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Book 3 operationalizes the Vijigīṣu’s internal sovereignty by converting social friction into adjudicable categories with predictable sanctions. Chapter 18 treats speech as a public-order variable: insults, defamation, and threats are not private “hurt feelings” but inputs that can trigger feud (jātavaira), factionalism, and reputational damage to professions and regions. Kautilya’s pragmatism lies in a graded tariff of fines (paṇa-based) that is sensitive to veracity (satya/mithyā), hierarchy (viśiṣṭa/hīna; varṇa ordering), and vulnerable/protected domains (parastrī; deva-caitya). He also demands evidentiary competence: medical experts for leprosy/madness, proximate witnesses, and specific tests for impotence—showing a proto-bureaucratic concern for proof over rumor. Strategically, this chapter strengthens janapada stability (the productive limb) and ensures the king’s daṇḍa is seen as measured rather than arbitrary, thereby sustaining compliance, revenue, and mobilization capacity for external conquest.
Sutra 1
वाक्पारुष्यमुपवादः कुत्सनमभिभर्त्सनमिति ॥ कZ_०३.१८.०१ ॥
गाली देना तीन तरह का होता है। किसी की बदनामी करना, बेइज़्ज़ती करना, या धमकाना।
Sutra 2
शरीरप्रकृतिश्रुतवृत्तिजनपदानां शरीरोपवादे काणखञ्जादिभिः सत्ये त्रिपणो दण्डः मिथ्योपवादे षट्पणो दण्डः ॥ कZ_०३.१८.०२ ॥
किसी की बॉडी, नेचर, पढ़ाई, काम या गाँव की गाली दो तो जुर्माना भी देना पड़ेगा। काना, लंगड़ा ऐसे शब्द यूज़ किये तो सही बात के लिए ३ पण और झूठ के लिए ६ पण फाइन लगेगा।
Sutra 3
शोभनाक्षिमन्तः इति काणखञ्जादीनां स्तुतिनिन्दायां द्वादशपणो दण्डः ॥ कZ_०३.१८.०३ ॥
अगर कोई किसी को मज़ाक में 'काना' या 'लंगड़ा' बोल के बुलाता है, उस पर 12 पण जुर्माना लगेगा। जैसे कोई काना आदमी को 'सुंदर आँखें है' बोल के छेड़ता है, यह भी वही गुनाह है। यह सब बदतमीज़ी है, इसलिए राजा इस पर पैसे लगाता है।
Sutra 4
कुष्ठोन्मादक्लैब्यादिभिः कुत्सायां च सत्यमिथ्यास्तुतिनिन्दासु द्वादशपणोत्तरा दण्डास्तुल्येषु ॥ कZ_०३.१८.०४ ॥
अगर कोई किसी को 'कोढ़', 'पागल', या 'नपुंसक' बोल के गाली देता है, तो जुर्माना 12 पण से शुरू होता है। चाहे वो सच हो या झूठ, गाली गाली ही है। दोनों तरफ के लोग बराबर के हो तो यह रूल लगेगा। और जुर्माना और भी बढ़ सकता है।
Sutra 5
विशिष्टेषु द्विगुणाः हीनेष्वर्धदण्डाः परस्त्रीषु द्विगुणाः प्रमादमदमोहादिभिरर्धदण्डाः ॥ कZ_०३.१८.०५ ॥
अगर बड़े आदमी को गाली दी, तो जुर्माना डबल लगेगा। छोटे आदमी को दिया तो आधा लगेगा। पर दूसरे की बीवी के बारे में कोई हरकत किया, तो फिर भी डबल जुर्माना लगेगा। अगर नशा में या गलती से कोई बदतमीज़ी हो गई, तो सिर्फ आधा जुर्माना लगेगा।
Sutra 6
कुष्ठोन्मादयोश्चिकित्सकाः संनिकृष्टा पुमांसश्च प्रमाणं क्लीबभावे स्त्रियो मूत्रफेनोऽप्सु विष्ठानिमज्जनं च ॥ कZ_०३.१८.०६ ॥
कोई किसी को कोढ़ या पागल बोल के, तो डॉक्टर और पास के लोग चेक करेंगे कि सच है या नहीं। नपुंसक होने का प्रूफ औरतें दे सकती हैं। पेशाब में झाग देख के या पानी में पॉटी डालकर देख के भी चेक करते थे कि बंदा सच में नपुंसक है या नहीं।
Sutra 7
प्रकृत्युपवादे ब्राह्मणक्षत्रियवैश्यशूद्रान्तावसायिनामपरेण पूर्वस्य त्रिपणोत्तरा दण्डाः पूर्वेणापरस्य द्विपणाधराः कुब्राह्मणादिभिश्च कुत्सायाम् ॥ कZ_०३.१८.०७ ॥
अगर कोई नीचे वाले जात का आदमी ऊपर वाले जात का आदमी को गाली देता है, तो उसका जुर्माना हर बार तीन पण बढ़ता है। अगर ऊपर वाले जात का आदमी नीचे वाले को गाली देता है, तो जुर्माना दो पण कम होता है। झूठा ब्राह्मण बोलने पर भी अलग सज़ा होती है।
Sutra 8
तेन श्रुतोपवादो वाग्जीवनानां कारुकुशीलवानां वृत्त्युपवादः प्राज्जूणकगान्धारादीनां च जनपदोपवादा व्याख्याताः ॥ कZ_०३.१८.०८ ॥
इसी रूल से और चीज़ें भी समझते हैं। अगर कोई सुनी-सुनी बात फैला के बदनाम करे, वो भी यहीं कैटेगरी में आता है। जो लोग बोलने से अपना पेट पालते हैं, उनके बारे में गंदी बातें बोलना भी यहीं है। कारीगर और कलाकार के काम के बारे में बुरा बोलना भी इसमें है। और किसी जनपद या देश के लोगों को गाली देना, जैसे प्रज्जुनक या गंधार वाले, वो भी यहीं रूल से सज़ा पाएंगे।
Sutra 9
यः परं एवं त्वां करिष्यामि इति करणेनाभिभर्त्सयेदकरणे यस्तस्य करणे दण्डस्ततोऽर्धदण्डं दद्यात् ॥ कZ_०३.१८.०९ ॥
अगर कोई किसी को धमका के बोलता है कि मैं तुम्हारा यह करूंगा, लेकिन वो काम नहीं करता। तो जो सज़ा उस काम के लिए होती, उसका आधा लगेगा। मतलब धमकी दी, काम नहीं किया, तो आधा जुर्माना।
Sutra 10
अशक्तः कोपं मदं मोहं वापदिशेद्द्वादशपणं दण्डं दद्यात् ॥ कZ_०३.१८.१० ॥
अगर कोई मजबूर या कमज़ोर आदमी गुस्सा, नशा या पागलपन की बात करता है। वो बहाना मान के छूट नहीं मिलेगी। उसको बारह पण का जुर्माना देना पड़ेगा।
Sutra 11
जातवैराशयः शक्तश्चापकर्तुं यावज्जीविकावस्थं दद्यात् ॥ कZ_०३.१८.११ ॥
लेकिन जो आदमी सच में दुश्मनी रखता है और कर भी सकता है। उसको तब तक रोक के रखो जब तक उसके पास कोई काम-धंधा चल रहा है। जितना टाइम उसकी कमाई है, उतना टाइम उसपे कंट्रोल रखना पड़ेगा।
Sutra 12
आक्रोशाद्देवचैत्यानामुत्तमं दण्डमर्हति ॥ कZ_०३.१८.१२च्द् ॥
अपने ही देश या गाँव में कोई गलती हो जाए तो जो पहले बताया गया है वही सज़ा लगेगी, वो कम है। लेकिन किसी जाति या संघ के साथ गलती हो तो बीच वाली सज़ा लगेगी।
Reduced feuds and factional escalation (jātavaira), higher trust in adjudication, protection of vulnerable/protected targets (parastrī; sacred sites), and preservation of occupational and regional reputations—thereby stabilizing janapada productivity and public order.
Graded fines: for bodily-defamation using terms like ‘one-eyed/cripple’—3 paṇas if true, 6 if false; praising/blaming such traits—12 paṇas; using ‘leper/madman/impotent’ and similar—12 paṇas and higher depending on parity/status; doubled for superiors and others’ women, halved for inferiors or when due to negligence/intoxication/delusion; threats incur half the penalty of the threatened act if the speaker cannot execute, but if capable and malicious may be punished up to loss of livelihood; insults against deva-caitya merit the highest (uttama) penalty.
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