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Sukta 1.38
Kaṇva (Kaṇva lineage)
Marutaḥ
Gāyatrī/Anuṣṭubh-like? (uncertain; requires metrical verification)
This hymn invokes the Marut-host as the swift, thunder-voiced companions of Indra, asking what delight draws them and urging them to accept the well-prepared offering. It praises their stormy brilliance—lightning, rain, and roaring power—while seeking protection, increase, and inner strengthening for the worshippers. The sukta culminates in a direct call to adore the Maruts and to have their might “grow here within us.”
Mantra 1
कद्ध नूनं कधप्रियः पिता पुत्रं न हस्तयोः । दधिध्वे वृक्तबर्हिषः ॥
मरुत देवता, तुम्हे क्या पसंद है? बाप जैसे बेटा को गोद में उठाता है, वैसे ही तुम हमारी पूजा संभालो। यहाँ सब तैयार है, जगह साफ है।
Mantra 2
क्व नूनं कद्वो अर्थं गन्ता दिवो न पृथिव्याः । क्व वो गावो न रण्यन्ति ॥
मरुत देवता, तुम कहाँ जा रहे हो? आसमान से हो या धरती से, कहाँ आ रहे हो? तुम्हारी किरणें कहाँ चमक रही हैं जो हमें खुशी देती हैं?
Mantra 3
क्व वः सुम्ना नव्यांसि मरुतः क्व सुविता । क्वो विश्वानि सौभगा ॥
हे मरुत, तुम्हारी नई नई किरणें कहाँ हैं? तुम्हारा साथ कहाँ है जो हमें सही रास्ता दिखाता है? तुम्हारी खुशियाँ कहाँ हैं जो हमें मिलती हैं?
Mantra 4
यद्यूयं पृश्निमातरो मर्तासः स्यातन । स्तोता वो अमृतः स्यात् ॥
मरुत देवता, तुम पृष्णि माता के बेटे हो। अगर तुम इंसान जैसे मरने वाले होते, तो तुम्हारा गायक अमर हो जाता। तुम्हारी वजह से वो अमृत पा लेता।
Mantra 5
मा वो मृगो न यवसे जरिता भूदजोष्यः । पथा यमस्य गादुप ॥
भगवान, मेरा गाना ऐसा मत होना जैसे कोई जानवर घास ढूँढता भटके। जो सच्चे भक्ति में खुश नहीं रहता। उसे यम के रास्ते मत जाने देना, वो रास्ता नीचे ले जाता है।
Mantra 6
मो षु णः परापरा निॠतिर्दुर्हणा वधीत् । पदीष्ट तृष्णया सह ॥
हमें तबाही न मिले, जो इधर-उधर घूमती है और उसे हराना मुश्किल है। प्यास हमारे पास न आए, जो आत्मा को सूख देती है।
Mantra 7
सत्यं त्वेषा अमवन्तो धन्वञ्चिदा रुद्रियासः । मिहं कृण्वन्त्यवाताम् ॥
रुद्रिय देवता सच में बड़े ताकतवाले हैं। सूखी ज़मीन पर भी वो बादल लाते हैं। वो बारिश करके सब को नया जीवन देते हैं।
Mantra 8
वाश्रेव विद्युन्मिमाति वत्सं न माता सिषक्ति । यदेषां वृष्टिरसर्जि ॥
बिजली चमकती है जैसे कोई आवाज़ कर रहा हो। माँ अपने बच्चे को अपने पास सोती है, वैसे ही यह शक्ति सब को अपने पास रखती है। जब बारिश आती है तो जीवन सुरक्षित हो जाता है।
Mantra 9
दिवा चित्तमः कृण्वन्ति पर्जन्येनोदवाहेन । यत्पृथिवीं व्युन्दन्ति ॥
दिन में भी वो अंधेरा कर देते हैं जब बादल आते हैं। ज़मीन को वो गीला कर देते हैं और ऊपर की मिट्टी उलट देते हैं ताकि नीचे से पानी आ सके।
Mantra 10
अध स्वनान्मरुतां विश्वमा सद्म पार्थिवम् । अरेजन्त प्र मानुषाः ॥
मरुत देवता की आवाज़ जब बरसती है, तो पूरी दुनिया का घर हिलने लगता है। लोगों के शरीर में काँपना आ जाता है। कोई बड़ी ताकत अंदर आ गई है।
Mantra 11
मरुतो वीळुपाणिभिश्चित्रा रोधस्वतीरनु । यातेमखिद्रयामभिः ॥
हे मरुत, तुम्हारे हाथ पक्के हैं। रास्ते में जो रुकावटें हैं, उनसे निकल के आओ। तुम्हारी ताकत कभी कम नहीं होती।
Mantra 12
स्थिरा वः सन्तु नेमयो रथा अश्वास एषाम् । सुसंस्कृता अभीशवः ॥
मरुत की रथ के पहिए मज़बूत हों। घोड़े और लगाम सब ठीक से बनी हों। जब यह सब सही हो, तो रास्ता साफ चलता है और मन हिलता नहीं।
Mantra 13
अच्छा वदा तना गिरा जरायै ब्रह्मणस्पतिम् । अग्निं मित्रं न दर्शतम् ॥
सीधी बात बोलो, दिल से। ब्रह्मणस्पति को बुलाओ, जो अग्नि है और दोस्त की तरह सामने खड़ा है। इससे शक्ति मिलती है और अंदर का सब सही हो जाता है।
Mantra 14
मिमीहि श्लोकमास्ये पर्जन्य इव ततनः । गाय गायत्रमुक्थ्यम् ॥
मुँह से जो शब्द निकलते हैं, उनको तोल के बोलो। जैसे बारिश बरसती है, वैसे ही शब्द फैलाओ। गायत्री मंत्र गाओ, यह सबसे पवित्र है।
Mantra 15
वन्दस्व मारुतं गणं त्वेषं पनस्युमर्किणम् । अस्मे वृद्धा असन्निह ॥
मरुत गण की पूजा करो। यह तेज़ हैं, आगे बढ़ने को तैयार, और अपनी आवाज़ में अग्नि जैसी ताकत रखते हैं। इनकी दुआ है कि यह हमारे अंदर स्ट्रॉन्ग हों और हम आगे बढ़ें।
The Maruts are a powerful group of storm deities—roaring like thunder and shining like lightning—who move together as a host and are closely associated with Indra.
It invites them to come to the sacrifice, accept the prepared offering, release life-giving rain, and grant protection, strength, and growth to the worshippers.
They represent intense, collective energy that can be frightening in nature but becomes a protective inner power when guided by prayer, order, and right intention.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
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