Opening the text

Sukta 2.11
Gṛtsamada (Bhārgava)
Indra
Triṣṭubh (common for Indra hymns in Mandala 2; verse-level confirmation requires scan)
This Indra hymn by Gṛtsamada calls the god to hear the poets’ plea, come to the sacrifice, and drink the Soma that strengthens his might. It praises Indra as the heroic giver and protector, asking for wealth, victory, and an unburnt share of fortune, so the worshippers may speak “the Vast” in the assembly with strong offspring and allies.
Mantra 1
श्रुधी हवमिन्द्र मा रिषण्यः स्याम ते दावने वसूनाम् । इमा हि त्वामूर्जो वर्धयन्ति वसूयवः सिन्धवो न क्षरन्तः ॥
इंद्र, हमारी पुकार सुन। हमें नुकसान मत पहुँचा। हम तेरे लायक हों, जो तू देता है। ये शक्तियाँ तुझे बढ़ाती हैं, सच्चा धन माँगती हैं। जैसे नदियाँ बहती रहती हैं, रुकती नहीं।
Mantra 2
सृजो महीरिन्द्र या अपिन्वः परिष्ठिता अहिना शूर पूर्वीः । अमर्त्यं चिद्दासं मन्यमानमवाभिनदुक्थैर्वावृधानः ॥
इंद्र ने वो बड़ी शक्तियाँ छोड़ी जो पहले से बंद थीं। साँप ने उन्हे घेरा हुआ था, तू ने तोड़ दिया। एक दास खुद को अमर समझता था, तू ने उसे गिरा दिया। स्तुति से तुझे ताकत मिलती है, तू रास्ता बनाता है।
Mantra 3
उक्थेष्विन्नु शूर येषु चाकन्त्स्तोमेष्विन्द्र रुद्रियेषु च । तुभ्येदेता यासु मन्दसानः प्र वायवे सिस्रते न शुभ्राः ॥
जिन स्तुतियों में तू खुश होता है, इंद्र, उनमें ये धारें तुझपर आती हैं। रुद्र जैसी ताकत वाली स्तुतियों में भी। तू खुश हो के उन्हे आगे बढ़ाता है, जैसे चमकदार धारें हवा के लिए बह रही हों।
Mantra 4
शुभ्रं नु ते शुष्मं वर्धयन्तः शुभ्रं वज्रं बाह्वोर्दधानाः । शुभ्रस्त्वमिन्द्र वावृधानो अस्मे दासीर्विशः सूर्येण सह्याः ॥
हम इंद्र की ताकत बढ़ा रहे हैं। उसके हाथ में चमकता वज्र है। इंद्र खुद भी चमक रहा है, उसकी ताकत बढ़ रही है। वो अंधेरे में रहने वाले लोगों को हमारे लिए जीत दे। सच के सूरज की तरह वो उनपे जीत पाए।
Mantra 5
गुहा हितं गुह्यं गूळ्हमप्स्वपीवृतं मायिनं क्षियन्तम् । उतो अपो द्यां तस्तभ्वांसमहन्नहिं शूर वीर्येण ॥
एक जादू की ताकत पानी में छुपी थी, गुप्त थी। इंद्र ने उसे ढूँढ लिया। उसने उस साँप को मारा अपनी ताकत से। फिर पानी आज़ाद हो गया और आसमान सही हो गया।
Mantra 6
स्तवा नु त इन्द्र पूर्व्या महान्युत स्तवाम नूतना कृतानि । स्तवा वज्रं बाह्वोरुशन्तं स्तवा हरी सूर्यस्य केतू ॥
हम इंद्र की पुरानी महानता गाते हैं। उसके नए काम भी गाते हैं। उसके हाथ का वज्र कितना अच्छा लगता है। उसके दो घोड़े सूरज की तरह चमकते हैं।
Mantra 7
हरी नु त इन्द्र वाजयन्ता घृतश्चुतं स्वारमस्वार्ष्टाम् । वि समना भूमिरप्रथिष्टारंस्त पर्वतश्चित्सरिष्यन् ॥
इंद्र की ताकत जब चलती है तो चमक फैलती है। ज़मीन फैल गई। पहाड़ भी हिलने लगा जैसे बह रहा हो। उसकी ताकत ने पूरा जगह हिला दिया।
Mantra 8
नि पर्वतः साद्यप्रयुच्छन्त्सं मातृभिर्वावशानो अक्रान् । दूरे पारे वाणीं वर्धयन्त इन्द्रेषितां धमनिं पप्रथन्नि ॥
पहाड़ बैठ गया, अब नहीं रोका। वो माओं के साथ चला। दूर किनारे पर शब्द बढ़ा। इंद्र की वजह से वो धारा फैल गई और जम गई।
Mantra 9
इन्द्रो महां सिन्धुमाशयानं मायाविनं वृत्रमस्फुरन्निः । अरेजेतां रोदसी भियाने कनिक्रदतो वृष्णो अस्य वज्रात् ॥
इंद्र ने उस बड़े पानी को तोड़ दिया जो दबा हुआ था। वृत्र नाम का एक राक्षस था जो जादू-जादू कर रहा था, इंद्र ने उसे बाहर निकाल के मारा। आसमान और धरती दोनों डर गए। जब इंद्र की बिजली चमकी, तो गूँज जैसी आवाज़ आई।
Mantra 10
अरोरवीद्वृष्णो अस्य वज्रोऽमानुषं यन्मानुषो निजूर्वात् । नि मायिनो दानवस्य माया अपादयत्पपिवान्त्सुतस्य ॥
इंद्र की बिजली की चमक एकदम ज़ोर से गूँजी। यह कोई आम इंसान की ताकत नहीं थी। जब हम थक जाते हैं तब भी यह ताकत काम करती है। इंद्र ने सोमरस पिया, और उस जादुगरनी शक्ति को बरबाद कर दिया जो लोगों को धोखा देती थी।
Mantra 11
पिबापिबेदिन्द्र शूर सोमं मन्दन्तु त्वा मन्दिनः सुतासः । पृणन्तस्ते कुक्षी वर्धयन्त्वित्था सुतः पौर इन्द्रमाव ॥
इंद्र, तुम सोमरस पियो। यह रस तुम्हे खुश करेगा और तुम्हारी ताकत बढ़ाएगा। जब तुम्हारा पेट भरेगा, तुम और स्ट्रॉन्ग हो जाओगे। इसलिए सोमरस इंद्र को बुलाता है कि वो हमारे पास आएँ।
Mantra 12
त्वे इन्द्राप्यभूम विप्रा धियं वनेम ऋतया सपन्तः । अवस्यवो धीमहि प्रशस्तिं सद्यस्ते रायो दावने स्याम ॥
इंद्र, हमने तुम्हे अपना सहारा माना है। तुम्हारी राह पर चल के हमें अच्छी सोच मिलती है। हम तुम्हारी प्रशंसा करते हैं और मदद माँगते हैं। तुम हमें इतनी दौलत दो कि हमारा काम बन जाए।
Mantra 13
स्याम ते त इन्द्र ये त ऊती अवस्यव ऊर्जं वर्धयन्तः । शुष्मिन्तमं यं चाकनाम देवास्मे रयिं रासि वीरवन्तम् ॥
इंद्र, हम तुम्हारे हो जाना चाहते हैं। तुम्हारी मदद से हमारी ताकत बढ़ती है। तुम सबसे बड़े बलवान हो, हम तुम्हे खुश करना चाहते हैं। भगवान, हमें इतनी दौलत और ताकत दो कि हम बड़े बन जाएँ।
Mantra 14
रासि क्षयं रासि मित्रमस्मे रासि शर्ध इन्द्र मारुतं नः । सजोषसो ये च मन्दसानाः प्र वायवः पान्त्यग्रणीतिम् ॥
इंद्र से दुआ है कि वो हमें एक अच्छा घर दे। वो हमें अपने पास रख के साथ चलाए। इंद्र, मरुत सेना को भी हमारे लिए भेज दे। जो लोग खुश हैं और मिलकर काम करते हैं, उनकी रखवाली करे। वो आगे बढ़ने वाली शक्ति हमारे नेतृत्व की हिफाजत करे।
Mantra 15
व्यन्त्विन्नु येषु मन्दसानस्तृपत्सोमं पाहि द्रह्यदिन्द्र । अस्मान्त्सु पृत्स्वा तरुत्रावर्धयो द्यां बृहद्भिरर्कैः ॥
इंद्र, दुश्मनों को अभी भाग जाने दे। वो लोग जिनको तुम हरा रहे हो। तुम सोमा पियो और आगे बढ़ो। जब हम लड़ाई में फंसे हैं, तुम हमें पार उतारो। तुम ही रक्षक हो। तुमने अपने गाना से आसमान को इतना बड़ा बना दिया।
Mantra 16
बृहन्त इन्नु ये ते तरुत्रोक्थेभिर्वा सुम्नमाविवासान् । स्तृणानासो बर्हिः पस्त्यावत्त्वोता इदिन्द्र वाजमग्मन् ॥
वो लोग बहुत ताकतवर हैं जो तुम्हारे गुण गाते हैं। तुम उनकी सुन लेता है, इंद्र। यह लोग अपना स्थापना बनाते हैं जैसे अपना ही घर हो। तुम उनकी हिफाजत करते हो। इसलिए वो जीत और शक्ति पाते हैं।
Mantra 17
उग्रेष्विन्नु शूर मन्दसानस्त्रिकद्रुकेषु पाहि सोममिन्द्र । प्रदोधुवच्छ्मश्रुषु प्रीणानो याहि हरिभ्यां सुतस्य पीतिम् ॥
इंद्र, तुम बहुत बहादुर हो। तुम सोमा पियो और खुश रहो। तुम तीन प्यालों में से पियो। तुम्हारा दाढ़ी पर झाग लगता है। तुम अपने दो घोड़ों के साथ आओ। सोमा पीने के लिए तैयार हो के आओ।
Mantra 18
धिष्वा शवः शूर येन वृत्रमवाभिनद्दानुमौर्णवाभम् । अपावृणोर्ज्योतिरार्याय नि सव्यतः सादि दस्युरिन्द्र ॥
इंद्र, तुम अपनी ताकत का इस्तेमाल करो। उसी से तुमने वृत्र को तोड़ दिया। वो रास्ता रोकने वाला था। तुमने अच्छे लोगों के लिए रोशनी निकाली। बुरे लोग पीछे हट गए। तुमने उनको साइड कर दिया।
Mantra 19
सनेम ये त ऊतिभिस्तरन्तो विश्वाः स्पृध आर्येण दस्यून् । अस्मभ्यं तत्त्वाष्ट्रं विश्वरूपमरन्धयः साख्यस्य त्रिताय ॥
इंद्र की शक्ति से हम जीतते हैं। वो सब लड़ाइयों से पार ले जाता है। वो बुरी ताकतों को अच्छी रोशनी से हरा देता है। इंद्र ने एक बड़ी शक्ति को हमारे लिए काम में लाया। यह दोस्ती के लिए किया, ताकि हम अंदर की रोशनी पा सकें।
Mantra 20
अस्य सुवानस्य मन्दिनस्त्रितस्य न्यर्बुदं वावृधानो अस्तः । अवर्तयत्सूर्यो न चक्रं भिनद्वलमिन्द्रो अङ्गिरस्वान् ॥
इंद्र की ताकत बढ़ गई। उसने एक बड़ा दुश्मन, अर्बुद, को गिरा दिया। वो चक्र चलाने लगा, जैसे सूरज चलता है। उसने पहाड़ तोड़ दिया और अंदर छुपी रोशनी बाहर ला दी। इंद्र अपने साथियों के साथ था।
Mantra 21
नूनं सा ते प्रति वरं जरित्रे दुहीयदिन्द्र दक्षिणा मघोनी । शिक्षा स्तोतृभ्यो माति धग्भगो नो बृहद्वदेम विदथे सुवीराः ॥
इंद्र, जो गाना गाने वाले हैं, उनकी सुन ले। उनकी दुआ पूरी कर दे। इनको सिख और इनको दे। हमें मत जलाना, हमारा हिस्सा मत खत्म कर। हम सबके सामने बड़ी बात बोलें, ताकि हम शक्ति से भरें।
The hymn asks Indra to hear the worshippers, come to the Soma sacrifice, become strong through the libations, and grant wealth, protection, and a secure share of fortune.
In Vedic ritual language, Soma is the power that ‘gladdens’ and increases Indra’s strength, so his drinking marks the moment he becomes ready to help and to give boons.
It is a closing blessing: “May we speak great, uplifting words in the assembly, and may we be rich in heroic strength (good offspring, courage, and capable allies).”
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
A free sign-in with Google or Apple keeps your chat saved across web and the app.
Read Rig Veda in the Vedapath app
Scan the QR code to open this directly in the app, with word-by-word meanings, Sanskrit recitation where available, and more.