
Sukta 9.48
Soma (Pavamāna)
यह संक्षिप्त पवमान सूक्त सोम की स्तुति करता है, जब वह शुद्ध होकर पवित्र आसनों में स्थापित किया जाता है। वह वीर्य और सौंदर्य धारण करता है, जो सफल और ‘सुसंपन्न’ यज्ञकर्म को सहारा देते हैं। सोम को राजसत्ता-युक्त और स्वर्गजन्मा कहा गया है, जो धन और बल प्रदान करता है; और प्रेरित किए जाने पर वह महान ‘इन्द्र-शक्ति’ में बढ़ता है, अभिलषित सहायता और व्यापक पराक्रम प्रदान करता है।
Mantra 1
तं त्वा नृम्णानि बिभ्रतं सधस्थेषु महो दिवः । चारुं सुकृत्ययेमहे ॥
हे (सोम) तुझे हम अन्वेषण करते हैं—महान द्यौ (स्वर्ग) के साधस्थानों में नृम्ण (वीर-शक्ति) धारण करने वाले; सुन्दर, ताकि हमारा सुकृत्य (सत्कर्म) और सिद्ध-कर्म पूर्ण हो।
Mantra 2
संवृक्तधृष्णुमुक्थ्यं महामहिव्रतं मदम् । शतं पुरो रुरुक्षणिम् ॥
संवृक्त (शुद्ध) और धृष्णु (धैर्यवान), उक्थ्य (स्तुति-योग्य) वह मद (आनन्द-उन्माद) है—महान, महाव्रत (महान नियम/व्रत) वाला; आक्रमण के विरुद्ध अस्तित्व के सौ अग्रभागों की रक्षा करने वाला।
Mantra 3
अतस्त्वा रयिमभि राजानं सुक्रतो दिवः । सुपर्णो अव्यथिर्भरत् ॥
अतः हे सुक्रतो, हे राजा, दिव्य समृद्धि (रयि) को तुम्हारे पास—सुपर्ण, अव्यथित (अकंप), वहन करता है।
Mantra 4
विश्वस्मा इत्स्वर्दृशे साधारणं रजस्तुरम् । गोपामृतस्य विर्भरत् ॥
प्रकाश के द्रष्टा प्रत्येक ऋषि के लिए वह—रजस् (मध्यलोकों) को वेग से पार करता हुआ—सामान्य निधि लाता है; और ऋत (सत्य-व्यवस्था) के गोपा (रक्षक) को भी वहन करता है।
Mantra 5
अधा हिन्वान इन्द्रियं ज्यायो महित्वमानशे । अभिष्टिकृद्विचर्षणिः ॥
तब प्रेरित होकर वह इन्द्रिय (इन्द्र-शक्ति) का अधिकतर भाग प्राप्त करता है और महान महत्त्व को पहुँचता है—वह अभिष्टि-कृत (इच्छित सहायता दिलाने वाला), विचर्षणि (विस्तृत-व्यापी) है।
The hymn praises Soma in his Pavamāna form—Soma as the pressed juice that is purified and made to flow clear during the sacrifice.
It portrays a divine, unhindered carrier bringing abundance from heaven—an image for Soma’s heavenly support and the swift arrival of prosperity through the rite.
It asks for successful performance of sacred work (sukṛti), wealth and abundance from heaven, and strengthened power (indriya) that grants the desired help and protection.
Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.
A free sign-in with Google or Apple keeps your chat saved across web and the app.
Read Rig Veda in the Vedapath app
Scan the QR code to open this directly in the app, with word-by-word meanings, Sanskrit recitation where available, and more.