
गौरुडव्यूह-रचना तथा अर्धचन्द्र-प्रत्यव्यूह (Garuḍa Array and the Ardhacandra Counter-Formation)
Upa-parva: Vyuha-nirmāṇa (Battle-Array Formations) Episode
Sañjaya reports that at dawn Bhīṣma Śāṃtanava issues deployment orders and constructs a large Garuḍa (eagle-shaped) battle-array, motivated by the victory of Dhṛtarāṣṭra’s sons. The chapter inventories placements within the formation—its beak, eyes, head, neck, back, tail, and wings—by naming prominent commanders and allied contingents. In response, Arjuna (Savyasācī), coordinated with Dhṛṣṭadyumna, counter-deploys the Pāṇḍava host in an Ardhacandra (half-moon) array designed to meet the severity of the opposing formation. The narrative then shifts from schematic arrangement to kinetic engagement: the wings and center are described with leading figures (e.g., Bhīma holding a horn/wing; central leaders and supporting kings), culminating in the onset of a dense, mixed confrontation of chariots, elephants, horses, and infantry. The soundscape—drums and tumult—marks the transition from ordered strategy to full-scale battle conditions.
Chapter Arc: धृतराष्ट्र संजय से पूछते हैं—श्वेत जैसे महाधनुर्धर के शल्य के रथ के निकट पहुँचते ही दोनों सेनाओं में कैसा कोलाहल उठा और किसने उसे रोका। → श्वेत को अग्रणी बनाकर पाण्डव-पक्ष के महारथी कौरव-बल को दबाने लगते हैं; रणभूमि में नगाड़ों की कर्ण-विदारक ध्वनि, रथों-घोड़ों-हाथियों की भगदड़ और चारों ओर रथियों का मर्दन युद्ध को ‘तुमुल’ बना देता है। → क्रोध से लाल नेत्रों वाले भीष्म पर्वत पर उमड़ते जलप्रवाह की भाँति श्वेत पर टूट पड़ते हैं और ब्रह्मास्त्र-संयुक्त, लोम-हर्षक (रोमांचकारी/भयावह) बाण से उसे मृत्यु-तुल्य आघात देकर रण में गिरा देते हैं। → श्वेत पर्वत-शिखर के टूटकर गिरने की तरह धराशायी दिखता है; पाण्डव-महारथी और उनके क्षत्रिय शोकाकुल होते हैं, जबकि कौरव-पक्ष में हर्ष की लहर दौड़ती है। → श्वेत-वध के बाद पाण्डव-पक्ष के प्रतिशोध और अगले महाद्वंद्वों की आहट—रण का वेग थमता नहीं, और भीषण प्रतिघात की भूमिका बनती है।
Verse 1
#5०3८६>- हु # अष्टचत्वारिशोड ध्याय: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध धृतराष्ट्र रवाच एवं श्वेते महेष्वासे प्राप्ते शल्यरथं प्रति । कुरव: पाण्डवेयाश्व॒ किमकुर्वत संजय
قال دِهْرِتَرَاشْتْرَة: «حين تقدّم شْفِيتا، ذلك الرامي الجبّار، نحو عربة شَالْيَا، ماذا صنع الكورو وأبناء باندو في تلك اللحظة، يا سَنْجَيَا؟»
Verse 2
भीष्म: शान्तनव: कि वा तन्ममाचक्ष्व पृच्छत: । धृतराष्ट्रने पूछा--संजय! इस प्रकार महान् धनुर्धर श्वेतके शल्यके रथके समीप पहुँचनेपर कौरवों तथा पाण्डवोंने क्या किया? अथवा शान्तनुनन्दन भीष्मने कौन-सा पुरुषार्थ किया? मेरे पूछनेके अनुसार ये सब बातें मुझसे कहो || १ है ।। संजय उवाच राजन् शतसहस््राणि ततः: क्षत्रियपुड्वा:,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنْجَيَا: «أيها الملك، عندئذٍ اندفع مئات الألوف من خيرة محاربي الكشاتريا إلى الأمام. وقد عزموا على قتل ذلك المقاتل الأبرع، فغدت المعركة في تلك اللحظة واسعةً مضطربةً صاخبة—تصعيدًا تمليه شريعة المحارب: حمايةُ الأهل والصف، وضربُ أشدّ الأخطار رهبةً في الميدان.»
Verse 3
श्वेतं सेनापतिं शूरं पुरस्कृत्य महारथा: । राज्ञो बल॑ दर्शयन्तस्तव पुत्रस्य भारत,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنْجَيَا: «أيها الملك، يا بَهَارَتَا—جعلوا القائد الباسل شْفِيتا في المقدّمة، فتقدّم عظماء أصحاب العربات مُظهرين قوّتهم أمام ابنك. ثم لما اندفعوا على بِهِيشْمَا—وهو أسبق المقاتلين، العازم على قتل شْفِيتا—اندلعت معركة واسعة مضطربة.»
Verse 4
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य त्रातुमैच्छन्महारथा: । अभ्यवर्तन्त भीष्मस्य रथं हेमपरिष्कृतम्,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنْجَيَا: «أيها الملك، جعلوا شِكْهَنْدِين في المقدّمة رغبةً في حمايته، فانقضّ عظماء أصحاب العربات نحو عربة بِهِيشْمَا الموشّاة بالذهب. وحين اندفعوا على ذلك الأسبق في القتال بنية القتل، ارتفع في الميدان صخبٌ عظيمٌ مروّع، واشتعلت معركة واسعة مضطربة.»
Verse 5
तत् ते5हं सम्प्रवक्ष्यामि महावैशसमद्भुतम्,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنْجَيَا: «أيها الملك، سأقصّ عليك الآن ذلك المشهد العجيب من المذبحة العظمى. فلما تقدّم خيرة المحاربين بنية القتل، اندلعت في تلك الساعة معركة واسعة مضطربة.»
Verse 6
तत्राकरोद् रथोपस्थान् शून्यान् शान्तनवो बहून्,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया उस युद्धमें शान्तनुनन्दन भीष्मने बहुत-से रथोंकी बैठकोंको रथियोंसे शून्य कर दिया। वहाँ उन्होंने अत्यन्त अद्भुत कार्य किया। अपने बाणोंद्वारा बहुत-से श्रेष्ठ रथियोंको बहुत पीड़ा दी। वे सूर्यके समान तेजस्वी थे। उन्होंने अपने सायकोंद्वारा सूर्यदेवको भी आच्छादित कर दिया
قال سنجيا: هناك جعل بهيشما، ابن شانتانو، كثيرًا من منصّات العربات خاليةً من فرسانها. ولمّا اندفع أبرع المقاتلين بنيّة القتل، اضطربت المعركة واشتدّت حتى غدت هائلةً صاخبة.
Verse 7
तत्राद्भुतं महच्चक्रे शरैरार्च्छद् रथोत्तमान् । समावृणोच्छरैरर्कमर्कतुल्यप्रतापवान्,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया उस युद्धमें शान्तनुनन्दन भीष्मने बहुत-से रथोंकी बैठकोंको रथियोंसे शून्य कर दिया। वहाँ उन्होंने अत्यन्त अद्भुत कार्य किया। अपने बाणोंद्वारा बहुत-से श्रेष्ठ रथियोंको बहुत पीड़ा दी। वे सूर्यके समान तेजस्वी थे। उन्होंने अपने सायकोंद्वारा सूर्यदेवको भी आच्छादित कर दिया
قال سنجيا: «هناك أتى بهيشما بأمرٍ عجيبٍ عظيم. فبسِهامه أمطرَ أرقى العربات وأغرقها، وبهيبةٍ توازي الشمس سترَ الشمسَ نفسها بوابلٍ من نصاله. وحين اندفع قُدُمًا عازمًا على قتل أبرع المحاربين، تضخّم الاصطدام في تلك اللحظة حتى صار هائلًا صاخبًا.»
Verse 8
नुदन् समन्तात् समरे रविरुद्यन् यथा तमः । तेनाजौ प्रेषिता राजन् शरा: शतसहस्रश:,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया जैसे सूर्य उदित होकर अन्धकारको नष्ट कर देते हैं, उसी प्रकार वे सब ओर समरभूमिमें शत्रु-सेनाओंका संहार कर रहे थे। राजन! उनके द्वारा चलाये हुए महान् वेग और बलसे सम्पन्न तथा क्षत्रियोंका विनाश करनेवाले लाखों बाणोंने रणभूमिमें सैकड़ों श्रेष्ठ वीरोंके मस्तक काट गिराये
قال سنجيا: أيها الملك، كما يطرد شروقُ الشمس الظلامَ، كذلك اندفعوا من كل جانب في ساحة القتال فبعثروا جموع العدو. ثم، أيها الحاكم، أُطلقت مئاتُ الألوف من السهام عبر الميدان. وحين هجموا على بهيشما—وهو أسبقُ المحاربين—بقصد قتله، غدا الاصطدام عظيمًا صاخبًا.
Verse 9
क्षत्रियान्तकरा: संख्ये महावेगा महाबला: । शिरांसि पातयामासुर्वीराणां शतशो रणे,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया जैसे सूर्य उदित होकर अन्धकारको नष्ट कर देते हैं, उसी प्रकार वे सब ओर समरभूमिमें शत्रु-सेनाओंका संहार कर रहे थे। राजन! उनके द्वारा चलाये हुए महान् वेग और बलसे सम्पन्न तथा क्षत्रियोंका विनाश करनेवाले लाखों बाणोंने रणभूमिमें सैकड़ों श्रेष्ठ वीरोंके मस्तक काट गिराये
قال سنجيا: في تلك المعركة سقطت السهام السريعة الجبّارة—مُهلكةُ المحاربين—بقوةٍ هائلة، وفي القتال صرعت مئات الأبطال فقطعت رؤوسهم. وحين سعى أبرع المقاتلين إلى قتل خيرِ المحاربين، غدا الاصطدام في تلك اللحظة عظيمًا صاخبًا.
Verse 10
गजान् कण्टकसन्नाहान् वज्रेणेव शिलोच्चयान् । रथा रथेषु संसक्ता व्यदृश्यन्त विशाम्पते,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया उन बाणोंने वज्रके मारे हुए पर्वतोंकी भाँति काँटेदार कवचोंसे सुसज्जित हाथियोंको भी धराशायी कर दिया। प्रजानाथ! उस समय रथ रथोंसे सटे हुए दिखायी देते थे
قال سنجيا: يا سيّدَ الناس، شوهدت الفيلةُ المدرّعةُ بدروعٍ ذاتِ أشواكٍ تنهار كقممٍ صخريةٍ حطّمها الصاعق. وكانت العرباتُ تضغط بعضها بعضًا، عربةً إلى عربة، متشابكةً في الزحام. وحين تقدّم أبرعُ المحاربين بنيّة القتل، تضخّمت المعركة في تلك اللحظة إلى جلبةٍ هائلةٍ مرعبة.
Verse 11
एके रथं पर्यवहंस्तुरगा: सतुरड्रमम् । युवानं निहतं वीरं लम्बमानं सकार्मुकम्,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया कितने ही घोड़े अपनेसहित रथको लिये हुए दूर भागे जा रहे थे और उसपर मरा हुआ नवयुवक वीर रथी धनुषके साथ ही लटक रहा था
قال سَنجايا: «أيها الملك، إن خيولًا كانت تجرّ العربة معها وتهرول هياجًا في كل ناحية. وعلى تلك العربة كان يتدلّى محاربٌ فتيٌّ قد قُتل، وما يزال متشبثًا بقوسه. وحين اندفع أبرع المقاتلين قُدُمًا بنية القتل، غدا الاصطدام في تلك اللحظة جلبةً عظيمةً مروّعة».
Verse 12
उदीर्णाश्न हया राजन् वहन्तस्तत्र तत्र ह । बद्धखड्गनिषड्गाश्च विध्वस्तशिरसो हता:,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنجايا: «أيها الملك، كانت الخيول هائجةً لا تُضبط، تجرّ عرباتها هنا وهناك. وكان المحاربون، وسيوفهم وأكنان سهامهم ما تزال مشدودة عليهم، صرعى برؤوسٍ مهشّمة. وحين تقدّم أمهر المقاتلين بنية القتل، تضخّم الاصطدام إلى معركةٍ واسعةٍ صاخبة».
Verse 13
परस्परेण धावन्त: पतिता: पुनरुत्थिता:,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया एक-दूसरेपर धावा करनेवाले कितने ही सैनिक गिर पड़ते और फिर उठकर खड़े हो जाते थे। खड़े होकर वे दौड़ते और परस्पर द्वन्द्ययुद्ध करने लगते थे। फिर आपसके प्रहारोंसे पीड़ित हो वे युद्धके मुहानेपर ही गिरकर लुढ़क जाते थे
قال سَنجايا: «في ذلك الحين غدت المعركة واسعةً مضطربة. كان كثيرون يندفعون بعضهم على بعض، فيسقطون ثم ينهضون من جديد؛ وبنية القتل يعودون فيقتحمون الصدام مرةً أخرى».
Verse 14
उत्थाय च प्रधावन्तो द्वन्ड्ययुद्धमवाप्रुवन् । पीडिता: पुनरन्योन्यं लुठन्तो रणमूर्थनि,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया एक-दूसरेपर धावा करनेवाले कितने ही सैनिक गिर पड़ते और फिर उठकर खड़े हो जाते थे। खड़े होकर वे दौड़ते और परस्पर द्वन्द्ययुद्ध करने लगते थे। फिर आपसके प्रहारोंसे पीड़ित हो वे युद्धके मुहानेपर ही गिरकर लुढ़क जाते थे
قال سَنجايا: «أيها الملك، إن كثيرًا من المحاربين نهضوا من جديد واندفعوا إلى الأمام، فدخلوا مبارزاتٍ فردية. وقد أنهكتهم ضربات بعضهم بعضًا فتدحرجوا عند مقدّمة ساحة القتال. وحين اندفعوا ليقتلوا بِهِيشْما—أول المقاتلين—غدا الاصطدام في تلك اللحظة واسعًا مضطربًا».
Verse 15
सचापा: सनिषज्ञश्न जातरूपपरिष्कृता: । विस्रब्धहतवीराश्व॒ शतश: परिपीडिता:,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنجايا: «أيها الملك، اندفع كثير من المحاربين، بأقواسهم وأكنان سهامهم، مزدانين بالذهب؛ وقد صُرعت خيولهم البطولية، وضُيّق عليهم ضغطًا شديدًا مئاتٍ مئات، ومع ذلك تقدموا. وحين سعوا إلى قتل بِهِيشْما—أول المقاتلين—اندلعت معركةٌ واسعةٌ مضطربة».
Verse 16
मत्तो गज: पर्यवर्तद्धयांश्व॒ हतसादिन:,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سنجيا: «أيها الملك، إنّ الفيلة وقد استبدّ بها الهياج في زحمة القتال أخذت تدور وتلتفّ، والخيول—وقد قُتل كثيرٌ من فرسانها—اندفعت هائمةً في اضطراب. وحين اندفع المحاربون بعزمٍ على إسقاط أسبق المقاتلين وأعلاهم، ارتفع في تلك اللحظة صخبُ حربٍ عظيمٌ مروّع».
Verse 17
सरथा रथिनश्चापि विमृद्नन्त: समन्ततः । मतवाले हाथी उन घोड़ोंके पीछे पड़े थे, जिनके सवार मारे गये थे। इसी प्रकार रथोंसहित रथी चारों ओर भूतलपर पड़ी हुई लाशोंको रौंदते हुए विचरण करते थे ।। १६३ || स्यन्दनादपतत् कक्षिन्निहतो5न्येन सायकै:,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سنجيا: «في كل ناحية كان فرسان المركبات بمركباتهم يسحقون كل ما يقع في طريقهم. وسقط مقاتلٌ من مركبةٍ ما، وقد أردته سهامُ غيره. وحين تزاحم أبطال الصفوة بعزم القتل، انتفخت المعركة في تلك اللحظة إلى جلبةٍ عارمةٍ مضطربة».
Verse 18
युध्यमानस्य संग्रामे व्यूढे रजसि चोत्थिते,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया उस संग्राममें इतनी धूल उड़ी कि कुछ सूझ नहीं पड़ता था। केवल धनुषकी टंकारसे ही यह जाना जाता था कि प्रतिद्वन्धी युद्ध कर रहा है। कितने ही योद्धा दूसरे योद्धाओंके शरीरका स्पर्श करके ही यह समझ पाते थे कि यह शत्रुदलका है
قال سنجيا: «أيها الملك، لما اشتدّ القتال وارتفع الغبار سحبًا كثيفة، صار الهجوم على بهيشما—أسبق المحاربين وأعلاهم، والذي قصدوا قتله—صدامًا عظيمًا مضطربًا. وفي تلك العاصفة العمياء من الحرب ضاع التمييز؛ ولم يكن يدلّ على استمرار القتال إلا طنين أوتار الأقواس، وكثيرٌ من المقاتلين لم يعرفوا العدو إلا بملامسة الأجساد وسط الفوضى».
Verse 19
धनु: कूजितविज्ञानं तत्रासीत् प्रतियुद्धयत: । गात्रस्पर्शेन योधानां व्यज्ञास्त परिपन्थिनम्,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया उस संग्राममें इतनी धूल उड़ी कि कुछ सूझ नहीं पड़ता था। केवल धनुषकी टंकारसे ही यह जाना जाता था कि प्रतिद्वन्धी युद्ध कर रहा है। कितने ही योद्धा दूसरे योद्धाओंके शरीरका स्पर्श करके ही यह समझ पाते थे कि यह शत्रुदलका है
قال سنجيا: «أيها الملك، في تلك المعركة لم يكن المقاتلون يعرف بعضهم بعضًا إلا من طنين القوس، إذ كان الاشتباك بالغ الاضطراب. وكثيرٌ من المحاربين، بمجرد لمس أطراف غيرهم، كانوا يميّزون أهو عدوٌّ من الصف المقابل أم لا. وحين اندفعوا ليُسقطوا بهيشما—أسبق المقاتلين—انتفخ القتال في تلك اللحظة إلى صخبٍ عظيمٍ مضطرب».
Verse 20
युद्धयमानं शरै राजन् सिज्जिनीथ्वजिनीरवात् | अन्योन्यं वीरसंशब्दो नाश्रूयत भटै: कृत:,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया राजन! कुछ लोग धनुषकी टंकार और सेनाका कोलाहल सुनकर ही यह समझ पाते थे कि कोई बाणोंद्वारा युद्ध कर रहा है। योद्धा एक-दूसरेके प्रति जो वीरोचित गर्जना करते थे, वह भी उस समय अच्छी तरह सुनायी नहीं देती थी
قال سنجيا: «أيها الملك، في خضمّ القتال بالسهام—وقد علا فيه طنين الأوتار وضجيج الرايات—كاد لا يُسمع حتى صياحُ الأبطال الذي يتبادله المحاربون. وحين هوجم بهيشما، وهو أسبق المقاتلين، من قِبل من عزموا على قتله، غدت المعركة في تلك اللحظة واسعةً شديدةَ الاضطراب مُروِّعة.»
Verse 21
शब्दायमाने संग्रामे पटहे कर्णदारिणि | युद्धयमानस्य संग्रामे कुर्वतः पौरुषं स्वकम्,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنْجَايَا: «أيها الملك، حين دوّى ميدان القتال، وحين ضُرِب طبل الحرب النافذ إلى الآذان، وحين كان المحاربون يتقاتلون وكلٌّ يُظهر بأسه، اندفعوا إلى الأمام بعزمٍ على قتل أسبق المقاتلين. فعندئذٍ، في تلك اللحظة، نشب اصطدامٌ عظيمٌ هائجٌ مضطرب.»
Verse 22
भीष्मचापच्युतैर्बाणैरार्तानां युध्यतां मृथे,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنْجَايَا: «أيها الملك، حين كانت السهام المنطلقة من قوس بِهِيشْمَة تُصيب المحاربين المكدودين في خضمّ المِعْرَكة، صار بِهِيشْمَة—وهو أسبق المقاتلين—هدفًا لمن أرادوا قتله. فعندئذٍ اندلعت معركةٌ عظيمةٌ هائجة.»
Verse 23
तस्मिन्नत्याकुले युद्धे दारुणे लोमहर्षणे,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنْجَايَا: «في تلك المعركة—شديدة الاضطراب، قاسية، تقشعرّ لها الأبدان—حين هوجم أسبقُ المحاربين بنيّة قتله، اندلع قتالٌ هائلٌ مضطرب.»
Verse 24
चक्रे भग्ने युगे छिन्ने एकथधुयें हये हत:,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنْجَايَا: «أيها الملك، حين انكسر العَجَل، وتصدّع النِّير، وقُتِل الحصان—حتى لم يبقَ للعربة إلا حصانٌ واحد—عندئذٍ، وبينما كان أسبقُ المحاربين (بِهِيشْمَة) يندفع بنيّة القتل، اندلعت معركةٌ عظيمةٌ هائجة. وفي تلك اللحظة اشتدّ الصراع، إذ اندفع عظماء المقاتلين لحماية أهلهم وكبح القتل الذي كان يتهدّد البطل المختار.»
Verse 25
एवं च समरे सर्वे वीराश्न विरथीकृता:,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنْجَايَا: «وهكذا، في تلك المعركة، جُرِّد كثيرٌ من الأبطال من عرباتهم؛ وحين اندفعوا إلى الأمام بعزمٍ على قتل أسبقِ المحاربين، نشب اصطدامٌ عظيمٌ هائج.»
Verse 26
गजो हत: शिरश्छिन्न॑ मर्म भिन्न हयो हत:,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنْجَايَا: «قُتِلَ فيلٌ، وقُطِعَتْ رؤوسٌ، وهَلَكَتْ خيولٌ، ونُفِذَتِ السهامُ إلى المقاتلِ والأحشاءِ. وحين اندفعَ خِيارُ المحاربينَ بنيّةِ القتلِ، نهضتْ معركةٌ عظيمةٌ صاخبةٌ مضطربة. وفي ذلك الاصطدامِ، اندفعَ أبطالُ الباندافا—وقد جعلوا شِكْهَنْدِين في المقدّمة وتقدّموا حمايةً للشجاعِ شْفِيتا—إلى عربةِ بِهِيشْما المزيّنةِ بالذهب، ليُظهِروا قوّتهم في وجهِ جانبِ دُرْيُودْهَنَة. وهكذا أشعلَ واجبُ الذودِ عن قائدِهم، مع قسوةِ ضرورةِ ساحةِ القتال، تصعيدًا مرعبًا للعنف.»
Verse 27
श्वेत: कुरूणामकरोत् क्षयं तस्मिन् महाहवे,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنْجَايَا: «في تلك المعركة العظمى أحدثَ شْفِيتا خرابًا مهولًا في صفوفِ الكُرُو. ثمّ لما همَّ بِهِيشْما—وهو أسبقُ المحاربين—بقتله، تضخّمَ الاصطدامُ إلى قتالٍ عظيمٍ صاخب؛ إذ حرّكته عزيمةُ قومٍ على حمايةِ بطلٍ واحد، وعزيمةُ خصومهم على إسقاطه.»
Verse 28
चिच्छेद रथिनां बाणै: शिरांसि भरतर्षभ,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया भरतश्रेष्ठ! श्वेतने अपने बाणोंद्वारा बहुत-से रथियोंके मस्तक काट डाले
قال سَنْجَايَا: «يا ثورَ آلِ بهاراتا، لقد قطعَ شْفِيتا بسِهامِه رؤوسَ كثيرٍ من فرسانِ العجلات. وحين صارَ بِهِيشْما—وهو أسبقُ المقاتلين—هدفًا لمن أرادوا قتله، اندلعتْ في تلك الساعة معركةٌ عظيمةٌ صاخبة. ويكشفُ المشهدُ توتّرَ الحربِ الأخلاقي: فالشجاعةُ وحمايةُ الجانبِ سرعان ما تنقلبان إلى هياجٍ قاتلٍ حين يصبحُ المقصودُ قتلَ شيخٍ مُهابٍ مُوقَّر.»
Verse 29
साड्दा बाहवश्चैव धनूंषि च समन्ततः । रथेषां रथचक्राणि तूणीराणि युगानि च,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया उन्होंने सब ओर बाण मारकर कितने ही योद्धाओंके धनुष और बाजूबंदसहित भुजाएँ काट डालीं। रथके ईषादण्ड, रथ-चक्र, तूणीर और जूए भी छिन्न-भिन्न कर दिये
قال سَنْجَايَا: «يا أيها الملك، عندئذٍ قامتْ معركةٌ عظيمةٌ صاخبة. تطايرتِ السهامُ في كلّ ناحية، فقطعتْ الأذرعَ مع واقياتها وقطّعتِ الأقواس؛ وتكسّرتْ أعمدةُ العرباتِ وعجلاتُها وجِعابُ السهامِ وأنْيُكُها. وهكذا، في فعلِ السعيِ إلى قتلِ أسبقِ المحاربين، أطلقَ المقاتلون عنفًا حوّلَ أدواتِ الحرب—والأجسادَ التي تمسك بها—إلى حطام، كاشفًا كيف تتشابكُ الحمايةُ والدمارُ في ساحةِ القتال.»
Verse 30
छत्राणि च महाहाणि पताकाश्न विशाम्पते । हयौघाश्र रथौघाक्ष नरौघाश्रैव भारत,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سَنْجَايَا: «يا سيّدَ الرجال، كانتِ المظلّاتُ العظيمةُ والراياتُ في كلّ مكان؛ وكانتْ جموعُ الخيلِ وجموعُ العرباتِ وجموعُ الرجالِ تتدفّق، يا بهاراتا. وحين هوجمَ بِهِيشْما—وهو أسبقُ المقاتلين—مِن قِبَلِ من عزموا على قتله، قامتْ في تلك الساعة معركةٌ عظيمةٌ صاخبة. ويُظهرُ المشهدُ كيف أنّ الحربَ تجرّ حتى الأعظمَ إلى عاصفةِ العزمِ الجماعي، حيث تتصادمُ حمايةُ الأهلِ ودافعُ إسقاطِ العدوّ في صدمةٍ واحدةٍ مدوّية.»
Verse 31
वारणा: शतशश्षैव हता: श्वेतेन भारत । राजन! बहुमूल्य छत्र और पताकाएँ भी उनके बाणोंसे खण्डित हो गयीं। भरतनन्दन! बैतने अश्वों, रथों और मनुष्योंके समुदायका तो वध किया ही; सैकड़ों हाथी भी मार गिराये || ३० ह ।। वयं श्वेतभयाद् भीता विहाय रथसत्तमम्,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سنجيا: «أيها الملك، يا بهارتا، إن شفيتا قد صرع الفيلة بالمئات، وتحطّمت المظلات النفيسة والرايات كذلك تحت سهامه. وقد استولى علينا الخوف من شفيتا فتركنا أبهى مركباتنا الحربية؛ وحين اندفع بهيشما—سيد المقاتلين—مُصمِّمًا على قتله، ثار في الميدان صخبٌ عظيمٌ مروّعٌ من أهوال القتال».
Verse 32
अपयातास्तथा पश्चाद् विभुं पश्याम धृष्णव: । शरपातमततिक्रम्य कुरव: कुरुनन्दन,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سنجيا: «ثم، يا قُرونندنا، تقدّم محاربو الكورو الجسورون مرة أخرى، مجتازين وابل السهام دون أن يرتدّوا، ونحن نرقب ذلك الجبار. وإذ كانوا يبتغون قتل بهيشما—أول المقاتلين—اندفعوا نحوه، وفي تلك اللحظة انفجرت معركة عظيمة صاخبة.»
Verse 33
भीष्मं शान्तनवं युद्धे स्थिता: पश्याम सर्वश: । कुरुनन्दन! हमलोग भी श्वेतके भयसे महारथी भीष्मको अकेला छोड़कर भाग खड़े हुए। इसीलिये इस समय जीवित रहकर महाराजका दर्शन कर रहे हैं। हम सभी कौरव श्ेतका बाण जहाँतक पहुँच पाता था, उतनी दूरीको लाँघकर युद्धभूमिमें खड़े हो दर्शककी भाँति शान्तनुनन्दन भीष्मको देख रहे थे ।। ३१-३२ ह ।। अदीनो दीनसमये भीष्मो<5स्माकं महाहवे,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سنجيا: «يا سليل كورو، كنا واقفين في ساحة القتال ننظر إلى بهيشما ابن شانتانو من كل جانب. حقًّا، من شدة خوفنا من شفيتا تركنا نحن أيضًا بهيشما—ذلك المحارب العظيم على العربة—وحيدًا وفررنا؛ ولذلك نحن أحياء الآن ونستطيع المثول بين يدي جلالتكم. لقد وقفنا نحن الكاورافا جميعًا خارج مدى سهام شفيتا، كأننا متفرجون لا غير، نحدّق في بهيشما ابن شانتانو. ومع ذلك لم يفقد بهيشما رباطة جأشه في تلك الشدة؛ فلما اندفع إليه أبرع المحاربين بعزم القتل، انفجر في الميدان صخبٌ عظيمٌ مروّعٌ من المعركة.»
Verse 34
एकस्तस्थौ नरव्याप्रो गिरिमेंरुरिवाचल: । उस महान् संग्राममें हमलोगोंके लिये कातरताका समय आ गया था, तो भी अकेले नरश्रेष्ठ भीष्म ही दीनतासे रहित हो मेरुपर्वतकी भाँति वहाँ अविचलभावसे खड़े रहे ।। ३३ - आददान इव प्राणान् सविता शिशिरात्यये,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سنجيا: «أيها الملك، في تلك المعركة العظمى، حين حلّت لحظة الذعر في صفّنا، وقف بهيشما وحده—خير الرجال—ثابتًا لا يتزحزح كجبل ميرو، منزّهًا عن الوهن. ثم، كما تبدو الشمس عند انقضاء الشتاء كأنها تنتزع أنفاس الحياة، اندلع اصطدامٌ هائلٌ صاخب: محاربو الباندافا، وقد جعلوا شيخاندين في المقدمة وتقدّموا لإظهار بأسهم، اندفعوا على بهيشما—سيد المقاتلين—بعزم إسقاطه، حمايةً للبطل شفيتا.»
Verse 35
स मुमोच महेष्वास: शरसंघाननेकश:,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سنجيا: «أيها الملك، إن ذلك الرامي العظيم أطلق جماعاتٍ من السهام مرارًا وتكرارًا. وحين هوجم بهيشما—سيد المحاربين—وهو يتقدّم بعزم القتل، ثار في الميدان صخبٌ عظيمٌ مروّعٌ من القتال.»
Verse 36
ते वध्यमाना भीष्मेण प्रजहुस्तं महाबलम्,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سنجيا: «أيها الملك، حين كانوا يُصرَعون بضربات بهيشما، تركوا ذلك المحارب الجبار. ولما اندفع بهيشما—وهو أسبق المقاتلين وأمضاهم، عازمًا على القتل—واشتدّ في الهجوم، اندلعت معركة عظيمة هائجة مضطربة».
Verse 37
तमेवमुपलक्ष्यैको हृष्ट: पुष्ट: परंतप,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया परंतप! श्वेतको पूर्वोक्तरूपसे कौरव-सेनाका संहार करते देख एकमात्र भीष्म ही उत्साहित और प्रफुल्ल हो पाण्डवोंको शोकमें डालते हुए जीवनका मोह और भय छोड़कर उस महासमरमें दुर्योधनके प्रिय कार्यमें जुट गये
قال سنجيا: «يا محرِق الأعداء، لما رآه على تلك الحال لم يتهلل ويشتدّ عزمه إلا بهيشما وحده. وحين تقدّم ذلك المتقدّم بين المحاربين، وفي قلبه نية القتل، وضغط الهجوم، قام صدامٌ عظيمٌ مضطربٌ من السلاح. وفي نبرته الأخلاقية يبرز البيت كيف أن شيخًا محاربًا، موثوقًا بولائه لفريقه—وقد طرح الخوف والتعلّق بالحياة—يلقي بنفسه في واجب القتال الرهيب، فيما تتعاظم وحشية الحرب من حوله.»
Verse 38
दुर्योधनप्रिये युक्त: पाण्डवान् परिशोचयन् । जीवितं दुस्त्यजं त्यक्त्वा भयं च सुमहाहवे,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया परंतप! श्वेतको पूर्वोक्तरूपसे कौरव-सेनाका संहार करते देख एकमात्र भीष्म ही उत्साहित और प्रफुल्ल हो पाण्डवोंको शोकमें डालते हुए जीवनका मोह और भय छोड़कर उस महासमरमें दुर्योधनके प्रिय कार्यमें जुट गये
قال سنجيا: «منهمكًا فيما هو عزيز على دوريوذانا، ألقى بهيشما الباندافا في الحزن. وفي خضمّ تلك المعركة العظمى نبذ التعلّق بالحياة—وهي عسيرة الترك—ونبذ الخوف أيضًا، ثم اندفع نحو أسبق المحاربين الذي كان يريد القتل (شفيتا). عندئذٍ اندلعت معركة واسعة مضطربة.»
Verse 39
पातयामास सैन्यानि पाण्डवानां विशाम्पते । प्रहरन््तमनीकानि पिता देवव्रतस्तव,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया दृष्टवा सेनापतिं भीष्मस्त्वरित: श्वेतमभ्ययात् | राजन! भीष्मजीने पाण्डवोंके बहुत-से सैनिकोंको मार गिराया। आपके पिता देवव्रतने जब देखा कि सेनापति श्वेत हमारी सेनापर प्रहार कर रहे हैं, तब वे तुरंत उनका सामना करनेके लिये गये
قال سنجيا: «يا سيّد الرجال (دهرتراشترا)، إن أباك ديفافراتا (بهیشما) صرع كثيرًا من قوات الباندافا. وإذ رأى الصفوف تُهاجَم، وأدرك أن أسبق المحاربين عازم على القتل، قامت معركة عظيمة مضطربة. ولما رأى بهيشما القائد شفيتا يضرب جيشنا، أسرع لملاقاته ومجابهته.»
Verse 40
।। स भीष्मं शरजालेन महता समवाकिरत्,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سنجيا: «أيها الملك، أمطر بهيشما بشبكة عظيمة من السهام. وحين هوجم بهيشما—وهو أسبق المحاربين، عازمًا على القتل—على هذا النحو، اندلعت في تلك اللحظة معركة كبيرة مضطربة. ويؤكد المشهد قسوة أخلاق الواجب في ساحة القتال: فحتى الشيخ الأجلّ يُواجَه بقوة لا هوادة فيها حين تتقدّم مطالب الحرب وحماية الجانب على كل شيء.»
Verse 41
तौ वृषाविव नर्दन्तौ मत्ताविव महाद्विपौ,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سنجيا: «إنّهما، وهما يزأران كزوجٍ من الثيران ويهيجان كفيلين عظيمين سكرانين، اندفعا نحو بهيشما—أشرف المحاربين—قاصدَين قتله. عندئذٍ اندلعت معركةٌ واسعةٌ عاصفةٌ مضطربة. وفي ذلك الاشتباك تقدّم جانب الباندافا وقد جعلوا شيكاندين في المقدّمة بمواجهة بهيشما، وفي الوقت نفسه سعَوا إلى حماية البطل الشجاع شفيتا؛ فغدت المواجهة قاسيةً لا بالسلاح وحده، بل بالدَّرما أيضًا، تحرّكها النذورُ والخططُ وواجبُ الكشاتريا لدى الفريقين.»
Verse 42
व्यात्राविव सुसंरब्धावन्योन्यमभिजषध्नतु: । वे दोनों वीर गर्जते हुए दो साँड़ों, मदसे उन्मत्त हुए दो गजराजों तथा क्रोधमें भरे हुए दो सिंहोंकी भाँति एक-दूसरेपर चोट करने लगे || ४१ ह ।। अस्त्रैरस्त्राणि संवार्य ततस्तौ पुरुषर्षभी,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سنجيا: «كَنَمِرَينِ هائجَينِ، أخذ البطلان الشبيهان بالثورين يضرب أحدُهما الآخر. يصدّان السلاحَ بالسلاح، وهما من أبرع المحاربين، وكلٌّ منهما يريد قتل صاحبه، فكان بينهما اصطدامٌ عظيمٌ مضطرب. ويُظهر المشهد كيف أنّ حرارة القتال قد تُغشي ضبط النفس، فتجعل المهارة والواجب منافسةً ضاريةً على الفناء.»
Verse 43
एकाल्ा निर्दहेद् भीष्म: पाण्डवानामनीकिनीम्,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया
قال سنجيا: «يا أيها الملك، إنّ بهيشما—أشرف المحاربين—كان كأنّه يستطيع أن يُحرق جيش الباندافا كلَّه بضربةٍ واحدة. فلمّا اندفع الباندافا، عازمين على إسقاط ذلك المقاتل الأبرع، تعاظم الاصطدام في تلك اللحظة حتى صار جلبةً هائلةً مرعبة. ويُبرز المشهد توتّر الدَّرما في الحرب: فحتى عند مواجهة شيخٍ موقَّرٍ مقيَّدٍ بنذوره، يدفع واجبُ ساحة القتال الفريقين إلى عنفٍ لا يلين، حاسمٍ ومكتوب المصير.»
Verse 44
शरै: परमसंक्रुद्धों यदि श्वेतो न पालयेत् । यदि श्वेत पाण्डव-सेनाकी रक्षा न करते तो भीष्मजी अत्यन्त क़ुद्ध होकर एक ही दिनमें उसे भस्म कर डालते || ४३ ह || पितामहं ततो दृष्टवा श्वेतेन विमुखीकृतम्
قال سنجيا: «لولا أنّ شفيتا قدّم الحماية، لكان بهيشما—وقد بلغ به الغضب غايته—قد أغرقه بوابلٍ من السهام. ثمّ لمّا رُئي الجدّ بهيشما وقد صُدَّ وكُفَّ على يد شفيتا، تبدّل الموقف في ساحة القتال.»
Verse 45
प्रहर्ष पाण्डवा जग्मु: पुत्रस्ते विमना5भवत् | तदनन्तर पितामह भीष्मको श्वैतके द्वारा युद्धसे विमुख किया हुआ देख समस्त पाण्डवोंको बड़ा हर्ष हुआ; परंतु आपके पुत्र दुर्योधनका मन उदास हो गया | ४४ ई ।। ततो दुर्योधन: क्रुद्धः पार्थिवै: परिवारित:
قال سنجيا: «امتلأ الباندافا ابتهاجًا، بينما غدا ابنُك كئيبًا. ثم إنّ دوريوذانا، وقد استبدّ به الغضب وأحاط به الملوك، انفجر سخطًا—إذ جُرح كبرياؤه حين رأى مدَّ المعركة يميل ضدّ جانبه. ويُظهر المقطع كيف أنّ النجاح والانتكاس في الحرب يثيران سريعًا الفرحَ واليأسَ والحنق، ويختبران الثباتَ وحسنَ التمييز تحت مطالب الدَّرما.»
Verse 46
दुर्मुखः कृतवर्मा च कृप: शल्यो विशाम्पति:
قال سنجيا: «كان دُرمُخا، وكريتَفَرما، وكِرِبا، وشَليَ—سيدُ الناس—(حاضرين هناك)».
Verse 47
दृष्टवा तु पार्थिवै: सर्वैर्दुयोधनपुरोगमै:
قال سنجيا: ولكن حين أبصر جميعُ الملوك—ودوريودhana في المقدّمة—(ذلك المنظر)…
Verse 48
पाण्डवानामनीकानि वध्यमानानि संयुगे । श्वेतो गाड़ेयमुत्सूज्य तव पुत्रस्य वाहिनीम्,इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि श्वेतवधे अष्टचत्वारिंशो5ध्याय: ।। ४८ ।। इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वनें ्षेतवधविषयक अड्शतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ
قال سنجيا: في خِضَمِّ المعركة كانت صفوفُ الباندافا تُحَطَّم في القتال. ثم أطلقوا شڤيتا، ابنَ غادي، على جيش ابنك، ومضَوا يضغطون القتال—فانتشر القتلُ والانهزام في جموع الكورو.
Verse 49
नाशयामास वेगेन वायुर्वृक्षानिवौजसा । दुर्योधन आदि सब राजाओंके द्वारा पाण्डवसेनाको युद्धमें मारी जाती देख श्वेतने गंगापुत्र भीष्मको छोड़कर आपके पुत्रकी सेनाका उसी प्रकार वेगपूर्वक विनाश आरम्भ किया, जैसे आँधी अपनी शक्तिसे वृक्षोंको उखाड़ फेंकती है || ४७-४८ ह ।। द्रावयित्वा चमूं राजन् वैराटि: क्रोधमूर्च्छित:
قال سنجيا: وبسرعةٍ وقوةٍ لا تُقاوَمان شرع يُفني جيشَ العدو، كما تقتلع الريحُ العاتيةُ الأشجارَ بقوتها. وبعد أن أوقع الجيشَ في الفرار، أيها الملك، اندفع ابنُ فيرَاطا—وقد غمرته سورةُ الغضب—يُتابع الهجوم ويُشدِّده.
Verse 50
तौ तत्रोपगतौ राजन शरदीप्ती महाबलौ,महाराज! वे दोनों महाबली महामना वीर बाणोंसे उद्दीप्त हो एक-दूसरेको मार डालनेकी इच्छासे समीप आकर वृत्रासुर और इन्द्रके समान युद्ध करने लगे
قال سنجيا: أيها الملك، إن هذين البطلين العظيمي القوة، وقد تلألأت سهامُهما كاللهيب، تقاربا وكلٌّ منهما يريد قتلَ صاحبه. وهناك اشتبكا في قتالٍ ضارٍ، كڤِرترا وإندرا في سالف الدهور.
Verse 51
अयुध्येतां महात्मानौ यथोभौ वृत्रवासवौ । अन्योन्यं तु महाराज परस्परवधैषिणौ,महाराज! वे दोनों महाबली महामना वीर बाणोंसे उद्दीप्त हो एक-दूसरेको मार डालनेकी इच्छासे समीप आकर वृत्रासुर और इन्द्रके समान युद्ध करने लगे
قال سانجيا: «أيها الملك العظيم، إن هذين البطلين ذوي النفس السامية اقتتلا كفِرِترا وفاسافا (إندرا)—تدانيا أحدهما من الآخر بنية القتل، وكلٌّ منهما يبتغي موت صاحبه».
Verse 52
निगृहा कार्मुकं श्वेतो भीष्म॑ विव्याध सप्तभि: । पराक्रमं ततस्तस्य पराक्रम्य पराक्रमी
قال سانجيا: بعدما كبح قوسه وثبّته، أصاب شفيتا بهيشما بسبعة سهام. ثم إن ذلك المحارب الجبار، مُجارياً بأس بهيشما ببأسه، اندفع إلى الأمام في شجاعة.
Verse 53
तरसा वारयामास मनत्तो मत्तमिव द्विपम् । श्वेतने धनुष खींचकर सात बाणोंद्वारा भीष्मको बेध डाला। तब पराक्रमी भीष्मने बैतके उस पराक्रमको स्वयं पराक्रम करके वेगपूर्वक रोक दिया; मानो किसी मतवाले हाथीने दूसरे मतवाले हाथीको रोक दिया हो ।। ५२ है ।। श्वेत: शान्तनवं भूय: शरै: संनतपर्वभि:
قال سانجيا: وبقوة خاطفة كبحه، كأن فيلاً هائجاً يردع فيلاً هائجاً آخر. ثم إن شفيتا طعن شانتانافا (بهیشما) مرة أخرى بسهام محكمة العُقَد والمواضع.
Verse 54
विव्याध पज्चविंशत्या तदद्भुतमिवाभवत् । तदनन्तर श्वेतने पुनः झुकी हुई गाँठवाले पचीस बाणोंसे शान्तनुनन्दन भीष्मको बींध डाला। वह एक अद्भुत-सी घटना हुई ।। ५३ है ।। त॑ प्रत्यविध्यद् दशभिर्भीष्म: शान्तनवस्तदा
قال سانجيا: لقد طعن بهيشما، ابن شانتانو، بخمسةٍ وعشرين سهماً؛ فكاد الأمر يبدو أعجوبة. ثم ما لبث شفيتا أن عاد فضرب بهيشما بخمسةٍ وعشرين سهماً أخرى. عندئذٍ ردّ بهيشما، ابن شانتانو، في تلك اللحظة نفسها، فثقبَه بعشرة سهام.
Verse 55
वैराटि: समरे क्रुद्धों भूशमायम्य कार्मुकम्
قال سانجيا: في خضمّ المعركة، كان ابن فيراتا مستعراً غضباً، فشدّ قوسه بعنف، مستعدّاً للضرب.
Verse 56
तावकानां परेषां च यथा युद्धमवर्तत । आपके और पाण्डवोंके सैनिकोंमें जो महान् संहारकारी युद्ध जिस प्रकार हुआ, उसका उसी रूपमें आपसे वर्णन करता हूँ,सम्प्रहस्य ततः श्वेत: सृक्किणी परिसंलिहन् धनुश्विच्छेद भीष्मस्य नवभिर्दशधा शरै: | इसके बाद उन्होंने हँसकर अपने मुँहके दोनों कोनोंको चाटते हुए नौ बाण मारकर भीष्मके धनुषके दस टुकड़े कर दिये
قال سنجيا: «سأقصّ عليك على وجه الدقة كيف دارت المعركة بين جندك وجند العدو. ثم إن شفيتا، ضاحكًا، لحسَ زاويتي فمه، وبِتِسعِ سِهامٍ حطّم قوسَ بهيشما إلى عشرةِ قطع».
Verse 57
संधाय विशिखं चैव शरं लोमप्रवाहिनम्
قال سنجيا: «ثبّت نصل السهم، ثم وضع سهمًا يُقشعرّ له البدن، وتهيّأ لإطلاقه».
Verse 58
केतुं निपतितं दृष्टवा भीष्मस्य तनयास्तव
قال سنجيا: «ولمّا رأى أبناؤك—المنضوون تحت راية بهيشما—رايته قد سقطت، اضطربوا لما في ذلك من نذيرٍ مشؤوم».
Verse 59
हत॑ भीष्मममन्यन्त श्वेतस्य वशमागतम् । भीष्मके ध्वजको नीचे गिरा देख आपके पुत्रोंने उन्हें श्वेतके वशमें पड़कर मरा हुआ ही माना || ५८ है || पाण्डवाश्चापि संहृष्टा दध्मु: शड्खान् मुदा युता:
قال سنجيا: «فظنّوا أن بهيشما قد قُتل وصار في قبضة شفيتا. أمّا الباندافا، فامتلأوا ابتهاجًا ونفخوا أصدافهم فرحًا.»
Verse 60
भीष्मस्य पतितं केतु दृष्टवा तालं महात्मन: । महात्मा भीष्मके तालध्वजको पृथ्वीपर पड़ा देख पाण्डव हर्षसे उललसित हो प्रसन्नतापूर्वक शंख बजाने लगे ।। ५९ हूं ।। ततो दुर्योधन: क्रोधात् स््वमनीकमनोदयत्
قال سنجيا: «لمّا رأى الباندافا رايةَ بهيشما العظيم—الموسومةَ بشعار نخلة التال—قد سقطت على الأرض، امتلأوا فرحًا وهتفوا ونفخوا أصدافهم ابتهاجًا. ثم إن دوريوذانا، وقد اشتعل غضبًا، حرّض جيشه وأثار حميّته.»
Verse 61
यत्ता भीष्म परीप्सध्वं रक्षमाणा: समन्ततः । मा नः प्रपश्यमानानां श्वेतान्मृत्युमवाप्स्यति
قال سنجيا: «اجتهدوا في تأمين بيشما—واحرسوه من كل جانب. لا تدعوا ذلك المحارب الأبيض الهيئة (شفيتا) يجلب علينا الموت ونحن واقفون ننظر.»
Verse 62
भीष्म: शान्तनव: शूरस्तथा सत्यं ब्रवीमि वः । तब दुर्योधनने क्रोधपूर्वक अपनी सेनाको आदेश दिया--“वीरो! सावधान होकर सब ओरसे भीष्मकी रक्षा करते हुए उन्हें घेरकर खड़े हो जाओ। कहीं ऐसा न हो कि ये हमारे देखते-देखते श्वेतके हाथों मारे जायँ। मैं तुमलोगोंको सत्य कहता हूँ कि शान्तनुनन्दन भीष्म महान् शूरवीर हैं" || ६०-६१ ह ।। राज्ञस्तु वचन श्रुत्वा त्वरमाणा महारथा:
قال سنجيا: «بيشما، ابن شانتانو الشجاع—أقول لكم هذا حقًّا.» ثم إن دوريوذانا، وقد استبدّ به الغضب، أصدر أمره إلى جيشه: «يا أبطال، كونوا على حذر. من كل جانب احموا بيشما وقفوا مطوّقين له. لا تدعوا أن يقع، أمام أعيننا، صريعًا بيد شفيتا. إني أقول لكم الصدق: بيشما ابن شانتانو محارب عظيم.» فلما سمع فرسان العربات العظام أمر الملك أسرعوا إلى التنفيذ.
Verse 63
बलेन चतुरड्रेण गाड्रेयमन्वपालयन् । राजा दुर्योधनकी यह बात सुनकर सब महारथी बड़ी उतावलीके साथ वहाँ आये और चतुरंगिणी सेनाद्वारा गंगानन्दन भीष्मकी रक्षा करने लगे ।। ६२ ह ।। बाह्लीक: कृतवर्मा च शल: शल्यश्न भारत
قال سنجيا: وبقوة الجيش ذي الأقسام الأربعة ظلّوا يراقبون ويحفظون بيشما، ابن الغانغا. يا بهاراتا، كان باهليكا وكريتافارما وشالا وشاليا (فيمن تقدّموا) قد اجتمعوا لحماية الجدّ في زحمة القتال.
Verse 64
जलसंधो विकर्णश्न चित्रसेनो विविंशति: । त्वरमाणास्त्वराकाले परिवार्य समनन््तत:
قال سنجيا: جلاسنده وفيكرنا وتشيتراسينا وفيفيمشتي—وقد أسرعوا في تلك اللحظة العاجلة—أحاطوا به من كل جانب.
Verse 65
शस्त्रवृष्टिं सुतुमुलां श्वेतस्पोपर्यपातयन् । भारत! बाह्लीक, कृतवर्मा, शल, शल्य, जलसंध, विकर्ण, चित्रसेन और विविंशति--इन सबने शीघ्रताके अवसरपर शीघ्रता करते हुए चारों ओरसे भीष्मजीको घेर लिया और श्वेतके ऊपर भयंकर शस्त्र-वर्षा करने लगे ।। ६३-६४ ह ।। तान् क्रुद्धों निशितैर्बाणैस्त्वरमाणो महारथ:
قال سنجيا: «يا بهاراتا، إن باهليكا وكريتافارما وشالا وشاليا وجلاسنده وفيكرنا وتشيتراسينا وفيفيمشتي—وقد انتهزوا الفرصة بتناسق سريع—أطبقوا الحصار حول بيشما من كل جانب، وأمطروا شفيتا بوابلٍ مروّع من السلاح.»
Verse 66
स निवार्य तु तान् सर्वान् केसरी कुज्जरानिव
قال سنجيا: بعدما كفَّهم جميعًا، أمسكهم وردَّهم—كأسدٍ يكبح الفيلة—مُظهِرًا قوةً مضبوطةً وسط اندفاع المعركة.
Verse 67
ततोअन्यद् धनुरादाय भीष्म: शान्तनवो युधि
قال سنجيا: ثم في خضمّ القتال، تناول بهيشما—ابن شانتانو—قوسًا آخر، ومضى في الحرب بعزمٍ لا يتزعزع، قائمًا بواجب الكشترية.
Verse 68
ततः सेनापति:ः क्रुद्धों भीष्मं बहुभिरायसै:
قال سنجيا: ثم إن القائد، وقد اشتعل غضبًا، هاجم بهيشما بأسلحةٍ كثيرةٍ من حديد—صورةٌ لهيجان ساحة القتال، حيث يدفع السخط الشخصي إلى تصعيد العنف على شيخٍ محاربٍ مُبجَّل.
Verse 69
विव्याध समरे राजन् सर्वलोकस्य पश्यत: । राजन! तब सेनापति श्वेतने कुपित हो उस समरभूमिमें बहुत-से लौहमय बाणोंद्वारा सब लोगोंके देखते-देखते भीष्मको क्षत-विक्षत कर दिया ।। ६८ इ |। ततः प्रव्यथितो राजा भीष्म॑ दृष्टवा निवारितम्,शैतने सम्पूर्ण विश्वके विख्यात वीर भीष्मको युद्धमें आगे बढ़नेसे रोक दिया, यह देखकर राजा दुर्योधनके मनमें बड़ी व्यथा हुई। साथ ही आपकी सेनामें सब लोगोंपर महान् भय छा गया
قال سنجيا: أيها الملك، في خضمّ المعركة وأمام أنظار الناس جميعًا، طعنه بالسهام. ويُبرز هذا المشهد أن أفعال العنف العلنية في الحرب ليست مجرد مآثر فردية، بل هي مشاهد تُشكِّل المعنويات والخوف والمناخ الأخلاقي في ساحة القتال.
Verse 70
प्रवीरं सर्वलोकस्य श्वेतेन युधि वै तदा । निष्ठानकश्न सुमहांस्तव सैन्यस्य चाभवत्,शैतने सम्पूर्ण विश्वके विख्यात वीर भीष्मको युद्धमें आगे बढ़नेसे रोक दिया, यह देखकर राजा दुर्योधनके मनमें बड़ी व्यथा हुई। साथ ही आपकी सेनामें सब लोगोंपर महान् भय छा गया
قال سنجيا: عندئذٍ في ساحة القتال، منع شْوِيتا البطلَ المشهورَ في العالم كله، بهيشما، من التقدّم. فلما رأى ذلك الملكُ دوريوذانا اعتراه ألمٌ عظيم؛ وفي جيشك خيّم خوفٌ شديد على الجميع.
Verse 71
त॑ वीरं वारितं दृष्टवा श्वेतेन शरविक्षतम् । हत॑ श्वेतेन मन्यन्ते श्वेतस्य वशमागतम्,ब्ैतने वीरवर भीष्मको कुण्ठित कर दिया और उनका शरीर बाणोंसे क्षत-विक्षत हो गया है, यह देखकर सब लोग यह मानने लगे कि भीष्मजी श्वेतके वशमें पड़ गये हैं और अब उन्हींके हाथसे मारे जायँगे
قال سانجيا: لما رأى المحاربون ذلك البطل وقد كُفَّت حركته، وجسده ممزقًا مثخنًا بجراح سهام شفيتا، خلصوا إلى أن بهيشما قد وقع تحت سلطان شفيتا، وأنه الآن سيُقتل على يده.
Verse 72
ततः क्रोधवशं प्राप्त: पिता देवव्रतस्तव । ध्वजमुन्मथितं दृष्टवा तां च सेनां निवारिताम्,तब आपके पिता देवव्रत भीष्म अपने ध्वजको टूटकर गिरा हुआ और सेनाको निवारित की हुई देखकर क्रोधके अधीन हो गये
قال سانجيا: ثم إن أباك ديفافراتا (بهيشما)، وقد استولى عليه الغضب، لما رأى رايته قد أُسقطت وجيشه قد كُفَّ وأُوقِف، اشتعل حنقًا.
Verse 73
श्वित॑ प्रति महाराज व्यसूजत् सायकान् बहून् तानावार्य रणे श्वेतों भीष्मस्य रथिनां वर:
قال سانجيا: «أيها الملك العظيم، إن شفيتا أطلق ردًّا سهامًا كثيرة. وفي لُجّة القتال كان شفيتا—وهو أبرع فرسان العربة في صفوف بهيشما—يصدّ تلك المقذوفات ويردّها.»
Verse 74
उत्सृज्य कार्मुक॑ राजन गाड़ेय: क्रोधमूर्च्छित:
قال سانجيا: أيها الملك، إن غادييا (Gāḍeya)، وقد غمر عقله طوفان الغضب، ألقى قوسه جانبًا.
Verse 75
अन्यत् कार्मुकमादाय विपुलं बलवत्तरम् | तत्र संधाय विपुलान् भल्लान् सप्त शिलाशितान्
قال سانجيا: ثم تناول قوسًا آخر أعرضَ وأشدَّ قوة، وهناك ركّب عليه سبعة سهامٍ عظيمة من نوع «بهلّا» (bhalla) مشحوذة بالحجر.
Verse 76
चतुर्भिश्व जघानाश्वाञ्छवेतस्य पृतनापते: । ध्वजं द्वाभ्यां तु चिच्छेद सप्तमेन च सारथे:
قال سنجيا: بأربع سهام صرع خيول شفيتا، قائد الجيش؛ وبسهمين آخرين قطع رايته؛ وبالسهم السابع أسقط السائق أيضًا.
Verse 77
शिरकश्रिच्छेद भल्लेन संक्रुद्धो लघुविक्रम: । राजन! यह देख गंगानन्दन भीष्मने क्रोधसे मूर्च्छिंत हो उस धनुषको फेंककर दूसरा अत्यन्त प्रबल एवं विशाल धनुष ले लिया और उसके ऊपर पत्थरपर रगड़कर तेज किये हुए सात विशाल भल्लोंका संधान किया। उनमेंसे चार भल्लोंके द्वारा उन्होंने सेनापति ब्ैतके चार घोड़ोंको मार डाला, दोसे उनका ध्वज काट दिया और अपनी फुर्तीका परिचय देते हुए सातवें भल्लके द्वारा क्रोधपूर्वक उनके सारथिका सिर उड़ा दिया || ७४-७६ है ।। हताश्वसूतात् स रथादवप्लुत्य महाबल:
قال سنجيا: «يا ملك! لما قُطع رأسه بسهم عريض النصل، اشتعل بهيشما—السريع الفعل—غضبًا. وإذ رأى ذلك ابن الغانغا، كأنما أذهله السخط، ألقى قوسه وأخذ قوسًا آخر بالغ القوة عظيمًا، وركّب عليه سبعة سهام عظيمة عريضة النصل، قد شُحذت بحكّها على الحجر. فأردى بأربعة منها خيول القائد باهليكا الأربع، وباثنين قطع الراية، وبالسهم السابع—مظهرًا سرعته—جزّ رأس السائق غيظًا. ثم إن المحارب الجبار، وقد قُتلت خيوله وسائقه، قفز من العربة.»
Verse 78
विरथं रथिनां श्रेष्ठ श्वेतं दृष्टया पितामह:
قال سنجيا: لما رأى شفيتا وقد صار بلا عربة، تنبّه بهيشما، الجدّ الأكبر، إلى ذلك المتقدّم بين فرسان العربات.
Verse 79
स ताड्यमान: समरे भीष्मचापच्युतै: शरै:
قال سنجيا: في خضمّ المعركة كان يُضرَب بسهامٍ أُطلقت من قوس بهيشما.
Verse 80
ततः शक्ति रणे श्वेतो जग्राहोग्रां महाभयाम्,अत्यन्त उग्र, महाभयंकर, कालदण्डके समान घोर और मृत्युकी जिह्वा-सी प्रतीत होनेवाली उस शक्तिको श्वेतने हाथमें उठाया और लंबी साँस लेते हुए रणक्षेत्रमें शान्तनुपुत्र भीष्मसे इस प्रकार कहा--
قال سنجيا: ثم إن شفيتا، في وسط القتال، تناول رمحًا رهيبًا (شاكتي) يبعث على فزع عظيم—شديد الضراوة، مروّعًا كعصا الموت نفسها، كأنه لسان الفناء. رفع ذلك السلاح في يده وأخذ نفسًا طويلًا، ثم خاطب بهيشما ابن شانتانو في ساحة الحرب قائلًا هكذا—
Verse 81
कालदण्डोपमां घोरां मृत्योर्जिद्वामिव श्वसन् । अब्रवीच्च तदा श्वेतो भीष्मं शान्तनवं रणे,अत्यन्त उग्र, महाभयंकर, कालदण्डके समान घोर और मृत्युकी जिह्वा-सी प्रतीत होनेवाली उस शक्तिको श्वेतने हाथमें उठाया और लंबी साँस लेते हुए रणक्षेत्रमें शान्तनुपुत्र भीष्मसे इस प्रकार कहा--
قال سنجيا: حينئذٍ رفع شڤيتا، وهو يلهث لشدّة القتال، ذلك السلاح المروّع—مخيفًا كعصا العقاب ليَما، وكأنه لسان الموت نفسه—وخاطب بهيشما ابن شانتانو في ساحة المعركة.
Verse 82
तिछ्ठेदानीं सुसंरब्ध: पश्य मां पुरुषो भव | एवमुकक््त्वा महेष्वासो भीष्मं युधि पराक्रमी,'भीष्म! इस समय साहसपूर्वक खड़े रहो। मुझे देखो और पुरुष बनो“, ऐसा कहकर अमित आत्मबलसे सम्पन्न महाधनुर्धर और पराक्रमी वीर श्वेतने भीष्मपर वह सर्पके समान भयंकर शक्ति चलायी। श्वेत पाण्डवोंका हित और आपके पक्षका अहित करनेकी इच्छासे पराक्रम दिखा रहे थे
قال سنجيا: «اثبت الآن وقد اشتدّ غضبك؛ انظر إليّ وكن رجلًا!» ثم إن شڤيتا، الرامي العظيم الباسل، تقدّم في القتال لملاقاة بهيشما.
Verse 83
ततः शक्तिममेयात्मा चिक्षेप भुजगोपमाम् | पाण्डवार्थे पराक्रान्तस्तवानर्थ चिकीर्षुक:,'भीष्म! इस समय साहसपूर्वक खड़े रहो। मुझे देखो और पुरुष बनो“, ऐसा कहकर अमित आत्मबलसे सम्पन्न महाधनुर्धर और पराक्रमी वीर श्वेतने भीष्मपर वह सर्पके समान भयंकर शक्ति चलायी। श्वेत पाण्डवोंका हित और आपके पक्षका अहित करनेकी इच्छासे पराक्रम दिखा रहे थे
قال سنجيا: ثم إن شڤيتا، ذو العزم الذي لا يُقاس، قذف سلاح «الشَّكتي» المروّع، منطلقًا كالأفعى في طيرانه. ساعيًا لنصرة قضية الباندڤا وقاصدًا إلحاق الضرر بجانبكم، أظهر بأسه بإلقائه على بهيشما، محرضًا إياه أن يثبت ويواجهه مواجهة الرجال.
Verse 84
हाहाकारो महानासीत् पुत्राणां ते विशाम्पते । दृष्टवा शक्ति महाघोरां मृत्योर्दण्डसमप्रभाम्
قال سنجيا: «يا سيد الناس، ارتفع بين أبنائك صراخ عظيم حين أبصروا ذلك الرمح بالغ الرهبة، متلألئًا كأنه عصا الموت ذاتها.»
Verse 85
अपतत् सहसा राजन् महोल्केव नभस्तलात्,अष्टभिनवभ्रिर्भीष्म: शक्ति चिच्छेद पत्रिभि: । राजन्! वह शक्ति आकाशसे बहुत बड़ी उल्काके समान सहसा गिरी। अन्तरिक्षमें ज्वालाओंसे घिरी हुई-सी उस प्रज्वलित शक्तिको देखकर आपके पिता देवव्रतको तनिक भी घबराहट नहीं हुई। उन्होंने आठ-नौ बाण मारकर उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिये
قال سنجيا: «أيها الملك، لقد هوت تلك الحربة فجأة من السماء كأنها شهاب عظيم. ولما رآها تتأجّج في الفضاء، كأن النيران تطوّقها، لم يضطرب أبوك ديفافراتا (بهيشما) قيد أنملة؛ وبثمانية أو تسعة سهام شطر السلاح إلى شظايا.»
Verse 86
ज्वलन्तीमन्तरिक्षे तां ज्वालाभिरिव संवृताम् । असम्भ्रान्तस्तदा राजन् पिता देवव्रतस्तव
قال سنجيا: «أيها الملك، عندئذٍ رأى أبوك ديفافراتا (بهِيشما)، ثابت الجأش غير مضطرب ولا مشوش، أنها تتوهّج في السماء كأن ألسنة اللهب تُحيط بها من كل جانب».
Verse 87
उत्कृष्टहेमविकृतां निकृतां निशितै: शरै:
قال سنجيا: وبسهامٍ حادّة كالموسى قُطِعَت وأُسقِطَت—وهي شيءٌ صيغ وزُيِّن بذهبٍ نفيس—إشارةً إلى أنّ في سَعير المعركة يغدو أبدع الصنع وأبهى البهاء هشًّا أمام عنفٍ لا يلين.
Verse 88
शक्ति विनिहतां दृष्टवा वैराटि: क्रोधमूर्च्छित:,गदां जग्राह संहृष्टो भीष्मस्य निधन प्रति । अपनी शक्तिको इस प्रकार विफल हुई देख विराटपुत्र श्वेत क्रोधसे मूर्च्छित हो गये। कालने उनकी विवेक-शक्तिको नष्ट कर दिया था; अतः उन्हें अपने कर्तव्यका भान न रहा। उन्होंने हर्षसे उत्साहित हो हँसते-हँसते भीष्मको मार डालनेके लिये हाथमें गदा उठा ली
قال سنجيا: لما رأى أن رميته بالرمح قد ذهبت سدى، غشي على ابن فيرَاطا من شدة الغضب، ثم قبض مبتهجًا على هراوة (غَدَا)، قاصدًا أن يُنزل ببهِيشما الموت. ويُظهر هذا المشهد كيف يحجب السخطُ البصيرة في ساحة القتال، فيحوّل الواجب إلى ثأرٍ متهوّر.
Verse 89
कालोपहतचेतास्तु कर्तव्यं नाभ्यजानत । क्रोधसम्मूर्च्छितो राजन् वैराटि: प्रहसन्निव
قال سنجيا: «أيها الملك، لقد ضُرِبَ عقلُه وغُلِبَ عليه بيدِ كالا (الزمن/القدر)، فلم يعد يميّز ما ينبغي فعله. وقد غشي عليه تحت سحر الغضب، فكان أمير فيرَاطا يتصرّف كأنه يضحك—حُجِبَ حكمُه، وساقته العاطفة لا الواجب.»
Verse 90
क्रोधेन रक्तनयनो दण्डपाणिरिवान्तक:
قال سنجيا: وقد احمرّت عيناه من الغضب، فبدا كأنه أنتاكا (الموت) نفسه، عصاه في يده—صورةٌ للغضب وقد تجسّد، تُنذر بأن السخط إذا انفلت في ساحة القتال حوّل المحارب إلى أداةٍ للدمار لا إلى صاحب بصيرة وتمييز.
Verse 91
भीष्म॑ं समभिदुद्राव जलौघ इव पर्वतम् । उस समय उनकी आँखें क्रोधसे लाल हो रही थीं। वे हाथमें दण्ड लिये यमराजके समान जान पड़ते थे। जैसे महान् जलप्रवाह किसी पर्वतसे टकराता हो, उसी प्रकार वे गदा लिये भीष्मकी ओर दौड़े ।। ९० है ।। तस्य वेगमसंवार्य मत्वा भीष्म: प्रतापवान्
اندفع شْفِيتا نحو بِهِيشْما اندفاعَ سيلٍ عارمٍ يصطدم بجبل. وفي تلك اللحظة كانت عيناه تحمران من الغضب، وفي يده عصاً كأنه يَمَراجا نفسه. وكما يضرب التيار الجارف صخرة الجبل، كذلك أسرع وهو قابضٌ على الهراوة إلى بِهِيشْما.
Verse 92
श्वेत: क्रोधसमाविष्टो भ्रामयित्वा तु तां गदाम्
وكان شْفِيتا وقد استبدّ به الغضب يدوّر تلك الهراوة ويُديرها.
Verse 93
रथे भीष्मस्य चिक्षेप यथा देवो धनेश्वर: । उधर श्वेतने क्रोधसे व्याप्त हो उस गदाको आकाशमें घुमाकर भीष्मके रथपर फेंक दिया, मानो कुबेरने गदाका प्रहार किया हो ।। ९२ ह ।। तया भीष्मनिपातिन्या स रथो भस्मसात्कृत:
ثم قذفها إلى عربة بِهِيشْما، كأن كوبيرا ربَّ الثروة قد ضرب بهراوته. وبتلك الضربة التي قصدت إسقاط بِهِيشْما، تحولت العربة إلى رماد.
Verse 94
विरथं रथिनां श्रेष्ठ भीष्मं दृष्टवा रथोत्तमा:
فلما رأوا بِهِيشْما—وهو سيّد فرسان العربات—واقفاً بلا عربة، اضطرب خيرة المقاتلين على العربات واستبدّت بهم العَجَلة والقلق.
Verse 95
ततोअन्यं रथमास्थाय थधनुर्विस्फार्य दुर्मना:
ثم اعتلى عربةً أخرى، وشدّ قوسه حتى دوّى وتره، غير أنّ نفسه غشيتها الكآبة.
Verse 96
एतस्मिन्नन्तरे भीष्म: शुश्राव विपुलां गिरम्
قال سنجيا: في خِضَمِّ تلك الوقائع سمع بهيشما صوتًا عظيمًا بعيدَ المدى—كأنه نذيرٌ سماويّ يقطع جريان المعركة ويُشعر بأن وراء الحرب المتكشِّفة حضورًا أخلاقيًّا وكونيًّا أوسع.
Verse 97
आकाशादीरितां दिव्यामात्मनो हितसम्भवाम् | भीष्म भीष्म महाबाहो शीघ्रं यत्नं कुरुष्व वै
قال سنجيا: «قد ارتفع من السماء قولٌ إلهيّ، صدر لخيرك أنت. يا بهيشما—يا بهيشما، يا عظيمَ الساعد—أسرِع وابذل جهدك في الحال!»
Verse 98
एष हास्य जये कालो निर्दिष्टो विश्वयोनिना । इसी बीचमें भीष्मने अपने हितसे सम्बन्ध रखनेवाली एक दिव्य एवं गम्भीर आकाशवाणी सुनी--“महाबाहु भीष्म! शीघ्र प्रयत्न करो। इस श्वेतपर विजय पानेके लिये ब्रह्माजीने यही समय निश्चित किया है” || ९६-९७ हू ।। एतच्छुत्वा तु वचन देवदूतेन भाषितम्
قال سنجيا: «لأجل نصره، قد عيَّن مَنبعُ الكون (براهما) هذه اللحظة بعينها.» فلما سمع بهيشما هذا القول على لسان رسولٍ إلهيّ أدرك ثِقَلَ النداء السماوي: لقد ثُبِّت وقتُ السعي الحاسم، والتأخّر خذلانٌ للواجب أمام قدرٍ قد فُتِح بابه.
Verse 99
सम्प्रहृष्टमना भूत्वा वधे तस्य मनो दे । देवदूतका कहा हुआ यह वचन सुनकर भीष्मजीका मन प्रसन्न हो गया और उन्होंने श्ेतके वधका विचार किया ।। ९८ है ।। विरथं रथियनां श्रेष्ठ श्वेतं दृष्टया पदातिनम्
قال سنجيا: لما سمع بهيشما ذلك القول كأنه نداءٌ إلهيّ، انشرح صدره وارتفعت همّته. وبقلبٍ حازم وجّه فكره إلى قتل شفيتا (Śveta)، مُؤطِّرًا الفعل بوصفه قرارًا لازمًا في أخلاق الحرب القاسية لا حقدًا شخصيًّا.
Verse 100
सात्यकिर्भीमसेनश्व धृष्टद्ुम्नश्व॒ पार्षत:
قال سنجيا: وكان ساتيَكي، وبهيمسينا، ودهريشتاديومنَ—ابن بارشاتا (دروبادا)—[حاضرين/متقدّمين]، وقد ذُكروا في عداد أبرَز المحاربين في مجرى المعركة.
Verse 101
एतानापतत: सर्वान् द्रोणशल्यकृपै: सह
قال سانجيا: «إنّ أولئك المحاربين جميعًا اندفعوا إلى الأمام للهجوم—مع درونا وشاليا وكريبا—وتقدّموا كأنهم جسدٌ واحد».
Verse 102
स निरुद्धेषु सर्वेषु पाण्डवेषु महात्मसु
قال سانجيا: «حين أُحيطَ جميعُ الباندافا ذوي النفوس العظيمة وطُوِّقوا وكُبِحوا، اشتدّ الموقف حتى غدا لحظةَ خطرٍ جسيم».
Verse 103
तदपास्य धनुश्छिन्नं त्वरमाण: पितामह:
قال سانجيا: «فنبذَ القوسَ المقطوعَ، وأسرعَ الجدُّ بهيشما مُندفعًا إلى الأمام».
Verse 104
ततः प्रचरमाणस्तु पिता देवव्रतस्तव,तदनन्तर आपके पिता महारथी देवव्रतने तुरंत ही दूसरा धनुष लेकर वहाँ विचरण करते हुए ही क्षणभरमें उसपर प्रत्यंचा चढ़ा दी। वह इन्द्रधनुषके समान प्रकाशित हो रहा था
قال سانجيا: «ثم إنّ أباك ديفافراتا (بهيشما)، وهو يجول في ساحة القتال، تناول على الفور قوسًا آخر، وحتى وهو يواصل الحركة شدَّه في لحظة. وكان ذلك القوس يتلألأ كقوس إندرا (قوس قزح)».
Verse 105
अन्यत् कार्मुकमादाय त्वरमाणो महारथ: । क्षणेन सज्यमकरोच्छक्रचापसमप्रभम्,तदनन्तर आपके पिता महारथी देवव्रतने तुरंत ही दूसरा धनुष लेकर वहाँ विचरण करते हुए ही क्षणभरमें उसपर प्रत्यंचा चढ़ा दी। वह इन्द्रधनुषके समान प्रकाशित हो रहा था
قال سانجيا: «عندئذٍ تناول ذلك المقاتل العظيم على العربة قوسًا آخر بعزمٍ سريع، وفي لحظةٍ شدَّه. وكان يلمع ببهاءٍ كبهاء قوس إندرا».
Verse 106
पिता ते भरतश्रेष्ठ श्वेतं दृष्टवा महारथै: । वृतं त॑ं मनुजव्याघ्रैर्भीमसेनपुरोगमै:
قال سانجيا: «يا خيرَ آلِ بهاراتا، إن أباك حين رأى شْفِيتا مُحاطًا بعظماء فرسان العربات—مطوَّقًا برجالٍ كالنمور يتقدّمهم بهيماسينا—أدرك جسامة اللحظة وضغط المعركة.»
Verse 107
आपततन्तं ततो भीष्मो भीमसेन॑ प्रतापवान्
قال سانجيا: ثم إن بهيشما الجبّار، المتوهّج بالبأس، تقدّم ليلقى بهيماسينا وهو يندفع إلى الأمام—كأنها هيبةُ الشيخ المجرَّب تواجه اندفاعَ القوة الفتيّة، وسط الضيق الأخلاقي لحربٍ بين ذوي القربى.
Verse 108
आजलम्ने विशिखेी: षष्ट्या सेनान्यं स महारथ: । उस समय सेनानायक भीमसेनको सामने आते देख प्रतापी महारथी भीष्मने उन्हें साठ बाणोंसे घायल कर दिया || १०७ है || अभिमन्युं च समरे पिता देवव्रतस्तव
قال سانجيا: عندئذٍ أصاب بهيشما، فارسُ العربة العظيم، بهيماسينا قائدَ الجيش بستين سهمًا وهو يتقدّم إلى المقدّمة. وفي المعركة نفسها هاجم أبوك ديفافراتا (بهييشما) أبهيمانيو أيضًا—مُظهِرًا أن أخلاق الحرب القاسية لا تُمهل أحدًا؛ فحتى الشيوخُ الموقَّرون يلاقون الأبطال الصاعدين بكامل قوة السلاح، مقيّدين بواجبهم نحو جانبهم.
Verse 109
सात्यकिं च शतेनाजौ भरतानां पितामह:
قال سانجيا: وفي خِضَمِّ القتال واجه جدُّ آلِ بهاراتا ساتياكي بمئة (هجمة)، يريد كبح تقدّمه وسط صدامٍ بين ذوي القربى، عادلٍ في دعواه مدمّرٍ في أثره.
Verse 110
धृष्टद्युम्नं च विंशत्या कैकेयं चापि पञ्चभि: । तांश्व॒ सर्वान् महेष्वासान् पिता देववब्रतस्तव
قال سانجيا: «بِعِشرين (ضربة) على دْهْرِشْتَدْيُومْنَ، وبخمسٍ على أميرِ كَيْكَيَة—أسقط أبوك ديفافراتا جميعَ أولئك الرماة العظام.»
Verse 111
वारयित्वा शरैघोरिे: श्वेतमेवाभिदुद्रुवे । भरतवंशियोंके उन पितामहने युद्धस्थलमें सौ बाणोंसे सात्यकिको, बीस सायकोंद्वारा धष्टद्यम्मनको और पाँच बाणोंसे केकयराजकुमारको क्षत-विक्षत कर दिया। इस प्रकार आपके पिता भीष्मने अपने भयंकर बाणोंद्वारा उन सम्पूर्ण महाधनुर्धरोंको जहाँके तहाँ रोककर पुनः श्वेतपर ही आक्रमण किया || १०९-११० हू || तत: शरं मृत्युसमं भारसाधनमुत्तमम्,तदनन्तर महाबली भीष्मने धनुषको खींचकर उसके ऊपर एक मृत्युके समान भयंकर, भारी-से-भारी लक्ष्यको बेधनेमें समर्थ, उत्तम और दुःसह पंखयुक्त बाण रखा; फिर उसे ब्रह्मास्त्रद्वारा अभिमन्त्रित करके छोड़ दिया
ثم إنَّ بهيشما الجبّار شدَّ قوسه ووضع عليه سهمًا نفيسًا—ثقيلًا عسير الاحتمال، قاتلًا كالموت نفسه، قادرًا على اختراق أعسر الأهداف. وبعد أن قدَّسه بتعويذة «براهماأسترا»، أطلقه. ويُبرز هذا المشهد التصعيد الكالح للحرب: إذ تُستدعى القدرة الخارقة لا لضبط النفس، بل للحسم بالتدمير، فتتعاظم المعضلة الأخلاقية بين واجب المحارب وكلفة الظفر الكارثية.
Verse 112
विकृष्य बलवान् भीष्म: समाधत्त दुरासदम् | ब्रह्मास्त्रेण सुसंयुक्त तं शरं लोमवाहिनम्,तदनन्तर महाबली भीष्मने धनुषको खींचकर उसके ऊपर एक मृत्युके समान भयंकर, भारी-से-भारी लक्ष्यको बेधनेमें समर्थ, उत्तम और दुःसह पंखयुक्त बाण रखा; फिर उसे ब्रह्मास्त्रद्वारा अभिमन्त्रित करके छोड़ दिया
قال سنجيا: إنَّ بهيشما القوي شدَّ قوسه وهيّأ سهمًا مهيبًا عسير الدفع. وكان ذلك النصل مزوّدًا بريشٍ مفزع؛ ثم أمدَّه بقوة «براهماأسترا» فجعله سلاحًا لا يُقاوَم، وأطلقه عازمًا أن يصيب حتى أعسر الأهداف. ويُبرز المشهد تصعيد الحرب القاتم، إذ تُسخَّر براعة الأسلحة المقدّسة للهدم لا للكفّ.
Verse 113
ददृशुर्देवगन्धर्वा: पिशाचोरगराक्षसा: । स तस्य कवचं भित्त्वा हृदयं चामितौजस:
قال سنجيا: لقد شهدت الآلهة والگندهرفا، ومعهم البيشاشا والحيات والراكشاسا، ذلك المشهد. ثم إنَّ ذلك المحارب ذا البأس الذي لا يُقاس، بعدما حطّم درع خصمه، نفذ إلى القلب—صورةٌ لنهائية الحرب العارية، حيث تلتقي البراعة والقدر أمام أنظار العوالم كلّها.
Verse 114
अस्तं गच्छन् यथा55दित्य: प्रभामादाय सत्वर:
قال سنجيا: «كما أن الشمس، مسرعةً إلى مغيبها، تمضي حاملةً معها ضياءها…»
Verse 115
एवं जीवितमादाय श्वेतदेहाज्जगाम ह । जैसे डूबता हुआ सूर्य अपनी प्रभा साथ लेकर शीघ्र ही अस्त हो जाता है, उसी प्रकार वह बाण श्वेतके शरीरसे उसके प्राण लेकर चला गया ।। ११४ ह ।। त॑ भीष्मेण नरव्यात्रं तथा विनिहतं युधि
قال سنجيا: وهكذا، وقد حملت معه حياته ذاتها، غادر السهم جسد شفيتا. وكما أن الشمس إذا غاصت أسرعت إلى الغروب وهي تحمل ضياءها، كذلك انطلق ذلك النصل بعد أن حمل معه نَفَس شفيتا. وعلى هذا النحو سقط “نمر الرجال” صريعًا في المعركة بيد بهيشما، مؤكِّدًا يقين الموت القاتم في خضم حرب تُسمّى حربَ الحق.
Verse 116
अशोचन् पाण्डवास्तत्र क्षत्रियाश्व महारथा:
قال سنجيا: هناك حزنَ الباندافا—أولئك المها-رَثَة، فرسان العربات العظام، والكشاتريا الحقّ—حزناً شديداً. تُبرز هذه العبارة الكلفة الإنسانية للقتال: فحتى أشجع المحاربين وأشدّهم التزاماً بواجب الدارما لا يسلمون من الأسى حين يواجهون الفقد وعواقب الحرب.
Verse 117
ततो दुःशासनो राजन श्वैतं दृष्टया निपातितम्
قال سنجيا: «ثم، أيها الملك، رأى دُحشاسَنَةُ شفايتا وقد صُرِع وسقط.» تُبرز هذه العبارة اندفاع ساحة القتال الكئيب؛ فمشاهدة سقوط الرفيق تُقَسّي العزم وتزيد الثقل الأخلاقي لمواصلة العنف.
Verse 118
तस्मिन् हते महेष्वासे भीष्मेणाहवशोभिना
قال سنجيا: لما قُتِل ذلك الرامي العظيم على يد بهيشما، زينة ساحة الوغى، بدا كأن بهاء المعركة نفسها قد تبدّل. وهكذا، في الحرب، سقوطُ بطلٍ مُقدَّم يغيّر ميزان الميدان: في التدبير كما في الثقل الأخلاقي.
Verse 119
प्रावेपन्त महेष्वासा: शिखण्डिप्रमुखा रथा: । संग्रामभूमिमें शोभा पानेवाले भीष्मजीके द्वारा महाधनुर्धर श्वेतके मारे जानेपर शिखण्डी आदि महाधनुर्धर रथी भयके मारे काँपने लगे || ११८ ह || ततो धनंजयो राजन वार्ष्णेयश्चापि सर्वश:,राजन! तब सेनापति श्वेतके मारे जानेके कारण अर्जुन और श्रीकृष्णने धीरे-धीरे अपनी सेनाको युद्धभूमिसे पीछे हटा लिया। भारत! फिर आपकी और पाण्डवोंकी सेना भी उस समय युद्धसे विरक्त हो गयी
قال سنجيا: لما قُتِل الرامي الجسور شفيتا على يد بهيشما، أخذ كبار الرماة—فرسان العربات يتقدمهم شيخاندين—يرتجفون من الخوف. ثم، أيها الملك، أخذ دهننجيا (أرجونا) وفارشنَيَة (كريشنا) يسحبان قواتهما رويداً رويداً عن ساحة القتال؛ وفي تلك اللحظة فترت عزيمة جيشك وجيش الباندافا معاً عن مواصلة الحرب. يبيّن هذا المقطع كيف يمكن لسقوط بطلٍ واحدٍ مُثالي أن يزلزل المعنويات ويبدّل المزاج الأخلاقي والميزان الاستراتيجي لجيشٍ بأسره.
Verse 120
अवहारं शनैश्षक्रुर्निहते वाहिनीपतौ । ततो<वहार: सैन्यानां तव तेषां च भारत,राजन! तब सेनापति श्वेतके मारे जानेके कारण अर्जुन और श्रीकृष्णने धीरे-धीरे अपनी सेनाको युद्धभूमिसे पीछे हटा लिया। भारत! फिर आपकी और पाण्डवोंकी सेना भी उस समय युद्धसे विरक्त हो गयी
قال سنجيا: لما قُتِل قائدُ الجيش شرعوا ينسحبون رويداً رويداً. ثم، يا بهاراتا، انسحب جيشك وجيشهم على السواء.
Verse 121
तावकानां परेषां च नर्दतां च मुहुर्मुहु: । पार्था विमनसो भूत्वा न्यवर्तन्त महारथा: । चिन्तयन्तो वध घोर द्वैरथेन परंतपा:,उस समय आपके और शत्रुपक्षके सैनिक भी बारंबार गर्जना कर रहे थे। उस द्वैरथ युद्धमें जो भयंकर संहार हुआ था, उसके लिये चिन्ता करते हुए शत्रुसंतापी पाण्डव महारथी उदास मनसे शिविरमें लौट आये
قال سنجيا: وبينما كان محاربوك ومحاربو الفريق المقابل يزأرون مرارًا وتكرارًا، خيّم الكمد على أبناء باندو—أولئك المقاتلين العظام على العربات، محرقي الأعداء. وإذ أخذوا يتفكّرون في المذبحة المروّعة التي أفضت إليها مواجهة العربة بالعربة، ارتدّوا راجعين إلى معسكرهم، وقد اضطربت نفوسهم من فداحة ثمن القتال.
Verse 126
शतश: पतिता भूमौ वीरशय्यासु शेरते । राजन! वे प्रचण्ड घोड़े उस रथको लिये-दिये यत्र-तत्र घूम रहे थे। कमरमें तलवार और पीठपर तरकस बाँधे हुए सैकड़ों आहत वीर मस्तक कट जानेके कारण पृथ्वीपर गिरकर वीरोचित शय्याओंपर शयन कर रहे थे
قال سنجيا: «أيها الملك، لقد سقط مئات المحاربين على الأرض وهم راقدون على مضاجع الأبطال. والخيول الضارية التي حملت عرباتها ذهابًا وإيابًا تجوب هنا وهناك في قلق واضطراب. بسيوف عند الأوساط وجِعابٍ مشدودة على الظهور، سقط عدد لا يُحصى من الأبطال الجرحى—وقد قُطعت رؤوسهم في الصدام—إلى التراب، وهم الآن مضطجعون على الأرض كأنها سرير المحارب.»
Verse 156
तेन तेनाभ्यधावन्त विसृजन्तश्न भारत । भारत! सैकड़ों वीर धनुष और तरकस लिये सुवर्णमय आभूषणोंसे विभूषित हो कितने ही विपक्षी वीरोंका विश्वस्त भावसे विनाश करके स्वयं भी शत्रुओंके प्रहारसे अत्यन्त पीड़ित हो रहे थे और स्वयं भी अस्त्र-शस्त्रोंका प्रहार करते हुए विभिन्न मार्गोसे इधर-उधर भाग- दौड़ कर रहे थे
قال سنجيا: «يا بهاراتا، هكذا كانوا يندفعون مرة بعد مرة، مطلقين أسلحتهم. كثير من المحاربين—يحملون الأقواس والجِعاب، ومتزينين بحُليّ من ذهب—أهلكوا أبطال الخصم بعزم واثق؛ غير أنهم هم أيضًا أُصيبوا إصابات بالغة من ضربات العدو، وبينما يردّون بالسلاح كانوا يركضون ويجتاحون في مسالك شتى وسط فوضى القتال.»
Verse 176
हतसारथिरप्युच्चै: पपात काष्ठवद् रथ: । कितने ही वीर दूसरोंके बाणोंसे मारे जाकर रथसे गिर पड़ते थे। कहीं सारथिके मारे जानेपर रथ साधारण काष्ठकी भाँति ऊँचेसे नीचे गिर पड़ता था
قال سنجيا: في فوضى المعركة كان كثير من الأبطال، إذ تصيبهم سهام غيرهم، يهْوُون من عرباتهم. وفي مواضع أخرى، إذا قُتل السارَثي—سائق العربة—سقطت العربة من علوّ كأنها خشبة، وقد انقطع عنها كل توجيه.
Verse 216
नाश्रौष॑ नामगोत्राणि कीर्तन च परस्परम् | कानोंका परदा फाड़नेवाले डंकेकी आवाजसे सारी रणभूमि गूँज उठी थी। अतः वहाँ अपने पुरुषार्थको प्रकट करनेवाले किसी योद्धाकी बात मुझे नहीं सुनायी देती थी। वे लोग जो आपसमें नाम-गोत्र आदिका परिचय देते थे, उसे भी मैं नहीं सुन पाता था
قال سنجيا: لم أستطع أن أسمع الأسماء والأنساب التي كان ينادي بها بعضهم بعضًا، ولا النداءات المتبادلة بين المحاربين. فقد امتلأ ميدان القتال بدويّ طبول الحرب والضجيج، حتى إن تحدّيات المقاتلين التي يعلنون بها بأسهم لم تكن تتضح لي؛ كما لم أقدر أن أميّز ما كانوا يتبادلون من تعريف بالاسم والقبيلة (الغوترَة).
Verse 226
परस्परेषां वीराणां मनांसि समकम्पयन् । युद्धमें भीष्मजीके धनुषसे छूटे हुए बाणोंसे समस्त योद्धा पीड़ित हो रहे थे। उन बाणोंने परस्पर सभी वीरोंके हृदय कँपा दिये थे
قال سانجيا: في لُجَّة القتال كانت سهام بهيشما المنطلقة من قوسه تعذّب المحاربين المجتمعين، وتُرجِف قلوب الأبطال المتقابلين بعضهم أمام بعض—صورة لقوة الحرب الطاغية، حيث يرتجف حتى الشجاع حين تُطلَق البراعة القتالية بلا انقطاع.
Verse 236
पिता पुत्र च समरे नाभिजानाति कश्चन । वह युद्ध अत्यन्त भयंकर, रोमांचकारी तथा सबको व्याकुल कर देनेवाला था। उसमें कोई पिता अपने पुत्रको भी पहचान नहीं पाता था
قال سانجيا: في تلك المعركة لم يستطع أحد أن يتعرّف حتى على ابنه. لقد غدا القتال بالغ الفظاعة—مثيرًا في رعبه، مُقلِقًا إلى حدّ أنه أوقع الجميع في الاضطراب. وفي ذلك الخضمّ، عجز الأب عن تمييز ولده، دلالةً على أن الحرب قد تطمس الروابط المألوفة ووضوح البصيرة الأخلاقية.
Verse 246
आश्षिप्त: स्यन्दनाद् वीर: ससारथिरजिद्ागै: । भीष्मके बाणोंसे पहिये टूट गये, जूआ कट गया और एकमात्र बचा हुआ रथका घोड़ा भी मारा गया। उस दशामें रथपर बैठा हुआ सारथिसहित वीर रथी भी उनके बाणोंसे आहत होकर स्वर्ग सिधारा
قال سانجيا: وقد صُرِع ذلك البطل عن عربته بسهام العدو التي لا تُقاوَم—ومعه سائس العربة—فغُلب أمره. وتحت سهام بهيشما تحطّمت عجلات العربة، وقُطع النير، وقُتل حتى الحصان الوحيد الباقي. وفي تلك الحال العاجزة، كان الفارس المقاتل على العربة جالسًا مع سائسه، فأُصيب بتلك السهام ثم مضى إلى السماء—صورة لحتْمِيّة الحرب القاتمة، وللمصير الباهظ لمن يقف في طريق محارب أعظم، موثوقٍ بنذرٍ لا ينثني.
Verse 256
तेन तेन सम दृश्यन्ते धावमाना: समन्तत: । इस प्रकार उस समरांगणमें रथहीन हुए सभी वीर भिन्न-भिन्न मार्गोंसे सब ओर दौड़ते दिखायी देते थे
قال سانجيا: وهكذا، في ساحة القتال كان يُرى الفرسان الذين فقدوا عرباتهم يركضون في كل ناحية، عبر مسالك شتى—متفرقين مضطربين.
Verse 263
अहत: को<पि नैवासीदू भीष्मे निध्नति शात्रवान् | किसीका हाथी मारा गया, किसीका मस्तक कट गया, किसीके मर्मस्थान विदीर्ण हो गये और किसीका घोड़ा ही नष्ट हो गया। जब भीष्मजी शत्रुओंका संहार कर रहे थे, उस समय (उनके सम्मुख आया हुआ) कोई भी ऐसा विपक्षी नहीं बचा, जो घायल न हुआ हो
قال سانجيا: حين كان بهيشما يُهلك الأعداء، لم يبقَ من واجهه خصمٌ إلا وقد أُصيب بجراح. فهذا قُتل فيله، وذاك قُطع رأسه، وآخر شُقّت مواضعُه القاتلة، وآخر هلك حصانه.
Verse 276
राजपुत्रान् रथोदारानवधीच्छतसंघश: । इसी प्रकार उस महायुद्धमें श्वेत भी कौरवोंका संहार कर रहे थे। उन्होंने सैकड़ों श्रेष्ठ रथी राजकुमारोंका संहार कर डाला
قال سنجيا: لقد قتل أبناء الملوك—فرسان العربات النبلاء—مئاتٍ مئات. وهكذا، في تلك المعركة العظمى، كان شڤيتا أيضًا يفتك بالكورافا؛ فأهلك مئاتٍ من خيرة الأمراء المقاتلين على العربات.
Verse 343
गभस्तिभिरिवादित्यस्तस्थौ शरमरीचिमान् | जैसे सर्दीके अन्तमें सूर्यदेव धरतीका जल सोखने लगते हैं, उसी प्रकार भीष्म समस्त सैनिकोंके प्राणोंका अपहरण-सा कर रहे थे। किरणोंसे सुशोभित सूर्यदेवकी भाँति भीष्म बाणरूपी रश्मियोंसे शोभा पाते हुए वहाँ खड़े थे
قال سنجيا: وقف بهيشما هناك كالشمس، متلألئًا بالأشعة—وسهامه كأنها خيوط الضياء. وكما تبدو شمس آخر الشتاء كأنها تمتص رطوبة الأرض، كذلك بدا بهيشما كأنه ينتزع أنفاس الحياة من المحاربين، فيغمر ساحة القتال ببريق لا يُقاوَم وقوة قاتلة.
Verse 356
निष्नन्नमित्रान् समरे वज्पाणिरिवासुरान् | जैसे वज्रपाणि इन्द्र असुरोंका संहार करते हैं, उसी प्रकार महाधनुर्धर भीष्म उस रणक्षेत्रमें शत्रुओंका विनाश करते हुए बारंबार बाणसमूहोंकी वर्षा कर रहे थे
قال سنجيا: في أتون القتال كان بهيشما يقطع جموع الأعداء، كما يصرع فجراباني إندرا الآسورا. مرة بعد مرة أمطرهم بوابل من السهام، لا يفتر، فوق ساحة المعركة.
Verse 366
स्वयूथादिव ते यूथान्मुक्त भूमिषु दारुणम् । महाबली भीष्मजी अपने झुंडसे बिछुड़े हुए हाथीकी भाँति आपकी सेनासे विलग होकर उस रणभूमिमें अत्यन्त भयंकर हो रहे थे; उनकी मार खाकर सम्पूर्ण शत्रु उन्हें छोड़कर भाग गये
قال سنجيا: إن بهيشما الجبار، وقد انفصل عن جيشك كفيلٍ انقطع عن قطيعه، صار مهيبًا مرعبًا في ساحة القتال. ولما نالهم ضربه، تركه جيش الأعداء بأسره وفرّ هاربًا.
Verse 403
श्वेत चापि तथा भीष्म: शरौघै: समवाकिरत् । श्वेतने अपने असंख्य बाणोंका जाल-सा बिछाकर भीष्मको ढक दिया। तब भीष्मने भी वैतपर बाण-समूहोंकी वर्षा की
قال سنجيا: وكذلك فعل شڤيتا، فأمطر بهيشما بوابل كثيف من السهام حتى كأنه غطّاه بشبكة. غير أن بهيشما لم يَهِن، وردّ بأن أمطر بدوره كُتَلًا من السهام—صورةً لعزمٍ قتالي ثابت في واجب ساحة المعركة.
Verse 426
भीष्म: श्वेतश्व युयुधे परस्परवधैषिणौ । तदनन्तर वे दोनों पुरुषश्रेष्ठ भीष्म और श्वेत अपने अस्त्रोंद्वारा विपक्षीके अस्त्रोंका निवारण करके एक-दूसरेको मार डालनेकी इच्छासे युद्ध करने लगे
قال سانجيا: تقاتل بهيشما وشفيتاشفا أحدهما الآخر، وكلٌّ منهما يتوخّى موت صاحبه. ثم إن هذين الفارسين من خيار الرجال—بهیشما وشفيتاشفا—كانا يصدّان مقاذيف العدوّ بأسلحتهما، ويشتبكان في القتال مدفوعين برغبةٍ في إسقاط الآخر وقتله.
Verse 456
ससैन्य: पाण्डवानीकम भ्यद्रवत संयुगे । तब दुर्योधनने कुपित हो समस्त राजाओं तथा सेनाके साथ उस युद्धभूमिमें पाण्डव- सेनापर आक्रमण किया
قال سانجيا: في غمرة القتال اندفع دوريوذانا، وقد استبدّ به الغضب، ومعه جنده. فجمع الملوك وكلَّ قوة جيشه، ثم شنّ على ساحة المعركة هجومًا على جيش الباندافا، مدفوعًا بالسخط وإرادة قهر أعدائه.
Verse 466
भीष्म जुगुपुरासाद्य तव पुत्रेण नोदिता: । दुर्मुख, कृतवर्मा, कृपाचार्य तथा राजा शल्य आपके पुत्रकी आज्ञासे आकर भीष्मकी रक्षा करने लगे
قال سانجيا: بتحريضٍ من ابنك اقتربوا من بهيشما وأحاطوا به ليحموه. دورموخا، وكريتافارما، وكريباتشاريا، والملك شاليا—وقد جاءوا بأمر ابنك—شرعوا يحرسون بهيشما.
Verse 496
आपतत् सहसा भूयो यत्र भीष्मो व्यवस्थित: । राजन! विराटपुत्र श्वेत उस समय क्रोधसे मूर्च्छिंत हो रहे थे। वे आपकी सेनाको दूर भगाकर फिर सहसा वहीं आ पहुँचे, जहाँ भीष्म खड़े थे
قال سانجيا: «أيها الملك، إن شفيتا ابن فيراتا، كأنما غلبه الغضب حتى أذهله، اندفع مرة أخرى اندفاعًا مباغتًا إلى الموضع الذي كان بهيشما قائمًا فيه. وبعد أن طرد جنودك بعيدًا عاد سريعًا واندفع ثانية نحو بهيشما.»
Verse 546
स विद्धस्तेन बलवान् नाकम्पत यथाचल: । तब शान्तनुनन्दन भीष्मने भी दस बाण मारकर बदला चुकाया। उनके द्वारा घायल किये जानेपर भी बलवान श्वेत विचलित नहीं हुआ। वह पर्वतकी भाँति अविचलभावसे खड़ा रहा
قال سانجيا: مع أنه أُصيب بسهمه، لم يرتجف ذلك الجبار؛ بل ثبت كالجبل لا يتزحزح. وفي لهيب القتال ردّ بهيشما ابن شانتانو بإطلاق عشرة سهام جزاءً بما ناله؛ غير أن شفيتا القوي، وإن جُرح، ظل قائمًا ثابتًا لا يتزعزع.
Verse 556
आजपघान ततो भीष्म॑ श्वेत: क्षत्रियनन्दन: । तदनन्तर क्षत्रियकुलको आनन्दित करनेवाले विराटकुमार श्वेतने युद्धमें कुपित हो धनुषको जोर-जोरसे खींचकर भीष्मपर पुनः बाणोंद्वारा प्रहार किया
قال سنجيا: ثم إن شفيتا، بهجة الكشاتريا، ضرب بيشما. وبعد ذلك، فإن شفيتا—أمير فيراتا وسليل سلالة المحاربين—استشاط غضبًا في ساحة القتال، فشدّ قوسه بقوة مرة بعد مرة، وعاد يهاجم بيشما بوابلٍ من السهام.
Verse 576
उनन््ममाथ ततस्तालं ध्वजशीर्ष महात्मन: । फिर शिखाशून्य पंखयुक्त बाणका संधान करके उसके द्वारा महात्मा भीष्मके तालचिह्नयुक्त ध्वजका ऊपरी भाग काट डाला
قال سنجيا: ثم ضرب فقطع الجزء العلوي من راية بيشما العظيم النفس، تلك الراية الموسومة بعلامة نخلة التال. وبعد أن ركّب سهمًا مُريَّشًا وأحسن تسديده، بتر به قمة الراية.
Verse 666
महता शरवर्षेण भीष्मस्य धनुराच्छिनत् | जैसे सिंह हाथियोंके समूहको आगे बढ़नेसे रोक देता है, उसी प्रकार उन सभी महारथियोंको रोककर भारी बाणवषकि द्वारा श्वेतने भीष्मका धनुष काट दिया
قال سنجيا: وبوابلٍ عظيم من السهام قطع قوس بيشما. وكما يصدّ الأسد تقدّم قطيعٍ من الفيلة، كذلك شفيتا—بعد أن كبح أولئك المها-رثيين جميعًا—بتر سلاح بيشما تحت مطرٍ كاسح من النبال.
Verse 673
श्वेतं विव्याध राजेन्द्र कड़्कपत्रै: शितै: शरै: । राजेन्द्र! तब शान्तनुनन्दन भीष्मने दूसरा धनुष लेकर युद्धस्थलमें कंकपत्रयुक्त पैने बाणोंद्वारा श्वेतको घायल कर दिया
قال سنجيا: أيها الملك، عندئذٍ أخذ بيشما ابن شانتانو قوسًا آخر، وفي ساحة القتال جرح شفيتا بسهامٍ حادّة كالموسى مُزوَّدة بريش البلشون.
Verse 736
धनुश्विच्छेद भल्लेन पुनरेव पितुस्तव । महाराज! उन्होंने श्वेतपर बहुत-से बाणोंकी वर्षा की, परंतु रथियोंमें श्रेष्ठ श्वेतने रणक्षेत्रमें उन सब सायकोंका निवारण करके पुनः: एक भल्लके द्वारा आपके पिता भीष्मका धनुष काट दिया
قال سنجيا: أيها الملك، بسهمٍ بهلّا (bhalla) حادّ قطع مرةً أخرى قوس أبيك. وقد أُمطرت على شفيتا سهامٌ كثيرة، غير أن شفيتا—وهو أبرع فرسان العجلات—صدّ كل مقذوف في ساحة الوغى، ثم ردّ بهدوءٍ واتزان فقطع قوس بيشما مرةً ثانية.
Verse 776
अमर्षवशमापतन्नो व्याकुल: समपद्यत । घोड़े और सारथिके मारे जानेपर महाबली श्वेत उस रथसे कूद पड़े और अमर्षके वशीभूत होकर व्याकुल हो उठे
قال سنجيا: إذ غلبته الحميّة (أمرشا) اضطرب وانكسرت سكينته. ولمّا قُتل السائق والخيول، قفز شڤيتا الجبّار من عربته، مدفوعًا بغضبٍ استولى عليه.
Verse 786
ताडयामास निशितै: शरसंघै: समन्ततः । रथियोंमें श्रेष्ठ श्वेतको रथहीन हुआ देख पितामह भीष्मने चारों ओरसे पैने बाणसमूहोंद्वारा उन्हें पीड़ा देनी प्रारम्भ की
قال سنجيا: لمّا رأى بهيشما الجدّ شڤيتا—وهو أبرع فرسان العربات—وقد صار بلا عربة، أخذ يهاجمه من كل جانب بوابلٍ كثيف من السهام الحادّة، يضغطه بالألم والخطر في قلب المعركة.
Verse 796
स्वरथे धनुरुत्सृज्य शक्ति जग्राह काज्चनीम् | उस समरभूमिमें भीष्मजीके धनुषसे छूटे हुए बाणोंद्वारा पीड़ित होनेपर श्वेतने धनुषको रथपर ही छोड़कर सुवर्णमयी शक्ति हाथमें ले ली
قال سنجيا: لمّا عُذِّب شڤيتا في ساحة القتال بسهامٍ أطلقها قوسُ بهيشما، ترك قوسه على العربة وأمسك بيده سلاح الشكتي الذهبي—رمحًا من ذهب.
Verse 846
श्वेतस्य करनिर्मुक्तां निर्मुक्तोरगर्संनिभाम् | राजन! श्वेतके हाथसे छूटकर यमदण्डके समान प्रकाशित होनेवाली और केंचुल छोड़कर निकली हुई सर्पिणीकी भाँति अत्यन्त भय उत्पन्न करनेवाली उस शक्तिको देखकर आपके पुत्रोंके दलमें महान् हाहाकार मच गया
قال سنجيا: أيها الملك! حين شوهدت تلك الشكتي المتوهّجة وقد انطلقت من يد شڤيتا، تلمع كعصا عقاب ياما، وتبعث الرعب كأفعى خرجت لتوّها بعد أن ألقت جلدها، علا في صفوف أبناءك صراخٌ عظيم من الفزع.
Verse 863
अष्टभिनवभ्रिर्भीष्म: शक्ति चिच्छेद पत्रिभि: । राजन्! वह शक्ति आकाशसे बहुत बड़ी उल्काके समान सहसा गिरी। अन्तरिक्षमें ज्वालाओंसे घिरी हुई-सी उस प्रज्वलित शक्तिको देखकर आपके पिता देवव्रतको तनिक भी घबराहट नहीं हुई। उन्होंने आठ-नौ बाण मारकर उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिये
قال سنجيا: أيها الملك، إنّ بهيشما قطع ذلك الرمح إلى قطعٍ بثمانية أو تسعة سهام. وكان السلاح عظيمًا كنيزكٍ متّقد، هبط فجأة من السماء. ومع أنه بدا في الفضاء كأنّ اللهيب يطوّقه، لم يضطرب أبوك ديفافراتا قيد أنملة؛ فبثمانية أو تسعة نبالٍ حطّمه شذر مذر.
Verse 876
उच्चुक्रुशुस्तत: सर्वे तावका भरतर्षभ । भरतश्रेष्ठ! उत्तम सुवर्णकी बनी हुई उस शक्तिको भीष्मके पैने बाणोंसे नष्ट हुई देख आपके पुत्र हर्षके मारे जोर-जोरसे कोलाहल करने लगे
قال سنجيا: عندئذٍ صاح جميعُ محاربيك صياحًا عاليًا، يا ثورَ سلالةِ بهاراتا. يا خيرَ البهاراتيين! إذ رأوا ذلك الرمحَ البهيَّ—المصوغَ من أصفى الذهب وأجوده—وقد حُطِّم بسهامِ بهيشما الحادّة، اندفع أبناؤك في نشوةِ الفرح فرفعوا جلبةً عظيمةً متكرّرة.
Verse 893
गदां जग्राह संहृष्टो भीष्मस्य निधन प्रति । अपनी शक्तिको इस प्रकार विफल हुई देख विराटपुत्र श्वेत क्रोधसे मूर्च्छित हो गये। कालने उनकी विवेक-शक्तिको नष्ट कर दिया था; अतः उन्हें अपने कर्तव्यका भान न रहा। उन्होंने हर्षसे उत्साहित हो हँसते-हँसते भीष्मको मार डालनेके लिये हाथमें गदा उठा ली
قال سنجيا: مبتهجًا أمسك بالهراوة، قاصدًا هلاكَ بهيشما. ولمّا رأى قوّتَه قد أُحبطت على هذا النحو، غشي شڤيتا ابنُ فيراتا غضبٌ ودوارٌ حتى كاد يُغمى عليه؛ فقد أظلم كالا (الزمن/القدر) بصيرتَه، فلم يعد يميّز حدودَ الواجب والدَّرما. وبفرحٍ طائشٍ متّقد، وهو يضحك في طريقه، رفع الهراوة في يده ليُسقط بهيشما صريعًا.
Verse 916
प्रहारविप्रमोक्षार्थ सहसा धरणीं गत: । प्रतापी भीष्म उसके वेगको अनिवार्य समझकर उस प्रहारसे बचनेके लिये सहसा पृथ्वीपर कूद पड़े
قال سنجيا: ولتفادي الضربة، هبط بهيشما الجبّار فجأةً إلى الأرض، إذ قدّر اندفاعَ ذلك الهجوم بأنه لا يُقاوَم، طالبًا النجاة من تلك الصدمة.
Verse 936
सध्वज: सह सूतेन साश्व: सयुगबन्धुर: । भीष्मको मार डालनेके लिये चलायी हुई उस गदाके आघातसे ध्वज, सारथि, घोड़े, जूआ और धुरा आदिके साथ वह सारा रथ चूर-चूर हो गया
قال سنجيا: وبضربةِ تلك الهراوة التي أُطلقت لقتل بهيشما، تحطّمَت العربةُ الحربيةُ كلُّها إلى شظايا—مع رايتها، وسائقها، وخيولها، والنير، والعمود، وسائر لوازمها.
Verse 943
अभ्यधावन्त सहिता: शल्यप्रभूतयो रथा: । रथियोंमें श्रेष्ठ भीष्मको रथहीन हुआ देख शल्य आदि उत्तम महारथी एक साथ दौड़े
قال سنجيا: ثم اندفعت العرباتُ الحربيةُ—يتقدّمها شَلْيَةُ وسائرُ كبارِ المَهارَثيين—معًا. ولمّا رأوا بهيشما، خيرَ المقاتلين على العربة، وقد صار بلا عربة، أسرعوا كجسدٍ واحدٍ لإسناده وحمايته.
Verse 956
शनकैरशभ्ययाच्छवेतं गाड़ेय: प्रहसन्निव । तब दूसरे रथपर बैठकर धनुषकी टंकार करते हुए गंगानन्दन भीष्म उदास मनसे हँसते हुए-से धीरे-धीरे श्वेतकी ओर चले
قال سنجيا: ببطءٍ، كأنما على شفتيه ابتسامةٌ خفيفةٌ مكظومة، تقدّم غانغيّا (بهِيشما) نحو شفيتا. ثم جلس على عربةٍ أخرى وجعل قوسه يدوّي بطنين الوتر، ومضى ابن الغانغا—بهِيشما—بقلبٍ متجردٍ لا يتعلّق، كأنه يضحك ضحكًا خافتًا، خطوةً بعد خطوةٍ نحو شفيتا.
Verse 996
सहितास्त्वभ्यवर्तन्त परीप्सन्तो महारथा: । रथियोंमें श्रेष्ठ श्वेतको रथहीन और पैदल देख उसकी रक्षा करनेके लिये एक साथ बहुत-से महारथी दौड़े आये
قال سنجيا: وقد اتحدت مقاصدهم، اندفع عظماء فرسان العجلات مسرعين، يريدون حماية شفيتا—وهو خيرُ الراثيين—حين رأوه قد تُرك بلا عربة واضطر إلى القتال راجلًا.
Verse 1006
कैकेयो धृष्टकेतुश्न अभिमन्युश्न वीर्यवान् | उनके नाम इस प्रकार हैं--सात्यकि, भीमसेन, ट्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न, केकयराजकुमार, धृष्टकेतु तथा पराक्रमी अभिमन्यु
قال سنجيا: «كايكيا، ودْهريشتاكيتو، وأبهيمانيو الجسور. وهذه أسماؤهم: ساتياكي، وبهيمسينا، ودْهريشتاديومنَ ابن دروبادا، وأمير كيكيا، ودْهريشتاكيتو، وأبهيمانيو الباسل».
Verse 1016
अवारयदमेयात्मा वारिवेगानिवाचल: । इन सबको आते देख अमेय शक्तिसम्पन्न भीष्मजीने द्रोणाचार्य, शल्य तथा कृपाचार्यके साथ जाकर उनकी गति रोक दी, मानो किसी पर्वतने जलके प्रवाहको अवरुद्ध कर दिया हो
قال سنجيا: إن بهِيشما، ذو الروح التي لا تُقاس، خرج مع درونا وشاليا وكريبا فصدّ تقدّمهم. أوقف اندفاعهم الجارف كما يحبس الجبل سيلَ المياه المتدفقة.
Verse 1023
श्वेत: खड्गमथाकृष्य भीष्मस्य धनुराच्छिनत् । समस्त महामना पाण्डवोंके अवरुद्ध हो जानेपर श्वेतने तलवार खींचकर भीष्मका धनुष काट दिया
قال سنجيا: لما حُوصِر شفيتا، ذلك الباندفي العظيم النفس، وكُفَّ اندفاعه، استلَّ سيفه وقطع قوس بهِيشما.
Verse 1036
देवदूतवच: श्रुत्वा वधे तस्य मनो दे | उस कटे हुए धनुषको फेंककर पितामह भीष्मने देवदूतके कथनपर ध्यान देकर तुरंत ही श्वेतके वधका निश्चय किया
قال سانجيا: لما سمع بهيشما كلام الرسول الإلهي ثبّت قلبه على قتل شفيتا. فألقى قوسه المكسور جانبًا، وكان الجدّ الأكبر منصتًا لذلك الأمر السماوي، فعزم في الحال على إيقاع الموت بشفيتا—فعلاً صُوِّر طاعةً لأمرٍ أعلى وسط ضرورات الحرب القاسية.
Verse 1066
अभ्यवर्तत गाड़ेय: श्वेतं सेनापतिं द्रुतम् । भरतश्रेष्ठ] आपके पिता गंगानन्दन भीष्मने नरश्रेष्ठ भीमसेन आदि महारथियोंसे घिरे हुए सेनापति श्वेतको देखकर उनपर तुरंत धावा किया
قال سانجيا: ثم اندفع غادِيا مسرعًا نحو شفيتا، قائد الجيش. ففي لُجّة القتال، إذا أُبصر القائد بين الأبطال المحيطين به، سعى الخصم إلى كسر عزيمة العدو بضرب مركز القيادة نفسه—وهو فعل يمتحن الشجاعة وضبط النفس ضمن مقتضيات دارما الكشاتريا.
Verse 1086
आजलपश्ने भरतश्रेष्स्त्रिभि: संनतपर्वभि: । उस समरभूमिमें आपके पिता भरतश्रेष्ठ भीष्मने झुकी हुई गाँठवाले तीन बाणोंसे अभिमन्युको चोट पहुँचायी
قال سانجيا: في ساحة القتال تلك، أصاب والدك—بهیشما، أرفعَ البهاراتا—أبهيمانيو بثلاثة سهامٍ كانت عُقَدُها منحنية. ويُبرز الخبر قسوة انضباط الحرب: فحتى الشيوخ الموقَّرين، المقيَّدين بالولاء وواجب الكشاتريا، يُنزلون الأذى بالشباب في مجرى القتال الذي لا يرحم.
Verse 1136
जगाम धरणीं बाणो महाशनिरिव ज्वलन् । उस समय देवताओं, गन्धर्वों, पिशाचों, नागों तथा राक्षसोंने भी देखा, वह बाण महान् वज्रके समान प्रज्वलित हो उठा और अमित बलशाली श्वेतके कवच तथा हृदयको भी छेदकर धरतीमें समा गया
قال سانجيا: إن السهم، متوهّجًا كصاعقةٍ عظيمة، اندفع حتى غاص في الأرض. وفي تلك اللحظة شهد ذلك حتى الآلهة، والغندهرفا، والبيشاتشا، والناگا، والراكشسا—كيف اشتعل كفَجْرَةِ فَجْرَةٍ كالفَجْرَةِ العظمى، كأنه فَجْرَةُ الفَجْرَةِ (فَجْرَةُ الفَجْرَةِ)؛ ثم بعد أن اخترق درع شفيتا وقلبه نفسه، وهو شديد البأس لا يُجارى، انغمس في التراب. ويُبرز المشهد حياد الحرب المرعب: فالبأس والحماية قد يتحطمان في لحظة، وحتى الشهود السماويون تُصعقهم قوة القدر وعنف البشر في ساحة الوغى.
Verse 1153
प्रपतन्तमपश्याम गिरे: शुद्भमिव च्युतम् भीष्मके द्वारा मारे गये नरश्रेष्ठ श्वेतको युद्धस्थलमें हमने देखा। वह टूटकर गिरे हुए पर्वतके समान जान पड़ता था
قال سانجيا: «لقد رأينا شفيتا، خيرَ الرجال، صريعًا بيد بهيشما، يهوي في ساحة القتال كقِمّةٍ بيضاءَ ساطعةٍ انكسرت من جبل. وكان سقوطه، فجائيًّا عظيمًا، يكشف الثقل الأخلاقي القاسي للحرب: كيف يُطرَح حتى النبيل الشجاع أرضًا حين يلتقي القدر بواجب السلاح.»
Verse 1166
प्रह्दष्टा श्र सुतास्तुभ्यं कुरवश्चापि सर्वश: । महारथी पाण्डव तथा उस दलके दूसरे क्षत्रिय श्वेतके लिये शोकमें डूब गये। इधर आपके पुत्र समस्त कौरव हर्षसे उललसित हो उठे
قال سانجيا: إن أبناءك وجميع الكورو من كل جانب امتلأوا فرحًا وابتهاجًا. أمّا عظماء فرسان العجلات من الباندافا، ومعهم سائر الكشاتريا في ذلك الجيش، فقد غمرهم الحزن على شفيتا. وعلى الجانب الآخر نهض أبناؤك—الكورافا جميعًا—متهلّلين مزهوّين بظفرهم.
Verse 1176
वादित्रनिनदैघेरिर्नृत्यति सम समन्ततः । राजन! श्वेतको मारा गया देख आपका पुत्र दुःशासन बाजे-गाजेकी भयंकर ध्वनिके साथ चारों ओर नाचने लगा
قال سانجيا: أيها الملك، وسط الزئير المروّع للطبول والآلات، عمّ الرقص من كل جانب. «لقد قُتل شفيتاكا!»—فلما سمع ذلك ابنك دُحشاسَنَة أخذ يرقص في كل ناحية، وقد استبدّ به صخب الموسيقى الرهيب.
The chapter implicitly stages a leadership dilemma: the duty to pursue victory for one’s side is pursued through disciplined organization, yet it occurs within a kin-conflict framework, highlighting the ethical strain between loyalty to a claimant and the broader costs of escalation.
Order precedes action: effective agency is shown as structured, role-aware, and responsive. The text frames strategy as a form of responsibility—coordination and clarity reduce chaos even when outcomes remain uncertain.
No explicit phalaśruti appears in this chapter; its significance is contextual, functioning as technical documentation of formations and as narrative scaffolding for understanding subsequent engagements and decision chains.