Adhyaya 57
Shalya ParvaAdhyaya 5789 Versesक्षणिक रूप से दुर्योधन के प्रहारों से पाण्डव पक्ष का मनोबल डगमगाता है, पर भीम के अचल रहने से संतुलन पुनः पाण्डवों की ओर झुकता प्रतीत होता है।

Adhyaya 57

Gadāyuddhe Kṛṣṇopadeśaḥ (Kṛṣṇa’s Counsel in the Mace-Duel) — Śalya-parva 57

Upa-parva: Gadāyuddha (Bhīma–Duryodhana Mace-Duel Episode)

Saṃjaya reports that Arjuna, observing the intensified duel between the two principal combatants, asks Kṛṣṇa to assess comparative superiority. Kṛṣṇa judges Bhīma stronger but Duryodhana more persistently trained, then argues that strict adherence to conventional combat rules may prevent Bhīma’s victory. He invokes precedents of māyā in conflict and recalls Bhīma’s dice-hall vow to break Duryodhana’s thighs, recommending a decisive strike consistent with that pledge. Arjuna then gives a covert signal by striking his own thigh, which Bhīma interprets. The duel is narrated with technical movement patterns (circular maṇḍalas and deceptive footwork), mutual exhaustion, exchanges of heavy blows, and Duryodhana’s attempt to evade. Bhīma capitalizes on the moment and strikes Duryodhana’s thighs, breaking them; Duryodhana falls, after which a sequence of ominous portents (winds, dust and blood-like rain, celestial disturbances, disquiet among beings) is described, marking the event’s cosmic and political gravity.

Chapter Arc: संजय धृतराष्ट्र से कहते हैं—भीमसेन को रणभूमि में आते देख दुर्योधन, अपने समस्त अभिमान और अंतिम आशा को समेटे, वेग से प्रत्युद्यत होता है; निर्णायक गदायुद्ध का द्वार खुलता है। → दोनों महाबली सींगवाले वृषभों की भाँति टकराते हैं; गदाओं के प्रहारों का महानिर्घोष उठता है और युद्ध इन्द्र-प्रह्लाद जैसे दैवी प्रतिद्वन्द्वियों के समान लोमहर्षक बन जाता है। रक्त से लथपथ होकर भी वे पीछे नहीं हटते; दुर्योधन की गदा वायु-वेग से घूमती देख पाण्डव-सोमक दल में भय और आशंका फैलती है। → दुर्योधन के प्रचण्ड प्रहार से भीम क्षणभर मूर्च्छित-से होकर कर्तव्य-विमूढ़ हो जाते हैं; पाण्डवों की विजय-आशा डगमगाती है। फिर निकट आकर दुर्योधन भीम के ललाट पर भीषण आघात करता है—पर भीम पर्वत-सा अचल रह जाता है; इसी क्षण आकाश में देव-अप्सराओं का हर्षनाद और पुष्पवर्षा गूँज उठती है। → भीम के अडिग रहने से पाण्डव पक्ष का टूटता मन संभलता है और यह स्पष्ट होता है कि यह द्वन्द्व केवल बल का नहीं, धैर्य और संकल्प का भी है; दोनों योद्धा रक्तरंजित होकर भी युद्ध-लय में टिके रहते हैं। → युद्ध का पलड़ा क्षण-क्षण झूलता है—भीम की स्थिरता के बाद अगला निर्णायक दाँव कौन लगाएगा, यह अनिश्चित रह जाता है।

Shlokas

Verse 1

अतड--णक+ सप्तपञ्चाशत्तमोड ध्याय: भीमसेन और दुर्योधनका गदायुद्ध संजय उवाच ततो दुर्योधनो दृष्टवा भीमसेनं तथागतम्‌ | प्रत्युद्ययावदीनात्मा वेगेन महता नदन्‌,संजय कहते हैं--राजन! तदनन्तर उदारहृदय दुर्योधनने भीमसेनको इस प्रकार आक्रमण करते देख स्वयं भी गर्जना करते हुए बड़े वेगसे आगे बढ़कर उनका सामना किया

桑阇耶说道:“大王啊!随后,杜尔约陀那见毗摩塞那如此逼近,便亲自迎上前去。其心志不摇,挟大势疾冲而出,放声咆哮。”

Verse 2

समापेततुरन्योन्यं शृद्धिणौ वृषभाविव । महानिर्घातघोष श्ष्‌ प्रहाराणामजायत,वे दोनों बड़े-बड़े सींगवाले दो साँड्रोंके समान एक-दूसरेसे भिड़ गये। उनके प्रहारोंकी आवाज महान्‌ वजपातके समान भयंकर जान पड़ती थी

桑阇耶说道:“二人相逼相撞,如同两头巨角雄牛角力相抵。他们交击的声响轰然大作,骇人如霹雳。”

Verse 3

अभवच्च तयोरय॑द्ध॑ तुमुलं लोमहर्षणम्‌ । जिगीषतोर्यथान्योन्यमिन्द्रप्रह्मादयोरिव,दुर्योधन और भीमका गदायुद्ध एक-दूसरेको जीतनेकी इच्छा रखनेवाले उन दोनोंमें इन्द्र और प्रह्नादके समान भयंकर एवं रोमांचकारी युद्ध होने लगा

桑阇耶说道:“随后,在这二人之间——各自都一心要胜过对方——爆发出一场喧腾而令人毛骨悚然的恶战,宛如因陀罗与普罗诃罗陀那般可怖的交锋。”

Verse 4

रुधिरोक्षितसर्वाड्री गदाहस्तौ मनस्विनौ । ददृशाते महात्मानौ पुष्पिताविव किशुकौ,उनके सारे अंग खूनसे लथपथ हो गये थे। हाथमें गदा लिये वे दोनों महामना मनस्वी वीर फूले हुए दो पलाश-वृक्षोंके समान दिखायी देते थे

桑阇耶说道:“那两位高魂而坚毅的勇士,手执钉锤,周身肢体尽被鲜血浸染;他们看上去宛如两株盛放的吉舒迦(帕拉沙)花树——在杀伐之中呈现出凄厉而壮丽的光彩。”

Verse 5

तथा तस्मिन्‌ महायुद्धे वर्तमाने सुदारुणे । खटद्योतसंघैरिव खं दर्शनीयं व्यरोचत

三阇耶说道:当那场可怖而惨烈的大决战正酣之时,苍穹却闪耀出一种奇异而夺目的美,仿佛布满了成群的萤火。

Verse 6

उस अत्यन्त भयंकर महायुद्धके चालू होनेपर गदाओंके आघातसे आगकी चिनगारियाँ छूटने लगीं। वे आकाशमें जुगनुओंके दलके समान जान पड़ती थीं और उनसे वहाँके आकाशकी दर्शनीय शोभा हो रही थी ।। तथा तस्मिन्‌ वर्तमाने संकुले तुमुले भूशम्‌ । उभावपि परिश्रान्तौ युध्यमानावरिंदमौ

当那极其可怖的大决战展开之时,铁棒相击迸出火星。那些火花升上天空,宛如萤火成群,使那片苍穹竟也显得可观。就在这纷乱喧腾之中,两位摧敌的勇士一边鏖战,一边也都疲惫不堪。

Verse 7

इस प्रकार चलते हुए उस अत्यन्त भयंकर घमासान युद्धमें लड़ते-लड़ते वे दोनों शत्रुदमन वीर बहुत थक गये ।। तौ मुहूर्त समाश्वस्य पुनरेव परंतपौ । सम्प्रहारयतां चित्रे सम्प्रगृह्म गदे शुभे,फिर उन दोनोंने दो घड़ीतक विश्राम किया। इसके बाद शत्रुओंको संताप देनेवाले वे दोनों योद्धा फिर विचित्र एवं सुन्दर गदाएँ हाथमें लेकर एक-दूसरेपर प्रहार करने लगे

就这样,在那极其可怖的混战之中,两位摧敌的勇士鏖战不息,终于疲惫至极。二人稍作喘息,旋即又执起华美而纹彩斑斓的铁棒,再度相互猛击。

Verse 8

तौतु दृष्टवा महावीर्यो समा श्चस्तौ नरर्षभौ । बलिनौ वारणोौ यद्वद्‌ वासितार्थे मदोत्कटौ,उन समान बलशाली महापराक्रमी नरश्रेष्ठ वीरोंने विश्राम करके पुनः हाथमें गदा ले ली और मैथुनकी इच्छावाली हथिनीके लिये लड़नेवाले दो बलवान एवं मदोन्मत्त गजराजोंके समान पुनः युद्ध आरम्भ कर दिया है, यह देखकर देवता, गन्धर्व और मनुष्य सभी अत्यन्त आश्चर्यसे चकित हो उठे

三阇耶说道:见那两位大勇之士——人中雄牛——力势相当,喘息既定又复执棒再战,观者只觉他们如两头强悍的象王,因发情而狂躁,为争一头愿受配偶的母象而相斗。目睹这再起的冲撞,诸天、乾闼婆与人间众生无不惊叹失色。

Verse 9

समानवीर्यो सम्प्रेक्ष्य प्रगृहीतगदावु भौ । विस्मयं परमं जम्मुर्देवगन्धर्वमानवा:,उन समान बलशाली महापराक्रमी नरश्रेष्ठ वीरोंने विश्राम करके पुनः हाथमें गदा ले ली और मैथुनकी इच्छावाली हथिनीके लिये लड़नेवाले दो बलवान एवं मदोन्मत्त गजराजोंके समान पुनः युद्ध आरम्भ कर दिया है, यह देखकर देवता, गन्धर्व और मनुष्य सभी अत्यन्त आश्चर्यसे चकित हो उठे

三阇耶说道:见那两人勇力相等,皆复执棒在手,诸天、乾闼婆与人间众生无不生起极大的惊异。稍作停歇之后,那两位首屈一指的英雄又以新的决意再续决斗——如两头强壮而狂躁的象王,为争一头愿受配偶的母象而相搏。

Verse 10

प्रगृहीतगदौ दृष्टवा दुर्योधनवृकोदरी । संशय: सर्वभूतानां विजये समपद्यत,दुर्योधन और भीमसेनको पुनः गदा उठाये देख उनमेंसे किसी एककी विजयके सम्बन्धमें समस्त प्राणियोंके हृदयमें संशय उत्पन्न हो गया

桑阇耶说道:见到杜尤陀那与弗利科达罗(毗摩)再度握起钉锤,万有众生心中皆生疑惧:二人之中,究竟谁将得胜?

Verse 11

समागम्य ततो भूयो भ्रातरौ बलिनां वरौ । अन्योन्यस्यान्तरप्रेप्सू प्रचक्राते$न्तरं प्रति,बलवानोंमें श्रेष्ठ उन दोनों भाइयोंमें जब पुनः भिड़न्त हुई तो दोनों ही दोनोंके चूकनेका अवसर देखते हुए पैंतरे बदलने लगे

桑阇耶说道:随后,那两位兄弟——强者之中的翘楚——又一次相逢交战。二人各怀心机,欲觅对方破绽,遂变换步法,环绕游走,等待那一瞬可乘之隙以定胜负。

Verse 12

यमदण्डोपमां गुर्वीमिन्द्राशनिमिवोद्यताम्‌ । ददृशुः प्रेक्षका राजन्‌ रौद्रीं विशसनीं गदाम्‌,राजन्‌! उस समय युद्धस्थलमें जब भीमसेन अपनी गदा घुमाने लगे, तब दर्शकोंने देखा, उनकी भारी गदा यमदण्डके समान भयंकर है। वह इन्द्रके वज़के समान ऊपर उठी हुई है और शत्रुको छिन्न-भिन्न कर डालनेमें समर्थ है। गदा घुमाते समय उसकी घोर एवं भयानक आवाज वहाँ दो घड़ीतक गूँजती रही

桑阇耶说道:“大王啊,观战者看见那柄巨大的钉锤——沉重可怖如阎摩之杖,高举如因陀罗之金刚雷霆——凶猛嗜杀,足以将敌人撕裂粉碎。”

Verse 13

आविद्धयतो गदां तस्य भीमसेनस्य संयुगे । शब्द: सुतुमुलो घोरो मुहूर्त समपद्यत,राजन्‌! उस समय युद्धस्थलमें जब भीमसेन अपनी गदा घुमाने लगे, तब दर्शकोंने देखा, उनकी भारी गदा यमदण्डके समान भयंकर है। वह इन्द्रके वज़के समान ऊपर उठी हुई है और शत्रुको छिन्न-भिन्न कर डालनेमें समर्थ है। गदा घुमाते समय उसकी घोर एवं भयानक आवाज वहाँ दो घड़ीतक गूँजती रही

桑阇耶说道:“大王啊,当毗摩塞那在战阵中挥旋钉锤时,骤然响起震天动地、令人胆寒的轰鸣,并持续了片刻。”

Verse 14

आविद्धयन्तमेरिं प्रेक्ष्य धार्तराष्ट्रो<थ पाण्डवम्‌ । गदामतुलवेगां तां विस्मित: सम्बभूव ह,आपका पुत्र दुर्योधन अपने शत्रु पाण्डुकुमार भीमसेनको वह अनुपम वेगशालिनी गदा घुमाते देख आश्र्यमें पड़ गया

桑阇耶说道:见那般度婆——自己的仇敌——挥旋那柄疾速无比的钉锤,持国之子(杜尤陀那)也不由得惊愕失色。

Verse 15

चरंश्व विविधान्‌ मार्गान्‌ मण्डलानि च भारत । अशोभत तदा वीरो भूय एव वृकोदर:

三阇耶说道:“噢,婆罗多啊!那时英雄弗利拘陀罗沿着种种路数驰走,又回旋成圈,愈发显得光彩夺目。”

Verse 16

भरतनन्दन! वीर भीमसेन भाँति-भाँतिके मार्गों और मण्डलोंका प्रदर्शन करते हुए पुनः बड़ी शोभा पाने लगे ।। तौ परस्परमासाद्य यत्तावन्योन्यरक्षणे । मार्जाराविव भक्षार्थ ततक्षाते मुहुर्मुहु:,वे दोनों परस्पर भिड़कर एक-दूसरेसे अपनी रक्षाके लिये प्रयत्नशील हो रोटीके टुकड़ोंके लिये लड़नेवाले दो बिलावोंके समान बारंबार आघात-प्रतिघात कर रहे थे

三阇耶说道:“噢,婆罗多的后裔啊!英勇的毗摩塞那施展千变万化的步法与回旋之势,再次以盛大光辉照耀战场。两位战士相互逼近,各自竭力防护自身;如两只猫为一口食物争斗,他们一次又一次地击打与反击。”

Verse 17

अचरदू भीमसेनस्तु मार्गान्‌ बहुविधांस्तथा । मण्डलानि विचित्राणि गतप्रत्यागतानि च

三阇耶说道:于是毗摩塞那在战场上以多种路数驰走,画出繁复多变的回旋之圈——进而复退——在战争的喧乱之中仍显出收放自如的武艺。

Verse 18

उस समय भीमसेन नाना प्रकारके मार्ग और विचित्र मण्डल दिखाने लगे। वे कभी शत्रुके सम्मुख आगे बढ़ते और कभी उसका सामना करते हुए ही पीछे हट आते थे ।। अस्त्रयन्त्राणि चित्राणि स्थानानि विविधानि च । परिमोक्षं प्रहाराणां वर्जन॑ं परिधावनम्‌,विचित्र अस्त्र-यन्त्रों और भाँति-भाँतिके स्थानोंका प्रदर्शन करते हुए वे दोनों शत्रुके प्रहारोंसे अपनेको बचाते, विपक्षीके प्रहारको व्यर्थ कर देते और दायें-बायें दौड़ लगाते थे

三阇耶说道:当时毗摩塞那施展种种战术步路与奇巧回旋之阵;时而迎敌直进,时而仍面向敌人而后撤。他又显出奇妙的兵器机巧与多样的站位——躲避来袭之击,使对手的攻势落空,并在战场上左右穿梭往返。

Verse 19

अभिद्रवणमाक्षेपमवस्थानं सविग्रहम्‌ । परिवर्तनसंवर्तमवप्लुतमुपप्लुतम्‌,कभी वेगसे एक-दूसरेके सामने जाते, कभी विरोधीको गिरानेकी चेष्टा करते, कभी स्थिरभावसे खड़े होते, कभी गिरे हुए शत्रुके उठनेपर पुनः उसके साथ युद्ध करते, कभी विरोधीपर प्रहार करनेके लिये चक्कर काटते, कभी शत्रुके बढ़ावको रोक देते, कभी विपक्षीके प्रहारको विफल करनेके लिये झुककर निकल जाते, कभी उछलते-कूदते, कभी निकट आकर गदाका प्रहार करते और कभी लौटकर पीछेकी ओर किये हुए हाथसे शत्रुपर आघात करते थे। दोनों ही गदायुद्धके विशेषज्ञ थे और इस प्रकार पैंतरे बदलते हुए एक- दूसरेपर चोट करते थे

三阇耶说道:他们不断变换战法——直冲相向,抛击与猛击;沉着立定,以势相抗;敌人倒下又起时再度交锋;绕行寻隙以求一击;遏止对手的推进;俯身闪避,使来击落空;腾跃跳掠;逼近以铁杵重击,继而转身以反臂回挥再下一击。二人皆为杵战宗师,凭着层出不穷的身法与机变,彼此都被打得负伤。

Verse 20

उपन्यस्तमपन्यस्तं गदायुद्धविशारदौ । एवं तौ विचरन्तौ तु परस्परमविध्यताम्‌,कभी वेगसे एक-दूसरेके सामने जाते, कभी विरोधीको गिरानेकी चेष्टा करते, कभी स्थिरभावसे खड़े होते, कभी गिरे हुए शत्रुके उठनेपर पुनः उसके साथ युद्ध करते, कभी विरोधीपर प्रहार करनेके लिये चक्कर काटते, कभी शत्रुके बढ़ावको रोक देते, कभी विपक्षीके प्रहारको विफल करनेके लिये झुककर निकल जाते, कभी उछलते-कूदते, कभी निकट आकर गदाका प्रहार करते और कभी लौटकर पीछेकी ओर किये हुए हाथसे शत्रुपर आघात करते थे। दोनों ही गदायुद्धके विशेषज्ञ थे और इस प्रकार पैंतरे बदलते हुए एक- दूसरेपर चोट करते थे

三阇耶说道:二人皆为棍槌格斗之术的宗师,不断变换身势——时而立守,时而撤守——在这般游走之间,彼此一击又一击地相互攻打。此景所彰显的并非狂怒,而是严整的武艺:他们在战争的暴烈之中,以克制的技法、持久的意志与沉着的掌控来寻求胜机。

Verse 21

वज्चयानौ पुनश्चैव चेरतु: कुरुसत्तमौ । विक्रीडन्ती सुबलिनौ मण्डलानि विचेरतु:,कुरुकुलके वे दोनों श्रेष्ठ और बलवान वीर विपक्षीको चकमा देते हुए बारंबार युद्धके खेल दिखाते तथा पैंतरे बदलते थे

三阇耶说道:那两位库鲁族中最卓绝的英雄一次又一次地移动,在交锋中环绕而行。二人强健而敏捷,厮杀宛如一场阴沉的竞技——佯攻、换势、踏出战圈,以机诈求胜、彼此牵制。此偈凸显战士之工:守礼的步法与战术的欺敌,皆在战场既定法度之内。

Verse 22

तौ दर्शयन्तौ समरे युद्धक्रीडां समन्तत: । गदाभ्यां सहसान्योन्यमाजघ्नतुररिंदमौ,समरांगणमें सब ओर युद्धकी क्रीडाका प्रदर्शन करते हुए उन दोनों शत्रुदमन वीरोंने सहसा अपनी गदाओंद्वारा एक-दूसरेपर प्रहार किया

三阇耶说道:当他们在战场四方尽显那凶烈的“战争之戏”时,那两位降敌的英雄忽然各执槌棒猛击对方——使厮杀化作一幕森然的景象,武艺与决心在毫不留情中受试炼。

Verse 23

परस्परं समासाद्य दंष्टा भ्यां द्विरदौ यथा । अशोभेतां महाराज शोणितेन परिप्लुतो,महाराज! जैसे दो हाथी अपने दाँतोंसे परस्पर प्रहार करके लहूलुहान हो जाते हैं, उसी प्रकार वे दोनों एक-दूसरेपर चोट करके खूनसे भीगकर शोभा पाने लगे

三阇耶说道:“大王啊,他们彼此逼近,光彩宛如两头以象牙相撞的巨象——二者皆为鲜血所浸。”此喻凸显战斗的残酷对称:勇武与耐力固然显现,但那所谓“辉耀”与战争中相互创伤的道德代价不可分离。

Verse 24

एवं तदभवद्‌ युद्ध घोररूपं परंतप । परिवृत्ते5हनि क्रूरं वृत्रवासवयोरिव

三阇耶说道:于是那场战斗呈现出可怖之形,噬敌者啊。待白昼转向(将近黄昏)之时,它愈发残酷——恰如弗栗陀罗与婆娑婆(因陀罗)之间那骇人的恶战。

Verse 25

शत्रुओंको संताप देनेवाले नरेश! इस प्रकार दिनकी समाप्तिके समय उन दोनों वीरोंमें वृत्रासुर और इन्द्रके समान क्रूरतापूर्ण एवं भयंकर युद्ध होने लगा ।। गदाहस्तौ ततस्तौ तु मण्डलावस्थितौ बली । दक्षिणं मण्डलं राजन्‌ धार्तराष्ट्रोडभ्यवर्तत

三阇耶说道:随后,那两位强大的勇士手执钉锤,摆开环绕对战的阵势。大王啊,持国之子(难敌)踏入右侧之环,逼迫交锋愈加紧迫。及至日光将尽,两人之间便爆发出如弗栗陀罗阿修罗与因陀罗相斗般残酷而可怖的战斗,技法与不屈意志把决斗推向更险峻的境地。

Verse 26

तथा तु चरतस्तस्य भीमस्य रणमूर्थनि

三阇耶说道:就这样,当毗摩在战场最前沿来回驰动之时,

Verse 27

आहतस्तु ततो भीम: पुत्रेण तव भारत

三阇耶说道:随后,毗摩被你的儿子击中,婆罗多啊——此事昭示:在战争的混乱中,即便最强者也难免遭逢骤然的逆转,而个人的忠诚与执念驱动着双方的杀伐。

Verse 28

इन्द्राशनिसमां घोरां यमदण्डमिवोद्यताम्‌

三阇耶说道:“(他看见)一件可怖的兵器,宛如因陀罗的金刚雷霆,高高举起,又如阎摩的刑杖——那是不可抗拒之力与迫近死亡的象征,笼罩战场。”

Verse 29

ददृशुस्ते महाराज भीमसेनस्य तां गदाम्‌ | राजेन्द्र! दर्शकोंने भीमसेनकी उस भयंकर गदाको इन्द्रके वज्ञ और यमराजके दण्डके समान उठी हुई देखा ।। आविध्यन्तं गदां दृष्टवा भीमसेनं तवात्मज:

三阇耶说道:大王啊,众人看见毗摩军的钉锤——可怖而高举——宛如因陀罗的金刚雷霆,又如阎摩的惩罚之杖。见毗摩军挥旋那钉锤,你的儿子(难敌)凝视着他,仿佛在战场上直面即将降临的报应之力。

Verse 30

गदामारुतवेगेन तव पुत्रस्य भारत

三阇耶说道:“噢,婆罗多(持国王啊),你儿子的攻势,挥舞钉锤之速如风……”

Verse 31

स चरन्‌ विविधान्‌ मार्गान्‌ मण्डलानि च भागश:

三阇耶说道:“他沿着种种路数游走,又按分寸划出圆环与分段。”

Verse 32

आविद्धा सर्ववेगेन भीमेन महती गदा

三阇耶说道:“那巨大的钉锤被毗摩以全力掷出。”

Verse 33

आधाूतां भीमसेनेन गदां दृष्टवा सुयोधन:

三阇耶说道:“见到毗摩军(毗摩塞那)携来的钉锤,苏优陀那(难敌,杜尔约陀那)便将其看在眼里。”

Verse 34

गदामारुतवेगं हि दृष्टवा तस्य महात्मन:

三阇耶说道:“众人见那位大心勇士的强猛钉锤,疾行如风,无不为之震骇而叹服。”

Verse 35

तौ दर्शयन्तौ समरे युद्धक्रीडां समनन्‍ततः

三阇耶说道:在战阵之中,两人展现了战争之“戏”——连绵不断、毫无间隙的较量,使战场本身化作舞台,任那不息的武艺与杀伐在其上奔涌。

Verse 36

तौ परस्परमासाद्य दंष्टाभ्यां द्विरदौ यथा

三阇耶说道:二人相向逼近,迎面相撞,如两头雄象以长牙相锁——那是不肯退让的鏖战之象征,无人屈服,连那一声声撞击都成了意志的尺度。

Verse 37

अशोभेतां महाराज शोणितेन परिप्लुतौ | महाराज! जैसे दो हाथी अपने दाँतोंसे परस्पर प्रहार करके लहूलुहान हो जाते हैं, उसी प्रकार वे दोनों एक-दूसरेपर चोट करके खूनसे लथपथ हो अद्भुत शोभा पाने लगे ।। ३६३६ || एवं तदभवद्‌ युद्ध घोररूपमसंवृतम्‌

三阇耶说道:“大王啊,两人浑身浴血,却反而显出一种光辉。于是那场战斗呈现出可怖的形貌,毫无约束——一场公开而残酷的冲撞,彼此的重击只令那暴烈之行更添骇人的辉煌。”

Verse 38

दृष्टवा व्यवस्थितं भीम॑ तव पुत्रो महाबल:

三阇耶说道:见到毗摩在阵列中稳如磐石地立定,你的儿子——力大无比者——也被激起而欲应战。

Verse 39

तस्य भीमो महावेगां जाम्बूनदपरिष्कृताम्‌

三阇耶说道:随后,毗摩以惊人的猛势举起一件以阎浮那陀金精美装饰的兵器,蓄势待击——那是武者决断与战争不息奔流的写照。

Verse 40

सविस्फुलिड्ो निर्हादस्तयोस्तत्राभिघातज:

桑阇耶说道:那二人相击之处,当即迸发出雷霆般的轰鸣,火星四散飞溅——这是战阵凶猛势头的写照:技艺与怒火相撞,仿佛连战场本身也在呼号。

Verse 41

प्रादुरासीन्महाराज सृष्टयोर्वज़योरिव । महाराज! उन दोनों गदाओंके टकरानेसे भयंकर शब्द हुआ और आगकी चिनगारियाँ छूटने लगीं। उस समय ऐसा जान पड़ा, मानो दोनों ओरसे छोड़े गये दो वज्र परस्पर टकरा गये हों || ४० ई ।। वेगवत्या तया तत्र भीमसेनप्रमुक्तया

桑阇耶说道:大王啊,随即响起骇人的巨声,宛如两道霹雳被掷出而相互撞击。两柄钉头槌猛烈相击,火花四溅。就在那儿,毗摩塞那所放出的迅疾一击奔涌向前——昭示战狂之中,纯粹的蛮力与怒火足以淹没克制与劝谏。

Verse 42

निपतन्त्या महाराज पृथिवी समकम्पत । राजेन्द्र! भीमसेनकी छोड़ी हुई उस वेगवती गदाके गिरनेसे धरती डोलने लगी ।। ४१६ || तां नामृष्यत कौरव्यो गदां प्रतिहतां रणे

桑阇耶说道:大王啊,当它坠落之时,大地震颤。诸王之主啊,毗摩塞那掷出的那柄迅疾之槌落下,连地面也为之战栗。然而那位俱卢王子无法忍受:自己的槌在战斗中竟被挡住。

Verse 43

स सव्यं मण्डलं राजा उदशभ्राम्य कृतनिश्चय:

桑阇耶说道:那位国王既已下定决心,便向左回旋成圈——以审慎而明确的意志驱转战车,如同在战争的道义重压之下仍择定其路之人。

Verse 44

आजजनेने मूर्थ्नि कौन्तेयं गदया भीमवेगया । तत्पश्चात्‌ राजा दुर्योधनने अपने मनमें दृढ़ निश्चय लेकर बायें मण्डलसे चक्कर लगाते हुए अपनी भयंकर वेगशाली गदासे कुन्तीकुमार भीमसेनके मस्तकपर प्रहार किया ।। ४३ $ई || तया त्वभिहतो भीम: पुत्रेण तव पाण्डव:

桑阇耶说道:随后,杜尔约陀那王以坚决之心自励,向左回旋一圈,挥动自己那迅猛骇人的钉头槌,击中昆蒂之子毗摩塞那的头顶。于是,般度族的毗摩,被你的儿子击中了。此景凸显战争中单挑的冷峻法则:决心、技艺与力量固然受赞颂,然而暴烈依旧赤裸,后果亦极其沉重。

Verse 45

आश्चर्य चापि तद्‌ राजन्‌ सर्वसैन्यान्यपूजयन्‌

三阇耶说道:“大王啊,这确是奇事——他们竟向诸军尽皆致敬。”

Verse 46

ततो गुरुतरां दीप्तां गदां हेमपरिष्कृताम्‌

随后,他举起一柄更为沉重、炽然发光、以黄金精饰的钉锤。

Verse 47

दुर्योधनाय व्यसृजद्‌ भीमो भीमपराक्रम: । तदनन्तर भयंकर पराक्रमी भीमसेनने दुर्योधनपर अपनी सुवर्णजटित तेजस्विनी एवं बड़ी भारी गदा छोड़ी ।। त॑ं प्रहारमसम्भ्रान्तो लाघवेन महाबल:

三阇耶说道:勇力可怖的毗摩将钉锤掷向都利约陀那。紧接着,毗摩塞那——以战功骇人者——又朝都利约陀那抛出一柄巨大、光焰夺目、镶饰黄金的钉锤。然而那大力之人毫不慌乱,以迅捷身法从容应对,显出战火之中不动的心志。

Verse 48

मोघं दुर्योधनश्षक्रे तत्रा भूद्‌ विस्‍्मयो महान्‌ । परंतु महाबली दुर्योधनको इससे तनिक भी घबराहट नहीं हुई। उसने फुर्तीसे इधर-उधर होकर उस प्रहारको व्यर्थ कर दिया। यह देख वहाँ सब लोगोंको महान्‌ आश्चर्य हुआ ।। ४७ न्‍ |! सा तु मोघा गदा राजन्‌ पतन्ती भीमचोदिता,चालयामास पृथिवीं महानिर्घातनि:स्वना । राजन! भीमसेनकी चलायी हुई वह गदा जब व्यर्थ होकर गिरने लगी, उस समय उसने वज्रपातके समान महान्‌ शब्द प्रकट करके पृथ्वीको हिला दिया

三阇耶说道:“大王啊,毗摩塞那所掷之锤竟落空无功。它徒然坠地之时,轰然作响,如霹雳坠落,震得大地随那巨大的撞击之声而颤动。见此情景,在场众人无不大为惊骇。”

Verse 49

आस्थाय कौशिकान्‌ मागनित्पतन्‌ स पुन: पुनः

三阇耶说道:他执起考希迦之兵,屡屡击倒那些冲锋而来的摩伽勇士。

Verse 50

गदानिपातं प्रज्ञाय भीमसेनं च वज्चितम्‌ | वज्चयित्वा तदा भीम॑ गदया कुरुसत्तम:

三阇耶说道:他识破了铁锤下劈之势,又见毗摩塞那一瞬间受骗,那位俱卢族中最卓越者便乘机以计胜毗摩,用自己的铁锤击中了他。

Verse 51

ताडयामास संक्रुद्धो वक्षोदेशे महाबल: । जब राजा दुर्योधनने देखा कि भीमसेनकी गदा नीचे गिर गयी और उनका वार खाली गया, तब क्रोधमें भरे हुए महाबली कुरुश्रेष्ठ दुर्योधनने कौशिक मार्गोंका आश्रय ले बार-बार उछलकर भीमसेनको धोखा देकर उनकी छातीमें गदा मारी || ४९-५० है || गदया निहतो भीमो मुहामानो महारणे

三阇耶说道:他怒火中烧,那大力的战士击中了毗摩的胸膛。毗摩在这场大战之中被铁锤击中,踉跄摇晃,神志恍惚。

Verse 52

तस्मिंस्तथा वर्तमाने राजन्‌ सोमकपाण्डवा:

三阇耶说道:“大王啊,事情正如此展开之时,娑摩迦与般度族也依势继续推进。”

Verse 53

स तु तेन प्रहारेण मातड़़ इव रोषित:

而他挨了那一击,顿时怒不可遏——如狂象一般——显出战场反复点燃的暴烈之怒。

Verse 54

हस्तिवद्धस्तिसंकाशमभिदुद्राव ते सुतम्‌ उस प्रहारसे भीमसेन मतवाले हाथीकी भाँति कुपित हो उठे और जैसे एक गजराज दूसरे गजराजपर धावा करता है, उसी प्रकार उन्होंने आपके पुत्रपर आक्रमण किया ।। ५३ ई || ततस्तु तरसा भीमो गदया तनयं तव

三阇耶说道:于是毗摩被骤起的迅疾与怒火驱使,执铁锤冲向你的儿子——如狂象冲击同样如象般的对手。

Verse 55

अभिद॒द्राव वेगेन सिंहो वनगजं यथा । जैसे सिंह जंगली हाथीपर झपटता है, उसी प्रकार भीमसेन गदा लेकर बड़े वेगसे आपके पुत्रकी ओर दौड़े ।। उपसृत्य तु राजानं गदामोक्षविशारद:,राजन! गदाका प्रहार करनेमें कुशल भीमसेनने आपके पुत्र राजा दुर्योधनके निकट पहुँचकर गदा घुमायी और उसे मार डालनेके उद्देश्य्से उसकी पसलीमें आघात किया

三阇耶说道:如狮子疾扑野象,毗摩塞那手执铁棒,以极快之势冲向你的儿子。逼近都利约陀那王时,毗摩——精于棒击之术——旋转兵器,怀着要了结他的决意,猛击其肋侧。

Verse 56

आविध्यत गदां राजन्‌ समुद्दिश्य सुतं तव । अताडयदू भीमसेन: पाश्चे दुर्योधनं तदा,राजन! गदाका प्रहार करनेमें कुशल भीमसेनने आपके पुत्र राजा दुर्योधनके निकट पहुँचकर गदा घुमायी और उसे मार डालनेके उद्देश्य्से उसकी पसलीमें आघात किया

三阇耶说道:“大王啊,毗摩塞那挥旋铁棒,直指你的儿子,当即击中都利约陀那王的肋侧。”

Verse 57

स विद्दल: प्रहारेण जानुभ्यामगमन्महीम्‌ । तस्मिन्‌ कुरुकुलश्रेष्ठे जानु भ्यामवनीं गते,(ततो यमौ यमसदृशौ पराक्रमे सपार्षत: शिनितनयश्न वीर्यवान्‌ | समाह्वयन्नहमित्यभित्वरं- स्तवात्मजं समभियजुर्जयैषिण: ।। उस समय यमराजके सदृश पराक्रमी नकुल और सहदेव, दृष्टद्युम्न तथा पराक्रमी शिनिपौत्र सात्यकि--ये सब-के-सब विजयके अभिलाषी हो “मैं लड़/ूँगा, मैं लडूँगा” ऐसा कहकर बड़ी उतावलीके साथ आपके पुत्रको ललकारने और उसपर आक्रमण करने लगे। निगृहा[ तान्‌ पुनरपि पाण्डवो बली तवात्मजं स्वयमभिगम्य कालवत्‌ | चचार च व्यपगतखेदवेपथु: सुरेश्वरो नमुचिमिवोत्तमं रणे ।।) परंतु बलवान पाण्डुपुत्र भीमने उन सबको रोककर स्वयं ही आपके पुत्रपर पुनः कालके समान आक्रमण किया और खेद एवं कम्पसे रहित होकर वे रणभूमिमें उसी प्रकार विचरने लगे, जैसे देवराज इन्द्र श्रेष्ठ दैत्य नमुचिपर आक्रमण करके युद्धस्थलमें विचरण करते थे। इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि गदायुद्धे सप्तपञ्चाशत्तमो5ध्याय: ।। ५७ || इस प्रकार श्रीमह्याभारत शल्यपवके अन्तर्गत गदापर्वमें गदायुद्धविषयक सत्तावनवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/

三阇耶说道:他被那一击击碎,双膝着地,坠倒于尘土之上。当那位库鲁族的翘楚已跪伏在地时,双生子那库罗与萨诃提婆——勇力如阎摩——并与德利什塔丢摩那及尸尼之子、骁勇的萨底耆,皆求胜心切,齐齐冲上前来,各自高呼:“我来战!我来战!”,向你的儿子挑战并发动攻击。然而强大的般度之子毗摩又一次制止了他们,自己如同“时劫”(时间/死神)化身般再度逼近你的儿子;他毫无疲惫与战栗,在战场上纵横往来,恰似天帝因陀罗击倒名将魔罗那牟支之后,仍在阵中驰骋。

Verse 58

उदतिष्ठत्‌ ततो नाद: सृञ्जयानां जगत्पते । राजन! उस प्रहारसे व्याकुल हो आपका पुत्र पृथ्वीपर घुटने टेककर बैठ गया। उस कुरुकुलके श्रेष्ठ वीर दुर्योधनके घुटने टेक देनेपर सूंजयोंने बड़े जोरसे हर्षध्वनि की || ५७३ || तेषां तु निनदं श्रुत्वा सृञ्जयानां नरर्षभ:

三阇耶说道:“大地之主啊,那时斯林阇耶军中爆发出一阵巨大的吼声。大王啊,你的儿子被那一击所扰乱,跪伏于地。都利约陀那——库鲁族最杰出的勇士——如此屈膝之时,斯林阇耶众发出如雷的欢呼。”

Verse 59

अमर्षाद्‌ भरतश्रेष्ठ पुत्रस्ते समकुप्यत । उत्थाय तु महाबाहुर्महानाग इव श्वसन्‌

三阇耶说道:婆罗多族的至上者啊,你的儿子因难以忍受的愤怒而勃然大怒。那位臂力雄伟者站起身来,喘息如巨象。

Verse 60

दिधक्षत्रिव नेत्राभ्यां भीमसेनमवैक्षत । भरतश्रेष्ठ) उन सूंजयोंका वह सिंहनाद सुनकर पुरुषप्रवर आपका महाबाहु पुत्र दुर्योधन अमर्षसे कुपित हो उठा और खड़ा होकर महान्‌ सर्पके समान फुंकार करने लगा। उसने दोनों आँखोंसे भीमसेनकी ओर इस प्रकार देखा, मानो उन्हें भस्म कर डालना चाहता हो ।। ततः स भरतश्रेष्ठो गदापाणिरभिद्रवन्‌

三阇耶说道:他仿佛要以双目之火将毗摩塞那焚尽一般,目光死死钉在毗摩身上。听到那如狮子般的咆哮,你那臂力雄伟之子都利约陀那——人中之杰——被难以遏止的怒火点燃。他霍然起身,像巨蛇般嘶嘶作响,又以双眼瞪视毗摩,仿佛要把他化为灰烬。随后,那婆罗多族中最卓越的勇士手执钉锤,猛然冲上前去。

Verse 61

प्रमथिष्यन्निव शिरो भीमसेनस्य संयुगे । भरतवंशका वह श्रेष्ठ वीर हाथमें गदा लेकर युद्धस्थलमें भीमसेनका मस्तक कुचल डालनेके लिये उनकी ओर दौड़ा ।। ६० ह || स महात्मा महात्मानं भीम॑ भीमपराक्रम:

三阇耶说道:他仿佛要在鏖战之中碾碎毗摩塞那的头颅一般,那婆罗多族的首席英雄紧握钉锤,横越战场向他疾冲,意在击碎毗摩的颅骨。于是,那位大心之士、威力可怖的战士,向同样大心、其勇力本就令人战栗的毗摩猛扑而去。

Verse 62

स भूय: शुशुभे पार्थस्ताडितो गदया रणे । उद्धिन्नरुधिरो राजन्‌ प्रभिन्न इव कुज्जर:

三阇耶说道:大王啊,在战阵之中又一次被钉锤击中后,帕尔塔反而愈发光耀;鲜血迸流,宛如发情的雄象被刺穿而血涌不止。

Verse 63

राजन! रणभूमिमें उस गदाकी चोट खाकर भीमसेनके मस्तकसे रक्तकी धारा बह चली और वे मदकी धारा बहानेवाले गजराजके समान अधिक शोभा पाने लगे ।। ततो गदां वीरहणीमयोमयीं प्रगृह् वज्ाशनितुल्यनि:स्वनाम्‌ । अताडयच्छत्रुममित्रकर्षणो बलेन विक्रम्य धनंजयाग्रज:,तदनन्तर अर्जुनके बड़े भाई शत्रुसूदन भीमसेनने बलपूर्वक पराक्रम प्रकट करके वज्र और अशनिके तुल्य महान्‌ शब्द करनेवाली वीरविनाशिनी लोहमयी गदा हाथमें लेकर उसके द्वारा अपने शत्रुपर प्रहार किया

三阇耶说道:大王啊,纵然在战场上被那钉锤击中,毗摩的头上仍涌出血流;然而他反而更显雄丽,宛如发情的象王,淌出麝液。随后,檀那阇耶之兄、诛敌者毗摩塞那以强悍之勇,抓起一柄铁制钉锤——能毁灭英雄,声如金刚雷霆——并以此猛击其敌。

Verse 64

स भीमसेनाभिहतस्तवात्मज: पपात संकम्पितदेहबन्धन: । सुपुष्पितो मारुतवेगताडितो वने यथा शाल इवावघूर्णित:,भीमसेनके उस प्रहारसे आहत होकर आपके पुत्रके शरीरकी नस-नस ढीली हो गयी और वह वायुके वेगसे प्रताड़ित हो झोंके खानेवाले विकसित शालवृक्षकी भाँति काँपता हुआ पृथ्वीपर गिर पड़ा

三阇耶说道:被毗摩塞那击中后,你的儿子倒下了,躯体震颤,筋骨松脱。就像森林中的娑罗树——花开繁盛,却被狂风猛击——它摇晃翻转,终于倾倒在地。

Verse 65

ततः प्रणेदुर्जहृषुश्च॒ पाण्डवा: समीक्ष्य पुत्र पतितं क्षितौ तव । ततः सुतस्ते प्रतिलभ्य चेतनां समुत्पपात द्विरदो यथा हृदात्‌,आपके पुत्रको पृथ्वीपर पड़ा देख पाण्डव हर्षमें भरकर सिंहनाद करने लगे। इतनेहीमें आपका पुत्र होशमें आ गया और सरोवरसे निकले हुए हाथीके समान उछलकर खड़ा हो गया

三阇耶说道:于是,般度诸子见你的儿子倒卧尘土,便齐声高呼,欢腾不已。然而不久,你的儿子复得神识,猛然跃起——如巨象自湖中腾出——显出战场之上福祸翻覆何其迅疾;在那严酷的战争伦理里,胜利与危厄往往无间相随。

Verse 66

स पार्थिवो नित्यममर्षितस्तदा महारथ: शिक्षितवत््‌ परि भ्रमन्‌ । अताडयत्‌ पाण्डवमग्रत: स्थितं स विह्धलाड़्री जगतीमुपास्पृशत्‌,सदा अमर्षमें भरे रहनेवाले महारथी राजा दुर्योधनने एक शिक्षित योद्धाकी भाँति विचरते हुए अपने सामने खड़े भीमसेनपर पुन: गदाका प्रहार किया। उसकी चोट खाकर भीमसेनका सारा शरीर शिथिल हो गया और उन्होंने धरती थाम ली

三阇耶说道:随后,那位国王常怀忿恨,身为大车战士,身形游走如久经训练的斗士,又以钉锤再击立于面前的般度之子。中击之后,毗摩塞那四肢松软,立势尽失,沉坠下去,手抓大地。

Verse 67

स सिंहनादं विननाद कौरवो निपात्य भूमौ युधि भीममोजसा । बिभेद चैवाशनितुल्यमोजसा गदानिपातेन शरीररक्षणम्‌,भीमसेनको युद्धस्थलमें बलपूर्वक भूमिपर गिराकर कुरुराज दुर्योधन सिंहके समान दहाड़ने लगा। उसने सारी शक्ति लगाकर चलायी हुई गदाके आघातसे भीमसेनके वज्तुल्य कवचका भेदन कर दिया था

三阇耶说道:他以纯然之力在战阵之中将毗摩掀翻在地,那位俱卢王(难敌)便如狮子般咆哮。继而他挥出一记钉锤,势若霹雳,以同样惊人的劲力击碎了毗摩塞那的护身之具——铠甲——显明在无情的战争法则里,蛮力与武艺足以压倒最坚固的防御。

Verse 68

ततोअन्तरिक्षे निनदो महान भूद्‌ दिवौकसामप्सरसां च नेदुषाम्‌ | पपात चोच्चैरमरप्रवेरित॑ विचित्रपुष्पोत्करवर्षमुत्तमम्‌,उस समय आकाशमें हर्षध्वनि करनेवाले देवताओं और अप्सराओंका महान्‌ कोलाहल गूँज उठा। साथ ही देवताओंद्वारा बहुत ऊँचेसे की हुई विचित्र पुष्पसमूहोंकी वहाँ अच्छी वर्षा होने लगी

随即,空中轰然大作——诸天欢呼,天女(阿普萨罗)齐声应和。又在不死者的催动下,自高天洒落上妙花雨,缤纷花簇纷纷而下,仿佛神明的嘉许与庄严的惊叹,为这场惨烈战争中方才目睹的壮举作证。

Verse 69

ततः परानाविशदुत्तमं भयं समीक्ष्य भूमौ पतितं नरोत्तमम्‌ | अहीयमानं च बलेन कौरवं निशाम्य भेदं सुदृढस्य वर्मण:,राजन! तदनन्तर यह देखकर कि भीमसेनका सुदृढ़ कवच छित्न-भिन्न हो गया, नरश्रेष्ठ भीम धराशायी हो गये और कुरुराज दुर्योधनका बल क्षीण नहीं हो रहा है, शत्रुओंके मनमें बड़ा भारी भय समा गया

三阇耶说道:随后,敌军阵中忽被至大的恐惧所攫——他们看见人中最胜者倒卧尘土;又见俱卢王的气力并未衰减,纵然那坚固铠甲已被击破。战场的道德氛围里,一位猛士被压倒而对方国王仍岿然不动的景象,使惊惧与疑惘愈加深重,提醒众人:沙场之上,祸福翻转何其迅疾。

Verse 70

ततो मुहूर्तादुपलभ्य चेतनां प्रमृज्य वक्‍त्र॑ रुधिराक्तमात्मन: | धृतिं समालम्ब्य विवृत्य लोचने बलेन संस्तभ्य वृकोदर: स्थित:,तत्पश्चात्‌ दो घड़ीमें सचेत हो भीमसेन खूनसे भींगे हुए अपने मुँहको पोंछते हुए उठे और बलपूर्वक अपनेको सँभालकर धैर्यका आश्रय ले आँख खोलकर देखते हुए पुनः युद्धके लिये खड़े हो गये

三阇耶说道:过了片刻,毗摩塞那恢复了知觉。他拭去自己那沾满鲜血的面庞,凭着坚忍扶持心志;睁开双眼,以纯粹的力量稳住身躯,狼腹者(弗利科达罗)再度挺身而立,准备重返战阵——在战争残酷逼迫之中,显出不屈的耐力之象。

Verse 253

सव्यं तु मण्डलं तत्र भीमसेनो< भ्यवर्तत । राजन! दोनों ही हाथमें गदा लेकर मण्डलाकार युद्धस्थलमें खड़े थे। उनमेंसे बलवान्‌ दुर्योधन दक्षिण मण्डलमें खड़ा था और भीमसेन बायें मण्डलमें

三阇耶说道:在那里,毗摩塞那移入对决的左侧圆阵。大王啊,两位勇士立于圆形斗场之中,各自手执钉头槌——以体力见长的难敌守住右侧圆阵,而毗摩占据左侧。

Verse 263

दुर्योधनो महाराज पार्श्देशे5भ्यताडयत्‌ । महाराज! युद्धके मुहानेपर वाममण्डलमें विचरते हुए भीमसेनकी पसलीमें दुर्योधनने गदा मारी

三阇耶说道:大王啊,难敌击中了毗摩塞那的侧身。就在毗摩于战阵前沿、左翼游走之时,难敌挥下钉头槌,砸在毗摩的肋骨上——此事显出战争怒焰如何驱使勇士追求致命的肉体重击而非克制,却仍不离那残酷的单挑武士法度。

Verse 276

आविद्धयत गदां गुर्वी प्रहारं तमचिन्तयन्‌ । भरतनन्दन! आपके पुत्रद्वारा आहत किये गये भीमसेन उस प्रहारको कुछ भी न गिनते हुए अपनी भारी गदा घुमाने लगे

三阇耶说道:他对那一击毫不在意;被你之子击中的毗摩塞那,开始挥旋他那沉重的钉头槌。此景凸显战场阴沉的准则:痛楚须被制服,而非纵容;报复亦须在无尽战压之中,锻成有纪律的行动。

Verse 293

समुद्यम्य गदां घोरां प्रत्यविध्यत्‌ परंतप: । शत्रुओंको संताप देनेवाले आपके पुत्र दुर्योधनने भीमसेनको गदा घुमाते देख अपनी भयंकर गदा उठाकर उनकी गदापर दे मारी

三阇耶说道:见毗摩塞那挥旋钉头槌,你的儿子难敌——灼敌者——举起自己那可怖的钉头槌回击,使槌与槌相撞。于是这场决斗愈发坚硬,成为力量与意志的试炼;刹帝利之法(kṣatra-dharma)在此以正面、克制而有纪律的交锋显现,而非以退却示人。

Verse 303

शब्द आसीत्‌ सुतुमुलस्तेजश्च॒ समजायत । भारत! आपके पुत्रकी वायुतुल्य गदाके वेगसे उस गदाके टकरानेपर बड़े जोरका शब्द हुआ और दोनों गदाओंसे आगकी चिनगारियाँ छूटने लगीं

三阇耶说道:一声震天巨响轰然迸发,炽烈如火的光辉随之腾起。噢,婆罗多王啊!当你儿子那如风般迅疾的铁杵与对手的铁杵相撞之时,撞击声如雷霆般轰鸣,两件兵器上同时迸射出火星,使这场决斗更显凶猛。

Verse 316

समशोभत तेजस्वी भूयो भीमात्‌ सुयोधन: । नाना प्रकारके मार्गों और भिन्न-भिन्न मण्डलोंसे विचरते हुए तेजस्वी दुर्योधनकी उस समय भीमसेनसे अधिक शोभा हुई

三阇耶说道:就在那一刻,光彩照人的苏优陀那(难敌)看上去竟比毗摩更为夺目。他穿行于多种进退路数之间,身形在不同的战圈中回旋变换,其威势与气度一时仿佛压过了对手。

Verse 323

सधूमं सार्चिषं चाग्निं मुमोचोग्रमहास्वना । भीमसेनके द्वारा सम्पूर्ण वेगसे घुमायी गयी वह विशाल गदा उस समय भयंकर शब्द करती हुई धूम और ज्वालाओंसहित आग प्रकट करने लगी

三阇耶说道:伴随着骇人的雷鸣般巨响,那柄被毗摩塞那以全力疾旋的巨杵,仿佛喷吐出火焰,烟雾缭绕,火舌翻卷。

Verse 336

अद्विसारमयीं गुर्वीमाविध्यन्‌ बह्मशोभत । भीमसेनके द्वारा घुमायी गयी उस गदाको देखकर दुर्योधन भी अपनी लोहमयी भारी गदाको घुमाता हुआ अधिक शोभा पाने लगा

三阇耶说道:毗摩塞那奋力旋舞他那巨杵,仿佛以金刚所铸,光辉夺目。见此,难敌也旋起自己沉重的铁杵,意欲与之比肩,乃至在武勇的华彩上更胜一筹。

Verse 353

गदाभ्यां सहसान्योन्यमाजघ्नतुररिंदमौ | समरांगणमें सब ओर युद्धकी क्रीडाका प्रदर्शन करते उन दोनों शत्रुदमन वीरोंने सहसा अपनी गदाओंद्वारा एक-दूसरेपर प्रहार किया

三阇耶说道:在战场中央——四面皆呈现出战争那凶烈的“戏斗”——两位摧敌的英雄忽然以铁杵相击,彼此猛然一击。

Verse 376

परिवृत्ते5हनि क्रूरं वृत्रवासवयोरिव । इस प्रकार दिनकी समाप्तिके समय, उन दोनों वीरोंमें प्रकटरूपमें वृत्रासुर और इन्द्रके समान क्रूरतापूर्ण एवं भयंकर युद्ध होने लगा

三阇耶说道:当白昼将尽之时,那两位英雄之间显现出一场凶猛而可怖的搏杀——宛如弗利陀罗与婆娑婆(因陀罗)那般骇人的冲突。暮光渐沉,争斗愈发坚硬,成为对耐力与决断的考验;勇武虽被彰显,却丝毫不能减轻战争残酷所带来的道德重负。

Verse 383

चरंश्रित्रतरान्‌ मार्गान्‌ कौन्तेयमभिदुद्रुवे । तदनन्तर विचित्र मार्गोंसे विचरते हुए आपके महाबली पुत्रने कुन्तीकुमार भीमसेनको खड़ा देख उनपर सहसा आक्रमण किया

三阇耶说道:他循着极其多变的路径穿行,疾冲向昆蒂之子。继而,陛下那力大无穷的儿子在那些变幻的行进线路间驰走时,看见毗摩塞那——昆蒂之子——稳立不动,便在一阵骤起的战意驱使下,猛然向他发动攻击。此举昭示:在战争中,决心与冲动相互碰撞,力量也要在坚毅面前受试炼。

Verse 393

अतिक्कुद्धस्य क्रुद्धस्तु ताडयामास तां गदाम्‌ | यह देख क्रोधमें भरे भीमसेनने अत्यन्त कुपित हुए दुर्योधनकी सुवर्णजटित उस महावेगशालिनी गदापर ही अपनी गदासे आघात किया

三阇耶说道:毗摩塞那怒不可遏,自身亦如烈焰般燃烧,竟径直击向那柄钉锤。见杜尤陀那盛怒如狂,毗摩便以己锤猛击杜尤陀那那柄镶金、迅猛无比的巨锤。战火炽热之中,怒对怒相答;这场较量既是力量的试炼,也是克制的试炼。

Verse 426

मत्तो द्विप इव क्रुद्धः प्रतिकुड्जरदर्शनात्‌ । जैसे क्रोधमें भरा हुआ मतवाला हाथी अपने प्रतिद्वन्द्ी गजराजको देखकर सहन नहीं कर पाता, उसी प्रकार रणभूमिमें अपनी गदाको प्रतिहत हुई देख कुरुवंशी दुर्योधन नहीं सह सका

三阇耶说道:如同醉象见到对手雄象便怒不可遏,杜尤陀那——眼见自己的钉锤在战场上被格挡——竟无法忍受。此喻揭示:受伤的傲慢与失控的愤怒,而非明辨之心,常在战争的道德混沌中驱使武士更深地走向毁灭。

Verse 446

नाकम्पत महाराज तदद्भुतमिवा भवत्‌ । महाराज! आपके पुत्रके आघातसे पीड़ित होनेपर भी पाण्डुपुत्र भीमसेन विचलित नहीं हुए। वह अद्भुत-सी बात हुई

三阇耶说道:“大王啊,他竟不曾颤动;仿佛发生了奇事。纵然被您之子击中而疼痛,般度之子、般度族的毗摩塞那也毫不动摇。”

Verse 453

यद्‌ गदाभिहतो भीमो नाकम्पत पदात्‌ पदम्‌ | राजन्‌! गदाकी चोट खाकर भी जो भीमसेन एक पग भी इधर-उधर नहीं हुए, वह महान्‌ आश्वर्यकी बात थी, जिसकी सभी सैनिकोंने भूरि-भूरि प्रशंसा की

三阇耶说道:“大王啊,虽被钉锤击中,毗摩竟连一步也未曾挪动。那在沉重一击之下仍岿然不动的坚忍,实为奇观;两军诸勇士无不大加称颂——这是战火狂怒之中不动摇意志的象征。”

Verse 513

नाभ्यमन्यत कर्तव्यं पुत्रेणाभ्याहतस्तव । उस महासमरमें आपके पुत्रकी गदाकी चोट खाकर भीमसेन मूर्च्छित-से हो गये और एक क्षणतक उन्हें अपने कर्तव्यका ज्ञानतक न रहा

三阇耶说道:“被你的儿子击倒之时,毗摩塞那一瞬间竟失却了应当如何行事的觉知;在那场大决战中,他因钉锤重击而踉跄,如同昏厥,连责任之念也未能在心中升起片刻。”

Verse 523

भृशोपहतसंकल्पा न हृष्टमनसो5 भवन्‌ । राजन्‌! जब भीमसेनकी ऐसी अवस्था हो गयी, उस समय सोमक और पाण्डव बहुत ही खिन्न और उदास हो गये। उनकी विजयकी आशा नष्ट हो गयी

三阇耶说道:“大王啊,他们的决心遭受重创,心中再无欢喜。毗摩塞那陷入那般境地之时,索摩迦人与般度诸子尽皆沮丧哀伤;胜利的希望在他们心中熄灭了。”

Verse 613

अताडयच्छड्खदेशे न चचालाचलोपम: । पास पहुँचकर उस भयंकर पराक्रमी महामनस्वी वीरने महामना भीमसेनके ललाटपर गदासे आघात किया, परंतु भीमसेन पर्वतके समान अविचलभावसे खड़े रह गये, तनिक भी विचलित नहीं हुए

三阇耶说道:“他击中了他的额部,然而毗摩塞那——如山岳一般——竟毫不动摇。那一击本欲撼折英雄之志,反倒显出毗摩在残酷的单挑法则中所具的坚忍:胜利固以强力求取,而真正的伟大,却在不屈的勇气中显现。”

Verse 3436

भयं विवेश पाण्डूंस्तु सवानिव ससोमकान्‌ | उस महामनस्वी वीरकी वायुतुल्य गदाके वेगको देखकर सोमकोंसहित समस्त पाण्डवोंके मनमें भय समा गया

三阇耶说道:“恐惧如骤然而至的巨力,侵入般度诸子——连同索摩迦人——的心中。见那位大心英雄之钉锤疾如风驰,惊惧便在所有般度诸子与索摩迦人的心念间蔓延;战场的暴烈,竟使素来坚毅者也为之动摇。”

Frequently Asked Questions

Whether a decisive strike that violates conventional duel norms can be justified by prior vows, strategic necessity, and the opponent’s perceived reliance on deception—balancing procedural fairness against catastrophic political risk.

The chapter frames ethical action as context-sensitive: counsel may prioritize preventing larger harm and fulfilling binding commitments, even when idealized rules of engagement appear to prohibit the needed act.

No explicit phalaśruti is stated; instead, the narrative supplies meta-commentary through portents and communal agitation, signaling that the event carries exceptional moral and cosmic weight within the epic’s evaluative framework.