Adhyaya 69
Adi ParvaAdhyaya 6933 Verses

Adhyaya 69

Śakuntalā’s Satya-Discourse and the Recognition of Bharata (शकुन्तला–सत्योपदेशः; भरतप्रतिग्रहः)

Upa-parva: Śakuntalopākhyāna (Duḥṣanta–Śakuntalā Episode)

Chapter 69 presents Śakuntalā’s structured ethical critique of Duḥṣanta’s refusal to acknowledge their son. She opens with a perception-based rebuke—seeing others’ minor faults while ignoring one’s own—then develops illustrative analogies (mirror imagery; the swine and the swan separating impurity from essence) to distinguish the foolish from the discerning in moral speech. The discourse shifts to rājadharma and filial duty: abandoning one’s son undermines prosperity, reputation, and posthumous welfare, while truth is elevated above ritual magnitude (truth outweighing vast sacrificial merit). Śakuntalā warns that falsehood severs association and asserts her son’s capacity to rule even without Duḥṣanta. The narrative then introduces Vaiśaṃpāyana’s frame: a bodiless celestial voice validates Śakuntalā’s claim, instructs acceptance, and assigns the name Bharata (linked to “bearing/supporting”). Duḥṣanta explains his earlier hesitation as concern for public doubt, then formally embraces the child and honors Śakuntalā. The chapter concludes with Bharata’s consecration and a genealogical-ideological bridge: Bharata’s fame becomes an eponym for the Bhārata lineage and the epic’s civilizational identity.

Chapter Arc: Janamejaya, eager to know how the lion among men obtained Shakuntala, asks Vaishampayana for the full account—thus the tale turns from genealogy to a living scene of pursuit and fate. → Vaishampayana describes King Dushyanta setting out with a vast retinue—warriors in varied arms and attire, conches and kettledrums resounding—entering the forest for the royal hunt. The chase scatters herds, dries throats with dust and thirst, and turns the woodland into a tumult where beasts and men collide. → In the thick of the hunt, Dushyanta’s prowess blazes: he cuts down charging threats with sword and spear, whirls the mace with practiced mastery, and the forest itself seems overrun by elephants and storm-like volleys—until the king stands as the axis of the chaos, feared by beasts and admired by onlookers who liken him to Indra. → The chapter settles with the image of Dushyanta’s irresistible might and royal momentum established—his hunt has become the narrative engine that will carry him toward the encounter destined to change his lineage. → The king’s onward movement into the forest points toward the imminent meeting with Shakuntala, left just beyond the chapter’s threshold.

Shlokas

Verse 1

अपन बक। है २ >> $. दूरवर्ती शत्रुपर गदा फेंकना 'प्रक्षे' कहलाता है। २. समीपवर्ती शत्रुपर गदाकी कोटिसे प्रहार करना “विक्षेप” कहा गया है। ३. जब शत्रु बहुत हों तो सब ओर गदाको घुमाते हुए शत्रुओंपर उसका प्रहार करना “परिक्षेप” है। ४. गदाके अग्रभागसे मारना “अभिक्षेप” कहलाता है। एकोनसप्ततितमो<ध्याय: दुष्पन्तका शिकारके लिये वनमें जाना और विविध हिंसक वन-जन्तुओंका वध करना जनमेजय उवाच सम्भवं भरतस्याहं चरितं च महामते: । शकुन्तलाय श्रोत्पत्तिं श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः,जनमेजय बोले--ब्रह्मन! मैं परम बुद्धिमान्‌ भरतकी उत्पत्ति और चरित्रको तथा शकुन्तलाकी उत्पत्तिके प्रसंगको भी यथार्थरूपसे सुनना चाहता हूँ

ຈະນະເມຊະຍະ (Janamejaya) ກ່າວວ່າ: «ໂອ ທ່ານລະສີຜູ້ໃຈໃຫຍ່, ຂ້າພະເຈົ້າປາຖະນາຈະຟັງໃຫ້ແທ້ຈິງ ເຖິງການເກີດຂອງພະຣະຕະ (Bharata) ແລະປະຫວັດຊີວິດຂອງພຣະອົງ, ພ້ອມທັງເຫດປັດໃຈແຫ່ງການເກີດຂອງສະກຸນຕະລາ (Śakuntalā) ດ້ວຍ»។

Verse 2

दुष्यन्तेन च वीरेण यथा प्राप्ता शकुन्तला | त॑ वै पुरुषसिंहस्य भगवन्‌ विस्तरं त्वहम्‌

ຈະນະເມຊະຍະ ກ່າວວ່າ: «ຂໍທ່ານຜູ້ເຄົາລົບ, ຈົ່ງເລົ່າໃຫ້ຂ້າພະເຈົ້າຟັງໂດຍລະອຽດວ່າ ສະກຸນຕະລາ (Śakuntalā) ໄດ້ຖືກວີຣະບຸລຸດ ດຸສຍັນຕະ (Duṣyanta) —ສິງໃນຫມູ່ມະນຸດ— ຮັບໄປເປັນພຣະມະເຫສີແນວໃດ; ເພາະຂ້າພະເຈົ້າປາຖະນາຈະຟັງເລື່ອງທັງມວນ»។

Verse 3

वैशम्पायन उवाच स कदाचिन्महाबाहु: प्रभूतनलवाहन:,वैशम्पायनजीने कहा--एक समयकी बात है, महाबाहु राजा दुष्यन्त बहुत-से सैनिक और सवारियोंको साथ लिये सैकड़ों हाथी-घोड़ोंसे घिरकर परम सुन्दर चतुरंगिणी सेनाके साथ एक गहन वनकी ओर चले

ໄວສຳປາຍະນະ (Vaiśampāyana) ກ່າວວ່າ: ຄັ້ງໜຶ່ງ ພຣະຣາຊາ ດຸສຍັນຕະ (Duṣyanta) ຜູ້ມີແຂນແຂງກ້າ ໄດ້ນຳທະຫານ ແລະພາຫະນະຫຼາຍປະການ ມີຊ້າງແລະມ້ານັບຮ້ອຍລ້ອມຮອບ ພ້ອມກອງທັບສີ່ເຫຼົ່າ (ຈະຕຸຣັງຄະ) ອັນສົງ່າງາມ ມຸ່ງໜ້າໄປສູ່ປ່າທີ່ໜາແໜ້ນແຫ່ງໜຶ່ງ।

Verse 4

वनं जगाम गहनं हयनागशतैर्वृत: । बलेन चतुरज्जेण वृत: परमवल्गुना,वैशम्पायनजीने कहा--एक समयकी बात है, महाबाहु राजा दुष्यन्त बहुत-से सैनिक और सवारियोंको साथ लिये सैकड़ों हाथी-घोड़ोंसे घिरकर परम सुन्दर चतुरंगिणी सेनाके साथ एक गहन वनकी ओर चले

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຄັ້ງໜຶ່ງ ພະຣາຊາ ດຸສຍັນຕະ ຜູ້ມີພະຫັດແຂງແກ່ນ ໄດ້ອອກເດີນທາງໄປສູ່ປ່າທຶບໜາ ໂດຍມີກອງທັບຈະຕຸຣັງຄະອັນງາມສົດສະຫງ່າອ້ອມຂ້າງ ແລະຖືກລ້ອມດ້ວຍມ້າແລະຊ້າງນັບຮ້ອຍ ພ້ອມດ້ວຍໄພພົນຫຼາຍຫຼາຍ.

Verse 5

खड्गशक्तिधरैवीरिर्गदामुसलपाणिभि: । प्रासतोमरहस्तैश्व ययौ योधशतैर्वृत:,जब राजाने यात्रा की, उस समय खड्ग, शक्ति, गदा, मुसल, प्रास और तोमर हाथमें लिये सैकड़ों योद्धा उन्हें घेरे हुए थे

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອພະຣາຊາອອກເດີນທາງ ພະອົງໄດ້ເຄື່ອນໄປໂດຍມີນັກຮົບນັບຮ້ອຍລ້ອມຮອບ—ວີຣະບຸຣຸດຖືດາບແລະຫອກ, ຖືຄອນ (ກະບອງ) ແລະມູສະລະ, ອີກພວກໜຶ່ງຖືຫອກຍາວແລະຫອກຂວ້າງ.

Verse 6

सिंहनादैश्व योधानां शड्खदुन्दुभिनि:स्वनै: । रथनेमिस्वनैश्वैव सनागवरबूंहितैः,महाराज दुष्यन्तके यात्रा करते समय योद्धाओंके सिंहनाद, शंख और नगाड़ोंकी आवाज, रथके पहियोंकी घरघराहट, बड़े-बड़े गजराजोंकी चिग्घाड़, घोड़ोंकी हिनहिनाहट, नाना प्रकारके आयुध तथा भाँति-भाँतिके वेष धारण करनेवाले योद्धाओंद्वारा की हुई गर्जना और ताल ठोंकनेकी आवाजोंसे चारों ओर भारी कोलाहल मच गया था। महलके श्रेष्ठ शिखरपर बैठी हुई स्त्रियाँ उत्तम राजोचित शोभासे सम्पन्न शूरवीर दुष्यन्तको देख रही थीं। वे अपने यशको बढ़ानेवाले, इन्द्रके समान पराक्रमी और शत्रुओंका नाश करनेवाले थे। शत्रुरूपी मतवाले हाथीको रोकनेके लिये उनमें सिंहके समान शक्ति थी

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອພະຣາຊາ ດຸສຍັນຕະ ກຳລັງເຄື່ອນທັບ ຄວາມອື້ອອຶງອັນໃຫຍ່ກໍເກີດຂຶ້ນທົ່ວທຸກທິດ—ສຽງຮ້ອງຄຳຮາມດັ່ງສິງຂອງນັກຮົບ, ສຽງສັງຂ໌ແລະກອງດຸນດຸບິ, ສຽງລໍ້ລົດຮົບຄືກຄືນ, ແລະສຽງຊ້າງໃຫຍ່ຮ້ອງກ້ອງ. ນີ້ແມ່ນການປະກາດອຳນາດກະສັດທີ່ມີລະບຽບ ແລະການຄຸ້ມຄອງທຳມະຂອງແຜ່ນດິນ.

Verse 7

नानायुधधरैश्वापि नानावेषधरैस्तथा । ह्षितस्वनमिश्रैश्न क्षेगेडितास्फोटितस्वनै:,महाराज दुष्यन्तके यात्रा करते समय योद्धाओंके सिंहनाद, शंख और नगाड़ोंकी आवाज, रथके पहियोंकी घरघराहट, बड़े-बड़े गजराजोंकी चिग्घाड़, घोड़ोंकी हिनहिनाहट, नाना प्रकारके आयुध तथा भाँति-भाँतिके वेष धारण करनेवाले योद्धाओंद्वारा की हुई गर्जना और ताल ठोंकनेकी आवाजोंसे चारों ओर भारी कोलाहल मच गया था। महलके श्रेष्ठ शिखरपर बैठी हुई स्त्रियाँ उत्तम राजोचित शोभासे सम्पन्न शूरवीर दुष्यन्तको देख रही थीं। वे अपने यशको बढ़ानेवाले, इन्द्रके समान पराक्रमी और शत्रुओंका नाश करनेवाले थे। शत्रुरूपी मतवाले हाथीको रोकनेके लिये उनमें सिंहके समान शक्ति थी

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ທ່າມກາງນັກຮົບທີ່ຖືອາວຸດຫຼາຍຢ່າງ ແລະນຸ່ງແຕ່ງຫຼາຍແບບ ມີສຽງໂຮຮ້ອງອັນຄຶກຄືນປົນກັນ ທັງສຽງຮ້ອງຫຼິ້ນ ແລະສຽງຕົບມື ກັບສຽງຕົບແຂນ ຈົນເກີດເປັນຄວາມອື້ອອຶງໃຫຍ່ທົ່ວທຸກທິດ. ນີ້ແມ່ນພະລັງອັນຮ້ອນແຮງຂອງຂະບວນກະສັດ ທີ່ເຮັດໃຫ້ຊື່ສຽງແລະອຳນາດປາກົດແຈ້ງ.

Verse 8

आसीत्‌ किलकिलाशब्दस्तस्मिन्‌ गच्छति पार्थिवे । प्रासादवरशृज्गभस्था: परया नृपशो भया,महाराज दुष्यन्तके यात्रा करते समय योद्धाओंके सिंहनाद, शंख और नगाड़ोंकी आवाज, रथके पहियोंकी घरघराहट, बड़े-बड़े गजराजोंकी चिग्घाड़, घोड़ोंकी हिनहिनाहट, नाना प्रकारके आयुध तथा भाँति-भाँतिके वेष धारण करनेवाले योद्धाओंद्वारा की हुई गर्जना और ताल ठोंकनेकी आवाजोंसे चारों ओर भारी कोलाहल मच गया था। महलके श्रेष्ठ शिखरपर बैठी हुई स्त्रियाँ उत्तम राजोचित शोभासे सम्पन्न शूरवीर दुष्यन्तको देख रही थीं। वे अपने यशको बढ़ानेवाले, इन्द्रके समान पराक्रमी और शत्रुओंका नाश करनेवाले थे। शत्रुरूपी मतवाले हाथीको रोकनेके लिये उनमें सिंहके समान शक्ति थी

ໄວສຳປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອກະສັດນັ້ນກຳລັງເຄື່ອນໄປ ສຽງອື້ອອຶງຄືກຄືນກໍເກີດຂຶ້ນຢ່າງໃຫຍ່. ຈາກຫໍພະຣາຊະວັງອັນດີເລີດ ບັນດານາງທັງຫຼາຍຖືກຄວາມຕື່ນເຕັ້ນແລະຄວາມເກງຂາມຄອບງຳ ເບິ່ງຂະບວນພະຣາຊາຜ່ານໄປ ໃຫ້ເມືອງທັງໝົດກ້ອງກັບສຽງນັ້ນ.

Verse 9

ददृशुस्तं स्त्रियस्तत्र शूरमात्मयशस्करम्‌ | शक्रोपमममित्रघ्नं परवारणवारणम्‌,महाराज दुष्यन्तके यात्रा करते समय योद्धाओंके सिंहनाद, शंख और नगाड़ोंकी आवाज, रथके पहियोंकी घरघराहट, बड़े-बड़े गजराजोंकी चिग्घाड़, घोड़ोंकी हिनहिनाहट, नाना प्रकारके आयुध तथा भाँति-भाँतिके वेष धारण करनेवाले योद्धाओंद्वारा की हुई गर्जना और ताल ठोंकनेकी आवाजोंसे चारों ओर भारी कोलाहल मच गया था। महलके श्रेष्ठ शिखरपर बैठी हुई स्त्रियाँ उत्तम राजोचित शोभासे सम्पन्न शूरवीर दुष्यन्तको देख रही थीं। वे अपने यशको बढ़ानेवाले, इन्द्रके समान पराक्रमी और शत्रुओंका नाश करनेवाले थे। शत्रुरूपी मतवाले हाथीको रोकनेके लिये उनमें सिंहके समान शक्ति थी

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ທີ່ນັ້ນ ບັນດາແມ່ຍິງໄດ້ເຫັນວິລະບຸລຸດນັ້ນ—ຜູ້ເພີ່ມພູນກຽດສັກຂອງຕົນ—ກ້າຫານດັ່ງພຣະອິນທຣາ, ເປັນຜູ້ປາບສັດຕູ, ແລະເປັນຜູ້ຂັດຂວາງຊ້າງສັດຕູທີ່ຄຸ້ມຄັ່ງດຸຮ້າຍ. ພາບນີ້ຍ້ຳໃຫ້ເຫັນສະເໝີພາບພຣະຣາຊາແລະຄຸນທຳນັກຮົບ: ກຳລັງແລະວິໄນຂອງກະສັດຖືກສະແດງເປັນພະລັງປົກປ້ອງ ທີ່ຢັບຢັ້ງຄວາມຮຸນແຮງຂອງສັດຕູ ແລະຄ້ຳຈຸນລະບຽບຕາມທຳມະຣາຊາ.

Verse 10

पश्यन्तः स्त्रीगणास्तत्र वज्रपाणिं सम मेनिरे । अयं स पुरुषव्यात्रो रणे वसुपराक्रम:

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອພວກນາງເບິ່ງຢູ່ ຝູງແມ່ຍິງໃນທີ່ນັ້ນກໍເຫັນວ່າລາວຄືວັຊຣະປານິ (ພຣະອິນທຣາ ຜູ້ຖືສາຍຟ້າ). “ນີ້ແມ່ນເສືອໃນຫມູ່ມະນຸດ” ພວກນາງຄິດ—ຜູ້ມີພະລັງໃນສົງຄາມນ່າຢ້ານດັ່ງວະສຸ—ເປັນຄຳສະທ້ອນຄວາມພິລຶກພິລັນຕໍ່ພະລັງວິລະບຸລຸດຕາມອຸດົມຄະຕິໃນມະຫາກາວະ.

Verse 11

इति वाचो ब्रुवन्त्यस्ता: स्त्रिय: प्रेमणा नराधिपम्‌,ऐसी बातें करती हुई वे स्त्रियाँ बड़े प्रेमसे महाराज दुष्यन्तकी स्तुति करतीं और उनके मस्तकपर फूलोंकी वर्षा करती थीं। यत्र-तत्र खड़े हुए श्रेष्ठ ब्राह्मण सब ओर उनकी स्तुति- प्रशंसा करते थे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອເວົ້າຄຳເຊັ່ນນັ້ນ ບັນດາແມ່ຍິງເຕັມໄປດ້ວຍຄວາມຮັກ ໄດ້ສັນລະເສີນກະສັດ; ແລະຈາກທຸກທິດ ພຣາຫມັນຜູ້ປະເສີດ ທີ່ຢືນຢູ່ຕາມຈຸດຕ່າງໆ ກໍພາກັນຖວາຍຄຳສັນລະເສີນ ແລະຄຳຊົມເຊີຍເຊັ່ນດຽວກັນ.

Verse 12

तुष्ठवुः पुष्पवृष्टी क्ष ससृजुस्तस्य मूर्थनि । तत्र तत्र च विप्रेन्द्रै: स्‍्तूयमान: समन्‍्ततः,ऐसी बातें करती हुई वे स्त्रियाँ बड़े प्रेमसे महाराज दुष्यन्तकी स्तुति करतीं और उनके मस्तकपर फूलोंकी वर्षा करती थीं। यत्र-तत्र खड़े हुए श्रेष्ठ ब्राह्मण सब ओर उनकी स्तुति- प्रशंसा करते थे

ພວກນາງສັນລະເສີນພຣະອົງ ແລະໂຮຍດອກໄມ້ລົງເທິງພຣະເສົາດັ່ງຝົນ. ແລະຕາມຈຸດຕ່າງໆ ພຣາຫມັນຜູ້ປະເສີດທົ່ວທິດກໍຍັງສັນລະເສີນພຣະອົງຢ່າງຕໍ່ເນື່ອງ—ເປັນບັນຍາກາດແຫ່ງການຊົມເຊີຍຕໍ່ໜ້າສາທາລະນະ ທີ່ວາງພຣະຣາຊະກິດໃຫ້ເປັນຜູ້ຄວນແກ່ກຽດສັກ ແລະການຍອມຮັບຂອງສັງຄົມ.

Verse 13

निर्ययौ परमप्रीत्या वनं मृगजिघांसया । त॑ं देवराजप्रतिमं मत्तवारणधूर्गतम्‌,इस प्रकार महाराज वनमें हिंसक पशुओंका शिकार खेलनेके लिये बड़ी प्रसन्नताके साथ नगरसे बाहर निकले। वे देवराज इन्द्रके समान पराक्रमी थे। मतवाले हाथीकी पीठपर बैठकर यात्रा करनेवाले उन महाराज दुष्यन्तके पीछे-पीछे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र सभी वर्णोके लोग गये और सब आशीर्वाद एवं विजयसूचक वचनोंद्वारा उनके अभ्युदयकी कामना करते हुए उनकी ओर देखते रहे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ດ້ວຍຄວາມຍິນດີຢ່າງຍິ່ງ ພຣະອົງໄດ້ອອກໄປສູ່ປ່າ ໂດຍມຸ່ງໝາຍຈະລ່າສັດປ່າ. ພຣະອົງມີສະຫງ່າງາມແລະພະລັງດັ່ງພຣະອິນທຣາ ຈອມເທວະ, ແລະເສດັດອອກໄປໂດຍປະທັບຢູ່ເທິງຫຼັງຊ້າງທີ່ກຳລັງຄຸ້ມຄັ່ງ. ເມື່ອພຣະຣາຊາດຸສຍັນຕະ ເຄື່ອນຂະບວນໄປ ປະຊາຊົນທັງສີ່ວັນນະກໍຕາມຫຼັງໄປ ຈ້ອງມອງພຣະອົງ ແລະເປົ່າຄຳອວຍພອນ ພ້ອມຄຳຊະນະໄຊ ປາດຖະໜາໃຫ້ພຣະອົງຈະເລີນຮຸ່ງເຮືອງ ແລະສຳເລັດຜົນ.

Verse 14

द्विजक्षत्रियविट्शूद्रा निर्यान्तमनुजग्मिरे । ददृशुर्वर्धभानास्ते आशीर्भिश्च॒ जयेन च,इस प्रकार महाराज वनमें हिंसक पशुओंका शिकार खेलनेके लिये बड़ी प्रसन्नताके साथ नगरसे बाहर निकले। वे देवराज इन्द्रके समान पराक्रमी थे। मतवाले हाथीकी पीठपर बैठकर यात्रा करनेवाले उन महाराज दुष्यन्तके पीछे-पीछे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र सभी वर्णोके लोग गये और सब आशीर्वाद एवं विजयसूचक वचनोंद्वारा उनके अभ्युदयकी कामना करते हुए उनकी ओर देखते रहे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອພະມະຫາກະສັດອອກເດີນທາງຈາກນະຄອນ ຜູ້ຄົນຈາກວັນນະທັງສີ່—ພຣາຫມັນ, ກະສັດຕະຣິຍະ, ໄວສະຍະ, ແລະ ສູດຣະ—ພາກັນຕາມຢູ່ຂ້າງຫຼັງ. ພວກເຂົາຈ້ອງມອງພະອົງພ້ອມຄໍາອວຍພອນມົງຄຸນ ແລະ ສຽງໂຮງຊະນະ ປາຖະນາໃຫ້ພະອົງສໍາເລັດການງານ ແລະ ມີຄວາມສຸກສະຫງົບໃນການເດີນທາງຫຼວງນັ້ນ.

Verse 15

सुदूरमनुजग्मुस्तं पौरजानपदास्तथा । न्यवर्तन्त ततः पश्चादनुज्ञाता नृपेण ह,नगर और जनपदके लोग बहुत दूरतक उनके पीछे-पीछे गये। फिर महाराजकी आज्ञा होनेपर लौट आये

ຊາວນະຄອນ ແລະ ຊາວບ້ານນອກ ພາກັນຕາມພະອົງໄປໄກຫຼາຍ. ຕໍ່ມາ ເມື່ອໄດ້ຮັບອະນຸຍາດຈາກພະມະຫາກະສັດ ພວກເຂົາຈຶ່ງຫັນກັບ—ສະແດງທັງຄວາມຜູກພັນລຶກຊຶ້ງ ແລະ ຄວາມເຄົາລົບຕໍ່ພະບັນຊາອັນມີລະບຽບ.

Verse 16

सुपर्णप्रतिमेनाथ रथेन वसुधाधिप: । महीमापूरयामास घोषेण त्रिदिवं तथा,उनका रथ गरुडके समान वेगशाली था। उसके द्वारा यात्रा करनेवाले नरेशने घरघराहटकी आवाजसे पृथ्वी और आकाशको गुँँजा दिया। जाते-जाते बुद्धिमान्‌ दुष्यन्तने एक नन्दनवनके समान मनोहर वन देखा, जो बेल, आक, खैर, कैथ और धव (बाकली) आदि वृक्षोंसे भरपूर था

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ແລ້ວພະອົງເຈົ້າແຫ່ງພື້ນພິພົບ ກໍຂຶ້ນລົດສົງຄາມທີ່ໄວດັ່ງສຸພັນ (ກຣຸດ). ເມື່ອລົດແລ່ນໄປ ສຽງຄືກຄືນຂອງມັນເຮັດໃຫ້ແຜ່ນດິນກ້ອງກັງ ແລະ ຮາວກັບສະທ້ອນໄປຮອດຟ້າ—ເປັນເຄື່ອງຊີ້ຖຶງພະລັງອໍານາດ ແລະ ການກ້າວໜ້າອັນແນ່ວແນ່ຂອງພະອົງ.

Verse 17

स गच्छन्‌ ददृशे धीमान्‌ नन्दनप्रतिमं वनम्‌ । बिल्वार्कखदिराकीर्ण कपित्थधवसंकुलम्‌,उनका रथ गरुडके समान वेगशाली था। उसके द्वारा यात्रा करनेवाले नरेशने घरघराहटकी आवाजसे पृथ्वी और आकाशको गुँँजा दिया। जाते-जाते बुद्धिमान्‌ दुष्यन्तने एक नन्दनवनके समान मनोहर वन देखा, जो बेल, आक, खैर, कैथ और धव (बाकली) आदि वृक्षोंसे भरपूर था

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນຂະນະທີ່ພະອົງເດີນທາງຕໍ່ໄປ ພະມະຫາກະສັດຜູ້ມີປັນຍາໄດ້ເຫັນປ່າໜຶ່ງງາມດັ່ງນັນທະນະວັນ. ປ່ານັ້ນໜາແໜ້ນດ້ວຍຕົ້ນ bilva, arka, khadira ແລະ ແອດແນ້ນດ້ວຍ kapittha ແລະ dhava—ພາບແຫ່ງຄວາມອຸດົມ ແລະ ຄວາມເປັນມົງຄຸນທີ່ມັກນໍາໜ້າເຫດການສໍາຄັນໃນມະຫາກາບຍະ.

Verse 18

विषमं पर्वतस्रस्तैरश्मभिश्व समावृतम्‌ । निर्जलं निर्मनुष्यं च बहुयोजनमायतम्‌,पर्वतकी चोटीसे गिरे हुए बहुत-से शिला-खण्ड वहाँ इधर-उधर पड़े थे। ऊँची-नीची भूमिके कारण वह वन बड़ा दुर्गग जान पड़ता था। अनेक योजनतक फैले हुए उस वनमें कहीं जल या मनुष्यका पता नहीं चलता था

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ພື້ນທີ່ນັ້ນຂຸລຂະ ແລະ ຖືກປົກຄຸມດ້ວຍກ້ອນຫີນທີ່ຫຼົ່ນລົງຈາກພູ. ເນື່ອງຈາກພື້ນດິນສູງຕໍ່າບໍ່ເທົ່າກັນ ມັນຈຶ່ງເບິ່ງຄືວ່າຍາກຈະຂ້າມຜ່ານຢ່າງຍິ່ງ. ຖິ່ນກັນດານນັ້ນແຜ່ກວ້າງໄປຫຼາຍໂຍຊະນະ ບໍ່ປາກົດຮ່ອງຮອຍນໍ້າ ແລະ ບໍ່ມີຮ່ອງຮອຍມະນຸດ—ເປັນພູມທັດອັນແຫ້ງແລ້ງ ແລະ ນ່າຫວາດຫວັ່ນ ທີ່ທົດສອບຄວາມອົດທົນ ແລະ ຈິດໃຈອັນແນ່ວແນ່.

Verse 19

मृगसिंहैर्व॒तं घोरैरन्यैश्वापि वनेचरै: । तद्‌ वन॑ मनुजव्याघ्र: सभृत्ययलवाहन:,वह सब ओर मृग और सिंह आदि भयंकर जन्तुओं तथा अन्य वनवासी जीवोंसे भरा हुआ था। नरश्रेष्ठ राजा दुष्यन्तने सेवक, सैनिक और सवारियोंके साथ नाना प्रकारके हिंसक पशुओंका शिकार करते हुए उस वनको रौंद डाला। वहाँ बाणोंके लक्ष्यमें आये हुए बहुत-से व्याप्रोंको महाराज दुष्यन्तने मार गिराया और कितनोंको सायकोंसे बींध डाला। शक्तिशाली पुरुषोंमें श्रेष्ठ नरेशने कितने ही दूरवर्ती हिंसक पशुओंको बाणोंद्वारा घायल किया। जो निकट आ गये, उन्हें तलवारसे काट डाला और कितने ही एण जातिके पशुओंको शक्ति नामक शस्त्रद्वारा मौतके घाट उतार दिया

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ປ່ານັ້ນແອດແນ້ນໄປດ້ວຍສັດດຸຮ້າຍ—ທັງກວາງແລະສິງ—ພ້ອມດ້ວຍສັດປ່າອື່ນໆທີ່ພາກັນທ່ອງໄປໃນຖິ່ນດົງ. ແລ້ວພຣະຣາຊາດຸສຍັນຕະ—ເສືອໃນຫມູ່ມະນຸດ—ໄດ້ເຂົ້າໄປພ້ອມຂ້າລາຊບໍລິພານ ທະຫານ ແລະພາຫະນະ ພາກັນຕະລຸຍຜ່ານປ່າ ພ້ອມກັບການລ່າສັດດຸຮ້າຍ.

Verse 20

लोडयामास दुष्यन्त: सूदयन्‌ विविधान्‌ मृगान्‌ । बाणगोचरसपम्प्राप्तांस्तत्र व्याप्रगणान्‌ बहूनू,वह सब ओर मृग और सिंह आदि भयंकर जन्तुओं तथा अन्य वनवासी जीवोंसे भरा हुआ था। नरश्रेष्ठ राजा दुष्यन्तने सेवक, सैनिक और सवारियोंके साथ नाना प्रकारके हिंसक पशुओंका शिकार करते हुए उस वनको रौंद डाला। वहाँ बाणोंके लक्ष्यमें आये हुए बहुत-से व्याप्रोंको महाराज दुष्यन्तने मार गिराया और कितनोंको सायकोंसे बींध डाला। शक्तिशाली पुरुषोंमें श्रेष्ठ नरेशने कितने ही दूरवर्ती हिंसक पशुओंको बाणोंद्वारा घायल किया। जो निकट आ गये, उन्हें तलवारसे काट डाला और कितने ही एण जातिके पशुओंको शक्ति नामक शस्त्रद्वारा मौतके घाट उतार दिया

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ພຣະຣາຊາດຸສຍັນຕະ ທ່ອງໄປໃນປ່າ ລ່າແລະຂ້າສັດປ່າຫຼາຍຊະນິດ. ທີ່ນັ້ນ ພຣະອົງໄດ້ຍິງລົງເສືອຈຳນວນຫຼາຍ ທີ່ເຂົ້າມາຢູ່ໃນລະດັບລູກສອນ.

Verse 21

पातयामास दुष्यन्तो निर्बिभेद च सायकै: । दूरस्थान्‌ सायकै: कांश्चिदभिनत्‌ स नराधिप:,वह सब ओर मृग और सिंह आदि भयंकर जन्तुओं तथा अन्य वनवासी जीवोंसे भरा हुआ था। नरश्रेष्ठ राजा दुष्यन्तने सेवक, सैनिक और सवारियोंके साथ नाना प्रकारके हिंसक पशुओंका शिकार करते हुए उस वनको रौंद डाला। वहाँ बाणोंके लक्ष्यमें आये हुए बहुत-से व्याप्रोंको महाराज दुष्यन्तने मार गिराया और कितनोंको सायकोंसे बींध डाला। शक्तिशाली पुरुषोंमें श्रेष्ठ नरेशने कितने ही दूरवर्ती हिंसक पशुओंको बाणोंद्वारा घायल किया। जो निकट आ गये, उन्हें तलवारसे काट डाला और कितने ही एण जातिके पशुओंको शक्ति नामक शस्त्रद्वारा मौतके घाट उतार दिया

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ພຣະຣາຊາດຸສຍັນຕະ ຍິງລົງສັດຫຼາຍຕົວ ແລະທະລຸດພວກມັນດ້ວຍລູກສອນ. ແມ່ນແຕ່ສັດທີ່ຢູ່ໄກ ພຣະອົງກໍຍັງຍິງໃຫ້ບາດເຈັບດ້ວຍລູກສອນ.

Verse 22

अभ्याशमागतांश्वान्यान्‌ खड्गेन निरकृन्तत । कांश्चिदेणान्‌ समाजघ्ने शक्‍्त्या शक्तिमतां वर:,वह सब ओर मृग और सिंह आदि भयंकर जन्तुओं तथा अन्य वनवासी जीवोंसे भरा हुआ था। नरश्रेष्ठ राजा दुष्यन्तने सेवक, सैनिक और सवारियोंके साथ नाना प्रकारके हिंसक पशुओंका शिकार करते हुए उस वनको रौंद डाला। वहाँ बाणोंके लक्ष्यमें आये हुए बहुत-से व्याप्रोंको महाराज दुष्यन्तने मार गिराया और कितनोंको सायकोंसे बींध डाला। शक्तिशाली पुरुषोंमें श्रेष्ठ नरेशने कितने ही दूरवर्ती हिंसक पशुओंको बाणोंद्वारा घायल किया। जो निकट आ गये, उन्हें तलवारसे काट डाला और कितने ही एण जातिके पशुओंको शक्ति नामक शस्त्रद्वारा मौतके घाट उतार दिया

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ພຣະຣາຊາ—ຜູ້ເປັນເລີດໃນຫມູ່ຜູ້ມີພະລັງ—ໄດ້ຟັນສັດທີ່ເຂົ້າມາໃກ້ ທັງຫມາແລະສັດອື່ນໆ ດ້ວຍດາບ. ກວາງບາງຕົວ ພຣະອົງກໍສັງຫານດ້ວຍຫອກ (śakti).

Verse 23

श्रोतुमिच्छामि तत्त्वज्ञ सर्व मतिमतां वर । भगवन! वीरवर दुष्यन्तने शकुन्तलाको कैसे प्राप्त किया? मैं पुरुषसिंह दुष्यन्तके उस चरित्रको विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ। तत्त्वज्ञ मुने! आप बुद्धिमानोंमें श्रेष्ठ हैं। अतः ये सब बातें बताइये,गदामण्डलतत्त्वज्ञक्ष॒चारामितविक्रम: । तोमरैरसिभिश्वापि गदामुसलकम्पनै: असीम पराक्रमवाले राजा गदा घुमानेकी कलामें अत्यन्त प्रवीण थे। अतः वे तोमर, तलवार, गदा तथा मुसलोंकी मारसे स्वेच्छापूर्वक विचरनेवाले जंगली हाथियोंका वध करते हुए वहाँ सब ओर विचरने लगे। अदभुत पराक्रमी नरेश और उनके युद्ध-प्रेमी सैनिकोंने उस विशाल वनका कोना-कोना छान डाला। अतः सिंह और बाघ उस वनको छोड़कर भाग गये। पशुओंके कितने ही झुंड, जिनके यूथपति मारे गये थे, व्यग्र होकर भागे जा रहे थे और कितने ही यूथ इधर-उधर आर्तनाद करते थे। वे प्याससे पीड़ित हो सूखी नदियोंमें जाकर जब जल नहीं पाते, तब निराशासे अत्यन्त खिन्न हो दौड़नेके परिश्रमसे क्लान्तचित्त होनेके कारण मूर्च्छित होकर गिर पड़ते थे। भूख, प्यास और थकावटसे चूर-चूर हो बहुत-से पशु धरतीपर गिर पड़े

ຊະນະເມຊະຍະ ກ່າວວ່າ: “ໂອ ຜູ້ຮູ້ຄວາມຈິງ ຜູ້ເປັນເລີດໃນຫມູ່ປັນຍາຊົນ! ຂ້າພະເຈົ້າປາຖະໜາຈະຟັງທຸກຢ່າງ. ທ່ານຜູ້ຄວນເຄົາລົບ—ດຸສຍັນຕະວີຣະບຸລຸດໄດ້ຮັບນາງສະກຸນຕະລາແນວໃດ? ຂ້າພະເຈົ້າປາຖະໜາຈະຟັງໂດຍລະອຽດ ຊີວິດແລະຄວາມປະພຶດຂອງດຸສຍັນຕະ—ສິງໃນຫມູ່ມະນຸດ. ໂອ ມຸນີຜູ້ຮູ້ຄວາມເປັນຈິງ, ທ່ານເປັນເລີດໃນຫມູ່ຜູ້ມີປັນຍາ; ດັ່ງນັ້ນ ຂໍໃຫ້ທ່ານເລົ່າທຸກຢ່າງເຫຼົ່ານີ້.” (ສືບຕໍ່ເລື່ອງ:) ພຣະຣາຊາຜູ້ມີວິຣະກຳບໍ່ມີຂອບເຂດ ຊ່ຽວຊານໃນສິລະປະການຫມຸນຄະທາ (mace). ດ້ວຍຫອກ, ດາບ, ແລະການຟາດຟັນດ້ວຍຄະທາແລະກະບອກ, ພຣະອົງທ່ອງໄປມາ ຟັນຟາດຊ້າງປ່າທີ່ທ່ອງໄປຕາມໃຈ. ພຣະມະຫາກະສັດຜູ້ກ້າຫານຢ່າງອັດສະຈັນ ແລະທະຫານຜູ້ຮັກສົງຄາມຂອງພຣະອົງ ໄດ້ຄົ້ນຫາທຸກມຸມຂອງປ່າອັນກວ້າງໃຫຍ່ນັ້ນ. ສິງແລະເສືອພາກັນຫນີອອກຈາກປ່າ; ຝູງສັດຫຼາຍຝູງ ທີ່ຫົວໜ້າຝູງຖືກສັງຫານ ພາກັນແຕກຕື່ນວິ່ງຫນີ, ແລະຝູງອື່ນໆຮ້ອງຄຳຄວນດ້ວຍຄວາມທຸກ. ຖືກທໍລະມານໂດຍຄວາມຫິວນ້ຳ ພວກມັນໄປຫາທ້ອງນ້ຳທີ່ແຫ້ງ ແຕ່ບໍ່ພົບນ້ຳ ຈຶ່ງຕົກໃນຄວາມຫມົດຫວັງ; ເມື່ອວິ່ງຢ່າງບ້າຄັ່ງຈົນເຫນື່ອຍລ້າ ພວກມັນກໍສະລົບແລະລົ້ມລົງ. ສັດຈຳນວນຫຼາຍ ຖືກບີບຄັ້ນໂດຍຄວາມຫິວໂຫຍ, ຫິວນ້ຳ, ແລະຄວາມເຫນື່ອຍລ້າ ນອນກະຈາຍເກືອນກາດຢູ່ເທິງພື້ນດິນ.

Verse 24

चचार स विनिष्नन्‌ वै स्वैरचारान्‌ वनद्विपान्‌ । राज्ञा चाद्भुतवीर्येण योधेश्व समरप्रियै:,असीम पराक्रमवाले राजा गदा घुमानेकी कलामें अत्यन्त प्रवीण थे। अतः वे तोमर, तलवार, गदा तथा मुसलोंकी मारसे स्वेच्छापूर्वक विचरनेवाले जंगली हाथियोंका वध करते हुए वहाँ सब ओर विचरने लगे। अदभुत पराक्रमी नरेश और उनके युद्ध-प्रेमी सैनिकोंने उस विशाल वनका कोना-कोना छान डाला। अतः सिंह और बाघ उस वनको छोड़कर भाग गये। पशुओंके कितने ही झुंड, जिनके यूथपति मारे गये थे, व्यग्र होकर भागे जा रहे थे और कितने ही यूथ इधर-उधर आर्तनाद करते थे। वे प्याससे पीड़ित हो सूखी नदियोंमें जाकर जब जल नहीं पाते, तब निराशासे अत्यन्त खिन्न हो दौड़नेके परिश्रमसे क्लान्तचित्त होनेके कारण मूर्च्छित होकर गिर पड़ते थे। भूख, प्यास और थकावटसे चूर-चूर हो बहुत-से पशु धरतीपर गिर पड़े

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ພຣະອົງນັ້ນໄດ້ທ່ອງໄປທົ່ວບ່ອນນັ້ນ ຟັນຟາດສັງຫານຊ້າງປ່າໃນດົງໄມ້ ທີ່ເດີນຫາກິນຕາມໃຈ. ກະສັດຜູ້ມີພະລັງອັນນ່າອັດສະຈັນ ພ້ອມດ້ວຍນັກຮົບຜູ້ຮັກສົງຄາມ ໄດ້ກວາດຄົ້ນປ່າໃຫຍ່ໄປທຸກທິດ—ເປັນພາບຂອງອໍານາດກະສັດທີ່ເມື່ອເກີນຂອບ ກໍ່ເຮັດໃຫ້ປ່າກາຍເປັນທົ່ງແຫ່ງຄວາມຫວາດກົວຂອງສັດທັງຫຼາຍ.

Verse 25

लोड्यमानं महारण्यं तत्यजु: सम मृगाधिपा: । तत्र विद्रुतयूथानि हतयूथपतीनि च,असीम पराक्रमवाले राजा गदा घुमानेकी कलामें अत्यन्त प्रवीण थे। अतः वे तोमर, तलवार, गदा तथा मुसलोंकी मारसे स्वेच्छापूर्वक विचरनेवाले जंगली हाथियोंका वध करते हुए वहाँ सब ओर विचरने लगे। अदभुत पराक्रमी नरेश और उनके युद्ध-प्रेमी सैनिकोंने उस विशाल वनका कोना-कोना छान डाला। अतः सिंह और बाघ उस वनको छोड़कर भाग गये। पशुओंके कितने ही झुंड, जिनके यूथपति मारे गये थे, व्यग्र होकर भागे जा रहे थे और कितने ही यूथ इधर-उधर आर्तनाद करते थे। वे प्याससे पीड़ित हो सूखी नदियोंमें जाकर जब जल नहीं पाते, तब निराशासे अत्यन्त खिन्न हो दौड़नेके परिश्रमसे क्लान्तचित्त होनेके कारण मूर्च्छित होकर गिर पड़ते थे। भूख, प्यास और थकावटसे चूर-चूर हो बहुत-से पशु धरतीपर गिर पड़े

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອປ່າໃຫຍ່ນັ້ນຖືກກວາດຄົ້ນແລະກົດຂີ່ຢ່າງຮຸນແຮງ ຈອມສັດ—ສິງແລະເສືອ—ກໍລະທິ້ມປ່ານັ້ນແລະຫນີໄປ. ທີ່ນັ້ນ ຝູງສັດຫຼາຍຝູງວິ່ງຫນີດ້ວຍຄວາມຕົກໃຈ ເພາະຫົວໜ້າຝູງຖືກສັງຫານ; ຝູງອື່ນໆກະຈາຍຕົວ ທຸກທ້ອນ ແລະຮ້ອງຄາງຂະນະຫນີ. ຂໍ້ຄວາມນີ້ຊີ້ໃຫ້ເຫັນວ່າ ພະລັງການຮົບທີ່ບໍ່ຖືກຄວບຄຸມ ເມື່ອຫັນໄປກະທົບທໍາມະຊາດ ຈະກໍ່ໃຫ້ເກີດຄວາມຫວາດກົວ ຄວາມວຸ່ນວາຍ ແລະຄວາມທຸກທ້ອນແກ່ຜູ້ບໍ່ມີຜິດ—ເປັນຄໍາເຕືອນທາງຈິດທໍາອັນແຝງເຖິງໂທດພົນຂອງອໍານາດທີ່ບໍ່ມີຂອບເຂດ.

Verse 26

मृगयूथान्यथौत्सुक्याच्छब्दं चक्रुस्ततस्तत: । शुष्काश्चापि नदीर्गत्वा जलनैराश्यकर्शिता:,असीम पराक्रमवाले राजा गदा घुमानेकी कलामें अत्यन्त प्रवीण थे। अतः वे तोमर, तलवार, गदा तथा मुसलोंकी मारसे स्वेच्छापूर्वक विचरनेवाले जंगली हाथियोंका वध करते हुए वहाँ सब ओर विचरने लगे। अदभुत पराक्रमी नरेश और उनके युद्ध-प्रेमी सैनिकोंने उस विशाल वनका कोना-कोना छान डाला। अतः सिंह और बाघ उस वनको छोड़कर भाग गये। पशुओंके कितने ही झुंड, जिनके यूथपति मारे गये थे, व्यग्र होकर भागे जा रहे थे और कितने ही यूथ इधर-उधर आर्तनाद करते थे। वे प्याससे पीड़ित हो सूखी नदियोंमें जाकर जब जल नहीं पाते, तब निराशासे अत्यन्त खिन्न हो दौड़नेके परिश्रमसे क्लान्तचित्त होनेके कारण मूर्च्छित होकर गिर पड़ते थे। भूख, प्यास और थकावटसे चूर-चूर हो बहुत-से पशु धरतीपर गिर पड़े

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ແລ້ວຝູງກວາງທີ່ຖືກກະທົບໃຈກໍຮ້ອງສຽງຊໍ້າໆ ຕາມບ່ອນຕ່າງໆ. ແລະບາງພວກ ຖືກຄວາມສິ້ນຫວັງເພາະນ້ໍາທໍລະມານ ກໍໄປຮອດແມ່ນ້ໍາທີ່ແຫ້ງຂອດ; ເມື່ອບໍ່ພົບນ້ໍາຢູ່ນັ້ນ ພວກມັນກໍຖືກກັດກິນໂດຍຄວາມສິ້ນຫວັງ ແລະຄວາມເມື່ອຍລ້າ.

Verse 27

व्यायामक्लान्तह्ृदया: पतन्ति सम विचेतस: । क्षुत्पिपासापरीताश्र श्रान्ताश्न॒ पतिता भुवि,असीम पराक्रमवाले राजा गदा घुमानेकी कलामें अत्यन्त प्रवीण थे। अतः वे तोमर, तलवार, गदा तथा मुसलोंकी मारसे स्वेच्छापूर्वक विचरनेवाले जंगली हाथियोंका वध करते हुए वहाँ सब ओर विचरने लगे। अदभुत पराक्रमी नरेश और उनके युद्ध-प्रेमी सैनिकोंने उस विशाल वनका कोना-कोना छान डाला। अतः सिंह और बाघ उस वनको छोड़कर भाग गये। पशुओंके कितने ही झुंड, जिनके यूथपति मारे गये थे, व्यग्र होकर भागे जा रहे थे और कितने ही यूथ इधर-उधर आर्तनाद करते थे। वे प्याससे पीड़ित हो सूखी नदियोंमें जाकर जब जल नहीं पाते, तब निराशासे अत्यन्त खिन्न हो दौड़नेके परिश्रमसे क्लान्तचित्त होनेके कारण मूर्च्छित होकर गिर पड़ते थे। भूख, प्यास और थकावटसे चूर-चूर हो बहुत-से पशु धरतीपर गिर पड़े

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ດ້ວຍຄວາມເມື່ອຍລ້າໃນໃຈຈາກການອອກແຮງບໍ່ຢຸດ ສະຕິສຳນຶກຂອງພວກມັນກໍມືດມົນ ແລະຫວ່າງໄຫວ ຈຶ່ງລົ້ມລົງ. ຖືກຄວາມຫິວແລະຄວາມກະຫາຍນ້ໍາຮຸກຮານ ແລະເມື່ອຍລ້າ ພວກມັນກໍລົ້ມຢູ່ເທິງດິນ—ເປັນພາບວ່າ ຄວາມຮຸນແຮງແລະການກໍ່ກວນປ່າທີ່ບໍ່ມີຂອບເຂດ ພາສັດມີຊີວິດໃຫ້ຕົກຢູ່ໃນຄວາມທຸກທ້ອນອັນຊ່ວຍຕົນບໍ່ໄດ້.

Verse 28

केचित्‌ तत्र नरव्याप्रैरभक्ष्यन्त बुभुक्षितै: । केचिदग्निमथोत्पाद्य संसाध्य च वनेचरा:,वहाँ कितने ही व्याप्र-स्वभावके नृशंस जंगली मनुष्य भूखे होनेके कारण कुछ मृगोंको कच्चे ही चबा गये। कितने ही वनमें विचरनेवाले व्याध वहाँ आग जलाकर मांस पकानेकी अपनी रीतिके अनुसार मांसको कूट-कूटकर राँधने और खाने लगे। उस वनमें कितने ही बलवान्‌ और मतवाले हाथी अस्त्र-शस्त्रोंके आघातसे क्षत-विक्षत होकर सूँड़को समेटे हुए भयके मारे वेगपूर्वक भाग रहे थे। उस समय उनके घावोंसे बहुत-सा रक्त बह रहा था और वे मल-मूत्र करते जाते थे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ບາງຄົນໃນທີ່ນັ້ນ ຖືກຄວາມຫິວຄອບງໍາ ແລະມີນິໄສດຸຮ້າຍດັ່ງເສືອ ກໍເລີ່ມກິນສິ່ງທີ່ບໍ່ຄວນກິນ. ອີກບາງພວກ—ຜູ້ອາໄສໃນປ່າ—ໄດ້ຈຸດໄຟກ່ອນ ແລ້ວຈັດການໃຫ້ພ້ອມ ຈຶ່ງປຸງອາຫານໃນດົງໄມ້ຕາມວິທີປະເພນີຂອງພວກເຂົາ. ພາບນີ້ຊີ້ໃຫ້ເຫັນວ່າ ເມື່ອລະບຽບພັງທະລາຍ ຄວາມຫິວແລະຄວາມຢ້ານກົວອາດຜັກດັນມະນຸດໃຫ້ໄປສູ່ຄວາມໂຫດຮ້າຍ ແລະຫ່າງໄກຈາກຄວາມຍັບຍັ້ງ.

Verse 29

भक्षयन्ति सम मांसानि प्रकुट्य विधिवत्‌ तदा । तत्र केचिद्‌ गजा मत्ता बलिन: शस्त्रविक्षता:,वहाँ कितने ही व्याप्र-स्वभावके नृशंस जंगली मनुष्य भूखे होनेके कारण कुछ मृगोंको कच्चे ही चबा गये। कितने ही वनमें विचरनेवाले व्याध वहाँ आग जलाकर मांस पकानेकी अपनी रीतिके अनुसार मांसको कूट-कूटकर राँधने और खाने लगे। उस वनमें कितने ही बलवान्‌ और मतवाले हाथी अस्त्र-शस्त्रोंके आघातसे क्षत-विक्षत होकर सूँड़को समेटे हुए भयके मारे वेगपूर्वक भाग रहे थे। उस समय उनके घावोंसे बहुत-सा रक्त बह रहा था और वे मल-मूत्र करते जाते थे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໃນເວລານັ້ນ ໃນປ່າດົງດິບນັ້ນ ບາງຄົນກິນເນື້ອ ໂດຍຈັດແຕ່ງຕາມປະເພນີຂອງຕົນ ແລະຕາມກົດລະບຽບອັນຫຍາບກະດ້າງ. ທີ່ນັ້ນ ມີຊ້າງປ່າຜູ້ແຂງແກ່ງ ມຶນເມົາດ້ວຍລະດູມັດ (rut) ຖືກອາວຸດຟັນຟາດຈົນຂາດຂີດຂະຫຍອຍ ຈຶ່ງຫົວງວງງວງງວງ ດຶງງວງເຂົ້າ ແລະຫນີດ້ວຍຄວາມຢ້ານ. ພາບນີ້ສະທ້ອນການພັງທະລາຍຂອງການຢັບຢັ້ງທຳມະດາ: ຄວາມຫິວແລະຄວາມຮຸນແຮງຜັກດັນໃຫ້ສັດທັງຫຼາຍດິ້ນຮົນເພື່ອຢູ່ລອດ ແລະປ່າກາຍເປັນໂຮງລະຄອນແຫ່ງຄວາມໂຫດຮ້າຍແລະຄວາມຫວາດຫວັນ.

Verse 30

संकोच्याग्रकरान्‌ भीता: प्रद्रवन्ति सम वेगिता: । शकृन्मूत्रं सृजन्तश्च क्षरन्तः शोणितं बहु,वहाँ कितने ही व्याप्र-स्वभावके नृशंस जंगली मनुष्य भूखे होनेके कारण कुछ मृगोंको कच्चे ही चबा गये। कितने ही वनमें विचरनेवाले व्याध वहाँ आग जलाकर मांस पकानेकी अपनी रीतिके अनुसार मांसको कूट-कूटकर राँधने और खाने लगे। उस वनमें कितने ही बलवान्‌ और मतवाले हाथी अस्त्र-शस्त्रोंके आघातसे क्षत-विक्षत होकर सूँड़को समेटे हुए भयके मारे वेगपूर्वक भाग रहे थे। उस समय उनके घावोंसे बहुत-सा रक्त बह रहा था और वे मल-मूत्र करते जाते थे

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ດ້ວຍຄວາມຢ້ານ ພວກມັນດຶງສ່ວນຫນ້າ (ງວງ) ເຂົ້າ ແລະຫນີໄປດ້ວຍຄວາມໄວເທົ່າກັນ. ໃນຂະນະທີ່ວິ່ງ ພວກມັນຖ່າຍອຸຈາລະ ແລະປັດສະວະ ແລະເລືອດຈຳນວນຫຼາຍໄຫຼອອກຈາກບາດແຜ—ເປັນພາບຂອງຄວາມຮຸນແຮງໃນປ່າ ແລະຜົນອັນໂຫດຮ້າຍຂອງການຈົມຕີດ້ວຍອາວຸດຕໍ່ສັດມີຊີວິດ.

Verse 31

वन्या गजवरास्तत्र ममृदुर्मनुजान्‌ बहून्‌ । तद्‌ वनं बलमेघेन शरधारेण संवृतम्‌ | व्यरोचत मृगाकीर्ण राज्ञा हतमृगाधिपम्‌,बड़े-बड़े जंगली हाथियोंने भी वहाँ भागते समय बहुत-से मनुष्योंको कुचल डाला। वहाँ बाणरूपी जलकी धारा बरसानेवाले सैन्यरूपी बादलोंने उस वनरूपी व्योमको सब ओरसे घेर लिया था। महाराज दुष्यन्तने जहाँके सिंहोंको मार डाला था, वह हिंसक पशुओंसे भरा हुआ वन बड़ी शोभा पा रहा था

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ທີ່ນັ້ນ ຊ້າງປ່າຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ ໄດ້ຢ່ຳຂີ້ມະນຸດຫຼາຍຄົນໃນຂະນະທີ່ຫນີ. ປ່ານັ້ນ—ດັ່ງຟ້າ—ຖືກປິດລ້ອມທຸກດ້ານໂດຍກອງທັບດັ່ງເມກ ທີ່ຫຼັ່ງຝົນເປັນຫ່າຝົນລູກສອນ. ເຕັມໄປດ້ວຍສັດປ່າ ມັນຍິ່ງສະຫງ່າງາມ ເພາະກະສັດໄດ້ສັງຫານ “ເຈົ້າແຫ່ງຜູ້ລ່າ” ຂອງປ່ານັ້ນ (ສິງ) ໄວ້ແລ້ວ.

Verse 69

इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि शकुन्तलोपाख्याने एकोनसप्ततितमो< ध्याय:,इस प्रकार श्रीमह्याभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें शकुन्तलोपाख्यानविषयक उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ

ດັ່ງນີ້ ໃນ «ສຣີ ມະຫາພາຣະຕະ» ພາຍໃນ ອາດິປະຣະວະ, ໃນ ສັມພະວະປະຣະວະ, ໃນຕອນວ່າດ້ວຍ ຊະກຸນຕະລາ, ບົດທີ 69 ໄດ້ສິ້ນສຸດລົງ. ຄຳລົງທ້າຍນີ້ເປັນໝາຍວ່າຕອນຊະກຸນຕະລາສິ້ນສຸດ ແລະຊີ້ໃຫ້ເຫັນການຫັນກັບໄປສູ່ເລື່ອງລາວກວ້າງໃຫຍ່ເກືອບທັງໝົດວ່າດ້ວຍກຳເນີດແລະສາຍວົງສາ ອັນເປັນກອບຂອງຈັນຍາທຳແລະລາຊະວົງຂອງມະຫາກາບນີ້.

Verse 103

यस्य बाहुबलं प्राप्प न भवन्त्यसुहृदूगणा: । वहाँ देखती हुई स्त्रियोंने उन्हें वज्रपाणि इन्द्रके समान समझा और आपसमें वे इस प्रकार बातें करने लगीं--“सखियो! देखो तो सही, ये ही वे पुरुषसिंह महाराज दुष्यन्त हैं, जो संग्रामभूमिमें वसुओंके समान पराक्रम दिखाते हैं, जिनके बाहुबलमें पड़कर शत्रुओंका अस्तित्व मिट जाता है”

ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອເຫັນພຣະອົງຢູ່ທີ່ນັ້ນ ບັນດາແມ່ຍິງເຫັນວ່າພຣະອົງຄືພຣະອິນທຣາ ຜູ້ຖືວັຊຣະ (Vajrapāṇi) ແລະພວກນາງກ່າວກັນວ່າ: “ເພື່ອນເອີຍ ຈົ່ງເບິ່ງ—ນີ້ແຫຼະ ‘ສິງໃນຫມູ່ຊາຍ’ ພຣະຣາຊາ ດຸສຍັນຕະ. ໃນສະໜາມຮົບ ພຣະອົງສະແດງວິລະກຳດັ່ງວະສຸ; ແລະເມື່ອສັດຕູຕົກຢູ່ໃນອຳນາດແຂນອັນແຂງກ້າຂອງພຣະອົງ ການຍືນຢູ່ຂອງພວກເຂົາກໍຖືກລົບລ້າງໄປ”។

Frequently Asked Questions

The dilemma concerns whether a ruler may deny a privately established relationship and child due to public doubt; the text evaluates this as a conflict between reputation-management and the non-negotiable duty of satya and पुत्रधर्म.

Truth is treated as the highest dharma and a stabilizing public good: discernment in speech, self-scrutiny, and fidelity to one’s obligations are presented as superior to mere external prestige or ritual magnitude.

A formal phalaśruti is not stated; instead, the chapter offers meta-validation through narrative authority (celestial testimony) and genealogical consequence: Bharata’s recognition becomes the legitimizing hinge for the Bhārata lineage and the epic’s historical self-identification.