Gadāyuddhe Kṛṣṇopadeśaḥ (Kṛṣṇa’s Counsel in the Mace-Duel) — Śalya-parva 57
उस अत्यन्त भयंकर महायुद्धके चालू होनेपर गदाओंके आघातसे आगकी चिनगारियाँ छूटने लगीं। वे आकाशमें जुगनुओंके दलके समान जान पड़ती थीं और उनसे वहाँके आकाशकी दर्शनीय शोभा हो रही थी ।। तथा तस्मिन् वर्तमाने संकुले तुमुले भूशम् । उभावपि परिश्रान्तौ युध्यमानावरिंदमौ
当那极其可怖的大决战展开之时,铁棒相击迸出火星。那些火花升上天空,宛如萤火成群,使那片苍穹竟也显得可观。就在这纷乱喧腾之中,两位摧敌的勇士一边鏖战,一边也都疲惫不堪。
संजय उवाच