
अध्याय ५५ — भीष्मस्य प्रचण्डविक्रमः, अर्जुनप्रत्युत्तरं, कृष्णस्य चक्रोद्यतिः (Chapter 55: Bhīṣma’s onslaught, Arjuna’s counter, and Kṛṣṇa’s raised discus)
Upa-parva: Bhīṣma-vīrya–darśana (Battlefield Episode: Bhīṣma’s onslaught and Kṛṣṇa’s intervention)
Dhṛtarāṣṭra asks Saṃjaya to report Bhīṣma’s actions after his vow in the fierce engagement. Saṃjaya narrates a tumultuous clash marked by overwhelming sound, rout, and heavy losses; Bhīṣma’s archery is described as omnidirectional and nearly unanswerable, fragmenting Yudhiṣṭhira’s forces and inducing panic. Arjuna and Kṛṣṇa move toward Bhīṣma; Bhīṣma showers Arjuna’s chariot with arrows, repeatedly re-strings new bows with exceptional speed, and even praises Arjuna’s skill when his bow is cut. Despite Kṛṣṇa’s charioteering that neutralizes volleys, Bhīṣma wounds both Kṛṣṇa and Arjuna. Observing Arjuna’s apparent restraint against the elder, Kṛṣṇa resolves to end Bhīṣma himself, leaps from the chariot with Sudarśana, and rushes forward. Bhīṣma welcomes the approach with reverential address, framing death by Kṛṣṇa as auspicious. Arjuna restrains Kṛṣṇa, reaffirms his own vow to bring the war to its conclusion with Kṛṣṇa’s support, and Kṛṣṇa returns to the chariot. The chapter closes with Arjuna’s intensified counterattack (including a major astric deployment), the Kaurava side’s temporary withdrawal at dusk, and a quantitative notice of Arjuna’s battlefield impact.
Chapter Arc: संजय धृतराष्ट्र को बताता है कि कौरव-सेना एक अत्यन्त भयंकर, अभेद्य ‘क्रौंच-व्यूह’ में सजाई जा रही है—ऐसा विन्यास जो शत्रु की गति, दृष्टि और साहस तीनों को तोड़ दे। → द्रोण, कृप, शल्य, सोमदत्त, विकर्ण, अश्वत्थामा, दुःशासन आदि प्रमुख महारथियों को उनके-उनके स्थानों पर नियुक्त किया जाता है; पीछे-रक्षा में नानादेशीय राजाओं की पंक्तियाँ खड़ी होती हैं। भीष्म-रक्षित सेना को अजेय कहा जाता है, फिर भी भीमसेन की प्रचण्डता का संकेत भीतर-ही-भीतर भय की लहर उठाता है। → रण-वाद्यों का एक साथ विस्फोट—शंख, भेरी, पणव, आनक—और सिंहनादों के साथ समूची कौरव-सेना का युद्धोन्माद में उठ खड़ा होना; क्रौंच-व्यूह का ‘जीवित’ हो जाना। → व्यूह-रचना पूर्ण होती है; कौरव पक्ष हर्षित होकर युद्ध के लिए तत्पर दिखता है और अपनी सामूहिक शक्ति पर भरोसा जमाता है। → यह अभेद्य प्रतीत होने वाला क्रौंच-व्यूह पाण्डवों के प्रहार के सामने टिकेगा या भीम/पाण्डव इसकी चोंच और पंखों को तोड़ देंगे—अगला प्रसंग इसी टकराव की ओर धकेल देता है।
Verse 1
[दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ ई श्लोक मिलाकर कुल ६० ई लोक हैं।] >> श््जु ीस-ॉ्िसस ३. यहाँ “नियुत” का अर्थ एक लाख किया गया है। किसी-किसीके मतमें उसका अर्थ दस लाख भी होता है। २. दस करोड़की संख्याको अर्बुद कहते हैं। 3. पंख। ४. अग्रभाग। ५. पंखके भीतरके छोटे-छोटे पंख। एकपज्चाशत्तमो< ध्याय: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना तथा दोनों दलोंमें शंखध्वनि और सिंहनाद संजय उवाच क्रौज्च॑ दृष्टवा ततो व्यूहमभेद्यं तनयस्तव । रक्ष्यमाणं महाघोरं पार्थेनामिततेजसा,संजय कहते हैं--महाराज! उस अत्यन्त भयंकर अभेद्य क्रौंचव्यूहको अमिततेजस्वी अर्जुनके द्वारा सुरक्षित देखकर आपका पुत्र दुर्योधन आचार्य द्रोण, कृप, शल्य, भूरिश्रवा, विकर्ण, अश्वत्थामा और दुःशासन आदि सब भाइयों तथा युद्धके लिये आये हुए अन्य बहुतेरे शूरवीरोंके पास जाकर उन सबका हर्ष बढ़ाता हुआ यह समयोचित वचन बोला --वीरो! आप सब लोग नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्रोंके प्रहारमें कुशल तथा युद्धकी कलामें निपुण हैं
قال سنجيا: «أيها الملك، حين رأى عندئذٍ تشكيل “كراونچا” القتالي، الرهيب المنيع—المفزع في تصميمه ذاته—وهو تحت حراسة أرجونا ذي البهاء الذي لا يُقاس، فإن ابنك (دوريودhana) …»
Verse 2
आचार्यमुपसंगम्य कृपं शल्यं च पार्थिव । सौमदत्तिं विकर्ण च सो<श्वृत्थामानमेव च,संजय कहते हैं--महाराज! उस अत्यन्त भयंकर अभेद्य क्रौंचव्यूहको अमिततेजस्वी अर्जुनके द्वारा सुरक्षित देखकर आपका पुत्र दुर्योधन आचार्य द्रोण, कृप, शल्य, भूरिश्रवा, विकर्ण, अश्वत्थामा और दुःशासन आदि सब भाइयों तथा युद्धके लिये आये हुए अन्य बहुतेरे शूरवीरोंके पास जाकर उन सबका हर्ष बढ़ाता हुआ यह समयोचित वचन बोला --वीरो! आप सब लोग नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्रोंके प्रहारमें कुशल तथा युद्धकी कलामें निपुण हैं
قال سنجيا: «أيها الملك، إن ابنك (دوريودhana) إذ دنا من المعلّم درونا، وكذلك من كريبا وشاليا، ومن سومَدَتّي (بهوريشرافاس) وفيكارنا وأشفَتّھاما، مضى بين أولئك الأبطال المتقدمين. ولما رأى تشكيل “كراونچا” الرهيب، الذي يبدو عصيًّا على الاختراق، تحت حراسة أرجونا ذي البهاء الذي لا يُقاس، قصد أن يبعث فيهم الحماسة بكلماتٍ في موضعها—مثيرًا عزمهم للِّقاء القريب.»
Verse 3
दुःशासनादीत् भ्रातृश्च सर्वानेव च भारत | अन्यांश्व सुबहून् शूरान् युद्धाय समुपागतान्,संजय कहते हैं--महाराज! उस अत्यन्त भयंकर अभेद्य क्रौंचव्यूहको अमिततेजस्वी अर्जुनके द्वारा सुरक्षित देखकर आपका पुत्र दुर्योधन आचार्य द्रोण, कृप, शल्य, भूरिश्रवा, विकर्ण, अश्वत्थामा और दुःशासन आदि सब भाइयों तथा युद्धके लिये आये हुए अन्य बहुतेरे शूरवीरोंके पास जाकर उन सबका हर्ष बढ़ाता हुआ यह समयोचित वचन बोला --वीरो! आप सब लोग नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्रोंके प्रहारमें कुशल तथा युद्धकी कलामें निपुण हैं
قال سنجيا: «يا بهاراتا (دھرتراشترا)، إنّ دوريودھانا دنا من دوحشاسانا ومن جميع إخوته، وكذلك من كثير من الأبطال الذين اجتمعوا للقتال.»
Verse 4
प्राहेदें वचनं काले हर्षयंस्तनयस्तव । नानाशस्त्रप्रहरणा: सर्वे युद्धविशारदा:,संजय कहते हैं--महाराज! उस अत्यन्त भयंकर अभेद्य क्रौंचव्यूहको अमिततेजस्वी अर्जुनके द्वारा सुरक्षित देखकर आपका पुत्र दुर्योधन आचार्य द्रोण, कृप, शल्य, भूरिश्रवा, विकर्ण, अश्वत्थामा और दुःशासन आदि सब भाइयों तथा युद्धके लिये आये हुए अन्य बहुतेरे शूरवीरोंके पास जाकर उन सबका हर्ष बढ़ाता हुआ यह समयोचित वचन बोला --वीरो! आप सब लोग नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्रोंके प्रहारमें कुशल तथा युद्धकी कलामें निपुण हैं
قال سنجيا: «وفي تلك اللحظة نطق ابنك بكلماتٍ في محلّها، مُبهجًا ومُشجّعًا رجاله: “إنكم جميعًا ماهرون في توجيه الضربات بمختلف أصناف السلاح، وخبراء في سنن القتال.”»
Verse 5
एकैकश: समर्था हि यूयं सर्वे महारथा: । पाण्डुपुत्रान् रणे हन्तुं ससैन्यान् किमु संहता:,“आप सभी महारथी हैं। आपमेंसे प्रत्येक योद्धा रणक्षेत्रमें सेनासहित पाण्डवोंका वध करनेमें समर्थ हैं। फिर सब लोग मिलकर उन्हें परास्त कर दें, इसके लिये तो कहना ही क्या है
«إنكم جميعًا من المَهارَثَة. فكلُّ واحدٍ منكم قادرٌ وحده على قتل أبناء باندو في ساحة القتال، ولو كانوا مع جيوشهم؛ فكيف إذا اجتمعتم—فما الذي يُقال بعدُ إلا إنكم ستقهرونهم!»
Verse 6
अपर्याप्तं॑ तदस्माकं बल॑ भीष्माभिरक्षितम् | पर्याप्तमिदमेतेषां बल॑ भीमाभिरक्षितम्,'भीष्मपितामहके द्वारा सुरक्षित हमारी वह सेना सब प्रकारसे अजेय है, परन्तु भीमसेनके द्वारा सुरक्षित इन पाण्डवोंकी यह सेना जीतनेमें सुगम है; अतः मेरी राय है कि संस्थान, शूरसेन, वेत्रिक, कुकुर, आरोचक, त्रिगर्त, मद्रक तथा यवन आदि देशोंके लोग शत्रुंजय, दुःशासन, वीर विकर्ण, नन््द, उपनन्द, चित्रसेन तथा पारिभद्रक वीरोंके साथ जाकर अपनी सेनाको आगे रखते हुए भीष्मकी ही रक्षा करें!
«إن جيشنا، المحروس ببهِيشما، يبدو غيرَ متناهٍ وعسيرَ الغلبة؛ أمّا جيشهم، المحروس ببهِيمَ، فيبدو محدودًا، ولذلك أيسرَ قهرًا.»
Verse 7
संस्थाना: शूरसेनाश्न वेत्रिका: कुकुरास्तथा । आरोचकासल्त्रिगर्ताश्न मद्रका यवनास्तथा,'भीष्मपितामहके द्वारा सुरक्षित हमारी वह सेना सब प्रकारसे अजेय है, परन्तु भीमसेनके द्वारा सुरक्षित इन पाण्डवोंकी यह सेना जीतनेमें सुगम है; अतः मेरी राय है कि संस्थान, शूरसेन, वेत्रिक, कुकुर, आरोचक, त्रिगर्त, मद्रक तथा यवन आदि देशोंके लोग शत्रुंजय, दुःशासन, वीर विकर्ण, नन््द, उपनन्द, चित्रसेन तथा पारिभद्रक वीरोंके साथ जाकर अपनी सेनाको आगे रखते हुए भीष्मकी ही रक्षा करें!
قال سنجيا: «فليتقدّم السَّمْسْثانَة، والشُّورَسِين، والڤِتْرِيكَة، والكُكُرَة، والآروچَكَة، والتِّرِيگَرْتَة، والمَدْرَكَة، والياڤَنَة أيضًا—مع المحاربين شترونجيايا، ودوحشاسانا، وفيكارنا الشجاع، ونندا، وأوبانندا، وتشيتراسينا، وبارِبهادرا—وليجعلوا جيوشهم في المقدّمة، وليكرّسوا أنفسهم لحراسة بهِيشما وحده.»
Verse 8
शत्रुंजयेन सहितास्तथा दुःशासनेन च । विकर्णेन च वीरेण तथा नन्दोपनन्दकै:,'भीष्मपितामहके द्वारा सुरक्षित हमारी वह सेना सब प्रकारसे अजेय है, परन्तु भीमसेनके द्वारा सुरक्षित इन पाण्डवोंकी यह सेना जीतनेमें सुगम है; अतः मेरी राय है कि संस्थान, शूरसेन, वेत्रिक, कुकुर, आरोचक, त्रिगर्त, मद्रक तथा यवन आदि देशोंके लोग शत्रुंजय, दुःशासन, वीर विकर्ण, नन््द, उपनन्द, चित्रसेन तथा पारिभद्रक वीरोंके साथ जाकर अपनी सेनाको आगे रखते हुए भीष्मकी ही रक्षा करें!
قال سَنْجَيا: «كانوا برفقة شَتْرُنجَيا، ومعهم أيضًا دُحْشاسَنَة؛ ومعهم البطل فيكارْنَة كذلك؛ وكذلك نَنْدَة وأُوبَنَنْدَة».
Verse 9
चित्रसेनेन सहिता: सहिता: पारिभद्रकै: । भीष्ममेवाभिरक्षन्तु सहसैन्यपुरस्कृता:,'भीष्मपितामहके द्वारा सुरक्षित हमारी वह सेना सब प्रकारसे अजेय है, परन्तु भीमसेनके द्वारा सुरक्षित इन पाण्डवोंकी यह सेना जीतनेमें सुगम है; अतः मेरी राय है कि संस्थान, शूरसेन, वेत्रिक, कुकुर, आरोचक, त्रिगर्त, मद्रक तथा यवन आदि देशोंके लोग शत्रुंजय, दुःशासन, वीर विकर्ण, नन््द, उपनन्द, चित्रसेन तथा पारिभद्रक वीरोंके साथ जाकर अपनी सेनाको आगे रखते हुए भीष्मकी ही रक्षा करें!
قال سَنْجَيا: «فلتتقدّم تلك الجموع—برفقة تشِتْرَسِينا ومع انضمام محاربي البارِبْهَدْرَة—وقد جعلوا جيوشهم في المقدّمة، وليكرّسوا أنفسهم لحراسة بِهِيشْمَة وحده».
Verse 10
(संजय उवाच दुर्योधनवच: श्रुत्वा सर्व एव महारथा: । तथेत्येनं नृपा ऊचुस्तदा द्रोणपुरोगमा: ।।) संजय कहते हैं--महाराज! दुर्योधनकी यह बात सुनकर द्रोण आदि सभी महारथियों एवं राजाओंने उस समय “तथास्तु” कहकर उसकी बात मान ली। ततो भीष्मश्न द्रोणश्व तव पुत्राश्चन मारिष । अव्यूहन्त महाव्यूहं पाण्डूनां प्रतिबाधनम्,आर्य! तदनन्तर भीष्म, द्रोण तथा आपके पुत्रोंने मिलकर अपनी सेनाका महान व्यूह बनाया, जो पाण्डव-सैनिकोंको बाधा पहुँचानेमें समर्थ था
قال سَنْجَيا: «يا أيها الملك، لما سمع الجميع كلام دُرْيُودْهَنَة، أجاب كلُّ أصحاب المركبات العظام والملوك—يتقدّمهم دْرُوْنَة—قائلين: “ليكن كذلك”، فقبلوا اقتراحه. ثم إن بِهِيشْمَة ودْرُوْنَة، مع أبنائك يا موقَّر، رتّبوا تشكيلًا قتاليًّا عظيمًا، أُعِدَّ لعرقلة قوات الباندَفَة وكبحها».
Verse 11
भीष्म: सैन्येन महता समन्तात् परिवारित: । ययौ प्रकर्षन् महतीं वाहिनीं सुरराडिव,तदनन्तर बहुत बड़ी सेनाद्वारा सब ओरसे घिरे हुए भीष्म देवराज इन्द्रकी भाँति विशाल वाहिनी साथ लिये आगे-आगे चले
قال سَنْجَيا: «ومع أنه كان محاطًا من كل جانب بجيش عظيم، تقدّم بِهِيشْمَة، جاذبًا وراءه حشدًا جليلًا—كإندرا، ملك الآلهة».
Verse 12
तमन्वयान्महेष्वासो भारद्वाज: प्रतापवान् । कुन्तलैश्व दशार्णश्ष मागधैश्व विशाम्पते
قال سَنْجَيا: «وتبِعَهُ الرامي العظيم، الابنُ الباسلُ لبهارَدْفاجَة، ومعه محاربو كُنْتَلا ودَشَارْنَة ومَغَدْهَة، يا سيّدَ الرجال».
Verse 13
विदर्भमेकलैश्नैव कर्णप्रावरणैरपि । सहिता: सर्वसैन्येन भीष्ममाहवशोभिनम्
قال سانجيا: تقدّموا نحو فيداربها، مكتملين بالسلاح، حتى بواقي الأذن وأغطية الوقاية، ومعهم الجيش كلّه؛ وكان بهيشما في المقدّمة، متألّقًا بمجد ساحة القتال.
Verse 14
गान्धारा: सिन्धुसौवीरा: शिबयो5थ वसातय: । उनके पीछे प्रतापी वीर महाधनुर्धर द्रोणाचार्यने युद्धके लिये प्रस्थान किया। महाराज! उस समय कुन्तल, दशार्ण, मागध, विदर्भ, मेकल तथा कर्णप्रावरण आदि देशोंके सैनिकोंके साथ गान्धार, सिन्धु, सौवीर, शिबि तथा वसाति देशोंके वीर क्षत्रिय युद्धमें शोभा पानेवाले भीष्मकी रक्षा करने लगे || १२-१३ ह ।। शकुनिश्च स्वसैन्येन भारद्वाजमपालयत्,शकुनिने अपनी सेना साथ लेकर द्रोणाचार्यकी रक्षामें योग दिया। तत्पश्चात् अपने भाइयोंसहित राजा दुर्योधन अत्यन्त हर्षमें भरकर अश्वातक, विकर्ण, अम्बष्ठ, कोसल, दरद, शक, क्षुद्रक तथा मालव आदि देशोंके योद्धाओंके साथ सुबलपुत्र शकुनिकी सेनाका संरक्षण करने लगा
قال سانجيا: اتخذ الغاندھاريون، والسندھيون والسوفيريون، والشيبِيّون والوساتيون مواقعهم. وبقواته الخاصة حمى شكوني درونا، ابن بهاردفاجا. وفي ترتيب الصفوف أُنيط بالملوك الحلفاء والقوى الإقليمية أن يحرسوا القادة المفصليين.
Verse 15
ततो दुर्योधनो राजा सहित: सर्वसोदरै: । अश्वातकैर्विकर्णक्ष॒ तथा चाम्बछकोसलै:,शकुनिने अपनी सेना साथ लेकर द्रोणाचार्यकी रक्षामें योग दिया। तत्पश्चात् अपने भाइयोंसहित राजा दुर्योधन अत्यन्त हर्षमें भरकर अश्वातक, विकर्ण, अम्बष्ठ, कोसल, दरद, शक, क्षुद्रक तथा मालव आदि देशोंके योद्धाओंके साथ सुबलपुत्र शकुनिकी सेनाका संरक्षण करने लगा
قال سانجيا: ثم إن الملك دوريودھانا، ومعه جميع إخوته، وانضم إليه محاربو الأشفاتَكة وفيكارنا والأمبَشثا والكوسَلا، صفّ قواته لحماية دروناآتشاريّا. وبعد ذلك، وهو طافح بالابتهاج ومحاط بإخوته وكتائب الحلفاء، تولّى أيضًا صون جيش شكوني ابن سوبالا.
Verse 16
दरदैश्न शकैश्वैव तथा क्षुद्रकमालवै: । अभ्यरक्षत संहृष्ट: सौबलेयस्य वाहिनीम्,शकुनिने अपनी सेना साथ लेकर द्रोणाचार्यकी रक्षामें योग दिया। तत्पश्चात् अपने भाइयोंसहित राजा दुर्योधन अत्यन्त हर्षमें भरकर अश्वातक, विकर्ण, अम्बष्ठ, कोसल, दरद, शक, क्षुद्रक तथा मालव आदि देशोंके योद्धाओंके साथ सुबलपुत्र शकुनिकी सेनाका संरक्षण करने लगा
قال سانجيا: مبتهجًا، أحاط جيش ابن ساوبالا (شكوني) بحراسةٍ واقية من محاربي الدارادا، والشاكا، والكشودراكا، والمالافا.
Verse 17
भूरिश्रवा: शल: शल्यो भगदत्तश्न मारिष: । विन्दानुविन्दावावन्त्यौ वाम॑ पार्श्वमपालयन्,भूरिश्रवा, शल, शल्य, आदरणीय राजा भगदत्त तथा अवन्तीके राजकुमार विन्द और अनुविन्द उस सारी सेनाके वामभागकी रक्षा कर रहे थे। सोमदत्तपुत्र भूरि, त्रिगर्तराज सुशर्मा, काम्बोजराज सुदक्षिण, श्रुतायु तथा अच्युतायु--ये दक्षिणभागमें स्थित होकर उस सेनाकी रक्षा कर रहे थे
قال سانجيا: «أيها الملك الموقّر، كان بهوريشرَفاس، وشالا، وشاليا، وبهاگاداتّا—ومعهم أميرا أفنتي: فيندا وأنوفيندا—يحرسون الميسرة من ذلك الجيش. وعلى الميمنة وقف بهوري ابن سوماداتّا، وملك التريگارتا سوشَرما، وملك الكامبوجا سودكشِنا، والمحاربان شروتايو وأتشيوتايو، يحمون الحشد.»
Verse 18
सौमदत्ति: सुशर्मा च काम्बोजश्न सुदक्षिण: । श्रुतायुश्नाच्युतायुश्न दक्षिणं पक्षमास्थिता:,भूरिश्रवा, शल, शल्य, आदरणीय राजा भगदत्त तथा अवन्तीके राजकुमार विन्द और अनुविन्द उस सारी सेनाके वामभागकी रक्षा कर रहे थे। सोमदत्तपुत्र भूरि, त्रिगर्तराज सुशर्मा, काम्बोजराज सुदक्षिण, श्रुतायु तथा अच्युतायु--ये दक्षिणभागमें स्थित होकर उस सेनाकी रक्षा कर रहे थे
قال سنجيا: في الجناح الجنوبي من جيش الكورو وقف ابن سوماداتا (بهوريشرَفَس) مع سوشَرما، وملك الكامبوجا سودكشِنا، والمحاربين شروتايو وأتشيوتايو. وقد تمركزوا هناك لحراسة ذلك الجناح—ترتيبٌ منضبطٌ للقادة يبيّن أن الحرب لا تُدار كعراكٍ فوضوي، بل كتعبئةٍ محكمةٍ تقوم على الانضباط وأداء الواجب.
Verse 19
अश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वत: । महत्या सेनया सार्ध सेनापृषछ्ठे व्यवस्थिता:,अश्वत्थामा, कृपाचार्य तथा सात्वतवंशी कृतवर्मा अपनी विशाल सेनाके साथ कौरव- सेनाके पृष्ठभागमें खड़े होकर उसका संरक्षण करते थे
قال سنجيا: كان أشوَتثاما، وكريپا، وكريتَفارمان من سلالة الساتفاتا، ومعهم قوة عظيمة، متمركزين في مؤخرة جيش الكورو، ثابتين لحراسة الخط الخلفي وتحصينه. وتبرز الآية خُلُق الحرب القائم على الحماية—إذ تُصان المؤخرة، وهي الأشد عرضة، لكي يقاتل القلب دون خوف من أن يُقطع عنه السند.
Verse 20
पृष्ठगोपास्तु तस्यथासन् नानादेश्या जनेश्वरा: । केतुमान् वसुदानश्र पुत्र: काश्यस्य चाभिभू:,केतुमान्, वसुदान, काशिराजके पुत्र अभिभू तथा अन्य अनेक देशोंके नरेश सेना पृष्ठके पोषक थे
قال سنجيا: كان يحرس مؤخرته ملوكٌ كُثُر من أقاليم شتى—كيتومان، وفاسودانا، وأبهيبو ابن كاشيا. وهكذا أُحكم حتى ظهرُ ذلك الصفّ القتالي بملوكٍ ذوي صيت، دلالةً على حسن التنظيم وتقاسم المسؤولية داخل الجيش مع اقتراب الحرب.
Verse 21
भारत! तदनन्तर आपकी सेनाके समस्त सैनिक हर्षसे उललसित हो प्रसन्नतापूर्वक शंख बजाने और सिंहनाद करने लगे
يا بهاراتا، وما إن تلا ذلك حتى ابتهج جميع جنود جيشك، فهتفوا طربًا وتهلّلوا سرورًا، وأخذوا ينفخون في الصدَف ويرفعون صيحاتٍ حربية كزئير الأسد.
Verse 22
तेषां श्रुत्वा तु हृष्टानां वृद्ध: कुरूपितामह: । सिंहनादं विनद्योच्चै: शड्खं दध्मौ प्रतापवान्,उनका हर्षनाद सुनकर कुरुकुलके वृद्ध पितामह प्रतापी भीष्मने जोर-जोरसे सिंहनाद करके अपना शंख बजाया
فلما سمع الشيخُ جدُّ الكورو—بهِيشما، عظيمَ البأس—هتافَ جنوده المبتهجين، أطلق زئيرًا عاليًا كزئير الأسد ونفخ في صدفته، مثبتًا العزم ومُجَمِّعًا صفَّه ليؤدّي واجب المحارب الحقّ في المعركة المقبلة.
Verse 23
ततः शड्खाश्न भेर्यश्व॒ पणवा विविधा: परे । आनकाश्चाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलो5भवत्,तदनन्तर शंख, भेरी, नाना प्रकारके पणव और आनक आदि अन्य बाजे सहसा बज उठे और उन सबका सम्मिलित शब्द सब ओर गूँज उठा
قال سنجيا: ثم ضُرِبت فجأةً الأصدافُ والأجراسُ الحربيةُ والطبولُ العظيمةُ، ومعها شتّى طبولِ «پَنَڤا» في الجانب الآخر، وكذلك طبولُ «آنَكَ»؛ فارتفع صوتُها مجتمعًا إلى دويٍّ هائلٍ يجلجل في كلِّ ناحية.
Verse 24
ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ । प्रदध्मतु: शड्खवरौ हेमरत्नपरिष्कृती,तत्पश्चात् श्वेत घोड़ोंसे जुते हुए विशाल रथपर बैठे भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुन अपने सुवर्णभूषित श्रेष्ठ शंखोंको बजाने लगे
ثم إن كṛṣṇa وأرجونا، وهما جالسان على تلك العربة العظيمة المقرونة بخيول بيض، نفخا في أصدافهما النفيسة الموشّاة بالذهب والجواهر—إعلانًا ذا بُشرى، لكنه إعلانُ حربٍ كذلك.
Verse 25
पाज्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजय: । पौण्डूरं दध्मौ महाशड्खं भीमकर्मा वृकोदर:,हृषीकेशने पांचजन्य, अर्जुनने देवदत्त तथा भयंकर कर्म करनेवाले भीमसेनने पौण्ड्र नामक महान् शंख बजाया
قال سنجيا: نفخ هريشيكيشا (كṛṣṇa) في الصدفة المسماة «پانچَجَنْيَة»؛ ونفخ دهننجيا (أرجونا) في «دِڤَدَتّا»؛ ونفخ ڤṛكودرا (بهيمَ)، المشهور بأفعالٍ مروّعة، في الصدفة العظمى المسماة «پَوُنْدْرَ».
Verse 26
अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर: । नकुल: सहदेवश्न सुघोषमणिपुष्पकौ,कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिरने अनन्तविजय तथा नकुल-सहदेवने सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाया
قال سنجيا: نفخ الملك يودهيشثيرا، ابن كونتي، في صدفته المسماة «أننتَڤِجَيَة»؛ ونفخ ناكولا وسهاديفا في صدفتَيهما «سُغهوشَة» و«مَنيپوشپَكَة».
Verse 27
काशिराजश्च शैब्यश्ष शिखण्डी च महारथ: । धृष्टद्युम्नो विराटश्न सात्यकिश्व महारथ:,काशिराज, शैब्य, महारथी शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, विराट, महारथी सात्यकि, पांचालवीर, महाथनुर्धर द्रौपदीके पाँचों पुत्र--ये सभी बड़े-बड़े शंखोंको बजाने और सिंहनाद करने लगे
قال سنجيا: ملك كاشي، وشيبيَة، والمحارب العظيم على العربة شيخَنْدي؛ ودهريشتاديومنَة، وڤيراتا، والمحارب العظيم على العربة ساتيَكي—هؤلاء الأبطال البارزون رفعوا أصدافهم وزأروا زئيرَ الأسود، يعلنون العزم ويشحذون هممَ صفّهم قبيل انفتاح ساحة القتال.
Verse 28
पाज्चाल्याश्व महेष्वासा द्रौपद्या: पजच चात्मजा: । सर्वे दध्मुर्महाशड्खान् सिंहनादांश्न नेदिरे,काशिराज, शैब्य, महारथी शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, विराट, महारथी सात्यकि, पांचालवीर, महाथनुर्धर द्रौपदीके पाँचों पुत्र--ये सभी बड़े-बड़े शंखोंको बजाने और सिंहनाद करने लगे
قال سنجيا: إن رماة البانشالا الأقوياء، وأبناء دروبدي الخمسة، قد نفخوا جميعًا في محاراتهم العظيمة وأطلقوا صيحات قتال كزئير الأسد. ومعهم أيضًا ملك كاشي، وشايبيا، ومحارب العربة العظيم شيكاندين، ودهريشتاديومنا، وفيراتا، ومحارب العربة العظيم ساتياكي، وأبطال البانشالا—سادة القوس—فأسمعوا المحارات وعلنوا عزمهم. وفي الإطار الأخلاقي للملحمة، يدل هذا الهدير الجماعي على استعداد منضبط لحرب الدارما، حيث تقترن الشجاعة بالواجب والولاء.
Verse 29
स घोष: सुमहांस्तत्र वीरैस्तै: समुदीरित: । नभश्न पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादयत्,वहाँ उन वीरोंद्वारा प्रकट किया हुआ वह महान् तुमुल घोष पृथ्वी और आकाशको निनादित करने लगा
قال سنجيا: هناك، دوّى ذلك الصخب العظيم العاصف الذي أثاره أولئك الأبطال دوياً شديداً حتى جعل السماء والأرض ترتجّان معاً—إعلاناً مهيباً عن عزم القتال عشية المعركة.
Verse 30
एवमेते महाराज प्रह्ृष्टा: कुरुपाण्डवा: । पुनर्युद्धाय संजग्मुस्तापयाना: परस्परम्,महाराज! इस प्रकार ये हर्षमें भरे हुए कौरव-पाण्डव एक-दूसरेको संताप देते हुए पुनः युद्धके लिये रणक्षेत्रमें जा पहुँचे
قال سنجيا: «وهكذا، أيها الملك، إن الكورو والپاندڤا—وقد امتلأوا نشوةً واندفاعاً—عادوا إلى القتال من جديد، يوقع كلٌّ منهم الألم بالآخر». وتبرز الآية زخم الحرب المأساوي: حين يُحجَب الدارما بالمنافسة، تصبح حتى الفرحة والحماسة وقوداً للأذى المتبادل.
Verse 50
इस प्रकार श्रीमह्याभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्यवधपर्वमें क्रौंचव्यूडनिर्माणविषयक पचासवाँ अध्याय पूरा हुआ
يختم سنجيا: هكذا، في المهابهارتا الموقَّرة، ضمن بهيشما پرفا—وخاصة في القسم المتعلق بسقوط بهيشما—تنتهي الفصول عند الفصل الخمسين، وهو الذي يتناول تشكيل صفّ القتال «كراونچا» (على هيئة طائر الكركي).
Verse 51
इति श्रीमहा भारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि कौरवव्यूहरचनायामेकपज्चाशत्तमो<ध्याय:
هكذا ينتهي الفصل الحادي والخمسون في بهيشما پرفا من «شري مهابهارتا»، ضمن القسم المتعلق بسقوط بهيشما، في المقطع الذي يصف ترتيب تشكيل القتال لدى الكاورافا. وتشير هذه الخاتمة إلى انتقال في السرد: فالتنظيم الرسمي للجيوش يؤطر الثقل الأخلاقي للحرب، ويُلقي بظلّ سقوط بهيشما الجليل الوشيك.
Verse 231
ततस्ते तावका: सर्वे हृष्टा युद्धाय भारत । दध्मु: शड्खान् मुदा युक्ता: सिंहनादांस्तथोन्नदन्
قال سنجيا: ثم إن جميع من في صفّك، يا بهاراتا، وقد غمرتهم البهجة وتشوّقوا للقتال، نفخوا أصدافهم فرحًا، وأطلقوا زئيرًا كزئير الأسود.
Arjuna’s dilemma is whether reverence for Bhīṣma (an elder and revered authority) may justify restraint when allied forces are collapsing; the narrative tests the boundary between personal devotion and public duty within kṣātra-dharma.
Effective action requires clarity of role and commitment: vows and responsibilities must be upheld even amid emotional conflict, and leadership must prevent compassion or reverence from becoming functional inaction during collective crisis.
No explicit phalāśruti is stated here; the chapter’s meta-function is narrative and ethical calibration—showing how restraint, escalation, and role-discipline preserve the alliance’s framework while acknowledging the karmic gravity of battlefield decisions.