Character · Ramcharitmanas
Lakshmana in the Ramcharitmanas
लक्ष्मणNamed in 294 verses
Speaks in 38 verses
In this book
Key chapters
The chapters where Lakshmana matters most.
त्याग-दीक्षा का सोपान: राजधर्म, गृहधर्म और व्यक्तिगत आसक्ति का परित्याग करके ‘वन-मार्ग’ को ‘अंतर-मार्ग’ बनाना। इस काण्ड में राम का निष्कासन केवल कथा-घटना नहीं, साधक-चित्त का संस्कार है, जहाँ विरह, करुण
सोपान-प्रवेश: ‘भक्ति का जन्म’, चित्त का संस्कार, दृष्टि का शुद्धीकरण, और रूप-माधुर्य के द्वारा सगुण ब्रह्म में मन का स्थिरीकरण। इस काण्ड में कथा-श्रवण स्वयं साधना बनता है: बाल-लीला और मिथिला-लीला ‘आकर्
सोपान-प्रवेश: ‘भक्ति का जन्म’ और अहं-क्रोध-प्रताप के बीच मर्यादा का प्राकट्य। बालकाण्ड इस अर्थ में प्रथम सीढ़ी है कि यहाँ राम-नाम/राम-रूप के प्रति श्रद्धा, विनय, और गुरु-समाज में व्यवहार-धर्म का संस्क
सोपान-प्रवेश: ‘दर्शन’ से ‘आसक्ति’ और ‘श्रद्धा’ से ‘वर-निश्चय’ तक। बालकाण्ड में भक्ति का जन्म ‘श्रवण-कीर्तन’ से नहीं, ‘साक्षात् रूप-दर्शन’ से भी होता है, नगर-नारी, बालक, मुनि-पत्नी, सबके हृदय में राम-रू
यह सोपान ‘सखा-धर्म’ और ‘वैराग्य-प्रबोधन’ का द्वार है: साधक-चित्त (सुग्रीव/वानर-समुदाय) को राज्य-भोग, भय, और प्रमाद से निकालकर ‘राम-काज’ में स्थिर करना। बालि-वध के बाद करुणा, ज्ञान, और नीति का संगम दिख
यह सोपान ‘त्याग-धर्म’ का द्वार है: राजसुख के शिखर पर खड़े होकर भी राम-धर्म के लिए स्वेच्छा से वनगमन स्वीकारते हैं। साधक के भीतर यही रूपांतरण घटता है, ‘मेरा अधिकार’ से ‘ईश्वर-आज्ञा’ की ओर, तथा गृह-आश्रय
यह सोपान ‘त्याग-धर्म’ का द्वार है, राज्य, सुख, और लोक-प्रतिष्ठा का स्वेच्छा-परित्याग करके ‘राम-आज्ञा’ को परम सत्य मानना। अयोध्या काण्ड में भक्ति का परिपाक करुण-रस के द्वारा होता है: वियोग, पछितावा, और
त्याग-दीक्षा का सोपान: राजसुख-सम्पदा के मध्य ‘धर्म’ की पुकार, और ‘वियोग’ के भीतर ‘राम-पद-नेह’ का जागरण। यहाँ गृहस्थ-व्यवस्था (राजधर्म, पितृवचन, कुलमर्यादा) और परमार्थ (वैराग्य, विवेक, भक्ति) का निर्णा
त्याग और आज्ञापालन का सोपान: राजधर्म के शिखर से वनगमन का अवरोह, जहाँ ‘लोक-मान्यता’ (जन-प्रेम) और ‘आत्म-निवेदन’ (ईश्वर-इच्छा) एक हो जाते हैं। यह चरण साधक को सिखाता है कि प्रियतम-धर्म (राम) का अनुसरण बा
This Sopāna is the ‘Vana-sādhanā’ step: the soul leaves the social city (rājya, maryādā) and enters the inner forest where desire, fear, and deception appear unclothed. The wilderness becomes a crucib
Key episodes
Rama and Sita in the Flower Garden (Pushpavatika)
Ramcharitmanas 1.23-1.24
The Boatman Washes Rama's Feet (Kevat)
Ramcharitmanas 2.11
Every verse that names Lakshmana
294 verses
- 1.2.35
मैं जनक और उनके परिवार को प्रणाम करता हूँ, जिन्हें राम के चरणों के लिए गेहरा छिपा प्यार था। उन्होंने इस प्यार को योग और राजा के सुख दोनों के बीच छिपा रखा, पर राम को देखते ही वो सब सामने आ गया। सबसे पहले मैं भरत के चरणों को प्रणाम करता हूँ…
- 1.3.41
दोनो अक्षर मीठे हैं और दिल को भाते हैं। यह अक्षरों की दो आंखें हैं, और भक्त की जान हैं। याद करना आसान है और सबको खुशी देते हैं। इस दुनिया में फायदा हैं, और आगे वाली दुनिया में सहारा हैं। बोलना, सुनना, और याद करना बहुत अच्छा है। तुलसीदास को…
- 1.6.106
लछिमन ने देखा, उमा ने जो रूप धारा था। वो हैरान रह गया, दिल में बहुत घबराना हुआ। वो बहुत शांत और समझदार था, इसलिए कुछ कह नहीं सका। क्योंकि उसे भगवान की ताकत मालूम थी। पर भगवान, जो सब कुछ देखता है और सबके दिल की बात जानता है, उसने सती का…
- 1.6.110
जिधर जिधर देखा, उतने राम दिखे। हर राम के साथ सारे भगवान और उनकी शक्तियां भी दिखी। संसार के सारे जीव, चलने वाले और ना चलने वाले, उनके भी अनेक प्रकार देखे। भगवान अलग अलग रूप धर के प्रभु की पूजा कर रहे थे, पर राम का दूसरा रूप कहीं नहीं दिखा।…
- 1.17.354
मैं वही भेस में आऊंगा। तुम मुझे तब पहचान लेना। जब मैं तुम्हें अकेले में बुलाऊंगा और सारी कहानी सुनाऊंगा।
- 1.20.412
जिस में सारी अच्छी क्वालिटीज हैं, जिसे राम बहुत चाहते हैं, और जो पूरे जहान का आधार है, उसको गुरु वसिष्ट ने लछिमन ये खूबाद नाम दिया।
- 1.20.413
गुरु ने अपने दिल में सोच कर नाम रखे, और राजा से कहा, आपके चार बेटे वेद का ही सार हैं। ये रिशियों का धन हैं, भक्तों की जान हैं, और शिव जी का प्राण हैं। शिव जी इनके बचपन के खेल में बहुत आनंद लेते थे। लक्ष्मन ने बचपन से ही राम को अपना हित…
- 1.22.444
राम और लक्ष्मन रिशि के साथ निकल पडे, और वहां पहुंच गए जहां गंगा बहती है, जो दुनिया को पाक करने वाली नदी है। गधि के बेटे ने उन्हें पूरी कहानी सुनाई कि आसमानी नदी जमीन पर कैसे आई। फिर भगवान ने रिशियों के साथ नहाया, और जमीन के देवता माने जाने…
- 1.22.453
राम और लखन, ये दोनों भाई बहुत अच्छे हैं। उनमे सुंदरता, अच्छा चरित्र और ताकत, तीनों का बसेरा है। उन्होने मेरा यज्ञ रखा, पूरा जग साक्षी है इस बात का। और जंग मे उन्होने दानवों को हरा दिया।
- 1.22.456
लखन के दिल में एक खास चाहत थी, कि वो जनकपुर जाकर देखे। पर उसमें भगवन का डर था, और रिशि के सामने शर्म भी आती थी, इसलिए खुलके नही बोला, बस अंदर ही मुस्कुराया। राम को अपने छोटे भाई के दिल की बात समझ आ गयी, और उनका दिल खुश हो गया क्योंकि वो…
- 1.22.457
दोनो भाई, जाओ शहर देख कर वापस आ जाओ। तुम दोनो खुशी के खजाने हो। अपने सुंदर चेहरा सब को दिखा दो, ताके सब की आँखों को बरकत मिले।
- 1.23.462
सखीजी बताओ, ऐसा कौन है जो शरीर में है और इतना सुंदर रूप देख कर फस न जाए? फिर एक ने प्यार से नरम आवाज़ में कहा, समझदार सहेली, जो मैंने सुना है वो सुनो। ये दोनों दशरथ के बेटे हैं, जैसे छोटे हंस जोड़ी बनाएँ। ये रिशी कौशिक के यज्ञ के रक्षक…
- 1.23.472
रात हो गई, रिशि ने आज्ञा दी, सब ने शाम की पूजा की। पुरानी कहानियां और इतिहास सुनाते हुए, रात के दो पहर निकल गए। फिर रिशि सोने के लिए गए, दोनों भाइयों ने उनके पैर दबाने शुरू किए। जिनके पैरों के लिए जो जोगी लोग कई तरह का जाप और योग करते हैं…
- 1.23.473
लखमन ने मुर्गी की आवाज़ सुनी, और रात गई समझ कर उठ गया। राम जो सबसे समझदार हैं और दुनिया के स्वामी हैं, उन्होंने अपने गुरु से भी पहले जाग लिया था।
- 1.24.480
कंगन, कमर की घुंघरू और पायल की आवाज़ सुन कर, राम ने दिल में सोचा और लक्ष्मन से कहा. जैसे कामदेव ने दुनिया जीतने का मन बनाकर युद्ध का ढोल बजा दिया हो. ये बोल कर वो उस तरफ मुड कर देखने लगे, और उनकी आँखें सीता के चेहरे के चाँद की चकोर बन गई.…
- 1.24.482
भाई, यही वो जनक की बेटी है जिसकी वजह से धनुष की यज्ञ हो रही है। उसकी सहेलियां उसे गौरी की पूजा करने ले कर आई हैं, और वो बगीचे में घूम रही है, अपनी रोशनी से जगमग कर रही है। जिसकी अनोखी खूबसूरती देख कर मेरा मन, जो अपने आप साफ है, हिल गया। सब…
- 1.24.495
दोनो भाई दिल में सीता की खूबसूरती की तारीफ कर रहे थे, और गुरु के पास गए। राम ने कौशिक को सब बता दिया. उसका स्वभाव सीधा था, उसमे कोई चाल नही थी। रिशि ने फूल लिए और पूजा की, फिर दोनो भाइयों को आशीर्वाद दिया। तुम्हारे सारे मनोरथ पूरे हों. ये…
- 1.24.497
तू कभी छोटा होता है कभी बड़ा, और अपने प्यार से अलग हुई औरतों को दर्द देता है। राहु जब तेरी कमजोरी का मौका मिलता है, तब तुझे खा जाता है। तू चकवा पक्षी को दुखी करता है और कमल का दुश्मन है। ऐ चाँद, तेरे बहुत अवगुण हैं। सीता के चेहरे को तुझसे…
- 1.24.498
जैसे सुबह होते ही रात के फूल बंध हो जाते हैं और तारों की रोशनी धीमी पड़ जाती है, वैसे ही आपके आने की खबर सुन के सारे राजा कमजोर पड़ गए।
- 1.24.499
सारे राजा सितारों की तरह अपनी रोशनी दे रहे हैं, पर धनुष के भारी अंधेरे को दूर नहीं कर सकते। कमल, चकवा पक्षी, मधुमक्खी, और कई तरह के पक्षी, सब रात खत्म होते ही खुश हो जाते हैं। वैसे ही प्रभु, आपके सारे भक्त खुश होंगे जब धनुष टूट जाएगा। सूरज…