
Sukta 5.29
This hymn praises Indra as the steadfast, all-knowing leader of the Maruts, celebrating his world-ordering power and his decisive victory over the Serpent (Ahi), the archetype of obstruction. It repeatedly uses the motif of “three” (Aryaman’s ordinance, the luminous realms, streams/waters) to frame Indra’s triumph as a restoration of cosmic order and the release of life-giving waters and light. The seer closes by offering newly fashioned brahman (hymnic craft) to Indra, likening the prayer to a well-made garment and a finely built chariot.
Mantra 1
त्र्यर्यमा मनुषो देवताता त्री रोचना दिव्या धारयन्त । अर्चन्ति त्वा मरुतः पूतदक्षास्त्वमेषामृषिरिन्द्रासि धीरः ॥
अर्यमन की तीन शक्तियाँ हैं जो इंसान के लिए भगवान की तरफ से आई हैं। भगवान तीन दुनिया को रोशनी में रखते हैं। मरुत देवता जो शुद्ध शक्ति वाले हैं, तुम्हारी स्तुति करते हैं। हे इंद्र, तुम उनका गुरु हो और तुम्हारा दिमाग बहुत स्ट्रांग है।
Mantra 2
अनु यदीं मरुतो मन्दसानमार्चन्निन्द्रं पपिवांसं सुतस्य । आदत्त वज्रमभि यदहिं हन्नपो यह्वीरसृजत्सर्तवा उ ॥
जब मरुत देवता खुश हो के इंद्र की तारीफ करने लगे, इंद्र ने सोम पी लिया था। तब उसने वज्र उठाया। उसने उस बड़े साँप को मारा जो रास्ता रोक रहा था। उसने पानी को आज़ाद कर दिया ताकि वो बह सके।
Mantra 3
उत ब्रह्माणो मरुतो मे अस्येन्द्रः सोमस्य सुषुतस्य पेयाः । तद्धि हव्यं मनुषे गा अविन्ददहन्नहिं पपिवाँ इन्द्रो अस्य ॥
मरुत देवता मेरे साथ हैं इस काम के लिए। इंद्र को सोम पीना है जो फ्रेश है। यही भगवान के लिए चढ़ावा है। इंद्र ने इंसान के लिए रोशनी ढूंढी। उसने सोम पी के उस साँप को मारा जो रोके हुआ था।
Mantra 4
आद्रोदसी वितरं वि ष्कभायत्संविव्यानश्चिद्भियसे मृगं कः । जिगर्तिमिन्द्रो अपजर्गुराणः प्रति श्वसन्तमव दानवं हन् ॥
उसने दुनिया को फैला के अलग किया। जो लोग डर में थे, वो काँपने लगे। इंद्र ज़ोर से गरजा और उस दानव को मारा जो उसके पास आ रहा था। उसने अंधेरी ताकत को पीछे कर दिया।
Mantra 5
अध क्रत्वा मघवन्तुभ्यं देवा अनु विश्वे अददुः सोमपेयम् । यत्सूर्यस्य हरितः पतन्तीः पुरः सतीरुपरा एतशे कः ॥
मघवन, जब तुमने सोचा, सारे देवता मान गए। उन्होंने तुम्हे सोम पीने को दिया। सूरज के घोड़े जब आगे दौड़ते हैं, ऊपर उड़ते हैं, कौन उनके पीछे जा सकता है? वो रोशनी इतनी तेज़ है कि कोई उसको पकड़ नहीं सकता।
Mantra 6
नव यदस्य नवतिं च भोगान्त्साकं वज्रेण मघवा विवृश्चत् । अर्चन्तीन्द्रं मरुतः सधस्थे त्रैष्टुभेन वचसा बाधत द्याम् ॥
जब मघवन ने वज्र मारा, उसने दुश्मन के 99 मज़े तोड़ दिए। मरुत, जो साथ में थे, इंद्र की तारीफ करने लगे। उनकी आवाज़ इतनी ज़ोर की थी कि आसमान खुल गया। रोशनी के लिए जगह बन गई।
Mantra 7
सखा सख्ये अपचत्तूयमग्निरस्य क्रत्वा महिषा त्री शतानि । त्री साकमिन्द्रो मनुषः सरांसि सुतं पिबद्वृत्रहत्याय सोमम् ॥
अग्नि ने दोस्ती में तेज़ी से उसके लिए खाना बनाया। वो बड़े-बड़े 300 हिस्सों में था। इंद्र ने इंसान की मदद से तीनों नदियाँ पा ली। सोम पी कर वो वृत्र को मारने गया। पानी आज़ाद हो गया।
Mantra 8
त्री यच्छता महिषाणामघो मास्त्री सरांसि मघवा सोम्यापाः । कारं न विश्वे अह्वन्त देवा भरमिन्द्राय यदहिं जघान ॥
मघवन ने 300 ताकत जीती और तीनों नदियाँ भी। सोम के पानी भी उसके पास आ गए। सारे देवता ने चिल्लाके इंद्र की जीत का जश्न मनाया। उसने उस बड़े साँप को मारा था जो सब रोक रहा था।
Mantra 9
उशना यत्सहस्यैरयातं गृहमिन्द्र जूजुवानेभिरश्वैः । वन्वानो अत्र सरथं ययाथ कुत्सेन देवैरवनोर्ह शुष्णम् ॥
इंद्र, जब तुम अपने दोस्तों और घोड़ों के साथ उस घर पहुँचे, तुमने रथ लिया और आगे बढ़ गए। कुत्स और देवता तुम्हारे साथ थे। तुमने शुष्ण को हराया जो सब को सूखा रहा था। अब पानी मिलने लगा।
Mantra 10
प्रान्यच्चक्रमवृहः सूर्यस्य कुत्सायान्यद्वरिवो यातवेऽकः । अनासो दस्यूँरमृणो वधेन नि दुर्योण आवृणङ्मृध्रवाचः ॥
इंद्र ने सूर्य का एक पहिया निकाला और कुत्स के लिए एक नया रास्ता बनाया। उसने दुश्मनों को मारा, जो लोग गलत बात करते थे। उन्हें अंधेरे में बंद कर दिया ताकि सच्चा रास्ता आगे बढ़ सके।
Mantra 11
स्तोमासस्त्वा गौरिवीतेरवर्धन्नरन्धयो वैदथिनाय पिप्रुम् । आ त्वामृजिश्वा सख्याय चक्रे पचन्पक्तीरपिबः सोममस्य ॥
लोगों के गाने ने इंद्र को ताकत दी। उसने पिप्रु नाम के दुश्मन को हराया जो गलत काम करता था। रिजिस्वा ने इंद्र को अपना दोस्त बनाया। दोनों मिलकर सोम रस पिया और काम किया।
Mantra 12
नवग्वासः सुतसोमास इन्द्रं दशग्वासो अभ्यर्चन्त्यर्कैः । गव्यं चिदूर्वमपिधानवन्तं तं चिन्नरः शशमाना अप व्रन् ॥
नवग्व और दशग्व नाम के रिषि सोम रस लेकर इंद्र की पूजा करते हैं। एक बार गायों का बाड़ा बंद था, कोई अंदर जा नहीं सकता था। रिशियों ने मेहनत करके उसको खोला ताकि रास्ता मिल जाए।
Mantra 13
कथो नु ते परि चराणि विद्वान्वीर्या मघवन्या चकर्थ । या चो नु नव्या कृणवः शविष्ठ प्रेदु ता ते विदथेषु ब्रवाम ॥
भगवान, तुम्हारी यह सारी कहानियाँ काफी बड़ी हैं। तुमने जो नए काम किये हैं, उनको हम लोगों के बीच में बतायेंगे। तुम्हारी ताकत की बात सबको सुनायेंगे।
Mantra 14
एता विश्वा चकृवाँ इन्द्र भूर्यपरीतो जनुषा वीर्येण । या चिन्नु वज्रिन्कृणवो दधृष्वान्न ते वर्ता तविष्या अस्ति तस्याः ॥
इंद्र, तूने बहुत काम किये हैं, पैदा होते ही तूने ताकत दिखाई। जो भी काम अब करेगा, उसकी कोई सीमा नहीं है। तेरे पास वज्र है, तेरी ताकत का कोई एंड नहीं।
Mantra 15
इन्द्र ब्रह्म क्रियमाणा जुषस्व या ते शविष्ठ नव्या अकर्म । वस्त्रेव भद्रा सुकृता वसूयू रथं न धीरः स्वपा अतक्षम् ॥
हे इंद्र, यह पूजा जो हम कर रहे हैं, इसको अपना ले। हमने तेरे लिए नए काम किए हैं, तू सबसे ताकतवाला है। यह पूजा बिल्कुल अच्छे कपड़े जैसी है, अच्छी तरह बनाई हुई। पंडित लोगों ने इसको रथ जैसा बनाया है, बहुत सोच समझ के। यह सब तेरे लिए है इंद्र।
A threefold vision of order: Aryaman’s ordinance for humans and the three luminous realms upheld by the gods, with the Maruts praising Indra as their wise seer.
Indra’s might is unfolded through images of force, streams, and Soma-waters, presenting his power as both cosmic (world-supporting) and communal (acclaimed by all gods).
The victory shout of the gods at the decisive act: Indra slays the Serpent (Ahi), releasing what was held back and securing the triumph of light and flow over blockage.
The poet offers a freshly crafted brahman to Indra—like a fine garment or a well-built chariot—sealing praise into a ritual instrument meant to carry blessings to the worshippers.
try aryamā … trī rocanā
yad ahiṃ jaghāna
indra brahma kriyamāṇā juṣasva
It praises Indra as the great victor who breaks obstruction (Ahi) and releases waters and light, with the Maruts singing alongside him. It also links this victory to cosmic and social order through Aryaman.
The “three” points to a structured cosmos—three luminous realms and a threefold sense of ordinance/order (Aryaman). It frames Indra’s victory as restoring a stable, well-arranged world.
It means the poet’s hymn itself is a carefully made sacred work. Like a well-made garment or chariot, the prayer is presented as a ritual vehicle meant to carry blessings and strength from Indra.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
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