पात्र
भीष्म
Bhīṣma
- श्लोक
- 2,609
- ग्रंथ
- 18
- अध्याय
- 892
ग्रंथ क्या कहते हैं
महाभारत में भीष्म, जिनका पहला नाम देवव्रत था, राजा शान्तनु और गंगा के पुत्र हैं, जिनका जन्म एक वसु के तेज से हुआ था। महाभारत 1.57.76महाभारत (गीता प्रेस) 1.96.47 भीष्म ने राज्य का त्याग कर दिया और आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया, ताकि एक निषादराज की पुत्री का विवाह उनके पिता से हो सके। महाभारत (गीता प्रेस) 1.101.97 इसी महाकाव्य में भीष्म कौरव सेना के सेनापति बनते हैं। महाभारत 14.59.8 अर्जुन के बाणों से बिंधकर वे बाणों की शय्या पर लेट जाते हैं। महाभारत (गीता प्रेस) 1.1.185 इसके बाद कुरुराज युधिष्ठिर भीष्म के बताए धर्म-निर्णयों को सुनकर अपना मन फिर से शांत और स्थिर कर पाते हैं। महाभारत 1.2.201
कहाँ पढ़ें
हर वह श्लोक जिसमें भीष्म का नाम आता है, ग्रंथ के अनुसार।
- 6.114.28
हे भरतश्रेष्ठ! क्रुद्ध अर्जुन ने भीष्म की भुजाओं के बल से प्रेरित उस शक्ति को पाँच बाणों से पाँच भागों में काट डाला।
- 1.94.67
तब देवव्रत वृद्ध क्षत्रियों के साथ दाशराज के पास गया और अपने पिता के लिए स्वयं उस कन्या का वरण करने लगा।
- 6.115.30
तब धर्मात्मा शान्तनव भीष्म ने सामने खड़े पाण्डवों और कुरुओं को प्रणाम करके उनसे कहा।
- 6.114.28
- 1.15.1
भीष्म बोले—हे ब्राह्मण! ब्रह्मा ने वाराणसीपुरी में (किसे) भेजकर क्या किया? और हे मुनि! जनार्दन (विष्णु) ने तथा शंकर (शिव) ने कौन-सा कर्म किया?
- 1.2.47
जो पहले ब्रह्मा ने महात्मा पुलस्त्य से कहा था, वही पुलस्त्य ने आगे गंगाद्वार (हरिद्वार) में भीष्म से प्रकट किया।
- 6.80.3
देवव्रत बहुत बड़े ज्ञानी थे, ध्यान योग में लगे रहते थे। सारे शास्त्रों का आश्रय थे, इंद्रियों को वश में रखते थे और पाप से मुक्त थे।
- 1.15.1
- 6.1.57.1
सूत बोले—हे द्विजश्रेष्ठो! उस पुण्य क्षेत्र में भीष्म ने स्वयं, ब्राह्मण-श्रेष्ठों की सम्मति और दृढ़ अंतःकरण के साथ, आदित्यदेव की विधिपूर्वक स्थापना की।
- 6.1.226.16
ज्ञान से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है—यह सत्य मैंने कहा है। हे नृप! यही उपदेश आगे चलकर शांतनुनन्दन भीष्म से भी सुना जाएगा।
- 6.1.72.5
तब नागपुर से भीष्म, द्रोण आदि सहित समस्त कौरव शीघ्र ही द्वारवती नगरी की ओर चल पड़े।
- 6.1.57.1
- 1.20.15
उनका प्रथम पुत्र गांगेय (भीष्म) महान वीर और अत्यंत बलवान था। उसी प्रकार सत्यवती से वे दो महाबली पुत्र उत्पन्न हुए।
- 6.24.22
राजा शांतनु स्वर्ग सिधार गए और मेरी माता विधवा हो गईं। वह साध्वी अपने दो पुत्रों के साथ भीष्म द्वारा रक्षित होकर रहने लगीं।
- 2.5.5
चार वर्षों तक राजा ने अपने पुत्र (देवव्रत) के साथ विहार करते हुए वैसे ही सुख प्राप्त किया, जैसे भगवान शिव अपने पुत्र कुमार (कार्तिकेय) के साथ आनंदित होते हैं।
- 1.20.15
मुख्य अध्याय
वे अध्याय जिनमें भीष्म सबसे अहम हैं।
Bhīṣma’s Fall to the Arrow-Bed
Central tragic hero and ethical pivot
Śāṃtanu’s Ideal Rule; Devavrata’s Return; The Satyavatī Marriage Condition and Bhīṣma’s Vow (आदि पर्व, अध्याय ९४)
Heir who converts a political problem into a moral absolute…
Bhīṣma’s Fall, the Arrow-bed (śara-talpa), and the Establishment of Guard
Fallen commander transformed into a living axis of dharma
Bhīṣma’s request for water; Arjuna’s Parjanya-astra; counsel to Duryodhana on reconciliation
शरशय्यास्थः धर्म-राजनीति-उपदेशकः
Janaka-Sulabhā Dialogue on Mokṣa and Non-attachment
Authoritative transmitter who frames doctrine through an…
Bhīṣma-Karṇa Saṃvāda on the Śaraśayyā (भीष्म-कर्ण संवादः शरशय्यायाम्)
Wounded patriarch dispensing truth, absolution, and…
Inquiry into the means to overcome Bhīṣma
Unconquerable commander who voluntarily discloses his own…
Bharadvāja’s Counsel on Crisis-Statecraft (Śānti Parva 138)
Primary instructor
Praise of Ācāra as the Basis of Longevity, Fame, and Prosperity
Normative authority who elevates ācāra as the master-key…
Dāyavibhāga (Inheritance Apportionment) and Household Precedence: Dialogue of Yudhiṣṭhira and Bhīṣma
Dharma-authority delivering casuistic inheritance doctrine with…
मुख्य प्रसंग
The Gita Begins: Arjuna's Despair on the Battlefield
भगवद गीता 1-2
Devavrata's Vow: How Bhishma Got His Name
महाभारत 1.94
Draupadi Dragged into the Assembly
महाभारत 2.60-2.63
Bhishma Falls to the Bed of Arrows
महाभारत 6.114-6.117
अन्य स्रोतों में Wikipedia · Wikidata Q1405629