Adhyaya 7
Shalya ParvaAdhyaya 759 Versesकर्ण-वध से पाण्डव पक्ष का पलड़ा भारी; कौरव पक्ष शल्य के संकल्प से अंतिम प्रतिरोध के लिए स्वयं को समेटता है।

Adhyaya 7

Śalya Installed as Commander; Coalition Agreement and Battle Arrays (शल्यसेनापत्यारोहणं व्यूहवर्णनं च)

Upa-parva: Śalya-senāpati-vyūha-nirdeśa (Appointment of Śalya and Battle-Array Description)

Saṃjaya reports that at dawn Duryodhana orders all great warriors to arm. The army rapidly equips chariots, elephants, infantry, and horses; instruments sound to rouse troops. Śalya, king of Madra, is appointed senāpati, and the forces are distributed into divisions (anīkas) with Śalya placed prominently. Key Kaurava leaders assemble—Kṛpa, Kṛtavarmā, Aśvatthāmā (Drauṇi), Śalya, and Śakuni (Saubala)—and establish an operational rule: none should fight the Pāṇḍavas alone; mutual protection is mandated, with transgression framed as grave moral fault. Both sides then advance in formation. Dhṛtarāṣṭra queries how Śalya and Duryodhana fell; Saṃjaya prefaces the account with the theme of bodily and material destruction (kṣaya) and describes the psychological swing from fear (after Karṇa’s fall) to renewed hope anchored in Śalya’s leadership. The Kaurava deployment is detailed (Śalya at the front; Kṛtavarmā on one flank; Gautama on the other with Śakas and Yavanas; Aśvatthāmā at the rear with Kāmbojas; Duryodhana protected in the center; Śakuni with a large cavalry body). The Pāṇḍavas counter by dividing into three: Dhṛṣṭadyumna–Śikhaṇḍin–Sātyaki charge Śalya’s wing; Yudhiṣṭhira targets Śalya directly; Arjuna engages Kṛtavarmā and the Saṃśaptakas; Bhīma and Somakas press Gautama; Nakula–Sahadeva move against Śakuni and Ulūka. Saṃjaya provides remaining force counts for both sides and concludes with the onset of a severe, mutual engagement at dawn.

Chapter Arc: कर्ण के पतन के बाद रणभूमि पर रात उतरती है; पाण्डव-पांचाल शिविर में विजय-निद्रा है, पर कौरव पक्ष में शून्य और क्रोध—और उसी अँधेरे में शल्य का तेजस्वी प्रतिज्ञा-वाक्य उठ खड़ा होता है। → शल्य दुर्योधन से कहता है कि रथस्थ श्रीकृष्ण-अर्जुन की जोड़ी अद्वितीय है, पर वह आज अपने क्षात्रबल, तपोवीर्य और अस्त्र-बल का प्रदर्शन करेगा; वह धनुर्वेद के अंगों, युद्ध-नीति और आत्मविश्वास का उद्घोष कर कौरवों के टूटते मनोबल को बाँधने का प्रयत्न करता है। → शल्य की प्रतिज्ञा चरम पर पहुँचती है—“आज लोग मुझे निर्भय विचरते देखें; मैं कुन्तीपुत्रों और सोमकों को जीतूँगा; या तो उन्हें निहनूँगा या स्वयं मारा जाकर स्वर्ग जाऊँगा”—और दुर्योधन से कहता है कि अपने समस्त बल से उस ‘महारथ’ (अर्जुन) को रण में दबोचो। → अध्याय का अंत युद्ध-पूर्व संकल्प और मनोबल-निर्माण पर टिकता है: कौरव पक्ष अपने नए सेनापति शल्य के भरोसे अगले दिवस के लिए तैयार होता है, जबकि पाण्डव पक्ष कर्ण-वध की प्रसन्नता में निश्चिन्त निद्रा लेता है। → अगले दिन शल्य का यह गर्जन क्या सचमुच पाण्डवों की विजय-धारा रोक पाएगा, या यह प्रतिज्ञा भी कर्ण की भाँति रण-धूल में विलीन होगी?

Shlokas

Verse 1

ऑफ क्र ३. धनुर्वेदके दस अंग इस प्रकार हैं--व्रत, प्राप्ति, धृति, पुष्टि, स्मृति, क्षेप, शत्रुभेदन, चिकित्सा, उद्दीपन और कृष्टि। २. दीक्षा, शिक्षा, आत्मरक्षा और इसका साधन--ये धनुर्वेदके चार चरण कहे गये हैं। सप्तमो<्ध्याय: राजा शल्यके वीरोचित उद्गार तथा श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको शल्यवधके लिये उत्साहित करना संजय उवाच एतच्छुत्वा वचो राज्ञो मद्रराज: प्रतापवान्‌ | दुर्योधनं तदा राजन्‌ वाक्यमेतदुवाच ह,संजय कहते हैं--महाराज! राजा दुर्योधनकी यह बात सुनकर प्रतापी मद्रराज शल्यने उससे इस प्रकार कहा--

三阇耶说道:“大王啊,听罢国王这番话,英武的摩陀罗之主沙利耶便对杜罗约陀那作如下答复。场面转入沙利耶的武士之言,凸显战阵之中‘盟誓之忠’与‘达摩所要求的严峻真理’之间的道义张力。”

Verse 2

दुर्योधन महाबाहो शृणु वाक्‍्यविदां वर । यावेतौ मन्यसे कृष्णौ रथस्थौ रथिनां वरौ

三阇耶说道:“噢,臂力无双的杜罗约陀那,善言辞者之最——且听我言。至于你所认为在车战武士中至高无上的那两位‘黑天’,立于战车之上……”

Verse 3

न मे तुल्यावुभावेतौ बाहुवीर्ये कथंचन । *वाक्यवेत्ताओंमें श्रेष्ठ महाबाहु दुर्योधन! तुम रथपर बैठे हुए जिन दोनों श्रीकृष्ण और अर्जुनको रथियोंमें श्रेष्ठ समझते हो, ये दोनों बाहुबलमें किसी प्रकार मेरे समान नहीं हैं ।। २ इ। उद्यतां पृथिवीं सर्वां ससुरासुरमानवाम्‌

三阇耶说道:“论臂力,那二人绝无可能与我相等。纵使整个大地——连同诸天、阿修罗与人类——一齐奋起(与我为敌)……”

Verse 4

योधयेयं रणमुखे संक्रुद्ध: किमु पाण्डवान्‌ । “मैं युद्धके मुहानेपर कुपित हो अपने सामने युद्धके लिये आये हुए देवताओं, असुरों और मनुष्योंसहित सारे भूमण्डलके साथ युद्ध कर सकता हूँ। फिर पाण्डवोंकी तो बात ही क्या है? ३ ६ || विजेष्यामि रणे पार्थान्‌ सोमकांश्व समागतान्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“若在战阵最前沿我怒火炽盛,我甚至能与整个世界交战——连同诸天、阿修罗与人类。何况区区般度五子?”

Verse 5

अहं सेनाप्रणेता ते भविष्यामि न संशय: । तं च व्यूहं विधास्यामि न तरिष्यन्ति यं परे,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“我必为你的统帅——毫无疑虑。我也必布置一种战阵(vyūha),使敌军无法突破。杜尔约陀那,我所言皆真;其中没有丝毫不定。”

Verse 6

इस प्रकार श्रीमह्याभारत शल्यपर्वमें शल्य और दुर्योधनका संवादविषयक छठा अध्याय पूरा हुआ,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” एवमुक्तस्ततो राजा मद्राधिपतिमञ्जसा भरतश्रेष्ठ! प्रजानाथ! उनके ऐसा कहनेपर क्लेशसे दबे हुए राजा दुर्योधनने शास्त्रीय विधिके अनुसार सेनाके मध्यभागमें मद्रराज शल्यका सेनापतिके पदपर अभिषेक कर दिया

“杜尔约陀那,我对你所言皆为真实——毫无疑虑。在战场上,我将征服昆蒂的诸子,连同那些敢于上前的索摩迦亦然——此亦无疑。我必为你的统帅,并布下敌军无法突破的战阵(vyūha)。杜尔约陀那,我以真言告你——绝无不定。” 摩陀罗王沙利耶如此言毕,杜尔约陀那虽为忧苦所压,仍依照经论所许可的军礼,在大军中央正式为沙利耶行灌顶礼,立其为统帅。

Verse 7

अभ्यषिज्चत सेनाया मध्ये भरतसत्तम | विधिना शास्त्रदृष्टेन क्लिष्टरूपो विशाम्पते,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” भरतश्रेष्ठ! प्रजानाथ! उनके ऐसा कहनेपर क्लेशसे दबे हुए राजा दुर्योधनने शास्त्रीय विधिके अनुसार सेनाके मध्यभागमें मद्रराज शल्यका सेनापतिके पदपर अभिषेक कर दिया इति श्रीमहा भारते शल्यपर्वणि शल्यसैनापत्याभिषेके सप्तमो5ध्याय:

三阇耶说道:噢,婆罗多族中最卓越者,噢,万民之主!他既如此言毕,杜尔约陀那虽愁苦压身,仍依经论所定之仪,在军中为沙利耶行灌顶礼,立其为统帅。

Verse 8

अभिषिक्ते ततस्तस्मिन्‌ सिंहनादो महानभूत्‌ । तव सैन्ये5भ्यवाद्यन्त वादित्राणि च भारत,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” भारत! उनका अभिषेक हो जानेपर आपकी सेनामें बड़े जोरसे सिंहनाद होने लगा और भाँति-भाँतिके बाजे बज उठे

三阇耶说道:当他受灌顶就任之时,军中爆发出震天的狮吼。婆罗多啊,你的军队里,诸般乐器四面齐鸣。

Verse 9

हृष्टाश्षासंस्तथा योधा मद्रकाश्न महारथा: । तुष्टवुश्चैव राजानं शल्यमाहवशोभिनम्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” मद्रदेशके महारथी योद्धा हर्षमें भर गये और संग्राममें शोभा पानेवाले राजा शल्यकी स्तुति करने लगे--

三阇耶说道:诸位战士——摩陀罗国的诸大车战士(mahāratha)——皆欢欣鼓舞。他们赞颂沙利耶王,称其在战场上光辉夺目。

Verse 10

जय राजंश्रविरञ्जीव जहि शत्रून्‌ समागतान्‌ | तव बाहुबल प्राप्य धार्तराष्ट्रा महाबला:,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“大王啊,Śravirañjīva啊,当取胜——击灭那已集结而来的敌军。凭借陛下臂力之威,持国之子诸位勇士必将占上风。”我所言皆真,杜尔约陀那啊,毫无疑虑。

Verse 11

त्वं हि शक्तो रणे जेतुं ससुरासुरमानवान्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“你确有能力在战场上取胜,纵使对手是人与诸天、阿修罗同来。此言我以真实宣告,杜尔约陀那啊——毫无疑虑。”

Verse 12

एवं सम्पूज्यमानस्तु मद्राणामधिपो बली,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“就这样,在受到应有的礼敬之后,强大的摩陀罗之主对杜尔约陀那宣言:‘我对你所说皆为真实——毫无疑虑。我将在战场上战胜昆蒂的诸子,以及站在我面前的索摩迦众。毫无疑问,我将担任你的统帅,并布下敌军无法逾越的战阵。’”

Verse 13

शल्य उवाच अद्य चाहं रणे सर्वान्‌ पज्चालान्‌ सह पाण्डवै:,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

沙利耶说道:“今日在战场上,我将击败所有般遮罗人,并连同般度五子一并压服。此言我以真实宣告,杜尔约陀那啊——毫无疑虑。”

Verse 14

अद्य पश्यन्तु मां लोका विचरन्तमभीतवत्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“让众人今日看见我无所畏惧地往来驰行。”此言我以真实告知你,杜尔约陀那啊——毫无疑虑。

Verse 15

अद्य पाण्डुसुता: सर्वे वासुदेव: ससात्यकि: । पज्चालाश्षेदयश्नैव द्रौपदेयाश्ष सर्वश:,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“今日我必战胜般度诸子——并及婆苏提婆与萨底耆,旁遮罗人与设陀耶人,以及德劳帕蒂诸子,无一遗漏。杜尔约陀那,我以真实告汝:毫无疑虑。”

Verse 16

धृष्टद्युम्न: शिखण्डी च सर्वे चापि प्रभद्रका: । विक्रमं मम पश्यन्तु धनुषश्चन महद्‌ बलम्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“让德里什塔丢姆那、尸建陀因以及一切普罗婆陀罗迦,见识我的武勇与我弓之大力。杜尔约陀那,我以真实告汝:毫无疑虑。”

Verse 17

आज सब लोग मुझे रणभूमिमें निर्भय विचरते देखें, आज समस्त पाण्डव, श्रीकृष्ण, सात्यकि, पांचाल और चेदिदेशके योद्धा, द्रौपदीके सभी पुत्र, धृष्टद्युम्न, शिखण्डी तथा समस्त प्रभद्रकगण मेरा पराक्रम तथा मेरे धनुषका महान्‌ बल अपनी आँखों देख लें ।। १४ १५ || लाघवं चास्त्रवीर्य च भुजयोश्व बल॑ युधि । अद्य पश्यन्तु मे पार्था: सिद्धाश्चन सह चारणै:,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” प्रतीकारपरा भूत्वा चेष्टन्तां विविधा: क्रिया: । आज कुन्तीके सभी पुत्र तथा चारणोंसहित सिद्धगण भी युद्धमें मेरी फुर्ती, अस्त्र-बल और बाहुबलको देखें। मेरी दोनों भुजाओंमें जैसा बल है तथा अस्त्रोंका मुझे जैसा ज्ञान है, उसके अनुसार आज मेरा पराक्रम देखकर पाण्डव महारथी उसके प्रतीकारमें तत्पर हो नाना प्रकारके कार्योंके लिये सचेष्ट हों

三阇耶说道:“让普利塔之子今日见我在战中的迅捷、兵器之威与臂力之强;让诸悉达并诸查罗那亦为见证。杜尔约陀那,我以真实告汝:毫无疑虑。让般度五子之诸豪杰,为欲制我,施展种种多般对策。”

Verse 18

यादृशं मे बल॑ बाह्दो: सम्पदस्त्रेषु या च मे । अद्य मे विक्रमं दृष्टवा पाण्डवानां महारथा:,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“念及我臂力之强与我对诸兵器之精熟,今日般度诸大车战士在见我武勇之后,必将知晓。杜尔约陀那,我以真实告汝:毫无疑虑。”

Verse 19

अद्य सैन्यानि पाण्डूनां द्रावयिष्ये समन्‍्तत:,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” कुरुनन्दन! आज मैं पाण्डवोंकी सेनाओंको चारों ओर भगा दूँगा। प्रभो! युद्धस्थलमें तुम्हारा प्रिय करनेके लिये आज मैं द्रोणाचार्य, भीष्म तथा सूतपुत्र कर्णसे भी बढ़कर पराक्रम दिखाता और जूझता हुआ रणभूमिमें सब ओर विचरण करूँगा

三阇耶说道:“今日我必使般度军旅四面溃散奔逃。杜尔约陀那,我以真实告汝:毫无疑虑。”

Verse 20

द्रोणभीष्मावति विभो सूतपुत्र॑ च संयुगे । विचरिष्ये रणे युध्यन्‌ प्रियार्थ तव कौरव,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” कुरुनन्दन! आज मैं पाण्डवोंकी सेनाओंको चारों ओर भगा दूँगा। प्रभो! युद्धस्थलमें तुम्हारा प्रिय करनेके लिये आज मैं द्रोणाचार्य, भीष्म तथा सूतपुत्र कर्णसे भी बढ़कर पराक्रम दिखाता और जूझता हुआ रणभूमिमें सब ओर विचरण करूँगा

三阇耶说道:“噢,大能者,噢,俱卢族的勇士!为取悦于你,我将在战场上奋战驰骋,于战争中纵横往来,显现出甚至胜过德罗那与毗湿摩、亦胜过车夫之子迦尔纳的英勇。此言我以真实宣告,噢,难敌——毫无疑虑。”

Verse 21

संजय उवाच अभिषिक्ते तथा शल्ये तव सैन्येषु मानद । न कर्णव्यसनं किंचिन्मेनिरे तत्र भारत,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” संजय कहते हैं--मानद! भरतनन्दन! इस प्रकार आपकी सेनाओंमें राजा शल्यका अभिषेक होनेपर समस्त योद्धाओंको कर्णके मारे जानेका थोड़ा-सा भी दुःख नहीं रह गया

三阇耶说道:“噢,赐予荣誉者,噢,婆罗多的后裔!当沙利耶依礼受灌顶(被立为统帅)置于你军中之时,那里的战士们对迦尔纳的厄运(他的死亡)竟连一丝哀伤也没有。”

Verse 22

हृष्टा: सुमनसश्वलैव बभूवुस्तत्र सैनिका: । मेनिरे निहतान्‌ पार्थान्‌ मद्रराजवशं गतान्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” वे सब-के-सब प्रसन्नचित्त होकर हर्षसे भर गये और यह मानने लगे कि कुन्तीके पुत्र मद्रराज शल्यके वशमें पड़कर अवश्य ही मारे जायँगे

三阇耶说道:于是士卒们欢欣鼓舞,心情畅快。他们断定,昆蒂之子——般度五子——既已落入摩陀罗王沙利耶的掌控之下,必将被杀无疑。“此言我以真实告你,噢,难敌——毫无疑虑。”

Verse 23

प्रहर्ष प्राप्प सेना तु तावकी भरतर्षभ । तां रात्रिमुषिता सुप्ता हर्षचित्ता च साभवत्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” भरतश्रेष्ठ] आपकी सेना महान्‌ हर्ष पाकर उस रातमें वहीं रही और सो गयी। उसके मनमें बड़ा उत्साह था

三阇耶说道:“噢,婆罗多族中的雄牛!你的军队得了极大的振奋,那一夜便留在原地安睡;其心充满自信与欢喜。”

Verse 24

सैन्यस्य तव त॑ शब्दं श्रुत्वा राजा युधिष्ठिर: । वार्ष्णेयमब्रवीद्‌ वाक्‍्यं सर्वक्षत्रस्य पश्यत:,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” उस समय आपकी सेनाका वह महान्‌ हर्षनाद सुनकर राजा युधिष्ठिरने समस्त क्षत्रियोंके सामने ही भगवान्‌ श्रीकृष्णसे कहा--

三阇耶说道:听到你军中那震天的呼号,坚战王(尤提士提罗)在众刹帝利面前,向瓦尔什涅耶(奎师那)开口说道。

Verse 25

मद्रराज: कृत: शल्यो धार्तराष्ट्रेण माधव । सेनापति्महेष्वास: सर्वसैन्येषु पूजित:,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“噢,摩达婆啊,摩陀罗王沙利耶已被持国之子(难敌)任命为全军统帅——他是卓绝的弓手,受诸军敬仰。我对你所言皆为真实,难敌啊,毫无疑虑。”

Verse 26

“माधव! धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधनने समस्त सेनाओंद्वारा सम्मानित महाधनुर्धर मद्रराज शल्यको सेनापति बनाया है ।। एतजऊज्ञात्वा यथाभूतं कुरु माधव यत्क्षमम्‌ । भवान्‌ नेता च गोप्ता च विधत्स्व यदनन्तरम्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” “माधव! यह यथार्थ रूपसे जानकर आप जो उचित हो वैसा करें; क्योंकि आप ही हमारे नेता और संरक्षक हैं। इसलिये अब जो कार्य आवश्यक हो, उसका सम्पादन कीजिये'

三阇耶说道:“噢,摩达婆啊,持国之子难敌已立摩陀罗王沙利耶为统帅——大弓手,受全军敬礼。既知其事如实如此,摩达婆啊,就做合宜之举。你是我们的领袖与护持者,因此请筹划接下来必须完成之事。” “(沙利耶对难敌宣言:)‘在战场上,我将征服昆提诸子,亦将击败前来迎战的苏摩迦众。对此毫无疑虑。我必为你之统帅,并布下敌军不可逾越、不可冲破的战阵。难敌啊,我以真实告你——绝无疑惑。’”

Verse 27

तमब्रवीन्महाराज वासुदेवो जनाधिपम्‌ । आर्तायनिमहं जाने यथातत्त्वेन भारत,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” महाराज! तब भगवान्‌ श्रीकृष्णने राजासे कहा--'भारत! मैं ऋतायनकुमार राजा शल्यको अच्छी तरह जानता हूँ

三阇耶说道:大王啊,婆苏提婆(圣克里希那)对人主说道:“噢,婆罗多啊,我深知阿尔塔耶尼(沙利耶)其人,正如其真实本性。”

Verse 28

वीर्यवांश्व महातेजा महात्मा च विशेषत: । कृती च चित्रयोधी च संयुक्तो लाघवेन च,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” “वे बलशाली, महातेजस्वी, महामनस्वी, विद्वान, विचित्र युद्ध करनेवाले और शीघ्रतापूर्वक अस्त्र-शस्त्रोंका प्रयोग करनेवाले हैं

三阇耶说道:“他具足勇力与大光辉;尤为可贵的是,他心志高远。他技艺圆满,善以奇妙多变之战法应敌,行事迅捷。我所宣告皆为真实,难敌啊——毫无疑虑。”

Verse 29

यादृग्‌ भीष्मस्तथा द्रोणो यादृक्‌ कर्णश्न संयुगे । तादृशस्तद्विशिष्टो वा मद्रराजो मतो मम,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” 'भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण--ये सब लोग युद्धमें जैसे पराक्रमी थे, वैसे ही या उनसे भी बढ़कर पराक्रमी मैं मद्रराज शल्यको मानता हूँ

三阇耶说道:“如毗湿摩、如德罗那、如迦尔那在战阵中那般骁勇——摩陀罗王沙利耶亦复如是,甚至或更胜于彼:此乃我之判断。我所宣告皆为真实,难敌啊——毫无疑虑。”

Verse 30

युद्धयमानस्य तस्याहं चिन्तयानश्व भारत । योद्धारं नाधिगच्छामि तुल्यरूपं जनाधिप,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“噢,婆罗多啊!当我思量他在战阵中奋战之时,噢,大王,我寻不见有任何武士在形貌与勇力上能与之比肩。我以此为真告于你,杜罗约陀那——毫无疑虑。”

Verse 31

'भारत! नरेश्वर! मैं बहुत सोचनेपर भी युद्धपरायण शल्यके अनुरूप दूसरे किसी योद्धाको नहीं पा रहा हूँ |। शिखण्डयर्जुनभीमानां सात्वतस्य च भारत | धृष्टद्युम्नस्यथ च तथा बलेनाभ्यधिको रणे,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” “'भरतनन्दन! शिखण्डी, अर्जुन, भीम, सात्यकि और धृष्टद्युम्नसे भी वे रणभूमिमें अधिक बलशाली हैं

三阇耶说道:“噢,婆罗多啊,噢,大王!纵使我反复思量,也找不到另一位战士能与沙利耶在对战斗的专注与执着上相匹敌。噢,婆罗多啊,在战场之力上,他胜过尸佉ṇḍ因、阿周那、毗摩、萨底耶吉与德里什塔丢摩那。我以此为真告于你,杜罗约陀那——毫无疑虑。”

Verse 32

मद्रराजो महाराज सिंहद्विरदविक्रम: । विचरिष्यत्यभी: काले काल: क्रुद्ध: प्रजास्विव,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” “महाराज! सिंह और हाथीके समान पराक्रमी मद्रराज शल्य प्रलयकालमें प्रजापर कुपित हुए कालके समान निर्भय होकर रणभूमिमें विचरेंगे

三阇耶说道:“噢,大王!摩陀罗之主沙利耶,勇猛如狮如象,将无所畏惧地驰骋战场,犹如劫尽之时的‘时’(迦罗),对众生震怒。我以此为真告于你,杜罗约陀那;毫无疑虑。”

Verse 33

तस्याद्य न प्रपश्यामि प्रतियोद्धारमाहवे । त्वामृते पुरुषव्यात्र शार्ट्लसमविक्रमम्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” 'पुरुषसिंह! आपका पराक्रम सिंहके समान है। आज आपके सिवा युद्धस्थलमें दूसरेको ऐसा नहीं देखता, जो शल्यके सम्मुख होकर युद्ध कर सके

三阇耶说道:“今日此战,我看不见有人能真正立为与他相抗的斗将——唯有你,噢,人中之虎,你的勇力如猛兽一般。杜罗约陀那,我所言皆真;毫无疑虑。”

Verse 34

सदेवलोके कृत्स्ने5स्मिन्‌ नान्यस्त्वत्त: पुमान्‌ भवेत्‌ । मद्रराजं रणे क्रुद्धं यो हन्यात्‌ कुरुनन्दन,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” “कुरुनन्दन! देवताओंसहित इस सम्पूर्ण जगत्‌में आपके सिवा दूसरा कोई ऐसा पुरुष नहीं है, जो रणमें कुपित हुए मद्रराज शल्यको मार सके

三阇耶说道:“在这整个世界,连同诸天在内,除你之外再无一人能在战阵中、当摩陀罗王沙利耶怒起之时将其诛杀,噢,俱卢之喜。此乃我告于你的真言,杜罗约陀那——毫无疑虑。”

Verse 35

अहन्यहनि युध्यन्तं क्षोभयन्तं बल॑ तव । तस्माज्जहि रणे शल्यं मघवानिव शम्बरम्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” “इसलिये प्रतिदिन समरांगणमें जूझते और आपकी सेनाको विक्षुब्ध करते हुए राजा शल्यको युद्धमें आप उसी प्रकार मार डालिये, जैसे इन्द्रने शम्बरासुरका वध किया था

三阇耶说道:“他日日鏖战,使你的军势动荡不安;因此当在战场上诛杀摩陀罗王沙利耶——正如摩伽梵(因陀罗)诛灭阿修罗商婆罗一般。都利约陀那,我所言皆真,毫无疑虑。”

Verse 36

अजेयश्चाप्यसौ वीरो धार्तराष्ट्रण सत्कृत: । तवैव हि जयो नून॑ हते मद्रेश्वरे युधि,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” “वीर शल्य अजेय हैं। दुर्योधनने उनका बड़ा सम्मान किया है। युद्धमें मद्रराजके मारे जानेपर निश्चय आपकी ही जीत होगी

三阇耶说道:“那位英雄(沙利耶)确实不可战胜,且已受持国之子以礼敬重。诚然,一旦摩陀罗之主在战中被杀,你的胜利便必定无疑。我以真实告你,都利约陀那——毫无疑虑。”

Verse 37

तस्मिन्‌ हते हतं सर्व धार्तराष्ट्रबलं महत्‌ । एतच्छुत्वा महाराज वचन मम साम्प्रतम्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” “महाराज! कुन्तीकुमार! उनके मारे जानेपर आप समझ लें कि दुर्योधनकी सारी विशाल सेना ही मार डाली गयी। इस समय मेरी इस बातको सुनकर महारथी मद्रराजपर चढ़ाई कीजिये और महाबाहो! जैसे इन्द्रने नमुचिका वध किया था, उसी प्रकार आप भी उन्हें मार डालिये

三阇耶说道:“他一旦被杀,当知持国一族那浩大军势也等同尽灭。大王,请此刻听我之言:都利约陀那,我所言皆真,毫无疑虑。”

Verse 38

प्रत्युद्याहि रणे पार्थ मद्रराज॑ महारथम्‌ । जहि चैनं महाबाहो वासवो नमुचिं यथा,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” “महाराज! कुन्तीकुमार! उनके मारे जानेपर आप समझ लें कि दुर्योधनकी सारी विशाल सेना ही मार डाली गयी। इस समय मेरी इस बातको सुनकर महारथी मद्रराजपर चढ़ाई कीजिये और महाबाहो! जैसे इन्द्रने नमुचिका वध किया था, उसी प्रकार आप भी उन्हें मार डालिये

三阇耶说道:“噢,帕尔塔,出阵迎战摩陀罗王——那位大车战士。大臂者啊,击杀他吧,如同婆娑婆(因陀罗)诛灭那牟支一般。我以真实告你,都利约陀那——毫无疑虑。”

Verse 39

न चैवात्र दया कार्या मातुलो<यं ममेति वै । क्षत्रधर्म पुरस्कृत्य जहि मद्रजनेश्वरम्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” 'ये मेरे मामा हैं" ऐसा समझकर आपको उनपर दया नहीं करनी चाहिये। आप क्षत्रियरधर्मको सामने रखते हुए मद्रराज शल्यको मार डालें

三阇耶说道:“此处不可因念‘他是我的舅父’而生怜悯。以刹帝利之法为先,当诛沙利耶——摩陀罗民之主。都利约陀那,我所言皆真,毫无疑虑。”

Verse 40

द्रोणभीष्मार्णवं तीर्त्वा कर्णपातालसम्भवम्‌ | मा निमज्जस्व सगण: शल्यमासाद्य गोष्पदम्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” 'भीष्म, द्रोण और कर्णरूपी महासागरको पार करके आप अपने सेवकोंसहित शल्यरूपी गायकी खुरीमें न डूब जाइये

三阇耶说道:“你既已渡过德罗那与毗湿摩之海——其深渊由迦尔那而生——切莫与你的随从一道,在抵达沙利耶时反而沉没;与前者相比,他不过如牛蹄印中的一洼浅水。杜尔约陀那,我以真实告你:毫无疑虑。”

Verse 41

यच्च ते तपसो वीर्य यच्च क्षात्रं बल॑ं तव | तद्‌ दर्शय रणे सर्व जहि चैनं महारथम्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” “राजन! आपका जो तपोबल और क्षात्रबल है, वह सब रणभूमिमें दिखाइये और इन महारथी शल्यको मार डालिये'

三阇耶说道:“你由苦行所得的威力,你作为刹帝利战士所具的力量——都当在战场上尽数显现。击杀这位大车战士。杜尔约陀那,我以真实告你:毫无疑虑。”

Verse 42

एतावदुकक्‍्त्वा वचनं केशव: परवीरहा । जगाम शिबिरं सायं पूज्यमानो5थ पाण्डवै:,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” शत्रुवीरोंका संहार करनेवाले भगवान्‌ श्रीकृष्ण यह बात कहकर सायंकाल पाण्डवोंसे सम्मानित हो अपने शिबिरमें चले गये

三阇耶说道:说罢此言,克舍婆——诛灭敌方勇士者——于傍晚回到自己的营帐,受般度诸子礼敬。“杜尔约陀那,我如此告你皆为真实;毫无疑虑。”

Verse 43

केशवे तु तदा याते धर्मपुत्रो युधिष्ठिर: । विसृज्य सर्वान्‌ भ्रातृश्व पज्चालानथ सोमकान्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:当时克舍婆离去之后,法子犹提施提罗——遣散了诸弟,又遣散了旁遮罗人,继而遣散了苏摩迦人——便以真实无疑之语对杜尔约陀那说道。他宣称:即便面对昆提的诸子以及挺身而出的苏摩迦众,他也将在战场上取胜;他将成为杜尔约陀那的统帅,布置一座敌军无法逾越的战阵。于是他断言:此言皆真,毫无不定。

Verse 44

सुष्वाप रजनीं तां तु विशल्य इव कुञ्जर: । श्रीकृष्णके चले जानेपर उस समय धर्मपुत्र युधिष्ठिरने अपने सब भाइयों तथा पांचालों और सोमकोंको भी विदा करके रातमें अंकुशरहित हाथीके समान शयन किया ।। ते च सर्वे महेष्वासा: पञ्चाला: पाण्डवास्तथा,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“那一夜,他安睡如同大象拔去镖矢之痛——无扰而自若。”

Verse 45

गतज्वरं महेष्वासं तीर्णपारं महारथम्‌,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” माननीय नरेश! सूतपुत्र कर्णके मारे जानेसे विजय पाकर महान्‌ धनुष एवं विशाल रथोंसे सुशोभित पाण्डव-सेना बहुत प्रसन्न हुई थी, मानो वह युद्धसे पार होकर निश्रिन्त हो गयी हो

三阇耶说道:“这位强大的神射手,这位伟大的车战勇士,已摆脱了焦灼的躁动,越过了危急关头。我以真实告知你,杜尔约陀那——毫无疑虑。”

Verse 46

बभूव पाण्डवेयानां सैन्यं च मुदितं नूप । सूतपुत्रस्य निधने जयं लब्ध्वा च मारिष,इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है” माननीय नरेश! सूतपुत्र कर्णके मारे जानेसे विजय पाकर महान्‌ धनुष एवं विशाल रथोंसे सुशोभित पाण्डव-सेना बहुत प्रसन्न हुई थी, मानो वह युद्धसे पार होकर निश्रिन्त हो गयी हो

三阇耶说道:“大王啊,般度诸子的军队欢欣鼓舞。因为车夫之子(迦尔纳)陨落之后,他们得胜而喜,仿佛已越过战阵之险。故我以真实告知你,杜尔约陀那——毫无疑虑。”

Verse 47

इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“因此我以真实告知你,杜尔约陀那——对此毫无疑虑。”

Verse 48

इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“我如此陈明真实,杜尔约陀那——毫无疑虑。”

Verse 49

इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“我如此告知你真实,杜尔约陀那——毫无疑虑。”

Verse 50

इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“我如此说的皆为真实,哦,杜律约陀那——毫无疑虑。在战场上,我将战胜昆蒂的诸子,以及迎面而来的娑摩迦诸军。亦无疑虑:我必为你统帅诸军,布置一座敌人无法逾越的战阵(vyūha)。杜律约陀那!我对你所言皆是真实——毫无疑虑。”

Verse 51

इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“我如此说的皆为真实,哦,杜律约陀那——毫无疑虑。”此言在文脉中为先前那番夸示的必胜与统军之诺作结:誓言击败昆蒂诸子与同盟娑摩迦,执掌统帅之位,并布下不可逾越的战阵(vyūha);而史诗又屡屡以命运与达摩之运作,映照人间自信的局限。

Verse 52

इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“我对你所言皆为真实,杜律约陀那——毫无疑虑。在战场上,我将战胜昆蒂的诸子,以及迎面而来的娑摩迦诸军。亦无疑虑:我必为你统帅诸军,布置一座敌人无法逾越的战阵(vyūha)。杜律约陀那!我所言皆是真实——毫无疑虑。”

Verse 53

इति सत्य ब्रवीम्येष दुर्योधन न संशय: । “मैं रणभूमिमें कुन्तीके सभी पुत्रों और सामने आये हुए सोमकोंपर भी विजय प्राप्त कर लूँगा। इसमें भी संदेह नहीं कि मैं तुम्हारा सेनापति होऊँगा और ऐसे व्यूहका निर्माण करूँगा, जिसे शत्रु लाँघ नहीं सकेंगे। दुर्योधन! यह मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूँ। इसमें कोई संशय नहीं है”

三阇耶说道:“我对你所言皆为真实,哦,杜律约陀那——毫无疑虑。”在筹谋战事之际,此句为那份自信与决断作结:把“必然”当作言辞之兵,以稳住俱卢诸将的心志,并为进攻之策张本。

Verse 106

निखिलाः पृथिवीं सर्वा प्रशासन्तु हतद्विष: । “राजन! आप चिरंजीवी हों। सामने आये हुए शत्रुओंका संहार कर डालें। आपके बाहुबलको पाकर धुृतराष्ट्रके सभी महाबली पुत्र शत्रुओंका नाश करके सारी पृथ्वीका शासन करें

三阇耶说道:“愿持国之诸子,既灭其仇怨,统治全大地。大王啊,愿你寿命绵长;当与敌军迎面相逢,便令其尽被诛灭。倚仗你强健的臂力,愿持国那些骁勇的儿子摧毁仇敌,治理天下。”

Verse 116

मर्त्यरधर्माण इह तु किमु सृजजयसोमकान्‌ | “आप रणभूमिमें सम्पूर्ण देवताओं, असुरों और मनुष्योंको जीत सकते हैं। फिर यहाँ मरणधर्मा सूंजयों और सोमकोंपर विजय पाना कौन बड़ी बात है?”

三阇耶说:“若你能在战场上征服诸天、阿修罗以及人间勇士,那么在此击败终归一死的室利尼阇耶与娑摩迦,又算得了什么伟业?”

Verse 126

हर्ष प्राप तदा वीरो दुरापमकृतात्मभि: । उनके द्वारा इस प्रकार प्रशंसित होनेपर बलवान वीर मद्रराज शल्यको वह हर्ष प्राप्त हुआ जो अकृतात्मा (युद्धकी शिक्षासे रहित) पुरुषोंके लिये दुर्लभ है

三阇耶说:那时,这位强大的英雄获得了一种喜悦,非缺乏自制与真修之人所能企及。被部众如此称颂,摩陀罗之王沙利耶心中升起高昂的振奋,这种荣光通常不临于未加陶冶之辈。

Verse 133

निहनिष्यामि वा राजन्‌ स्वर्ग यास्यामि वा हतः । शल्यने कहा--राजन्‌! आज मैं रणभूमिमें पाण्डवों-सहित समस्त पांचालोंको मार डालूँगा या स्वयं ही मारा जाकर स्वर्गलोकमें जा पहुँचूँगा

沙利耶对国王说道:“大王!今日在战场上,我要么诛尽般度五子并尽灭诸般遮罗;要么我若被杀,便往生天界。”

Verse 183

प्रतीकारपरा भूत्वा चेष्टन्तां विविधा: क्रिया: । आज कुन्तीके सभी पुत्र तथा चारणोंसहित सिद्धगण भी युद्धमें मेरी फुर्ती, अस्त्र-बल और बाहुबलको देखें। मेरी दोनों भुजाओंमें जैसा बल है तथा अस्त्रोंका मुझे जैसा ज्ञान है, उसके अनुसार आज मेरा पराक्रम देखकर पाण्डव महारथी उसके प्रतीकारमें तत्पर हो नाना प्रकारके कार्योंके लिये सचेष्ट हों

沙利耶宣告道:“让般度的诸位豪杰备齐一切对策。今日在战阵之中,让昆蒂之子与诸恰罗那,乃至悉达众,也都见证我的迅捷、我的兵器之威与我双臂之力。凭我双臂之劲与我对诸般武器的精通,今日当使我的英勇显现,使般度的诸大车战士为求抵御而竭力奋战,施展种种谋略。”

Verse 443

कर्णस्य निधने ह्ृष्टा: सुषुपुस्तां निशां तदा । वे सभी महाधथनुर्धर पांचाल और पाण्डवयोद्धा कर्णके मारे जानेसे हर्षमें भरकर रात्रिमें सुखकी नींद सोये

三阇耶说:迦尔那被诛之后,般度诸将与般遮罗的神射手们尽皆欢欣,那一夜他们安然酣睡。

Frequently Asked Questions

The chapter frames a conduct dilemma between individual heroics and coalition duty: leaders prohibit solitary engagement and require mutual protection, redefining valor as disciplined collective responsibility.

Leadership and policy can temporarily stabilize morale, yet the narrative underscores impermanence (kṣaya) and the inevitability of consequences once prior actions have set the war’s trajectory.

No formal phalaśruti is stated; the meta-commentary appears indirectly through Saṃjaya’s framing—urging Dhṛtarāṣṭra to listen steadily to an account characterized by destruction and irreversible outcomes.