楽しむ者に王国を与えるだろう。義父は太陽族の太陽、アマラーヴァティーの主さえも敬う方である。彼女の命の主はラグの主、彼女の師である。真に偉大であった方、その偉大さはラーマのものである。
Verse 407 (दोहा/सोरठा)
पति देवता सुतीय मनि सीय साँथरी देखि। बिहरत ह्रदउ न हहरि हर पबि तें कठिन बिसेषि।।199।।
夫であり神である方のクシャ草の寝床を見て、シーターの心は愛に満ちる。しかし動揺することはない、彼女の信仰は極めて堅固であるから。
परंपरा में इस खंड का फल ‘भ्रातृ-प्रेम, वैर-शमन, और नाम-विश्वास की दृढ़ता’ कहा जाता है। विशेषतः ‘राम नाम महिमा’ (दोहा 194 के भाव) के पाठ से पाप-संस्कार क्षीण होते हैं और साधक में निष्कपट भक्ति (अहं-रहित स्नेह) जाग्रत होती है।
लोक-परंपरा में ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ (नाम-संकीर्तन-सम्पुट) या ‘राम राम’ का जप-सम्पुट इस प्रसंग में जोड़ा जाता है, क्योंकि यहाँ नाम-महिमा और गंगा-तट-स्मरण प्रधान है। (क्षेत्र/सम्प्रदाय के अनुसार सम्पुट-रूप बदल सकता है।)
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