
Chapter Arc: जनमेजय का विस्मय—खाण्डव-दाह जैसे सर्वभक्षी अग्निकाण्ड में जहाँ अश्वसेन नाग और मय दानव के बचने का कारण बताया गया, वहीं ‘शार्कुक’ पक्षियों का सकुशल बच जाना कैसे हुआ? → वैशम्पायन शार्कुकों के ‘अग्निसम्मर्द’ में अविनाश का रहस्य खोलते हैं: मन्दपाल मुनि की तपस्या, यज्ञ-व्यवस्था में अग्नि की अनिवार्यता, और जरिता की अपत्य-स्नेहजन्य चिंता—इन सबके बीच यह प्रश्न तीखा होता जाता है कि अग्नि, जो सबको भस्म कर देता है, किन्हें और क्यों छोड़ देता है। → अग्नि के सर्वदेवात्मक स्वरूप का उद्घोष—‘त्वयि हव्यं च कव्यं च… त्वमेव दहनो देव…’—और उसी के साथ यह निर्णायक बोध कि अग्नि केवल विनाशक नहीं, यज्ञ-धर्म का आधार और लोक-धारण का स्तम्भ है; इसलिए उसके दाह और अदाह दोनों के पीछे धर्म-नियम और वर-प्रभाव काम करते हैं। → शार्कुकों के न जलने का कारण ‘यथाभूत’ रूप में स्थापित होता है—तप, वर, और धर्म-व्यवस्था के संरक्षण से वे अग्निकाण्ड में भी सुरक्षित रहे; साथ ही जरिता की मातृ-चिन्ता और संतति-रक्षा की कथा-धारा को आगे बढ़ाने का आधार बनता है। → जरिता की अपत्य-स्नेहयुक्त चिंता अब किस उपाय से संतानों की रक्षा/पुनर्मिलन को सुनिश्चित करेगी, और मन्दपाल की भूमिका किस दिशा में मुड़ेगी?
Verse 1
भ्च्प्स्ज्ल््स््ि ह्य #5््ाम्प्र् अष्टाविशर्त्याधिकद्विशततमो< ध्याय: शार्कुकोपाख्यान--मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता- शार्डिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना जनमेजय उवाच किमर्थ शार्कुकानग्निर्न ददाह तथागते । तस्मिन् वने दहामाने ब्रद्मन्नेतत् प्रचक्ष्य मे,जनमेजयने पूछा--ब्रह्मन्! इस प्रकार सारे वनके जलाये जानेपर भी अग्निदेवने उन चारों शार्ड्गकोंको क्यों दग्ध नहीं किया? यह मुझे बताइये
ຈະນະເມຊະຍະ ກ່າວວ່າ: «ເພາະເຫດໃດ ອັກນິເທວະ ຈຶ່ງບໍ່ເຜົານົກສາຣກຸກະ ເມື່ອພຣະອົງໄປຮອດທີ່ນັ້ນ? ໃນຍາມທີ່ປ່ານັ້ນກຳລັງຖືກໄຟກິນ ໂອ ພຣາຫມະນ, ຂໍຈົ່ງອະທິບາຍໃຫ້ຂ້າພະເຈົ້າຟັງ».
Verse 2
अदाहे हाश्वसेनस्य दानवस्य मयस्य च । कारणं कीर्तित ब्रह्म॒ज्छार्इुकाणां न कीर्तितम्,विप्रवर! आपने अश्वसेन नाग तथा मयदानवके न जलनेका कारण तो बताया है; परंतु शाड्ड्गकोंके दग्ध न होनेका कारण नहीं कहा है
ຈະນະເມຊະຍະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣາຫມະນຜູ້ປະເສີດ, ທ່ານໄດ້ກ່າວເຖິງເຫດທີ່ອັດສະວະເສນະ ນາກ ແລະ ມະຍະ ດານະວະ ບໍ່ຖືກໄຟເຜົາແລ້ວ; ແຕ່ທ່ານຍັງບໍ່ໄດ້ກ່າວເຖິງເຫດທີ່ພວກສາຣງກະ ບໍ່ຖືກເຜົາ».
Verse 3
तदेतददभुतं ब्रह्मज्छा्डकाणामनामयम् | कीर्तयस्वाग्निसम्मर्दे कथं ते न विनाशिता:,ब्रह्म! उस भयानक अग्निकाण्डमें उन शाड्र्गकोंका सकुशल बच जाना, यह बड़े आश्चर्यकी बात है। कृपया बताइये, उनका नाश कैसे नहीं हुआ?
ຈະນະເມຊະຍະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣາຫມະນ, ການທີ່ພວກຊານຑະກະ ຢູ່ລອດຢ່າງປອດໄພໃນເຫດໄຟໃຫຍ່ອັນນ່າຢ້ານນັ້ນ ແມ່ນເລື່ອງນ່າອັດສະຈັນຢ່າງແທ້. ຂໍຈົ່ງເລົ່າໃຫ້ຟັງວ່າ ໃນຄວາມປັ່ນປ່ວນອັນຮຸນແຮງຂອງໄຟໃຫຍ່ນັ້ນ ພວກເຂົາບໍ່ຖືກທຳລາຍໄດ້ແນວໃດ?»
Verse 4
वैशम्पायन उवाच यदर्थ शार्कईकानग्निर्न ददाह तथागते । तत् ते सर्व प्रवक्ष्यामि यथाभूतमरिंदम,वैशम्पायनजी कहते हैं--शत्रुदमन जनमेजय! वैसे भयंकर अग्निकाण्डमें भी अग्निदेवने जिस कारणसे शाडूर्गकोंको दग्ध नहीं किया और जिस प्रकार वह घटना घटित हुई, वह सब मैं तुम्हें बताता हूँ, सुनो
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຜູ້ປາບສັດຕູ! ຂ້າພະເຈົ້າຈະເລົ່າໃຫ້ທ່ານຟັງໂດຍຄົບຖ້ວນ ຕາມຄວາມເປັນຈິງ ວ່າເປັນເຫດໃດ ເຖິງແມ່ນໄຟພິນາດອັນນ່າຢ້ານນັ້ນຈະເກີດຂຶ້ນແລ້ວ ພຣະອັກນີກໍບໍ່ໄດ້ເຜົາພວກ ສາຣກາອິກະ ແລະເຫດການນັ້ນເກີດຂຶ້ນຢ່າງໃດ. ຈົ່ງຟັງ!»
Verse 5
धर्मज्ञानां मुख्यतमस्तपस्वी संशितव्रत: । आसीन्महर्षि: श्रुत॒वान् मन्दपाल इति श्रुत:,मन्दपाल नामसे विख्यात एक विद्दान् महर्षि थे। वे धर्मज्ञोंमें श्रेष्ठ और कठोर व्रतका पालन करनेवाले तपस्वी थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ມີມະຫາຣິສີອົງໜຶ່ງ ຊື່ ມັນດະປາລະ ໂດດເດັ່ນດ້ວຍຄວາມຮູ້. ໃນບັນດາຜູ້ຮູ້ທັນທຳມະ ທ່ານເປັນຜູ້ສູງສຸດ; ເປັນຕະປະສີຜູ້ເຂັ້ມງວດ ໝັ້ນຄົງໃນວຣະຕະອັນຝຶກຝົນດີ»
Verse 6
स मार्ममाश्रितो राजन्नृषीणामूर्ध्वरेतसाम् । स्वाध्यायवान् धर्मरतस्तपस्वी विजितेन्द्रिय:,राजन! वे ऊ्ध्वरेता मुनियोंके मार्ग (ब्रह्मचर्य)-का आश्रय लेकर सदा वेदोंके स्वाध्यायमें संलग्न और धर्मपालनमें तत्पर रहते थे। उन्होंने सम्पूर्ण इन्द्रियोंको वशमें कर लिया था और वे सदा तपस्यामें ही लगे रहते थे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະຣາຊາ, ທ່ານໄດ້ອາໄສມັກຄາຂອງບັນດາມຸນີຜູ້ຕັ້ງມັ່ນໃນພຣະຫມະຈັນທະຣະຍະ. ທ່ານອຸທິດຕົນຢ່າງສະເໝີໃນການສະວາດຫຍາຍະແຫ່ງເວດ ແລະມຸ່ງໝັ້ນໃນການປະພຶດທຳມະ; ເປັນຕະປະສີຜູ້ຊະນະອິນທຣີຍະ ແລະຢູ່ໃນຕະປະສະຍາຢ່າງບໍ່ຂາດສາຍ»
Verse 7
स गत्वा तपस: पार देहमुत्सूज्य भारत । जगाम पितृलोकाय न लेभे तत्र तत्फलम्,भारत! वे अपनी तपस्याको पूरी करके शरीरका त्याग करनेपर पितृलोकमें गये; किंतु वहाँ उन्हें अपने तप एवं सत्कर्मोंका फल नहीं मिला
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພາຣະຕະ, ເມື່ອທ່ານບັນລຸຈຸດສູງສຸດແຫ່ງຕະປະສະຍາແລ້ວ ທ່ານກໍລະທິ້ມຮ່າງກາຍ ແລະໄປສູ່ໂລກແຫ່ງປິຕຣະ; ແຕ່ຢູ່ທີ່ນັ້ນ ທ່ານກໍບໍ່ໄດ້ຮັບຜົນແຫ່ງຕະປະສະຍາ ແລະກຸສົນກຳຂອງຕົນ»
Verse 8
स लोकानफलान् दृष्टवा तपसा निर्जितानपि । पप्रच्छ धर्मराजस्य समीपस्थान् दिवौकस:,उन्होंने तपस्याद्वारा वशमें किये हुए लोकोंको भी निष्फल देखकर धर्मराजके पास बैठे हुए देवताओंसे पूछा
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ເມື່ອເຫັນວ່າ ແມ່ນແຕ່ໂລກທີ່ໄດ້ມາດ້ວຍຕະປະສະຍາກໍດູເຫມືອນບໍ່ມີຜົນ, ທ່ານຈຶ່ງຖາມບັນດາເທວະທີ່ນັ່ງຢູ່ໃກ້ ທຳມະຣາຊາ»
Verse 9
मन्दपाल उवाच किमर्थमावृता लोका ममैते तपसार्जिता: । कि मया न कृतं तत्र यस्यैतत् कर्मण: फलम्,मन्दपाल बोले--देवताओ! मेरी तपस्याद्वारा प्राप्त हुए ये लोक बंद क्यों हैं? (उपभोगके साधनोंसे शून्य क्यों हैं?) मैंने वहाँ कौन-सा सत्कर्म नहीं किया है, जिसका फल मुझे इस रूपमें मिला है
ມັນດະປາລາ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ເທວະທັງຫຼາຍ! ເຫດໃດເລີຍ ໂລກທັງນີ້ທີ່ຂ້າໄດ້ມາດ້ວຍອຳນາດແຫ່ງຕະປະສະຍາ ຈຶ່ງຖືກປິດບັງຈາກຂ້າ? ຂ້າໄດ້ຂາດກຸສົນກຳອັນໃດໃນທີ່ນັ້ນ ຈຶ່ງໄດ້ຮັບຜົນກຳເປັນແບບນີ້?»
Verse 10
तत्राहं तत् करिष्यामि यदर्थमिदमावृतम् । फलमेतस्य तपस: कथयध्वं दिवौकस:,जिसके लिये इस तपस्याका फल ढका हुआ है, मैं उस लोकमें जाकर वह कर्म करूँगा। आपलोग मुझसे उसको बताइये
«ດັ່ງນັ້ນ ຂ້າຈະເຮັດກິດນັ້ນເອງ ທີ່ເປັນເຫດໃຫ້ຜົນແຫ່ງຕະປະສະຍານີ້ຖືກປິດບັງ. ຂໍພວກເຈົ້າ ໂອ ຜູ້ຢູ່ໃນສະຫວັນ ຈົ່ງບອກຂ້າເຖີດ: ຜົນແຫ່ງຕະປະສະຍານີ້ແມ່ນຫຍັງ ເພື່ອຂ້າຈະໄປຍັງໂລກນັ້ນ ແລະສຳເລັດກິດທີ່ຕ້ອງເຮັດ»។
Verse 11
देवा ऊचु: ऋणिनो मानवा ब्रह्मन् जायन्ते येन तच्छूणु । क्रियाभिन्रह्मचर्येण प्रजया च न संशय:,देवताओंने कहा--ब्रह्मन! मनुष्य जिस ऋणसे ऋणी होकर जन्म लेते हैं, उसे सुनिये। यज्ञकर्म, ब्रह्मचर्यपालन और प्रजाकी उत्पत्ति--इन तीनोंके लिये सभी मनुष्योंपर ऋण रहता है, इसमें संशय नहीं है। यज्ञ, तपस्या और वेदाध्ययनके द्वारा वह सारा ऋण दूर किया जाता है। आप तपस्वी और यज्ञकर्ता तो हैं ही, आपके कोई संतान नहीं है
ເທວະທັງຫຼາຍກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣາຫມັນ! ຈົ່ງຟັງເຫດທີ່ມະນຸດເກີດມາເປັນຜູ້ມີໜີ້. ບໍ່ມີຂໍ້ສົງໄສວ່າ ມະນຸດທຸກຄົນມີພັນທະ—ດ້ວຍກິດຍັດ (ພິທີບູຊາ), ດ້ວຍວິໄນແຫ່ງພຣະຫມະຈັຣຍະ, ແລະດ້ວຍການໃຫ້ກຳເນີດລູກຫຼານ. ໜີ້ເຫຼົ່ານັ້ນຖືກຊຳລະໄດ້ດ້ວຍຍັດ, ຕະປະສະຍາ, ແລະການສຶກສາພຣະເວດ. ເຈົ້າເປັນຜູ້ບຳເນັດຕະປະ ແລະເປັນຜູ້ປະກອບຍັດແທ້ ແຕ່ເຈົ້າບໍ່ມີລູກ»។
Verse 12
तदपाक्रियते सर्व यज्ञेन तपसा श्रुतैः । तपस्वी यज्ञकृच्चासि न च ते विद्यते प्रजा,देवताओंने कहा--ब्रह्मन! मनुष्य जिस ऋणसे ऋणी होकर जन्म लेते हैं, उसे सुनिये। यज्ञकर्म, ब्रह्मचर्यपालन और प्रजाकी उत्पत्ति--इन तीनोंके लिये सभी मनुष्योंपर ऋण रहता है, इसमें संशय नहीं है। यज्ञ, तपस्या और वेदाध्ययनके द्वारा वह सारा ऋण दूर किया जाता है। आप तपस्वी और यज्ञकर्ता तो हैं ही, आपके कोई संतान नहीं है
«ໜີ້ທັງໝົດນັ້ນ ຖືກຊຳລະໄດ້ດ້ວຍຍັດ, ຕະປະສະຍາ, ແລະຄວາມຮູ້ອັນສັກສິດ (ການສຶກສາພຣະເວດ). ເຈົ້າເປັນຜູ້ບຳເນັດຕະປະ ແລະເປັນຜູ້ປະກອບຍັດແທ້ ແຕ່ເຈົ້າບໍ່ມີລູກ»។
Verse 13
त इमे प्रसवस्यार्थे तव लोका: समावृता: । प्रजायस्व ततो लोकानुपभोक्ष्यसि पुष्कलान्,अतः संतानके लिये ही आपके ये लोक ढके हुए हैं। इसलिये पहले संतान उत्पन्न कीजिये, फिर अपने प्रचुर पुण्यलोकोंका फल भोगियेगा
«ດັ່ງນັ້ນ ເພາະເຫດແຫ່ງການໃຫ້ກຳເນີດລູກຫຼານນີ້ແຫຼະ ໂລກຂອງເຈົ້າຈຶ່ງຖືກປິດບັງ. ຈົ່ງມີລູກຫຼານກ່ອນ; ແລ້ວເຈົ້າຈຶ່ງຈະໄດ້ເສບສຸກຜົນອັນອຸດົມແຫ່ງໂລກບຸນຂອງເຈົ້າ»។
Verse 14
पुंनाम्नो नरकात् पुत्रस्त्रायते पितरं श्रुति: । तस्मादपत्यसंताने यतस्व ब्रह्मसत्तम,श्रुतिका कथन है कि पुत्र 'पुत' नामक नरकसे पिताका उद्धार करता है। अतः विप्रवर! आप अपनी वंशपरम्पराको अविच्छिन्न बनानेका प्रयत्न कीजिये
ມັນດະປາລາ ກ່າວວ່າ: «ຄຳສອນໃນ ສຣຸຕິ ກ່າວວ່າ ລູກຊາຍຊ່ວຍກູ້ພໍ່ອອກຈາກນະລົກທີ່ເອີ້ນວ່າ ‘ປຸມ-ນາມັນ’। ດັ່ງນັ້ນ ໂອ ພຣາຫມັນຜູ້ປະເສີດ ຈົ່ງພາກພຽນໃຫ້ວົງສານຸວົງຂອງທ່ານສືບຕໍ່ໂດຍລູກຫຼານ»។
Verse 15
वैशम्पायन उवाच तच्छुत्वा मन्दपालस्तु वचस्तेषां दिवौकसाम् । क्व नु शीघ्रमपत्यं स्याद् बहुलं चेत्यचिन्तयत्,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! देवताओंका वह वचन सुनकर मन्दपालने बहुत सोचा-विचारा कि कहाँ जानेसे मुझे शीघ्र संतान होगी
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ຈະນະເມຊະຍະ, ເມື່ອມັນດະປາລາໄດ້ຍິນຖ້ອຍຄຳຂອງເທວະດາເຫຼົ່ານັ້ນ ລາວກໍ່ຄິດພິຈາລະນາຢ່າງໜັກ ວ່າ ‘ຈະໄປທີ່ໃດຈຶ່ງຈະໄດ້ລູກຫຼານໄວ ແລະຫຼາຍ’»។
Verse 16
स चिन्तयन्नभ्यगच्छत् सुबहुप्रसवान् खगान् । शार््धिकां शार््रिको भूत्वा जरितां समुपेयिवान्,यह सोचते हुए वे अधिक बच्चे देनेवाले पक्षियोंके यहाँ गये और शार्ज्रिक होकर जरिता नामवाली शार्डििकासे सम्बन्ध स्थापित किया
ລາວຄິດພິຈາລະນາຢູ່ແລ້ວ ກໍ່ໄປຫາຝູງນົກທີ່ຂື້ນຊື່ວ່າອອກລູກຫຼາຍ. ລາວແປງຮູບເປັນນົກ śārdhika ເພດຜູ້ ແລ້ວເຂົ້າໄປຫາ ຈະຣິຕາ ນົກ śārdhikā ເພດແມ່ ແລະຮ່ວມສຳພັນກັບນາງ ເພື່ອໃຫ້ໄດ້ລູກຫຼານ.
Verse 17
तस्यां पुत्रानजनयच्चतुरो ब्रह्म॒वादिन: । तानपास्य स तत्रैव जगाम लपितां प्रति
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນນາງນັ້ນ ລາວໃຫ້ກຳເນີດລູກຊາຍສີ່ຄົນ ຜູ້ລ້ວນແຕ່ຍຶດຖືວິຊາສັກສິດ ແລະວິນັຍແຫ່ງພຣາຫມັນ. ປະລະລູກເຫຼົ່ານັ້ນໄວ້ທີ່ນັ້ນແລ້ວ ລາວກໍ່ໄປຕໍ່ຈາກທີ່ນັ້ນໄປຫາ ລະປິຕາ Lapitā.
Verse 18
तस्मिन् गते महाभागे लपितां प्रति भारत
ໂອ ພາຣະຕະ, ເມື່ອບຸກຄົນຜູ້ມີກຽດສັກສີນັ້ນໄດ້ຈາກໄປຫາ ລະປິຕາ Lapitā ແລ້ວ, ເລື່ອງລາວກໍ່ຫັນໄປສູ່ສິ່ງທີ່ເກີດຂຶ້ນກັບນາງ.
Verse 19
तेन त्यक्तानसंत्याज्यानृषीनण्डगतान् वने,अंडेमें स्थित उन मुनियोंको यद्यपि मन्दपालने त्याग दिया था, तो भी वे त्यागने योग्य नहीं थे। अतः पुत्र-शोकसे पीड़ित हुई जरिताने खाण्डववनमें अपने पुत्रोंको नहीं छोड़ा। वह स्नेहसे विह्नल होकर अपनी तवृत्तिद्वारा उन नवजात शिशुओंका भरण-पोषण करती रही
ບັນດາລະສີເຫຼົ່ານັ້ນ ແມ່ນແມ່ນວ່າມັນດະປາລະໄດ້ປະຖິ້ມເຂົາໃນປ່າ ໃນຂະນະທີ່ຍັງຢູ່ໃນໄຂ່ ແຕ່ເຂົາບໍ່ແມ່ນຜູ້ຄວນຖືກປະຖິ້ມແທ້. ດັ່ງນັ້ນ ຈະຣິຕາ ຜູ້ຖືກທຸກທ້ອນໂດຍຄວາມໂສກເພາະລູກ ບໍ່ໄດ້ປະຖິ້ມລູກຊາຍຂອງນາງໃນປ່າຂານດະວະ. ນາງຖືກຄວາມຮັກຂອງແມ່ຄອບງໍາ ແລະຍັງຄົງຫຼ້ຽງດູອຸ້ມຊູລູກນ້ອຍເພິ່ງເກີດເຫຼົ່ານັ້ນດ້ວຍກໍາລັງຂອງນາງເອງ.
Verse 20
न जहीौ पुत्रशोकार्ता जरिता खाण्डवे सुतान् । बभार चैतान् संजातान् स्ववृत्त्या स््नेहविप्लवा,अंडेमें स्थित उन मुनियोंको यद्यपि मन्दपालने त्याग दिया था, तो भी वे त्यागने योग्य नहीं थे। अतः पुत्र-शोकसे पीड़ित हुई जरिताने खाण्डववनमें अपने पुत्रोंको नहीं छोड़ा। वह स्नेहसे विह्नल होकर अपनी तवृत्तिद्वारा उन नवजात शिशुओंका भरण-पोषण करती रही
ໄວສັມປາຍະນະກ່າວວ່າ: ຈະຣິຕາ ຜູ້ຖືກຄວາມໂສກເພາະລູກຄອບງໍາ ບໍ່ໄດ້ປະຖິ້ມລູກຊາຍຂອງນາງໃນປ່າຂານດະວະ. ນາງຖືກຄວາມຮັກຂອງແມ່ເຮັດໃຫ້ຫວັ່ນໄຫວ ແລະໄດ້ຫຼ້ຽງດູອຸ້ມຊູຜູ້ເພິ່ງເກີດເຫຼົ່ານັ້ນດ້ວຍກໍາລັງຂອງນາງເອງ ບໍ່ຍອມໃຫ້ເຂົາຖືກນັບເປັນຜູ້ຖືກປະຖິ້ມ.
Verse 21
ततोअग्निं खाण्डवं दग्धुमायान्तं दृष्टवानृषि: । मन्दपाल शक्षरंस्तस्मिन् वने लपितया सह,उधर वनमें लपिताके साथ विचरते हुए मन्दपाल मुनिने अग्निदेवको खाण्डववनका दाह करनेके लिये आते देखा
ຕໍ່ມາ ມັນດະປາລະ ລະສີ ຜູ້ພາລະປິຕາເດີນທ່ອງໄປໃນປ່ານັ້ນ ໄດ້ເຫັນພຣະອັກນິ ກໍາລັງເຂົ້າມາ ດ້ວຍເຈດຈໍານົງຈະເຜົາປ່າຂານດະວະໃຫ້ມອດໄໝ້.
Verse 22
त॑ संकल्पं विदित्वाग्नेर्ज्ञात्वा पुत्रांक्ष बालकान् । सोभितुष्टाव विप्रर्षिब्राह्माणो जातवेदसम्
ໄວສັມປາຍະນະກ່າວວ່າ: ເມື່ອຮູ້ເຈດຈໍານົງຂອງພຣະອັກນິ ແລະຮັບຮູ້ວ່າເດັກນ້ອຍເຫຼົ່ານັ້ນແມ່ນລູກຊາຍຂອງຕົນ ພຣາຫມັນ—ຜູ້ເປັນລະສີໃນບັນດາປະໂຣຫິດ—ກໍເກີດຄວາມພໍໃຈ ແລະໄດ້ສັນລະເສີນພຣະຊາຕະເວດະ (ອັກນິ).
Verse 23
मन्दपाल उवाच त्वमग्ने सर्वलोकानां मुखं त्वमसि हव्यवाट्,मन्दपालने कहा--अग्निदेव! आप सब लोकोंके मुख हैं, आप ही देवताओंको हविष्य पहुँचाते हैं
ມັນດະປາລະກ່າວວ່າ: “ໂອ ອັກນິ! ເຈົ້າແມ່ນປາກຂອງທຸກໂລກ; ເຈົ້າແມ່ນຜູ້ນໍາເຄື່ອງບູຊາ (ຮະວິ) ໃຫ້ເຖິງເທວະດາທັງຫຼາຍ.”
Verse 24
त्वमन्त: सर्वभूतानां गूढश्वरसि पावक । त्वामेकमाहु: कवयस्त्वामाहुस्त्रिविध पुन:,पावक! आप समस्त प्राणियोंके अन्तस्तलमें गूढ़-रूपसे विचरते हैं। विद्वान् पुरुष आपको एक (द्वितीय ब्रह्मरूप) बताते हैं। फिर दिव्य, भौम और जठरानलरूपसे आपके त्रिविध स्वरूपका प्रतिपादन करते हैं
ມັນດະປາລາ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ປາວະກະ (ໄຟ), ເຈົ້າເຄື່ອນໄຫວຢ່າງລັບເຊື່ອງຢູ່ໃນສ່ວນໃນສຸດຂອງສັດທັງປວງ. ບັນດາລິດສີຜູ້ຮູ້ແຈ້ງກ່າວວ່າ ເຈົ້າເປັນອັນດຽວ—ເປັນສານະສຳຄັນສູງສຸດອັນດຽວ—ແຕ່ກໍຍັງພາກັນອະທິບາຍເຈົ້າເປັນສາມພາກ: ໄຟເທວະ (ໄຟຟ້າ), ໄຟພື້ນດິນ, ແລະ ໄຟຍ່ອຍອາຫານໃນກາຍ (ຊະຖະຣານະລ)»
Verse 25
त्वामष्टधा कल्पयित्वा यज्ञवाहमकल्पयन् । त्वया विश्वमिदं सृष्टं वदन्ति परमर्षय:,आपको ही पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश, सूर्य, चन्द्रमा और यजमान--इन आठ मूर्तियोंमें विभक्त करके ज्ञानी पुरुषोंने आपको यज्ञवाहन बनाया है। महर्षि कहते हैं कि इस सम्पूर्ण विश्वकी सृष्टि आपने ही की है
ເມື່ອຄິດເຫັນເຈົ້າເປັນຮູບແປດປະການ ບັນດາຜູ້ຮູ້ແຈ້ງໄດ້ສ້າງຕັ້ງເຈົ້າໃຫ້ເປັນຜູ້ຂົນສົ່ງ ແລະ ພາຫະນະແຫ່ງຍັດ. ລິດສີຜູ້ສູງສຸດກ່າວວ່າ ຈັກກະວານທັງປວງນີ້ເກີດຂຶ້ນໂດຍເຈົ້ານັ້ນເອງ.
Verse 26
त्वदृते हि जगत् कृत्स्नं सद्यो नश्येद् हुताशन । तुभ्यं कृत्वा नमो विप्रा: स्वकर्मविजितां गतिम्
ມັນດະປາລາ ກ່າວວ່າ: «ຫາກບໍ່ມີເຈົ້າ ໂອ ຫຸຕາຊະນະ (ໄຟ), ໂລກທັງປວງນີ້ຈະພິນາດໃນທັນທີ. ດັ່ງນັ້ນ ບັນດາພຣາຫມັນໄດ້ນ້ອມກາຍຄຳນົບເຈົ້າ ແລະ ບັນລຸສະຖານະອັນປະເສີດ ທີ່ໄດ້ມາດ້ວຍບຸນກຳຂອງພິທີ ແລະ ໜ້າທີ່ຂອງຕົນ»
Verse 27
त्वामग्ने जलदानाहुः खे विषक्तान् सविद्युत:,अग्ने! आकाशगमें विद्युतकें साथ मेघोंकी जो घटा घिर आती है, उसे भी आपका ही स्वरूप कहते हैं
ມັນດະປາລາ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ອັກນິ, ພວກເຂົາເອີ້ນເຈົ້າວ່າ ເມກນຳຝົນ—ເມກທີ່ຫ້ອຍຢູ່ໃນຟ້າ ມີຟ້າຜ່າວາບວາບ. ແມ່ນແຕ່ກອງເມກໃຫຍ່ທີ່ຮວມຕົວ ແລະ ກົດກຽວເຂົ້າມາຕາມຟ້າພ້ອມຟ້າຜ່າ ກໍຖືກກ່າວວ່າເປັນຮູບຂອງເຈົ້າເອງ»
Verse 28
दहन्ति सर्वभूतानि त्वत्तो निष्क्रम्य हेतय: । जातवेदस्त्वयैवेदं विश्व सृष्ट महाद्युते,प्रलयकालमें आपसे ही भयंकर ज्वालाएँ निकलकर सम्पूर्ण प्राणियोंको भस्म कर डालती हैं। महान् तेजस्वी जातवेदा! आपसे ही यह सम्पूर्ण विश्व उत्पन्न हुआ है
ມັນດະປາລາ ກ່າວວ່າ: «ຈາກເຈົ້າ ມີໄຟລຸກໂຊນດຸດດັ່ງອາວຸດພຸ່ງອອກມາ ເຜົາຜານສັດມີຊີວິດທັງປວງ. ໂອ ຊາຕະເວດັສ, ໂອ ຜູ້ມີລັດສະໝີອັນຍິ່ງໃຫຍ່—ໂດຍເຈົ້າແຕ່ຜູ້ດຽວ ຈັກກະວານທັງປວງນີ້ໄດ້ຖືກກໍ່ກຳເນີດ»
Verse 29
तवैव कर्म विहितं भूतं सर्व चराचरम् । त्वया55पो विहिता: पूर्व त्वयि सर्वमिदं जगत्,तथा आपके ही द्वारा कर्मोंका विधान किया गया है और सम्पूर्ण चराचर प्राणियोंकी उत्पत्ति भी आपसे ही हुई है। आपसे ही पूर्वकालमें जलकी सृष्टि हुई है और आपमें ही यह सम्पूर्ण जगत् प्रतिष्ठित है
ມັນດະປາລາ ກ່າວຕໍ່ພຣະອົງຜູ້ຖືກນົບນ້ອມວ່າ: ການວາງລະບຽບແຫ່ງກຳ ແລະ ຊະຕາກຳ ເປັນຂອງພຣະອົງແຕ່ຜູ້ດຽວ. ສັບພະສິ່ງທັງທີ່ເຄື່ອນໄຫວ ແລະ ບໍ່ເຄື່ອນໄຫວ ເກີດຈາກພຣະອົງ. ໃນການເລີ່ມຕົ້ນແຫ່ງການກໍ່ກຳເນີດ ພຣະອົງໄດ້ບັງເກີດນ້ຳກ່ອນ ແລະ ຈັກກະວານທັງປວງນີ້ກໍຕັ້ງຢູ່ໃນພຣະອົງ.
Verse 30
त्वयि हव्यं च कव्यं च यथावत् सम्प्रतिष्ठितम् । त्वमेव दहनो देव त्वं धाता त्वं बृहस्पति:
ໃນພຣະອົງ ທັງຮັວຍະ (ເຄື່ອງບູຊາແດ່ເທວະ) ແລະ ກັວຍະ (ພິທີສຳລັບບັນພະບຸລຸດ) ຕັ້ງຢູ່ຢ່າງຖືກຕ້ອງແລະໝັ້ນຄົງ. ພຣະອົງແຕ່ຜູ້ດຽວແມ່ນໄຟທິບ; ພຣະອົງແມ່ນ ທາຕຣ (ຜູ້ຄ້ຳຈຸນ) ແລະ ພຣະອົງແມ່ນ ບຣິຫັສປະຕິ.
Verse 31
वैशम्पायन उवाच एवं स्तुतस्तदा तेन मन्दपालेन पावक:,वैशम्पायनजी कहते हैं--राजन्! मन्दपाल मुनिके इस प्रकार स्तुति करनेपर अग्निदेव उन अमित-तेजस्वी महर्षिपर बहुत प्रसन्न हुए और प्रसन्नचित्त होकर उनसे बोले --'मैं आपके किस अभीष्ट कार्यकी सिद्धि करूँ?”
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນເວລານັ້ນ ເມື່ອຖືກມຸນີມັນດະປາລາສັນລະເສີນດັ່ງນັ້ນ ພາວະກະ (ອັກນິ) ຜູ້ສ່ອງສະຫວ່າງດ້ວຍລັດສະໝີອັນຫາທຽບບໍ່ໄດ້ ກໍຍິນດີຢ່າງຍິ່ງ. ດ້ວຍໃຈປິຕິ ພຣະອົງຈຶ່ງກ່າວກັບລະສີນັ້ນວ່າ: “ຄວາມປາດຖະໜາໃດຂອງເຈົ້າ ຂ້າພະເຈົ້າຈະສຳເລັດໃຫ້?”
Verse 32
तुतोष तस्य नृपते मुनेरमिततेजस: । उवाच चैन प्रीतात्मा किमिष्टं करवाणि ते,वैशम्पायनजी कहते हैं--राजन्! मन्दपाल मुनिके इस प्रकार स्तुति करनेपर अग्निदेव उन अमित-तेजस्वी महर्षिपर बहुत प्रसन्न हुए और प्रसन्नचित्त होकर उनसे बोले --'मैं आपके किस अभीष्ट कार्यकी सिद्धि करूँ?”
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ພຣະຣາຊາ, ພຣະເທວະໄຟ ຍິນດີຢ່າງຍິ່ງຕໍ່ມຸນີຜູ້ມີລັດສະໝີຫາທຽບບໍ່ໄດ້ນັ້ນ. ດ້ວຍໃຈປິຕິ ພຣະອົງຈຶ່ງກ່າວກັບເຂົາວ່າ: “ເຈົ້າປາດຖະໜາສິ່ງໃດ? ຂ້າພະເຈົ້າຈະເຮັດໃຫ້ເຈົ້າ.”
Verse 33
तमब्रवीन्मन्दपाल: प्राउ्जलिहव्यवाहनम् । प्रदहन् खाण्डवं दावं मम पुत्रान् विसर्जय,तब मन्दपालने हाथ जोड़कर हव्यवाहन अग्निसे कहा--“भगवन्! आप खाण्डववनका दाह करते समय मेरे पुत्रोंको बचा दें”
ແລ້ວ ມັນດະປາລາ ຍົກມືນົບນ້ອມ ກ່າວຕໍ່ ຮັວຍະວາຫະນະ (ອັກນິ) ວ່າ: “ຂ້າແຕ່ພຣະອົງ, ເມື່ອພຣະອົງເຜົາປ່າຄານດະວະ ຂໍໃຫ້ປ່ອຍແລະຊ່ວຍລູກຊາຍຂອງຂ້າພະເຈົ້າໃຫ້ລອດ.”
Verse 34
तथेति तत् प्रतिश्रुत्य भगवान् हव्यवाहन: । खाण्डवे तेन कालेन प्रजज्वाल दिधक्षया,“बहुत अच्छा” कहकर भगवान् हव्यवाहनने वैसा करनेकी प्रतिज्ञा की और उस समय खाण्डववनको जलानेके लिये वे प्रज्वलित हो उठे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອກ່າວວ່າ «ເຊັ່ນນັ້ນເທີດ» ພຣະໄຟອັນເປັນເທວະ (ອັກນິ) ຜູ້ຫາບເຄື່ອງບູຊາ ໄດ້ຮັບປາກແລະສັນຍາ; ໃນຂະນະນັ້ນເອງ ພຣະໄຟກໍລຸກໂຊນຂຶ້ນໃນປ່າຂານະດະວະ ດ້ວຍເຈດນາຈະເຜົາມັນ—ເປັນໝາຍແຫ່ງການເລີ່ມຕົ້ນອັນບໍ່ອາດຫັນກັບໄດ້ຂອງໄຟພິນາດ ທີ່ຈະນໍາພາຜົນທາງທໍາ ແລະທາງຈັກກະວານຕໍ່ໄປ.
Verse 176
बालान् स तानण्डगतान् सह मात्रा मुनिर्वने । जरिताके गर्भसे चार ब्रह्मवादी पुत्रोंको मुनिने जन्म दिया। अंडेमें पड़े हुए उन बच्चोंको मातासहित वहीं छोड़कर वे मुनि वनमें लपिताके पास चले गये
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ມຸນີໃນປ່າ ໄດ້ໃຫ້ກໍ່ກໍາເນີດບຸດຊາຍສີ່ຄົນ—ເປັນພວກບຣະຫມະວາດິນ (ຜູ້ອຸທິດຕົນແກ່ຄວາມຮູ້ອັນສັກສິດ)—ໃນຄັນຂອງ ຈະຣິຕາ. ທາຣົກນ້ອຍເຫຼົ່ານັ້ນຍັງຢູ່ໃນໄຂ່; ມຸນີຈຶ່ງປະໄວ້ເດັກທີ່ຖືກຂັງໃນໄຂ່ນັ້ນພ້ອມແມ່ຢູ່ທີ່ນັ້ນ ແລ້ວເດີນຕໍ່ໄປຕາມປ່າ ໄປຫາທີ່ພັກຂອງ ຈະຣິຕາ. ເຫດການນີ້ຊີ້ໃຫ້ເຫັນຄວາມຕຶງຕັນລະຫວ່າງການວາງວິໄສຂອງຜູ້ຖືຕະປະສະ ແລະພັນທະທາງທໍາຕໍ່ຜູ້ພຶ່ງພາ, ປູທາງໃຫ້ການຄຸ້ມຄອງແລະການຮັບຮູ້ຜູ້ອ່ອນແອໃນພາຍຫຼັງ.
Verse 183
अपत्यस्नेहसंयुक्ता जरिता बह्गचिन्तयत् । भारत! महाभाग मन्दपाल मुनिके लपिताके पास चले जानेपर संतानके प्रति स्नेहयुक्त जरिताको बड़ी चिन्ता हुई
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຈະຣິຕາ ຜູ້ຜູກພັນດ້ວຍຄວາມຮັກລູກຢ່າງເລິກຊຶ້ງ ກໍເກີດຄວາມກັງວົນຢ່າງໃຫຍ່; ໃຈນາງຫວນຄິດຊໍ້າໆເຖິງຄວາມປອດໄພຂອງລູກໆ ຫຼັງຈາກມຸນີ ມານະດະປາລ ໄດ້ຈາກໄປ.
Verse 223
पुत्रान् प्रति वदन् भीतो लोकपालं महौजसम् । अग्निदेवके संकल्पको जानकर और अपने पुत्रोंकी बाल्यावस्थाका विचार करके ब्रह्मर्षि मन्दपाल भयभीत होकर महातेजस्वी लोकपाल अग्निसे अपने पुत्रोंकी रक्षाके लिये निवेदन करते हुए (ईश्वरकी भाँति) उनकी स्तुति करने लगे
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອຮູ້ເຖິງພຣະປະສົງຂອງພຣະອັກນິ ແລະຄິດເຖິງຄວາມເປັນເດັກນ້ອຍຂອງບຸດທັງຫຼາຍ, ພຣະພຣະຫມະຣິສິ ມານະດະປາລ ກໍຫວາດຫວັນ; ແລ້ວໄດ້ວອນຂໍພຣະອັກນິ—ໂລກະປາລຜູ້ມີອໍານາດໃຫຍ່—ໃຫ້ຄຸ້ມຄອງບຸດຂອງຕົນ, ພ້ອມທັງເລີ່ມສັນລະເສີນພຣະອົງ ດັ່ງການສະຕູຕິພຣະເອສະວະຣະ.
Verse 227
इस प्रकार श्रीमह्याभारत आदिपव॑के अन्तर्गत मयदर्शनपर्वमें मयदानवकी रक्षाविषयक दो सौ सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ
ດັ່ງນີ້ ບົດທີ 227 ໃນພາກ ມະຍະດັດສະນະ ອັນຢູ່ໃນ ອາດິປະຣະວະ ຂອງມະຫາພາຣະຕະອັນຄວນແກ່ການນົບນ້ອມ ກໍສິ້ນສຸດລົງ—ເປັນບົດທີ່ກ່ຽວກັບການຄຸ້ມຄອງ (ແລະການລະເວັ້ນຊີວິດ) ຂອງດານະວະ ມະຍາ. ຄໍາປິດທ້າຍນີ້ເນັ້ນນັຍທາງທໍາ: ແມ່ນແຕ່ທ່າມກາງການທໍາລາຍແລະຄວາມຂັດແຍ່ງ, ຄວາມຍັບຍັ້ງ ແລະການປົກປ້ອງຜູ້ມາຂໍພຶ່ງພາ ກໍຖືກຍົກຍ້ອງເປັນຄຸນທໍາອັນສໍາຄັນ.
Verse 228
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि मयदर्शनपर्वणि शार्ज़ुकोपाख्यानेडष्टाविंशत्यधिकद्धिशततमो< ध्याय:,इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपव॑के अन्तर्गत मयदर्शनपर्वमें शा्ड्ुकोपाख्यानविषयक दो सौ अद्वाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ດັ່ງນັ້ນ ໃນ «ສີຣີ ມະຫາພາຣະຕະ» ພາຍໃນ «ອາດິປະຣະວະ» ໃນຕອນທີ່ເອີ້ນວ່າ «ມະຍະດັຣຊະນະ ປະຣະວະ» ບົດທີ່ຮູ້ຈັກວ່າ «ຊາຣັງກະ ອຸປາຂະຍານະ»—ບົດທີ 228—ກໍໄດ້ສິ້ນສຸດລົງ. ຖ້ອຍຄໍາປິດນີ້ເປັນເຄື່ອງໝາຍຢືນຢັນການສໍາເລັດຂອງໜ່ວຍນິທານ ແລະການຈັດລຽງອັນລະອຽດຂອງຄໍາພີຕາມການສືບທອດ.
Verse 266
गच्छन्ति सह पत्नीभि: सुतैरपि च शाश्वतीम् । हुताशन! आपके बिना सम्पूर्ण जगत् तत्काल नष्ट हो जायगा। ब्राह्मणलोग आपको नमस्कार करके अपनी पत्नियों और पुत्रोंके साथ कर्मानुसार प्राप्त की हुई सनातन गतिको प्राप्त होते हैं
ມັນດະປາລະ ກ່າວວ່າ: «ເຂົາເຈົ້າໄປຕໍ່ ພ້ອມກັບເມຍ ແລະແມ່ນກະທັ້ງລູກຊາຍ ໄປສູ່ສະພາບອັນຖາວອນ. ໂອ ໄຟ (ຮຸຕາຊະນະ) ຖ້າບໍ່ມີທ່ານ ໂລກທັງປວງຈະພິນາດລົງໃນທັນທີ. ພຣາຫມັນທັງຫຼາຍ ນົບນ້ອມຕໍ່ທ່ານ ແລະໄດ້ບັນລຸ—ພ້ອມກັບເມຍແລະລູກ—ຈຸດໝາຍອັນນິລັນດອນ ຕາມກຳຂອງຕົນ»។
Verse 303
त्वमश्विनौ यमौ मित्र: सोमस्त्वमसि चानिल: । आपट्ीमें हव्य और कव्य यथावत् प्रतिष्ठित हैं। देव! आप ही दग्ध करनेवाले अग्नि, धारण-पोषण करनेवाले धाता और बुद्धिके स्वामी बृहस्पति हैं। आप ही युगल अश्विनीकुमार, मित्र (सूर्य), चन्द्रमा और वायु हैं
ມັນດະປາລະ ສັນລະເສີນເທວະທີ່ຢູ່ຕໍ່ໜ້າວ່າ: «ທ່ານແມ່ນອັສວິນຄູ່, ຍະມະຄູ່, ມິຕຣະ, ໂສມະ, ແລະອະນິລະ—ລົມ. ໃນຍາມຄັບຂັນ ຮະວະ (ເຄື່ອງບູຊາແດ່ເທວະ) ແລະ ກະວະ (ເຄື່ອງບູຊາແດ່ບັນພະບຸລຸດ) ກໍຕັ້ງຢູ່ຢ່າງຖືກຕ້ອງໂດຍອານຸພາບຂອງທ່ານ. ໂອ ເທວະ! ທ່ານແມ່ນອັກນິຜູ້ເຜົາໄໝ້, ແມ່ນທາຕຣະຜູ້ຄ້ຳຈຸນແລະຫຼ້ຽງດູ, ແລະແມ່ນບຣິຫັສປະຕິ ເຈົ້າແຫ່ງປັນຍາ. ທ່ານແມ່ນອັສວິນີກຸມາຣະຄູ່, ມິຕຣະ (ພຣະອາທິດ), ຈັນທຣະ, ແລະວາຍຸ.»