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Sukta 8.73
Atri (probable, as the hymn repeatedly references Atraye; traditional attribution to Atri or Atris in Aśvin hymns)
Aśvins
Gāyatrī (probable: short refrain-like structure; exact meter requires full hymn scan)
This Aśvin hymn repeatedly summons the twin divine physicians to rise, yoke their chariot, and come close, so that their help may be “near and seated” within the worshipper. Through a refrain-like insistence, it asks for swift rescue, strengthening, and the breaking of obstructing darkness, as if storming a fortress. The overall purpose is immediate aid—healing, protection, and the restoration of ṛta (right order) in life and mind.
Mantra 1
उदीराथामृतायते युञ्जाथामश्विना रथम् । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
अश्विन भाइयो, उठो और सत्य ढूंढने वाले के लिए आओ। अपनी रथ जोड़ो और हमारे पास आओ। तुम्हारी मदद हमारे पास हो।
Mantra 2
निमिषश्चिज्जवीयसा रथेना यातमश्विना । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
अश्विन भाइयो, अपनी तेज़ रथ से आओ। आँख के झपकने से भी तेज़ आओ। तुम्हारी मदद हमारे पास आ के बैठ जाये।
Mantra 3
उप स्तृणीतमत्रये हिमेन घर्ममश्विना । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
अश्विन भइयों, अत्रि के लिए गरम पानी ठंडा करके रखना। ठंडा करके, गरम भी रखना। ऐसा करो कि तुम्हारी मदद हमारे पास ही रहे।
Mantra 4
कुह स्थः कुह जग्मथुः कुह श्येनेव पेतथुः । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
तुम कहाँ हो? कहीं से आए हो? बाज़ की तरह उड़के आए हो क्या? तुम्हारी मदद हमारे पास ही रहे, यही दुआ है।
Mantra 5
यदद्य कर्हि कर्हि चिच्छुश्रूयातमिमं हवम् । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
आज या कभी भी, जब हम पुकारें, तुम सुनो अश्विन। सुनो और पास आओ। तुम्हारी मदद हमारे पास ही रहे।
Mantra 6
अश्विना यामहूतमा नेदिष्ठं याम्याप्यम् । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
अश्विन, लोग तुम्हे बहुत पुकारते हैं। मैं भी तुम्हारे पास आ रहा हूँ। तुम्हारी मदद हमारे पास ही रहे।
Mantra 7
अवन्तमत्रये गृहं कृणुतं युवमश्विना । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
अश्विन भइयों, अत्रि के लिए एक ऐसा घर बना दो जो सुरक्षित हो। कोई तकलीफ न हो। तुम्हारी मदद हमारे पास ही रहे।
Mantra 8
वरेथे अग्निमातपो वदते वल्ग्वत्रये । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
अग्नि को चुनो। यह आग का ताप अत्रि के लिए सही बात बोलता है। आपकी मदद हमारे पास हो, हमारे अंदर काम करती हो।
Mantra 9
प्र सप्तवध्रिराशसा धारामग्नेरशायत । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
आगे बढ़ो, सात गुणों वाली शक्ति अपने आप को बिछा देती है। अग्नि की तरह बहती धारा बनके। आपकी मदद पास हो, सच में हमारे साथ हो।
Mantra 10
इहा गतं वृषण्वसू शृणुतं म इमं हवम् । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
इधर आओ, दोनों। तुम्मे जीत की ताकत है, धन है। मेरा यह बुलाना सुनो। आपकी मदद पास हो, सच में हमारे साथ हो।
Mantra 11
किमिदं वां पुराणवज्जरतोरिव शस्यते । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
लोग तुम्हारे बारे में ऐसा क्यों बोलते हैं? जैसे कोई पुरानी कहानी हो, जैसे बूढ़े लोगों की बात हो। आपकी मदद पास हो, सच में हमारे साथ हो।
Mantra 12
समानं वां सजात्यं समानो बन्धुरश्विना । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
अश्विन दोनों भाई हो, तुम्हारी एक ही जात है। तुम्हारा एक ही रिश्ता है, एक ही बंधन है। आपकी मदद पास हो, सच में हमारे साथ हो।
Mantra 13
यो वां रजांस्यश्विना रथो वियाति रोदसी । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
अश्विन भइयों, तुम्हारी गाड़ी आसमान में चलती है और दुनिया घूमती है। तुम्हारी मदद हमारे पास हो, सच में हमारे काम आए।
Mantra 14
आ नो गव्येभिरश्व्यैः सहस्रैरुप गच्छतम् । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
हमारे पास आओ, हज़ारों गाय और घोड़े लेकर। तुम्हारी मदद हमारे पास हो, सच में हमारे काम आए।
Mantra 15
मा नो गव्येभिरश्व्यैः सहस्रेभिरति ख्यतम् । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
हमें छोड़ के न जाओ, तुम लोग बहुत बड़े हो। हज़ारों चमक और ताकत लेकर हमारे पास रहो। तुम्हारी मदद हमारे पास हो, सच में हमारे काम आए।
Mantra 16
अरुणप्सुरुषा अभूदकर्ज्योतिॠतावरी । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
सुबह लाल चमक के साथ आई और रोशनी फैला दी। वो सच के रास्ते पे चलती है। तुम्हारी मदद हमारे पास हो, सच में हमारे काम आए।
Mantra 17
अश्विना सु विचाकशद्वृक्षं परशुमाँ इव । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
अश्विन भइयों, सब साफ साफ दिख जाए। जैसे पेड़ को काटने से देख सकते हैं, वैसे ही सब क्लियर हो जाए। तुम्हारी मदद हमारे पास हो, सच में हमारे काम आए।
Mantra 18
पुरं न धृष्णवा रुज कृष्णया बाधितो विशा । अन्ति षद्भूतु वामवः ॥
जैसे कोई ताकतवाला किले को तोड़ के अंदर जाता है, वैसे ही अंधेरा को तोड़ दो। जो लोग अंधेरे में फंसे हैं, उन्हे आगे बढ़ने दो। तुम्हारी मदद पास हो, सच में साथ है।
The Aśvins are twin Vedic deities known for swift arrival, healing, and rescue. This hymn calls them like urgent helpers who come at dawn and restore strength and well-being.
It asks that the Aśvins’ help be “near” and “seated/present” for the worshipper. The idea is not only distant blessing, but immediate, steady support felt within one’s life and mind.
Call the Aśvins quickly and confidently: they hear, arrive, and remove obstacles—especially the ‘blackness’ of oppression or confusion—so that truth (ṛta), health, and protection can be restored.
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