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सोपान-प्रवेश: ‘भक्ति का जन्म’ से ‘भक्ति का समाज’ तक। बालकाण्ड में राम-नाम और राम-रूप का प्रथम स्थापन होता है; यहाँ विवाह-लीला ‘सगुण’ की साकार मधुरता के द्वारा जीव को ‘निरगुण’ सत्य की ओर उन्मुख करती है—लोक-रीति (वैदिक/लौकिक) के अनुशासन में प्रेम का शुद्धीकरण। यह चरण साधक को बताता है कि मुक्ति का द्वार ‘मंगल-आचार’ और ‘समधी-भाव’ (समता, आदर, विनय) से खुलता है।
此段婚坛之事,将婚礼的“甘美情爱(madhura-rati)”转化为“吉祥之法(maṅgala-dharma)”。其情味以甘美与奇妙相融,并以寂静为底:遮那迦与达沙罗陀的姻亲平等、天花雨、仙者祝祷,使民间庆典升华为“法之庆典”。图尔西在此把世间美的描写(容貌、衣饰、珠宝、饮馔、布施)化作修行之学:洗足、蜜乳供(madhupārka)、火供、执手成婚(pāṇigrahaṇa)、绕火行礼——皆为“阶梯”的踏板:净化感官之乐、柔伏我慢,并将关系神圣化(遮那迦以罗摩“如自在天(Īśa)”而礼拜)。于是,有相戏剧之甘露终指向无相之理:那位“摧破爱神之敌(manoj-ari)”者,亦是“破除劫垢(kalimal-bhañjana)”者。
Verse 667 (चौपाई)
मिले जनकु दसरथु अति प्रीतीं। करि बैदिक लौकिक सब रीतीं।। मिलत महा दोउ राज बिराजे। उपमा खोजि खोजि कबि लाजे।। लही न कतहुँ हारि हियँ मानी। इन्ह सम एइ उपमा उर आनी।। सामध देखि देव अनुरागे। सुमन बरषि जसु गावन लागे।। जगु बिरंचि उपजावा जब तें। देखे सुने ब्याह बहु तब तें।। सकल भाँति सम साजु समाजू। सम समधी देखे हम आजू।। देव गिरा सुनि सुंदर साँची। प्रीति अलौकिक दुहु दिसि माची।। देत पाँवड़े अरघु सुहाए। सादर जनकु मंडपहिं ल्याए।।
遮那迦与达沙拉塔怀着深厚的情谊相会,遵循一切吠陀与世俗礼仪。两位伟大的君王相会,光彩照人,诗人们寻找比喻却感到惭愧。他们找不到令心中满意的比喻,便在心中想出这样的比拟:就像这两位一样。见到这联姻,天神们心生爱意,撒下花雨并开始歌颂赞美。自从梵天创造世界以来,许多婚礼被人所见所闻。在各方面,同样的布置与聚会,同样的亲家,我们今日所见。听到天神的话语,美丽的莎奇心想:双方都生起了非凡的爱意。遮那迦怀着敬意,赐座并献上合适的礼物,将他们迎入华堂。
Verse 668 (छंद)
मंडपु बिलोकि बिचीत्र रचनाँ रुचिरताँ मुनि मन हरे।। निज पानि जनक सुजान सब कहुँ आनि सिंघासन धरे।। कुल इष्ट सरिस बसिष्ट पूजे बिनय करि आसिष लही। कौसिकहि पूजत परम प्रीति कि रीति तौ न परै कही।।
凝视着华堂奇妙的构造,圣贤们的心被其美丽所吸引。明智的遮那迦亲手为每人搬来宝座。瓦西斯塔如同家族神祇般受到敬拜,他谦卑地接受祝福。毗湿婆密多罗受到至高的敬爱,那种礼遇难以言表。
Verse 669 (दोहा/सोरठा)
बामदेव आदिक रिषय पूजे मुदित महीस। दिए दिब्य आसन सबहि सब सन लही असीस।।320।।
投山仙人等圣贤受到国王欢喜的敬拜。他赐予所有人神圣的座位,所有人都接受了祝福。
Verse 670 (चौपाई)
बहुरि कीन्ह कोसलपति पूजा। जानि ईस सम भाउ न दूजा।। कीन्ह जोरि कर बिनय बड़ाई। कहि निज भाग्य बिभव बहुताई।। पूजे भूपति सकल बराती। समधि सम सादर सब भाँती।। आसन उचित दिए सब काहू। कहौं काह मूख एक उछाहू।। सकल बरात जनक सनमानी। दान मान बिनती बर बानी।। बिधि हरि हरु दिसिपति दिनराऊ। जे जानहिं रघुबीर प्रभाऊ।। कपट बिप्र बर बेष बनाएँ। कौतुक देखहिं अति सचु पाएँ।। पूजे जनक देव सम जानें। दिए सुआसन बिनु पहिचानें।।
拘萨罗之主再次举行敬拜,知道没有其他情感能与对主的敬爱相比。他双手合十,诚恳祈求,述说自己的福分与丰盛的荣耀。国王敬拜所有的迎亲宾客,以同样的欢喜与敬意对待各方。他赐予每人合适的座位,我还能说什么呢?我的心充满欢喜。遮那迦以礼物、敬意、祈请与善言,礼遇整个迎亲队伍。梵天、毗湿奴、湿婆、方位之主与太阳神,所有知晓罗怙之主威力者。他们化作婆罗门形象,观看这奇观,觉得真实无比。遮那迦敬拜他们,视他们为天神,在未识破他们身份的情况下赐予上座。
Verse 671 (छंद)
पहिचान को केहि जान सबहिं अपान सुधि भोरी भई। आनंद कंदु बिलोकि दूलहु उभय दिसि आनँद मई।। सुर लखे राम सुजान पूजे मानसिक आसन दए। अवलोकि सीलु सुभाउ प्रभु को बिबुध मन प्रमुदित भए।।
谁能认出他们?所有人都沉浸在自我的思绪中,夜色已深。见到新郎,那喜悦之源,双方都充满欢喜。天神们见到明智的罗摩,在心中敬拜他,献上心意的座位。见到主的品德与本性,圣贤们的心中充满喜悦。
Verse 672 (दोहा/सोरठा)
रामचंद्र मुख चंद्र छबि लोचन चारु चकोर। करत पान सादर सकल प्रेमु प्रमोदु न थोर।।321।।
罗摩旃陀罗的面容如明月般美丽,他的双眼如查科拉鸟般迷人。众人皆怀着敬意享用槟榔,他们的爱与喜悦无穷无尽。
Verse 673 (चौपाई)
समउ बिलोकि बसिष्ठ बोलाए। सादर सतानंदु सुनि आए।। बेगि कुअँरि अब आनहु जाई। चले मुदित मुनि आयसु पाई।। रानी सुनि उपरोहित बानी। प्रमुदित सखिन्ह समेत सयानी।। बिप्र बधू कुलबृद्ध बोलाईं। करि कुल रीति सुमंगल गाईं।। नारि बेष जे सुर बर बामा। सकल सुभायँ सुंदरी स्यामा।। तिन्हहि देखि सुखु पावहिं नारीं। बिनु पहिचानि प्रानहु ते प्यारीं।। बार बार सनमानहिं रानी। उमा रमा सारद सम जानी।। सीय सँवारि समाजु बनाई। मुदित मंडपहिं चलीं लवाई।।
观察时辰,瓦西什塔召唤;沙塔南达闻声恭敬前来。"快去将公主带来。"众仙人领命,欢喜离去。王后们听闻此言,与明智的同伴一同欢喜。她们召唤婆罗门妇女和家族长者,遵循家族传统,唱诵吉祥之歌。那些化身为美丽女子的女神们,天生丽质,肤色黝黑。妇女们见到她们便心生欢喜,虽未相识,却爱之胜过生命。王后们一再礼敬她们,视其为乌玛、罗摩和萨拉达。她们装扮悉多,组成队伍,欢喜地引领她至婚礼殿堂。
Verse 674 (छंद)
चलि ल्याइ सीतहि सखीं सादर सजि सुमंगल भामिनीं। नवसप्त साजें सुंदरी सब मत्त कुंजर गामिनीं।। कल गान सुनि मुनि ध्यान त्यागहिं काम कोकिल लाजहीं। मंजीर नूपुर कलित कंकन ताल गती बर बाजहीं।।
众女伴恭敬地装扮悉多,以吉祥饰品相饰,引领她前来。七百名美丽女子随行,步态如发情之大象。众仙人闻其歌声,舍弃禅定;爱神之杜鹃亦感羞惭。脚铃、足镯、腕镯随优雅步伐奏出乐音。
Verse 675 (दोहा/सोरठा)
सोहति बनिता बृंद महुँ सहज सुहावनि सीय। छबि ललना गन मध्य जनु सुषमा तिय कमनीय।।322।।
悉多在众女子中光彩夺目,天生丽质。她的美丽如同优雅女子在众少女中独树一帜。
Verse 676 (चौपाई)
सिय सुंदरता बरनि न जाई। लघु मति बहुत मनोहरताई।। आवत दीखि बरातिन्ह सीता।।रूप रासि सब भाँति पुनीता।। सबहि मनहिं मन किए प्रनामा। देखि राम भए पूरनकामा।। हरषे दसरथ सुतन्ह समेता। कहि न जाइ उर आनँदु जेता।। सुर प्रनामु करि बरसहिं फूला। मुनि असीस धुनि मंगल मूला।। गान निसान कोलाहलु भारी। प्रेम प्रमोद मगन नर नारी।। एहि बिधि सीय मंडपहिं आई। प्रमुदित सांति पढ़हिं मुनिराई।। तेहि अवसर कर बिधि ब्यवहारू। दुहुँ कुलगुर सब कीन्ह अचारू।।
悉多的美丽无法言说,我有限的智慧难以尽述其迷人之处。迎亲队伍渐近,悉多现身,她是美的化身,处处纯洁。众人心中默默顶礼,见到罗摩,心愿圆满。达沙拉塔与众子一同欢喜,心中喜悦难以言表。诸神顶礼并撒下天花,众仙人诵念祝福,此乃一切吉祥之本。歌声、鼓声、欢呼声此起彼伏,男女皆沉浸在爱与喜悦之中。如是,悉多来到婚礼殿堂,众仙人充满喜悦与安宁,诵念神圣经文。此时,两族导师依仪轨举行一切仪式。
Verse 677 (छंद)
आचारु करि गुर गौरि गनपति मुदित बिप्र पुजावहीं। सुर प्रगटि पूजा लेहिं देहिं असीस अति सुखु पावहीं।। मधुपर्क मंगल द्रब्य जो जेहि समय मुनि मन महुँ चहैं। भरे कनक कोपर कलस सो सब लिएहिं परिचारक रहैं।।1।। कुल रीति प्रीति समेत रबि कहि देत सबु सादर कियो। एहि भाँति देव पुजाइ सीतहि सुभग सिंघासनु दियो।। सिय राम अवलोकनि परसपर प्रेम काहु न लखि परै।। मन बुद्धि बर बानी अगोचर प्रगट कबि कैसें करै।।2।।
仪式完毕,欢喜的婆罗门敬拜导师、高丽和甘尼什。诸神显现接受敬拜并赐予祝福,众人获得大乐。蜜供、吉祥之物及仪式所需,凡众仙人心之所愿,金瓶金罐皆已盛满,侍者持一切物品侍立。依家族传统与爱心,恭敬祈请太阳,一切皆已备妥。如是敬拜诸神,赐悉多以美丽宝座。悉多与罗摩相视,彼此之爱无人能察。此爱超越心意、智慧、言语与感官,诗人如何能表达?
Verse 678 (दोहा/सोरठा)
होम समय तनु धरि अनलु अति सुख आहुति लेहिं। बिप्र बेष धरि बेद सब कहि बिबाह बिधि देहिं।।323।।
火祭之时,火神现身,欢喜接受祭品。吠陀化身为婆罗门,诵念一切婚礼仪轨。
Verse 679 (चौपाई)
जनक पाटमहिषी जग जानी। सीय मातु किमि जाइ बखानी।। सुजसु सुकृत सुख सुदंरताई। सब समेटि बिधि रची बनाई।। समउ जानि मुनिबरन्ह बोलाई। सुनत सुआसिनि सादर ल्याई।। जनक बाम दिसि सोह सुनयना। हिमगिरि संग बनि जनु मयना।। कनक कलस मनि कोपर रूरे। सुचि सुंगध मंगल जल पूरे।। निज कर मुदित रायँ अरु रानी। धरे राम के आगें आनी।। पढ़हिं बेद मुनि मंगल बानी। गगन सुमन झरि अवसरु जानी।। बरु बिलोकि दंपति अनुरागे। पाय पुनीत पखारन लागे।।
贾纳卡与其王后名闻天下,悉多为其女,如何能尽述其德?她的美名、功德、幸福与美丽,梵天汇聚一切而创造之。知时已至,召唤大仙;已婚妇女闻声恭敬携吉祥之物前来。贾纳卡左侧,美目如月,如明月现于雪山之旁。金瓶、宝器,美丽洁净,盛满芳香吉祥之水。国王与王后亲手欢喜持之,置于罗摩面前。众仙人诵念吠陀吉祥之语,知时已至,天花从天而降。见新人相爱,开始为他们洗足。
Verse 680 (छंद)
लागे पखारन पाय पंकज प्रेम तन पुलकावली। नभ नगर गान निसान जय धुनि उमगि जनु चहुँ दिसि चली।। जे पद सरोज मनोज अरि उर सर सदैव बिराजहीं। जे सकृत सुमिरत बिमलता मन सकल कलि मल भाजहीं।।1।। जे परसि मुनिबनिता लही गति रही जो पातकमई। मकरंदु जिन्ह को संभु सिर सुचिता अवधि सुर बरनई।। करि मधुप मन मुनि जोगिजन जे सेइ अभिमत गति लहैं। ते पद पखारत भाग्यभाजनु जनकु जय जय सब कहै।।2।। बर कुअँरि करतल जोरि साखोचारु दोउ कुलगुर करैं। भयो पानिगहनु बिलोकि बिधि सुर मनुज मुनि आँनद भरैं।। सुखमूल दूलहु देखि दंपति पुलक तन हुलस्यो हियो। करि लोक बेद बिधानु कन्यादानु नृपभूषन कियो।।3।। हिमवंत जिमि गिरिजा महेसहि हरिहि श्री सागर दई। तिमि जनक रामहि सिय समरपी बिस्व कल कीरति नई।। क्यों करै बिनय बिदेहु कियो बिदेहु मूरति सावँरी। करि होम बिधिवत गाँठि जोरी होन लागी भावँरी।।4।।
开始洗其莲花足,爱使其身毛竖立。天城中歌声、鼓声、胜利之声回荡,欢喜似向四方传播。此莲花足常驻爱神之敌的心湖中,一念即净化心灵,消除卡利时代一切污垢。触之,罪人亦得解脱;湿婆顶载其甘露,诸神常赞。仙人瑜伽士心中敬拜,得遂所愿。贾纳卡,最有福者,洗此足时,众人皆呼胜利、胜利。最上婆罗门将王子与少女之手相合,如族中导师行婚礼。见牵手礼,梵天、诸神、世人、仙人皆充满喜悦。见新郎为乐之源,新人身心欢喜。依吠陀与世间仪轨,诸王之冠行赠女之礼。如喜马万特将吉里贾许配湿婆,如哈里将吉祥天女许配大海,贾纳卡将悉多许配罗摩,新名传遍世界。如何能表达恳求?维德哈如无身者而行,依仪轨行祭,结绳系结,婚礼开始。
Verse 681 (दोहा/सोरठा)
जय धुनि बंदी बेद धुनि मंगल गान निसान। सुनि हरषहिं बरषहिं बिबुध सुरतरु सुमन सुजान।।324।।
胜利之声、祝福、吠陀诵念、吉祥之歌与鼓声齐鸣,明智的诸神欢喜,从天树撒下天花。
Verse 682 (चौपाई)
कुअँरु कुअँरि कल भावँरि देहीं।।नयन लाभु सब सादर लेहीं।। जाइ न बरनि मनोहर जोरी। जो उपमा कछु कहौं सो थोरी।। राम सीय सुंदर प्रतिछाहीं। जगमगात मनि खंभन माहीं । मनहुँ मदन रति धरि बहु रूपा। देखत राम बिआहु अनूपा।। दरस लालसा सकुच न थोरी। प्रगटत दुरत बहोरि बहोरी।। भए मगन सब देखनिहारे। जनक समान अपान बिसारे।। प्रमुदित मुनिन्ह भावँरी फेरी। नेगसहित सब रीति निबेरीं।। राम सीय सिर सेंदुर देहीं। सोभा कहि न जाति बिधि केहीं।। अरुन पराग जलजु भरि नीकें। ससिहि भूष अहि लोभ अमी कें।। बहुरि बसिष्ठ दीन्ह अनुसासन। बरु दुलहिनि बैठे एक आसन।।
王子与少女心中充满羞涩的喜悦,他们彼此凝视,恭敬地接受这美好的景象。这迷人的结合无法言说,无论我用何种比喻,都显得不足。罗摩与悉多显得极为美丽,如同柱间的宝石般闪耀。仿佛爱神与他的伴侣化作多种形态,观看罗摩这无与伦比的婚礼。他们的目光中既有渴望又有羞涩,一次又一次地显现又退缩。所有观礼者都沉醉其中,如同遮那迦王一般忘记了自己。欢喜的圣者们完成了婚礼仪式,连同所有的礼节与赠礼。罗摩与悉多在额上涂抹朱砂,他们的光彩无法为任何人所描述。如同莲花上的红色花粉,月亮被装饰;大蛇心中充满对甘露的渴望。然后瓦西什塔给予指示,新娘与新郎同坐于一座位之上。
Verse 683 (छंद)
बैठे बरासन रामु जानकि मुदित मन दसरथु भए। तनु पुलक पुनि पुनि देखि अपनें सुकृत सुरतरु फल नए।। भरि भुवन रहा उछाहु राम बिबाहु भा सबहीं कहा। केहि भाँति बरनि सिरात रसना एक यहु मंगलु महा।।1।। तब जनक पाइ बसिष्ठ आयसु ब्याह साज सँवारि कै। माँडवी श्रुतिकीरति उरमिला कुअँरि लईं हँकारि के।। कुसकेतु कन्या प्रथम जो गुन सील सुख सोभामई। सब रीति प्रीति समेत करि सो ब्याहि नृप भरतहि दई।।2।। जानकी लघु भगिनी सकल सुंदरि सिरोमनि जानि कै। सो तनय दीन्ही ब्याहि लखनहि सकल बिधि सनमानि कै।। जेहि नामु श्रुतकीरति सुलोचनि सुमुखि सब गुन आगरी। सो दई रिपुसूदनहि भूपति रूप सील उजागरी।।3।। अनुरुप बर दुलहिनि परस्पर लखि सकुच हियँ हरषहीं। सब मुदित सुंदरता सराहहिं सुमन सुर गन बरषहीं।। सुंदरी सुंदर बरन्ह सह सब एक मंडप राजहीं। जनु जीव उर चारिउ अवस्था बिमुन सहित बिराजहीं।।4।।
罗摩与遮那迦之女就座,达沙拉塔心中欢喜,一次又一次地看着自己善行的果实,全身汗毛竖立。整个世界充满欢腾,所有人都在谈论罗摩的婚礼。舌头如何能描述这伟大的吉祥之事?然后遮那迦王得到瓦西什塔的指示,准备好婚礼的安排。他将曼达维、室鲁塔基尔蒂和乌尔米拉以隆重的仪式许配给诸位王子。拘萨罗国王的女儿具备美德、端庄、喜悦与美貌,他以所有的礼遇与慈爱将她许配给婆罗多。知道她是遮那迦之女的妹妹,是所有美女中的珍宝,他以所有的礼遇将她许配给罗什曼那。名为室鲁塔基尔蒂者,眼如莲花,面容美丽,在一切美德中最为卓越,他将她许配给敌人的毁灭者,其美貌与德行闻名于世。看到新郎与新娘相配,他们心中既羞涩又欢喜。所有人都欢喜赞叹他们的美丽,天神们降下花雨。美丽的新娘与英俊的新郎在同一华盖下闪耀,仿佛人生的四个阶段与圣者们同在。
Verse 684 (दोहा/सोरठा)
मुदित अवधपति सकल सुत बधुन्ह समेत निहारि। जनु पार महिपाल मनि क्रियन्ह सहित फल चारि।।325।।
阿约迪亚之主欢喜地注视着他所有的儿子与他们的新娘,如同一位国王看见四棵如意树结满果实。
Verse 685 (चौपाई)
जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी। सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी।। कहि न जाइ कछु दाइज भूरी। रहा कनक मनि मंडपु पूरी।। कंबल बसन बिचित्र पटोरे। भाँति भाँति बहु मोल न थोरे।। गज रथ तुरग दास अरु दासी। धेनु अलंकृत कामदुहा सी।। बस्तु अनेक करिअ किमि लेखा। कहि न जाइ जानहिं जिन्ह देखा।। लोकपाल अवलोकि सिहाने। लीन्ह अवधपति सबु सुखु माने।। दीन्ह जाचकन्हि जो जेहि भावा। उबरा सो जनवासेहिं आवा।। तब कर जोरि जनकु मृदु बानी। बोले सब बरात सनमानी।।
正如罗怙族英雄的婚礼被描述的那样,所有王子的婚礼也如此举行。所赠的嫁妆无法言说,极为丰盛;金银珠宝的华盖依然满溢。毯子、衣裳和精美的布匹,种类繁多,价值连城,不计其数。大象、战车、马匹、男女仆人,以及装饰如如意神牛的奶牛。物品无数,如何能计算?无法言说,只有亲眼所见者才知道。世界的守护者惊奇地观看,阿约迪亚之主欢喜地接受一切。他给予每个求者所喜悦之物,婚礼宾客们回到他们的住处。然后遮那迦王合掌,以温和的言语,恭敬地对所有婚礼宾客说话。
Verse 686 (छंद)
सनमानि सकल बरात आदर दान बिनय बड़ाइ कै। प्रमुदित महा मुनि बृंद बंदे पूजि प्रेम लड़ाइ कै।। सिरु नाइ देव मनाइ सब सन कहत कर संपुट किएँ। सुर साधु चाहत भाउ सिंधु कि तोष जल अंजलि दिएँ।।1।। कर जोरि जनकु बहोरि बंधु समेत कोसलराय सों। बोले मनोहर बयन सानि सनेह सील सुभाय सों।। संबंध राजन रावरें हम बड़े अब सब बिधि भए। एहि राज साज समेत सेवक जानिबे बिनु गथ लए।।2।। ए दारिका परिचारिका करि पालिबीं करुना नई। अपराधु छमिबो बोलि पठए बहुत हौं ढीट्यो कई।। पुनि भानुकुलभूषन सकल सनमान निधि समधी किए। कहि जाति नहिं बिनती परस्पर प्रेम परिपूरन हिए।।3।। बृंदारका गन सुमन बरिसहिं राउ जनवासेहि चले। दुंदुभी जय धुनि बेद धुनि नभ नगर कौतूहल भले।। तब सखीं मंगल गान करत मुनीस आयसु पाइ कै। दूलह दुलहिनिन्ह सहित सुंदरि चलीं कोहबर ल्याइ कै।।4।।
以恭敬、赠礼、谦卑和盛大的赞美礼遇整个婚礼宾客,众多圣者充满喜悦,以爱与虔诚进行礼拜。天神们低头礼拜,对所有人说,双手合十:天神与圣者们希望情感的海洋得到满足,他们以手捧水奉献。遮那迦王合掌,再次对拘萨罗国王及其族人说话,言语迷人,充满爱、德行与善良。国王啊,我们现在在各方面都成为您的亲人;请将我们连同这王室仪仗视为您的仆人,毫无保留。这些女儿将作为侍女服侍,请以新的慈悲抚育她们。请宽恕任何过失,我说得太多,有些冒昧。然后,太阳族的装饰者恭敬地对待所有的人,使宝藏之主成为他的姻亲。无需言语,他们的心中充满相互的爱。天神们降下花雨,国王们回到住处。胜利的鼓声与吠陀的诵唱充满天空,城中充满惊奇。然后,在圣者之主的命令下,妇女们唱起吉祥之歌,美丽的新娘与新郎们前往婚礼华盖。
Verse 687 (दोहा/सोरठा)
पुनि पुनि रामहि चितव सिय सकुचति मनु सकुचै न। हरत मनोहर मीन छबि प्रेम पिआसे नैन।।326।।
悉多一次又一次地凝视罗摩,她的心羞涩,却不感到羞涩。她迷人的双眼充满爱的渴望,饮尽他那迷人形体的美丽。
Verse 688 (चौपाई)
स्याम सरीरु सुभायँ सुहावन। सोभा कोटि मनोज लजावन।। जावक जुत पद कमल सुहाए। मुनि मन मधुप रहत जिन्ह छाए।। पीत पुनीत मनोहर धोती। हरति बाल रबि दामिनि जोती।। कल किंकिनि कटि सूत्र मनोहर। बाहु बिसाल बिभूषन सुंदर।। पीत जनेउ महाछबि देई। कर मुद्रिका चोरि चितु लेई।। सोहत ब्याह साज सब साजे। उर आयत उरभूषन राजे।। पिअर उपरना काखासोती। दुहुँ आँचरन्हि लगे मनि मोती।। नयन कमल कल कुंडल काना। बदनु सकल सौंदर्ज निधाना।। सुंदर भृकुटि मनोहर नासा। भाल तिलकु रुचिरता निवासा।। सोहत मौरु मनोहर माथे। मंगलमय मुकुता मनि गाथे।।
他黝黑的身体天生美丽,其光彩令千万爱神羞愧。他的莲花足佩戴脚铃,圣者们的心如蜜蜂般常在其上盘旋。他黄色、神圣而美丽的陀提闪耀,如同太阳与闪电的光辉。他的腰间系着迷人的小铃腰带,双臂宽阔,装饰美丽。他黄色的圣线给予极大的美丽,手上的戒指夺人心魄。他佩戴所有婚礼装饰而闪耀,胸前装饰着项链。他的上衣是黄色的,两件衣物的边缘镶嵌着珍珠宝石。他的莲花眼与耳朵佩戴耳环,他的面容是一切美丽的宝库。他美丽的眉毛与迷人的鼻子,额头上的提拉克,是光辉的居所。他可爱的头戴着皇冠,吉祥如意,镶嵌着珍珠宝石。
Verse 689 (छंद)
गाथे महामनि मौर मंजुल अंग सब चित चोरहीं। पुर नारि सुर सुंदरीं बरहि बिलोकि सब तिन तोरहीं।। मनि बसन भूषन वारि आरति करहिं मंगल गावहिं। सुर सुमन बरिसहिं सूत मागध बंदि सुजसु सुनावहीं।।1।। कोहबरहिं आने कुँअर कुँअरि सुआसिनिन्ह सुख पाइ कै। अति प्रीति लौकिक रीति लागीं करन मंगल गाइ कै।। लहकौरि गौरि सिखाव रामहि सीय सन सारद कहैं। रनिवासु हास बिलास रस बस जन्म को फलु सब लहैं।।2।। निज पानि मनि महुँ देखिअति मूरति सुरूपनिधान की। चालति न भुजबल्ली बिलोकनि बिरह भय बस जानकी।। कौतुक बिनोद प्रमोदु प्रेमु न जाइ कहि जानहिं अलीं। बर कुअँरि सुंदर सकल सखीं लवाइ जनवासेहि चलीं।।3।। तेहि समय सुनिअ असीस जहँ तहँ नगर नभ आनँदु महा। चिरु जिअहुँ जोरीं चारु चारयो मुदित मन सबहीं कहा।। जोगीन्द्र सिद्ध मुनीस देव बिलोकि प्रभु दुंदुभि हनी। चले हरषि बरषि प्रसून निज निज लोक जय जय जय भनी।।4।।
皇冠镶嵌着巨大的宝石,他可爱的肢体夺走每一颗心。城中的妇女与美丽的女神们注视着他,赞美他,打破一切拘束。她们以水、衣裳和装饰品进行阿尔蒂,唱着吉祥之歌。天神们降下花雨,吟游诗人与赞颂者歌颂他的荣耀名声。王子与公主们被带到婚礼华盖,已婚妇女们充满喜悦,以极大的爱按照世俗习俗进行吉祥仪式。肤色白皙的妇女教导罗摩与悉多,她们说着智慧的话语。在后宫充满欢笑、游戏与爱的喜悦中,他们获得了出生的果实。在手中的宝石镜子中,他们凝视着那美丽宝藏的形象。遮那迦之女被分离的恐惧所征服,无法抬起双臂观看。那喜悦、游戏、欢乐与爱无法言说,只有妇女们知道。美丽的新娘与所有的朋友前往婚礼华盖。那时,请听那充满城市与天空的巨大喜悦的祝福。愿你们长寿,他们心中欢喜地说,四人相拥。瑜伽之主、成就者、圣者之主与天神们,看见主,敲响胜利之鼓。他们欢喜地离去,降下花雨,向各自的世界高呼胜利、胜利、胜利。
Verse 690 (दोहा/सोरठा)
सहित बधूटिन्ह कुअँर सब तब आए पितु पास। सोभा मंगल मोद भरि उमगेउ जनु जनवास।।327।।
然后所有王子与他们的新娘来到父亲面前。光彩、吉祥与喜悦充满城市,仿佛是出生的居所。
Verse 691 (चौपाई)
पुनि जेवनार भई बहु भाँती। पठए जनक बोलाइ बराती।। परत पाँवड़े बसन अनूपा। सुतन्ह समेत गवन कियो भूपा।। सादर सबके पाय पखारे। जथाजोगु पीढ़न्ह बैठारे।। धोए जनक अवधपति चरना। सीलु सनेहु जाइ नहिं बरना।। बहुरि राम पद पंकज धोए। जे हर हृदय कमल महुँ गोए।। तीनिउ भाई राम सम जानी। धोए चरन जनक निज पानी।। आसन उचित सबहि नृप दीन्हे। बोलि सूपकारी सब लीन्हे।। सादर लगे परन पनवारे। कनक कील मनि पान सँवारे।।
然后婚宴以多种方式举行,遮那迦王派人邀请婚礼宾客。他们为他们洗脚,给予无与伦比的衣裳,国王也为女儿们举行了送别仪式。他恭敬地为所有人洗脚,按照他们的等级让他们就座。遮那迦王为阿约迪亚之主洗脚,他的德行与慈爱无法描述。他又为罗摩洗莲花足,这能除去心中的污垢。他将三位兄弟视为与罗摩平等,亲手为他们洗脚。国王给予所有人合适的座位,说话并接受他们为女婿。他恭敬地开始礼遇客人,以金饰和宝石装饰他们。
Verse 692 (दोहा/सोरठा)
सूपोदन सुरभी सरपि सुंदर स्वादु पुनीत। छन महुँ सब कें परुसि गे चतुर सुआर बिनीत।।328।।
食物芬芳馥郁,色香味俱全,清净无染。顷刻之间,聪慧谦恭的主人便将一切奉于众人面前。
Verse 693 (चौपाई)
पंच कवल करि जेवन लअगे। गारि गान सुनि अति अनुरागे।। भाँति अनेक परे पकवाने। सुधा सरिस नहिं जाहिं बखाने।। परुसन लगे सुआर सुजाना। बिंजन बिबिध नाम को जाना।। चारि भाँति भोजन बिधि गाई। एक एक बिधि बरनि न जाई।। छरस रुचिर बिंजन बहु जाती। एक एक रस अगनित भाँती।। जेवँत देहिं मधुर धुनि गारी। लै लै नाम पुरुष अरु नारी।। समय सुहावनि गारि बिराजा। हँसत राउ सुनि सहित समाजा।। एहि बिधि सबहीं भौजनु कीन्हा। आदर सहित आचमनु दीन्हा।।
他们取了五口食物,开始进食;听闻歌声乐音,心中充满无限欢喜。各式各样的菜肴被端上,如同甘露,难以言表。贤明的主人开始侍奉;菜肴种类繁多,谁能知晓其名?备有四种食物,每一种都无法描述。菜肴种类繁多,美味可口;每一道都有无数风味。进食时他们唱起甜美歌谣;男女众人齐声应和。时光美好,歌声悠扬;国王听闻,与众人一同欢笑。如此众人皆享用了膳食;随后恭敬地奉上漱口之水。
Verse 694 (दोहा/सोरठा)
देइ पान पूजे जनक दसरथु सहित समाज। जनवासेहि गवने मुदित सकल भूप सिरताज।।329।।
遮纳迦王以槟榔敬拜十车王及全体会众。诸王欢喜愉悦,各自返回住所。
परंपरागत मान्यता में विवाह-प्रसंग का पाठ ‘गृहस्थ-धर्म की शुद्धि’, दांपत्य-सौहार्द, कुल-समन्वय, और मंगल-कर्मों की सिद्धि देता है। विशेषतः ‘पद-पखारन/पाणिग्रहण/होम’ के वर्णन का श्रवण मन को ‘लोक-रस’ से उठाकर ‘हरि-रस’ में स्थिर करता है—विघ्न-शमन, सद्बुद्धि, और प्रेम-भक्ति की वृद्धि।
सामान्यतः विवाह/मंगल-प्रसंग में ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ (नाम-संकीर्तन) या ‘सियाराममय सब जग जानी’ भाव-स्मरण समपुट रूप में जोड़ा जाता है। कुछ परंपराओं में गौरी-गणपति पूजन-संदर्भ हेतु ‘गौरी गणपति’ मंगलाचरण/‘विघ्न हरन मंगल करन’ की आवृत्ति भी की जाती है।
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