Ayodhya KandaPrakarana 120 Verses

Prakarana 1

यह सोपान ‘राजधर्म बनाम प्रेमधर्म’ के द्वंद्व को साधना-पथ में रूपान्तरित करता है: बाह्य अभिषेक (सामाजिक-राजकीय प्रतिष्ठा) से भीतर के अभिषेक (त्याग, समत्व, आज्ञापालन) की ओर चढ़ाई। अयोध्या—‘अयोध्या’ (अ-युद्ध) प्रतीक है उस अंतःपुर की जहाँ इच्छा/लोभ के साथ युद्ध नहीं, बल्कि विवेक से शमन होता है। इस काण्ड में राम का युवराज-टीका प्रस्ताव भक्ति के लिए ‘मंगल’ है, पर वही मंगल आगे चलकर वैराग्य की कसौटी बनता है। अतः यह चरण साधक को सिखाता है कि ईश्वर-सान्निध्य का शिखर राजसुख नहीं, गुरु-वचन, पितृ-वचन और लोक-कल्याण के लिए स्वेच्छा से कष्ट स्वीकार करना है—यही मुक्ति की सीढ़ी का निर्णायक पायदान है।

الراسا الرئيسي في أيودهيا كاندا هو كارونا، لكن مصدره ليس الحزن وحده، بل هو "دارما-كارونا" المولود من الاحتكاك بين صرامة دارما ورقة الحب. في هذا القسم، بعد المنغalacharana (عبادة شانكارا، وإشعاع وجه راغو-ناندانا، وراما حامل القوس)، يتكشف بهاء المدينة وفرح الناس: فالتشبيهات مثل "البركة المتجددة أبداً" و"غيابات الفضيلة" تجعل أيودهيا أرضاً للعقل غنية بالبونيا. ثم يستقر محور السرد فوراً على قرار الأمير: إدراك داشاراثا للشيخوخة (الشعر الأبيض) والحصول على موافقة الغورو. هذا الهيكل يضع عمداً "المهرجان" بجانب "بذرة التخلي": كلما كانت استعدادات التتويج أكثر روعة، كلما كان الخلفية أعمق للتضحية القادمة. هنا يحول تولسي ساغونا-ليلا (التتويج الملكي) نحو حقيقة نيرغونا (عدم التعلق، وطاعة الأمر، والتساوي)، وهذا هو المكان الدارماشاستري لتوازن الكاندا الروحي.

Verses

شلوكا 1-3

यस्याङ्के च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तकेभाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि व्यालराट्।सोऽयं भूतिविभूषणः सुरवरः सर्वाधिपः सर्वदाशर्वः सर्वगतः शिवः शशिनिभः श्रीशङ्करः पातु माम्।।⁠1।।

प्रसन्नतां या न गताभिषेकतस्तथा न मम्ले वनवासदुःखतः।मुखाम्बुजश्री रघुनन्दनस्य मे सदास्तु सा मञ्जुलमंगलप्रदा।।⁠2।।

नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं सीतासमारोपितवामभागम्।पाणौ महासायकचारुचापं नमामि रामं रघुवंशनाथम्।।⁠3।।

yasyāṅke ca vibhāti bhūdharasutā devāpagā mastakebhāle bālavidhurgale ca garalaṁ yasyorasi vyālarāṭ |so'yaṁ bhūtivibhūṣaṇaḥ suravaraḥ sarvādhipaḥ sarvadāśarvaḥ sarvagataḥ śivaḥ śaśinibhaḥ śrīśaṅkaraḥ pātu mām ||⁠1||

prasannatāṁ yā na gatābhiṣekatastathā na mamle vanavāsaduḥkhataḥ |mukhāmbujaśrī raghunandanasya me sadāstu sā mañjulamaṁgalapradā ||⁠2||

nīlāmbujaśyāmalakomalāṅgaṁ sītāsamāropitavāmabhāgam |pāṇau mahāsāyakacārucāpaṁ namāmi rāmaṁ raghuvaṁśanātham ||⁠3||

ليحميني ذلك الأفضل بين الآلهة، رب الكل، المزين دائماً بالرماد كزينة: الذي يلمع في حضنه ابنة الجبل، ويحمل النهر السماوي على رأسه، وعلى جبهته الهلال الفتي، والسم في حلقه، وملك الثعابين كقلادة عبر صدره؛ هو شارفا، الكلي الحضور، الرحيم، ذو لون القمر، شانكارا المبارك. ليمنحني وجه اللوتس لبهجة راغو دائماً بركات جميلة وميمونة؛ هي التي لم تفرح بالتتويج، ولم تحزن بسبب حزن النفي إلى الغابة. أنحني لراما، رب سلالة راغو، الذي هو داكن كاللوتس الأزرق، ذو أطراف رقيقة، مع سيتا جالسة على جانبه الأيسر، ممسكاً في يده قوساً جميلاً وسهاماً ممتازة.

دوها

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि।।

śrīguru carana saroja raja nija manu mukuru sudhāri |baranaũ raghubara bimala jasu jo dāyaku phala cāri ||

بغبار أقدام اللوتس للغورو المبجل، صقلت مرآة قلبي؛ الآن سأروي المجد النقي لأفضل راغو، الذي يمنح الثمار الأربعة للحياة البشرية.

تشاوباي 1.1-4

जब तें रामु ब्याहि घर आए।नित नव मंगल मोद बधाए।।

भुवन चारिदस भूधर भारी।सुकृत मेघ बरषहि सुख बारी।।

रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई।उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई।।

मनिगन पुर नर नारि सुजाती।सुचि अमोल सुंदर सब भाँती।।

कहि न जाइ कछु नगर बिभूती।जनु एतनिअ बिरंचि करतूती।।

सब बिधि सब पुर लोग सुखारी।रामचंद मुख चंदु निहारी।।

मुदित मातु सब सखीं सहेली।फलित बिलोकि मनोरथ बेली।।

राम रूपु गुनसीलु सुभाऊ।प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ।।

jaba teṁ rāmu byāhi ghara āe |nita nava maṁgala moda badhāe ||

bhuvana cāridasa bhūdhara bhārī |sukṛta megha baraṣahi sukha bārī ||

ridhi sidhi saṁpati nadīṁ suhāī |umagi avadha aṁbudhi kahũ āī ||

manigana pura nara nāri sujātī |suci amola suṁdara saba bhā̃tī ||

kahi na jāi kachu nagara bibhūtī |janu etania biraṁci karatūtī ||

saba bidhi saba pura loga sukhārī |rāmacaṁda mukha caṁdu nihārī ||

mudita mātu saba sakhīṁ sahelī |phalita biloki manoratha belī ||

rāma rūpu gunasīlu subhāū |pramudita hoi dekhi suni rāū ||

منذ أن عاد راما إلى البيت بعد زواجه، كانت تحدث في أيودهيا كل يوم أفراح وأهازيج ومسرات جديدة. كانت العوالم الأربعة عشر كالجبال العظيمة، وغيوام الفضول تمطر عليها ماء السعادة. كانت البركة والقدرة الروحية والثروة أنهاراً جميلة فاضت وجاءت إلى أيودهيا محيطها. رجال المدينة ونساؤها من أصل نبيل كانوا كالجواهر: طاهرة لا تقدر بثمن وجميلة بكل وجه. لا يوصف بهاء المدينة، وكأنه كله من صنع الخالق. كان جميع أهل المدينة سعداء بكل وجه، ينظرون إلى وجه راماتشاندار كالقمر. فرحت كل الأمهات مع صديقاتهن ورفيقاتهن، رأين كروم أمانيهن تثمر. طرب الملك غاية الطرب لما رأى وسمع عن جمال راما وفضله وحسن سيرته وطبيعته.

دوها 1

सब कें उर अभिलाषु अस कहहिं मनाइ महेसु।आप अछत जुबराज पद रामहि देउ नरेसु।।⁠1।।

saba keṁ ura abhilāṣu asa kahahiṁ manāi mahesu |āpa achata jubarāja pada rāmahi deu naresu ||⁠1||

في قلوب الجميع كانت هذه الرغبة، وقالوها وهم يصلّون لماهيشا: أن يعطي الملك راما منصب ولي العهد وهو لا يزال حيا.

تشاوباي 2.1-4

एक समय सब सहित समाजा।राजसभाँ रघुराजु बिराजा।।

सकल सुकृत मूरति नरनाहू।राम सुजसु सुनि अतिहि उछाहू।।

नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें।लोकप करहिं प्रीति रुख राखें।।

तिभुवन तीनि काल जग माहीं।भूरि भाग दसरथ सम नाहीं।।

मंगलमूल रामु सुत जासू।जो कछु कहिज थोर सबु तासू।।

रायँ सुभायँ मुकुरु कर लीन्हा।बदनु बिलोकि मुकुट सम कीन्हा।।

श्रवन समीप भए सित केसा।मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा।।

नृप जुबराज राम कहुँ देहू।जीवन जनम लाहु किन लेहू।।

eka samaya saba sahita samājā |rājasabhā̃ raghurāju birājā ||

sakala sukṛta mūrati naranāhū |rāma sujasu suni atihi uchāhū ||

nṛpa saba rahahiṁ kṛpā abhilāṣeṁ |lokapa karahiṁ prīti rukha rākheṁ ||

tibhuvana tīni kāla jaga māhīṁ |bhūri bhāga dasaratha sama nāhīṁ ||

maṁgalamūla rāmu suta jāsū |jo kachu kahija thora sabu tāsū ||

rāyã subhāyã mukuru kara līnhā |badanu biloki mukuṭa sama kīnhā ||

śravana samīpa bhae sita kesā |manahũ jaraṭhapanu asa upadesā ||

nṛpa jubarāja rāma kahũ dehū |jīvana janama lāhu kina lehū ||

في يوم من الأيام جلس ملك الراغو، داشاراثا، على عرشه في بلاطه محاطًا بجميع حاشيته. وكان الملك تجسيدًا لكل الفضائل، ولما سمع صيت راما الطيب امتلأ غبطة وسرورًا. وبقي جميع الملوك قريبين منه يطمعون في رضاه، وحرّاس أرجاء العالم يتصرفون بمودة متبعين رغباته. في العوالم الثلاثة وفي الأزمنة الثلاثة، الماضي والحاضر والمستقبل، لا أحد في الكون أوفر حظًا من داشاراثا. من كان راما ابنه، أصل كل بركة، فمهما قيل عن حسن حظه فهو قليل. وأخذ الملك المرآة بيده بطبيعته، ونظر إلى وجهه فيها فعدّل تاجه. وقد ظهر الشعر الأبيض قرب أذنيه، كأن المشيخة توصيه بهذا: يا أيها الملك، اجعل راما وليًا للعهد، فما بالك لا تأخذ جزاء حياتك وميلادك وافرًا؟

دوها 2

यह बिचारु उर आनि नृप सुदिनु सुअवसरु पाइ।प्रेम पुलकि तन मुदित मन गुरहि सुनायउ जाइ।।⁠2।।

yaha bicāru ura āni nṛpa sudinu suavasaru pāi |prema pulaki tana mudita mana gurahi sunāyau jāi ||⁠2||

بعد أن أحضر هذا الفكر إلى قلبه، وإذ وجد يوماً جميلاً وساعة مناسبة، ذهب الملك، وبدنه يرتجف بالمحبة وقلبه يمتلئ بالفرح، وأخبر معلمه الروحي بذلك.

تشاوباي 3.1-4

कहइ भुआलु सुनिअ मुनिनायक।भए राम सब बिधि सब लायक।।

सेवक सचिव सकल पुरबासी।जे हमारे अरि मित्र उदासी।।

सबहि रामु प्रिय जेहि बिधि मोही।प्रभु असीस जनु तनु धरि सोही।।

बिप्र सहित परिवार गोसाईं।करहिं छोहु सब रौरिहि नाई।।

जे गुर चरन रेनु सिर धरहीं।ते जनु सकल बिभव बस करहीं।।

मोहि सम यहु अनुभयउ न दूजें।सबु पायउँ रज पावनि पूजें।।

अब अभिलाषु एकु मन मोरें।पूजहि नाथ अनुग्रह तोरें।।

मुनि प्रसन्न लखि सहज सनेहू।कहेउ नरेस रजायसु देहू।।

kahai bhuālu sunia munināyaka |bhae rāma saba bidhi saba lāyaka ||

sevaka saciva sakala purabāsī |je hamāre ari mitra udāsī ||

sabahi rāmu priya jehi bidhi mohī |prabhu asīsa janu tanu dhari sohī ||

bipra sahita parivāra gosāīṁ |karahiṁ chohu saba raurihi nāī ||

je gura carana renu sira dharahīṁ |te janu sakala bibhava basa karahīṁ ||

mohi sama yahu anubhayau na dūjeṁ |sabu pāyaũ raja pāvani pūjeṁ ||

aba abhilāṣu eku mana moreṁ |pūjahi nātha anugraha toreṁ ||

muni prasanna lakhi sahaja sanehū |kaheu naresa rajāyasu dehū ||

قال الملك: «اسمع يا سيد الحكماء. لقد صار راما مؤهلاً لكل شيء بكل طريق.» الخدم والوزراء وجميع سكان المدينة، سواء كانوا أعدائي أو أصدقائي أو محايدين، جميعهم يحبون راما كما هو عزيز عليّ. إنه يبدو كأنه بركة الرب نفسها تجسدت في جسد. البراهمة مع عائلاتهم، يا مولاي، جميعهم يظهرون له المودة كما يفعلون معك. الذين يحملون غبار قدمي معلمهم على رؤوسهم، كأنهم يملكون كل ازدهار تحت سلطتهم. لا أحد غيري قد اختبر هذا. لقد نلت كل شيء بعبادة غبار قدميك المقدستين. الآن في قلبي رغبة واحدة، يا سيدي، وستتحقق بنعمتك. فلما رأى الحكيم المودة الطبيعية للملك، سرّ وقال: «أيها الملك، أصدر أمرك.»

دوها 3

राजन राउर नामु जसु सब अभिमत दातार।फल अनुगामी महिप मनि मन अभिलाषु तुम्हार।।⁠3।।

rājana rāura nāmu jasu saba abhimata dātāra |phala anugāmī mahipa mani mana abhilāṣu tumhāra ||⁠3||

أيها الملك، اسمك وشهرك هما اللذان يعطيان كل ما هو مرغوب. يا جوهرة الملوك، لتتحقق رغبة قلبك.

تشاوباي 4.1-4

सब बिधि गुरु प्रसन्न जियँ जानी।बोलेउ राउ रहँसि मृदु बानी।।

नाथ रामु करिअहिं जुबराजू।कहिअ कृपा करि करिअ समाजू।।

मोहि अछत यहु होइ उछाहू।लहहिं लोग सब लोचन लाहू।।

प्रभु प्रसाद सिव सबइ निबाहीं।यह लालसा एक मन माहीं।।

पुनि न सोच तनु रहउ कि जाऊ।जेहिं न होइ पाछें पछिताऊ।।

सुनि मुनि दसरथ बचन सुहाए।मंगल मोद मूल मन भाए।।

सुनु नृप जासु बिमुख पछिताहीं।जासु भजन बिनु जरनि न जाहीं।।

भयउ तुम्हार तनय सोइ स्वामी।रामु पुनीत प्रेम अनुगामी।।

saba bidhi guru prasanna jiyã jānī |boleu rāu rahãsi mṛdu bānī ||

nātha rāmu kariahiṁ jubarājū |kahia kṛpā kari karia samājū ||

mohi achata yahu hoi uchāhū |lahahiṁ loga saba locana lāhū ||

prabhu prasāda siva sabai nibāhīṁ |yaha lālasā eka mana māhīṁ ||

puni na soca tanu rahau ki jāū |jehiṁ na hoi pācheṁ pachitāū ||

suni muni dasaratha bacana suhāe |maṁgala moda mūla mana bhāe ||

sunu nṛpa jāsu bimukha pachitāhīṁ |jāsu bhajana binu jarani na jāhīṁ ||

bhayau tumhāra tanaya soi svāmī |rāmu punīta prema anugāmī ||

عالماً في قلبه أن المعلم راضٍ بكل الطرق، تكلّم الملك بكلمات لطيفة مليئة بالفرح. يا سيدي، لِيُجعل راما ولياً للعهد. تفضّل وقل لي، لأقوم بالترتيبات. لِيُقَم هذا الاحتفال ما دمت حياً، ولِيَنَل جميع الناس مكافأة أعينهم الكاملة. بفضل سيدي وفضل شيفا، تحقّق كل شيء؛ لا يبقى في قلبي إلا هذه الرغبة الواحدة. بعد ذلك لن أشغل بالي سواء بقي الجسد أو رحل، حتى لا يكون هناك ندم فيما بعد. سماع كلمات داشاراثا المفرحة، فُرِح قلب الحكيم؛ كانت أصل البركة والفرح. اسمع أيها الملك: الذي يُعرض عنه المتمرّدون فيندمون، والذي بدون عبادته لا يزول احتراق القلب أبداً، ذلك الرب نفسه صار ابنك: راما، الطاهر، الذي يتبع المحبة.

دوها 4

बेगि बिलंबु न करिअ नृप साजिअ सबुइ समाजु।सुदिन सुमंगलु तबहिं जब रामु होहिं जुबराजु।।⁠4।।

begi bilaṁbu na karia nṛpa sājia sabui samāju |sudina sumaṁgalu tabahiṁ jaba rāmu hohiṁ jubarāju ||⁠4||

لا تتأخر أيها الملك؛ رتب الاجتماع كله. ذلك وحده هو اليوم الجميل والميمون عندما يصبح راما ولياً للعهد.

تشاوباي 5.1-4

मुदित महिपति मंदिर आए।सेवक सचिव सुमंत्रु बोलाए।।

कहि जयजीव सीस तिन्ह नाए।भूप सुमंगल बचन सुनाए।।

जौं पाँचहि मत लागै नीका।करहु हरषि हियँ रामहि टीका।।

मंत्री मुदित सुनत प्रिय बानी।अभिमत बिरवँ परेउ जनु पानी।।

बिनती सचिव करहि कर जोरी।जिअहु जगतपति बरिस करोरी।।

जग मंगल भल काजु बिचारा।बेगिअ नाथ न लाइअ बारा।।

नृपहि मोदु सुनि सचिव सुभाषा।बढ़त बौंड़ जनु लही सुसाखा।।

mudita mahipati maṁdira āe |sevaka saciva sumaṁtru bolāe ||

kahi jayajīva sīsa tinha nāe |bhūpa sumaṁgala bacana sunāe ||

jauṁ pā̃cahi mata lāgai nīkā |karahu haraṣi hiyã rāmahi ṭīkā ||

maṁtrī mudita sunata priya bānī |abhimata biravã pareu janu pānī ||

binatī saciva karahi kara jorī |jiahu jagatapati barisa karorī ||

jaga maṁgala bhala kāju bicārā |begia nātha na lāia bārā ||

nṛpahi modu suni saciva subhāṣā |baṛhata bauṁṛa janu lahī susākhā ||

عاد الملك إلى قصره فرحًا، واستدعى خدمه ووزيره سومنترا. فقالوا "النصر لك، وعمراً طويلاً" وانحنوا برؤوسهم، وأخبرهم الملك بالبشارة السعيدة. "إن كان الرأي يبدو حسنًا للجميع، فضعوا بفرح وقلب راضٍ علامة المُلك على جبهة راما." فرح الوزير بسماع هذه الكلمات الحسنة، كأن المطر هطل على غرسة رغبته. رفع الوزير التماسه بأكف مضمومة: "عاش رب العالمين مليون سنة." "لقد قررت عملًا صالحًا يجلِب البركة للعالم، فأسرع يا سيدي ولا تتأخر." فرح الملك بسماع كلمات الوزير الحسنة، كالكروم النامية التي وجدت غصنًا قويًا.

دوها 5

कहेउ भूप मुनिराज कर जोइ जोइ आयसु होइ।राम राज अभिषेक हित बेगि करहु सोइ सोइ।।⁠5।।

kaheu bhūpa munirāja kara joi joi āyasu hoi |rāma rāja abhiṣeka hita begi karahu soi soi ||⁠5||

قال الملك: "مهما كان أمر سيد الحكماء، فافعلوا كل شيء على الفور من أجل تتويج راما ملكاً."

تشاوباي 6.1-4

हरषि मुनीस कहेउ मृदु बानी।आनहु सकल सुतीरथ पानी।।

औषध मूल फूल फल पाना।कहे नाम गनि मंगल नाना।।

चामर चरम बसन बहु भाँती।रोम पाट पट अगनित जाती।।

मनिगन मंगल बस्तु अनेका।जो जग जोगु भूप अभिषेका।।

बेद बिदित कहि सकल बिधाना।कहेउ रचहु पुर बिबिध बिताना।।

सफल रसाल पूगफल केरा।रोपहु बीथिन्ह पुर चहुँ फेरा।।

रचहु मंजु मनि चौकें चारू।कहहु बनावन बेगि बजारू।।

पूजहु गनपति गुर कुलदेवा।सब बिधि करहु भूमिसुर सेवा।।

haraṣi munīsa kaheu mṛdu bānī |ānahu sakala sutīratha pānī ||

auṣadha mūla phūla phala pānā |kahe nāma gani maṁgala nānā ||

cāmara carama basana bahu bhā̃tī |roma pāṭa paṭa aganita jātī ||

manigana maṁgala bastu anekā |jo jaga jogu bhūpa abhiṣekā ||

beda bidita kahi sakala bidhānā |kaheu racahu pura bibidha bitānā ||

saphala rasāla pūgaphala kerā |ropahu bīthinha pura cahũ pherā ||

racahu maṁju mani caukeṁ cārū |kahahu banāvana begi bajārū ||

pūjahu ganapati gura kuladevā |saba bidhi karahu bhūmisura sevā ||

فقال كبير الحكماء بفرح بصوت لطيف: "ائتوا بماء من جميع الأماكن المقدسة." "ائتوا بالأعشاب والجذور والزهور والثمار وأوراق التنبول." ذكرها واحدة تلو الأخرى، عادّاً الأشياء الميمونة الكثيرة. ذكر المروحات والجلود والملابس بأنواع كثيرة، وأنواعاً لا تحصى من الصوف والفرو والحرير. ذكر أكواماً من الجواهر وكثيراً من الأشياء الميمونة الأخرى، كل ما في العالم يصلح لتتويج الملك. بعد أن بيّن جميع الطقوس المعروفة في الفيدا، قال: "أقيموا في المدينة خياماً ومظلات بأنواع كثيرة." "ازرعوا أشجار المانجو المثمرة ونخيل الأريكا والموز على طول الشوارع، في جميع أنحاء المدينة." "شكّلوا ساحات جميلة مرصّعة بالجواهر، وزيّنوا الأسواق بسرعة." "اعبدوا غنابات والمرشد وآلهة العائلة، واخدموا البراهمة بكل الطرق."

دوها 6

ध्वज पताक तोरन कलस सजहु तुरग रथ नाग।सिर धरि मुनिबर बचन सबु निज निज काजहिं लाग।।⁠6।।

dhvaja patāka torana kalasa sajahu turaga ratha nāga |sira dhari munibara bacana sabu nija nija kājahiṁ lāga ||⁠6||

أقيموا الأعلام والرايات والأقواس والزخارف؛ وزينوا الخيول والعربات والفيلة. حاملاً في ذهنه كلمات الحكيم العظيم، انطلق كل واحد إلى مهمته الخاصة.

تشاوباي 7.1-4

जो मुनीस जेहि आयसु दीन्हा।सो तेहिं काजु प्रथम जनु कीन्हा।।

बिप्र साधु सुर पूजत राजा।करत राम हित मंगल काजा।।

सुनत राम अभिषेक सुहावा।बाज गहागह अवध बधावा।।

राम सीय तन सगुन जनाए।फरकहिं मंगल अंग सुहाए।।

पुलकि सप्रेम परसपर कहहीं।भरत आगमनु सूचक अहहीं।।

भए बहुत दिन अति अवसेरी।सगुन प्रतीति भेंट प्रिय केरी।।

भरत सरिस प्रिय को जग माहीं।इहइ सगुन फलु दूसर नाहीं।।

रामहि बंधु सोच दिन राती।अंडन्हि कमठ हृदउ जेहि भाँती।।

jo munīsa jehi āyasu dīnhā |so tehiṁ kāju prathama janu kīnhā ||

bipra sādhu sura pūjata rājā |karata rāma hita maṁgala kājā ||

sunata rāma abhiṣeka suhāvā |bāja gahāgaha avadha badhāvā ||

rāma sīya tana saguna janāe |pharakahiṁ maṁgala aṁga suhāe ||

pulaki saprema parasapara kahahīṁ |bharata āgamanu sūcaka ahahīṁ ||

bhae bahuta dina ati avaserī |saguna pratīti bheṁṭa priya kerī ||

bharata sarisa priya ko jaga māhīṁ |ihai saguna phalu dūsara nāhīṁ ||

rāmahi baṁdhu soca dina rātī |aṁḍanhi kamaṭha hṛdau jehi bhā̃tī ||

مهما كان الأمر الذي أعطاه سيد الحكماء لشخص ما، قام بذلك العمل أولاً. يعبد الملك البراهمة والقديسين والآلهة، ويقوم بالأعمال التي تجلب الخير والفائدة لراما. سماعاً بتتويج راما الميمون، امتلأت أيوديا بأصوات الآلات الموسيقية والابتهاج العظيم. أظهرت أجساد راما وسيتا علامات حسنة؛ ارتجفت أطرافهم الجميلة بعلامات خير. مرتجفين بالمحبة، تحدثوا مع بعضهم البعض؛ كانت هذه إشارات لمجيء بهاراتا. مرت أيام كثيرة في ترقب عظيم؛ أعطت العلامات ثقة باللقاء مع الحبيب. لا أحد في العالم عزيز كبهاراتا؛ هذا هو ثمر العلامات، ولا غير. يفكر راما في أخيه ليلاً ونهاراً، كما يعتني السلحفاة ببيضها في قلبها.

دوها 7

एहि अवसर मंगलु परम सुनि रहँसेउ रनिवासु।सोभत लखि बिधु बढ़त जनु बारिधि बीचि बिलासु।।⁠7।।

ehi avasara maṁgalu parama suni rahãseu ranivāsu |sobhata lakhi bidhu baṛhata janu bāridhi bīci bilāsu ||⁠7||

في هذا الوقت، امتلأت الأسرة الملكية بهجة عند سماعها الأخبار السارة للغاية، وبدت في غاية الحسن كأنها تلاعب الأمواج المتزايدة في وسط المحيط عند رؤية القمر المكتمل.

تشاوباي 8.1-4

प्रथम जाइ जिन्ह बचन सुनाए।भूषन बसन भूरि तिन्ह पाए।।

प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं।मंगल कलस सजन सब लागीं।।

चौकें चारु सुमित्राँ पुरी।मनिमय बिबिध भाँति अति रुरी।।

आनँद मगन राम महतारी।दिए दान बहु बिप्र हँकारी।।

पूजीं ग्रामदेबि सुर नागा।कहेउ बहोरि देन बलिभागा।।

जेहि बिधि होइ राम कल्यानू।देहु दया करि सो बरदानू।।

गावहिं मंगल कोकिलबयनीं।बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं।।

prathama jāi jinha bacana sunāe |bhūṣana basana bhūri tinha pāe ||

prema pulaki tana mana anurāgīṁ |maṁgala kalasa sajana saba lāgīṁ ||

caukeṁ cāru sumitrā̃ purī |manimaya bibidha bhā̃ti ati rurī ||

ānãda magana rāma mahatārī |die dāna bahu bipra hãkārī ||

pūjīṁ grāmadebi sura nāgā |kaheu bahori dena balibhāgā ||

jehi bidhi hoi rāma kalyānū |dehu dayā kari so baradānū ||

gāvahiṁ maṁgala kokilabayanīṁ |bidhubadanīṁ mṛgasāvakanayanīṁ ||

الذين ذهبوا أولاً وأحضروا الأخبار، نالوا حلياً وثياباً وفيرة. بأجساد مرتجزة بالحب وقلوب عامرة بالتعلق، شرعت النساء جميعاً في ترتيب أباريق الماء الميمونة. سوميترا زينت الساحات الطقسية البديعة، المصنوعة من جواهر متنوعة، فائقة الحسن. والدة راما، الغارقة في البهجة، استدعت البراهمة وأعطتهم عطايا كثيرة. عبدت إلهة القرية والآلهة والناغا، ووعدتهم بقرابين في المقابل. صلت قائلة: ارحميني وامنحيني تلك النعمة التي يزدهر بها راما. نساء بأصوات كالوقواق، ووجوه كالقمر، وعيون كعيون الأيل، غنين أغاني مباركة.

دوها 8

राम राज अभिषेकु सुनि हियँ हरषे नर नारि।लगे सुमंगल सजन सब बिधि अनुकूल बिचारि।।⁠8।।

rāma rāja abhiṣeku suni hiyã haraṣe nara nāri |lage sumaṁgala sajana saba bidhi anukūla bicāri ||⁠8||

عند سماع تتويج راما الملكي، ابتهج الرجال والنساء في قلوبهم؛ وبدأ جميع الأخيار الاحتفالات الميمونة، مراعين ما هو مواتٍ في كل طريق.

تشاوباي 9.1-4

तब नरनाहँ बसिष्ठु बोलाए।रामधाम सिख देन पठाए।।

गुर आगमनु सुनत रघुनाथा।द्वार आइ पद नायउ माथा।।

सादर अरघ देइ घर आने।सोरह भाँति पूजि सनमाने।।

गहे चरन सिय सहित बहोरी।बोले रामु कमल कर जोरी।।

सेवक सदन स्वामि आगमनू।मंगल मूल अमंगल दमनू।।

तदपि उचित जनु बोलि सप्रीती।पठइअ काज नाथ असि नीती।।

प्रभुता तजि प्रभु कीन्ह सनेहू।भयउ पुनीत आजु यहु गेहू।।

आयसु होइ सो करौं गोसाई।सेवक लहइ स्वामि सेवकाई।।

taba naranāhã basiṣṭhu bolāe |rāmadhāma sikha dena paṭhāe ||

gura āgamanu sunata raghunāthā |dvāra āi pada nāyau māthā ||

sādara aragha dei ghara āne |soraha bhā̃ti pūji sanamāne ||

gahe carana siya sahita bahorī |bole rāmu kamala kara jorī ||

sevaka sadana svāmi āgamanū |maṁgala mūla amaṁgala damanū ||

tadapi ucita janu boli saprītī |paṭhaia kāja nātha asi nītī ||

prabhutā taji prabhu kīnha sanehū |bhayau punīta āju yahu gehū ||

āyasu hoi so karauṁ gosāī |sevaka lahai svāmi sevakāī ||

ثم استدعى الملك فاسيشتا وأرسله إلى بيت راما لتعليمه. فلما سمع رام، سيد راغو، بمجيء المعلم، جاء إلى الباب ووضع رأسه عند قدميه. قدّم له آرغيا بخشوع وأدخله إلى البيت، وأكرمه بعبادته بستة عشر نوعاً من القرابين. ثم قبض هو وسيتا على قدميه معاً، وتكلم رام ويداه كاللوتس مطويتان. عندما يأتي السيد إلى بيت خادمه، فهذا أصل كل بركة ومخمد كل مصيبة. ومع ذلك، يا سيدي، كان من اللائق أن تستدعي خادمك بمحبة وترسله في المهمة؛ هكذا هي السنة. لكنك تركت سلطانك وأظهرت لي حباً، فأصبح هذا البيت اليوم مقدساً. أيها السيد، أي أمر تأمرني به سأنفذه؛ لأن الخادم ينال ثواب الخدمة عندما يخدم سيده.

دوها 9

सुनि सनेह साने बचन मुनि रघुबरहि प्रसंस।राम कस न तुम्ह कहहु अस हंस बंस अवतंस।।⁠9।।

suni saneha sāne bacana muni raghubarahi prasaṁsa |rāma kasa na tumha kahahu asa haṁsa baṁsa avataṁsa ||⁠9||

سماع هذه الكلمات المفعمة بالمحبة، مدح الحكيم راما، أفضل راغو: يا راما، لماذا لا تتكلم هكذا؟ أنت زينة بيت الشمس، الذي يشبه الإوز.

Frequently Asked Questions

परंपरा में अयोध्या काण्ड के ‘अभिषेक-मंगल’ प्रसंग का पाठ गृह-शांति, राज्य/कार्य-सिद्धि, तथा गुरु-आज्ञा के प्रति दृढ़ता देने वाला माना जाता है; विशेषतः ‘मंगल’ और ‘धर्म-निश्चय’ की बुद्धि जाग्रत होती है—जो आगे के वनवास-त्याग को समझने की पात्रता बनती है।

अभिषेक/मंगल-प्रसंग में कई रामानंदी परंपराओं में ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ या ‘राम राम’ नाम-जप को समपुट रूप में जोड़ा जाता है; शिव-वंदना के संदर्भ में कुछ पाठ-परंपराएँ ‘ॐ नमः शिवाय’ का संक्षिप्त समपुट भी रखती हैं (स्थानीय/सम्प्रदायानुसार भेद)।

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