Opening the text
Sopāna-1: ‘Ārambha-śuddhi’—the first stair where the heart is softened by śravaṇa (hearing) and maṅgal (auspicious joy). In Bālakāṇḍa, devotion is born as rasa: wonder, tenderness, and dharma-affirming delight. The present unit (Doha 290–299 region) is a threshold-moment: the household-city (Ayodhyā) becomes a liturgical body preparing for the divine marriage, turning social celebration into a sacrament of bhakti.
يجعل بَالَا كاندا من الماناس سُلَّماً بتحويل السببية الملحمية إلى سببية البكتي: فالأحداث تتكشف لأن الحب ينضج. وفي هذا المقطع، الغالب هو راسا الهارسا (الفرح)، المتشابك مع فاتسليا (الحنان الأبوي) وساخيا (الصداقة الأخوية): دموع داشاراثا، وحماس الإخوة، وزينة المدينة المشتركة. والسرد ليس مجرد "أنباء سوايامفارا سيتا"، بل هو تكريس للحياة المدنية لأيودهيا استعداداً شبيهاً بالياجنا. ويصيغ لاهوت تولسيداس بهدوء راما ولاكشمانا كـ "بيسوا-بيبهوشانا" - زينة الكون - بحيث يصبح الاحتفال البشري اعترافاً بالإلهي. ويعكس تناوب الوزن (حركة الشوباي الجارية، ورسوخ الدوهة) الصعود الروحي: المشاعر ترتفع موجات، ثم تثبت بأبيات حكمية. وهكذا يكون موضع هذا كاندا أساسياً: فهو يعلم أن التحرر يبدأ استماعاً جماعياً، واستقصاءً محباً، واستعداداً دهارمياً لليلي الرب.
Verse 602 (चौपाई)
पहुँचे दूत राम पुर पावन। हरषे नगर बिलोकि सुहावन।। भूप द्वार तिन्ह खबरि जनाई। दसरथ नृप सुनि लिए बोलाई।। करि प्रनामु तिन्ह पाती दीन्ही। मुदित महीप आपु उठि लीन्ही।। बारि बिलोचन बाचत पाँती। पुलक गात आई भरि छाती।। रामु लखनु उर कर बर चीठी। रहि गए कहत न खाटी मीठी।। पुनि धरि धीर पत्रिका बाँची। हरषी सभा बात सुनि साँची।। खेलत रहे तहाँ सुधि पाई। आए भरतु सहित हित भाई।। पूछत अति सनेहँ सकुचाई। तात कहाँ तें पाती आई।।
وصل الرسل إلى مدينة راما المطهرة، وفرحت المدينة لجمالها. أعلنوا بشارتهم عند باب الملك، فاستدعاهم الملك داشاراثا لما سمع. انحنوا وأعطوه الرسالة، فقام الملك فرحاً وأخذها بنفسه. امتلأت عيناه بالدموع وهو يقرأ الرسالة، واقشعر جسده وامتلأ صدره. ضم راما ولاكشمانا الرسالة الجميلة إلى صدورهما، وبقيا صامتين لا يستطيعان النطق بكلمات حلوة. ثم تمالك نفسه وقرأ الرسالة، وفرح المجلس لسماع الأخبار الصادقة. كان بهارات وإخوته المحبون يلعبون هناك، فلما علموا جاؤوا. وسألوا بمحبة وخجل: يا أبت، من أين جاءت الرسالة؟
Verse 603 (दोहा/सोरठा)
कुसल प्रानप्रिय बंधु दोउ अहहिं कहहु केहिं देस। सुनि सनेह साने बचन बाची बहुरि नरेस।।290।।
هل إخواننا الأحباء بخير؟ في أي بلد هم؟ أخبرونا. فلما سمع الملك هذه الكلمات المفعمة بالمحبة والتواضع، قرأ الرسالة مرة أخرى.
Verse 604 (चौपाई)
सुनि पाती पुलके दोउ भ्राता। अधिक सनेहु समात न गाता।। प्रीति पुनीत भरत कै देखी। सकल सभाँ सुखु लहेउ बिसेषी।। तब नृप दूत निकट बैठारे। मधुर मनोहर बचन उचारे।। भैया कहहु कुसल दोउ बारे। तुम्ह नीकें निज नयन निहारे।। स्यामल गौर धरें धनु भाथा। बय किसोर कौसिक मुनि साथा।। पहिचानहु तुम्ह कहहु सुभाऊ। प्रेम बिबस पुनि पुनि कह राऊ।। जा दिन तें मुनि गए लवाई। तब तें आजु साँचि सुधि पाई।। कहहु बिदेह कवन बिधि जाने। सुनि प्रिय बचन दूत मुसकाने।।
فلما سمعا الرسالة، ارتج الأخوان، ولم يستطع جسداهما احتمال محبتهما الفائقة. ولما رأى الجميع محبة بهارات الطاهرة، شعروا بفرح خاص. حينئذ أجلس الملك الرسل قربه وتكلم بكلمات حلوة ساحرة. قولوا لي يا إخواني، هل هما بخير؟ لقد رأيتموهما بأعينكم. الفاتح والأبيض، يحملان أقواسهما، شابان، برفقة الحكيم فيشواميترا، هل تعرفانهما؟ أخبراني عن طباعهما. وغلبتهما المحبة فسأل الملك مراراً: من اليوم الذي أخذهما فيه الحكماء حتى الآن، لم أنسهما أبداً. أخبرني أيها الرسل، كيف عرفهما رب فيديها؟ فلما سمع الرسل هذه الكلمات الحبيبة، ابتسموا.
Verse 605 (दोहा/सोरठा)
सुनहु महीपति मुकुट मनि तुम्ह सम धन्य न कोउ। रामु लखनु जिन्ह के तनय बिस्व बिभूषन दोउ।।291।।
اسمع يا أيها الملك: بين جواهر تيجان الملوك، لا أحد مبارك مثلك. راما ولاكشمانا اللذان هما ابناك، هما زينة العالمين.
Verse 606 (चौपाई)
पूछन जोगु न तनय तुम्हारे। पुरुषसिंघ तिहु पुर उजिआरे।। जिन्ह के जस प्रताप कें आगे। ससि मलीन रबि सीतल लागे।। तिन्ह कहँ कहिअ नाथ किमि चीन्हे। देखिअ रबि कि दीप कर लीन्हे।। सीय स्वयंबर भूप अनेका। समिटे सुभट एक तें एका।। संभु सरासनु काहुँ न टारा। हारे सकल बीर बरिआरा।। तीनि लोक महँ जे भटमानी। सभ कै सकति संभु धनु भानी।। सकइ उठाइ सरासुर मेरू। सोउ हियँ हारि गयउ करि फेरू।। जेहि कौतुक सिवसैलु उठावा। सोउ तेहि सभाँ पराभउ पावा।।
لا حاجة للسؤال عن أبنائك، فهم أسود بين الرجال الذين ينيرون العوالم الثلاثة. أمام شهرتهم وقوتهم يصبح القمر باهتاً وتبرد حرارة الشمس. ماذا أقول عنهم يا سيد؟ كيف أصفهم؟ يمكن للمرء أن يحدق في الشمس أو يحمل مصباحاً بيده. في حفل اختيار سيتا زوجاً، اجتمع ملوك كثيرون، كل منهم محارب عظيم يفوق الآخر. قوس شيفا لم يستطع أحد شده، وهُزم جميع الأبطال الشجعان وخجلوا. جميع المحاربين المشهورين في العوالم الثلاثة حاروا أمام قوس شيفا. الذي كان يستطيع رفع جبل ميرو بسهولة رجع مهزوماً. نفس الذي رفع جبل شيفا أُذل في ذلك المجمع.
Verse 607 (दोहा/सोरठा)
तहाँ राम रघुबंस मनि सुनिअ महा महिपाल। भंजेउ चाप प्रयास बिनु जिमि गज पंकज नाल।।292।।
هناك سُمع عن راما، جوهرة سلالة راغو، يا أيها الملك العظيم. كسر القوس بلا جهد، كما يكسر الفيل ساق زهرة اللوتس.
Verse 608 (चौपाई)
सुनि सरोष भृगुनायकु आए। बहुत भाँति तिन्ह आँखि देखाए।। देखि राम बलु निज धनु दीन्हा। करि बहु बिनय गवनु बन कीन्हा।। राजन रामु अतुलबल जैसें। तेज निधान लखनु पुनि तैसें।। कंपहि भूप बिलोकत जाकें। जिमि गज हरि किसोर के ताकें।। देव देखि तव बालक दोऊ। अब न आँखि तर आवत कोऊ।। दूत बचन रचना प्रिय लागी। प्रेम प्रताप बीर रस पागी।। सभा समेत राउ अनुरागे। दूतन्ह देन निछावरि लागे।। कहि अनीति ते मूदहिं काना। धरमु बिचारि सबहिं सुख माना।।
عند سماع هذا، جاء سيد بهرغو غاضباً وأظهر قوته بطرق كثيرة أمام أعينهم. عند رؤية هذا، أعطاه راما قوسه الخاص، وب توسلات كثيرة جعله يعود إلى الغابة. يا ملك، راما ذو قوة لا تُضاهى، ولاكشمانا كنز من الشجاعة مثله. يرتجف الملوك عند رؤيته، كما ترتجف الفيلة عند رؤية الأسد أو الفرس الصغير عند رؤية سيده. عندما رأت الآلهة هذين الفتى، لم يستطع أحد تحمل النظر إليهما. كانت كلمات الرسول محببة، مفعمة بالحب والشجاعة والنشوة البطولية. امتلأ الملك مع المجمع كله بالمودة، وبدأ يعطي بسخاء للرسل. عند الحديث عن الظلم أغلقوا آذانهم، وعند التفكير في البر فرحوا جميعاً.
Verse 609 (दोहा/सोरठा)
तब उठि भूप बसिष्ठ कहुँ दीन्हि पत्रिका जाइ। कथा सुनाई गुरहि सब सादर दूत बोलाइ।।293।।
ثم قام الملك وأعطى الرسالة لفاشيشتا، وذهب وروى القصة كاملة للغور، ودعا الرسل باحترام.
Verse 610 (चौपाई)
सुनि बोले गुर अति सुखु पाई। पुन्य पुरुष कहुँ महि सुख छाई।। जिमि सरिता सागर महुँ जाहीं। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।। तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।। तुम्ह गुर बिप्र धेनु सुर सेबी। तसि पुनीत कौसल्या देबी।। सुकृती तुम्ह समान जग माहीं। भयउ न है कोउ होनेउ नाहीं।। तुम्ह ते अधिक पुन्य बड़ काकें। राजन राम सरिस सुत जाकें।। बीर बिनीत धरम ब्रत धारी। गुन सागर बर बालक चारी।। तुम्ह कहुँ सर्ब काल कल्याना। सजहु बरात बजाइ निसाना।।
عند سماع هذا، تكلم الغور وقد نال فرحاً عظيماً، وقال: على الرجل الصالح يحل السعادة. كما تصب الأنهار في المحيط رغم أن المحيط لا يرغب فيها، هكذا السعادة والرخاء يأتيان إلى الأتقياء بطبيعتهما دون طلب. أنت غور وبراهمي وبقرة وإله، لذا يا كوشاليا المباركة أنت إلهة. لم يكن في العالم أحد صالح مثلك، ولن يكون. أنتم أشد صلاحاً وعظمة من الغربان، والملك داشاراثا له ابن يساوي راما. بطولي، متواضع، ثابت على البر والنذور، محيط من الفضائل، فتى جميل في الرابعة من عمره. لتكن البركات دائماً معكم، جهزوا موكب الزفاف واضربوا الطبول.
Verse 611 (दोहा/सोरठा)
चलहु बेगि सुनि गुर बचन भलेहिं नाथ सिरु नाइ। भूपति गवने भवन तब दूतन्ह बासु देवाइ।।294।।
هيا نذهب بسرعة! عند سماع كلمات الغور، انحنى الملك برأسه خشوعاً. ثم انطلق الملك إلى قصره بعد أن أعد مأوى للرسل.
Verse 612 (चौपाई)
राजा सबु रनिवास बोलाई। जनक पत्रिका बाचि सुनाई।। सुनि संदेसु सकल हरषानीं। अपर कथा सब भूप बखानीं।। प्रेम प्रफुल्लित राजहिं रानी। मनहुँ सिखिनि सुनि बारिद बनी।। मुदित असीस देहिं गुरु नारीं। अति आनंद मगन महतारीं।। लेहिं परस्पर अति प्रिय पाती। हृदयँ लगाइ जुड़ावहिं छाती।। राम लखन कै कीरति करनी। बारहिं बार भूपबर बरनी।। मुनि प्रसादु कहि द्वार सिधाए। रानिन्ह तब महिदेव बोलाए।। दिए दान आनंद समेता। चले बिप्रबर आसिष देता।।
استدعى الملك جميع مسؤولي القصر، وقرأ رسالة جاناكا وأعلم الجميع بها. عند سماع الرسالة، امتلأ الجميع فرحاً، وروى الملوك قصصاً أخرى كثيرة. فرح الملك والملكة كأن الغيمة أصبحت الحجل عند سماع الأخبار السارة. زوجات الغور أعطين بركات مفرحة، وكانت الأمهات غارقات في سرور عظيم. أخذن الرسائل العزيزة جداً من بعضهن البعض، وضغطنها على قلوبهن وضممنها إلى صدورهن. وصف الملوك مجد وأعمال راما ولاكشمانا مراراً وتكراراً. بعد قول بنعمة الحكيم، غادروا من الباب، ثم استدعت الملكات ماهاديفا. أعطين الهدايا بفرح، ورحل أفضل البراهميين وهم يمنحون البركات.
Verse 613 (दोहा/सोरठा)
जाचक लिए हँकारि दीन्हि निछावरि कोटि बिधि। चिरु जीवहुँ सुत चारि चक्रबर्ति दसरत्थ के।।295।।
عش طويلاً مع أبنائك الأربعة يا إمبراطور داشاراثا، الذي أعطيت ملايين الهدايا للسائلين بأيدي مفتوحة.
Verse 614 (चौपाई)
कहत चले पहिरें पट नाना। हरषि हने गहगहे निसाना।। समाचार सब लोगन्ह पाए। लागे घर घर होने बधाए।। भुवन चारि दस भरा उछाहू। जनकसुता रघुबीर बिआहू।। सुनि सुभ कथा लोग अनुरागे। मग गृह गलीं सँवारन लागे।। जद्यपि अवध सदैव सुहावनि। राम पुरी मंगलमय पावनि।। तदपि प्रीति कै प्रीति सुहाई। मंगल रचना रची बनाई।। ध्वज पताक पट चामर चारु। छावा परम बिचित्र बजारू।। कनक कलस तोरन मनि जाला। हरद दूब दधि अच्छत माला।।
بينما كانوا يسيرون، تكلموا وهم يرتدون ملابس فاخرة، وفرحاً ضربوا الطبول. تلقى جميع الناس النبأ، وفي كل بيت بدأوا الاحتفال. امتلأت العوالم الأربعة عشر بهجة بزفاف ابنة جاناكا وسيد راغو. عند سماع القصة الميمونة، امتلأ الناس حباً، وبدأوا يزينون الطرق والبيوت والأزقة. رغم أن أيوديا جميلة دائماً، مدينة راما المباركة المقدسة، إلا أنه من محبة المحبة، خلقوا زخارف ميمونة. رُفعت الأعلام والرايات والأقمشة الجميلة ومروحات ذيل الياك والمظلات الغريبة جداً في الأسواق. رُتبت الأواني الذهبية والأقواس والشباك المرصعة بالجواهر والكركم والعشب واللبن وأكاليل الزهور.
Verse 615 (दोहा/सोरठा)
मंगलमय निज निज भवन लोगन्ह रचे बनाइ। बीथीं सीचीं चतुरसम चौकें चारु पुराइ।।296।।
كانت بيوت الناس ميمونة وجميلة، كل واحد مزين ومُرتب. رُشت الأزقة وكنست، وطُليت الساحات بشكل جميل.
Verse 616 (चौपाई)
जहँ तहँ जूथ जूथ मिलि भामिनि। सजि नव सप्त सकल दुति दामिनि।। बिधुबदनीं मृग सावक लोचनि। निज सरुप रति मानु बिमोचनि।। गावहिं मंगल मंजुल बानीं। सुनिकल रव कलकंठि लजानीं।। भूप भवन किमि जाइ बखाना। बिस्व बिमोहन रचेउ बिताना।। मंगल द्रब्य मनोहर नाना। राजत बाजत बिपुल निसाना।। कतहुँ बिरिद बंदी उच्चरहीं। कतहुँ बेद धुनि भूसुर करहीं।। गावहिं सुंदरि मंगल गीता। लै लै नामु रामु अरु सीता।। बहुत उछाहु भवनु अति थोरा। मानहुँ उमगि चला चहु ओरा।।
هنا وهناك تجمعت جماعات من النساء الجميلات، مزينات بملابس جديدة وجميلة، كلها تتألق بالبهاء. بوجوه كالقمر وعيون كعيون الغزال، كن منغمرات بالكامل في أشكالهن الخاصة، تجسيداً حياً للنشوة. غنين أغاني مباركة بأصوات عذبة، كان صوتهن يخجل العندليب وطائر الكالكانثا. كيف يمكن للمرء أن يصف القصر الملكي؟ كان جناحاً صُمم لسحر العالم. كانت هناك العديد من الأشياء المباركة والجذابة؛ الأشياء تتألق والآلات الموسيقية تعزف بكثرة. في مكان ما كان المداحون ينشدون الثناء؛ وفي مكان آخر كان البراهمة يرتلون التراتيل الفيدية. غنت النساء الجميلات أغاني مباركة، يرددن مراراً أسماء راما وسيتا. القصر، رغم صغره، كان يفيض بالابتهاج؛ بدا وكأن الفرح نفسه يتحرك في كل اتجاه.
Verse 617 (दोहा/सोरठा)
सोभा दसरथ भवन कइ को कबि बरनै पार। जहाँ सकल सुर सीस मनि राम लीन्ह अवतार।।297।।
من يستطيع وصف روعة قصر داشاراثا، حيث انحنى جميع الآلهة برؤوسهم، لأن راما قد تجسد هناك؟
Verse 618 (चौपाई)
भूप भरत पुनि लिए बोलाई। हय गय स्यंदन साजहु जाई।। चलहु बेगि रघुबीर बराता। सुनत पुलक पूरे दोउ भ्राता।। भरत सकल साहनी बोलाए। आयसु दीन्ह मुदित उठि धाए।। रचि रुचि जीन तुरग तिन्ह साजे। बरन बरन बर बाजि बिराजे।। सुभग सकल सुठि चंचल करनी। अय इव जरत धरत पग धरनी।। नाना जाति न जाहिं बखाने। निदरि पवनु जनु चहत उड़ाने।। तिन्ह सब छयल भए असवारा। भरत सरिस बय राजकुमारा।। सब सुंदर सब भूषनधारी। कर सर चाप तून कटि भारी।।
ثم أرسل الملك بهارات في طلب خيوله وعرباته ومحفاته، وأمر بتجهيزها. انطلقوا بسرعة، فموكب زفاف سيد راغو قادم! عند سماع هذا، امتلأ الأخوان بالبهجة. استدعى بهارات جميع الخدم وأعطاهم الأوامر؛ فنهضوا بفرح وأسرعوا إلى مهامهم. بحب وعناية سرجوا الخيول؛ خيول من كل لون، نبيلة ومبهرة، تم تجهيزها. كانت كلها جميلة، رشيقة وسريعة الحركة؛ كخيول الآلهة، بدا وكأنها تخط على الأرض بخفة. من سلالات عديدة، لا يمكن وصفها؛ لا تخشى الريح، بدا وكأنها تريد الطيران. امتطى جميع أولئك الفرسان؛ كانوا أمراء مثل بهارات نفسه. كانوا جميعاً وسيمين، جميعهم يرتدون الحلي؛ كانت الأ quivers والأقواس في أيديهم، والسيوف على خصورهم.
Verse 619 (दोहा/सोरठा)
छरे छबीले छयल सब सूर सुजान नबीन। जुग पदचर असवार प्रति जे असिकला प्रबीन।।298।।
كان جميع أولئك الفرسان رائعين ورشيقين، محاربين شجعان، مهرة وشباب. خبراء في استخدام السيف والدرع، سواء على الأقدام أو راكبين، كانوا أساتذة في كل سلاح.
Verse 620 (चौपाई)
बाँधे बिरद बीर रन गाढ़े। निकसि भए पुर बाहेर ठाढ़े।। फेरहिं चतुर तुरग गति नाना। हरषहिं सुनि सुनि पवन निसाना।। रथ सारथिन्ह बिचित्र बनाए। ध्वज पताक मनि भूषन लाए।। चवँर चारु किंकिन धुनि करही। भानु जान सोभा अपहरहीं।। सावँकरन अगनित हय होते। ते तिन्ह रथन्ह सारथिन्ह जोते।। सुंदर सकल अलंकृत सोहे। जिन्हहि बिलोकत मुनि मन मोहे।। जे जल चलहिं थलहि की नाई। टाप न बूड़ बेग अधिकाई।। अस्त्र सस्त्र सबु साजु बनाई। रथी सारथिन्ह लिए बोलाई।।
ربط الأبطال عمائمهم بإحكام وثبتوا دروعهم؛ خرجوا ووقفوا مستعدين خارج المدينة. قاد الفرسان المهرة خيولهم بخطوات متنوعة، وابتهجوا وهم يسمعون رياح الرايات. جهز سائقو العربات العجلات بطرق عجيبة، مزينينها بالأعلام والرايات والحلي المرصعة. مذبات ذيل الياك الجميلة والأجراس الرنانة صنعوا موسيقى؛ بدا وكأنهم يسرقون روعة الشمس نفسها. كانت هناك خيول لا تحصى تعود لسافارني؛ تم ربطها بتلك العربات بواسطة السائقين. بدت كلها جميلة ومزينة بالحلي؛ كل من رآها، أسرت قلوب الحكماء. تلك التي تتحرك على الماء وكأنها على اليابسة، دون غرق أو تباطؤ، بسرعة أكبر. تم تجهيز جميع الأسلحة والعدد؛ تم استدعاء محاربي العربات وسائقيها وركوبها.
Verse 621 (दोहा/सोरठा)
चढ़ि चढ़ि रथ बाहेर नगर लागी जुरन बरात। होत सगुन सुन्दर सबहि जो जेहि कारज जात।।299।।
صاعدين إلى عرباتهم واحداً تلو الآخر، خرجوا من المدينة، وبدأ موكب الزفاف يتجمع. كانت كل الفأل حسنة وجميلة لأي غرض سافروا من أجله.
Bālakāṇḍa establishes the Manas as a sopāna by converting epic causality into bhakti-causality: events occur because love ripens. In this excerpt, the rasa is chiefly harsa (joy) braided with vātsalya and sakhya: Daśaratha’s tears, the brothers’ thrill, the city’s collective ornamentation. The narrative is not merely ‘news of Sītā-svayaṃvara’; it is the sanctification of Ayodhyā’s civic life into yajña-like preparation. Tulasīdāsa’s theology quietly frames Rama and Lakshmana as ‘biswa-bibhūṣaṇa’—cosmic ornaments—so that human celebration becomes recognition of the divine. The meter’s alternation (chaupāī flow, doha anchoring) mimics spiritual ascent: emotion rises in waves, then is stabilized by aphoristic couplets. Thus the kanda’s placement is foundational: it teaches that liberation begins as communal hearing, affectionate inquiry, and dharmic readiness for the Lord’s līlā.
Traditional satsang reading treats this unit as ‘vivāha-maṅgal’ śravaṇa: it is believed to increase household śānti, remove obstacles to auspicious beginnings (especially marriage/rites), and awaken prema-bhakti by contemplating Ayodhyā’s collective joy at Rāma’s līlā.
A common kīrtan-samput used around vivāha/maṅgal passages is: “सीता राम, सीता राम, सीता राम, जय सीता राम” (or simply “जय जय सियाराम”). Local traditions may also insert “राम नाम” as a refrain after each doha during pāṭha.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
A free sign-in with Google or Apple keeps your chat saved across web and the app.
Read Ramcharitmanas in the Vedapath app
Scan the QR code to open this directly in the app, with word-by-word meanings, Sanskrit recitation where available, and more.