Adhyaya 311
Vana ParvaAdhyaya 31129 Verses

Adhyaya 311

Chapter Arc: Vaishampayana opens the hidden wound of Kunti: a maiden’s secret pregnancy—an event that will shadow the Kurukshetra fate long before the war is even named. → Kunti, terrified of kin and social censure, conceals the गर्भ; only a trusted nurse knows. Knowing it is ‘akartavya’ for an unmarried girl, she still clings to the child with fierce पुत्रस्नेह, torn between dharma-as-reputation and dharma-as-motherhood. → In the dead of night, weeping and desperate for one last sight, Kunti places the newborn—radiant like the Sun, armored with divine कवच and adorned with divine कुण्डल—into a casket and sets him afloat upon the river, her lament rising as the current carries away her firstborn. → The casket drifts to the region near Champa, into the Suta realm; the child survives, still bearing the miraculous armor and earrings—fate preserving what society forced her to abandon. → The abandoned child’s future identity and the inevitable collision between birth-truth and lived-lineage are left hanging, as destiny quietly transfers him into another household.

Shlokas

Verse 1

हम (_) ऑन आा5ह अष्टाधिकांत्रेशततमो< ध्याय: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना वैशग्पायन उवाच ततो गर्भ: समभवत्‌ पृथाया: पृथिवीपते । शुक्ले दशोत्तरे पक्षे तारापतिरिवाम्बरे,वैशम्पायनजी कहते हैं--राजन! इस प्रकार आकाशमें जैसे चन्द्रमाका उदय होता है, उसी प्रकार ग्यारहवें मासके- शुक्लपक्षकी प्रतिपदाको कुन्तीके उदरमें भगवान्‌ सूर्यके द्वारा गर्भ स्थापित हुआ

Vaiśaṃpāyana berkata: “Wahai penguasa bumi, kemudian terjadilah pembuahan pada Pṛthā (Kuntī). Pada paruh terang, di hari kesebelas, ia tampak laksana sang penguasa bintang-bintang—Bulan—terbit di angkasa.”

Verse 2

सा बान्धवभयाद्‌ बाला गर्भ तं॑ विनिगूहती । धारयामास सुश्रोणी न चैनां बुबुधे जन:,सुन्दर कटिप्रदेशवाली कुन्ती भाई-बन्धुओंके भयसे उस गर्भको छिपाती हुई धारण करने लगी। अत: कोई भी मनुष्य नहीं जान सका कि यह गर्भवती है

Gadis muda itu, karena takut kepada sanak-kerabatnya, menyembunyikan kandungan itu dan terus menjaganya. Walau berpinggul elok, ia menutupinya sedemikian rapat sehingga tak seorang pun di antara orang banyak menyadari bahwa ia mengandung.

Verse 3

नहितां वेद नार्यन्या काचिद्‌ धात्रेयिकामृते । कन्यापुरगतां बालां निपुणां परिरक्षणे,एक धायके सिवा दूसरी कोई स्त्री भी इसका पता न पा सकी। कुन्ती सदा कन्याओंके अन्तःपुरमें रहती थी एवं अपने रहस्यको छिपानेमें वह अत्यन्त निपुण थी

Tak ada perempuan lain yang mengetahui keadaannya selain sang inang. Gadis itu tinggal di bagian dalam kediaman para perawan, dan ia amat piawai menjaga rahasianya—menutupinya dengan kendali diri dan kebijaksanaan.

Verse 4

ततः कालेन सा गर्भ सुषुवे वरवर्णिनी । कन्यैव तस्य देवस्य प्रसादादमरप्रभम्‌,तदनन्तर सुन्दरी पृथाने यथासमय भगवान्‌ सूर्यके कृपाप्रसादसे स्वयं कन्या ही बनी रहकर देवताओंके समान तेजस्वी एक पुत्रको जन्म दिया

Kemudian, ketika waktunya tiba, wanita berparas elok itu melahirkan. Berkat anugerah dewa itu, ia tetap seorang perawan, namun melahirkan seorang putra yang bercahaya laksana para dewa yang abadi.

Verse 5

तथैवाबद्धकवचं कनकोज्ज्वलकुण्डलम्‌ । हर्यक्षं वृषभस्कन्धं यथास्य पितरं तथा,उसने अपने पिताके ही समान शरीरपर कवच बाँध रखा था और उसके कानोंमें सोनेके बने हुए दो दिव्य कुण्डल जगमगा रहे थे। उस बालककी आँखें सिंहके समान और कंधे वृषभ-जैसे थे

Vaiśaṃpāyana berkata: “Demikian pula, sang anak mengenakan zirah yang telah terikat pada tubuhnya, dan anting-anting emasnya berkilau cemerlang. Matanya kekuningan laksana mata singa, bahunya seperti bahu banteng—wujudnya menyerupai ayahnya dalam segala hal.”

Verse 6

जातमात्र च त॑ गर्भ धात्र्या सम्मन्त्रय भाविनी । मज्जूषायां समाधाय स्वास्तीर्णायां समन्ततः,उस बालकके पैदा होते ही भामिनी कुन्तीने धायसे सलाह लेकर एक पिटारी मँगवायी और उसमें सब ओर सुन्दर मुलायम बिछौने बिछा दिये। इसके बाद उस पिटारीमें चारों ओर मोम चुपड़ दिया, जिससे उसके भीतर जल न प्रवेश कर सके। जब वह सब तरहसे चिकनी और सुखद हो गयी, तब उसके भीतर उस बालकको सुला दिया और उसका सुन्दर ढककन बंद कर दिया तथा रोते-रोते उस पिटारीको अश्वनदीमें छोड़ दिया

Begitu bayi itu lahir, Kuntī yang tabah—setelah bermusyawarah dengan sang inang—menempatkan sang bayi dalam sebuah peti yang dihampari alas lembut di segala sisi.

Verse 7

मधूच्छिष्टस्थितायां सा सुखायां रुदती तथा । श्लक्ष्णायां सुपिधानायामश्वनद्यामवासृजत्‌,उस बालकके पैदा होते ही भामिनी कुन्तीने धायसे सलाह लेकर एक पिटारी मँगवायी और उसमें सब ओर सुन्दर मुलायम बिछौने बिछा दिये। इसके बाद उस पिटारीमें चारों ओर मोम चुपड़ दिया, जिससे उसके भीतर जल न प्रवेश कर सके। जब वह सब तरहसे चिकनी और सुखद हो गयी, तब उसके भीतर उस बालकको सुला दिया और उसका सुन्दर ढककन बंद कर दिया तथा रोते-रोते उस पिटारीको अश्वनदीमें छोड़ दिया

Setelah menaruh bayi itu dalam peti yang disegel dengan lilin—halus, tertutup rapat, dan dibuat senyaman mungkin—ia, sambil menangis, menghanyutkannya ke Sungai Aśvanadī.

Verse 8

जानती चाप्यकर्तव्यं कन्याया गर्भधारणम्‌ । पुत्रस्नेहेन सा राजन्‌ करुणं पर्यदेवयत्‌,राजन! यद्यपि वह यह जानती थी कि किसी कन्याके लिये गर्भधारण करना सर्वथा निषिद्ध और अनुचित है, तथापि पुत्रस्नेह उमड़ आनेसे कुन्ती वहाँ करूणाजनक विलाप करने लगी

Wahai raja, meski ia tahu bahwa bagi seorang gadis yang belum bersuami, mengandung adalah perbuatan terlarang dan tak patut, namun karena kasihnya kepada sang putra ia meratap dengan pilu.

Verse 9

समुत्सृजन्ती मज्जूषामश्वनद्यां तदा जले । उवाच रुदती कुन्ती यानि वाक्यानि तच्छूणु,उस समय अश्वनदीके जलमें उस पिटारीको छोड़ते समय रोती हुई कुन्तीने जो बातें कहीं, उन्हें बताता हूँ; सुनो

Ketika ia melepaskan peti itu ke dalam air Sungai Aśvanadī, Kuntī yang menangis mengucapkan kata-kata tertentu; dengarkanlah.

Verse 10

स्वस्ति ते चान्तरिक्षेभ्य: पार्थिवेभ्यश्व पुत्रक | दिव्येभ्यश्वचैव भूतेभ्यस्तथा तोयचराश्न ये,वह बोली--'मेरे बच्चे! जलचर, थलचर, आकाशचारी तथा दिव्य प्राणी तेरा मंगल करें

Ia berkata, “Anakku, semoga kesejahteraan menyertaimu—dari para makhluk yang bergerak di angkasa, yang hidup di bumi, dari golongan ilahi, dan juga dari segala makhluk penghuni air.”

Verse 11

शिवास्ते सन्तु पन्थानो मा च ते परिपन्थिन: । आगताश्च तथा पुत्र भवन्त्वद्रोहचेतस:,“तेरा मार्ग मंगलमय हो। बेटा! तेरे पास शत्रु न आयें। जो आ जाय॑ँ, उनके मनमें तेरे प्रति द्रोहकी भावना न रहे

Semoga jalan-jalanmu menjadi mujur dan membawa berkah, dan semoga tiada penghalang mengusikmu. Anakku, bahkan mereka yang mendekat kepadamu pun—semoga datang tanpa permusuhan, dengan hati bebas dari niat mencelakakan.

Verse 12

पातु त्वां वरुणो राजा सलिले सलिलेश्वर: । अन्तरिक्षे5न्तरिक्षस्थ: पवन: सर्वगस्तथा,“जलमें उसके स्वामी राजा वरुण तेरी रक्षा करें। अन्तरिक्षमें वहाँ रहनेवाले सर्वगामी वायुदेव तेरी रक्षा करें

Di dalam air, semoga Raja Varuṇa, penguasa segala perairan, melindungimu; dan di angkasa, semoga Dewa Angin yang bersemayam di ruang antara dan bergerak ke segala penjuru pun melindungimu.

Verse 13

पिता त्वां पातु सर्वत्र तपनस्तपतां वर: । येन दत्तो$सि मे पुत्र दिव्येन विधिना किल,“पुत्र! जिन्होंने दिव्य रीतिसे तुझे मेरे गर्भमें स्थापित किया है वे तपनेवालोंमें श्रेष्ठ तेरे पिता भगवान्‌ सूर्य सर्वत्र तेरा पालन करें

Semoga ayahmu—Dewa Surya, Tapana, yang terunggul di antara para pembakar—melindungimu di mana pun. Sebab oleh ketetapan ilahi, demikian dikisahkan, engkau dianugerahkan kepadaku sebagai putra.

Verse 14

आदित्या वसवो रुद्रा: साध्या विश्वे च देवता: । मरुतश्नष सहेन्द्रेण दिशश्ष॒ सदिगी श्वरा:,“आदित्य, वसु, रुद्र, साध्य, विश्वेदेव, इन्द्रसहित मरुदगण, दिक्पालोंसहित दिशाएँ तथा समस्त देवता सभी सम-विषम स्थानोंमें तेरी रक्षा करें। यदि विदेशमें भी तू जीवित रहेगा तो मैं इन कवच-कुण्डल आदि चिह्लोंसे उपलक्षित होनेपर तुझे पहचान लूँगी

Semoga para Āditya, Vasu, Rudra, Sādhya, Viśvedewa, para Marut bersama Indra, serta segala penjuru beserta para penjaganya, melindungimu di mana pun. Dan bila engkau tetap hidup bahkan di negeri asing, aku akan mengenalimu melalui tanda-tanda ini—baju zirah, anting, dan ciri-ciri lainnya.

Verse 15

रक्षन्तु त्वां सुरा: सर्वे समेषु विषमेषु च । वेत्स्यामि त्वां विदेशेषपि कवचेनाभिसूचितम्‌,“आदित्य, वसु, रुद्र, साध्य, विश्वेदेव, इन्द्रसहित मरुदगण, दिक्पालोंसहित दिशाएँ तथा समस्त देवता सभी सम-विषम स्थानोंमें तेरी रक्षा करें। यदि विदेशमें भी तू जीवित रहेगा तो मैं इन कवच-कुण्डल आदि चिह्लोंसे उपलक्षित होनेपर तुझे पहचान लूँगी

Semoga semua dewa melindungimu, baik di tempat yang rata maupun yang berbahaya. Dan sekalipun engkau berada di negeri asing, aku akan mengenalimu dari tanda-tanda yang menandaimu—terutama baju zirahmu.

Verse 16

धन्यस्ते पुत्र जनको देवो भानुर्विभावसु: । यस्त्वां द्रक्ष्यति दिव्येन चक्षुषा वाहिनीगतम्‌,“बेटा! तेरे पिता भगवान्‌ भुवनभास्कर धन्य हैं, जो अपनी दिव्य दृष्टिसे नदीकी धारामें स्थित हुए तुझको देखेंगे

Waiśaṃpāyana berkata: “Wahai putra, sungguh berbahagialah ayahmu—dewa Bhānu, Vibhāvasu, Sang Surya—sebab dengan penglihatan surgawi ia akan memandangmu, meski engkau berada di arus sungai.”

Verse 17

धन्‍्या सा प्रमदा या त्वां पुत्र॒त्वे कल्पयिष्यति । यस्यास्त्वं तृषित: पुत्र सतनं पास्यसि देवज,देवपुत्र! वह रमणी धन्य है जो तुझे अपना पुत्र बनाकर पालेगी और तू भूख-प्यास लगनेपर जिसके स्तनोंका दूध पियेगा

Waiśaṃpāyana berkata: “Berbahagialah perempuan yang akan mengangkatmu sebagai putranya dan membesarkanmu. Wahai putra dewa, saat engkau haus, engkau akan menyusu pada payudaranya.”

Verse 18

को नु स्वप्रस्तया दृष्टो या त्वामादित्यवर्चसम्‌ । दिव्यवर्मसमायुक्तं दिव्यकुण्डलभूषितम्‌,“उस भाग्यशालिनी नारीने कौन-सा ऐसा शुभ स्वप्न देखा होगा, जो सूर्यके समान तेजस्वी, दिव्य कवचसे संयुक्त, दिव्य कुण्डलभूषित, कमलदलके समान विशाल नेत्रवाले, लाल कमलदलके सदृश गौर कान्तिवाले, सुन्दर ललाट और मनोहर केशसमूहसे विभूषित तुझ-जैसे दिव्य बालकको अपना पुत्र बनायेगी”

Waiśaṃpāyana berkata: “Mimpi mujur apakah yang telah dilihat perempuan beruntung itu, sehingga ia akan memperolehmu sebagai putra—engkau yang bercahaya laksana Surya, berselimut zirah surgawi, dan berhias anting-anting ilahi?”

Verse 19

पद्मायतविशालाक्ष पद्मताम्रदलोज्ज्वलम्‌ | सुललाटं सुकेशान्तं पुत्रत्वे कल्पयिष्यति,“उस भाग्यशालिनी नारीने कौन-सा ऐसा शुभ स्वप्न देखा होगा, जो सूर्यके समान तेजस्वी, दिव्य कवचसे संयुक्त, दिव्य कुण्डलभूषित, कमलदलके समान विशाल नेत्रवाले, लाल कमलदलके सदृश गौर कान्तिवाले, सुन्दर ललाट और मनोहर केशसमूहसे विभूषित तुझ-जैसे दिव्य बालकको अपना पुत्र बनायेगी”

Waiśaṃpāyana berkata: “Siapakah perempuan beruntung itu—mimpi mujur apakah yang ia lihat—hingga ia akan menerimamu sebagai putra: bermata lebar laksana kelopak teratai, berkilau seperti daun teratai kemerahan, berkening indah, dan berambut elok?”

Verse 20

धन्या द्रक्ष्यन्ति पुत्र त्वां भूमौ संसर्पमाणकम्‌ | अव्यक्तकलवाक्यानि वदन्तं रेणुगुण्ठितम्‌,“वत्स! जब तू धरतीपर पेटके बल सरकता फिरेगा और समझमें न आनेवाली मधुर तोतली बोली बोलेगा, उस समय तेरे धूलिधूसरित अंगोंको जो लोग देखेंगे, वे धन्य हैं

Waiśaṃpāyana berkata: “Berbahagialah mereka yang akan memandangmu, wahai putraku, ketika engkau merangkak di tanah—mengucap kata-kata yang masih belum jelas namun manis seperti celoteh—dengan tubuh kecilmu terselimuti debu.”

Verse 21

धन्‍्या द्रक्ष्यन्ति पुत्र त्वां पुनर्योवनगोचरम्‌ । हिमवद्धनसम्भूतं सिंहं केसरिणं यथा,पुत्र! हिमालयके जंगलमें उत्पन्न हुए केसरी सिंहके समान तुझे जवानीमें जो लोग देखेंगे, वे धन्य हैं

Wahai putraku, berbahagialah mereka yang akan memandangmu kembali dalam jangkauan masa muda—laksana singa berjanggut surai keemasan yang lahir di rimba Himalaya.

Verse 22

एवं बहुविधं राजन्‌ विलप्य करुणं पृथा । अवासृजत मज्जूषामश्चनद्यास्तदा जले,राजन्‌! इस तरह बहुत-सी बातें कहकर करुण-विलाप करती हुई कुन्तीने उस समय अश्वनदीके जलमें वह पिटारी छोड़ दी

Wahai Raja, setelah meratap dengan banyak cara dan meluapkan ratap pilu, Pṛthā (Kuntī) pada saat itu melemparkan peti itu ke dalam air Sungai Aśvanadī.

Verse 23

रुदती पुत्रशोकार्ता निशीथे कमलेक्षणा । धात्रया सह पृथा राजन पुत्रदर्शनलालसा,जनमेजय! आधी रातके समय कमलनयनी कुन्ती पुत्रशोकसे आतुर हो उसके दर्शनकी लालसासे धात्रीके साथ नदीके तटपर देरतक रोती रही

Wahai Janamejaya, di tengah malam Kuntī yang bermata bak teratai, dilanda duka karena putranya; rindu hendak memandangnya, ia menangis lama di tepi sungai bersama inang pengasuhnya.

Verse 24

विसर्जयित्वा मज्जूषां सम्बोधनभयात्‌ पितु: । विवेश राजभवन पुन: शोकातुरा तत:,पेटीको पानीमें बहाकर, कहीं पिताजी जग न जायूँ, इस भयसे वह शोकसे आतुर हो पुन: राजभवनमें चली गयी

Setelah menghanyutkan peti itu ke air, karena takut ayahnya akan mengenalinya, ia yang diliputi duka kembali masuk ke istana raja.

Verse 25

मज्जूषा त्वश्वनद्या: सा ययौ चर्मण्वतीं नदीम्‌ । चर्मण्वत्याश्व यमुनां ततो गड़ां जगाम ह,वह पिटारी अश्वनदीसे चर्मण्वती (चम्बल) नदीमें गयी। चर्मण्वतीसे यमुनामें और वहाँसे गंगामें जा पहुँची

Peti itu, terbawa arus, bergerak dari Aśvanadī menuju Sungai Carmaṇvatī; dari Carmaṇvatī masuk ke Yamunā, lalu dari sana mencapai Gaṅgā.

Verse 26

गड़ाया: सूतविषयं चम्पामनुययौ पुरीम्‌ । स मज्जूषागतो गर्भस्तरज़ैरुह्ममानक:

Vaiśampāyana berkata: Mengikuti arus Gaṅgā, bayi dalam kandungan yang diletakkan di dalam peti kecil itu terbawa gelombang dan sampai ke kota Campā di negeri para Sūta.

Verse 27

पिटारीमें सोया हुआ वह बालक गंगाकी लहरोंसे बहाया जाता हुआ चम्पापुरीके पास सूतराज्यमें जा पहुँचा ।। अमृतादुत्थितं दिव्यं तनुवर्म सकुण्डलम्‌ । धारयामास तं गर्भ दैवं च विधिनिर्मितम्‌,उसके शरीरका दिव्य कवच और कानोंके कुण्डल--ये अमृतसे प्रकट हुए थे। वे ही विधाताद्वारा रचित उस देवकुमारको जीवित रख रहे थे

Vaiśampāyana berkata: Bayi itu, terbaring dalam peti kecil, dihanyutkan gelombang Gaṅgā hingga dekat Campāpurī, ke wilayah raja Sūta. Dari amṛta telah muncul baju zirah ilahi pada tubuhnya dan anting di telinganya; perlindungan surgawi yang ditenun oleh takdir itulah yang menjaga anak itu tetap hidup.

Verse 307

इस प्रकार श्रीमह्याभारत वनपर्वके अन्तर्गत कुण्डलाहरणपर्वमें सूर्यकृन्ती-समायमविषयक तीन सौ सातवाँ अध्याय पूरा हुआ

Demikian berakhir bab ke-307 dari Vana Parva Mahābhārata yang mulia, dalam bagian “Peristiwa Pengambilan Anting”, mengenai pertemuan Sūrya dan Kuntī.

Verse 308

इति श्रीमहा भारते वनपर्वणि कुण्डलाहरणपर्वणि कर्णपरित्यागे अष्टाधिकत्रिशततमो< ध्याय:,इस प्रकार श्रीमह्याभारत वनपर्वके अन्तर्गत कुण्डलाहरणपर्वमें कर्णपरित्यागविषयक तीन सौ आठवाँ अध्याय पूरा हुआ

Demikian berakhir bab ke-308 dari Vana Parva Mahābhārata yang mulia, dalam bagian “Peristiwa Pengambilan Anting”, mengenai pelepasan (pemberian) Karṇa.