Opening the text

Book 3 operationalizes state power through courts and enforceable liability. In 3.10, Kautilya pushes sovereignty into the village micro-level: the grāmika and rotating local watchers (upavāsaḥ) must escort and monitor village affairs, expel known criminals (thieves, adulterers), and physically structure space around the settlement (a stambha-marked perimeter outpost) to deter re-entry and predation. The chapter then treats agrarian prosperity as a security problem: grazing and crop-damage are not “private mishaps” but measurable harms with standardized fines and restitution schedules by animal type and circumstance (grazing, sitting, encamping). Exemptions (village sacred bull, certain cows/oxen) show dharma-sensitive calibration without weakening enforcement. For the Vijigīṣu, this is not pastoral detail: it is janapada hardening—turning dispersed producers into a governable, protected base that reliably yields revenue, recruits, and supplies, while minimizing local disorder that would otherwise invite matsya-nyāya and fiscal leakage.
Sutra 1
कर्मोदकमार्गमुचितं रुन्धतः कुर्वतोऽनुचितं वा पूर्वः साहसदण्डः सेतुकूपपुण्यस्थानचैत्यदेवायतनानि च परभूमौ निवेशयतः ॥ कZ_०३.१०.०१ ॥
पानी के रास्ता रोकने पे, या गलत रास्ता बनाने पे, छोटा फाइन लगेगा। और अगर किसी की ज़मीन पे बिना पूछे कुआँ, बाँध, मंदिर, या पूजा का स्थान बना दे, तो भी वही फाइन लगेगा। दूसरी ज़मीन पे कुछ भी मत बनाओ।
Sutra 2
पूर्वानुवृत्तं धर्मसेतुमाधानं विक्रयं वा नयतो नाययतो वा मध्यमः साहसदण्डः श्रोतृऋणामुत्तमः अन्यत्र भग्नोत्सृष्टात् ॥ कZ_०३.१०.०२ ॥
जब कोई पुराना धरम का बाँध या पानी का सिस्टम है, उसे कोई तोड़ दे या ठीक से नहीं संभाले। या फिर उसे गलत तरीके से गिरवी रखे या बेच दे। इसके लिए मध्यम साहस दंड लगता है। अगर बात श्रोतिय ज़मीन की है, तो सबसे बड़ा दंड लगेगा। लेकिन अगर वो बाँध टूट चुका है या छोड़ दिया गया है, तो अलग बात है।
Sutra 3
स्वाम्यभावे ग्रामाः पुण्यशीला वा प्रतिकुर्युः ॥ कZ_०३.१०.०३ ॥
अगर किसी ज़मीन का मालिक नहीं है, तो गाँव के लोग या जो लोग अच्छे काम करते हैं, वो उसकी ज़िम्मेदारी लेंगे। वो ही उसे संभालेंगे या ठीक करेंगे।
Sutra 4
पथिप्रमाणं दुर्गनिवेशे व्याख्यातम् ॥ कZ_०३.१०.०४ ॥
रास्तों की नाप कितनी होनी चाहिए, यह किले बनाने वाले हिस्से में बताया गया है। वहाँ जाके देख सकते हो।
Sutra 5
क्षुद्रपशुमनुष्यपथं रुन्धतो द्वादशपणो दण्डः महापशुपथं चतुर्विंशतिपणः हस्तिक्षेत्रपथं चतुष्पञ्चाशत्पणः सेतुवनपथं षट्शतः श्मशानग्रामपथं द्विशतः द्रोणमुखपथं पञ्चशतः स्थानीयराष्ट्रविवीतपथं साहस्रः ॥ कZ_०३.१०.०५ ॥
अगर कोई छोटी रास्ता रोके जहाँ आदमी और छोटे जानवर जाते हैं, तो 12 पण जुर्माना। बड़े जानवरों के रास्ते के लिए 24 पण। हाथी के रास्ते के लिए 54 पण। जंगल या बाँध के रास्ते के लिए 600 पण। श्मशान या गाँव के रास्ते के लिए 200 पण। द्रोणमुख के रास्ते के लिए 500 पण। और अगर कोई ज़िला या सीमा का रास्ता रोके, तो 1000 पण लगता है।
Sutra 6
अतिकर्षणे चैषां दण्डचतुर्था दण्डाः ॥ कZ_०३.१०.०६ ॥
अगर वो अपनी हद से ज़्यादा ज़मीन का इस्तेमाल करें, तो उनको चौथी कैटेगरी का जुर्माना देना पड़ेगा।
Sutra 7
कर्षणे पूर्वोक्ताः ॥ कZ_०३.१०.०७ ॥
जब नॉर्मल जोते जाता है, तो जो रूल्स पहले बताये थे वही लगेंगे। कोई नई बात नहीं है।
Sutra 8
क्षेत्रिकस्याक्षिपतः क्षेत्रमुपवासस्य वा त्यजतो बीजकाले द्वादशपणो दण्डः अन्यत्र दोषोपनिपाताविषह्येभ्यः ॥ कZ_०३.१०.०८ ॥
अगर किसान बीज बोने का टाइम अपना खेत छोड़ दे, तो उसपे 12 पण जुर्माना लगेगा। लेकिन अगर कोई बड़ा आफत आयी हो, तब माफ है।
Sutra 9
करदाः करदेष्वाधानं विक्रयं वा कुर्युः ब्रह्मदेयिका ब्रह्मदेयिकेषु ॥ कZ_०३.१०.०९ ॥
करद वाले अपनी ज़मीन सिर्फ करद वाले को ही बेच सकते या गिरवी रख सकते। ब्रह्मदेय वाले भी सिर्फ ब्रह्मदेय वाले को ही।
Sutra 10
अन्यथा पूर्वः साहसदण्डः ॥ कZ_०३.१०.१० ॥
अगर कोई ये रूल तोड़ के ज़मीन बेचेगा, तो उसको ज़ोर जबरदस्ती का जुर्माना मिलेगा। जो पहले से फिक्स्ड है।
Sutra 11
करदस्य वाकरदग्रामं प्रविशतः ॥ कZ_०३.१०.११ ॥
अगर कोई करद वाला, या जो करद नहीं है, ऐसे गाँव में घुस जाये जहाँ करद नहीं है...
Sutra 12
करदं तु प्रविशतः सर्वद्रव्येषु प्राकाम्यं स्यात् अन्यत्रागारात् ॥ कZ_०३.१०.१२ ॥
जब करदा किसी गाँव में आता है, वो सब चीज़ें खरीद-सकता है। कोई रोकेगा नहीं। बस घर में रहने का काम अलग है।
Sutra 13
तदप्यस्मै दद्यात् ॥ कZ_०३.१०.१३ ॥
लेकिन रहने की जगह भी उसको देनी पड़ेगी। यह भी ज़रूरी है।
Sutra 14
अनादेयमकृषतोऽन्यः पञ्चवर्षाण्युपभुज्य प्रयासनिष्क्रयेण दद्यात् ॥ कZ_०३.१०.१४ ॥
अगर कोई ज़मीन जोते नहीं, तो दूसरा उसको पाँच साल तक यूज़ कर सकता है। उसके बाद उसका पैसा देना पड़ेगा।
Sutra 15
अकरदाः परत्र वसन्तो भोगमुपजीवेयुः ॥ कZ_०३.१०.१५ ॥
जो करदा नहीं है, वो कहीं और रह सकता है। अपना हिस्सा ले सकता है।
Sutra 16
ग्रामार्थेन ग्रामिकं व्रजन्तमुपवासाः पर्यायेणानुगच्छेयुः ॥ कZ_०३.१०.१६ ॥
जब गाँव का मुखिया गाँव का काम से बाहर जाता है, तो गाँव के लोग बारी-बारी से उसके साथ जाते हैं। एक बार एक, दूसरी बार दूसरा।
Sutra 17
अननुगच्छन्तः पणार्धपणिकं योजनं दद्युः ॥ कZ_०३.१०.१७ ॥
जो लोग साथ नहीं आते, उनको जुर्माना देना पड़ेगा। एक योजन के लिए एक-एंड-अ-हाफ पन लगेंगे।
Sutra 18
ग्रामिकस्य ग्रामादस्तेनपारदारिकं निरस्यतश्चतुर्विंशतिपणो दण्डः ग्रामस्योत्तमः ॥ कZ_०३.१०.१८ ॥
अगर गाँव का मुखिया किसी चोर या घर-तोड़ आदमी को गाँव से निकाल दे, तो जुर्माना अलग है। गाँव लेवल पे सबसे बड़ा जुर्माना चौबीस पन लगता है।
Sutra 19
निरस्तस्य प्रवेशो ह्यभिगमेन व्याख्यातः ॥ कZ_०३.१०.१९ ॥
जो आदमी गाँव से निकाला गया है, वो वापस अगर आ जाए। उसको वही रूल लगेगा जो बिना परमिशन के घुसने पे लगता है।
Sutra 20
स्तम्भैः समन्ततो ग्रामाद्धनुःशतापकृष्टमुपसालं कारयेत् ॥ कZ_०३.१०.२० ॥
गाँव के आस-पास एक फेंस बनाना है। सीमा यह होनी चाहिए कि गाँव से सौ धनुष दूर हो। फेंस में लंबे खंभे गाड़ के बनाओ।
Sutra 21
पशुप्रचारार्थं विवीतमालवनेनोपजीवेयुः ॥ कZ_०३.१०.२१ ॥
जानवरों को चरने के लिए जगह चाहिए। गाँव के बाहर जो चरा-गाह है, उसमें जंगल भी आता है। वही एरिया यूज़ करो।
Sutra 22
विवीतं भक्षयित्वापसृतानामुष्ट्रमहिषाणां पादिकं रूपं गृह्णीयुः गवाश्वखराणां चार्धपादिकं क्षुद्रपशूनां षोडशभागिकम् ॥ कZ_०३.१०.२२ ॥
जानवर खेत में घास खाके चले जाए तो टैक्स लगेगा। ऊंट और भैंस के लिए चार में से एक हिस्सा देना पड़ेगा। गाय, घोड़ा और गधा के लिए आठ में से एक हिस्सा। छोटे जानवर के लिए सोलह में से एक।
Sutra 23
भक्षयित्वा निषण्णानामेत एव द्विगुणा दण्डाः परिवसतां चतुर्गुणाः ॥ कZ_०३.१०.२३ ॥
घास खाके अगर जानवर वहीं रुक जाए तो दुगुना टैक्स लगेगा। अगर वहीं खड़े रह जाए, तो चारगुना टैक्स लगेगा।
Sutra 24
ग्रामदेववृषा वानिर्दशाहा वा धेनुरुक्षाणो गोवृषाश्चादण्ड्याः ॥ कZ_०३.१०.२४ ॥
गाँव की मंदिर का बैल, जिसका कोई मालिक नहीं हो, और गाय, बैल, इनपर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
Sutra 25
सस्यभक्षणे सस्योपघातं निष्पत्तितः परिसंख्याय द्विगुणं दापयेत् ॥ कZ_०३.१०.२५ ॥
जानवर ने फसल खा ली तो पूरा हिसाब लगाओ कि नुकसान कितना हुआ। उस हिसाब से दुगुना पैसा वसूल करो।
Sutra 26
स्वामिनश्चानिवेद्य चारयतो द्वादशपणो दण्दः प्रमुञ्चतश्चतुर्विंशतिपणः ॥ कZ_०३.१०.२६ ॥
अगर कोई जानवर मालिक को बताए बिना किसी के जानवर को भगा के ले जाता है। तो उसका जुर्माना बारह पण है। और अगर वो जानवर को छोड़ देता है, तो जुर्माना छब्बीस पण लगेगा।
Sutra 27
पालिनामर्धदण्डाः ॥ कZ_०३.१०.२७ ॥
जो लोग दूसरों की हिफाज़त करते हैं, उनके लिए सज़ा आधी है। अगर वो कोई गलती करें, तो उनका जुर्माना नॉर्मल से आधा लगेगा।
Sutra 28
तदेव षण्डभक्षणे कुर्यात् ॥ कZ_०३.१०.२८ ॥
बैल या जो जानवर नसबंदी हो चुका है, वो खेत में घुस के खाता है तो भी यही रूल लगेगा। उसमें भी वही सज़ा होगी।
Sutra 29
वाटभेदे द्विगुणः वेश्मखलवलयगतानां च धान्यानां भक्षणे ॥ कZ_०३.१०.२९ ॥
अगर कोई फेंस तोड़ दे, तो जुर्माना डबल होगा। और अगर कोई घर में, खेत में या जहाँ अनाज़ रखा हो, वहाँ से खाए, तो भी जुर्माना दुगना लगेगा।
Sutra 30
हिंसाप्रतीकारं कुर्यात् ॥ कZ_०३.१०.३० ॥
जितना नुकसान हुआ है, उतना पैसा देना पड़ेगा। जो चीज़ टूटी या खराब हुई, उसका भुगतान करना पड़ेगा।
Sutra 31
अभयवनमृगाः परिगृहीता वा भक्षयन्तः स्वामिनो निवेद्य यथावध्यास्तथा प्रतिषेद्धव्याः ॥ कZ_०३.१०.३१ ॥
जो जानवर जंगल में सुरक्षित हैं या किसी के पास बंद हैं, वो भी अगर खेत में घुस के खाएँ, तो मालिक को बताओ। फिर उन्हें वैसे ही रोकना है जैसे किसी खतरनाक जानवर को रोकते हैं।
Sutra 32
पशवो रश्मिप्रतोदाभ्यां वारयितव्याः ॥ कZ_०३.१०.३२ ॥
जानवर को रोप और लाठी से रोकना चाहिए। रोप से बाँधो और लाठी से संभालो।
Sutra 33
तेषामन्यथा हिंसायां दण्डपारुष्यदण्डाः ॥ कZ_०३.१०.३३ ॥
अगर रोकने में गलत तरीके से जानवर को नुकसान हो गया, तो मारना-पीटना मान के सज़ा देना। जो ज़ोर से मारेगा, उसको भी परेशान करेंगे।
Sutra 34
प्रार्थयमाना दृष्टापराधा वा सर्वोपायैर्नियन्तव्याः । इति क्षेत्रपथहिंसा ॥ कZ_०३.१०.३४ ॥
चाहे वो माफ़ी माँग रहे हों या पकड़े गए हों, उनको किसी भी तरीके से रोकना है। खेत और रास्ते को नुकसान पहुँचाने का हिसाब यह पूरा हुआ।
Sutra 35
कर्षकस्य ग्राममभ्युपेत्याकुर्वतो ग्राम एवात्ययं हरेत् ॥ कZ_०३.१०.३५ ॥
किसान ने गाँव को काम करने का वादा किया, लेकिन काम नहीं किया। तो गाँव वाले खुद उससे जुर्माना ले लेंगे।
Sutra 36
कर्माकरणे कर्मवेतनद्विगुणम् हिरण्यादाने प्रत्यंशद्विगुणम् भक्ष्यपेयादाने च प्रहवणेषु द्विगुणमंशं दद्यात् ॥ कZ_०३.१०.३६ ॥
काम नहीं किया तो डबल वेतन देना पड़ेगा। कैश उठाया तो डबल वापस करना। खाना-पीना खाया तो डबल दाम लगाना पड़ेगा।
Sutra 37
प्रेक्षायामनंशदः सस्वजनो न प्रेक्षेत ॥ कZ_०३.१०.३७ ॥
जब किसी का इंस्पेक्शन या ऑडिट हो, तो ऐसे लोग इंस्पेक्टर नहीं बनना चाहिए जो उस काम में कोई हिस्सा नहीं रखते। अपने रिश्तेदार या करीबी लोग भी इंस्पेक्टर नहीं बनना चाहिए।
Sutra 38
प्रच्छन्नश्रवणेक्षणे च सर्वहिते च कर्मणि निग्रहेण द्विगुणमंशं दद्यात् ॥ कZ_०३.१०.३८ ॥
जब किसी को चुपके से सुनना हो या देखना हो, और जब काम में किसी की गलती रोकनी हो, तो उसको डब रिवॉर्ड मिलता है। यह सब लोग के भले के लिए होता है।
Sutra 39
सर्वहितमेकस्य ब्रुवतः कुर्युराज्ञाम् ॥ कZ_०३.१०.३९ ॥
अगर एक बंदा भी सबके भले के बारे में बात करे, तो उसकी बात मान लो। उसको हुकुम की तरह मान के फॉलो करो।
Sutra 40
अकरणे द्वादशपणो दण्डः ॥ कZ_०३.१०.४० ॥
अगर कोई काम ही नहीं करे, जो करना था वो ना करे, तो उस पर 12 पना फाइन लगता है।
Sutra 41
तं चेत्सम्भूय वा हन्युः पृथगेषामपराधद्विगुणो दण्डः ॥ कZ_०३.१०.४१ ॥
अगर सब मिल के किसी को मार दे, तो हर एक पे अलग-अलग फाइन लगेगा। उसकी गलती के हिसाब से डब फाइन होगा।
Sutra 42
उपहन्तृषु विशिष्टः ॥ कZ_०३.१०.४२ ॥
जब कई लोग मिल के कोई जुर्म करते हैं, तो सबसे बड़े गुनहगार को अलग से पकड़ना चाहिए। उसकी सज़ा सबसे ज़्यादा होनी चाहिए।
Sutra 43
ब्राह्मणश्चैषां ज्यैष्ठ्यं नियम्येत ॥ कZ_०३.१०.४३ ॥
और अगर उसमें कोई ब्राह्मण भी हो, तो उसकी सीनियॉरिटी का अलग से हिसाब रखना। यह रूल फिक्स है।
Sutra 44
प्रहवणेषु चैषां ब्राह्मणा नाकामाः कुर्युः अंशं च लभेरन् ॥ कZ_०३.१०.४४ ॥
जब कोई पब्लिक फंक्शन हो, ब्राह्मण को ज़बरदस्ती काम नहीं करवाना चाहिए। और उनको अपना हिस्सा देना भी ज़रूरी है।
Sutra 45
तेन देशजातिकुलसंघानां समयस्यानपाकर्म व्याख्यातम् ॥ कZ_०३.१०.४५ ॥
इससे यह भी क्लियर हो जाता है कि किसी देश, जाति, कुल या ग्रुप की अग्रीमेंट तोड़ने का क्या रूल है। अगर कोई अपनी मंज़ूरी नहीं निभाता, तो क्या करना है।
Sutra 46
ग्रामशोभाश्च रक्षाश्च तेषां प्रियहितं चरेत् ॥ कZ_०३.१०.४६च्द् ॥
राजा देश के भले के लिए काम कराए। सड़क पर पुल और रास्ते बनवाए ताकि लोग आराम से घूम सकें।
Reduced rural crime and crop-loss, predictable compensation for damage, and a disciplined village administration—stabilizing food supply and livelihoods while increasing the state’s dependable revenue base from a secure janapada.
Non-participation in mandated escort/watch: fine per yojana (paṇārdha-paṇika). Grāmika failing in expulsion duties: 24 paṇas. Grazing/trespass damage: graded rūpa/fines by animal type and circumstance (higher if animals sit or encamp). Unreported grazing: 12 paṇas; releasing/letting loose: 24 paṇas; herdsmen (pālin) receive half-penalties; fence-breaking and eating stored grain incur doubled penalties; plus required restitution for crop damage assessed and charged at double.
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