Rig Veda Sukta 37
Mandala 9Sukta 376 Mantras

Sukta 37

Sukta 9.37

Devata

Soma Pavamāna

यह संक्षिप्त पवमान सूक्त सोम की स्तुति करता है—नव-निष्पीडित सोम पवित्र (छन्नी) से होकर वेदियों/कुंडों की ओर वेग से प्रवाहित होता है, देवों के पान के योग्य बनता है। सोम को दिव्य, सत्य-प्रकाशक शुद्धिकर्ता कहा गया है, जो रक्षस् आदि शत्रु शक्तियों का भेदन करता है और अपने समान तेजस्वी बंधु बलों के साथ मिलकर प्रकाश को प्रकट करता है—अंततः इन्द्र को अपनी ऊर्जादायक भेंट प्रदान करता है।

Sanskrit recitationRig Veda 9.37

Mantras

Mantra 1

स सुतः पीतये वृषा सोमः पवित्रे अर्षति । विघ्नन्रक्षांसि देवयुः ॥

पीने हेतु निचोड़ा गया वह वृषभ-सा बलवान सोम पवित्र (छन्नी) से होकर वेग से बहता है, देव-यु (देव-प्राप्ति का अभिलाषी); वह विघ्नों और रक्षस् (अन्धकार-शक्तियों) को विदीर्ण करता है।

Mantra 2

स पवित्रे विचक्षणो हरिरर्षति धर्णसिः । अभि योनिं कनिक्रदत् ॥

वह पवित्र (छन्नी) में विवेकी हरि (सोम) धारण-शक्ति से वेगपूर्वक प्रवाहित होता है; गर्जना करता हुआ वह अपनी योनि—अपने स्रोत और आश्रय—की ओर बढ़ता है।

Mantra 3

स वाजी रोचना दिवः पवमानो वि धावति । रक्षोहा वारमव्ययम् ॥

वह वाजी—समृद्धि-बल का वाहक—पवमान सोम दिव्य रोचनाओं में व्याप्त होकर दौड़ता है; रक्षोघ्न होकर वह सत्य के अव्यय वार (आवरण/परिसर) में प्रवेश करता है।

Mantra 4

स त्रितस्याधि सानवि पवमानो अरोचयत् । जामिभिः सूर्यं सह ॥

वह पवमान सोम त्रित के सानु (शिखर-रिज) पर प्रकाश को प्रज्वलित करता है; जामि—स्वजन शक्तियों—के साथ उसने सूर्य को प्रकट किया।

Mantra 5

स वृत्रहा वृषा सुतो वरिवोविददाभ्यः । सोमो वाजमिवासरत् ॥

वह वृत्र-हंता, बलवान वृषभ—निचोड़ा हुआ—उपासकों के लिए विस्तृत मार्ग का खोजी; अजेय सोम, मानो वाज/समृद्धि ही बनकर, प्रवाहित हुआ।

Mantra 6

स देवः कविनेषितोऽभि द्रोणानि धावति । इन्दुरिन्द्राय मंहना ॥

वह देव, कवि-प्रेरणा से प्रेरित होकर, द्रोणों (रस-वाटों) की ओर दौड़ता है; इन्दु इन्द्र के लिए शीघ्र होता है—वृद्धि की शक्ति (मंहना) धारण किए।

Frequently Asked Questions

It praises Soma as he is pressed and purified through the filter, describing him as a shining power that removes darkness and obstruction and becomes fit for the gods’ drinking.

In Vedic thought, purification is also protection: as Soma clarifies, he symbolically and ritually drives away harmful influences—outer enemies and inner confusion alike.

The hymn ends by sending the bright drop (Indu) toward the vats ‘for Indra,’ because Indra is a primary recipient of Soma and is strengthened by it for victory and increase.

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