Opening the text

Sukta 7.56
Vasiṣṭha (traditional for RV 7.56, Marut hymns in Book 7)
Maruts (Rudra’s youthful host)
Triṣṭubh (common for Marut hymns; verse-level verification needed)
This hymn of Vasiṣṭha praises the Maruts—Rudra’s youthful storm-host—marveling at their unified onset, shining ornaments, and weapon-bearing power that brings rain and clears the sky. It seeks their protection and well-being, asking that their fierce energy turn auspicious for the worshipper and community. The closing verse broadens the blessing, invoking other cosmic powers (Indra, Varuṇa, Mitra, Agni, Waters, Plants, Forest-lords) to accept the offering and grant peace in the Maruts’ shelter.
Mantra 1
क ईं व्यक्ता नरः सनीळा रुद्रस्य मर्या अध स्वश्वाः ॥
वो कौन हैं जो दिख रहे हैं? रुद्र के वीर लोग, सब एक साथ रहते हैं, अपने घोड़े ले के आते हैं। एक टीम की तरह आते हैं।
Mantra 2
नकिर्ह्येषां जनूंषि वेद ते अङ्ग विद्रे मिथो जनित्रम् ॥
कोई नहीं जानता इनका कहाँ से आना है। लेकिन दोस्त, वो आपस में जानते हैं कि वो कहाँ से हैं। कौन से हैं, कैसे हैं, यह राज़ है।
Mantra 3
अभि स्वपूभिर्मिथो वपन्त वातस्वनसः श्येना अस्पृध्रन् ॥
ये शक्तियाँ अपनी ताकत से एक दूसरे को साफ करती हैं। हवा की आवाज़ के साथ बाज़ की तरह तेज़ चलती हैं। कोई उन्हे रोके नहीं, वो आगे बढ़ते हैं। रास्ता साफ करते हैं।
Mantra 4
एतानि धीरो निण्या चिकेत पृश्निर्यदूधो मही जभार ॥
जो रिशि पक्का है, वो छुपी चीज़ें समझता है। जब पृश्नि माता ने दूध दिया, बड़ी मा ने पाल पोस के बड़ा किया।
Mantra 5
सा विट् सुवीरा मरुद्भिरस्तु सनात्सहन्ती पुष्यन्ती नृम्णम् ॥
वो गाँव मरुत के साथ वीरों से भरा हो। पुराना से चल आया हो, जीता रहे, आदमियों की ताकत बढ़ाता रहे।
Mantra 6
यामं येष्ठाः शुभा शोभिष्ठाः श्रिया सम्मिश्ला ओजोभिरुग्राः ॥
मरुत, तुम आगे चलने वाले हो। सुंदर हो, चमकते हो। चमक और ताकत से भरे हो। तुम्हारी शक्ति बड़ी है।
Mantra 7
उग्रं व ओजः स्थिरा शवांस्यधा मरुद्भिर्गणस्तुविष्मान् ॥
तुम्हारी ताकत तेज़ है, तुम्हारी शक्ति पक्की है। मरुत के साथ ये सेना बड़ी स्ट्रॉन्ग हो जाती है।
Mantra 8
शुभ्रो वः शुष्मः क्रुध्मी मनांसि धुनिर्मुनिरिव शर्धस्य धृष्णोः ॥
मरुत्स, तुम्हारी ताकत चमकदार है और बहुत तेज़ है। यह ताकत लोगों के दिल में हलचल मचा देती है। जैसे कोई रिशि भाव में डूब जाता है, वैसे ही यह हिम्मत वाले लोगों के मन को हिला देती है।
Mantra 9
सनेम्यस्मद्युयोत दिद्युं मा वो दुर्मतिरिह प्रणङ्नः ॥
मरुत्स, हमसे कोई बुरी चीज़ दूर भगा दो। कोई बला हमारे ऊपर न आए। कोई बुरा इरादा हमारे पास न आए। हमें बचा के रखना।
Mantra 10
प्रिया वो नाम हुवे तुराणामा यत्तृपन्मरुतो वावशानाः ॥
मैं तुम्हारा प्यारा नाम ले के पुकारता हूँ, जो जल्दी आते हो। मरुत्स, तुम खुशी से भाग के आओ और खुश हो जाओ। मैं तुम्हे बुला रहा हूँ।
Mantra 11
स्वायुधास इष्मिणः सुनिष्का उत स्वयं तन्वः शुम्भमानाः ॥
मरुत्स के पास अपने हथियार हैं और वो तेज़ हैं। उन्होंने सोना पहना है, वो ऐसे चमक रहे हैं। वो अपने आप को सजाके खड़े हैं, देखने में अच्छे लग रहे हैं।
Mantra 12
शुची वो हव्या मरुतः शुचीनां शुचिं हिनोम्यध्वरं शुचिभ्यः । ऋतेन सत्यमृतसाप आयञ्छुचिजन्मानः शुचयः पावकाः ॥
मरुत्स, तुम्हारे लिए जो चढ़ाया जाता है वो साफ है। मैं भी साफ मन से यह पूजा करता हूँ। सच्चाई से तुम सच तक पहुँचते हो। तुम साफ पैदा हुए हो, तुम साफ हो और तुम जला के साफ करते हो।
Mantra 13
अंसेष्वा मरुतः खादयो वो वक्षस्सु रुक्मा उपशिश्रियाणाः । वि विद्युतो न वृष्टिभी रुचाना अनु स्वधामायुधैर्यच्छमानाः ॥
मरुत देवता के कंधों पर तेज़ हथियार बंधे हैं। उनकी छाती पर सोने जैसी चमक है। वो बिजली की तरह चमक के बारिश के साथ आते हैं। अपने नियम के हिसाब से चलते हैं और अपने हथियार चलाते हैं।
Mantra 14
प्र बुध्न्या व ईरते महांसि प्र नामानि प्रयज्यवस्तिरध्वम् । सहस्रियं दम्यं भागमेतं गृहमेधीयं मरुतो जुषध्वम् ॥
मरुत देवता की महता ऊपर उठती है। उनके नाम फैल जाते हैं क्योंकि वो भक्ति में लगे हैं। हज़ार गुना बरकत वाला हिस्सा ले लो। यह घर के लिए अच्छा है। मरुत देवता, इसे अपना लो।
Mantra 15
यदि स्तुतस्य मरुतो अधीथेत्था विप्रस्य वाजिनो हवीमन् । मक्षू रायः सुवीर्यस्य दात नू चिद्यमन्य आदभदरावा ॥
अगर तुम उसकी सुन लो जो स्तुति कर रहा है और भगवान को पूजा कर रहा है। तो जल्दी से उसको धन और शक्ति दो। जो लोग देते हैं उनको कोई कम नहीं कर सकता। वो बरकत से भरा रहता है।
Mantra 16
अत्यासो न ये मरुतः स्वञ्चो यक्षदृशो न शुभयन्त मर्याः । ते हर्म्येष्ठाः शिशवो न शुभ्रा वत्सासो न प्रक्रीळिनः पयोधाः ॥
मरुत देवता तेज़ दौड़ने वाले घोड़ों की तरह हैं। अपनी मर्ज़ी से चलते हैं और चमकते हैं जैसे कोई खूबसूरत चीज़ दिखे। वो जवान वीर हैं जो सबको अच्छा लगने लगते हैं। घर के बच्चों की तरह चमकदे हैं। बछड़े की तरह खेलते हैं और दूध देते हैं। हम में शक्ति भरते हैं।
Mantra 17
दशस्यन्तो नो मरुतो मृळन्तु वरिवस्यन्तो रोदसी सुमेके । आरे गोहा नृहा वधो वो अस्तु सुम्नेभिरस्मे वसवो नमध्वम् ॥
मरुत देवता हमें इज़्ज़त दें और हमारे लिए रास्ता खोल दें। हमें अपना आशीर्वाद दें। वो दोनों दुनिया का काम करते हैं। हमसे दूर रहो जो रोशनी और जान को मारता है। अपनी अच्छी शक्ति से हमारे पास आओ और मदद करो।
Mantra 18
आ वो होता जोहवीति सत्तः सत्राचीं रातिं मरुतो गृणानः । य ईवतो वृषणो अस्ति गोपाः सो अद्वयावी हवते व उक्थैः ॥
पंडित जी बैठे हैं यहाँ, सच्चे दिल से पूजा कर रहे हैं। वो मरुत देवताओं को बुला रहे हैं, उनकी बड़ाई कर रहे हैं। मरुत लोग जो हैं, वो ताकत वाले हैं, चमक के रखवाले हैं। वो बिना किसी भेद के तुम्हे अपने गान से पुकारते हैं।
Mantra 19
इमे तुरं मरुतो रामयन्तीमे सहः सहस आ नमन्ति । इमे शंसं वनुष्यतो नि पान्ति गुरु द्वेषो अररुषे दधन्ति ॥
यह मरुत देवता तेज़ ताकत को खुश करते हैं। यह बड़ी ताकतें उस बड़े बल के आगे झुकती हैं। यह उन लोगों की बड़ाई की रखवाली करते हैं जो भगवान को ढूंढते हैं। दुश्मन लोगों के लिए वो बड़ा भारी गुस्सा रखते हैं।
Mantra 20
इमे रध्रं चिन्मरुतो जुनन्ति भृमिं चिद्यथा वसवो जुषन्त । अप बाधध्वं वृषणस्तमांसि धत्त विश्वं तनयं तोकमस्मे ॥
मरुत देवता ऐसे लोगों को भी आगे बढ़ा देते हैं जो थके हैं, गिरते पड़े हैं। जैसे वसु देवता सही रास्ते से खुश होते हैं। हे ताकत वालो, अंधेरा दूर करो। हमारे बच्चों और परिवार को आगे बढ़ाओ।
Mantra 21
मा वो दात्रान्मरुतो निरराम मा पश्चाद्दघ्म रथ्यो विभागे । आ नः स्पार्हे भजतना वसव्ये यदीं सुजातं वृषणो वो अस्ति ॥
मरुत देवता, हमे अपने तोहफे से मत काटो। अपनी दुनिया में हमे पीछे मत छोड़ो। हमारे साथ अच्छी दौलत बाँटो। तुम में ताकत है, तुम दे सकते हो।
Mantra 22
सं यद्धनन्त मन्युभिर्जनासः शूरा यह्वीष्वोषधीषु विक्षु । अध स्मा नो मरुतो रुद्रियासस्त्रातारो भूत पृतनास्वर्यः ॥
जब लोग गुस्से में लड़ते हैं, जब बहादुर लोग नदियों और पेड़ों के बीच लड़ते हैं। तब मरुत देवता, तुम हमारे रखवाले बनो। तुम रुद्र के हो, तुम लड़ाई में हमारी रक्षा करो।
Mantra 23
भूरि चक्र मरुतः पित्र्याण्युक्थानि या वः शस्यन्ते पुरा चित् । मरुद्भिरुग्रः पृतनासु साळ्हा मरुद्भिरित्सनिता वाजमर्वा ॥
मरुत्स, तुमने बहुत काम किए हैं। पहले भी लोग तुम्हारे लिए गाना गाते थे। जो लोग तुम्हारे साथ लड़ते हैं, वो दुश्मन पर जीत जाते हैं। तुम्हारे साथ घोड़ा भी तेज़ भागता है और ताकत पा लेता है।
Mantra 24
अस्मे वीरो मरुतः शुष्म्यस्तु जनानां यो असुरो विधर्ता । अपो येन सुक्षितये तरेमाध स्वमोको अभि वः स्याम ॥
मरुत्स, हमारे अंदर एक बहादुर आदमी बना दो जो लोगों का काम संभाले। उसकी मदद से हम पानी पार करके अच्छे घर पहुँचें। फिर हम अपने घर आजाएँ तुम्हारे सामने।
Mantra 25
तन्न इन्द्रो वरुणो मित्रो अग्निराप ओषधीर्वनिनो जुषन्त । शर्मन्त्स्याम मरुतामुपस्थे यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः ॥
इंद्र, वरुण, मित्र, अग्नि, पानी, पेड़-पौधे और जंगल सब हमारी बात मान लें। हम मरुत्स की गोद में सुखी रहें। तुम हमेशा हमें बुराई से बचाते रहो।
They are Rudra’s youthful troop of storm-gods, moving together with speed and brilliance, bringing winds, thunder, and rain, and also guarding those who honor them.
The weapons show their power to break obstacles and drive the storm, while the gold ornaments and lightning imagery show their radiant, sky-bright presence and life-giving rain.
That the offering be accepted by the chief gods and nature-powers, and that the worshippers live in peace ‘in the lap of the Maruts,’ protected always with well-being.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
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