Character · Varaha Purana
Narada in the Varaha Purana
नारदNamed in 101 verses
In this book
Key chapters
The chapters where Narada matters most.
The Curse of Sāmba and the Prescribed Observance of Sun-Worship
The Vaiṣṇavī Goddess on Mount Mandara: Emergence of the Maidens, Construction of the Goddess-City, and Nārada’s Visit
Determination of the Origin and Procedure of the Ancestral Offering (Pitṛyajña/Śrāddha)
Nārada’s Journey to Śvetadvīpa and the Means of Attaining the Lord through the Pañcarātra
Nārada’s Teaching on a Viṣṇu-Vrata for Securing a Husband (Narrative of the Apsarases)
Nārada’s Account of a Former Birth and a Hymn to Nārāyaṇa
Description of the Greatness of the Pativratā (Marital Fidelity and Ethical Devotion)
The Birth of Mahiṣāsura and the Goddess’s Victory as Mahīṣamardinī
Dharma as the Bull-Form: Soma’s Transgression and the Institution of the Thirteenth Lunar Day Observance
The Rite of the Āṣāḍha Bright-Fortnight Dvādaśī Fast and the Installation (Nyāsa) of the Fourfold Manifestation
Every verse that names Narada
101 verses
- 2.43
मरीचि, अत्रि, अंगिरस, पुलह और क्रतु, यह सब थे। फिर पुलस्त्य जो बहुत तेज था। प्रचेतस और भृगु भी थे। दसवें नंबर पर नारद थे। और वशिष्ठ जो बड़े तपस्वी थे।
- 2.44
सनक और उसके भाइयों को उसने वो काम दिया जिसमे दुनिया से दूर रहते हैं। मरीचि और बाकी रिशियों को वो काम दिया जिसमे दुनिया में रहके काम करते हैं। बस नारद को अलग रखा, उनको यह काम नहीं दिया।
- 2.55
जब राजा तपस्या में लगे थे, तब नारद वहाँ आए। वो राजा को देखना चाहते थे जो धरम फॉलो कर रहे थे। राजा चक्रवर्ती थे, मतलब सबसे बड़े राजा।
- 2.56
राजा ने देखा कि नारद आसमान में है। वो इतनी चमक के साथ थे जैसे सूरज चमक रहा हो। राजा खुशी से उठ के खड़े हो गए। उन्होंने नारद को रेस्पेक्ट दिया।
- 2.57
राजा ने नारद को बैठने के लिए आसन दिया। पानी से पैर धुलवाया और उनका स्वागत किया। दोनों ने बात-चीत की और एक दूसरे से मिल के खुश हुए। बात खतम होने पर राजा ने नारद से सवाल पूछा। नारद ब्रह्मा के बारे में सब जानते थे।
- 2.58
प्रियव्रत ने कहा, भगवन, कृत युग में कुछ अजब बात देखी या सुनी हो तो मुझे बताओ, नारद।
- 2.59
नारद ने कहा, मैंने एक अजब चीज़ देखी है, सुनो प्रियव्रत। कल मैं श्वेत नाम के द्वीप गया था। वहाँ एक झील थी, उसमें खिले हुए कमल थे।
- 2.75
मैंने तुम्हे पूरा बात शॉर्ट में बता दी है। अब तुम वेद और शास्त्र ले लो। नारद, तुम्हे सब का ज्ञान मिल जाएगा।
- 3.2
नारद ने कहा, राजा, जब मैंने वेद-सरस में स्नान किया, और सावित्री की बात सुनी, तो मुझे तुरंत हज़ारों जनम याद आ गए। सुनो मेरा पिछला जनम कैसा था।
- 3.11
नारद बोलते हैं मैं हमेशा विष्णु को नमन करता हूँ। वो सबसे बड़े से भी बड़े हैं, उनकी ताकत का कोई एंड नहीं। वो अमर हैं, पुराने से पुराने हैं। वो सबसे बड़े आधार हैं, सबसे पार ले जाने वाले हैं।
- 3.24
नर का मतलब पानी होता है। तुम अपने पुरखों को पानी देते रहते हो। इसलिए तुम्हारा नाम नारद होगा। यह नाम तुम्हे इसलिए मिल रहा है क्योंकि तुम पानी देते हो।
- 4.9
धरणी ने पूछा, नारद ने जो बात बताई थी, उसके बाद राजा प्रियव्रत ने क्या किया? परमेश्वर के कारण, वो कैसे बदल गया? यह मुझे बताओ।
- 4.10
वराह जी ने कहा, प्रियव्रत ने धरती को सात हिस्सों में बाँटा। फिर वो हिस्से अपने बेटों को दे दिए। नारद की बात सुनके वो हैरान हो गया था। इसलिए वो तपस्या करने चला गया।
- 10.37
नारद रिशि मेरु पर्वत पर चढ़े। ब्रह्मा के बेटे नारद ने सबको बताया। देव, गंधर्व, दानव, गुह्यक, इंसान, दैत्य सब थे। नारद ने इंद्र को कहा कि दुर्जय जीत गया है।
- 22.41
वो तुम्बुरु और नारद के साथ गया। हाहा-हुहु भी साथ था। फिर वो किन्नरों के पास गया। असुर और राक्षस के पास भी गया।
- 22.46
उस उत्सव में पर्वत और नारद ने गाना गाया। सिद्ध लोग नाचने लगे। जंगल के पेड़-पौधे भी जैसे नाच रहे हो। बहुत सारे अच्छे फूल उड़ाए गए। देवताओं की औरतें भी ज़ोर से नाच रही थीं, बहुत खुशी में।
- 27.20
नारद ने वो लड़ाई देखी। फिर वो नारायण के पास गया। उसने बताया कि कैलास पर बड़ी लड़ाई हो रही है। दानव भी उसमें शामिल थे।
- 32.12
नारद ने देखा कि देवता और असुर लड़ रहे हैं और दोनों तरफ गुस्सा है। वो खुश होकर अपने पिता ब्रह्मा के पास गया और उनसे बात की।
- 46.7
देवकी के कोई बेटा नहीं था। वो बहुत अच्छी और पति के धरम में लगी हुई थी। बहुत टाइम के बाद नारद उनके घर आए।
- 54.4
राजा साहब, सुना जाता है कि पुराने ज़माने में नारद ने एक बात बताई थी। उन्होंने विष्णु का व्रत बताया जो खुशी देता है। अप्सराओं का भी व्रत बताया था।