Deity · Ramcharitmanas

Shiva in the Ramcharitmanas

शिवNamed in 308 verses

Speaks in 57 verses

In this book

Named as
Shambhu, Shankara, Mahesha, Hara, Mahadeva, Śiva, Rudra, Tripurari
  1. Kanda 1186
  2. Kanda 231
  3. Kanda 37
  4. Kanda 47
  5. Kanda 510
  6. Kanda 627
  7. Kanda 740

Key chapters

The chapters where Shiva matters most.

  1. भक्ति-उद्गम की पहली सीढ़ी: ‘श्रद्धा’ से ‘श्रवण’ और ‘संशय-निवृत्ति’ तक। बालकाण्ड में रामकथा का प्रवेश-द्वार शिव-उमा संवाद है, जहाँ जिज्ञासा (उमा) गुरु-वाणी (शिव) से शुद्ध होकर ‘सगुण’ में ‘निर्गुण’ की पह

    Ramcharitmanas 1.11 · 17 verses

  2. सोपान-प्रवेश: ‘भक्ति का बीज’, शिव-उमा संवाद के माध्यम से जीव के भीतर संकल्प (हठ), श्रद्धा (गुर-वचन-प्रतीति) और काम-निग्रह का उदय। यहाँ कथा-भूमि राम-जन्म से पहले ‘अंतःकरण-शुद्धि’ की तैयारी करती है: देवह

    Ramcharitmanas 1.9 · 16 verses

  3. भक्ति का जन्म-चरण: जिज्ञासा (प्रश्न) से श्रद्धा, फिर श्रद्धा से शरणागति। बालकाण्ड ‘सोपान’ में साधक को ‘कथा-प्रवेश’ का अधिकार देता है, जहाँ अहं-रहित प्रश्न (उमा) और कृपा-समाधान (शंकर) से मानस-सर में प्र

    Ramcharitmanas 1.13 · 6 verses

  4. The first sopāna (step) where bhakti is born through śravaṇa-darśana: the seeker’s heart is trained to recognize divinity hidden in apparent childhood, humility, and ‘play’ (kautuka). In this passage,

    Ramcharitmanas 1.26 · 9 verses

  5. सोपान-शिखर का ‘लोक-धर्म-परिक्षण’ चरण: राम-राज्य के आदर्श के बाद कलियुग-स्वभाव का निदान, और उससे भी ऊपर ‘नाम-आश्रय’ द्वारा सहज निस्तार। उत्तरकाण्ड यहाँ ‘समाज-व्यवस्था’ का वर्णन मात्र नहीं, बल्कि साधक क

    Ramcharitmanas 7.11 · 8 verses

  6. सोपान-प्रवेश: ‘श्रद्धा-विश्वास’ की देहरी पर खड़े होकर साधक गुरु-वंदना, सत्संग-महिमा, और राम-नाम/राम-गुण के प्रति अनुराग से ‘मानस’ में अवगाहन करता है। यह काण्ड जन्म-कथा से पहले ‘भक्ति की जन्मभूमि’ बनात

    Ramcharitmanas 1.1 · 7 verses

  7. सोपान-प्रवेश: ‘भक्ति का जन्म’ और ‘सगुण-साकार के सौंदर्य में चित्त-स्थापन’। बालकाण्ड मन को कथा-श्रवण योग्य बनाता है, नाम, रूप, गुण, लीला के माध्यम से चित्त की मलिनता घटाकर उसे मंगल-लग्न (अनुकूल काल) की

    Ramcharitmanas 1.32 · 7 verses

  8. यह सोपान ‘धर्म-विजय’ का द्वार है: साधक के भीतर ‘अहं-लंका’ (अभिमान, भय, काम-क्रोध) पर सेतु-बंध के द्वारा विवेक-मार्ग बनता है। यहाँ भक्ति केवल भाव नहीं रहती, वह संगठन, अनुशासन, और ‘नाम-सेतु’ बनकर जीव को

    Ramcharitmanas 6.1 · 4 verses

  9. राज्याभिषेक-उपरांत ‘धर्म-स्थापन’ और ‘भक्ति-स्थैर्य’ का सोपान: साधक के भीतर राम-राज्य (अन्तःकरण-राज्य) की प्रतिष्ठा, जहाँ सेवा, सत्संग, और नाम-स्मरण जीवन-व्यवस्था बनते हैं। यह चरण ‘फल-श्रुति’ द्वारा पा

    Ramcharitmanas 7.2 · 6 verses

  10. This Sopāna is the awakening of bhakti through ‘darśana’ and ‘parīkṣā’: the soul witnesses the Lord’s effortless supremacy (bow-breaking) and learns that egoic strength collapses before grace. Bālakāṇ

    Ramcharitmanas 1.27 · 5 verses

Every verse that names Shiva

308 verses

  1. 1.1.1

    मैं सरस्वती और गणेश को प्रणाम करता हूँ। इन्हीं ने अक्षर बनाए, अर्थ बनाए, कविता के रस बनाए, छंद बनाए, और हर मंगल का काम किया। मैं पार्वती और शिव को प्रणाम करता हूँ। ये दोनों श्रद्धा और विश्वास के रूप हैं। इनके बिना सिद्ध लोग भी अपने दिल के…

  2. 1.1.2

    जिस को याद करने से काम हो जाता है, जो शिव के लोगों का लीडर है, जिसका मुह हाथी जैसा है, जो ग्यान का खजाना है और अच्छे गुनों का घर है, वो मुझ पर कृपा करे। जिसकी कृपा से जो बोल नहीं सकता वो बोलने लगता है, और जो लंगड़ा है वो सबसे ऊंचा मुश्किल…

  3. 1.1.3

    मैं अपने गुरु के चरण कमल की धूल को प्रणाम करता हूं। उसमें प्यारी खुशबू है, मीठी महक है, और भक्ति का रस है। ये अमृत की जड़ से बना एक खूबसूरत चूरन है। ये दुनिया की सारी बीमारियों का पूरा परिवार खत्म कर देता है। ये शिव जी के शरीर की सुद्ध राख…

  4. 1.1.5

    गुरु के चरणों की धूल एक नरम और सुंदर कजल है, आँखों के लिए अमृत है, जो आँख की हर खराबी को खत्म कर देती है। उस कजल से समझ की आँखों को साफ करके मैं राम के करमों को बताता हूँ, जो जनम मरण के चक्कर से आज़ाद कर देते हैं। पहले मैं ब्राह्मण के…

  5. 1.1.7

    यहाँ नहाने का फल तुरंत दिखता है। कौवा कोयल बन जाता है और बगुला हंस बन जाता है। कोई इस सुन कर हैरान न हो। सतसंग की महिमा कोई छिपी हुई बात नहीं है। वाल्मीकि, नारद और मटके से पैदा हुए अगस्त्य ने अपने अपने मुँह से अपनी अपनी कहानी कह दी है।…

  6. 1.1.9

    अब मैं बुरों के झुंड को भी दिल से प्रणाम करता हूँ। ये लोग बिना किसी वजह उनके भी दुश्मन हो जाते हैं जो उनके साथ अच्छे हैं। दूसरे का बुरा उनको अपना फायदा लगता है, और दूसरे का फायदा उनको नुकसान। दूसरे की तबाही में उनको खुशी मिलती है, और दूसरे…

  7. 1.1.19

    बुरे लोग मज़ाक उड़ाएंगे तो भी मेरा फायदा होगा। कौवा कोएल की मीठी आवाज़ को खराब बोलता है। बगुला हंस पर हँसी करता है, और मेंढक चातक पर। वैसे ही गंदी सोच वाले बुरे लोग साफ़ बात पर हँसी करते हैं। जिन्हें काव्य का स्वाद नहीं और राम के चरणों से…

  8. 1.2.21

    इस काव्य में राम का नाम है। बहुत पवित्र है। पुरान और वेदों का सार है। ये नाम मंगल का घर है। हर तरह के अमंगल को दूर करता है। शिव और पार्वती मिलकर इसे जपते हैं। कोई भी अच्हा कवि चाहे कितनी भी सुंदर रचना करे, राम के नाम के बिना उसमे चमक नहीं…

  9. 1.2.22

    तुलसीदास कहते हैं कि राम की कहानी मंगल लाती है और कलि युग की गंदगी हटा देती है। मेरी कविता का रास्ता टेढ़ा है, जैसे नदी का रास्ता टेढ़ा होता है। पर जैसे नदी का पानी साफ होता है, वैसे ही ये कहानी भी साफ है। भगवान के अच्छे नाम की वजह से मेरी…

  10. 1.2.27

    सारस्वती, शेष, शिव और ब्रह्मा, और सारी आगम, निगम और पुरान, बिना रुके उसके गुन गाते रहते हैं, और कहते हैं कि उसको अलग अलग तरीके से भी नहीं समझा सकते।

  11. 1.2.31

    फिर मैं सरस्वती और गंगा को मथा टेकता हूं। सरस्वती बोलने की देवी हैं और गंगा देवताओं की नदी हैं। दोनों पाक हैं और दोनों के काम प्यारे हैं। एक से नहाने और पानी पीने से पाप खतम हो जाता है। दूसरी को बताने और सुनने से समझ-बुद्धि की कमी दूर हो…

  12. 1.2.32

    अगर शिव और गौरी मुझ पर खुश हो जाएँ, सपने में हो या सच में, तो जो मैंने कहा है वो तुरंत सच हो जाए, और मेरी भाषा में लिखी कविता का असर रहे।

  13. 1.2.39

    मैं राम के नाम को नमन करता हूं। राम रघु परिवार के सबसे अच्छे हैं, और उनका नाम आग, सूरज और चाँद का सोर्स है। यह नाम ब्रह्मा, विष्णु और शिव का अस्तित्व है, और वेद इसकी सांस है। यह बिना किसी गुण के है, इसका कोई कंपेरिज़न नहीं, और यह सारे गुण…

  14. 1.3.49

    अपने भक्तों के लिए राम ने इंसान का शरीर लिया। खुद तकलीफ सही के साधु लोगों को खुश किया। पर उनका नाम प्यार से जो जपता है, वैसे भक्त बिना किसी मेहनत के खुशी और मंगल का घर बन जाते हैं। राम ने एक औरत की मदद की, वोह भी एक तपस्वी की पत्नी थी। पर…

  15. 1.3.52

    राम का नाम उस राम से भी बड़ा है जो आकार वाले हैं, और उस ब्रह्मा से भी बड़ा है जिसका कोई आकार नहीं है। यह नाम उनको भी वरदान देता है जो खुद सबसे बड़े वरदान देने वाले हैं। शिव ने अपने दिल में यह समझ लिया, और राम की कथा के सौ करोड़ लाइन्स में…

  16. 1.3.53

    नाम की कृपा से शिव कभी खत्म नहीं होते। उनकी चीज़ें तोह अमंगल हैं, पर वोह खुद मंगल का बड़ा भंडार हैं। शुक, सनक आदि, सिद्ध, रिशि और योगी, नाम की कृपा से ब्रह्म के सुख का आनंद लेते हैं। नारद नाम की ताकत जानते थे। दुनिया में सब हरि को प्यार…

  17. 1.4.61

    याज्ञवल्क्य ने बड़े रिशि भरद्वाज को एक बहुत सुंदर कथा सुनाई थी। वही बात मैं अब बताऊंगा और समझाऊंगा। सब अच्छे लोग सुनो और खुशी पाओ। शिव ने यह सुंदर कथा बनाई, फिर कृपा करके उमा को सुनाई। वही शिव ने यह काकभुशुंडि को दिया, क्योंकि उसको राम का…

  18. 1.4.63

    गुरु ने बार बार बताया, और जितना मेरे मन में गया मैंने समझ लिया। वही कथा मैं सबकी भाषा में लिखूंगा, ताकि मेरा अपना मन रोशन हो जाए। जितनी बुद्धि और विवेक मेरे पास है, उतनी मैं यह कहूंगा, जैसे हरि मेरे दिल में प्रेरणा करते हैं। यह कथा मेरा…

  19. 1.4.66

    पार्वती ने जिस तरह सवाल पूछे और शिव ने जिस तरह उनका जवाब दिया। सब कुछ अपनी वजह के साथ मैं गाके सुनाऊंगा, कहानी को अजीब और अलग-अलग तरह से बनाके। जो अभी तक यह कहानी नहीं सुनता है, वो सुन कर हैरान ना हो। ग्यानी लोग ऐसी अजीब कहानी सुनते हैं पर…

  20. 1.4.68

    इस तरह सब शक दूर करके, अपने गुरु के चरण की धूल सिर पे रख कर। फिर मैं सबसे हाथ जोड़ के कहता हूँ, ताकि इस कथा को सुनाने में कोई खराबी ना आये। अब शिव को सिर झुकाके, मैं राम के गुनों की साफ़ कथा सुनाता हूँ। साल सोलह सौ इकत्तीस में, मैं हरि के…