Opening the text

Sukta 3.38
Viśvāmitra Gāthina (attributed for Mandala 3 Indra cycle; hymn-level attribution)
Indra (with inner-psychological emphasis on Indra as the illumined Mind-Power); ancillary: Savitṛ appears later in the hymn
Triṣṭubh (dominant meter for RV 3.38)
This hymn of Viśvāmitra sets the poet’s inspired thought in motion like a well-yoked racing steed, seeking inner vision and the company of the seers, while calling Indra to break obstructions and win plenitude. Indra is praised not only as the heroic power in outer struggle but as the illumined Mind-Power that makes the hidden “breaths” and truths wake and move. A later visionary turn brings in subtle cosmic order—Gandharvas within the law—and an ancillary presence of Savitṛ as the awakener and impeller of right seeing.
Mantra 1
अभि तष्टेव दीधया मनीषामत्यो न वाजी सुधुरो जिहानः । अभि प्रियाणि मर्मृशत्पराणि कवीँरिच्छामि संदृशे सुमेधाः ॥
मैं सोच के साथ काम कर रहा हूँ, जैसे कोई चीज़ बनाता है। जैसे तेज़ घोड़ा दौड़ने को तैयार होता है, वैसे ही मेरा मन चल पड़ा। मैं अंदर की साँसों को जगा रहा हूँ। मैं रिशियों को ढूँढ रहा हूँ ताकि मुझे सही समझ मिले।
Mantra 2
इनोत पृच्छ जनिमा कवीनां मनोधृतः सुकृतस्तक्षत द्याम् । इमा उ ते प्रण्यो वर्धमाना मनोवाता अध नु धर्मणि ग्मन् ॥
रिशियों के जनम के बारे में सोचो और पूछो। उनकी शक्तियाँ दिमाग से बनी हैं, और उन्होंने आसमान को बनाया है। तुम्हारी यह सारी शक्तियाँ बढ़ रही हैं, जैसे हवा से चलें। फिर वो सीधा सही रास्ते पर चलते हैं।
Mantra 3
नि षीमिदत्र गुह्या दधाना उत क्षत्राय रोदसी समञ्जन् । सं मात्राभिर्ममिरे येमुरुर्वी अन्तर्मही समृते धायसे धुः ॥
यहाँ वो चुपके से छुपी चीज़ें रख देते हैं। राज करने के लिए वो दोनों दुनिया को जोड़ देते हैं। अपने नाप-तोल से उन्होंने बड़े-बड़े इलाके बनाए हैं। बड़ी शक्ति के अंदर, सब सही जोड़ के, उन्होंने नीव डाल दी है।
Mantra 4
आतिष्ठन्तं परि विश्वे अभूषञ्छ्रियो वसानश्चरति स्वरोचिः । महत्तद्वृष्णो असुरस्य नामा विश्वरूपो अमृतानि तस्थौ ॥
जब वो उठता है तो सारी शक्तियाँ उसको सजाती हैं। वो चमक के साथ चलता है, खुद से रोशन। बड़े शक्तिशाली भगवान का नाम बड़ा है। वो हर रूप में है और अमर रहता है।
Mantra 5
असूत पूर्वो वृषभो ज्यायानिमा अस्य शुरुधः सन्ति पूर्वीः । दिवो नपाता विदथस्य धीभिः क्षत्रं राजाना प्रदिवो दधाथे ॥
पहले बड़े बैल पैदा हुए थे। उनकी बहुत सारी नदियाँ पुरानी हैं। आसमान के बेटे, दोनों राजा, यज्ञ में अपने ज्ञान से राज की शक्ति को संभालते हैं। वो शक्ति आसमान से आती है।
Mantra 6
त्रीणि राजाना विदथे पुरूणि परि विश्वानि भूषथः सदांसि । अपश्यमत्र मनसा जगन्वान्व्रते गन्धर्वाँ अपि वायुकेशान् ॥
दोनों राजा बहुत जगह में सब राज कुर्सियाँ संभालते हैं। मैं यहाँ अपने मन से देखा कि गंधर्व भी इस धरम में हैं। उनके बाल हवा जैसे हैं, वो चुपके से सब संभालते हैं।
Mantra 7
तदिन्न्वस्य वृषभस्य धेनोरा नामभिर्ममिरे सक्म्यं गोः । अन्यदन्यदसुर्यं वसाना नि मायिनो ममिरे रूपमस्मिन् ॥
इस बड़े बैल के लिए लोग नाम से नापते हैं गाय का दूध जो सबके काम आता है। वो चमकता है और अंदर से उजाला देता है। यह लोग नए-नए ताकत पेने वाले हैं। मायावी लोग इस चीज़ में अलग-अलग रूप बना देते हैं।
Mantra 8
तदिन्न्वस्य सवितुर्नकिर्मे हिरण्ययीममतिं यामशिश्रेत् । आ सुष्टुती रोदसी विश्वमिन्वे अपीव योषा जनिमानि वव्रे ॥
सविता देवता की यह सोने जैसी सोच है, कोई इस्से रोक नहीं सकता। वो इसे चला देता है। अच्छी प्रार्थना दोनों दुनिया को हिलती है और सब को आगे बढ़ाती है। जैसे औरत बच्चे को चुनती है और पैदा करती है, वैसे ही यह भी सब कुछ पैदा करती है।
Mantra 9
युवं प्रत्नस्य साधथो महो यद्दैवी स्वस्तिः परि णः स्यातम् । गोपाजिह्वस्य तस्थुषो विरूपा विश्वे पश्यन्ति मायिनः कृतानि ॥
दोनों देवता पुरानी बड़ी ताकत को साफ करते हैं। इस्से हम पर भगवान की कृपा रहती है। जो स्थिर है और जिसकी जबान रक्षा करती है, उसके लिए मायावी लोग बने हुए सब रूप देख सकते हैं।
Mantra 10
शुनं हुवेम मघवानमिन्द्रमस्मिन्भरे नृतमं वाजसातौ । शृण्वन्तमुग्रमूतये समत्सु घ्नन्तं वृत्राणि संजितं धनानाम् ॥
हम अपने भले के लिए इंद्र को पुकारते हैं। वो बहुत ताकतवाला है और देता बहुत है। बोझ उठाने में और जीत में वो सबसे आगे है। वो हमारी सुनता है और लड़ाई में मदद करता है। दुश्मन को मारता है और धन जीतता है।
It asks Indra for help in overcoming obstacles and conflicts, and for “vāja”—a winning fullness that includes strength, clarity, and prosperity.
Because the poet is describing disciplined inspiration: the mind is harnessed and driven forward so it can reach inner vision and effective mantra-power.
They point to subtle guardians of inspired order within “vrata” (cosmic law), suggesting that behind the ritual and the world there is a hidden, structured harmony that vision can perceive.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
A free sign-in with Google or Apple keeps your chat saved across web and the app.
Read Rig Veda in the Vedapath app
Scan the QR code to open this directly in the app, with word-by-word meanings, Sanskrit recitation where available, and more.