
भीमसेनस्य कौरवसुतवधः तथा श्रुतर्वावधः (Slaying of Kaurava princes and the fall of Śrutarvā)
Upa-parva: Bhīmasena-vadha-prakaraṇa (strategic engagements against Dhṛtarāṣṭra’s sons)
Saṃjaya reports that after the elephant-corps segment is broken by the Pāṇḍava side and Bhīmasena continues to press the engagement, Dhṛtarāṣṭra’s surviving sons—named groups including Durmarṣaṇa, Śrutānta, Jayatsena, Jaitra, Bhūribala, Ravi, Durvimocana, Duṣpradharṣa, Sujāta, and Durviṣaha—converge to surround Bhīma while Duryodhana is not seen on the field. Bhīma remounts his chariot posture and executes a sequence of precise missile strikes, repeatedly dropping opponents from their cars and describing their fall through seasonal and arboreal similes. Śrutarvā, enraged by the sight of fallen brothers, advances with intensified archery; the duel escalates with dense arrow-exchange imagery likened to Yama’s staff. After Bhīma’s bow is cut, he re-arms and counters; when Śrutarvā is rendered chariotless, he draws sword and shield, but Bhīma’s kṣurapra (razor-headed arrow) severs his head, and his body collapses from the chariot with a resonant impact. The narrative closes with Kaurava remnants attempting renewed assault, only to be suppressed; Bhīma’s continued slaughter—hundreds of chariot-warriors, elephant units, infantry, and horses—is reported as producing widespread fear, dispersal, and the near-ruination of the Kaurava host in this sector.
Chapter Arc: रणभूमि में किरीटधारी अर्जुन मेघ-सा बाण-वर्षा करता दिखाई देता है—इन्द्राशनि-स्पर्श बाणों की धाराएँ मानो आकाश से टूट पड़ती हैं। → अर्जुन और भीमसेन कौरवों की रथसेना और गजसेना का संहार करते हैं; टूटे अक्ष-युग-चक्र, क्षीण तरकश, बाणपीड़ित योद्धा—सेना का अनुशासन बिखरने लगता है। इसी बीच अश्वत्थामा आदि दुर्योधन की खोज में भटकते हैं और कौरव दल में घबराहट फैलती है। → किरिटधारी के वध से बची-खुची कौरव सेना दुर्योधन के देखते-देखते संग्राम से भाग खड़ी होती है; उधर धृष्टद्युम्न दुर्योधन को पराजित कर उसके पलायन पर उसे घेरने/मारने की उत्कंठा से आगे बढ़ता है, और सात्यकि रथों के समूह सहित प्रचण्ड वेग से आ धमकता है—युद्ध का केंद्र दुर्योधन की ओर सिमट जाता है। → कौरव पक्ष में ‘राजा कहाँ है’ की अफरातफरी और पलायन का क्रम चलता है; कुछ लोग कहते हैं कि सारथि के मारे जाने पर दुर्योधन ने पांचालराज की दुर्धर्ष सेना को छोड़कर अन्यत्र शरण ली। दूसरी ओर पाण्डव पक्ष में थके योद्धा जलपान कर, घोड़ों को विश्राम देकर, फिर कवच धारण कर पुनः युद्ध के लिए प्रस्तुत होते हैं—युद्ध-यंत्रणा के बीच पुनर्संगठन। → दुर्योधन की वास्तविक स्थिति/ठिकाना अनिश्चित रहता है—खोज जारी है और अगला संघर्ष उसी के इर्द-गिर्द सघन होने को है।
Verse 1
अफ्-#-रात पञ्चविशो< ध्याय: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्चवृत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना संजय उवाच पश्यतां यतमानानां शूराणामनिवर्तिनाम् । संकल्पमकरोन्मोघं गाण्डीवेन धनंजय:,संजय कहते हैं--महाराज! यद्यपि कौरवयोद्धा युद्धसे पीछे न हटनेवाले शूरवीर थे और विजयके लिये पूरा प्रयत्न कर रहे थे तो भी उनके देखते-देखते अर्जुनने गाण्डीव धनुषसे उनके संकल्पको व्यर्थ कर दिया
三阇耶说道:“大王啊,纵然那些俱卢勇士奋力争胜、誓不退转,就在他们眼前,檀那阇耶(阿周那)以甘狄婆神弓使他们的决心尽成虚妄。”
Verse 2
इन्द्राशनिसमस्पर्शानविषह्मान्ू महौजस: । विसृजन् दृश्यते बाणान् धारा मुज्चन्निवाम्बुद:,जैसे बादल पानीकी धारा गिराता है, उसी प्रकार वे बाणोंकी वर्षा करते दिखायी देते थे। उन बाणोंका स्पर्श इन्द्रके वज्ोकी भाँति कठोर था। वे बाण असहा एवं महान् शक्तिशाली थे
只见他放箭如云倾雨注。那些箭矢触之如因陀罗金刚雷霆般坚烈;其势不可当,威力雄浑无比。
Verse 3
तत् सैन्यं भरतश्रेष्ठ वध्यमानं किरीटिना । सम्प्रदुद्राव संग्रामात् तव पुत्रस्य पश्यत:,भरतश्रेष्ठ! किरीटधारी अर्जुनकी मार खाकर वह बची हुई सेना आपके पुत्रके देखते- देखते रणभूमिसे भाग चली
三阇耶说道:噢,婆罗多族中最杰出者,那支军队——被戴冠的勇士(阿周那)所斩杀——当着你儿子的面溃散,逃离了战场。
Verse 4
पितृन् भ्रातृन् परित्यज्य वयस्यानपि चापरे । हतधुर्या रथा: केचिद्धतसूतास्तथा परे,कुछ लोग अपने पिता और भाइयोंको छोड़कर भागे तो दूसरे लोग मित्रोंको। कितने ही रथोंके घोड़े मारे गये थे और कितनोंके सारथि
三阇耶说道:有人抛下父亲与兄弟而逃;有人甚至舍弃同伴。战车之中,有的轭具与马队被击毙,有的御者被杀——战场遂充满惊惶、混乱,武阵之序尽皆崩坏。
Verse 5
भग्नाक्षयुगचक्रेषा: केचिदासन् विशाम्पते | अन्येषां सायका: क्षीणास्तथान्ये बाणपीडिता:
三阇耶说道:噢,民众之主,有些人的战车已成残废——车轴、轭具与车轮尽碎。另一些人的箭矢已尽;还有一些被箭伤折磨,痛苦难当。
Verse 6
प्रजानाथ! किन््हींके रथोंके जूए, धुरे, पहिये और हरसे भी टूट गये थे, दूसरे योद्धाओंके बाण नष्ट हो गये और अन्य योद्धा अर्जुनके बाणोंसे पीड़ित हो गये थे ।। अक्षता युगपत् केचित् प्राद्रवनू भयपीडिता: । केचित् पुत्रानुपादाय हतभूयिष्ठबान्धवा:,कुछ लोग घायल न होनेपर भी भयसे पीड़ित हो एक साथ ही भागने लगे और कुछ लोग अधिकांश बन्धु-बान्धवोंके मारे जानेपर पुत्रोंकोी साथ लेकर भागे
三阇耶说道:噢,人主,在那场骚乱中,有些人见自己的战车轭具、车轴、车轮及诸般配件尽皆破碎;有些人的箭矢已尽或被毁;还有些被阿周那的箭雨所折磨。虽未受伤,有些人仍因恐惧而一齐奔逃;又有些人——亲族多已战死——携着儿子逃离而去。
Verse 7
विचुक्रुशुः पितृंस्त्वन्ये सहायानपरे पुनः । बान्धवांश्व नरव्याप्र भ्रातृन् सम्बन्धिनस्तथा,नरव्याप्र! कोई पिताको पुकारते थे, कोई सहायकोंको। प्रजानाथ! कुछ लोग अपने भाई-बन्धुओं और सगे-सम्बन्धियोंको जहाँ-के-तहाँ छोड़कर भाग गये। बहुत-से महारथी पार्थके बाणोंसे अत्यन्त घायल हो मूर्च्छित हो रहे थे
三阇耶说道:有人呼喊父亲,有人呼喊同伴。噢,人中之虎,他们也呼唤亲族——兄弟与诸般姻亲。战阵混乱之中,许多人将自己的人马弃置原地而逃;又有许多大车战士,被帕尔塔(阿周那)的箭矢重创,昏厥倒下。
Verse 8
दुद्रुवु: केचिदुत्सृज्य तत्र तत्र विशाम्पते । बहवोऊत्र भृशं विद्धा मुहामाना महारथा:,नरव्याप्र! कोई पिताको पुकारते थे, कोई सहायकोंको। प्रजानाथ! कुछ लोग अपने भाई-बन्धुओं और सगे-सम्बन्धियोंको जहाँ-के-तहाँ छोड़कर भाग गये। बहुत-से महारथी पार्थके बाणोंसे अत्यन्त घायल हो मूर्च्छित हो रहे थे
三阇耶说道:“人民之主啊,有些人惊惶奔逃,四处弃守岗位。许多大车战士被阿周那之箭重重贯穿,因那震骇而昏厥欲倒。此景昭示:当恐惧与痛楚攫住心神时,即便强者亦会忘却本分,四散离析,把同袍抛在身后。”
Verse 9
निःश्वसन्ति सम दृश्यन्ते पार्थबाणहता नरा: । तानन्ये रथमारोप्य ह्वाश्वास्य च मुहूर्तकम्
三阇耶说道:“那些被阿周那之箭击倒的人,横陈其地,喘息急促,气若游丝。旁人将伤者扶上战车,给他们水饮,令其稍作喘息,又试图在短暂片刻唤回神识——这正是战争无情轮转的写照:怜悯只在持续的杀伐之间匆匆闪现。”
Verse 10
तानपास्य गता: केचित् पुनरेव युयुत्सव:
三阇耶说道:“有些人将他们弃置一旁而退却;另一些人仍怀战意,又再度返身投入。此句点明战中决心之摇摆:有人在压迫之下离场,有人却为本分、傲气或绝望所驱,重入厮杀。”
Verse 11
कुर्वन्तस्तव पुत्रस्य शासन युद्धदुर्मदा: । रणभूमिमें उन््मत्त होकर लड़नेवाले कितने ही युद्धाभिलाषी योद्धा उन घायलोंको वैसे ही छोड़कर आपके पुत्रकी आज्ञाका पालन करते हुए पुनः युद्धके लिये चल देते थे || १०६ || पानीयमपरे पीत्वा पर्याश्वास्य च वाहनम्,पुत्रानन्ये पितृनन्ये पुनर्युद्धभरोचयन् । भरतश्रेष्ठ! दूसरे लोग स्वयं पानी पीकर घोड़ोंकी भी थकावट दूर करते। उसके बाद कवच धारण करके लड़नेके लिये जाते थे। अन्य बहुत-से सैनिक अपने घायल बन्धुओं, पुत्रों और पिताओंको आश्वासन दे उन्हें शिविरमें रख आते। उसके बाद युद्धमें मन लगाते थे
三阇耶说道:“沉醉于战场狂热之中,你儿子的军士奉行他的号令。许多嗜战的勇士在阵地上如同癫狂般厮杀;将伤者原样弃置,便遵你儿之命,再度奔赴战斗。另一些人饮水解渴,也让坐骑稍得喘息;随后整束甲胄、执持兵器,复归战阵。又有许多士卒安抚受伤的亲族——儿子与父亲——把他们安置在营中,然后再将心神投向战争的重担。”
Verse 12
वर्माणि च समारोप्य केचिद् भरतसत्तम | समाश्चास्यापरे भ्रातृन् निक्षिप्य शिबिरेडपि च
三阇耶说道:“婆罗多族之最胜者啊,有些人披上甲胄;另一些人收拢自己的兄弟,将他们安放下来,甚至就在营中。”
Verse 13
सज्जयित्वा रथान् केचिद् यथामुख्यं विशाम्पते
桑阇耶说道:“噢,万民之主啊,有些人先把战车妥善备齐,随后依照品级与先后次序将其排列。”
Verse 14
आप्लुत्य पाण्डवानीकं पुनर्युद्धमरोचयन् । प्रजानाथ! कुछ लोग अपने रथकी रणसामग्रीसे सुसज्जित करके पाण्डव-सेनापर चढ़ आते और अपनी प्रधानताके अनुसार किसी श्रेष्ठ वीरके साथ जूझना पसंद करते थे ।। ते शूरा: किड्किणीजालै: समाच्छज्ना बभासिरे
桑阇耶说道:他们猛然冲入般度军阵,又一次选择了战斗。那些英雄的战车备齐兵甲,覆以叮当作响的铃网,光彩夺目——各人依其品级与武勇,皆欲与一位最上乘的战士交锋。
Verse 15
त्रैलोक्यविजये युक्ता यथा दैतेयदानवा: । वे शूरवीर कौरव-सैनिक रथमें लगे हुए किंकिणी-समूहसे आच्छादित हो तीनों लोकोंपर विजय पानेके लिये उद्यत हुए दैत्यों और दानवोंके समान सुशोभित होते थे ।। आगम्य सहसा केचिद् रथै: स्वर्णविभूषितै:
桑阇耶说道:英勇的俱卢军士卒,战车覆以成簇叮当的铃饰,华美非常,宛如将征服三界的底提耶与檀那婆。忽然间,其中一些人乘着金饰战车疾驰上前。
Verse 16
पाण्डवानामनीकेषु धृष्टद्युम्मनमयो धयन् । कुछ लोग अपने सुवर्णभूषित रथोंके द्वारा सहसा आकर पाण्डवसेनाओंमें धृष्टद्युम्नके साथ युद्ध करने लगे ।। धृष्टद्युम्नोडपि पाञज्चाल्य: शिखण्डी च महारथ:
桑阇耶说道:在般度军的阵列中,有些战士忽然驾着金饰战车冲入,便在般度军中与德里什塔丢摩那交战。般遮罗的德里什塔丢摩那,以及尸佉ṇḍin——二人皆为大车战士——都卷入了那场凶猛的冲突。
Verse 17
पाज्चाल्यस्तु ततः क्रुद्ध: सैन्येन महता55वृत:
桑阇耶说道:随后,那位般遮罗将领怒火中烧,立于原地,被一支庞大的军队环绕。
Verse 18
ततस्त्वापततस्तस्य तव पुत्रो जनाधिप
散阇耶说道:“随后,当他猛然扑上前去发动攻击之时,陛下之子啊,哦,人中之主,……”
Verse 19
बाणसंघाननेकान् वै प्रेषयामास भारत । नरेश्वर! भरतनन्दन! उस समय आपके पुत्रने आक्रमण करनेवाले धृष्टद्युम्मपर बहुत-से बाणसमूहोंका प्रहार किया ।। धृष्टद्युम्नस्ततो राजंस्तव पुत्रेण धन्विना,अश्वांश्व चतुरो हत्वा बाह्दोरुरसि चार्पित: । राजन्! आपके धनुर्धर पुत्रने बहुत-से नाराच, अर्ध-नाराच, शीघ्रकारी वत्सदन्त और कारीगरद्वारा साफ किये हुए बाणोंसे धृष्टद्युम्नके चारों घोड़ोंको मारकर उनकी दोनों भुजाओं और छातीमें भी चोट पहुँचायी
散阇耶说道:噢,婆罗多啊,噢,人中之主,噢,婆罗多族之欢——当时,陛下之子放出无数箭雨,射向正面冲来的德里什塔丢摩那。随后,噢,大王,陛下那位善使弓的儿子射杀了德里什塔丢摩那的四匹战马,又将箭矢钉入他的双臂与胸膛。
Verse 20
नाराचैरर्धनाराचैर्बहुभि: क्षिप्रकारिभि: । वत्सदन्तैश्न बाणैश्ल कर्मारपरिमार्जिति:
散阇耶说道:“他们以无数迅疾致命的箭——那罗迦与半那罗迦——又以铁匠精心磨光的‘犊齿’箭杆,催逼战斗向前推进。”
Verse 21
दुर्योधनके प्रहारसे अत्यन्त घायल हुए महाथधनुर्धर धृष्टद्युम्न अंकुशसे पीड़ित हुए हाथीके समान कुपित हो उठे और उन्होंने अपने बाणोंद्वारा उसके चारों घोड़ोंको मौतके हवाले कर दिया तथा एक भल्लसे उसके सारथिका भी सिर धड़से काट लिया
散阇耶说道:被都利约陀那重重击中,伟大的弓手德里什塔丢摩那虽身负重创,却如被钩棒刺痛的战象般怒火腾起。他以箭矢将都利约陀那的四匹战马尽数送入死地,又以一支阔刃箭斩落车夫之首,使其与躯体分离。
Verse 22
तस्याश्चांश्वतुरो बाणै: प्रेषयामास मृत्यवे । सारथेश्षास्यथ भल्लेन शिर: कायादपाहरत्,दुर्योधनके प्रहारसे अत्यन्त घायल हुए महाथधनुर्धर धृष्टद्युम्न अंकुशसे पीड़ित हुए हाथीके समान कुपित हो उठे और उन्होंने अपने बाणोंद्वारा उसके चारों घोड़ोंको मौतके हवाले कर दिया तथा एक भल्लसे उसके सारथिका भी सिर धड़से काट लिया
散阇耶说道:他以箭矢将对手的四匹战马送入死地;继而以一支阔刃箭斩下车夫之首,使其离开躯体。
Verse 23
ततो दुर्योधनो राजा पृष्ठमारुह्म वाजिन: । अपाक्रामद्धतरथो नातिदूरमरिंदम:,इस प्रकार रथके नष्ट हो जानेपर शत्रुदमन राजा दुर्योधन एक घोड़ेकी पीठपर सवार हो वहाँसे कुछ दूर हट गया
三阇耶说道:于是,杜尤陀那王——战车已毁——跃上马背,从那处撤离,并未走得太远。此刻是在战场混乱中作出的战术性退却,显明即便傲然的君主,一旦失去作战凭藉,也不得不向形势低头。
Verse 24
दृष्टवा तु हतविक्रान्तं स््वमनीक॑ महाबल: । तव पुत्रो महाराज प्रययौ यत्र सौबल:,महाराज! अपनी सेनाका पराक्रम नष्ट हुआ देख आपका महाबली पुत्र दुर्योधन वहीं चला गया, जहाँ सुबलपुत्र शकुनि खड़ा था
三阇耶说道:见到己方战阵的勇势已被摧折,你那强力之子,哦大王,便前往苏婆罗(沙昆尼)所立之处。此颂凸显了退却与求谋之时:当武力动摇,领袖便转向权谋与诡计的策划者,显出俱卢族对精算之计的倚赖,胜于对达摩之坚守。
Verse 25
ततो रथेषु भग्नेषु त्रिसाहस््रा महाद्विपा: । पाण्डवान् रथिन: सर्वान् समन्तात् पर्यवारयन्,वे धृष्टद्यम्मका सामना करना छोड़कर जहाँ शकुनि था, वहाँ चले गये। वर्तमान नरसंहारमें राजा दुर्योधनको न देखनेके कारण वे उद्विग्न हो उठे थे ।। इति श्रीमहा भारते शल्यपर्वणि दुर्योधनापयाने पठचरविंशो5ध्याय:
三阇耶说道:继而,当诸战车尽被击碎,三千头巨大战象从四面八方合围,包困一切般度族的车战勇士。此景凸显战争的残酷机理:当机动与护卫(战车)失效,成群之力便收拢成圈,孤立并吞没即便最卓绝的战士,使战场化作愈收愈紧的暴烈之环,而非英雄单挑之争。
Verse 26
रथसेनाके भंग हो जानेपर तीन हजार विशालकाय गजराजोंने समस्त पाण्डवरथियोंको चारों ओरसे घेर लिया ।। ते वृताः समरे पजच गजानीकेन भारत । अशोभनत महाराज ग्रहा व्याप्ता घनैरिव,भरतनन्दन! महाराज! समरांगणमें गजसेनासे घिरे हुए पाँचों पाण्डव मेघोंसे आवृत हुए पाँच ग्रहोंके समान शोभा पाते थे
三阇耶说道:当车军已被击溃,三千头魁伟如山的战象从四面合围般度族诸车战勇士。于是,在象军的包围之中,哦婆罗多后裔,哦大王,那般度五子宛如五颗行星,被浓云遮蔽。此喻凸显战争的沉重压迫:即便守持正法者亦难免被围困,然而他们的坚忍仍在暴烈与宿命的阴云之下透出光辉。
Verse 27
ततोडर्जुनो महाराज लब्धलक्ष्यो महाभुज: । विनिर्ययौ रथेनैव श्वेताश्वः कृष्णसारथि:,राजेन्द्र! तब भगवान् श्रीकृष्ण जिनके सारथि हैं, वे श्वेतवाहन महाबाहु अर्जुन अपने बाणोंका लक्ष्य पाकर रथके द्वारा आगे बढ़े
三阇耶说道:于是,哦大王,臂力无双的阿周那——既已锁定箭矢之的——仍乘战车奋然向前。其马皆白,而薄伽梵圣克里希那亲为御者,昭示阿周那的武决与神圣的引导相应相合,在战争的重压之中并行不悖。
Verse 28
तैः समन्तात् परिवृत: कुज्जरै: पर्वतोपमै: । नाराचैविंमलैस्तीक्ष्ग्णजानीकमयोधयत्,उन्हें चारों ओरसे पर्वताकार हाथियोंने घेर रखा था। वे तीखी धारवाले निर्मल नाराचोंद्वारा उस गजसेनाके साथ युद्ध करने लगे
三阇耶说道:他被四面如山岳般高耸的象兵围困,却仍与那象军鏖战,以洁净无瑕、锋利如剃刃的那罗遮(nārāca)箭矢还击。此景彰显战场压力之无休无止,也显出武士的决心:以严整的技艺迎对压倒性的力量,而非陷入惊惶。
Verse 29
तत्रैकबाणनिहतानपश्याम महागजान् । पतितान् पात्यमानांश्व निर्भिनज्नान् सव्यसाचिना,वहाँ हमने देखा कि सव्यसाची अर्जुके एक ही बाणकी चोट खाकर बड़े-बड़े हाथियोंके शरीर विदीर्ण होकर गिर गये हैं और लगातार गिराये जा रहे हैं
三阇耶说道:“在那里,我们看见巨象竟被一箭射倒——有的已然仆地,有的仍在不断被击落——它们的身躯被萨维亚萨钦(阿周那)撕裂贯穿。”此偈凸显战场武艺之可怖效率:权势与生命顷刻瓦解,也提醒听者战争的沉重道德分量,即便是以职责之名而战亦然。
Verse 30
भीमसेनस्तु तान् दृष्टवा नागान् मत्तगजोपम: । करेणादाय महतीं गदाम भ्यपतद् बली
三阇耶说道:见到那些强悍的战士——其势力可比猛象——毗摩塞那自身亦如战场上发狂的醉象,伸手握起一柄巨大的钉锤,挟不可遏止之力冲杀向前。此偈凸显战阵之中决意的奔涌:个人勇武与有节制的猛进,皆被导向战场上当下的职责所需。
Verse 31
अथाप्लुत्य रथात् तूर्ण दण्डपाणिरिवान्तक: । मतवाले हाथीके समान पराक्रमी बलवान् भीमसेन उन गजराजोंको आते देख तुरंत ही रथसे कूदकर हाथमें विशाल गदा लिये दण्डधारी यमराजके समान उनपर टूट पड़े ।। ३०३ || तमुद्यतगदं दृष्टवा पाण्डवानां महारथम्
三阇耶说道:于是毗摩塞那——力与勇皆盛,如发狂的战象——迅疾自战车跃下。手执巨锤,他扑向那些象王,宛如执罚杖的死神亲临。见那般陀婆的大车战士高举钉锤……
Verse 32
आविग्नं च बल॑ सर्व गदाहस्ते वृकोदरे,भीमसेनके गदा हाथमें लेते ही सारी कौरवसेना उद्दविग्न हो उठी। हमने देखा, भीमसेनकी गदासे उन धूलिधूसर पर्वताकार हाथियोंके कुम्भस्थल फट गये हैं और वे इधर- उधर भाग रहे हैं
三阇耶说道:当弗利寇达罗(毗摩塞那)执起钉锤之时,俱卢军全体为之惊惧。我们看见,那些满身尘土、如山般的巨象,被毗摩塞那的钉锤击中后,额前隆起之处(kumbhasthala)竟被劈裂,群兽四散奔逃。此景昭示:一名战士坚决的力量,足以粉碎最雄强的战争器具,使骄矜与聚众之势化作惊惶。
Verse 33
गदया भीमसेनेन भिन्नकुम्भान् रजस्वलान् । धावमानानपश्याम कुग्जरान् पर्वतोपमान्,भीमसेनके गदा हाथमें लेते ही सारी कौरवसेना उद्दविग्न हो उठी। हमने देखा, भीमसेनकी गदासे उन धूलिधूसर पर्वताकार हाथियोंके कुम्भस्थल फट गये हैं और वे इधर- उधर भाग रहे हैं
三阇耶说:我们看见那些战象高大如山,被毗摩塞那的铁锤击裂两鬓——尘土满身、鲜血淋漓——在惊惶中奔逃四散。毗摩塞那方一执锤,俱卢大军便为之震动;而我们亲见那群如山之象鬓裂而走,狼狈奔窜。
Verse 34
प्राद्रवन् कुज्जरास्ते तु भीमसेनगदाहता: । पेतुरार्तस्वरं कृत्वा छिन्नपक्षा इवाद्रय:,भीमसेनकी गदासे घायल हो वे हाथी भाग चले और आर्तनाद करके पंख कटे हुए पर्वतोंके समान पृथ्वीपर गिर पड़े
三阇耶说:那些战象被毗摩塞那的铁锤击中,惊惶奔逃;继而发出凄厉哀号,倒伏于地,如同被斩去双翼的群山。
Verse 35
प्रभिन्नकुम्भांस्तु बहून् द्रवरमाणानितस्तत: । पतमानांश्व सम्प्रेक्ष्य वित्रेसुस्तव सैनिका:,कुम्भस्थल फट जानेके कारण इधर-उधर भागते और गिरते हुए बहुत-से हाथियोंको देखकर आपके सैनिक संत्रस्त हो उठे
三阇耶说:见到许多战象两鬓迸裂,四散奔逃,奔走间又接连倒地,你的士卒便被恐惧攫住。
Verse 36
युधिष्ठिरो5पि संक्रुद्धो माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ । गार्ध्रपत्रै:शितैर्बाणैरनिन्युवैं यमसादनम्,युधिष्ठिर तथा माद्रीकुमार पाण्डुपुत्र नकुल-सहदेव भी अत्यन्त कुपित हो गीधकी पाँखोंसे युक्त पैने बाणोंद्वारा उन हाथियोंको यमलोक भेजने लगे
三阇耶说:坚守法度的由提施提罗也被怒火点燃;摩德丽之二子——般度之子那俱罗与娑诃提婆——以缀有兀鹫羽的锐箭,开始将敌人送往阎摩之所。
Verse 37
धृष्टद्युम्नस्तु समरे पराजित्य नराधिपम् | अपक्रान्ते तव सुते हयपृष्ठं समाश्रिते,पुत्र: पाउ्चालराजस्य जिधघांसु: कुञज्जरान् ययौ | उधर धृष्टद्युम्नने समरांगणमें राजा दुर्योधनको पराजित कर दिया था। महाराज! जब आपका पुत्र घोड़ेकी पीठपर सवार हो वहाँसे भाग गया, तब समस्त पाण्डवोंको हाथियोंसे घिरा हुआ देखकर धृष्टद्युम्नने सहसा उस गजसेनापर धावा किया। पांचालराजके पुत्र धृष्टद्यम्न उन हाथियोंको मार डालनेके लिये वहाँसे चल दिये
三阇耶说:战场之上,德里什塔丢姆那击败了国王(难敌),又见你的儿子退却,寄身于马背而走。于是般遮罗王之子德里什塔丢姆那,志在诛灭象军,迅疾向那支象队猛扑而去。
Verse 38
दृष्टवा च पाण्डवान् सर्वान् कुछ्जरै: परिवारितान् | धृष्टद्युम्नो महाराज सहसा समुपाद्रवत्
三阇耶说道:见诸般度子皆为群象所围,德里什塔丢摩那,王啊,立刻疾冲向前。
Verse 39
अदृष्टवा तु रथानीके दुर्योधनमरिंदमम्
三阇耶说道:然而在战车阵中不见都利约陀那——制敌者——众人心中顿生沉重不安。
Verse 40
अश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वत: । अपृच्छन क्षत्रियांस्तत्र क्व नु दुर्योधनो गत:
三阇耶说道:阿湿婆他摩、克利波与萨特瓦塔族的克利多跋摩,向那里的刹帝利武士询问道:“都利约陀那究竟去了哪里?”
Verse 41
इधर रथसेनामें शत्रुदमन दुर्योधनको न देखकर अश्व॒त्थामा, कृपाचार्य और सात्वतवंशी कृतवर्माने समस्त क्षत्रियोंसे पूछा--“राजा दुर्योधन कहाँ चले गये? ।। तेड5पश्यमाना राजानं वर्तमाने जनक्षये । मन्वाना निहतं तत्र तव पुत्र महारथा:
三阇耶说道:在战车军中不见都利约陀那——制敌者——阿湿婆他摩、师长克利波与萨特瓦塔族的克利多跋摩便询问诸刹帝利:“都利约陀那王去了哪里?” 他们在仍在进行的屠戮之中寻不见国王,那些大车战士便开始怀疑:你的儿子已在此处被杀。
Verse 42
आहुः केचिद्धते सूते प्रयातो यत्र सौबल:
三阇耶说道:有人说,车夫既被杀死,苏婆罗之子(沙昆尼)便离去,往他所去之处而去。
Verse 43
अपरे त्वब्रुव॑स्तत्र क्षत्रिया भृशविक्षता:,दूसरे अत्यन्त घायल हुए क्षत्रिय वहाँ इस प्रकार कहने लगे--“अरे! दुर्योधनसे यहाँ क्या काम है? यदि वे जीवित होंगे तो तुम सब लोग उन्हें देख ही लोगे। इस समय तो सब लोग एक साथ होकर केवल युद्ध करो। राजा तुम्हारी क्या (सहायता) करेंगे”
当时,有些刹帝利身受重创,便说道:“杜尤陀那在此有何用处?若他尚活,你们自会见到他。此刻你们众人当同心合力,只管奋战。你们的国王在这当下又能助你们什么呢?”
Verse 44
दुर्योधनेन कि कार्य द्रक्ष्यध्वं यदि जीवति । युद्धयध्वं सहिता: सर्वे कि वो राजा करिष्यति,दूसरे अत्यन्त घायल हुए क्षत्रिय वहाँ इस प्रकार कहने लगे--“अरे! दुर्योधनसे यहाँ क्या काम है? यदि वे जीवित होंगे तो तुम सब लोग उन्हें देख ही लोगे। इस समय तो सब लोग एक साथ होकर केवल युद्ध करो। राजा तुम्हारी क्या (सहायता) करेंगे”
三阇耶说道:“杜尤陀那在此有何用处?若他尚活,你们自会见到他。如今你们众人当齐心奋战。你们的国王此刻又能为你们做什么呢?”
Verse 45
ते क्षत्रिया: क्षतैगत्रिहत भूयिष्ठवाहना: । शरै: सम्पीड्यमानास्तु नातिव्यक्तमथाब्रुवन्,वहाँ जो क्षत्रिय युद्ध कर रहे थे, उनके अधिकांश वाहन नष्ट हो गये थे। शरीर क्षत- विक्षत हो रहे थे। वे बाणोंसे पीड़ित होकर कुछ अस्पष्ट वाणीमें बोले--“हमलोग जिससे घिरे हैं, इस सारी सेनाको मार डालें। ये सारे पाण्डव गजसेनाका संहार करके हमारे समीप चले आ रहे हैं'
三阇耶说道:那些刹帝利肢体撕裂、遍体创伤,大多数坐骑与战车尽毁,又被箭雨逼迫得喘不过气来,便以含混不清的声音说道:“让我们斩尽这支围困我们的全军。诸般般度子弟既已屠灭象军,如今正逼近我们。”
Verse 46
इदं सर्व बल॑ हन्मो येन सम परिवारिता: । एते सर्वे गजान् हत्वा उपयान्ति सम पाण्डवा:,वहाँ जो क्षत्रिय युद्ध कर रहे थे, उनके अधिकांश वाहन नष्ट हो गये थे। शरीर क्षत- विक्षत हो रहे थे। वे बाणोंसे पीड़ित होकर कुछ अस्पष्ट वाणीमें बोले--“हमलोग जिससे घिरे हैं, इस सारी सेनाको मार डालें। ये सारे पाण्डव गजसेनाका संहार करके हमारे समीप चले आ रहे हैं'
三阇耶说道:“让我们击溃这支围困我们的全军;因为般度诸子既已杀尽群象,如今正向我们逼来。”
Verse 47
श्रुत्वा तु वचन तेषामश्चत्थामा महाबल: । भित्त्वा पाउ्चालराजस्य तदनीकं दुरुत्सहम्,उनकी बात सुनकर महाबली अअश्वत्थामा, कृपाचार्य और कृतवर्मा-ये सभी दृढ़ धनुर्धर शूरवीर पांचालराजकी उस दु:सह सेनाका व्यूह तोड़कर, रथसेनाका परित्याग करके जहाँ शकुनि था, वहीं जा पहुँचे
听罢他们的话,大力的阿湿婆他摩便冲破了般遮罗王那难以抵挡的军阵;他离开战车之队,直奔沙昆尼所在之处。
Verse 48
कृपश्च कृतवर्मा च प्रययौ यत्र सौबल: । रथानीकं परित्यज्य शूरा: सुदृढ्धन्विन:,उनकी बात सुनकर महाबली अअश्वत्थामा, कृपाचार्य और कृतवर्मा-ये सभी दृढ़ धनुर्धर शूरवीर पांचालराजकी उस दु:सह सेनाका व्यूह तोड़कर, रथसेनाका परित्याग करके जहाँ शकुनि था, वहीं जा पहुँचे
三阇耶说道:克利波与克利多伐摩——弓力不屈的英勇战士——舍弃战车部队,前往苏婆罗(沙昆尼)所在之处。在战斗的洪流中,此举乃自一处阵势中作战术性撤离,以便与关键统帅会合重整;并非为个人荣名,而是出于战争的迫迫之需,映照出大战末期愈发支配众人行止的冷峻务实。
Verse 49
ततस्तेषु प्रयातेषु धृष्टद्युम्नपुरस्कृता: । आययु: पाण्डवा राजन् विनिध्नन्त: सम तावकम्
三阇耶说道:当那些战士离去之后,般度诸子——以德里什塔丢摩那为前锋——便推进而来,王啊,击杀你的军队。此偈凸显战局无情的推进:统帅身先士卒,激发协同进击;而战争的伦理张力虽未明言,却潜伏其间——胜利在战场既定法度之内,以不得不为的杀伐来求取。
Verse 50
राजन्! उन सबके आगे बढ़ जानेपर धृष्टद्युम्म आदि पाण्डव आपकी सेनाका संहार करते हुए वहाँ आ पहुँचे ।। दृष्टवा तु तानापततः सम्प्रहृष्टानू महारथान् । पराक्रान्तास्ततो वीरा निराशा जीविते तदा,हर्ष और उत्साहमें भरे हुए उन महारथियोंको आक्रमण करते देख आपके पराक्रमी वीर उस समय जीवनसे निराश हो गये
三阇耶说道:“王啊!在那些人冲上前去之后,德里什塔丢摩那与其余般度诸子也赶到那里,一路斩杀你的军队。见那些大车战士欢腾振奋、气焰如火地猛扑来攻,你的勇士们纵有武勇,当时也对生还绝望。”
Verse 51
विवर्णमुख भूयिष्ठम भवत् तावकं बलम् । परिक्षीणायुधान् दृष्टवा तानहं परिवारितान्,आपकी सेनाके अधिकांश योद्धाओंका मुख उदास हो गया। उन सबके आयुध नष्ट हो गये थे और वे चारों ओरसे घिर गये थे। राजन! उन सबकी वैसी अवस्था देख मैं जीवनका मोह छोड़कर अन्य चार महारथियोंको साथ ले हाथी और घोड़े दो अंगोंवाली सेनासे मिलकर धृष्टद्युम्नकी सेनाके साथ युद्ध करने लगा
三阇耶说道:你军大半面色惨淡,神情失色。见他们兵器耗尽,又四面受围,我——断绝对生命的贪恋——便与另外四位大车战士结为一处,并会同象军与马军,迎战德里什塔丢摩那所率之众。此景昭示:绝望与合围足以摧折军心;然而武士既以忠诚与职责自缚,纵使生机渺茫,亦仍奋然前行。
Verse 52
राजन् बलेन द्वयड्रेन त्यक्त्वा जीवितमात्मन: । आत्मना पज्चमो<्युद्धयं पाउ्चालस्य बलेन ह,आपकी सेनाके अधिकांश योद्धाओंका मुख उदास हो गया। उन सबके आयुध नष्ट हो गये थे और वे चारों ओरसे घिर गये थे। राजन! उन सबकी वैसी अवस्था देख मैं जीवनका मोह छोड़कर अन्य चार महारथियोंको साथ ले हाथी और घोड़े दो अंगोंवाली सेनासे मिलकर धृष्टद्युम्नकी सेनाके साथ युद्ध करने लगा
三阇耶说道:王啊,我已抛却对自身性命的顾念,便与另外四位大车战士同进——我为第五——迎战般遮罗大军,纵使我方仅有“两支军”(象军与马军)。见你军多半神色沮丧,兵器尽毁,又四面受围,我仍以决心入阵,使职责与忠诚凌驾于自保之上。
Verse 53
तस्मिन् देशे व्यवस्थाय यत्र शारद्वतः स्थित: । सम्प्रद्रुता वयं पजच किरीटिशरपीडिता:,मैं उसी स्थानमें स्थित होकर युद्ध कर रहा था, जहाँ कृपाचार्य मौजूद थे; परंतु किरीटधारी अर्जुनके बाणोंसे पीड़ित होकर हम पाँचों वहाँसे भागकर महाभयंकर धष्टद्युम्नके पास जा पहुँचे। वहाँ उनके साथ हमलोगोंका बड़ा भारी युद्ध हुआ। उन्होंने हम सबको परास्त कर दिया। तब हम वहाँसे भी भाग निकले
三阇耶说:“就在那一处战阵之中,舍罗陀婆多(克利帕)驻守其地,我们五人仍立而战;然而被戴冠的阿周那之箭所折磨,我们从那里奔逃。因惧而驱,我们抵达极其可怖的德利什塔丢摩那;在那里爆发了惨烈的交锋。他击败了我们所有人,我们又不得不再度退却。”
Verse 54
धृष्टय्युम्नं महारौद्रं तत्र नो5 भूदू रणो महान् । जितास्तेन वयं सर्वे व्यपयाम रणात् तत:,मैं उसी स्थानमें स्थित होकर युद्ध कर रहा था, जहाँ कृपाचार्य मौजूद थे; परंतु किरीटधारी अर्जुनके बाणोंसे पीड़ित होकर हम पाँचों वहाँसे भागकर महाभयंकर धष्टद्युम्नके पास जा पहुँचे। वहाँ उनके साथ हमलोगोंका बड़ा भारी युद्ध हुआ। उन्होंने हम सबको परास्त कर दिया। तब हम वहाँसे भी भाग निकले
三阇耶说:“在那里,与凶猛可怖的德利什塔丢摩那之间,我们遭遇了一场大战。他战胜了我们所有人,于是我们从那场战斗中退去。”
Verse 55
अथापश्यं॑ सात्यकिं तमुपायान्तं महारथम् । रथैश्नतुःशतैर्वीरों मामभ्यद्रवदाहवे,इतनेमें ही मैंने महारथी सात्यकिको अपने पास आते देखा। वीर सात्यकिने युद्धस्थलमें चार सौ रथियोंके साथ मुझपर धावा किया
三阇耶说:“就在那时,我看见大车战士萨底耶吉逼近而来。那位勇士率四百乘战车,在战场上径直向我冲击。”
Verse 56
धृष्टद्युम्नादहं मुक्त: कथंचिच्छान्तवाहनात् । पतितो माधवानीकं दुष्कृती नरकं॑ यथा,थके हुए वाहनोंवाले धृष्टद्युम्नसे किसी प्रकार छूटा तो मैं सात्यकिकी सेनामें आ फँसा; जैसे कोई पापी नरकमें गिर गया हो
三阇耶说:“我好不容易才从坐骑已疲惫不堪的德利什塔丢摩那手下脱身;可随即又坠入摩陀婆(奎师那)之军中——如同罪人堕入地狱。”
Verse 57
तत्र युद्धम भूद् घोरं मुहूर्तमतिदारुणम् । सात्यकिस्तु महाबाहुर्मम हत्वा परिच्छदम्
三阇耶说:“在那里,战斗变得骇人——在短暂的一刻里极其惨烈。随后,大臂之勇士萨底耶吉击落了我的护具(甲胄与随身装备),并乘势紧逼进攻。”
Verse 58
ततो मुहूर्तादिव तद् गजानीकमवध्यत
三阇耶说道:随即,仿佛只在顷刻之间,那支象军便被击溃而失其用——这正是战场混乱中,当决断之力迎面而来时,聚集的强大势能何其迅疾地崩塌的写照。
Verse 59
गदया भीमसेनेन नाराचैरर्जुनेन च । तदनन्तर दो ही घड़ीमें भीमसेनने गदासे और अर्जुनने नाराचोंसे उस गज-सेनाका संहार कर डाला ।। अभिपिष्टमहानागै: समन्तात् पर्वतोपमै:
三阇耶说道:毗摩塞那以铁杵,阿周那以铁箭(那罗遮),在紧接着的短暂片刻间,便将那支象军尽数歼灭。四面八方,巨象如山,或被击碎,或被践踏,战场的暴烈之势汹涌而起,毫无收束。
Verse 60
नातिप्रसिद्धेव गति: पाण्डवानामजायत । चारों ओर पर्वताकार विशालकाय हाथी पड़े थे, जो भीमसेन और अर्जुनके आघातोंसे पिस गये थे। उनके कारण पाण्डवोंका आगे बढ़ना अत्यन्त दुष्कर हो गया था ।। रथमार्ग ततश्षुक्रे भीमसेनो महाबल:
三阇耶说道:般度诸子前进之势仿佛迟疑受阻。四周尽是如山巨象横陈,皆被毗摩塞那与阿周那的重击碾碎;因此,向前推进变得极其艰难。于是,大力的毗摩塞那为战车清出了一条通路。
Verse 61
पाण्डवानां महाराज व्यपाकर्षन्महागजान् । महाराज! तब महाबली भीमसेनने बड़े-बड़े हाथियोंको खींचकर हटाया और पाण्डवोंके लिये रथ जानेका मार्ग बनाया ।। ६० ह || अश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वत:,इधर अअश्वत्थामा, कृपाचार्य और सात्वतवंशी कृतवर्मा--ये रथ-सेनामें आपके महारथी पुत्र शत्रुदमन राजा दुर्योधनको न देखकर उसकी खोज करने लगे
三阇耶说道:“大王啊,力大无比的毗摩塞那拖拽开那些阻挡般度诸子的巨象,为他们的战车开出通路。与此同时,阿湿婆他摩、克利波与萨特瓦塔族的克利多跋摩,在车阵之中不见你的儿子——降敌之王、伟大的车战勇士难敌(杜尔约陀那)——便开始四处寻觅他。”
Verse 62
अपश्यन्तो रथानीके दुर्योधनमरिंदमम् । राजानं मृगयामासुस्तव पुत्र महारथम्,इधर अअश्वत्थामा, कृपाचार्य और सात्वतवंशी कृतवर्मा--ये रथ-सेनामें आपके महारथी पुत्र शत्रुदमन राजा दुर्योधनको न देखकर उसकी खोज करने लगे
三阇耶说道:他们在密集的车阵之中不见难敌(杜尔约陀那)——那位国王、降敌者——便开始寻找你的儿子。此偈在战争的道德迷雾里点明:军队的凝聚与意志系于统帅可见的在场;而当这领导忽然缺席,焦虑与紊乱便随之而起。
Verse 63
परित्यज्य च पाज्चाल्यं प्रयाता यत्र सौबल: । राज्ञो5दर्शनसंविग्ना वर्तमाने जनक्षये
三阇耶说道:她抛下般遮罗的王子,前往苏婆罗(Saubala)所在之处。因国王忽然不见而心惊忧惧,又逢四周杀戮不息,她怀着惶急之心匆匆而行。
Verse 96
विश्रान्ताश्व वितृष्णाश्ष पुनर्युद्धाय जम्मिरे । अर्जुनके बाणोंसे आहत हो कितने ही मनुष्य रणभूमिमें ही पड़े-पड़े उच्छवास लेते दिखायी देते थे। उन्हें दूसरे लोग अपने रथपर बिठाकर घड़ी-दो-बड़ी आश्वासन दे स्वयं भी विश्राम करके प्यास बुझाकर पुनः युद्धके लिये जाते थे
战马得以歇息,口渴也已解除,他们又整装再赴战斗。许多人被阿周那的箭矢射伤,倒卧在战场之上,仍可见其喘息未绝。旁人将他们扶上战车,稍作一两刻安慰;自己也趁隙歇息、饮水解渴,旋即再返厮杀。
Verse 163
नाकुलिस्तु शतानीको रथानीकमयोधयन् । पांचालराजपुत्र धृष्टद्युम्न, महारथी शिखण्डी और नकुलपुत्र शतानीक--ये आपकी रथसेनाके साथ युद्ध कर रहे थे
三阇耶说道:那俱罗之子沙多尼迦(Śatānīka)正与战车军阵交锋。与他同在的,有般遮罗王之子德里什塔丢摩那(Dhṛṣṭadyumna),以及伟大的车战勇士施迦安提(Śikhaṇḍī),一同与汝之战车军相战。
Verse 173
अभ्यद्रवत् सुसंक्रुद्धस्तावकान् हन्तुमुद्यतः | तदनन्तर आपके सैनिकोंका वध करनेके लिये उद्यत हो विशाल सेनासे घिरे हुए धृष्टद्युम्नने अत्यन्त क्रोधपूर्वक आक्रमण किया
三阇耶说道:他怒火炽盛,意在诛戮汝之士卒,遂猛然冲杀向前。其后,德里什塔丢摩那(Dhṛṣṭadyumna)被大军簇拥,挟极怒而发起猛攻。
Verse 203
अश्वांश्व चतुरो हत्वा बाह्दोरुरसि चार्पित: । राजन्! आपके धनुर्धर पुत्रने बहुत-से नाराच, अर्ध-नाराच, शीघ्रकारी वत्सदन्त और कारीगरद्वारा साफ किये हुए बाणोंसे धृष्टद्युम्नके चारों घोड़ोंको मारकर उनकी दोनों भुजाओं और छातीमें भी चोट पहुँचायी
三阇耶说道:大王啊,汝那善射之子放出无数铁头箭——长矢那罗遮(nārāca)、半矢、迅疾如飞的“犊齿”箭镞,以及工匠精磨的利矢——射杀了德里什塔丢摩那(Dhṛṣṭadyumna)的四匹战马,并且又中其双臂与胸膛。
Verse 231
सो5तिविद्धो महेष्वासस्तोत्रार्दित इव द्विप:
三阇耶说道:纵然他是强弓善射的豪杰,也被箭矢贯穿全身,踉跄欲倒,如同被钩刺驱使而受苦的大象一般——此象征昭示:在战争中,当暴力刺透肉身,也刺透意志时,即便最强者亦会被压倒。
Verse 316
वित्रेसुस्तावका: सैन्या: शकृन्मूत्रे च सुखु॒वुः पाण्डव-महारथी भीमसेनको गदा उठाये देख आपके सैनिक भयसे थर्रा उठे और मल- मूत्र करने लगे
三阇耶说道:见到般度族的大车战士、摩诃罗提毗摩举起铁杵,你的军队顿时惊惶失措。恐惧压倒了他们,使其战栗不已,甚至失去自制,屎尿俱下。此景昭示:在战争中,当面对压倒性的力量,恐怖足以令纪律与尊严一并崩塌。
Verse 386
पुत्र: पाउ्चालराजस्य जिधघांसु: कुञज्जरान् ययौ | उधर धृष्टद्युम्नने समरांगणमें राजा दुर्योधनको पराजित कर दिया था। महाराज! जब आपका पुत्र घोड़ेकी पीठपर सवार हो वहाँसे भाग गया, तब समस्त पाण्डवोंको हाथियोंसे घिरा हुआ देखकर धृष्टद्युम्नने सहसा उस गजसेनापर धावा किया। पांचालराजके पुत्र धृष्टद्यम्न उन हाथियोंको मार डालनेके लिये वहाँसे चल दिये
三阇耶说道:般遮罗王之子,怀着诛灭群象之志,向象阵推进。战局展开之时,见杜尔约陀那已骑马遁去,而般度诸子被象军重重围困,德里什塔丢摩那便倏然冲击那象兵方阵——以武士之责护佑同盟,破开沉重的包围。
Verse 413
विवर्णवदना भूत्वा पर्यपृच्छन्त ते सुतम् वर्तमान जनसंहारमें राजाको न देखकर वे महारथी आपके पुत्रको मारा गया मान बैठे और मुँह उदास करके सबसे आपके पुत्रका पता पूछने लगे
三阇耶说道:他们面色惨白,神情黯然。在这仍在继续的屠戮之中,因不见国王,那些大车战士便认定你的儿子已遭杀害。带着哀戚的神色,他们四处打听你儿子的消息。
Verse 423
हित्वा पाड्चालराजस्य तदनीकं दुरुत्सहम् | कुछ लोगोंने कहा--'सारथिके मारे जानेपर पांचालराजकी उस दुःसह सेनाको त्यागकर राजा दुर्योधन वहीं गये हैं, जहाँ शकुनि हैं”
三阇耶说道:舍弃般遮罗王那难以撼动的阵列,有人禀报说:杜尔约陀那王——在其御者被杀之后——已从那一线撤退,前往沙昆尼所在之处。
Verse 573
जीवग्राहमगृलह्नान्मां मूर्च्छितं पतितं भुवि । वहाँ दो घड़ीतक बड़ा भयंकर एवं घोर युद्ध हुआ। महाबाहु सात्यकिने मेरी सारी युद्धसामग्री नष्ट कर दी और जब मैं मूर्च्छित होकर पृथ्वीपर गिर पड़ा, तब मुझे जीवित ही पकड़ लिया
三阇耶说道:“我昏厥倒地之时,他们将我活捉——把我当作活的俘虏擒住。那处一时之间爆发了可怖而惨烈的激战;臂力雄伟的萨底耶吉毁尽我一切战具,而当我神志尽失倒伏尘土之际,他不杀我而擒我。”
Verse 1263
पुत्रानन्ये पितृनन्ये पुनर्युद्धभरोचयन् । भरतश्रेष्ठ! दूसरे लोग स्वयं पानी पीकर घोड़ोंकी भी थकावट दूर करते। उसके बाद कवच धारण करके लड़नेके लिये जाते थे। अन्य बहुत-से सैनिक अपने घायल बन्धुओं, पुत्रों और पिताओंको आश्वासन दे उन्हें शिविरमें रख आते। उसके बाद युद्धमें मन लगाते थे
三阇耶说道:“婆罗多族中最卓越者啊,有些人又将心思转回战阵的重担——有的念及儿子,有的念及父亲。另一些人先自饮水,又为战马解乏;随后披甲而出,奔赴厮杀。许多士卒安慰了受伤的亲族——兄弟、儿子与父亲——将他们妥置营中,方才定心投入战斗。”
The chapter implicitly stages the tension between duty-bound combat and vengeance-driven excess: Bhīma’s actions are framed as kṣatriya obligation within war, yet the scale and sequencing of killings foreground the ethical ambiguity of retributive momentum once restraint and negotiated alternatives have vanished.
The narration emphasizes that tactical excellence and personal valor can decisively shape local outcomes, but cannot reverse the broader moral and causal trajectory already set by prior choices—illustrating karma as cumulative and war as an accelerant of irreversible loss.
No explicit phalaśruti is presented in this adhyāya; its meta-significance is conveyed narratively through similes, casualty accounting, and morale collapse, functioning as an exemplum of late-war inevitability rather than a stated salvific or ritual benefit.