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त्याग-धर्म का सोपान: राजसत्ता, कुलधर्म, और व्यक्तिगत अहं (राजमद) के बीच विवेक का उदय। इस काण्ड में ‘घर’ (अयोध्या) बाह्य-स्थान नहीं, अंतःकरण का राज्य है—जहाँ राम-आज्ञा के सामने वासनात्मक प्रतिरोध (लक्ष्मण का रोष) भी शुद्ध होकर मर्यादा-भक्ति में ढलता है, और भरत-चरित्र ‘अनासक्ति’ का आदर्श बनकर मुक्ति-सीढ़ी का दृढ़ पायदान होता है।
在此断续的段落(约多哈 230–239)中,“英雄之 ras(वीर-रस)”的奔涌(罗什曼欲起战端)立刻转化为“寂静之 ras(शांत)”与“仆从/兄弟之爱(दास्य/भ्रातृ-प्रेम)”。天启之声(空中之语)虽称赞罗什曼之力,却同时提示政策与明辨:审度当与不当、骤然行动后的悔意、以及王权之醉最为难治。罗摩的回答以夸饰譬喻确立“婆罗多不可能有王醉”:如蚊能掀须弥、以酸浆毁乳海。继而场景营造中,林庵之境成为“善治(सुराज)”的寓象——戒律与自制、安宁与善慧、以及依止罗摩足下的心。最终浮现“知识之 सभा”的意象:在众仙围绕之中,悉多—罗摩成为“ भक्तi-真知—喜乐(saccidānanda)”的有相表征。由是此段引行者从怒之能量上升为 विवेक,再由 विवेक 归于 प्रेम 的奉献与投靠。
Verse 470 (चौपाई)
उठि कर जोरि रजायसु मागा। मनहुँ बीर रस सोवत जागा।। बाँधि जटा सिर कसि कटि भाथा। साजि सरासनु सायकु हाथा।। आजु राम सेवक जसु लेऊँ। भरतहि समर सिखावन देऊँ।। राम निरादर कर फलु पाई। सोवहुँ समर सेज दोउ भाई।। आइ बना भल सकल समाजू। प्रगट करउँ रिस पाछिल आजू।। जिमि करि निकर दलइ मृगराजू। लेइ लपेटि लवा जिमि बाजू।। तैसेहिं भरतहि सेन समेता। सानुज निदरि निपातउँ खेता।। जौं सहाय कर संकरु आई। तौ मारउँ रन राम दोहाई।।
他起身合掌祈求,仿佛一位战士因战斗的激情而从睡眠中醒来。他束起发髻,紧束腰间,手持弓箭,准备就绪。"今日我要赢得罗摩仆人的荣耀,给婆罗多上一堂战争之课。罗摩因轻慢而承受了果报;如今两兄弟将安睡于战场之床。让全军来到森林;今日我要显露我积压已久的愤怒。如同狮子撕碎象群,如同鹰隼俯冲攫取猎物,我也将如此击倒婆罗多及其全军,在战场上无畏地杀死他及其兄弟。即使湿婆亲自前来相助,我仍要在战场上杀死他,呼唤罗摩之名。"
Verse 471 (दोहा/सोरठा)
अति सरोष माखे लखनु लखि सुनि सपथ प्रवान। सभय लोक सब लोकपति चाहत भभरि भगान।।230।।
罗什曼那充满极度愤怒,发出誓言;听闻目睹,众人都深信不疑。全世界陷入恐惧,所有世间之主都惊恐地想要逃离。
Verse 472 (चौपाई)
जगु भय मगन गगन भइ बानी। लखन बाहुबलु बिपुल बखानी।। तात प्रताप प्रभाउ तुम्हारा। को कहि सकइ को जाननिहारा।। अनुचित उचित काजु किछु होऊ। समुझि करिअ भल कह सबु कोऊ।। सहसा करि पाछैं पछिताहीं। कहहिं बेद बुध ते बुध नाहीं।। सुनि सुर बचन लखन सकुचाने। राम सीयँ सादर सनमाने।। कही तात तुम्ह नीति सुहाई। सब तें कठिन राजमदु भाई।। जो अचवँत नृप मातहिं तेई। नाहिन साधुसभा जेहिं सेई।। सुनहु लखन भल भरत सरीसा। बिधि प्रपंच महँ सुना न दीसा।।
世人沉溺于恐惧,空中回响着呼喊;罗什曼那的臂力被广为称颂。"父亲,您的威德与影响力,谁能描述,谁能知晓?无论事情是否合宜,做了再说;每个人经过思考后都说出自己认为最好的话。那些仓促行事的人事后都会后悔;吠陀如此说,智者没有比这更高的智慧。"听闻诸神之言,罗什曼那感到惭愧,罗摩和悉多以恭敬之心礼遇他。他说:"父亲,您说了恰当的智慧;兄弟,王权的傲慢是最难克服的。那些被傲慢所醉的国王,有他们在的地方就没有善人的聚会。听着,罗什曼那:婆罗多确实是善良的;在世间的幻化中,从未见过这样的人。"
Verse 473 (दोहा/सोरठा)
भरतहि होइ न राजमदु बिधि हरि हर पद पाइ।। कबहुँ कि काँजी सीकरनि छीरसिंधु बिनसाइ।।231।।
婆罗多绝不会生起王权的傲慢,因为他已获得诃里与诃罗之足。剑鞘岂能吸干乳海?
Verse 474 (चौपाई)
तिमिरु तरुन तरनिहि मकु गिलई। गगनु मगन मकु मेघहिं मिलई।। गोपद जल बूड़हिं घटजोनी। सहज छमा बरु छाड़ै छोनी।। मसक फूँक मकु मेरु उड़ाई। होइ न नृपमदु भरतहि भाई।। लखन तुम्हार सपथ पितु आना। सुचि सुबंधु नहिं भरत समाना।। सगुन खीरु अवगुन जलु ताता। मिलइ रचइ परपंचु बिधाता।। भरतु हंस रबिबंस तड़ागा। जनमि कीन्ह गुन दोष बिभागा।। गहि गुन पय तजि अवगुन बारी। निज जस जगत कीन्हि उजिआरी।। कहत भरत गुन सीलु सुभाऊ। पेम पयोधि मगन रघुराऊ।।
黑暗吞没太阳;天空融入芥子;云朵被容纳于芥子之中。水中的生物溺亡于一滴水中;造物主天生宽恕,但他也会舍弃自己的创造。蚊蚋以气息吹走须弥山;然而兄弟,王权的傲慢绝不会在婆罗多心中生起。罗什曼那,你的誓言使你的父亲蒙羞;没有像婆罗多这样纯洁的朋友。父亲,善德如乳,过失如水;造物主将它们混合在一起。婆罗多是日族湖泊中的天鹅;从出生起,他就分辨了善与恶。取善德之乳,舍弃过失之水,他以自己的荣耀照亮了世界。人们称颂婆罗多的品德、本性;罗怙之主沉浸于爱之海洋。
Verse 475 (दोहा/सोरठा)
सुनि रघुबर बानी बिबुध देखि भरत पर हेतु। सकल सराहत राम सो प्रभु को कृपानिकेतु।।232।।
听闻罗怙之主的话语,看见婆罗多对他的挚爱,所有天神都赞颂罗摩,他是慈悲之所。
Verse 476 (चौपाई)
जौं न होत जग जनम भरत को। सकल धरम धुर धरनि धरत को।। कबि कुल अगम भरत गुन गाथा। को जानइ तुम्ह बिनु रघुनाथा।। लखन राम सियँ सुनि सुर बानी। अति सुखु लहेउ न जाइ बखानी।। इहाँ भरतु सब सहित सहाए। मंदाकिनीं पुनीत नहाए।। सरित समीप राखि सब लोगा। मागि मातु गुर सचिव नियोगा।। चले भरतु जहँ सिय रघुराई। साथ निषादनाथु लघु भाई।। समुझि मातु करतब सकुचाहीं। करत कुतरक कोटि मन माहीं।। रामु लखनु सिय सुनि मम नाऊँ। उठि जनि अनत जाहिं तजि ठाऊँ।।
若婆罗多未曾生于世间,整个大地将无人持守正法之道。除了您,罗怙之主啊,谁能知晓婆罗多那诗人世家无法企及的无尽德行故事?罗什曼那、罗摩和悉多听闻天神之言,感受到无法言喻的极大喜悦。此时婆罗多与所有随从一起,在神圣的曼达基尼河中沐浴。他将众人安置在河岸边,征得母亲、导师和谋臣的许可后启程。婆罗多前往悉多和罗怙之主所在之处,尼沙达之主和弟弟随行。他明白母亲的行为,心中感到羞愧,千万种疑虑在心中升起。听闻我的名字,愿罗摩、罗什曼那和悉多起身,不离此地往他处去。
Verse 477 (दोहा/सोरठा)
मातु मते महुँ मानि मोहि जो कछु करहिं सो थोर। अघ अवगुन छमि आदरहिं समुझि आपनी ओर।।233।।
母亲啊,无论您做什么,将我视为己出,我都视为微不足道;请宽恕我的罪过与过失,将我视为己出而给予尊重。
Verse 478 (चौपाई)
जौं परिहरहिं मलिन मनु जानी। जौ सनमानहिं सेवकु मानी।। मोरें सरन रामहि की पनही। राम सुस्वामि दोसु सब जनही।। जग जस भाजन चातक मीना। नेम पेम निज निपुन नबीना।। अस मन गुनत चले मग जाता। सकुच सनेहँ सिथिल सब गाता।। फेरत मनहुँ मातु कृत खोरी। चलत भगति बल धीरज धोरी।। जब समुझत रघुनाथ सुभाऊ। तब पथ परत उताइल पाऊ।। भरत दसा तेहि अवसर कैसी। जल प्रबाहँ जल अलि गति जैसी।। देखि भरत कर सोचु सनेहू। भा निषाद तेहि समयँ बिदेहू।।
若您摒弃阴暗之心,将我视为仆人而加以尊重,那么我便皈依罗摩;罗摩是我真正的主人,一切过错皆在我。世间荣耀如器皿,恰塔卡鸟与鱼遵循各自法则,各有所长,常新不衰。他心中如此思索,踏上路途;羞愧、爱恋与疲惫使全身松软。他将心念从母亲所为之事转开,以虔诚、力量与耐心为伴而行。当他想起罗怙之主的本性,他的脚步便找到了道路。那时婆罗多的状态如何?如水中蜜蜂随水流漂动。见婆罗多的忧愁与爱恋,尼沙达在那一刻仿佛忘却了肉身。
Verse 479 (दोहा/सोरठा)
लगे होन मंगल सगुन सुनि गुनि कहत निषादु। मिटिहि सोचु होइहि हरषु पुनि परिनाम बिषादु।।234।।
吉祥的征兆开始显现;尼沙达听闻后解说其义:忧愁将消逝,喜悦将来临,终将获得欢乐。
Verse 480 (चौपाई)
सेवक बचन सत्य सब जाने। आश्रम निकट जाइ निअराने।। भरत दीख बन सैल समाजू। मुदित छुधित जनु पाइ सुनाजू।। ईति भीति जनु प्रजा दुखारी। त्रिबिध ताप पीड़ित ग्रह मारी।। जाइ सुराज सुदेस सुखारी। होहिं भरत गति तेहि अनुहारी।। राम बास बन संपति भ्राजा। सुखी प्रजा जनु पाइ सुराजा।। सचिव बिरागु बिबेकु नरेसू। बिपिन सुहावन पावन देसू।। भट जम नियम सैल रजधानी। सांति सुमति सुचि सुंदर रानी।। सकल अंग संपन्न सुराऊ। राम चरन आश्रित चित चाऊ।।
他知仆人之言皆为真实,便前往靠近仙人居所之处。婆罗多看见森林中群山汇聚,欢喜如得宝藏,心中却感饥渴。他充满恐惧与渴望,如受苦之民,受三重苦恼折磨,被星宿所伤。他前往善治之国、安乐之地,其境遇如婆罗多一般。罗摩在林中的居所光彩照人,人民安乐,如得贤君。国王之臣超脱而有智慧,森林美丽,为神圣之地。士兵如阎摩般守纪律,山岳如都城,和平、智慧、清净与美丽如王后。诸根圆满如贤君,心之所愿即皈依罗摩之足。
Verse 481 (दोहा/सोरठा)
जीति मोह महिपालु दल सहित बिबेक भुआलु। करत अकंटक राजु पुरँ सुख संपदा सुकालु।।235।।
战胜迷妄,国王与其眷属成为智慧之蜂,在城中无碍地治理,享有幸福、富足与良时。
Verse 482 (चौपाई)
बन प्रदेस मुनि बास घनेरे। जनु पुर नगर गाउँ गन खेरे।। बिपुल बिचित्र बिहग मृग नाना। प्रजा समाजु न जाइ बखाना।। खगहा करि हरि बाघ बराहा। देखि महिष बृष साजु सराहा।। बयरु बिहाइ चरहिं एक संगा। जहँ तहँ मनहुँ सेन चतुरंगा।। झरना झरहिं मत्त गज गाजहिं। मनहुँ निसान बिबिधि बिधि बाजहिं।। चक चकोर चातक सुक पिक गन। कूजत मंजु मराल मुदित मन।। अलिगन गावत नाचत मोरा। जनु सुराज मंगल चहु ओरा।। बेलि बिटप तृन सफल सफूला। सब समाजु मुद मंगल मूला।।
森林之中众多仙人居住,如城邑村落无数。奇异鸟兽种类繁多,众生聚集难以尽述。孔雀、狮子、老虎、野猪皆可见,见水牛与公牛,赞叹其美。敌对之兽共同食草,四处仿佛四军阵列。瀑布倾泻,狂象长鸣,仿佛鼓乐齐奏。查科拉鸟、恰塔卡鸟、鹦鹉、杜鹃鸣唱,天鹅欢悦,心中喜悦。蜂群飞舞,孔雀起舞,仿佛四方皆有吉祥。藤蔓、树木、草木花果繁茂,一切聚会为喜悦吉祥之源。
Verse 483 (दोहा/सोरठा)
राम सैल सोभा निरखि भरत हृदयँ अति पेमु। तापस तप फलु पाइ जिमि सुखी सिरानें नेमु।।236।।
观看罗摩之山的美丽,婆罗多心中充满深切爱意;如苦行者获得修行之果,他心中欢喜,誓愿圆满。
Verse 484 (चौपाई)
तब केवट ऊँचें चढ़ि धाई। कहेउ भरत सन भुजा उठाई।। नाथ देखिअहिं बिटप बिसाला। पाकरि जंबु रसाल तमाला।। जिन्ह तरुबरन्ह मध्य बटु सोहा। मंजु बिसाल देखि मनु मोहा।। नील सघन पल्ल्व फल लाला। अबिरल छाहँ सुखद सब काला।। मानहुँ तिमिर अरुनमय रासी। बिरची बिधि सँकेलि सुषमा सी।। ए तरु सरित समीप गोसाँई। रघुबर परनकुटी जहँ छाई।। तुलसी तरुबर बिबिध सुहाए। कहुँ कहुँ सियँ कहुँ लखन लगाए।। बट छायाँ बेदिका बनाई। सियँ निज पानि सरोज सुहाई।।
于是船夫登高奔来,举起手臂对婆罗多说道:主啊,请看那些大树,芒果、阎浮、多摩罗。那些树中榕树最为庄严,见其美丽宏大,心为之迷醉。其叶深密,其果鲜红,树荫不断,时时予人安乐。如黑暗与曙光交织之体,仿佛造物主凝聚美妙而成。此树近河,罗怙之主的叶舍在此。种种图尔西树生长其间,此处悉多,彼处罗什曼那所植。榕树荫下悉多以莲花妙手建造平台。
Verse 485 (दोहा/सोरठा)
जहाँ बैठि मुनिगन सहित नित सिय रामु सुजान। सुनहिं कथा इतिहास सब आगम निगम पुरान।।237।।
在那里,悉多与明智的罗摩每日与众仙人共坐,聆听阿含、吠陀与往世书的一切故事与历史。
Verse 486 (चौपाई)
सखा बचन सुनि बिटप निहारी। उमगे भरत बिलोचन बारी।। करत प्रनाम चले दोउ भाई। कहत प्रीति सारद सकुचाई।। हरषहिं निरखि राम पद अंका। मानहुँ पारसु पायउ रंका।। रज सिर धरि हियँ नयनन्हि लावहिं। रघुबर मिलन सरिस सुख पावहिं।। देखि भरत गति अकथ अतीवा। प्रेम मगन मृग खग जड़ जीवा।। सखहि सनेह बिबस मग भूला। कहि सुपंथ सुर बरषहिं फूला।। निरखि सिद्ध साधक अनुरागे। सहज सनेहु सराहन लागे।। होत न भूतल भाउ भरत को। अचर सचर चर अचर करत को।।
听了朋友的话,望着森林,婆罗多的双眼盈满了泪水。两兄弟前行礼拜,虽羞怯仍诉说爱意。见到罗摩的双足,他们欢喜雀跃,如同穷人得到了点金石。他们头顶尘土,将其贴在心头和眼中,获得了与罗怙之主相见的喜悦。见到婆罗多那无法言喻的状态,众生都沉浸在爱中:鹿、鸟,甚至最低等的生物。朋友因爱迷失了道路,天神们指引正途,降下花雨。仙人和修行者见此情景,心生虔诚,开始赞美他的天然深情。大地上无人能与婆罗多的爱相比,他使有情无情、动与不动的众生都感动虔诚。
Verse 487 (दोहा/सोरठा)
पेम अमिअ मंदरु बिरहु भरतु पयोधि गँभीर। मथि प्रगटेउ सुर साधु हित कृपासिंधु रघुबीर।।238।।
爱是甘露,离别如山,婆罗多是深邃的海洋。搅动它们,慈悲之海、罗怙之主为了天神和圣者的利益而显现。
Verse 488 (चौपाई)
सखा समेत मनोहर जोटा। लखेउ न लखन सघन बन ओटा।। भरत दीख प्रभु आश्रमु पावन। सकल सुमंगल सदनु सुहावन।। करत प्रबेस मिटे दुख दावा। जनु जोगीं परमारथु पावा।। देखे भरत लखन प्रभु आगे। पूँछे बचन कहत अनुरागे।। सीस जटा कटि मुनि पट बाँधें। तून कसें कर सरु धनु काँधें।। बेदी पर मुनि साधु समाजू। सीय सहित राजत रघुराजू।। बलकल बसन जटिल तनु स्यामा। जनु मुनि बेष कीन्ह रति कामा।। कर कमलनि धनु सायकु फेरत। जिय की जरनि हरत हँसि हेरत।।
与朋友一起,迷人的罗什曼那无法看透茂密森林的屏障。婆罗多看见了主的道院,神圣,是一切吉祥的居所,极为美丽。当他进入时,忧愁消散,如同瑜伽士获得了至高目标。婆罗多看见罗什曼那和主在前方,他询问并充满爱意地诉说。头顶发髻,腰系仙人的树皮衣,肩背箭囊,手持良弓。祭坛上坐着圣人聚会,与悉多一起,罗怙之主光芒四射。黑身,身披树皮,发髻盘结,如同爱神化作了仙人的形象。莲花般的双手转动弓箭,消除心中的焦灼,微笑凝视。
Verse 489 (दोहा/सोरठा)
लसत मंजु मुनि मंडली मध्य सीय रघुचंदु। ग्यान सभाँ जनु तनु धरे भगति सच्चिदानंदु।।239।।
在光辉的仙人聚会中,悉多和罗怙旃德拉闪耀,如同在智慧的殿堂中现身,是虔诚、存在、意识和极乐的化身。
परंपरागत मान्यता में भरत-चरित्र और राजमद-निवारण वाले प्रसंग का पाठ क्रोध, अहं, और भ्रातृ-कलह के संस्कारों को शांत करता है; सेवकभाव, विनय, और ‘मर्यादा’ की बुद्धि दृढ़ होती है—विशेषतः घर-परिवार/सत्ता-संबंधी विवादों में मन को धर्म-मार्ग पर स्थिर करने वाला माना जाता है।
सामान्य मानस-पारायण परंपरा में रामनाम-सम्पुट (जैसे ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’) या ‘राम’ नाम का जप-सम्पुट जोड़ा जाता है; भरत-प्रसंग में कुछ परंपराएँ ‘भरत चरित करहु बिसेसा’ (मानस-भाव-सम्पुट) रूप से भी स्मरण कराती हैं, पर निश्चित एकरूप ‘अनिवार्य’ सम्पुट सम्प्रदायानुसार बदलता है।
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