Rig Veda Sukta 34
Mandala 9Sukta 346 Mantras

Sukta 34

Sukta 9.34

Devata

Soma Pavamāna (Indu, the purified Soma)

यह संक्षिप्त पवमान सूक्त सोम की स्तुति करता है—जब उसे पेरा जाता है, शुद्ध किया जाता है और वह स्थिर धारा में प्रवाहित होता है—जो अपने स्वाभाविक बल से प्रतिरोधों को भेदकर आगे बढ़ता है। इसमें छनाई के बाह्य यज्ञकर्म को अंतःप्रेरणा से जोड़ा गया है: सोम ‘मार्ज्य’ (शोधक/परिशोधक) बनकर इन्द्र के वीर्यपूर्ण उन्माद को जगाता है, और स्वयं स्तुतिगीत भी दुग्धधेनु के रंभाने-से उसके पास बहते चले आते हैं।

Mantras

Mantra 1

प्र सुवानो धारया तनेन्दुर्हिन्वानो अर्षति । रुजद्दृळ्हा व्योजसा ॥

निचोड़ा गया इन्दु (सोम) धारा बनकर निरंतर बहता है; प्रेरित होकर वह प्रवाहित होता है—अपने बल से वह कठोर अवरोधों को तोड़ देता है।

Mantra 2

सुत इन्द्राय वायवे वरुणाय मरुद्भ्यः । सोमो अर्षति विष्णवे ॥

निचोड़ा हुआ सोम इन्द्र के लिए, वायु के लिए, वरुण के लिए, मरुतों के लिए—और विष्णु के लिए प्रवाहित होता है। वह देवशक्तियों को अपना परिशुद्ध आनन्द-रस अर्पित करता है।

Mantra 3

वृषाणं वृषभिर्यतं सुन्वन्ति सोममद्रिभिः । दुहन्ति शक्मना पयः ॥

बलवान को बलवानों द्वारा प्रेरित करके, वे अद्रि-शिलाओं से सोम को निचोड़ते हैं। वे कौशल से पोषक सार—मधुर पयः—दोह लेते हैं।

Mantra 4

भुवत्त्रितस्य मर्ज्यो भुवदिन्द्राय मत्सरः । सं रूपैरज्यते हरिः ॥

वह त्रित का शोधक-परिशोधक बनता है; वह इन्द्र के लिए मत्सर—उत्साहक उन्माद—बनता है। हरितवर्ण (हरि) रूपों के साथ संयुक्त होकर अभिषिक्त होता है।

Mantra 5

अभीमृतस्य विष्टपं दुहते पृश्निमातरः । चारु प्रियतमं हविः ॥

ऋत के विस्तृत आसन की ओर, पृष्णि-माता (चित्त-बिंदीदार) माताएँ उसके लिए चारु, अति-प्रिय हवि का दुहन करती हैं।

Mantra 6

समेनमह्रुता इमा गिरो अर्षन्ति सस्रुतः । धेनूर्वाश्रो अवीवशत् ॥

उसे—अह्वान न किए हुए भी आकर्षक—ये गिरः सम-वेग से निरंतर प्रवाहित होती हैं; और वाश्र (प्रेरणा की धेनु) रंभाती है।

Frequently Asked Questions

It praises Soma as he is pressed and purified, flowing in a steady stream. The hymn highlights Soma’s power to remove obstacles and to energize the gods—especially Indra.

Indra is mentioned because purified Soma is the classic source of Indra’s exhilaration and strength. Trita appears as a figure connected with Soma’s cleansing power, emphasizing purification as a sacred function.

It suggests that prayer and inspired speech also ‘stream’ toward Soma, just like the purified juice. In simple terms: when Soma is purified, the mind and voice become clearer and more inspired.

Read Rig Veda in the Vedapath app

Scan the QR code to open this directly in the app, with audio, word-by-word meanings, and more.

Continue reading in the Vedapath app

Open in App